Class 10 History: यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय

Revise the NCERT Class 10 History chapter, Rise of Nationalism in Europe, with these concise and well-organised revision notes. JAC Exam Prep (jac.jharkhandexamprep.com) provides NCERT Class 10 History Rise of Nationalism in Europe Revision Notes based on the latest NCERT syllabus. Download the PDF below and revise the chapter for school examinations, CBSE board examinations, and competitive exams such as JEE and NEET.

WhatsApp Channel
Join Now
Telegram Channel
Join Now

Chapter Overview

Class10
SubjectHistory 
Chapter NameRise of Nationalism in Europe
यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय
Resource TypeRevision Notes
SyllabusNCERT
Suitable ForCBSE, JAC and other state boards

यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय Revision Notes

1. राष्ट्र (Nation) से आप क्या समझते हैं?

उत्तर ⇒
राष्ट्र ऐसे लोगों का समूह होता है जो साझा इतिहास, संस्कृति, परंपरा, आदर्शों तथा भविष्य के प्रति समान आकांक्षाओं से जुड़े होते हैं। प्रसिद्ध विचारक अर्नेस्ट रेनन के अनुसार राष्ट्र केवल भाषा, धर्म या नस्ल से नहीं बनता, बल्कि लोगों की एक साथ रहने की इच्छा, साझा गौरवशाली अतीत तथा भविष्य के लिए सामूहिक संकल्प से बनता है।

राष्ट्र के निर्माण में राष्ट्रीय एकता, नागरिकों की भागीदारी तथा देश के प्रति निष्ठा का विशेष महत्व होता है। राष्ट्र अपने नागरिकों की सामूहिक पहचान का प्रतीक होता है।

राष्ट्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

(i) साझा इतिहास एवं परंपरा।

(ii) राष्ट्रीय एकता की भावना।

(iii) समान उद्देश्य एवं भविष्य की आकांक्षा।

(iv) नागरिकों की सहभागिता।

(v) देश के प्रति निष्ठा एवं समर्पण।

2. राष्ट्रवाद (Nationalism) क्या है?

उत्तर ⇒
राष्ट्रवाद वह भावना है जिसके अंतर्गत लोग अपने देश को एक स्वतंत्र एवं एकीकृत राष्ट्र के रूप में देखते हैं तथा उसकी एकता, स्वतंत्रता एवं विकास के लिए कार्य करते हैं। राष्ट्रवाद लोगों में राष्ट्रीय गौरव, देशभक्ति एवं राष्ट्रीय एकता की भावना उत्पन्न करता है।

यूरोप में 18वीं एवं 19वीं शताब्दी के दौरान राष्ट्रवाद के विचारों का तेजी से विकास हुआ। फ्रांसीसी क्रांति के बाद स्वतंत्रता, समानता एवं बंधुत्व के सिद्धांतों ने पूरे यूरोप में राष्ट्रवादी आंदोलनों को जन्म दिया।

राष्ट्रवाद के प्रमुख तत्व निम्नलिखित हैं—

(i) राष्ट्रीय एकता।

(ii) स्वतंत्रता की भावना।

(iii) समान अधिकार।

(iv) साझा संस्कृति एवं इतिहास।

(v) देश के प्रति समर्पण।

3. राष्ट्रवाद के उदय के प्रमुख कारण लिखिए।

उत्तर ⇒
यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय अचानक नहीं हुआ, बल्कि अनेक सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक कारणों के परिणामस्वरूप हुआ। फ्रांसीसी क्रांति ने लोगों में स्वतंत्रता एवं समानता की भावना विकसित की। औद्योगिक क्रांति, मध्यम वर्ग का उदय तथा लोकतांत्रिक विचारों के प्रसार ने भी राष्ट्रवाद को मजबूत किया।

इसके अतिरिक्त साहित्य, कला, भाषा एवं राष्ट्रीय प्रतीकों ने लोगों में राष्ट्रीय चेतना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

राष्ट्रवाद के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—

(i) 1789 की फ्रांसीसी क्रांति।

(ii) स्वतंत्रता, समानता एवं बंधुत्व के विचार।

(iii) निरंकुश राजतंत्र का विरोध।

(iv) मध्यम वर्ग का उदय।

(v) साझा भाषा एवं संस्कृति।

(vi) साहित्य, कला एवं राष्ट्रीय प्रतीकों का विकास।

(vii) आर्थिक एकीकरण एवं व्यापार का विस्तार।

4. फ्रांसीसी क्रांति (1789) का राष्ट्रवाद के विकास में क्या योगदान था?

उत्तर ⇒
1789 की फ्रांसीसी क्रांति राष्ट्रवाद के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। इस क्रांति से पहले फ्रांस में निरंकुश राजतंत्र था, लेकिन क्रांति के बाद सत्ता राजा से निकलकर जनता के हाथों में आ गई। पहली बार यह घोषित किया गया कि राष्ट्र का निर्माण जनता करेगी और वही उसकी नियति तय करेगी।

क्रांति के दौरान राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय गान, समान कानून, समान अधिकार तथा नागरिकता जैसे विचार विकसित हुए। इन विचारों ने पूरे यूरोप में राष्ट्रवादी आंदोलनों को प्रेरित किया।

फ्रांसीसी क्रांति के प्रमुख योगदान निम्नलिखित हैं—

(i) राष्ट्रवाद का प्रसार।

(ii) समानता एवं स्वतंत्रता का सिद्धांत।

(iii) नागरिक अधिकारों की स्थापना।

(iv) राष्ट्रीय ध्वज एवं राष्ट्रीय प्रतीकों का विकास।

(v) लोकतांत्रिक शासन की स्थापना।

5. फ्रांसीसी क्रांतिकारियों द्वारा राष्ट्रीय एकता स्थापित करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए?

