Class 10 Civics: संघवाद
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Chapter Overview
| Class | 10 |
| Subject | Civics |
| Chapter Name | संघवाद |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
संघवाद Revision Notes
1. संघवाद (Federalism) क्या है?
उत्तर ⇒ संघवाद एक ऐसी शासन व्यवस्था है जिसमें शासन की शक्तियाँ संविधान द्वारा केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों के बीच विभाजित की जाती हैं। दोनों स्तर की सरकारें अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से कार्य करती हैं तथा सीधे जनता के प्रति उत्तरदायी होती हैं। संघवाद का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय एकता बनाए रखना तथा क्षेत्रीय विविधताओं का सम्मान करना है।
(i) केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच शक्तियों का विभाजन होता है।
(ii) दोनों स्तर की सरकारें स्वतंत्र होती हैं।
(iii) संविधान शक्तियों का निर्धारण करता है।
(iv) राष्ट्रीय एकता को बनाए रखता है।
(v) क्षेत्रीय विविधताओं का सम्मान करता है।
2. संघीय शासन व्यवस्था (Federal System) क्या है?
उत्तर ⇒ संघीय शासन व्यवस्था वह व्यवस्था है जिसमें संविधान के अनुसार केंद्र एवं राज्य/प्रांत सरकारों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया जाता है। केंद्र सरकार राष्ट्रीय महत्व के विषयों जैसे रक्षा एवं विदेश नीति का संचालन करती है, जबकि राज्य सरकारें स्थानीय महत्व के विषयों जैसे कृषि, पुलिस एवं स्वास्थ्य का प्रबंधन करती हैं। दोनों सरकारें अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में स्वतंत्र रहती हैं।
(i) दो या अधिक स्तर की सरकारें होती हैं।
(ii) शक्तियों का विभाजन संविधान द्वारा होता है।
(iii) केंद्र राष्ट्रीय विषयों का संचालन करता है।
(iv) राज्य स्थानीय विषयों का संचालन करते हैं।
(v) दोनों सरकारें जनता के प्रति उत्तरदायी होती हैं।
3. एकात्मक शासन व्यवस्था (Unitary System) क्या है?
उत्तर ⇒ एकात्मक शासन व्यवस्था वह व्यवस्था है जिसमें शासन की सभी प्रमुख शक्तियाँ केंद्रीय सरकार के पास होती हैं। राज्य या प्रांत सरकारें यदि होती भी हैं, तो वे अपनी शक्तियाँ केंद्र से प्राप्त करती हैं तथा केंद्र के अधीन कार्य करती हैं। केंद्र सरकार आवश्यकतानुसार राज्यों की शक्तियों में परिवर्तन भी कर सकती है।
(i) केंद्रीय सरकार सर्वोच्च होती है।
(ii) राज्यों की शक्तियाँ केंद्र निर्धारित करता है।
(iii) केंद्र राज्यों की शक्तियों में परिवर्तन कर सकता है।
(iv) शासन का केंद्रीकरण होता है।
(v) पूरे देश के लिए एक ही सर्वोच्च सरकार होती है।
4. संघीय शासन व्यवस्था एवं एकात्मक शासन व्यवस्था में अंतर लिखिए।
उत्तर ⇒ संघीय एवं एकात्मक शासन व्यवस्था में मुख्य अंतर सत्ता के वितरण का होता है। संघीय व्यवस्था में केंद्र एवं राज्यों के बीच शक्तियों का संवैधानिक विभाजन होता है, जबकि एकात्मक व्यवस्था में सभी प्रमुख शक्तियाँ केंद्र सरकार के पास होती हैं। संघीय व्यवस्था में दोनों स्तर की सरकारें स्वतंत्र होती हैं, जबकि एकात्मक व्यवस्था में राज्य सरकारें केंद्र के अधीन रहती हैं।
| संघीय शासन व्यवस्था | एकात्मक शासन व्यवस्था |
|---|---|
| सत्ता केंद्र एवं राज्यों में विभाजित होती है। | सत्ता मुख्यतः केंद्र सरकार के पास होती है। |
| शक्तियों का विभाजन संविधान करता है। | शक्तियाँ केंद्र द्वारा निर्धारित होती हैं। |
| केंद्र एवं राज्य स्वतंत्र होते हैं। | राज्य केंद्र के अधीन कार्य करते हैं। |
| केंद्र राज्यों के अधिकार नहीं छीन सकता। | केंद्र राज्यों की शक्तियों में परिवर्तन कर सकता है। |
| उदाहरण – भारत, अमेरिका | उदाहरण – ब्रिटेन |
