Class 10 Civics: राजनीतिक दल
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Chapter Overview
| Class | 10 |
| Subject | Civics |
| Chapter Name | राजनीतिक दल (Political Party) |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
राजनीतिक दल Revision Notes
1. राजनीतिक दल (Political Party) क्या है?
उत्तर ⇒ राजनीतिक दल लोगों का एक संगठित समूह होता है, जो समान विचारधारा, नीतियों एवं कार्यक्रमों के आधार पर कार्य करता है। इसका मुख्य उद्देश्य चुनाव लड़कर राजनीतिक सत्ता प्राप्त करना तथा सरकार बनाकर अपने कार्यक्रमों को लागू करना होता है। राजनीतिक दल लोकतंत्र के महत्वपूर्ण अंग हैं क्योंकि वे जनता एवं सरकार के बीच सेतु का कार्य करते हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
(i) लोगों का संगठित समूह होता है।
(ii) चुनाव लड़कर सत्ता प्राप्त करना इसका उद्देश्य होता है।
(iii) समान विचारधारा एवं नीतियों पर आधारित होता है।
(iv) जनता एवं सरकार के बीच सेतु का कार्य करता है।
(v) लोकतंत्र का महत्वपूर्ण अंग है।
2. किसी राजनीतिक दल की पहचान कैसे तय होती है?
उत्तर ⇒ किसी भी राजनीतिक दल की पहचान मुख्य रूप से उसकी नीतियों एवं सामाजिक आधार से होती है। दल किन मुद्दों को प्राथमिकता देता है, उसके चुनावी वादे क्या हैं तथा समाज के किन वर्गों का उसे समर्थन प्राप्त है, इन्हीं आधारों पर उसकी पहचान बनती है। प्रत्येक राजनीतिक दल अपनी विचारधारा एवं कार्यक्रमों के माध्यम से अन्य दलों से अलग पहचान स्थापित करता है।
(i) उसकी नीतियों से पहचान होती है।
(ii) चुनावी कार्यक्रमों से पहचान बनती है।
(iii) सामाजिक आधार महत्वपूर्ण होता है।
(iv) समर्थकों के वर्ग से पहचान मिलती है।
(v) विचारधारा दल की विशेष पहचान होती है।
3. राजनीतिक दल के मुख्य अंग लिखिए।
उत्तर ⇒ किसी भी राजनीतिक दल के सफल संचालन के लिए उसके तीन प्रमुख अंग होते हैं—नेता, सक्रिय सदस्य एवं समर्थक (अनुयायी)। नेता दल का नेतृत्व करते हैं तथा महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं। सक्रिय सदस्य संगठन को मजबूत बनाते हैं एवं दल की गतिविधियों में भाग लेते हैं, जबकि समर्थक चुनावों एवं अन्य कार्यक्रमों में दल का सहयोग करते हैं।
(i) नेता।
(ii) सक्रिय सदस्य।
(iii) समर्थक (अनुयायी)।
(iv) सभी मिलकर संगठन को मजबूत बनाते हैं।
(v) लोकतांत्रिक गतिविधियों का संचालन करते हैं।
4. राजनीतिक दलों के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒ राजनीतिक दल लोकतंत्र में अनेक महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। वे चुनाव लड़ते हैं, उम्मीदवारों का चयन करते हैं, नीतियाँ एवं कार्यक्रम बनाते हैं, सरकार का गठन करते हैं तथा कानून निर्माण में भाग लेते हैं। इसके अतिरिक्त विपक्ष के रूप में सरकार की आलोचना करते हैं, जनमत का निर्माण करते हैं तथा जनता एवं सरकार के बीच संपर्क स्थापित करते हैं।
(i) चुनाव लड़ना।
(ii) नीतियाँ एवं कार्यक्रम बनाना।
(iii) सरकार बनाना एवं चलाना।
(iv) कानून निर्माण में भाग लेना।
(v) जनमत निर्माण एवं विपक्ष की भूमिका निभाना।
5. लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर ⇒ आधुनिक लोकतंत्र में राजनीतिक दलों के बिना शासन व्यवस्था का प्रभावी संचालन संभव नहीं है। यदि राजनीतिक दल न हों, तो सभी उम्मीदवार निर्दलीय होंगे तथा राष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट नीतियाँ एवं कार्यक्रम नहीं बन पाएँगे। राजनीतिक दल समाज के विभिन्न विचारों एवं हितों को संगठित करते हैं, सरकार का गठन करते हैं तथा जनता के प्रति उत्तरदायी शासन सुनिश्चित करते हैं।
(i) लोकतंत्र के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक हैं।
(ii) सरकार बनाने में सहायता करते हैं।
(iii) राष्ट्रीय नीतियाँ एवं कार्यक्रम तैयार करते हैं।
(iv) जनता एवं सरकार के बीच संपर्क स्थापित करते हैं।
(v) लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं।
6. लोकतंत्र में विपक्ष (Opposition) की भूमिका क्या है?