उत्तर ⇒
फ्रांसीसी क्रांतिकारियों ने राष्ट्रीय एकता एवं नागरिकों में समान पहचान विकसित करने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए। उन्होंने पूरे देश में समान कानून लागू किए तथा राष्ट्रीय प्रतीकों को अपनाया। प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार किया गया और पूरे फ्रांस में एक समान माप-तौल प्रणाली लागू की गई।

इन सुधारों के कारण लोगों में राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित हुई तथा आधुनिक राष्ट्र-राज्य की नींव मजबूत हुई।

फ्रांसीसी क्रांतिकारियों द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम निम्नलिखित हैं—

(i) तिरंगा राष्ट्रीय ध्वज अपनाया गया।

(ii) नेशनल असेंबली का गठन किया गया।

(iii) पूरे देश में समान कानून लागू किए गए।

(iv) समान माप-तौल प्रणाली लागू की गई।

(v) आंतरिक सीमा शुल्क समाप्त किए गए।

(vi) फ्रेंच भाषा को राष्ट्रीय भाषा के रूप में बढ़ावा दिया गया।

(vii) नागरिकों को समान अधिकार प्रदान किए गए।

6. नेपोलियन बोनापार्ट (Napoleon Bonaparte) कौन था? यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास में उसका क्या योगदान था?

उत्तर ⇒ नेपोलियन बोनापार्ट फ्रांस का एक महान सेनापति एवं शासक था। उसने फ्रांसीसी क्रांति के बाद अनेक प्रशासनिक एवं कानूनी सुधार किए। उसके द्वारा लागू की गई नेपोलियन संहिता (Napoleonic Code), 1804 ने कानून के समक्ष समानता, निजी संपत्ति की सुरक्षा तथा सामंती व्यवस्था के अंत जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांत स्थापित किए। इन सुधारों ने यूरोप के अनेक देशों में राष्ट्रवाद एवं लोकतांत्रिक विचारों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हालाँकि नेपोलियन के साम्राज्यवादी विस्तार के कारण कई देशों में उसके विरुद्ध राष्ट्रीय आंदोलन भी शुरू हुए, जिससे राष्ट्रवाद की भावना और अधिक मजबूत हुई।

(i) नेपोलियन संहिता लागू की।

(ii) सामंती विशेषाधिकार समाप्त किए।

(iii) कानून के समक्ष समानता स्थापित की।

(iv) प्रशासनिक सुधार किए।

(v) यूरोप में राष्ट्रवाद को बढ़ावा मिला।

7. नेपोलियन संहिता (Napoleonic Code) क्या थी?

उत्तर ⇒ नेपोलियन संहिता वर्ष 1804 में फ्रांस के शासक नेपोलियन बोनापार्ट द्वारा लागू की गई एक महत्वपूर्ण कानूनी संहिता थी। इसका उद्देश्य पूरे फ्रांस में समान कानून लागू करना तथा सामंती व्यवस्था को समाप्त करना था। इस संहिता ने सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समान अधिकार प्रदान किए तथा निजी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की।

बाद में नेपोलियन ने जिन देशों पर विजय प्राप्त की, वहाँ भी इस संहिता को लागू किया गया। इससे पूरे यूरोप में आधुनिक न्याय व्यवस्था एवं राष्ट्रवाद के विकास को बल मिला।

(i) वर्ष 1804 में लागू हुई।

(ii) सभी नागरिकों को समान अधिकार मिले।

(iii) सामंती व्यवस्था समाप्त हुई।

(iv) निजी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित हुई।

(v) आधुनिक कानूनी व्यवस्था का विकास हुआ।

8. वियना कांग्रेस (Congress of Vienna) क्या थी?

उत्तर ⇒ वियना कांग्रेस का आयोजन 1815 ई. में ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में किया गया। इसका उद्देश्य नेपोलियन बोनापार्ट की पराजय के बाद यूरोप में राजनीतिक स्थिरता स्थापित करना तथा पुराने राजवंशों को पुनः सत्ता में लाना था। इस सम्मेलन की अध्यक्षता ऑस्ट्रिया के विदेश मंत्री प्रिंस क्लेमेन्स वॉन मेटरनिख (Metternich) ने की थी।

वियना कांग्रेस में यूरोप का राजनीतिक मानचित्र पुनः बनाया गया तथा फ्रांस की शक्ति को सीमित करने का प्रयास किया गया। हालांकि इसके बाद भी राष्ट्रवादी आंदोलनों को रोका नहीं जा सका।

(i) आयोजन वर्ष 1815 में हुआ।

(ii) स्थान – वियना (ऑस्ट्रिया)।

(iii) अध्यक्ष – मेटरनिख।

(iv) पुराने राजवंशों को पुनः स्थापित किया गया।

(v) यूरोप में शक्ति संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया गया।

9. वियना कांग्रेस के प्रमुख उद्देश्य लिखिए।

उत्तर ⇒ वियना कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य नेपोलियन के युद्धों के बाद यूरोप में शांति एवं स्थिरता स्थापित करना था। सम्मेलन में भाग लेने वाले देशों ने यह निर्णय लिया कि यूरोप में पुनः राजतंत्र स्थापित किया जाए तथा भविष्य में किसी एक देश को अत्यधिक शक्तिशाली बनने से रोका जाए।

इस सम्मेलन ने यूरोप में शक्ति संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया, लेकिन राष्ट्रवाद की बढ़ती भावना को रोकने में सफल नहीं हो सका।

वियना कांग्रेस के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित थे—

(i) यूरोप में शांति स्थापित करना।

(ii) पुराने राजवंशों को पुनः सत्ता में लाना।

(iii) फ्रांस की शक्ति को सीमित करना।

(iv) शक्ति संतुलन बनाए रखना।

(v) राष्ट्रवादी एवं उदारवादी आंदोलनों को नियंत्रित करना।

10. मेटरनिख (Metternich) कौन था?