5. संघीय शासन व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर ⇒ संघीय शासन व्यवस्था में शासन की शक्तियाँ संविधान द्वारा विभिन्न स्तरों की सरकारों के बीच बाँटी जाती हैं। प्रत्येक स्तर की सरकार का अपना अधिकार क्षेत्र होता है तथा कोई भी सरकार दूसरे स्तर की शक्तियों का मनमाने ढंग से उपयोग नहीं कर सकती। स्वतंत्र न्यायपालिका संविधान की रक्षा करती है तथा केंद्र एवं राज्यों के बीच विवादों का समाधान करती है।
(i) दो या अधिक स्तर की सरकारें होती हैं।
(ii) शक्तियों का स्पष्ट विभाजन संविधान द्वारा किया जाता है।
(iii) प्रत्येक स्तर की सरकार स्वतंत्र होती है।
(iv) स्वतंत्र न्यायपालिका होती है।
(v) केंद्र एवं राज्यों के राजस्व के अलग-अलग स्रोत होते हैं।
6. संघीय व्यवस्था के दो प्रमुख उद्देश्य लिखिए।
उत्तर ⇒ संघीय व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य देश की एकता एवं अखंडता बनाए रखना तथा विभिन्न क्षेत्रों की भाषायी, सांस्कृतिक एवं सामाजिक विविधताओं का सम्मान करना है। संघवाद के माध्यम से राष्ट्रीय हितों की रक्षा के साथ-साथ राज्यों को भी अपने क्षेत्र के विकास के लिए पर्याप्त अधिकार दिए जाते हैं। इससे लोकतंत्र मजबूत होता है और सभी क्षेत्रों का संतुलित विकास संभव हो पाता है।
(i) राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता बनाए रखना।
(ii) क्षेत्रीय विविधताओं का सम्मान करना।
(iii) राज्यों को स्वायत्तता प्रदान करना।
(iv) लोकतंत्र को मजबूत बनाना।
(v) संतुलित विकास सुनिश्चित करना।
7. सफल संघीय व्यवस्था के लिए आवश्यक शर्तें लिखिए।
उत्तर ⇒ किसी भी संघीय व्यवस्था की सफलता के लिए केंद्र एवं राज्यों के बीच आपसी विश्वास तथा सहयोग आवश्यक होता है। सत्ता के बँटवारे के नियमों पर सभी राज्यों की सहमति होनी चाहिए तथा सभी स्तर की सरकारों को संविधान का सम्मान करना चाहिए। जब सरकारें सहयोग एवं समन्वय के साथ कार्य करती हैं, तभी संघीय व्यवस्था सफल होती है।
(i) केंद्र एवं राज्यों के बीच आपसी विश्वास।
(ii) सत्ता के बँटवारे पर सहमति।
(iii) संविधान का सम्मान।
(iv) सहयोग एवं समन्वय।
(v) लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन।
8. संघीय शासन व्यवस्था के गठन के दो प्रमुख तरीके लिखिए।
उत्तर ⇒ विश्व में संघीय शासन व्यवस्था मुख्यतः दो प्रकार से विकसित हुई है। पहला, साथ आकर संघ बनाना (Coming Together Federation), जिसमें कई स्वतंत्र देश मिलकर एक संघ का निर्माण करते हैं। दूसरा, साथ लेकर संघ बनाना (Holding Together Federation), जिसमें एक बड़ा देश अपनी आंतरिक विविधताओं को ध्यान में रखते हुए राज्यों के बीच सत्ता का बँटवारा करता है। भारत दूसरे प्रकार का संघीय देश है।
(i) साथ आकर संघ बनाना।
(ii) साथ लेकर संघ बनाना।
(iii) पहला मॉडल स्वतंत्र देशों के मिलन पर आधारित है।
(iv) दूसरा मॉडल विविधताओं वाले बड़े देशों में अपनाया जाता है।
(v) भारत ‘साथ लेकर संघ बनाना’ का उदाहरण है।
9. ‘साथ आकर संघ बनाना’ (Coming Together Federation) क्या है?
उत्तर ⇒ जब दो या दो से अधिक स्वतंत्र देश अपनी संप्रभुता बनाए रखते हुए मिलकर एक नया संघ बनाते हैं, तो इसे साथ आकर संघ बनाना कहा जाता है। ऐसे संघों में सभी राज्यों को समान अधिकार प्राप्त होते हैं तथा राज्य सामान्यतः केंद्र की तुलना में अधिक शक्तिशाली होते हैं। अमेरिका, स्विट्जरलैंड एवं ऑस्ट्रेलिया इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
(i) स्वतंत्र देश मिलकर संघ बनाते हैं।
(ii) राज्यों को अधिक अधिकार प्राप्त होते हैं।
(iii) सभी राज्यों को समान दर्जा मिलता है।
(iv) संप्रभुता साझा की जाती है।
(v) उदाहरण – अमेरिका, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रेलिया।
10. ‘साथ लेकर संघ बनाना’ (Holding Together Federation) क्या है?