उत्तर ⇒ चुनाव में हारने वाले राजनीतिक दल विपक्ष की भूमिका निभाते हैं। विपक्ष सरकार की नीतियों एवं कार्यों की समीक्षा करता है तथा उसकी गलतियों एवं कमियों को जनता के सामने लाता है। यह सरकार के सामने वैकल्पिक नीतियाँ प्रस्तुत करता है तथा यह सुनिश्चित करता है कि सरकार संविधान एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुसार कार्य करे। इस प्रकार विपक्ष लोकतंत्र को मजबूत एवं उत्तरदायी बनाता है।
(i) सरकार की नीतियों की आलोचना करता है।
(ii) वैकल्पिक नीतियाँ प्रस्तुत करता है।
(iii) जनता के मुद्दों को उठाता है।
(iv) सरकार को जवाबदेह बनाता है।
(v) लोकतंत्र को मजबूत करता है।
7. कानून निर्माण में राजनीतिक दलों की क्या भूमिका है?
उत्तर ⇒ देश में कानून बनाने का कार्य संसद एवं विधानसभाएँ करती हैं, लेकिन राजनीतिक दल इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अधिकांश सांसद एवं विधायक किसी-न-किसी राजनीतिक दल से जुड़े होते हैं तथा वे अपने दल की नीतियों एवं निर्देशों के अनुसार कानूनों के पक्ष या विपक्ष में मतदान करते हैं। इस प्रकार राजनीतिक दल कानून निर्माण की दिशा एवं स्वरूप को प्रभावित करते हैं।
(i) संसद एवं विधानसभाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
(ii) कानूनों के पक्ष या विपक्ष में मतदान करते हैं।
(iii) दल के निर्देशों का पालन करते हैं।
(iv) नीतियों को कानून का रूप देने में सहायता करते हैं।
(v) लोकतांत्रिक प्रक्रिया को संचालित करते हैं।
8. राजनीतिक दल जनता और सरकार के बीच कड़ी कैसे बनते हैं?
उत्तर ⇒ राजनीतिक दल जनता की समस्याओं, माँगों एवं सुझावों को सरकार तक पहुँचाते हैं। साथ ही सरकार की योजनाओं, नीतियों एवं कार्यक्रमों की जानकारी भी जनता तक पहुँचाते हैं। इस प्रकार राजनीतिक दल जनता एवं सरकार के बीच संवाद स्थापित करते हैं तथा दोनों के बीच विश्वास एवं सहयोग बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
(i) जनता की समस्याएँ सरकार तक पहुँचाते हैं।
(ii) सरकारी योजनाओं की जानकारी देते हैं।
(iii) जनता एवं सरकार के बीच संवाद स्थापित करते हैं।
(iv) जनहित के मुद्दे उठाते हैं।
(v) लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं।
9. जनमत निर्माण (Public Opinion) में राजनीतिक दलों की क्या भूमिका है?
उत्तर ⇒ राजनीतिक दल विभिन्न सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक मुद्दों पर जनता के बीच चर्चा एवं बहस करते हैं। वे अपनी नीतियों एवं कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जागरूक बनाते हैं तथा विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए अपने विचार प्रस्तुत करते हैं। इससे जनता में राजनीतिक चेतना विकसित होती है तथा जनमत का निर्माण होता है।
(i) जनता को राजनीतिक रूप से जागरूक बनाते हैं।
(ii) विभिन्न मुद्दों पर चर्चा कराते हैं।
(iii) अपनी नीतियों का प्रचार करते हैं।
(iv) लोकतांत्रिक विचारों का प्रसार करते हैं।
(v) जनमत का निर्माण करते हैं।
10. राजनीतिक दलों के बिना लोकतंत्र क्यों सफल नहीं हो सकता?