उत्तर ⇒ क्लेमेन्स वॉन मेटरनिख ऑस्ट्रिया का प्रसिद्ध विदेश मंत्री एवं यूरोप का प्रभावशाली राजनेता था। उसने 1815 की वियना कांग्रेस की अध्यक्षता की तथा पूरे यूरोप में राजतंत्र की पुनर्स्थापना का समर्थन किया। वह उदारवाद एवं राष्ट्रवाद का कट्टर विरोधी था क्योंकि उसका मानना था कि ये विचार यूरोप की राजनीतिक स्थिरता के लिए खतरा हैं।

मेटरनिख की नीतियों के कारण कुछ समय तक राजतंत्र मजबूत रहा, लेकिन बाद में यूरोप के अनेक देशों में राष्ट्रवादी आंदोलनों ने उसकी नीतियों को चुनौती दी।

(i) ऑस्ट्रिया का विदेश मंत्री था।

(ii) वियना कांग्रेस का अध्यक्ष था।

(iii) राजतंत्र का समर्थक था।

(iv) राष्ट्रवाद एवं उदारवाद का विरोधी था।

(v) यूरोप में शक्ति संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया।

11. उदारवाद (Liberalism) से आप क्या समझते हैं?

उत्तर ⇒ उदारवाद एक ऐसी राजनीतिक एवं सामाजिक विचारधारा है जो व्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता तथा नागरिक अधिकारों पर बल देती है। यह निरंकुश राजतंत्र का विरोध करती है तथा संविधान, लोकतंत्र एवं कानून के शासन का समर्थन करती है। 19वीं शताब्दी में यूरोप में उदारवाद के प्रसार ने राष्ट्रवाद को नई दिशा प्रदान की।

उस समय शिक्षित मध्यम वर्ग ने उदारवादी विचारों को अपनाकर लोकतांत्रिक शासन एवं राष्ट्रीय एकता की माँग की। उदारवाद ने अनेक यूरोपीय देशों में स्वतंत्रता आंदोलनों को प्रेरित किया।

(i) व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर बल देता है।

(ii) समानता का समर्थन करता है।

(iii) लोकतांत्रिक शासन की वकालत करता है।

(iv) संविधान एवं कानून के शासन का समर्थन करता है।

(v) निरंकुश राजतंत्र का विरोध करता है।

12. रूढ़िवाद (Conservatism) क्या है?

उत्तर ⇒ रूढ़िवाद एक ऐसी राजनीतिक विचारधारा है जो पारंपरिक संस्थाओं, राजतंत्र तथा सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने का समर्थन करती है। रूढ़िवादी लोग अचानक होने वाले राजनीतिक एवं सामाजिक परिवर्तनों के विरोधी थे। वे मानते थे कि परिवर्तन धीरे-धीरे एवं परंपराओं के अनुरूप होने चाहिए।

1815 की वियना कांग्रेस के बाद यूरोप के अधिकांश शासकों ने रूढ़िवादी नीतियाँ अपनाईं। उनका उद्देश्य राष्ट्रवादी एवं उदारवादी आंदोलनों को रोककर राजतंत्र को मजबूत बनाना था।

(i) परंपराओं का समर्थन करता है।

(ii) राजतंत्र का पक्षधर है।

(iii) तीव्र परिवर्तनों का विरोध करता है।

(iv) सामाजिक स्थिरता बनाए रखने पर बल देता है।

(v) राष्ट्रवादी आंदोलनों का विरोध करता है।

13. ज्यूसेपे मैजिनी (Giuseppe Mazzini) कौन थे?

उत्तर ⇒ ज्यूसेपे मैजिनी इटली के महान राष्ट्रवादी, क्रांतिकारी एवं विचारक थे। उनका जन्म 1805 ई. में जेनोआ (इटली) में हुआ था। उन्होंने इटली के एकीकरण एवं स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। मैजिनी का विश्वास था कि प्रत्येक राष्ट्र को स्वतंत्र एवं एकीकृत होना चाहिए।

उन्होंने यंग इटली (Young Italy) नामक संगठन की स्थापना की, जिसका उद्देश्य इटली के युवाओं में राष्ट्रवाद की भावना विकसित करना तथा देश को एकीकृत करना था। उनके विचारों ने पूरे यूरोप के राष्ट्रवादी आंदोलनों को प्रभावित किया।

(i) इटली के महान राष्ट्रवादी थे।

(ii) जन्म – 1805 ई.।

(iii) यंग इटली संगठन की स्थापना की।

(iv) इटली के एकीकरण का समर्थन किया।

(v) यूरोप में राष्ट्रवाद के प्रसार में योगदान दिया।

14. यंग इटली (Young Italy) संगठन क्या था?

उत्तर ⇒ यंग इटली (Young Italy) एक राष्ट्रवादी संगठन था जिसकी स्थापना 1831 ई. में ज्यूसेपे मैजिनी ने की थी। इस संगठन का उद्देश्य इटली के युवाओं को संगठित कर देश को विदेशी शासन एवं छोटे-छोटे राज्यों से मुक्त कर एक स्वतंत्र एवं एकीकृत राष्ट्र बनाना था।

इस संगठन के सदस्यों ने राष्ट्रवाद, स्वतंत्रता एवं लोकतंत्र के विचारों का प्रचार किया। यंग इटली ने इटली के एकीकरण आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा युवाओं में राष्ट्रीय चेतना उत्पन्न की।

(i) स्थापना – 1831 ई.।

(ii) संस्थापक – ज्यूसेपे मैजिनी।

(iii) उद्देश्य – इटली का एकीकरण।

(iv) युवाओं में राष्ट्रवाद का प्रसार।

(v) स्वतंत्र एवं लोकतांत्रिक इटली की स्थापना।

15. जर्मनी के एकीकरण (Unification of Germany) में बिस्मार्क (Bismarck) की भूमिका लिखिए।

उत्तर ⇒ ओट्टो वॉन बिस्मार्क (Otto von Bismarck) प्रशा (Prussia) का प्रधानमंत्री था। उसने अपनी “रक्त और लौह” (Blood and Iron) की नीति के माध्यम से जर्मनी का एकीकरण किया। बिस्मार्क का विश्वास था कि जर्मनी का एकीकरण भाषणों से नहीं बल्कि युद्ध एवं शक्तिशाली सेना के माध्यम से संभव है।

उसने डेनमार्क, ऑस्ट्रिया एवं फ्रांस के विरुद्ध युद्ध जीतकर जर्मनी के विभिन्न राज्यों को एकीकृत किया। अंततः 1871 ई. में जर्मन साम्राज्य की स्थापना हुई तथा विलियम प्रथम (William I) जर्मनी का सम्राट बना।

