Class 10 Civics: सत्ता की साझेदारी
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Chapter Overview
| Class | 10 |
| Subject | Civics |
| Chapter Name | सत्ता की साझेदारी |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
सत्ता की साझेदारी Revision Notes
1. सत्ता की साझेदारी (Power Sharing) क्या है?
उत्तर ⇒ सत्ता की साझेदारी वह लोकतांत्रिक व्यवस्था है जिसमें शासन की शक्ति विभिन्न सामाजिक समूहों, संस्थाओं एवं सरकार के अलग-अलग स्तरों के बीच बाँटी जाती है। इसका उद्देश्य किसी एक व्यक्ति या समुदाय का प्रभुत्व रोकना तथा सभी वर्गों को शासन में भागीदारी देना है। सत्ता की साझेदारी से लोकतंत्र मजबूत होता है, सामाजिक संघर्ष कम होते हैं तथा राष्ट्रीय एकता एवं राजनीतिक स्थिरता बनी रहती है।
(i) सत्ता का बँटवारा विभिन्न समूहों में होता है।
(ii) सभी समुदायों को भागीदारी मिलती है।
(iii) लोकतंत्र मजबूत होता है।
(iv) सामाजिक संघर्ष कम होते हैं।
(v) राष्ट्रीय एकता एवं राजनीतिक स्थिरता बनी रहती है।
2. सत्ता की साझेदारी का क्या महत्व है?
उत्तर ⇒ सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है। इससे समाज के सभी वर्गों को शासन में उचित प्रतिनिधित्व मिलता है तथा किसी एक समूह का वर्चस्व स्थापित नहीं हो पाता। यह व्यवस्था विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास, सहयोग एवं समानता की भावना विकसित करती है। सत्ता की साझेदारी से हिंसा एवं संघर्ष की संभावना कम होती है और लोकतांत्रिक शासन अधिक प्रभावी एवं उत्तरदायी बनता है।
(i) लोकतंत्र को मजबूत बनाती है।
(ii) सामाजिक संघर्ष कम करती है।
(iii) सभी समुदायों को प्रतिनिधित्व देती है।
(iv) सत्ता के दुरुपयोग को रोकती है।
(v) राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देती है।
3. सत्ता की साझेदारी की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर ⇒ सत्ता की साझेदारी में शासन की शक्ति विभिन्न संस्थाओं, सरकार के स्तरों एवं सामाजिक समूहों के बीच बाँटी जाती है। इससे किसी एक व्यक्ति या समुदाय का प्रभुत्व नहीं बनता। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी वर्गों को निर्णय प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिलता है। यह व्यवस्था सहयोग, सहिष्णुता एवं समानता की भावना को बढ़ावा देती है तथा लोकतंत्र को अधिक प्रभावी बनाती है।
(i) सत्ता का विभाजन विभिन्न स्तरों पर होता है।
(ii) किसी एक समूह का प्रभुत्व नहीं रहता।
(iii) सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व मिलता है।
(iv) लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होती है।
(v) सामाजिक सौहार्द एवं सहयोग बढ़ता है।
4. बेल्जियम की भाषायी संरचना का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ बेल्जियम यूरोप का एक छोटा देश है, जहाँ मुख्य रूप से तीन भाषायी समुदाय रहते हैं। लगभग 59% लोग डच (फ्लेमिश) भाषा बोलते हैं, 40% लोग फ्रेंच भाषा बोलते हैं तथा लगभग 1% लोग जर्मन भाषा बोलते हैं। राजधानी ब्रसेल्स में लगभग 80% लोग फ्रेंच तथा 20% लोग डच भाषा बोलते हैं। भाषायी विविधता के बावजूद बेल्जियम ने सत्ता की साझेदारी अपनाकर सामाजिक शांति एवं राजनीतिक स्थिरता बनाए रखी।
(i) 59% लोग डच भाषा बोलते हैं।