उत्तर ⇒ राजनीतिक दलों के बिना लोकतंत्र का प्रभावी संचालन संभव नहीं है। यदि सभी उम्मीदवार निर्दलीय हों, तो सरकार बनाना, राष्ट्रीय नीतियाँ तैयार करना तथा शासन चलाना कठिन हो जाएगा। राजनीतिक दल विभिन्न विचारों एवं हितों को संगठित करते हैं, प्रतिनिधियों को एकजुट रखते हैं तथा सरकार एवं विपक्ष दोनों की भूमिका निभाकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को स्थिर एवं उत्तरदायी बनाते हैं।
(i) सरकार के गठन में सहायता करते हैं।
(ii) राष्ट्रीय नीतियाँ तैयार करते हैं।
(iii) प्रतिनिधियों को संगठित रखते हैं।
(iv) लोकतंत्र को स्थिर बनाते हैं।
(v) सरकार एवं विपक्ष दोनों की भूमिका निभाते हैं।
11. दलीय व्यवस्था (Party System) क्या है?
उत्तर ⇒ दलीय व्यवस्था से आशय किसी देश में राजनीतिक दलों की संख्या तथा उनके बीच सत्ता के लिए होने वाली प्रतिस्पर्धा से है। प्रत्येक देश की सामाजिक, ऐतिहासिक एवं राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार उसकी दलीय व्यवस्था विकसित होती है। लोकतंत्र में मुख्यतः एक-दलीय, दो-दलीय एवं बहुदलीय व्यवस्था देखने को मिलती है।
(i) राजनीतिक दलों की व्यवस्था को दलीय व्यवस्था कहते हैं।
(ii) यह देश की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
(iii) लोकतंत्र में विभिन्न प्रकार की दलीय व्यवस्थाएँ होती हैं।
(iv) राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देती है।
(v) लोकतांत्रिक शासन को प्रभावित करती है।
12. एक-दलीय व्यवस्था (One Party System) क्या है?
उत्तर ⇒ एक-दलीय व्यवस्था वह व्यवस्था है जिसमें केवल एक राजनीतिक दल को शासन करने या चुनाव लड़ने की अनुमति होती है। इस व्यवस्था में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा एवं जनता के पास वैकल्पिक विकल्प नहीं होते। इसलिए इसे पूर्ण लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं माना जाता। चीन इसका प्रमुख उदाहरण है।
(i) केवल एक राजनीतिक दल कार्य करता है।
(ii) राजनीतिक प्रतिस्पर्धा नहीं होती।
(iii) जनता के पास सीमित विकल्प होते हैं।
(iv) लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं मानी जाती।
(v) उदाहरण – चीन।
13. दो-दलीय व्यवस्था (Two Party System) क्या है?
उत्तर ⇒ दो-दलीय व्यवस्था वह व्यवस्था है जिसमें मुख्य राजनीतिक प्रतिस्पर्धा दो बड़े दलों के बीच होती है। अन्य दल भी मौजूद हो सकते हैं, लेकिन सरकार बनाने की संभावना सामान्यतः इन्हीं दो दलों की होती है। सत्ता समय-समय पर इन दोनों दलों के बीच बदलती रहती है। अमेरिका एवं ब्रिटेन इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
(i) दो प्रमुख दलों के बीच प्रतिस्पर्धा होती है।
(ii) सत्ता दो दलों के बीच बदलती रहती है।
(iii) अन्य दल भी मौजूद हो सकते हैं।
(iv) सरकार प्रायः दो प्रमुख दलों में से कोई एक बनाता है।
(v) उदाहरण – अमेरिका एवं ब्रिटेन।
14. बहुदलीय व्यवस्था (Multi-Party System) क्या है?
उत्तर ⇒ बहुदलीय व्यवस्था वह व्यवस्था है जिसमें अनेक राजनीतिक दल चुनाव में भाग लेते हैं तथा सरकार बनाने के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने पर कई दल मिलकर गठबंधन सरकार भी बना सकते हैं। भारत में बहुदलीय व्यवस्था लागू है, क्योंकि यहाँ सामाजिक एवं सांस्कृतिक विविधता अधिक है।
(i) अनेक राजनीतिक दल चुनाव लड़ते हैं।
(ii) गठबंधन सरकार बनने की संभावना रहती है।
(iii) विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व होता है।
(iv) भारत में बहुदलीय व्यवस्था है।
(v) लोकतंत्र में विविधता को बढ़ावा मिलता है।
15. भारत में बहुदलीय व्यवस्था क्यों अपनाई गई है?
उत्तर ⇒ भारत एक विशाल एवं विविधताओं वाला देश है, जहाँ अनेक भाषाएँ, धर्म, जातियाँ एवं क्षेत्रीय संस्कृतियाँ हैं। ऐसी स्थिति में केवल एक या दो राजनीतिक दल पूरे देश का प्रभावी प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते। इसलिए भारत में बहुदलीय व्यवस्था अपनाई गई, जिससे विभिन्न क्षेत्रों एवं समुदायों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्राप्त हो सके तथा लोकतंत्र अधिक समावेशी बन सके।
(i) भारत विविधताओं वाला देश है।
(ii) विभिन्न समुदायों को प्रतिनिधित्व मिलता है।
(iii) क्षेत्रीय हितों की रक्षा होती है।
(iv) लोकतंत्र अधिक समावेशी बनता है।
(v) गठबंधन एवं सहयोग की भावना विकसित होती है।
16. गठबंधन (Coalition) क्या है?