(i) प्रशा का प्रधानमंत्री था।

(ii) “रक्त और लौह” नीति अपनाई।

(iii) तीन महत्वपूर्ण युद्ध लड़े।

(iv) 1871 ई. में जर्मनी का एकीकरण कराया।

(v) आधुनिक जर्मन राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

16. इटली के एकीकरण (Unification of Italy) में काउंट कैवूर (Count Cavour) की भूमिका लिखिए।

उत्तर ⇒ काउंट कैमिलो डी कैवूर (Count Camillo de Cavour) सार्डीनिया-पीडमोंट राज्य का प्रधानमंत्री था। उसने इटली के एकीकरण में महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं कूटनीतिक भूमिका निभाई। कैवूर ने फ्रांस की सहायता से ऑस्ट्रिया को पराजित किया तथा उत्तरी इटली के कई राज्यों को सार्डीनिया में मिला लिया। उसकी दूरदर्शिता एवं कूटनीति के कारण इटली के एकीकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ।

कैवूर ने आर्थिक एवं प्रशासनिक सुधार भी किए, जिससे सार्डीनिया एक शक्तिशाली राज्य बना और इटली के एकीकरण का नेतृत्व कर सका।

(i) सार्डीनिया-पीडमोंट का प्रधानमंत्री था।

(ii) फ्रांस से मैत्री स्थापित की।

(iii) ऑस्ट्रिया को पराजित करने में सफलता प्राप्त की।

(iv) इटली के एकीकरण का नेतृत्व किया।

(v) कुशल राजनीतिज्ञ एवं कूटनीतिज्ञ था।

17. गैरीबाल्डी (Giuseppe Garibaldi) कौन थे?

उत्तर ⇒ ज्यूसेपे गैरीबाल्डी इटली के प्रसिद्ध क्रांतिकारी एवं राष्ट्रवादी नेता थे। उन्होंने अपने स्वयंसेवकों की सेना ‘रेड शर्ट्स (Red Shirts)’ के साथ दक्षिणी इटली एवं सिसिली पर विजय प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने जीते हुए क्षेत्रों को राजा विक्टर इमैनुएल द्वितीय को सौंप दिया, जिससे इटली के एकीकरण का कार्य पूरा हुआ।

गैरीबाल्डी को इटली का महान देशभक्त माना जाता है। उनके साहस, नेतृत्व एवं बलिदान ने इटली के राष्ट्रवादी आंदोलन को नई दिशा दी।

(i) इटली के महान क्रांतिकारी थे।

(ii) रेड शर्ट्स सेना का नेतृत्व किया।

(iii) सिसिली एवं दक्षिणी इटली पर विजय प्राप्त की।

(iv) इटली के एकीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

(v) राष्ट्रवाद के प्रमुख समर्थक थे।

18. इटली का एकीकरण कब और कैसे हुआ?

उत्तर ⇒ 19वीं शताब्दी में इटली अनेक छोटे-छोटे राज्यों में विभाजित था। ज्यूसेपे मैजिनी ने राष्ट्रवाद की भावना जगाई, काउंट कैवूर ने कूटनीति एवं युद्ध के माध्यम से उत्तरी राज्यों को एकजुट किया तथा गैरीबाल्डी ने दक्षिणी राज्यों को जीतकर एकीकरण का मार्ग प्रशस्त किया।

अंततः 1861 ई. में विक्टर इमैनुएल द्वितीय के नेतृत्व में इटली एक स्वतंत्र राष्ट्र बना। बाद में 1870 ई. में रोम को भी इटली में मिला लिया गया और एकीकरण पूर्ण हुआ।

इटली के एकीकरण के प्रमुख चरण निम्नलिखित हैं—

(i) मैजिनी द्वारा राष्ट्रवाद का प्रचार।

(ii) कैवूर की कूटनीति।

(iii) गैरीबाल्डी के सैन्य अभियान।

(iv) 1861 ई. में इटली की स्थापना।

(v) 1870 ई. में रोम का विलय।

19. जर्मनी का एकीकरण कब और कैसे हुआ?

उत्तर ⇒ 19वीं शताब्दी के प्रारंभ में जर्मनी लगभग 39 छोटे-छोटे राज्यों में विभाजित था। प्रशा के प्रधानमंत्री ओट्टो वॉन बिस्मार्क ने “रक्त और लौह” की नीति अपनाकर जर्मनी के एकीकरण का नेतृत्व किया। उसने क्रमशः डेनमार्क (1864), ऑस्ट्रिया (1866) तथा फ्रांस (1870-71) के विरुद्ध युद्ध लड़े और विजय प्राप्त की।

इन युद्धों के बाद 18 जनवरी 1871 को वर्साय के महल में जर्मन साम्राज्य की घोषणा की गई तथा विलियम प्रथम जर्मनी के सम्राट बने।

जर्मनी के एकीकरण के प्रमुख चरण निम्नलिखित हैं—

(i) प्रशा का नेतृत्व।

(ii) बिस्मार्क की “रक्त और लौह” नीति।

(iii) डेनमार्क, ऑस्ट्रिया एवं फ्रांस पर विजय।

(iv) 1871 ई. में जर्मन साम्राज्य की स्थापना।

(v) विलियम प्रथम जर्मनी के सम्राट बने।

20. यूनान (Greece) के स्वतंत्रता आंदोलन का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ 19वीं शताब्दी के प्रारंभ में यूनान (ग्रीस) पर ऑटोमन (तुर्क) साम्राज्य का शासन था। यूनान के लोगों ने स्वतंत्र राष्ट्र की स्थापना के लिए संघर्ष प्रारंभ किया। यूरोप के अनेक राष्ट्रवादी विचारकों, कवियों एवं कलाकारों ने यूनान के स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थन किया। प्रसिद्ध अंग्रेज़ कवि लॉर्ड बायरन (Lord Byron) ने भी इस आंदोलन में सक्रिय भाग लिया और अपने प्राणों का बलिदान दिया।

अंततः 1832 ई. में यूनान को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता प्राप्त हुई। इस सफलता ने पूरे यूरोप के राष्ट्रवादी आंदोलनों को नई प्रेरणा दी।

(i) यूनान पर ऑटोमन साम्राज्य का शासन था।

(ii) स्वतंत्रता आंदोलन 1821 ई. में प्रारंभ हुआ।

(iii) लॉर्ड बायरन ने आंदोलन का समर्थन किया।

(iv) 1832 ई. में यूनान स्वतंत्र राष्ट्र बना।

(v) इस आंदोलन ने यूरोप में राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया।

21. रोमांटिकवाद (Romanticism) क्या था? राष्ट्रवाद के विकास में इसकी क्या भूमिका थी?