(ii) 40% लोग फ्रेंच भाषा बोलते हैं।
(iii) 1% लोग जर्मन भाषा बोलते हैं।
(iv) ब्रसेल्स में फ्रेंच भाषियों की संख्या अधिक है।
(v) भाषायी विविधता के बावजूद देश एकजुट है।
5. बेल्जियम में भाषायी संघर्ष के प्रमुख कारण लिखिए।
उत्तर ⇒ बेल्जियम में डच एवं फ्रेंच भाषी समुदायों के बीच आर्थिक एवं राजनीतिक असमानता के कारण तनाव उत्पन्न हुआ। फ्रेंच भाषी समुदाय संख्या में कम होने के बावजूद आर्थिक एवं राजनीतिक रूप से अधिक शक्तिशाली था। दूसरी ओर डच भाषी समुदाय अपनी संख्या अधिक होने के बावजूद स्वयं को उपेक्षित महसूस करता था। 1950 एवं 1960 के दशक में यह तनाव बढ़ गया, विशेषकर राजधानी ब्रसेल्स में। बाद में नेताओं ने सत्ता की साझेदारी अपनाकर इस समस्या का शांतिपूर्ण समाधान किया।
(i) आर्थिक असमानता थी।
(ii) राजनीतिक असंतुलन था।
(iii) फ्रेंच भाषियों का प्रभाव अधिक था।
(iv) डच भाषियों में असंतोष बढ़ा।
(v) सत्ता की साझेदारी से समस्या का समाधान हुआ।
6. श्रीलंका की जातीय संरचना का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ श्रीलंका भारत के दक्षिण में स्थित एक द्वीपीय देश है। यहाँ विभिन्न भाषायी एवं धार्मिक समुदाय निवास करते हैं। लगभग 74% जनसंख्या सिंहली समुदाय की है, जो मुख्यतः बौद्ध धर्म को मानती है। लगभग 18% लोग तमिल समुदाय से संबंधित हैं, जिनमें श्रीलंकाई तमिल एवं भारतीय तमिल दोनों शामिल हैं। इसके अतिरिक्त लगभग 7% लोग ईसाई समुदाय के हैं। इस विविधता के बावजूद सत्ता की साझेदारी के अभाव के कारण श्रीलंका में लंबे समय तक जातीय संघर्ष चलता रहा।
(i) 74% लोग सिंहली समुदाय के हैं।
(ii) 18% लोग तमिल समुदाय के हैं।
(iii) 7% लोग ईसाई समुदाय से हैं।
(iv) सिंहली मुख्यतः बौद्ध धर्म को मानते हैं।
(v) देश में भाषायी एवं धार्मिक विविधता है।
7. श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद (Majoritarianism) क्या था?
उत्तर ⇒ श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद वह नीति थी जिसके अंतर्गत सिंहली बहुसंख्यक समुदाय के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। सरकार ने सिंहली भाषा एवं बौद्ध धर्म को विशेष महत्व दिया तथा शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में भी सिंहली समुदाय को प्राथमिकता प्रदान की। इन नीतियों के कारण तमिल समुदाय स्वयं को उपेक्षित एवं भेदभाव का शिकार महसूस करने लगा, जिससे देश में जातीय तनाव बढ़ गया।
(i) सिंहली समुदाय को विशेष महत्व दिया गया।
(ii) तमिलों के साथ भेदभाव हुआ।
(iii) बहुसंख्यकों के हितों को प्राथमिकता मिली।
(iv) जातीय तनाव बढ़ा।
(v) लोकतांत्रिक संतुलन कमजोर हुआ।
8. 1956 का सिंहला ओनली एक्ट (Sinhala Only Act) क्या था?
उत्तर ⇒ 1956 में श्रीलंका की सरकार ने Sinhala Only Act पारित किया। इस कानून के अनुसार सिंहली भाषा को देश की एकमात्र राजभाषा घोषित कर दिया गया। इसके परिणामस्वरूप तमिल भाषा को सरकारी कार्यों एवं प्रशासन में उचित स्थान नहीं मिला। इस निर्णय से तमिल समुदाय में असंतोष बढ़ा तथा दोनों समुदायों के बीच मतभेद और गहरे हो गए।
(i) 1956 में लागू किया गया।
(ii) सिंहली को एकमात्र राजभाषा बनाया गया।
(iii) तमिल भाषा की उपेक्षा हुई।
(iv) तमिल समुदाय में असंतोष बढ़ा।
(v) जातीय संघर्ष तेज हुआ।
9. श्रीलंका में तमिल समुदाय की प्रमुख माँगें क्या थीं?