उत्तर ⇒ जब किसी बड़े एवं विविधताओं वाले देश में क्षेत्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र एवं राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन किया जाता है, तो इसे साथ लेकर संघ बनाना कहा जाता है। इस प्रकार की व्यवस्था में केंद्र सरकार अपेक्षाकृत अधिक शक्तिशाली होती है। सभी राज्यों को सामान्य अधिकार प्राप्त होते हैं, जबकि कुछ राज्यों को विशेष परिस्थितियों में विशेष अधिकार भी दिए जा सकते हैं। भारत, बेल्जियम एवं स्पेन इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
(i) बड़े देश में संघीय व्यवस्था बनाई जाती है।
(ii) केंद्र सरकार अपेक्षाकृत अधिक शक्तिशाली होती है।
(iii) राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन होता है।
(iv) कुछ राज्यों को विशेष अधिकार दिए जा सकते हैं।
(v) उदाहरण – भारत, बेल्जियम एवं स्पेन।
11. भारत में संघीय व्यवस्था का क्या महत्व है?
उत्तर ⇒ भारत एक विशाल एवं विविधताओं वाला देश है, जहाँ अनेक भाषाएँ, धर्म, संस्कृतियाँ एवं परंपराएँ हैं। ऐसी स्थिति में संघीय व्यवस्था राष्ट्रीय एकता बनाए रखने के साथ-साथ राज्यों को स्वायत्तता भी प्रदान करती है। भारतीय संविधान ने भारत को “राज्यों का संघ” घोषित किया है तथा केंद्र एवं राज्यों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया है। इससे लोकतंत्र मजबूत होता है तथा सभी क्षेत्रों का संतुलित विकास संभव होता है।
(i) राष्ट्रीय एकता बनी रहती है।
(ii) राज्यों को स्वायत्तता मिलती है।
(iii) क्षेत्रीय विविधताओं का सम्मान होता है।
(iv) लोकतंत्र मजबूत होता है।
(v) संतुलित विकास संभव होता है।
12. भारत को ‘राज्यों का संघ’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर ⇒ भारत को ‘राज्यों का संघ’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि संविधान ने केंद्र एवं राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन किया है। भारत अनेक भाषाओं, धर्मों एवं संस्कृतियों वाला देश है, इसलिए संघीय व्यवस्था अपनाकर राष्ट्रीय एकता एवं क्षेत्रीय स्वायत्तता दोनों को सुनिश्चित किया गया है। सभी राज्य मिलकर भारतीय संघ का निर्माण करते हैं तथा संविधान इसकी आधारशिला है।
(i) संविधान ने भारत को राज्यों का संघ कहा है।
(ii) केंद्र एवं राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन है।
(iii) राष्ट्रीय एकता सुनिश्चित होती है।
(iv) क्षेत्रीय विविधताओं का सम्मान होता है।
(v) लोकतंत्र को मजबूती मिलती है।
13. भारत में सरकार के कितने स्तर हैं?
उत्तर ⇒ प्रारंभ में भारतीय संविधान ने दो स्तर की सरकारों—केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार—की व्यवस्था की थी। बाद में 73वें एवं 74वें संविधान संशोधन (1992) के माध्यम से पंचायती राज एवं नगर निकायों को संवैधानिक मान्यता देकर तीसरे स्तर की सरकार की स्थापना की गई। वर्तमान में भारत में तीन स्तर की सरकारें कार्य करती हैं।
(i) केंद्र सरकार।
(ii) राज्य सरकार।
(iii) स्थानीय सरकार (पंचायत एवं नगर निकाय)।
(iv) तीनों स्तर संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त हैं।
(v) सभी स्तर जनता के प्रति उत्तरदायी हैं।
14. भारत में विधायी शक्तियों का विभाजन कैसे किया गया है?
उत्तर ⇒ भारतीय संविधान ने केंद्र एवं राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का विभाजन तीन सूचियों के माध्यम से किया है। ये हैं—संघ सूची, राज्य सूची एवं समवर्ती सूची। प्रत्येक सूची में अलग-अलग विषय निर्धारित किए गए हैं, जिन पर संबंधित सरकार कानून बना सकती है। इससे केंद्र एवं राज्यों के अधिकार स्पष्ट रहते हैं।
(i) संघ सूची।
(ii) राज्य सूची।
(iii) समवर्ती सूची।
(iv) संविधान द्वारा शक्तियों का विभाजन किया गया है।
(v) प्रत्येक स्तर का अपना अधिकार क्षेत्र है।
15. संघ सूची (Union List) क्या है?