उत्तर ⇒ जब दो या दो से अधिक राजनीतिक दल किसी साझा उद्देश्य के लिए मिलकर चुनाव लड़ते हैं या सरकार बनाते हैं, तो उसे गठबंधन (Coalition) कहा जाता है। गठबंधन सामान्यतः तब बनता है जब किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं होता। इस व्यवस्था में सभी सहयोगी दल मिलकर निर्णय लेते हैं तथा साझा कार्यक्रम के आधार पर शासन चलाते हैं। भारत में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) एवं संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
(i) दो या अधिक दल मिलकर गठबंधन बनाते हैं।
(ii) साझा कार्यक्रम के आधार पर कार्य करते हैं।
(iii) बहुमत न मिलने पर सरकार बनाते हैं।
(iv) सामूहिक निर्णय लिए जाते हैं।
(v) उदाहरण – NDA एवं UPA।
17. भारत में कितने राजनीतिक दल होने चाहिए? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒ किसी देश में राजनीतिक दलों की संख्या पहले से निर्धारित नहीं की जा सकती। यह उस देश की सामाजिक, ऐतिहासिक एवं राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करती है। समय के साथ समाज की आवश्यकताओं एवं जनता की राजनीतिक सोच के अनुसार नए दल बनते हैं और पुराने दलों में परिवर्तन होता है। इसलिए प्रत्येक देश में दलीय व्यवस्था स्वाभाविक रूप से विकसित होती है।
(i) दलों की संख्या पहले से तय नहीं होती।
(ii) यह सामाजिक परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
(iii) राजनीतिक इतिहास का प्रभाव पड़ता है।
(iv) समय के साथ दलीय व्यवस्था विकसित होती है।
(v) प्रत्येक देश की व्यवस्था अलग होती है।
18. भारत में राजनीतिक दलों के प्रकार लिखिए।
उत्तर ⇒ भारत जैसे संघीय लोकतंत्र में मुख्यतः दो प्रकार के राजनीतिक दल पाए जाते हैं—राष्ट्रीय दल एवं क्षेत्रीय (राज्य) दल। राष्ट्रीय दल कई राज्यों में सक्रिय होकर राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों पर कार्य करते हैं, जबकि क्षेत्रीय दल किसी विशेष राज्य या क्षेत्र के हितों एवं समस्याओं पर अधिक ध्यान देते हैं। दोनों प्रकार के दल भारतीय लोकतंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
(i) राष्ट्रीय दल।
(ii) क्षेत्रीय (राज्य) दल।
(iii) राष्ट्रीय दल पूरे देश में कार्य करते हैं।
(iv) क्षेत्रीय दल राज्य स्तर पर कार्य करते हैं।
(v) दोनों लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं।
19. मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल (Recognised Political Party) क्या है?
उत्तर ⇒ भारत में प्रत्येक राजनीतिक दल का निर्वाचन आयोग में पंजीकरण आवश्यक है। जो दल निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित शर्तों को पूरा करते हैं, उन्हें मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल कहा जाता है। ऐसे दलों को स्थायी चुनाव चिह्न एवं अन्य विशेष सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं। मान्यता राज्य स्तर या राष्ट्रीय स्तर पर दी जाती है।
(i) निर्वाचन आयोग से मान्यता प्राप्त होती है।
(ii) निर्धारित शर्तें पूरी करनी होती हैं।
(iii) स्थायी चुनाव चिह्न मिलता है।
(iv) विशेष सुविधाएँ प्राप्त होती हैं।
(v) राज्य एवं राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर मान्यता मिल सकती है।
20. राज्य दल (State Party) एवं राष्ट्रीय दल (National Party) में अंतर लिखिए।
उत्तर ⇒ राज्य दल एवं राष्ट्रीय दल का अंतर उनके कार्यक्षेत्र एवं निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित मान्यता के आधार पर होता है। राज्य दल मुख्यतः एक राज्य तक सीमित रहते हैं, जबकि राष्ट्रीय दल अनेक राज्यों में सक्रिय होकर राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों पर कार्य करते हैं।
| राज्य दल (State Party) | राष्ट्रीय दल (National Party) |
|---|---|
| एक राज्य या क्षेत्र में सक्रिय रहता है। | अनेक राज्यों में सक्रिय रहता है। |
| राज्य के मुद्दों पर ध्यान देता है। | राष्ट्रीय मुद्दों पर कार्य करता है। |
| राज्य स्तर की मान्यता प्राप्त करता है। | राष्ट्रीय स्तर की मान्यता प्राप्त करता है। |