उत्तर ⇒ श्रीलंका में तमिल समुदाय ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अनेक लोकतांत्रिक माँगें उठाईं। वे चाहते थे कि तमिल भाषा को भी राजभाषा का दर्जा मिले, तमिल बहुल क्षेत्रों को क्षेत्रीय स्वायत्तता प्रदान की जाए तथा शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में सभी समुदायों को समान अवसर मिलें। सरकार द्वारा इन माँगों की अनदेखी किए जाने के कारण तमिल समुदाय में असंतोष लगातार बढ़ता गया।
(i) तमिल भाषा को राजभाषा बनाया जाए।
(ii) क्षेत्रीय स्वायत्तता दी जाए।
(iii) शिक्षा में समान अवसर मिलें।
(iv) सरकारी नौकरियों में समान अधिकार हों।
(v) राजनीतिक अधिकारों की रक्षा की जाए।
10. श्रीलंका में गृहयुद्ध (Civil War) क्यों हुआ?
उत्तर ⇒ श्रीलंका में सिंहली बहुसंख्यक सरकार की नीतियों के कारण तमिल समुदाय में असंतोष बढ़ता गया। सरकार द्वारा तमिलों की भाषा, संस्कृति एवं राजनीतिक अधिकारों की उपेक्षा किए जाने से कई तमिल संगठनों का गठन हुआ। 1980 के दशक में कुछ उग्र संगठनों ने अलग ‘तमिल ईलम’ राष्ट्र की माँग शुरू कर दी। धीरे-धीरे यह संघर्ष गृहयुद्ध में बदल गया, जो कई वर्षों तक चला और 2009 में समाप्त हुआ।
(i) तमिलों के साथ भेदभाव हुआ।
(ii) अलग तमिल ईलम की माँग उठी।
(iii) उग्र संगठनों का गठन हुआ।
(iv) लंबे समय तक गृहयुद्ध चला।
(v) 2009 में गृहयुद्ध समाप्त हुआ।
11. श्रीलंका के गृहयुद्ध के प्रमुख परिणाम लिखिए।
उत्तर ⇒ श्रीलंका का गृहयुद्ध कई वर्षों तक चला, जिससे देश को भारी सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा। इस संघर्ष में दोनों पक्षों के हजारों लोग मारे गए तथा लाखों लोग अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर हुए। उद्योग, व्यापार, पर्यटन एवं शिक्षा पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ा। लंबे समय तक हिंसा और अस्थिरता के कारण देश का विकास प्रभावित हुआ। अंततः 2009 में गृहयुद्ध समाप्त हुआ, लेकिन तब तक श्रीलंका को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ चुकी थी।
(i) हजारों लोगों की मृत्यु हुई।
(ii) लाखों लोग शरणार्थी बने।
(iii) आर्थिक विकास प्रभावित हुआ।
(iv) सामाजिक एवं राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी।
(v) 2009 में गृहयुद्ध समाप्त हुआ।
12. बेल्जियम ने सत्ता की साझेदारी की व्यवस्था कैसे अपनाई?
उत्तर ⇒ बेल्जियम के नेताओं ने भाषायी विविधता को स्वीकार करते हुए सत्ता की साझेदारी की नीति अपनाई। 1970 से 1993 के बीच संविधान में चार बार संशोधन किए गए। केंद्रीय सरकार, क्षेत्रीय सरकार तथा सामुदायिक सरकार की व्यवस्था बनाई गई ताकि सभी भाषायी समुदायों को समान अधिकार एवं प्रतिनिधित्व मिल सके। इस व्यवस्था ने देश में शांति, सहयोग एवं राजनीतिक स्थिरता स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
(i) संविधान में चार संशोधन किए गए।
(ii) सत्ता का विकेंद्रीकरण किया गया।
(iii) सभी समुदायों को प्रतिनिधित्व मिला।
(iv) राजनीतिक संतुलन स्थापित हुआ।
(v) देश में शांति एवं स्थिरता बनी रही।
13. बेल्जियम की केंद्रीय सरकार की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर ⇒ बेल्जियम में केंद्रीय मंत्रिपरिषद में डच एवं फ्रेंच भाषी मंत्रियों की संख्या बराबर रखी गई है। कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय दोनों समुदायों की सहमति के बिना नहीं लिया जा सकता। इससे किसी एक समुदाय का प्रभुत्व नहीं बनता तथा दोनों भाषायी समूहों के बीच विश्वास एवं सहयोग की भावना बनी रहती है। यह सत्ता की साझेदारी का सफल उदाहरण माना जाता है।
(i) डच एवं फ्रेंच मंत्रियों की संख्या समान होती है।
(ii) दोनों समुदायों की सहमति आवश्यक होती है।
(iii) किसी एक समुदाय का प्रभुत्व नहीं होता।
(iv) राजनीतिक संतुलन बना रहता है।
(v) आपसी विश्वास एवं सहयोग बढ़ता है।
14. बेल्जियम में सामुदायिक सरकार (Community Government) क्या है?