उत्तर ⇒ संघ सूची में राष्ट्रीय महत्व के विषय शामिल किए गए हैं। इन विषयों पर केवल संसद (केंद्र सरकार) कानून बना सकती है। रक्षा, विदेश नीति, मुद्रा, बैंकिंग, संचार एवं परमाणु ऊर्जा जैसे विषय संघ सूची में आते हैं, क्योंकि इनका संबंध पूरे देश से होता है।
(i) राष्ट्रीय महत्व के विषय शामिल होते हैं।
(ii) केवल संसद कानून बना सकती है।
(iii) रक्षा संघ सूची का विषय है।
(iv) विदेश नीति एवं मुद्रा भी इसमें शामिल हैं।
(v) पूरे देश पर समान रूप से लागू होती है।
16. राज्य सूची (State List) क्या है?
उत्तर ⇒ राज्य सूची में ऐसे विषय शामिल किए गए हैं जिनका संबंध राज्य एवं स्थानीय प्रशासन से होता है। इन विषयों पर केवल राज्य विधानमंडल कानून बना सकता है। पुलिस, कृषि, सिंचाई, व्यापार, स्थानीय शासन एवं स्वास्थ्य जैसे विषय राज्य सूची में आते हैं। इन विषयों का प्रभाव मुख्यतः संबंधित राज्य तक सीमित रहता है।
(i) राज्य महत्व के विषय शामिल होते हैं।
(ii) केवल राज्य विधानमंडल कानून बना सकता है।
(iii) पुलिस राज्य सूची का विषय है।
(iv) कृषि एवं सिंचाई इसमें शामिल हैं।
(v) स्थानीय प्रशासन से संबंधित विषय होते हैं।
17. समवर्ती सूची (Concurrent List) क्या है?
उत्तर ⇒ समवर्ती सूची में ऐसे विषय शामिल किए गए हैं जिन पर केंद्र एवं राज्य दोनों सरकारें कानून बना सकती हैं। शिक्षा, वन, विवाह, गोद लेना, उत्तराधिकार तथा श्रमिक संघ जैसे विषय इस सूची में आते हैं। यदि किसी विषय पर केंद्र एवं राज्य के कानूनों में टकराव हो, तो केंद्र का कानून प्रभावी माना जाता है।
(i) केंद्र एवं राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।
(ii) शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है।
(iii) वन एवं विवाह इसमें शामिल हैं।
(iv) श्रमिक संघ भी समवर्ती सूची में आते हैं।
(v) विवाद होने पर केंद्र का कानून मान्य होता है।
18. अवशिष्ट विषय (Residuary Subjects) क्या हैं?
उत्तर ⇒ अवशिष्ट विषय वे विषय होते हैं जिनका उल्लेख संविधान की संघ, राज्य अथवा समवर्ती सूची में नहीं किया गया है। ऐसे विषयों पर कानून बनाने का अधिकार केवल केंद्र सरकार (संसद) को प्राप्त है। आधुनिक समय में कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, साइबर अपराध एवं नई तकनीकों से जुड़े विषय इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
(i) किसी भी सूची में शामिल नहीं होते।
(ii) संसद को कानून बनाने का अधिकार होता है।
(iii) आधुनिक तकनीकी विषय इसमें आते हैं।
(iv) साइबर अपराध इसका उदाहरण है।
(v) केंद्र सरकार इन पर निर्णय लेती है।
19. भारतीय संघ की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर ⇒ भारत की संघीय व्यवस्था ‘सबको साथ लेकर चलने’ के सिद्धांत पर आधारित है। सभी राज्यों को समान संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं, जबकि कुछ राज्यों को उनकी विशेष परिस्थितियों के कारण अतिरिक्त प्रावधान दिए गए हैं। संविधान ने केंद्र एवं राज्यों के बीच शक्तियों का संतुलित विभाजन किया है तथा लोकतांत्रिक शासन को मजबूत बनाया है।
(i) भारत राज्यों का संघ है।
(ii) केंद्र एवं राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन है।
(iii) कुछ राज्यों को विशेष प्रावधान प्राप्त हैं।
(iv) संविधान सर्वोच्च है।
(v) लोकतांत्रिक संघीय व्यवस्था अपनाई गई है।
20. भारत के कुछ राज्यों को विशेष दर्जा क्यों दिया गया है?