उत्तर ⇒ रोमांटिकवाद 19वीं शताब्दी का एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आंदोलन था। इसका उद्देश्य लोगों में राष्ट्रीय भावना, सांस्कृतिक गौरव तथा अपनी भाषा एवं परंपराओं के प्रति प्रेम उत्पन्न करना था। रोमांटिक कलाकारों, कवियों एवं लेखकों ने अपने साहित्य, संगीत एवं चित्रकला के माध्यम से लोगों को स्वतंत्रता एवं राष्ट्रवाद के लिए प्रेरित किया।

इस आंदोलन ने विभिन्न देशों के लोगों को अपनी सांस्कृतिक पहचान का महत्व समझाया तथा विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष के लिए प्रेरित किया। इस प्रकार रोमांटिकवाद ने यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

(i) राष्ट्रीय भावना को प्रोत्साहित किया।

(ii) संस्कृति एवं परंपराओं का सम्मान बढ़ाया।

(iii) साहित्य एवं कला के माध्यम से राष्ट्रवाद का प्रचार किया।

(iv) लोगों में स्वतंत्रता की भावना विकसित की।

(v) राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाया।

22. यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास में भाषा का क्या महत्व था?

उत्तर ⇒ भाषा किसी भी राष्ट्र की पहचान एवं एकता का महत्वपूर्ण आधार होती है। यूरोप में विभिन्न देशों के राष्ट्रवादी नेताओं ने अपनी मातृभाषा के विकास एवं प्रचार पर विशेष बल दिया। उन्होंने स्थानीय भाषाओं में साहित्य, कविता एवं गीतों की रचना कर लोगों में राष्ट्रीय चेतना उत्पन्न की।

पोलैंड, जर्मनी एवं इटली जैसे देशों में भाषा ने लोगों को एकजुट करने तथा विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

(i) राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया।

(ii) सांस्कृतिक पहचान विकसित की।

(iii) राष्ट्रवादी साहित्य का विकास हुआ।

(iv) लोगों में राष्ट्रीय चेतना उत्पन्न हुई।

(v) विदेशी शासन का विरोध मजबूत हुआ।

23. यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास में संस्कृति की क्या भूमिका थी?

उत्तर ⇒ संस्कृति किसी भी राष्ट्र की आत्मा होती है। यूरोप में राष्ट्रवादी नेताओं ने लोकगीतों, लोककथाओं, लोकनृत्यों एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के माध्यम से राष्ट्रीय भावना को जागृत किया। विभिन्न देशों के कलाकारों एवं साहित्यकारों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को लोगों के सामने प्रस्तुत किया, जिससे उनमें अपने राष्ट्र के प्रति गर्व की भावना विकसित हुई।

संस्कृति ने लोगों को एक समान पहचान प्रदान की तथा राष्ट्रवादी आंदोलनों को मजबूत बनाया।

(i) राष्ट्रीय पहचान विकसित हुई।

(ii) लोक संस्कृति का संरक्षण हुआ।

(iii) राष्ट्रवादी भावना मजबूत हुई।

(iv) सांस्कृतिक एकता बढ़ी।

(v) स्वतंत्रता आंदोलनों को प्रेरणा मिली।

24. पोलैंड में राष्ट्रवाद के विकास का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ 18वीं शताब्दी के अंत में पोलैंड को रूस, प्रशा एवं ऑस्ट्रिया ने आपस में बाँट लिया था। इसके बाद पोलैंड का स्वतंत्र अस्तित्व समाप्त हो गया। पोलैंड के लोगों ने अपनी भाषा, संस्कृति एवं परंपराओं को जीवित रखकर राष्ट्रवाद की भावना को बनाए रखा। अनेक विद्रोह हुए, लेकिन उन्हें दबा दिया गया।

पोलैंड के कवियों, संगीतकारों एवं बुद्धिजीवियों ने राष्ट्रवाद के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रसिद्ध संगीतकार फ्रेडरिक शोपाँ (Frederic Chopin) ने अपने संगीत के माध्यम से लोगों में राष्ट्रीय चेतना उत्पन्न की।

(i) पोलैंड का विभाजन हुआ।

(ii) लोगों ने भाषा एवं संस्कृति को सुरक्षित रखा।

(iii) अनेक राष्ट्रवादी विद्रोह हुए।

(iv) फ्रेडरिक शोपाँ ने राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया।

(v) स्वतंत्रता की भावना निरंतर बनी रही।

25. फ्रेडरिक शोपाँ (Frederic Chopin) कौन थे?

उत्तर ⇒ फ्रेडरिक शोपाँ पोलैंड के प्रसिद्ध संगीतकार एवं राष्ट्रवादी थे। उनका जन्म वर्ष 1810 ई. में हुआ था। उन्होंने अपने संगीत के माध्यम से पोलैंड के लोगों में राष्ट्रीय भावना एवं स्वतंत्रता की इच्छा को जीवित रखा। जब पोलैंड विदेशी शासन के अधीन था, तब शोपाँ की रचनाएँ लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनीं।

उन्होंने पोलैंड के लोक संगीत को अपनी रचनाओं में स्थान दिया, जिससे राष्ट्रीय संस्कृति का संरक्षण हुआ तथा राष्ट्रवादी आंदोलन को बल मिला।

(i) पोलैंड के प्रसिद्ध संगीतकार थे।

(ii) जन्म – 1810 ई.।

(iii) राष्ट्रवादी विचारों के समर्थक थे।

(iv) लोक संगीत को बढ़ावा दिया।

(v) अपने संगीत से राष्ट्रीय चेतना जगाई।

26. 1848 की फ्रांसीसी क्रांति का राष्ट्रवाद के विकास में क्या योगदान था?