उत्तर ⇒ बेल्जियम में तीसरे स्तर की सरकार को सामुदायिक सरकार कहा जाता है। इसका चुनाव भाषा के आधार पर किया जाता है। डच, फ्रेंच एवं जर्मन भाषायी समुदाय अपने-अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं। यह सरकार शिक्षा, भाषा एवं संस्कृति से संबंधित विषयों पर निर्णय लेती है। इससे प्रत्येक समुदाय अपनी भाषा एवं सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रख सकता है।
(i) भाषा के आधार पर गठित होती है।
(ii) शिक्षा से जुड़े विषयों पर निर्णय लेती है।
(iii) संस्कृति की रक्षा करती है।
(iv) भाषा संबंधी मामलों का संचालन करती है।
(v) सभी समुदायों को समान अधिकार देती है।
15. बेल्जियम मॉडल को सत्ता की साझेदारी का सफल उदाहरण क्यों माना जाता है?
उत्तर ⇒ बेल्जियम ने विभिन्न भाषायी समुदायों को सत्ता में समान भागीदारी देकर लोकतांत्रिक संतुलन स्थापित किया। केंद्र, क्षेत्रीय एवं सामुदायिक सरकारों के बीच शक्तियों का उचित बँटवारा किया गया। इससे भाषायी संघर्ष समाप्त हुए तथा सभी समुदायों में विश्वास बढ़ा। इसी कारण बेल्जियम में शांति एवं स्थिरता बनी रही और ब्रसेल्स को यूरोपीय संघ (European Union) का मुख्यालय चुना गया।
(i) सभी समुदायों को समान प्रतिनिधित्व मिला।
(ii) सत्ता का संतुलित बँटवारा किया गया।
(iii) भाषायी संघर्ष कम हुए।
(iv) देश में शांति एवं स्थिरता बनी रही।
(v) ब्रसेल्स यूरोपीय संघ का मुख्यालय बना।
16. सत्ता की साझेदारी क्यों आवश्यक है?
उत्तर ⇒ सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की सफलता एवं देश की एकता के लिए आवश्यक है। जब विभिन्न सामाजिक, भाषायी एवं धार्मिक समूहों को शासन में भागीदारी मिलती है, तो वे स्वयं को राष्ट्र का समान भागीदार महसूस करते हैं। इससे सामाजिक संघर्ष कम होते हैं तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था अधिक स्थिर एवं प्रभावी बनती है। सत्ता की साझेदारी किसी भी समुदाय के प्रभुत्व को रोकती है और सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती है।
(i) सामाजिक संघर्ष कम होते हैं।
(ii) लोकतंत्र मजबूत होता है।
(iii) सभी समुदायों को समान अवसर मिलते हैं।
(iv) राष्ट्रीय एकता बनी रहती है।
(v) सत्ता के दुरुपयोग पर रोक लगती है।
17. सत्ता की साझेदारी के पक्ष में युक्तिपरक (Prudential) तर्क लिखिए।
उत्तर ⇒ युक्तिपरक तर्क सत्ता की साझेदारी के व्यावहारिक लाभों पर आधारित है। इसके अनुसार विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच सत्ता का बँटवारा करने से संघर्ष एवं हिंसा की संभावना कम हो जाती है। जब सभी समुदायों को शासन में भागीदारी मिलती है, तो राजनीतिक स्थिरता बनी रहती है तथा राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है। इसलिए सत्ता की साझेदारी देश के हित में एक समझदारीपूर्ण व्यवस्था मानी जाती है।
(i) सामाजिक संघर्ष कम होते हैं।
(ii) राजनीतिक स्थिरता बनी रहती है।
(iii) राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है।
(iv) सभी समुदायों में विश्वास बढ़ता है।
(v) लोकतांत्रिक व्यवस्था सुरक्षित रहती है।
18. सत्ता की साझेदारी के पक्ष में नैतिक (Moral) तर्क लिखिए।