उत्तर ⇒ भारत के कुछ राज्यों को उनकी भौगोलिक स्थिति, जनजातीय संस्कृति, सामाजिक विशेषताओं एवं ऐतिहासिक परिस्थितियों के कारण विशेष प्रावधान दिए गए हैं। अनुच्छेद 371 के अंतर्गत असम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मिज़ोरम आदि राज्यों को विशेष अधिकार प्रदान किए गए हैं, ताकि उनकी सांस्कृतिक पहचान एवं परंपराओं की रक्षा की जा सके।
(i) जनजातीय संस्कृति की रक्षा के लिए।
(ii) भौगोलिक विशेषताओं के कारण।
(iii) ऐतिहासिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर।
(iv) अनुच्छेद 371 के अंतर्गत विशेष प्रावधान।
(v) सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा के लिए।
21. केंद्र शासित प्रदेश (Union Territory) क्या हैं?
उत्तर ⇒ केंद्र शासित प्रदेश वे क्षेत्र हैं जिनका प्रशासन सीधे केंद्र सरकार द्वारा संचालित किया जाता है। इन क्षेत्रों का आकार छोटा होने, जनसंख्या कम होने या विशेष प्रशासनिक महत्व के कारण इन्हें पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिया गया है। इन क्षेत्रों में राज्य सरकारों की तरह सभी अधिकार नहीं होते तथा इनका शासन राष्ट्रपति के प्रतिनिधि (उपराज्यपाल/प्रशासक) के माध्यम से चलता है।
(i) इनका प्रशासन केंद्र सरकार चलाती है।
(ii) इन्हें पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त नहीं होता।
(iii) राष्ट्रपति के प्रतिनिधि द्वारा शासन किया जाता है।
(iv) विशेष प्रशासनिक व्यवस्था होती है।
(v) उदाहरण – चंडीगढ़, लक्षद्वीप, दिल्ली।
22. संविधान में संघीय व्यवस्था में संशोधन कैसे किया जाता है?
उत्तर ⇒ भारत में संघीय व्यवस्था संविधान की मूल संरचना का महत्वपूर्ण भाग है। इसमें संशोधन करने के लिए केवल संसद का साधारण बहुमत पर्याप्त नहीं होता। ऐसे संशोधन को पहले संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से पारित किया जाता है तथा उसके बाद कम-से-कम आधे राज्यों की विधानसभाओं द्वारा अनुमोदित किया जाता है। इससे केंद्र एवं राज्यों दोनों के अधिकार सुरक्षित रहते हैं।
(i) संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत आवश्यक है।
(ii) आधे राज्यों की स्वीकृति आवश्यक होती है।
(iii) संविधान की मूल संरचना सुरक्षित रहती है।
(iv) केंद्र एवं राज्यों की सहमति आवश्यक होती है।
(v) संघीय व्यवस्था मजबूत बनी रहती है।
23. संघीय व्यवस्था में न्यायपालिका की क्या भूमिका है?
उत्तर ⇒ संघीय व्यवस्था में न्यायपालिका संविधान की संरक्षक होती है। यदि केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच अधिकारों को लेकर कोई विवाद उत्पन्न होता है, तो सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय उसका समाधान करते हैं। न्यायपालिका यह सुनिश्चित करती है कि दोनों स्तर की सरकारें संविधान के अनुसार कार्य करें तथा किसी के अधिकारों का उल्लंघन न हो।
(i) संविधान की रक्षा करती है।
(ii) केंद्र एवं राज्यों के विवादों का समाधान करती है।
(iii) सर्वोच्च न्यायालय अंतिम निर्णय देता है।
(iv) संविधान की व्याख्या करती है।
(v) संघीय संतुलन बनाए रखती है।
24. केंद्र एवं राज्य सरकारों के वित्तीय अधिकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ शासन चलाने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों को अलग-अलग प्रकार के कर लगाने तथा राजस्व एकत्र करने के अधिकार दिए गए हैं। संविधान में दोनों स्तर की सरकारों के वित्तीय अधिकार स्पष्ट रूप से निर्धारित किए गए हैं। इससे प्रत्येक सरकार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन स्वतंत्र रूप से कर सकती है तथा विकास कार्यों के लिए आवश्यक धन की व्यवस्था कर सकती है।
(i) दोनों सरकारों को कर लगाने का अधिकार है।
(ii) राजस्व के अलग-अलग स्रोत निर्धारित हैं।
(iii) विकास कार्यों के लिए धन उपलब्ध होता है।
(iv) वित्तीय स्वायत्तता बनी रहती है।
(v) संविधान वित्तीय अधिकार निर्धारित करता है।
25. भारत में भाषायी राज्यों का गठन क्यों किया गया?