उत्तर ⇒ 1848 की फ्रांसीसी क्रांति यूरोप के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना थी। इस क्रांति के परिणामस्वरूप फ्रांस में राजतंत्र का अंत हुआ और गणतंत्र की स्थापना हुई। इस क्रांति ने पूरे यूरोप में स्वतंत्रता, समानता एवं लोकतंत्र की भावना को मजबूत किया। इसके प्रभाव से जर्मनी, इटली, ऑस्ट्रिया एवं हंगरी जैसे देशों में भी राष्ट्रवादी एवं उदारवादी आंदोलन प्रारंभ हुए।

1848 की क्रांति ने यह सिद्ध कर दिया कि जनता अपने अधिकारों एवं राष्ट्रीय एकता के लिए संगठित होकर संघर्ष कर सकती है।

(i) फ्रांस में गणतंत्र की स्थापना हुई।

(ii) राष्ट्रवाद को नई दिशा मिली।

(iii) लोकतांत्रिक विचारों का प्रसार हुआ।

(iv) यूरोप में अनेक क्रांतियाँ प्रारंभ हुईं।

(v) जनता में राजनीतिक जागरूकता बढ़ी।

27. जर्मनी के एकीकरण में फ्रैंकफर्ट संसद (Frankfurt Parliament) की क्या भूमिका थी?

उत्तर ⇒ फ्रैंकफर्ट संसद का गठन 1848 ई. में जर्मनी के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों द्वारा किया गया था। इसका उद्देश्य जर्मनी को एक संविधान के अंतर्गत एकीकृत राष्ट्र बनाना था। संसद ने एक लोकतांत्रिक संविधान तैयार किया तथा प्रशा के राजा फ्रेडरिक विलियम चतुर्थ को जर्मनी का सम्राट बनने का प्रस्ताव दिया।

किन्तु राजा ने यह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया, जिससे फ्रैंकफर्ट संसद असफल हो गई। फिर भी इस संसद ने जर्मनी के एकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

(i) स्थापना – 1848 ई.।

(ii) उद्देश्य – जर्मनी का एकीकरण।

(iii) लोकतांत्रिक संविधान तैयार किया।

(iv) फ्रेडरिक विलियम चतुर्थ को सम्राट बनने का प्रस्ताव दिया।

(v) जर्मन राष्ट्रवाद को प्रोत्साहित किया।

28. बाल्कन क्षेत्र (Balkan Region) क्या था?

उत्तर ⇒ बाल्कन यूरोप का दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र था, जिसमें वर्तमान सर्बिया, बुल्गारिया, रोमानिया, अल्बानिया, ग्रीस, बोस्निया एवं मोंटेनेग्रो जैसे देश शामिल थे। यह क्षेत्र विभिन्न भाषाओं, धर्मों एवं जातियों के लोगों का निवास स्थान था। लंबे समय तक यह क्षेत्र ऑटोमन (तुर्क) साम्राज्य के अधीन रहा।

19वीं शताब्दी में यहाँ राष्ट्रवाद की भावना तेजी से विकसित हुई। विभिन्न जातियों ने स्वतंत्र राष्ट्र की स्थापना के लिए संघर्ष प्रारंभ किया, जिसके कारण बाल्कन क्षेत्र यूरोप का सबसे अस्थिर क्षेत्र बन गया।

(i) दक्षिण-पूर्वी यूरोप का क्षेत्र था।

(ii) अनेक जातियाँ एवं भाषाएँ थीं।

(iii) ऑटोमन साम्राज्य के अधीन था।

(iv) राष्ट्रवादी आंदोलन प्रारंभ हुए।

(v) यूरोप का संघर्षपूर्ण क्षेत्र बन गया।

29. बाल्कन क्षेत्र में राष्ट्रवाद के उदय के प्रमुख कारण लिखिए।

उत्तर ⇒ बाल्कन क्षेत्र में रहने वाली विभिन्न जातियाँ अपनी स्वतंत्र पहचान एवं स्वतंत्र राष्ट्र की स्थापना चाहती थीं। ऑटोमन साम्राज्य के कमजोर होने के साथ ही राष्ट्रवादी आंदोलन तेज हो गए। रूस, ऑस्ट्रिया एवं अन्य यूरोपीय शक्तियाँ भी इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहती थीं, जिससे संघर्ष और बढ़ गया।

इन परिस्थितियों के कारण बाल्कन क्षेत्र लंबे समय तक राजनीतिक अस्थिरता एवं युद्धों का केंद्र बना रहा।

बाल्कन क्षेत्र में राष्ट्रवाद के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे—

(i) ऑटोमन साम्राज्य का पतन।

(ii) विभिन्न जातियों में राष्ट्रीय चेतना।

(iii) स्वतंत्र राष्ट्र की इच्छा।

(iv) यूरोपीय शक्तियों की प्रतिस्पर्धा।

(v) सांस्कृतिक एवं भाषाई एकता की भावना।

30. यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास के प्रमुख परिणाम लिखिए।

उत्तर ⇒ यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास ने महाद्वीप के राजनीतिक एवं सामाजिक इतिहास को पूरी तरह बदल दिया। इसके परिणामस्वरूप जर्मनी एवं इटली जैसे नए राष्ट्रों का एकीकरण हुआ। अनेक देशों में लोकतांत्रिक शासन की स्थापना हुई तथा जनता में राष्ट्रीय एकता एवं स्वतंत्रता की भावना मजबूत हुई। हालांकि राष्ट्रवाद की तीव्र प्रतिस्पर्धा के कारण विभिन्न देशों के बीच संघर्ष भी बढ़े, जिसने आगे चलकर प्रथम विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि तैयार की।

राष्ट्रवाद के प्रमुख परिणाम निम्नलिखित हैं—

(i) जर्मनी एवं इटली का एकीकरण हुआ।

(ii) लोकतांत्रिक विचारों का विकास हुआ।

(iii) राष्ट्रीय एकता मजबूत हुई।

(iv) निरंकुश राजतंत्र कमजोर हुआ।

(v) स्वतंत्रता आंदोलनों को बल मिला।

(vi) यूरोप में राजनीतिक परिवर्तन हुए।

(vii) प्रथम विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि तैयार हुई।

31. राष्ट्रवाद के विकास में कला (Art) की क्या भूमिका थी?