उत्तर ⇒ नैतिक तर्क लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर आधारित है। इसके अनुसार लोकतंत्र का अर्थ केवल बहुमत का शासन नहीं, बल्कि सभी नागरिकों की शासन में भागीदारी है। प्रत्येक सामाजिक समूह को समान सम्मान एवं प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इसलिए सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की आत्मा मानी जाती है तथा यह समानता, न्याय एवं नागरिक अधिकारों की रक्षा करती है।
(i) लोकतंत्र की आत्मा है।
(ii) सभी नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करती है।
(iii) समानता एवं न्याय को बढ़ावा देती है।
(iv) सभी समूहों को प्रतिनिधित्व मिलता है।
(v) लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करती है।
19. युक्तिपरक एवं नैतिक तर्कों में अंतर लिखिए।
उत्तर ⇒ सत्ता की साझेदारी के पक्ष में दो प्रकार के तर्क दिए जाते हैं। युक्तिपरक तर्क सत्ता के बँटवारे से मिलने वाले व्यावहारिक लाभों, जैसे राजनीतिक स्थिरता एवं सामाजिक शांति पर बल देता है। जबकि नैतिक तर्क लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर आधारित है और यह मानता है कि प्रत्येक नागरिक एवं सामाजिक समूह को शासन में भाग लेने का अधिकार होना चाहिए। दोनों तर्क सत्ता की साझेदारी की आवश्यकता को सिद्ध करते हैं।
युक्तिपरक तर्क
(i) लाभ एवं परिणामों पर आधारित।
(ii) संघर्ष कम करने पर बल देता है।
(iii) राजनीतिक स्थिरता का समर्थन करता है।
नैतिक तर्क
(i) लोकतंत्र के सिद्धांतों पर आधारित।
(ii) समान भागीदारी पर बल देता है।
(iii) नागरिक अधिकारों की रक्षा करता है।
20. सत्ता की साझेदारी के प्रमुख रूप कितने हैं?
उत्तर ⇒ आधुनिक लोकतंत्रों में सत्ता की साझेदारी के चार प्रमुख रूप माने जाते हैं। इनमें सरकार के विभिन्न अंगों के बीच सत्ता का बँटवारा, सरकार के विभिन्न स्तरों के बीच शक्तियों का वितरण, सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व तथा राजनीतिक दलों एवं दबाव समूहों की भागीदारी शामिल है। इन सभी व्यवस्थाओं का उद्देश्य लोकतंत्र को मजबूत बनाना तथा सभी वर्गों को शासन में भागीदारी देना है।
सत्ता की साझेदारी के प्रमुख रूप निम्नलिखित हैं—
(i) क्षैतिज वितरण।
(ii) ऊर्ध्वाधर वितरण।
(iii) सामाजिक समूहों के बीच सत्ता की साझेदारी।
(iv) राजनीतिक दलों एवं दबाव समूहों के माध्यम से सत्ता की साझेदारी।
21. सत्ता की साझेदारी का पहला रूप – क्षैतिज वितरण (Horizontal Distribution of Power) क्या है?
उत्तर ⇒ जब सरकार के विभिन्न अंगों—विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका—के बीच सत्ता का बँटवारा किया जाता है, तो उसे क्षैतिज वितरण कहते हैं। ये सभी अंग एक ही स्तर पर कार्य करते हैं तथा एक-दूसरे पर नियंत्रण एवं संतुलन बनाए रखते हैं। इससे कोई भी अंग अपनी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं कर सकता और लोकतंत्र मजबूत होता है। भारत में यह व्यवस्था संविधान द्वारा सुनिश्चित की गई है।
(i) सत्ता सरकार के विभिन्न अंगों में बाँटी जाती है।
(ii) विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका शामिल हैं।
(iii) सभी अंग एक-दूसरे पर नियंत्रण रखते हैं।
(iv) शक्ति के दुरुपयोग पर रोक लगती है।
(v) लोकतंत्र मजबूत होता है।
22. सत्ता की साझेदारी का दूसरा रूप – ऊर्ध्वाधर वितरण (Vertical Distribution of Power) क्या है?