उत्तर ⇒ स्वतंत्रता के बाद भारत में राज्यों का पुनर्गठन मुख्यतः भाषा के आधार पर किया गया ताकि एक ही भाषा बोलने वाले लोग एक राज्य में रह सकें। इससे प्रशासन अधिक सरल एवं प्रभावी हुआ तथा लोगों को अपनी भाषा एवं संस्कृति के विकास का अवसर मिला। बाद के अनुभवों से यह सिद्ध हुआ कि भाषायी राज्यों के गठन से राष्ट्रीय एकता कमजोर नहीं हुई, बल्कि और अधिक मजबूत हुई।
(i) प्रशासन को सरल बनाने के लिए।
(ii) भाषायी पहचान को सम्मान देने के लिए।
(iii) क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए।
(iv) लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए।
(v) राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के लिए।
26. भारत में राज्यों का पुनर्गठन किन आधारों पर किया गया?
उत्तर ⇒ भारत में राज्यों का पुनर्गठन मुख्यतः भाषा के आधार पर किया गया, ताकि एक भाषा बोलने वाले लोग एक ही राज्य में रह सकें। इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय संस्कृति, भौगोलिक परिस्थितियों, प्रशासनिक सुविधा एवं जनजातीय पहचान के आधार पर भी नए राज्यों का गठन किया गया। झारखंड, उत्तराखंड एवं छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों का निर्माण क्षेत्रीय आवश्यकताओं एवं विकास को ध्यान में रखकर किया गया।
(i) भाषा के आधार पर।
(ii) क्षेत्रीय संस्कृति के आधार पर।
(iii) भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर।
(iv) प्रशासनिक सुविधा के लिए।
(v) जनजातीय एवं क्षेत्रीय पहचान को सम्मान देने के लिए।
27. भारत की भाषा नीति (Language Policy) क्या है?
उत्तर ⇒ भारत की भाषा नीति सभी भाषाओं के सम्मान एवं संरक्षण पर आधारित है। भारतीय संविधान ने किसी भी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं दिया है। हिंदी को संघ की राजभाषा तथा अंग्रेज़ी को सहायक राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया है। संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाओं को मान्यता दी गई है, जिससे भाषायी विविधता एवं राष्ट्रीय एकता दोनों बनी रहती हैं।
(i) भारत की कोई राष्ट्रभाषा नहीं है।
(ii) हिंदी संघ की राजभाषा है।
(iii) अंग्रेज़ी सहायक राजभाषा है।
(iv) 22 भाषाओं को संवैधानिक मान्यता प्राप्त है।
(v) सभी भाषाओं का सम्मान किया जाता है।
28. अंग्रेज़ी भाषा को सरकारी कार्यों में जारी क्यों रखा गया?
उत्तर ⇒ संविधान के अनुसार 1965 के बाद सरकारी कार्यों में अंग्रेज़ी का प्रयोग समाप्त किया जाना था, लेकिन गैर-हिंदी भाषी राज्यों, विशेषकर तमिलनाडु, ने इसका विरोध किया। राष्ट्रीय एकता एवं भाषायी संतुलन बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने हिंदी के साथ-साथ अंग्रेज़ी के प्रयोग को भी जारी रखने का निर्णय लिया। इससे भाषायी विवाद शांत हुआ तथा सभी राज्यों के हितों की रक्षा हुई।
(i) गैर-हिंदी राज्यों ने विरोध किया।
(ii) राष्ट्रीय एकता बनाए रखने के लिए।
(iii) भाषायी संतुलन बनाए रखने के लिए।
(iv) हिंदी के साथ अंग्रेज़ी का प्रयोग जारी रहा।
(v) प्रशासनिक कार्य सुचारु रूप से चलते रहे।
29. 1990 के बाद भारत में संघवाद कैसे मजबूत हुआ?
उत्तर ⇒ 1990 के बाद भारत में गठबंधन सरकारों एवं क्षेत्रीय राजनीतिक दलों का महत्व बढ़ा। किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण राष्ट्रीय दलों को क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर सरकार बनानी पड़ी। इससे राज्यों की स्वायत्तता का सम्मान बढ़ा तथा केंद्र एवं राज्यों के बीच सहयोग की भावना विकसित हुई। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों ने भी राज्यों की निर्वाचित सरकारों की सुरक्षा को मजबूत किया।
(i) गठबंधन सरकारों का गठन हुआ।
(ii) क्षेत्रीय दलों का महत्व बढ़ा।
(iii) राज्यों की स्वायत्तता मजबूत हुई।
(iv) केंद्र–राज्य सहयोग बढ़ा।
(v) संघीय व्यवस्था अधिक प्रभावी बनी।
30. गठबंधन सरकार (Coalition Government) क्या है?