उत्तर ⇒ यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास में कला ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चित्रकारों एवं मूर्तिकारों ने अपने चित्रों एवं कलाकृतियों के माध्यम से राष्ट्रीय एकता, स्वतंत्रता तथा देशभक्ति की भावना को व्यक्त किया। उन्होंने राष्ट्र को एक जीवंत प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे लोगों में राष्ट्रीय चेतना का विकास हुआ। अनेक चित्रों में राष्ट्र को एक महिला के रूप में दर्शाया गया, जो शक्ति, स्वतंत्रता एवं एकता का प्रतीक थी।

कला ने लोगों को अपनी संस्कृति, इतिहास एवं राष्ट्रीय पहचान के प्रति जागरूक किया तथा राष्ट्रवादी आंदोलनों को जनसमर्थन दिलाने में सहायता की।

(i) राष्ट्रीय चेतना का प्रसार हुआ।

(ii) स्वतंत्रता की भावना मजबूत हुई।

(iii) राष्ट्रीय प्रतीकों का विकास हुआ।

(iv) लोगों में एकता की भावना बढ़ी।

(v) राष्ट्रवादी आंदोलनों को प्रेरणा मिली।

32. मैरियान (Marianne) कौन थी?

उत्तर ⇒ मैरियान (Marianne) फ्रांस के राष्ट्र का मानवीय प्रतीक (Allegory) थी। फ्रांसीसी क्रांति के दौरान उसे स्वतंत्रता, समानता एवं गणतंत्र की प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया। उसके सिर पर लाल रंग की टोपी (Red Cap) दिखाई जाती थी, जो स्वतंत्रता का प्रतीक मानी जाती थी। मैरियान की प्रतिमाएँ सार्वजनिक स्थानों एवं सरकारी भवनों में स्थापित की गईं।

मैरियान फ्रांस के लोगों में राष्ट्रीय एकता एवं देशभक्ति की भावना उत्पन्न करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनी।

(i) फ्रांस की राष्ट्रीय प्रतीक थी।

(ii) स्वतंत्रता एवं गणतंत्र का प्रतीक थी।

(iii) लाल टोपी धारण करती थी।

(iv) राष्ट्रीय एकता का संदेश देती थी।

(v) फ्रांसीसी क्रांति की पहचान बनी।

33. जर्मेनिया (Germania) कौन थी?

उत्तर ⇒ जर्मेनिया (Germania) जर्मनी की राष्ट्रीय प्रतीक (Allegory) थी। 19वीं शताब्दी में जर्मनी के एकीकरण आंदोलन के दौरान उसे राष्ट्रवाद एवं राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया। चित्रों में जर्मेनिया के हाथ में तलवार तथा ओक (Oak) के पत्तों का मुकुट दिखाया जाता था। ओक के पत्ते वीरता एवं शक्ति के प्रतीक माने जाते थे।

जर्मेनिया ने जर्मन जनता में राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत किया तथा एकीकरण आंदोलन को प्रेरणा दी।

(i) जर्मनी की राष्ट्रीय प्रतीक थी।

(ii) राष्ट्रीय एकता का प्रतीक थी।

(iii) हाथ में तलवार धारण करती थी।

(iv) ओक के पत्तों का मुकुट पहनती थी।

(v) जर्मन राष्ट्रवाद को प्रेरित किया।

34. अर्नेस्ट रेनन (Ernest Renan) के राष्ट्र संबंधी विचार लिखिए।

उत्तर ⇒ अर्नेस्ट रेनन फ्रांस के प्रसिद्ध विचारक एवं इतिहासकार थे। उन्होंने अपने प्रसिद्ध व्याख्यान “What is a Nation?” (1882) में राष्ट्र की अवधारणा को स्पष्ट किया। उनके अनुसार राष्ट्र केवल भाषा, धर्म, नस्ल या भू-भाग पर आधारित नहीं होता, बल्कि लोगों की साझा ऐतिहासिक स्मृतियों, वर्तमान में साथ रहने की इच्छा तथा भविष्य के लिए सामूहिक संकल्प पर आधारित होता है।

रेनन के विचारों ने आधुनिक राष्ट्रवाद की अवधारणा को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

अर्नेस्ट रेनन के प्रमुख विचार निम्नलिखित हैं—

(i) राष्ट्र लोगों की सामूहिक इच्छा है।

(ii) साझा इतिहास राष्ट्र का आधार है।

(iii) राष्ट्रीय एकता आवश्यक है।

(iv) भविष्य के लिए सामूहिक संकल्प महत्वपूर्ण है।

(v) भाषा एवं धर्म अकेले राष्ट्र का आधार नहीं हैं।

35. यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास में महिलाओं की भूमिका लिखिए।

उत्तर ⇒ यूरोप के राष्ट्रवादी आंदोलनों में महिलाओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने राजनीतिक सभाओं, आंदोलनों एवं क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय भाग लिया। अनेक महिलाओं ने राष्ट्रवादी साहित्य का प्रचार किया तथा राष्ट्रीय चेतना फैलाने में योगदान दिया। हालांकि उस समय उन्हें मतदान का अधिकार एवं राजनीतिक समानता प्राप्त नहीं थी।

महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के कारण राष्ट्रवादी आंदोलनों को व्यापक जनसमर्थन मिला तथा समाज में राजनीतिक जागरूकता बढ़ी।

(i) राष्ट्रवादी आंदोलनों में भाग लिया।

(ii) राष्ट्रीय विचारों का प्रचार किया।

(iii) राजनीतिक सभाओं में भागीदारी की।

(iv) राष्ट्रीय चेतना फैलाने में सहयोग दिया।

(v) लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग की।

36. यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास में समाचार पत्रों एवं साहित्य की भूमिका लिखिए।