उत्तर ⇒ जब सत्ता का बँटवारा सरकार के विभिन्न स्तरों—केंद्र सरकार, राज्य सरकार एवं स्थानीय सरकार—के बीच किया जाता है, तो उसे ऊर्ध्वाधर वितरण कहते हैं। संविधान प्रत्येक स्तर की सरकार के अधिकार एवं जिम्मेदारियाँ निर्धारित करता है। इससे स्थानीय समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर किया जा सकता है तथा शासन अधिक प्रभावी एवं उत्तरदायी बनता है।
(i) केंद्र, राज्य एवं स्थानीय सरकारों में सत्ता बाँटी जाती है।
(ii) संविधान अधिकारों का निर्धारण करता है।
(iii) स्थानीय समस्याओं का समाधान आसान होता है।
(iv) शासन अधिक प्रभावी बनता है।
(v) लोकतंत्र में लोगों की भागीदारी बढ़ती है।
23. सत्ता की साझेदारी का तीसरा रूप – सामाजिक समूहों के बीच साझेदारी क्या है?
उत्तर ⇒ लोकतंत्र में सत्ता का बँटवारा विभिन्न सामाजिक, भाषायी, धार्मिक एवं जातीय समूहों के बीच भी किया जाता है। इसका उद्देश्य सभी समुदायों को शासन में उचित प्रतिनिधित्व देना तथा किसी भी समूह को उपेक्षित महसूस न होने देना है। भारत में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं महिलाओं के लिए आरक्षण तथा बेल्जियम में सामुदायिक सरकार इसकी प्रमुख उदाहरण हैं।
(i) सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व मिलता है।
(ii) अल्पसंख्यकों के अधिकार सुरक्षित रहते हैं।
(iii) समानता की भावना विकसित होती है।
(iv) सामाजिक संघर्ष कम होते हैं।
(v) लोकतंत्र अधिक समावेशी बनता है।
24. सत्ता की साझेदारी का चौथा रूप – राजनीतिक दलों एवं दबाव समूहों के माध्यम से साझेदारी क्या है?
उत्तर ⇒ लोकतंत्र में विभिन्न राजनीतिक दल चुनावों के माध्यम से सत्ता प्राप्त करने के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। समय-समय पर सत्ता अलग-अलग दलों के पास जाती रहती है। इसके अतिरिक्त किसान संगठन, मजदूर संघ, व्यापारी संगठन एवं अन्य दबाव समूह भी सरकार की नीतियों को प्रभावित करते हैं। इस प्रकार राजनीतिक दलों एवं दबाव समूहों के माध्यम से भी सत्ता की साझेदारी सुनिश्चित होती है।
(i) राजनीतिक दल सत्ता में भागीदारी करते हैं।
(ii) गठबंधन सरकारें बनती हैं।
(iii) दबाव समूह नीतियों को प्रभावित करते हैं।
(iv) विभिन्न वर्गों के हितों का प्रतिनिधित्व होता है।
(v) लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होती है।
25. ‘नियंत्रण और संतुलन’ (Checks and Balances) की व्यवस्था क्या है?
उत्तर ⇒ नियंत्रण और संतुलन वह व्यवस्था है जिसमें सरकार के विभिन्न अंग एक-दूसरे की शक्तियों पर निगरानी एवं नियंत्रण रखते हैं। भारत में कार्यपालिका संसद के प्रति उत्तरदायी होती है, जबकि न्यायपालिका विधायिका एवं कार्यपालिका के कार्यों की संवैधानिक समीक्षा कर सकती है। इससे कोई भी अंग निरंकुश नहीं बन पाता और संविधान की सर्वोच्चता बनी रहती है।
(i) विभिन्न अंग एक-दूसरे पर नियंत्रण रखते हैं।
(ii) शक्ति का दुरुपयोग रुकता है।
(iii) संविधान की सर्वोच्चता बनी रहती है।
(iv) लोकतंत्र सुरक्षित रहता है।
(v) शासन अधिक उत्तरदायी बनता है.
26. बेल्जियम में विशेष कानून (Special Majority Law) की व्यवस्था क्या है?