| राज्य विधानसभा चुनावों में प्रभावी होता है। | लोकसभा एवं कई राज्यों के चुनावों में प्रभावी होता है। |
| उदाहरण – झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), DMK आदि। | उदाहरण – BJP, INC, BSP, AAP आदि। |
21. राज्य दल (State Party) की मान्यता प्राप्त करने की शर्तें लिखिए।
उत्तर ⇒ भारत में किसी राजनीतिक दल को राज्य दल की मान्यता निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित नियमों के आधार पर दी जाती है। यदि कोई दल किसी राज्य की विधानसभा के चुनाव में पड़े कुल वैध मतों का कम-से-कम 6 प्रतिशत प्राप्त करता है तथा कम-से-कम 2 सीटों पर विजय प्राप्त करता है, तो उसे उस राज्य में मान्यता प्राप्त राज्य दल का दर्जा दिया जाता है। इस मान्यता के बाद दल को स्थायी चुनाव चिह्न एवं अन्य सुविधाएँ प्राप्त होती हैं।
(i) निर्वाचन आयोग द्वारा मान्यता दी जाती है।
(ii) कम-से-कम 6% मत प्राप्त करने होते हैं।
(iii) कम-से-कम 2 विधानसभा सीटें जीतनी होती हैं।
(iv) स्थायी चुनाव चिह्न प्राप्त होता है।
(v) अन्य विशेष सुविधाएँ भी मिलती हैं।
22. राष्ट्रीय दल (National Party) की मान्यता प्राप्त करने की शर्तें लिखिए।
उत्तर ⇒ किसी राजनीतिक दल को राष्ट्रीय दल का दर्जा निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर दिया जाता है। यदि कोई दल लोकसभा चुनाव में या कम-से-कम चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में 6 प्रतिशत मत प्राप्त करे तथा लोकसभा में कम-से-कम 4 सीटें जीते, तो उसे राष्ट्रीय दल की मान्यता दी जाती है। इससे वह पूरे देश में अपने चुनाव चिह्न का उपयोग कर सकता है।
(i) निर्वाचन आयोग मान्यता प्रदान करता है।
(ii) 6% मत प्राप्त करना आवश्यक है।
(iii) लोकसभा में कम-से-कम 4 सीटें जीतनी होती हैं।
(iv) पूरे देश में मान्यता प्राप्त होती है।
(v) स्थायी चुनाव चिह्न मिलता है।
23. भारत के मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दलों के नाम लिखिए।
उत्तर ⇒ निर्वाचन आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दल वे दल हैं जो निर्धारित शर्तों को पूरा करते हैं तथा राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करते हैं। वर्तमान में भारत में कई राष्ट्रीय दल हैं, जो विभिन्न विचारधाराओं एवं नीतियों के आधार पर लोकतांत्रिक राजनीति में भाग लेते हैं।
(i) भारतीय जनता पार्टी (BJP)
(ii) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)
(iii) आम आदमी पार्टी (AAP)
(iv) बहुजन समाज पार्टी (BSP)
(v) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)]
(vi) नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP)
24. भारतीय जनता पार्टी (BJP) का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर ⇒ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की स्थापना 1980 में हुई। यह भारतीय जनसंघ का पुनर्गठित रूप है। पार्टी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, समग्र मानवतावाद एवं अंत्योदय के सिद्धांतों से प्रेरित है। इसका उद्देश्य एक सशक्त एवं आधुनिक भारत का निर्माण करना है। यह भारत की प्रमुख राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियों में से एक है।
(i) स्थापना – 1980।
(ii) भारतीय जनसंघ का पुनर्गठित रूप है।
(iii) सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की समर्थक है।
(iv) आधुनिक एवं सशक्त भारत का लक्ष्य रखती है।
(v) प्रमुख राष्ट्रीय दल है।
25. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर ⇒ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की स्थापना 1885 में हुई। यह भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के सबसे पुराने राजनीतिक दलों में से एक है। स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही तथा स्वतंत्रता के बाद कई वर्षों तक इसने देश का शासन किया। कांग्रेस लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता एवं समावेशी विकास की समर्थक मानी जाती है।
(i) स्थापना – 1885।
(ii) भारत का सबसे पुराना प्रमुख राजनीतिक दल है।
(iii) स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका रही।
(iv) धर्मनिरपेक्षता एवं समावेशी विकास का समर्थन करती है।