उत्तर ⇒ गठबंधन सरकार वह सरकार होती है, जिसका गठन दो या दो से अधिक राजनीतिक दलों द्वारा मिलकर किया जाता है। जब किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं होता, तब कई दल साझा कार्यक्रम के आधार पर मिलकर सरकार बनाते हैं। इस व्यवस्था में सभी सहयोगी दल निर्णय प्रक्रिया में भाग लेते हैं तथा सत्ता की साझेदारी का पालन करते हैं।
(i) दो या अधिक दल मिलकर सरकार बनाते हैं।
(ii) स्पष्ट बहुमत न होने पर गठित होती है।
(iii) साझा कार्यक्रम के आधार पर कार्य करती है।
(iv) सत्ता की साझेदारी को बढ़ावा देती है।
(v) लोकतांत्रिक सहयोग को मजबूत बनाती है.
31. भारत में सत्ता का विकेंद्रीकरण (Decentralisation) क्या है?
उत्तर ⇒ जब केंद्र एवं राज्य सरकारें अपनी कुछ शक्तियाँ स्थानीय सरकारों (पंचायतों एवं नगर निकायों) को सौंपती हैं, तो इसे सत्ता का विकेंद्रीकरण कहा जाता है। इसका उद्देश्य स्थानीय समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर करना तथा जनता की शासन में प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित करना है। विकेंद्रीकरण लोकतंत्र को मजबूत बनाता है और स्थानीय स्वशासन को बढ़ावा देता है।
(i) स्थानीय सरकारों को शक्तियाँ दी जाती हैं।
(ii) जनता की भागीदारी बढ़ती है।
(iii) स्थानीय समस्याओं का समाधान आसान होता है।
(iv) लोकतंत्र मजबूत होता है।
(v) स्थानीय स्वशासन को बढ़ावा मिलता है।
32. सत्ता के विकेंद्रीकरण की आवश्यकता क्यों पड़ी?
उत्तर ⇒ भारत जैसे विशाल एवं विविधताओं वाले देश में केवल केंद्र एवं राज्य सरकारों के माध्यम से सभी समस्याओं का समाधान संभव नहीं था। स्थानीय लोगों को अपने क्षेत्र की समस्याओं की बेहतर जानकारी होती है। इसलिए पंचायतों एवं नगर निकायों को अधिकार देकर स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों एवं प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाया गया।
(i) स्थानीय समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर होता है।
(ii) प्रशासन अधिक प्रभावी बनता है।
(iii) जनता की भागीदारी बढ़ती है।
(iv) संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है।
(v) लोकतंत्र मजबूत होता है।
33. 73वें एवं 74वें संविधान संशोधन (1992) का महत्व लिखिए।
उत्तर ⇒ 1992 में संविधान के 73वें एवं 74वें संशोधन द्वारा पंचायती राज एवं नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया। इन संशोधनों के माध्यम से स्थानीय निकायों के नियमित चुनाव अनिवार्य किए गए, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई तथा राज्य चुनाव आयोग की स्थापना का प्रावधान किया गया। इससे स्थानीय स्वशासन को मजबूती मिली।
(i) पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा मिला।
(ii) नियमित चुनाव अनिवार्य हुए।
(iii) महिलाओं एवं SC/ST के लिए आरक्षण मिला।
(iv) राज्य चुनाव आयोग की स्थापना हुई।
(v) स्थानीय लोकतंत्र मजबूत हुआ।
34. पंचायती राज व्यवस्था (Panchayati Raj System) क्या है?
उत्तर ⇒ पंचायती राज व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों की स्थानीय स्वशासन प्रणाली है। इसका उद्देश्य गाँवों के विकास में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना है। भारत में पंचायती राज व्यवस्था के तीन स्तर हैं—ग्राम पंचायत, पंचायत समिति (प्रखंड स्तर) तथा जिला परिषद। यह व्यवस्था ग्रामीण लोकतंत्र की आधारशिला मानी जाती है।
(i) ग्रामीण स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था है।
(ii) तीन स्तरों पर कार्य करती है।
(iii) जनता की भागीदारी सुनिश्चित करती है।
(iv) ग्रामीण विकास को बढ़ावा देती है।
(v) लोकतंत्र को मजबूत बनाती है।
35. ग्राम पंचायत (Gram Panchayat) क्या है?
उत्तर ⇒ ग्राम पंचायत गाँव स्तर की स्थानीय स्वशासन संस्था है। इसके सदस्य गाँव के मतदाताओं द्वारा सीधे चुने जाते हैं। ग्राम पंचायत का प्रमुख सरपंच या मुखिया (प्रधान) कहलाता है। यह गाँव के विकास कार्यों, स्वच्छता, पेयजल, सड़क, प्रकाश व्यवस्था तथा अन्य स्थानीय समस्याओं के समाधान का कार्य करती है। इसका कार्य ग्राम सभा की देखरेख में होता है।
(i) गाँव स्तर की स्थानीय सरकार है।
(ii) सदस्य सीधे चुने जाते हैं।
(iii) प्रधान/सरपंच इसका प्रमुख होता है।
(iv) विकास कार्यों का संचालन करती है।
(v) ग्राम सभा के प्रति उत्तरदायी होती है.