उत्तर ⇒ यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास में समाचार पत्रों, पुस्तकों, कविताओं एवं साहित्य का महत्वपूर्ण योगदान था। लेखकों एवं कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों में स्वतंत्रता, समानता एवं राष्ट्रीय एकता की भावना उत्पन्न की। समाचार पत्रों ने विभिन्न देशों के राष्ट्रवादी आंदोलनों की जानकारी जनता तक पहुँचाई तथा लोगों को विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया।

साहित्य ने राष्ट्रीय संस्कृति, भाषा एवं इतिहास के प्रति लोगों में गर्व की भावना विकसित की। इससे राष्ट्रवादी विचार पूरे यूरोप में तेजी से फैलने लगे।

(i) राष्ट्रवादी विचारों का प्रचार हुआ।

(ii) लोगों में राष्ट्रीय चेतना विकसित हुई।

(iii) स्वतंत्रता आंदोलनों को समर्थन मिला।

(iv) राष्ट्रीय भाषा एवं संस्कृति को बढ़ावा मिला।

(v) जनता में राजनीतिक जागरूकता बढ़ी।

37. यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास में मध्यम वर्ग (Middle Class) की भूमिका लिखिए।

उत्तर ⇒ यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास में मध्यम वर्ग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी। औद्योगिक क्रांति के बाद व्यापारियों, उद्योगपतियों, शिक्षकों, वकीलों एवं बुद्धिजीवियों का एक नया मध्यम वर्ग विकसित हुआ। यह वर्ग लोकतंत्र, संविधान, समान अधिकार एवं राष्ट्रीय एकता का समर्थक था। उन्होंने विभिन्न राष्ट्रवादी आंदोलनों का नेतृत्व किया तथा जनता को संगठित किया।

मध्यम वर्ग के प्रयासों से अनेक देशों में उदारवादी एवं राष्ट्रवादी विचारों का प्रसार हुआ, जिसने आधुनिक राष्ट्र-राज्यों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया।

(i) राष्ट्रवादी आंदोलनों का नेतृत्व किया।

(ii) लोकतंत्र एवं संविधान का समर्थन किया।

(iii) समान अधिकारों की मांग की।

(iv) राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा दिया।

(v) राजनीतिक जागरूकता फैलाने में योगदान दिया।

38. यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास का भारत पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर ⇒ यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास का प्रभाव भारत सहित एशिया एवं अफ्रीका के अनेक देशों पर पड़ा। भारतीय नेताओं ने यूरोप के राष्ट्रवादी आंदोलनों से प्रेरणा लेकर स्वतंत्रता आंदोलन को संगठित किया। स्वतंत्रता, समानता एवं राष्ट्रीय एकता के विचारों ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को नई दिशा प्रदान की।

महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक, सुभाष चंद्र बोस एवं अन्य नेताओं ने भारतीयों में राष्ट्रीय चेतना विकसित की। इसके परिणामस्वरूप भारत में स्वतंत्रता आंदोलन और अधिक व्यापक एवं संगठित हुआ।

(i) भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरणा मिली।

(ii) स्वतंत्रता की भावना मजबूत हुई।

(iii) राष्ट्रीय एकता का विकास हुआ।

(iv) लोकतांत्रिक विचारों का प्रसार हुआ।

(v) विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष तेज हुआ।

39. यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास के प्रमुख कारण एवं परिणाम लिखिए।

उत्तर ⇒ यूरोप में राष्ट्रवाद का विकास 18वीं एवं 19वीं शताब्दी की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक था। फ्रांसीसी क्रांति, नेपोलियन की नीतियाँ, उदारवाद, रोमांटिकवाद एवं मध्यम वर्ग के उदय ने राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया। इसके परिणामस्वरूप जर्मनी एवं इटली का एकीकरण हुआ तथा लोकतांत्रिक शासन एवं राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित हुई।

हालाँकि राष्ट्रवाद के कारण विभिन्न देशों के बीच प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष भी बढ़े, जिसने आगे चलकर प्रथम विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि तैयार की।

प्रमुख कारण

(i) फ्रांसीसी क्रांति।

(ii) नेपोलियन के सुधार।

(iii) उदारवाद एवं लोकतंत्र।

(iv) रोमांटिकवाद।

(v) मध्यम वर्ग का उदय।

प्रमुख परिणाम

(i) जर्मनी एवं इटली का एकीकरण।

(ii) लोकतांत्रिक शासन का विकास।

(iii) राष्ट्रीय एकता मजबूत हुई।

(iv) स्वतंत्रता आंदोलनों को बल मिला।

(v) प्रथम विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि बनी।

40. ‘यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय’ अध्याय का निष्कर्ष लिखिए।

उत्तर ⇒ 19वीं शताब्दी में यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय विश्व इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना थी। फ्रांसीसी क्रांति ने स्वतंत्रता, समानता एवं बंधुत्व के सिद्धांतों का प्रसार किया, जिससे पूरे यूरोप में राष्ट्रीय चेतना विकसित हुई। मैजिनी, कैवूर, गैरीबाल्डी एवं बिस्मार्क जैसे नेताओं ने इटली एवं जर्मनी के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साहित्य, कला, भाषा एवं संस्कृति ने भी राष्ट्रवाद को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

यूरोप का राष्ट्रवादी आंदोलन केवल यूरोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने भारत सहित विश्व के अनेक देशों के स्वतंत्रता आंदोलनों को भी प्रेरित किया। आधुनिक राष्ट्र-राज्यों के निर्माण तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना में इस आंदोलन का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

More Class 10 History Revision Notes

Chapter 1: यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय
Chapter 2: भारत में राष्ट्रवाद
Chapter 3: भूमण्डलीकृत विश्व का बनना
Chapter 4: औद्योगीकरण का युग
Chapter 5: मुद्रण संस्कृति और आधुनिक दुनिया

Class 10 Notes by Subject

Mathematics
Science
Social Science
English
Hindi (Course A/B)
Sanskrit
Urdu
Disclaimer: If you are the copyright owner of any material featured on this page and wish to request its removal, please contact us at contact@sarkaridiary.in. We will review and respond to your request promptly.

Latest Updates