(v) राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
26. बहुजन समाज पार्टी (BSP) का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर ⇒ बहुजन समाज पार्टी (BSP) की स्थापना 1984 में कांशीराम के नेतृत्व में हुई। यह पार्टी दलितों, आदिवासियों, पिछड़ी जातियों एवं धार्मिक अल्पसंख्यकों सहित बहुजन समाज के अधिकारों एवं कल्याण के लिए कार्य करती है। पार्टी महात्मा फुले, पेरियार एवं डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों से प्रेरित है। इसका मुख्य आधार उत्तर प्रदेश में रहा है, लेकिन अन्य राज्यों में भी इसकी उपस्थिति है।
(i) स्थापना – 1984।
(ii) संस्थापक – कांशीराम।
(iii) बहुजन समाज के अधिकारों का समर्थन करती है।
(iv) डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों से प्रेरित है।
(v) प्रमुख राष्ट्रीय राजनीतिक दल है।
27. आम आदमी पार्टी (AAP) का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर ⇒ आम आदमी पार्टी (AAP) का गठन 26 नवम्बर 2012 को भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के बाद हुआ। यह पार्टी पारदर्शिता, सुशासन, जवाबदेही एवं भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन की समर्थक है। गठन के एक वर्ष के भीतर ही इसने दिल्ली में सरकार बनाई तथा बाद में पंजाब में भी सरकार का गठन किया। यह वर्तमान में भारत की प्रमुख राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियों में शामिल है।
(i) स्थापना – 26 नवम्बर 2012।
(ii) भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से उभरी।
(iii) सुशासन एवं पारदर्शिता पर बल देती है।
(iv) दिल्ली एवं पंजाब में सरकार बना चुकी है।
(v) राष्ट्रीय राजनीतिक दल है।
28. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर ⇒ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] की स्थापना 1964 में हुई। यह पार्टी मार्क्सवाद-लेनिनवाद की विचारधारा में विश्वास करती है तथा समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता एवं लोकतंत्र की समर्थक है। पार्टी मजदूरों, किसानों एवं गरीब वर्गों के अधिकारों के लिए कार्य करती है। इसका प्रमुख आधार केरल, पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा में रहा है।
(i) स्थापना – 1964।
(ii) मार्क्सवाद-लेनिनवाद की समर्थक है।
(iii) समाजवाद एवं धर्मनिरपेक्षता का समर्थन करती है।
(iv) मजदूरों एवं किसानों के हितों के लिए कार्य करती है।
(v) केरल, पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा में प्रभावशाली रही है।
29. नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर ⇒ नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) का गठन 2013 में पी. ए. संगमा के नेतृत्व में हुआ। यह पूर्वोत्तर भारत की पहली पार्टी है जिसे राष्ट्रीय दल का दर्जा प्राप्त हुआ। पार्टी शिक्षा, रोजगार, क्षेत्रीय विकास एवं समाज के सभी वर्गों के सशक्तिकरण पर विशेष बल देती है। इसका मुख्य प्रभाव पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में देखा जाता है।
(i) स्थापना – 2013।
(ii) संस्थापक – पी. ए. संगमा।
(iii) पूर्वोत्तर भारत की पहली राष्ट्रीय पार्टी है।
(iv) शिक्षा एवं क्षेत्रीय विकास पर बल देती है।
(v) प्रमुख राष्ट्रीय राजनीतिक दल है।
30. दल-बदल (Defection) क्या है?
उत्तर ⇒ जब कोई निर्वाचित जनप्रतिनिधि जिस राजनीतिक दल के टिकट पर चुनाव जीतकर आया हो, उसे छोड़कर किसी अन्य दल में शामिल हो जाता है, तो इसे दल-बदल (Defection) कहा जाता है। दल-बदल से राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न हो सकती है, इसलिए इसे रोकने के लिए भारत में दल-बदल विरोधी कानून बनाया गया है। इस कानून के अनुसार दल बदलने पर प्रतिनिधि की सदस्यता समाप्त की जा सकती है।
(i) निर्वाचित प्रतिनिधि दल बदलता है।
(ii) राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न हो सकती है।
(iii) इसे रोकने के लिए कानून बनाया गया है।
(iv) सदस्यता समाप्त हो सकती है।
(v) लोकतंत्र की स्थिरता बनाए रखने का प्रयास किया जाता है।
31. शपथपत्र (Affidavit) क्या है?