36. ग्राम सभा (Gram Sabha) क्या है?
उत्तर ⇒ ग्राम सभा किसी गाँव के सभी पंजीकृत मतदाताओं का समूह होती है। यह पंचायती राज व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण संस्था है। ग्राम पंचायत अपने सभी कार्य ग्राम सभा की देखरेख में करती है। ग्राम सभा पंचायत के बजट को स्वीकृति देती है, विकास कार्यों की समीक्षा करती है तथा पंचायत को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाती है। इससे ग्रामीण लोकतंत्र मजबूत होता है।
(i) गाँव के सभी मतदाता इसके सदस्य होते हैं।
(ii) ग्राम पंचायत की देखरेख करती है।
(iii) पंचायत के बजट को स्वीकृति देती है।
(iv) विकास कार्यों की समीक्षा करती है।
(v) लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ाती है।
37. पंचायत समिति (Panchayat Samiti) क्या है?
उत्तर ⇒ पंचायत समिति प्रखंड (ब्लॉक) स्तर की स्थानीय स्वशासन संस्था है। इसका गठन कई ग्राम पंचायतों को मिलाकर किया जाता है। पंचायत समिति ग्रामीण विकास योजनाओं का समन्वय करती है तथा ग्राम पंचायतों के कार्यों की निगरानी करती है। यह ग्राम पंचायत एवं जिला परिषद के बीच समन्वय स्थापित करने का कार्य भी करती है।
(i) प्रखंड स्तर की संस्था है।
(ii) कई ग्राम पंचायतों से मिलकर बनती है।
(iii) विकास योजनाओं का समन्वय करती है।
(iv) पंचायतों की निगरानी करती है।
(v) जिला परिषद से समन्वय स्थापित करती है।
38. जिला परिषद (Zila Parishad) क्या है?
उत्तर ⇒ जिला परिषद जिला स्तर की स्थानीय स्वशासन संस्था है। इसका गठन जिले की सभी पंचायत समितियों को मिलाकर किया जाता है। जिला परिषद जिले के समग्र विकास की योजनाएँ बनाती है तथा विभिन्न पंचायत समितियों के कार्यों का समन्वय करती है। इसके सदस्यों में निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ-साथ संबंधित क्षेत्र के सांसद एवं विधायक भी शामिल होते हैं।
(i) जिला स्तर की संस्था है।
(ii) पंचायत समितियों से मिलकर बनती है।
(iii) जिले के विकास की योजना बनाती है।
(iv) सांसद एवं विधायक भी सदस्य होते हैं।
(v) जिला स्तर पर समन्वय स्थापित करती है।
39. शहरी स्थानीय शासन (Urban Local Government) क्या है?
उत्तर ⇒ शहरी क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन की व्यवस्था को शहरी स्थानीय शासन कहा जाता है। छोटे शहरों में नगरपालिका तथा बड़े शहरों में नगर निगम कार्य करते हैं। इनके प्रतिनिधियों का चुनाव जनता द्वारा किया जाता है। नगर निगम का प्रमुख महापौर (Mayor) तथा नगरपालिका का प्रमुख अध्यक्ष कहलाता है। ये संस्थाएँ सड़क, जलापूर्ति, सफाई, प्रकाश व्यवस्था एवं अन्य नागरिक सुविधाओं का संचालन करती हैं।
(i) शहरों की स्थानीय शासन व्यवस्था है।
(ii) छोटे शहरों में नगरपालिका होती है।
(iii) बड़े शहरों में नगर निगम होता है।
(iv) महापौर/अध्यक्ष इसका प्रमुख होता है।
(v) नागरिक सुविधाओं का संचालन करती है।
40. ‘संघवाद’ अध्याय का निष्कर्ष लिखिए।
उत्तर ⇒ संघवाद भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार है। इसके माध्यम से केंद्र, राज्य एवं स्थानीय सरकारों के बीच शक्तियों का संतुलित विभाजन किया गया है। संघीय व्यवस्था राष्ट्रीय एकता को बनाए रखते हुए क्षेत्रीय विविधताओं का सम्मान करती है। भाषायी राज्यों का गठन, सत्ता का विकेंद्रीकरण, पंचायती राज व्यवस्था तथा गठबंधन राजनीति ने भारतीय संघवाद को और अधिक मजबूत बनाया है। यह अध्याय हमें सहयोग, सहमति एवं लोकतांत्रिक भागीदारी के महत्व को समझाता है।