उत्तर ⇒ शपथपत्र एक कानूनी दस्तावेज़ होता है जिसमें कोई व्यक्ति अपने बारे में आवश्यक जानकारी लिखित रूप में देता है तथा यह घोषणा करता है कि दी गई सभी सूचनाएँ सत्य हैं। चुनाव के समय प्रत्येक उम्मीदवार को अपनी संपत्ति, आय, शैक्षणिक योग्यता एवं आपराधिक मामलों की जानकारी शपथपत्र के माध्यम से निर्वाचन आयोग को देनी होती है। इससे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ती है तथा मतदाताओं को सही जानकारी प्राप्त होती है।
(i) यह एक कानूनी दस्तावेज़ होता है।
(ii) उम्मीदवार अपनी जानकारी इसमें देता है।
(iii) जानकारी सत्य होने की शपथ ली जाती है।
(iv) चुनाव में पारदर्शिता बढ़ती है।
(v) मतदाताओं को सही जानकारी मिलती है।
32. राजनीतिक दलों के सामने प्रमुख चुनौतियाँ लिखिए।
उत्तर ⇒ लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की महत्वपूर्ण भूमिका होने के बावजूद उनके सामने अनेक चुनौतियाँ हैं। दलों में आंतरिक लोकतंत्र का अभाव, वंशवाद, राजनीति में धन एवं अपराधियों का बढ़ता प्रभाव तथा मतदाताओं के सामने स्पष्ट वैचारिक विकल्प का अभाव प्रमुख समस्याएँ हैं। इन चुनौतियों के कारण लोकतंत्र की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
(i) आंतरिक लोकतंत्र का अभाव।
(ii) वंशवाद की समस्या।
(iii) धन एवं अपराधियों का बढ़ता प्रभाव।
(iv) स्पष्ट वैचारिक विकल्प का अभाव।
(v) लोकतंत्र की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
33. राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र का अभाव क्या है?
उत्तर ⇒ आंतरिक लोकतंत्र का अभाव तब होता है जब किसी राजनीतिक दल में निर्णय लेने की शक्ति कुछ चुनिंदा नेताओं तक सीमित रह जाती है। ऐसे दलों में नियमित संगठनात्मक चुनाव नहीं होते तथा सामान्य कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण निर्णयों में भाग लेने का अवसर नहीं मिलता। इससे लोकतांत्रिक भावना कमजोर पड़ती है और संगठन की पारदर्शिता कम हो जाती है।
(i) निर्णय कुछ नेताओं तक सीमित रहते हैं।
(ii) नियमित संगठनात्मक चुनाव नहीं होते।
(iii) कार्यकर्ताओं की भागीदारी कम होती है।
(iv) पारदर्शिता प्रभावित होती है।
(v) लोकतांत्रिक भावना कमजोर पड़ती है।
34. राजनीतिक दलों में वंशवाद (Dynastic Succession) क्या है?
उत्तर ⇒ वंशवाद वह स्थिति है जिसमें किसी राजनीतिक दल का नेतृत्व एक ही परिवार के सदस्यों तक सीमित हो जाता है। इससे योग्य एवं मेहनती कार्यकर्ताओं को नेतृत्व का अवसर कम मिलता है तथा लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है। वंशवाद को राजनीतिक दलों की प्रमुख चुनौतियों में से एक माना जाता है।
(i) नेतृत्व एक ही परिवार तक सीमित रहता है।
(ii) योग्य कार्यकर्ताओं के अवसर कम हो जाते हैं।
(iii) लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है।
(iv) संगठन में समान अवसर नहीं मिलते।
(v) यह राजनीतिक दलों की प्रमुख चुनौती है।
35. राजनीति में धनबल एवं अपराधियों की भूमिका क्यों चिंता का विषय है?
उत्तर ⇒ चुनावों में अत्यधिक धन का उपयोग तथा आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों की भागीदारी लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती है। धनबल के कारण चुनाव निष्पक्ष रूप से प्रभावित हो सकते हैं तथा योग्य उम्मीदवार पीछे रह सकते हैं। इसी प्रकार आपराधिक प्रवृत्ति वाले व्यक्तियों के राजनीति में आने से लोकतांत्रिक मूल्यों एवं सुशासन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
(i) चुनावों में धन का अत्यधिक उपयोग होता है।
(ii) निष्पक्ष चुनाव प्रभावित हो सकते हैं।
(iii) आपराधिक छवि वाले उम्मीदवार आगे आ सकते हैं।
(iv) लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुँचता है।
(v) सुशासन प्रभावित होता है.
36. राजनीतिक दलों में सुधार के लिए कौन-कौन से उपाय किए गए हैं?
उत्तर ⇒ राजनीतिक दलों को अधिक लोकतांत्रिक, पारदर्शी एवं उत्तरदायी बनाने के लिए अनेक सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। दल-बदल विरोधी कानून बनाया गया है, उम्मीदवारों के लिए अपनी संपत्ति एवं आपराधिक मामलों की जानकारी शपथपत्र के माध्यम से देना अनिवार्य किया गया है तथा निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों के संगठनात्मक चुनाव एवं आयकर विवरण प्रस्तुत करने जैसे प्रावधान लागू किए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य लोकतंत्र को अधिक मजबूत बनाना है।
(i) दल-बदल विरोधी कानून लागू किया गया।
(ii) उम्मीदवारों के लिए शपथपत्र अनिवार्य किया गया।
(iii) संगठनात्मक चुनावों पर बल दिया गया।
(iv) राजनीतिक दलों में पारदर्शिता बढ़ाई गई।
(v) लोकतंत्र को अधिक उत्तरदायी बनाया गया।
37. दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) क्या है?
उत्तर ⇒ दल-बदल विरोधी कानून राजनीतिक अस्थिरता को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया है। इस कानून के अनुसार यदि कोई निर्वाचित प्रतिनिधि अपने राजनीतिक दल को छोड़कर किसी अन्य दल में शामिल हो जाता है या दल के निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है। यह कानून लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
(i) राजनीतिक अस्थिरता रोकने के लिए बनाया गया।
(ii) दल बदलने पर सदस्यता समाप्त हो सकती है।
(iii) लोकतंत्र की स्थिरता बनाए रखता है।
(iv) निर्वाचित प्रतिनिधियों की जवाबदेही बढ़ाता है।
(v) संविधान संशोधन के माध्यम से लागू किया गया।
38. राजनीतिक दलों में सुधार के लिए नागरिकों की क्या भूमिका है?
उत्तर ⇒ राजनीतिक दलों में सुधार केवल कानूनों से संभव नहीं है, बल्कि जागरूक नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। नागरिकों को योग्य एवं ईमानदार उम्मीदवारों का समर्थन करना चाहिए, राजनीतिक दलों से पारदर्शिता एवं जवाबदेही की माँग करनी चाहिए तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत बनाने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। मीडिया एवं दबाव समूह भी सुधार की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
(i) योग्य उम्मीदवारों का समर्थन करना चाहिए।
(ii) पारदर्शिता की माँग करनी चाहिए।
(iii) लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देना चाहिए।
(iv) मीडिया एवं नागरिक समाज की भूमिका महत्वपूर्ण है।
(v) सक्रिय जनभागीदारी आवश्यक है।
39. ‘राजनीतिक दल’ अध्याय से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर ⇒ यह अध्याय हमें बताता है कि राजनीतिक दल लोकतंत्र के आधार स्तंभ हैं। वे जनता एवं सरकार के बीच सेतु का कार्य करते हैं, सरकार का गठन करते हैं, नीतियाँ बनाते हैं तथा विपक्ष के रूप में सरकार को उत्तरदायी बनाए रखते हैं। साथ ही यह अध्याय हमें यह भी सिखाता है कि राजनीतिक दलों में पारदर्शिता, आंतरिक लोकतंत्र एवं जनभागीदारी लोकतंत्र की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
(i) राजनीतिक दल लोकतंत्र के आधार हैं।
(ii) जनता एवं सरकार के बीच सेतु का कार्य करते हैं।
(iii) सरकार को उत्तरदायी बनाते हैं।
(iv) लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करते हैं।
(v) राजनीतिक सुधार आवश्यक हैं।
40. ‘राजनीतिक दल’ अध्याय का निष्कर्ष लिखिए।
उत्तर ⇒ राजनीतिक दल आधुनिक लोकतंत्र की अनिवार्य संस्था हैं। इनके बिना लोकतांत्रिक शासन की कल्पना नहीं की जा सकती। राजनीतिक दल चुनावों में भाग लेते हैं, सरकार का गठन करते हैं, विपक्ष की भूमिका निभाते हैं तथा जनता के हितों को सरकार तक पहुँचाते हैं। यद्यपि उनके सामने आंतरिक लोकतंत्र की कमी, वंशवाद, धनबल एवं अपराधीकरण जैसी चुनौतियाँ हैं, फिर भी निरंतर सुधार एवं सक्रिय जनभागीदारी के माध्यम से उन्हें अधिक प्रभावी एवं लोकतांत्रिक बनाया जा सकता है। यही एक सशक्त एवं सफल लोकतंत्र की आधारशिला है।