उत्तर ⇒ बेल्जियम में कुछ महत्वपूर्ण कानून तभी बनाए जा सकते हैं जब डच एवं फ्रेंच भाषायी समुदायों के सांसदों का बहुमत उनका समर्थन करे। इस व्यवस्था को विशेष बहुमत (Special Majority) की व्यवस्था कहा जाता है। इसका उद्देश्य किसी एक समुदाय को अपने बहुमत के आधार पर निर्णय लेने से रोकना तथा सभी समुदायों के हितों की रक्षा करना है। इससे लोकतांत्रिक संतुलन एवं आपसी विश्वास बना रहता है।
(i) दोनों भाषायी समुदायों की सहमति आवश्यक होती है।
(ii) किसी एक समुदाय का प्रभुत्व नहीं बनता।
(iii) सभी के हितों की रक्षा होती है।
(iv) लोकतांत्रिक संतुलन बना रहता है।
(v) सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा मिलता है।
27. ब्रसेल्स में सत्ता की साझेदारी की विशेष व्यवस्था क्या है?
उत्तर ⇒ बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में डच एवं फ्रेंच दोनों भाषायी समुदाय रहते हैं। यहाँ दोनों समुदायों के हितों की रक्षा के लिए अलग क्षेत्रीय सरकार बनाई गई है, जिसमें दोनों समुदायों को समान प्रतिनिधित्व दिया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य किसी भी समुदाय को उपेक्षित महसूस न होने देना तथा राजधानी में शांति एवं सहयोग बनाए रखना है।
(i) ब्रसेल्स की अलग सरकार है।
(ii) दोनों समुदायों को समान प्रतिनिधित्व मिलता है।
(iii) भाषायी संतुलन बनाए रखा जाता है।
(iv) किसी एक समुदाय का प्रभुत्व नहीं होता।
(v) सामाजिक शांति बनी रहती है।
28. भारत में सत्ता की साझेदारी के उदाहरण लिखिए।
उत्तर ⇒ भारत एक लोकतांत्रिक एवं संघीय देश है, जहाँ सत्ता की साझेदारी विभिन्न स्तरों एवं सामाजिक समूहों के बीच की गई है। केंद्र, राज्य एवं स्थानीय सरकारों के बीच शक्तियों का विभाजन किया गया है। संविधान अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त गठबंधन सरकारों एवं बहुदलीय व्यवस्था के माध्यम से भी सत्ता की साझेदारी सुनिश्चित की जाती है।
(i) केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच शक्तियों का बँटवारा।
(ii) पंचायत एवं नगर निकायों को अधिकार।
(iii) अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए आरक्षण।
(iv) महिलाओं के लिए आरक्षण।
(v) बहुदलीय एवं गठबंधन सरकार की व्यवस्था।
29. बेल्जियम और श्रीलंका की सत्ता व्यवस्था में अंतर लिखिए।
उत्तर ⇒ बेल्जियम एवं श्रीलंका दोनों बहुभाषी देश हैं, लेकिन दोनों ने भाषायी विविधता से निपटने के लिए अलग-अलग नीतियाँ अपनाईं। बेल्जियम ने सत्ता की साझेदारी के माध्यम से सभी समुदायों को समान अधिकार एवं प्रतिनिधित्व दिया, जबकि श्रीलंका में बहुसंख्यकवादी नीतियाँ अपनाई गईं। परिणामस्वरूप बेल्जियम में शांति एवं स्थिरता बनी रही, जबकि श्रीलंका में लंबे समय तक गृहयुद्ध एवं जातीय संघर्ष चलता रहा।
| बेल्जियम | श्रीलंका |
|---|---|
| सत्ता की साझेदारी अपनाई | बहुसंख्यकवाद अपनाया |
| सभी समुदायों को प्रतिनिधित्व | सिंहली समुदाय को प्राथमिकता |
| राजनीतिक स्थिरता बनी रही | गृहयुद्ध हुआ |
| सामाजिक सद्भाव बना | जातीय संघर्ष बढ़ा |
| लोकतांत्रिक संतुलन कायम रहा | राष्ट्रीय एकता प्रभावित हुई |
30. सत्ता की साझेदारी अध्याय से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर ⇒ सत्ता की साझेदारी का अध्याय हमें सिखाता है कि लोकतंत्र केवल बहुमत का शासन नहीं है, बल्कि सभी नागरिकों की समान भागीदारी का नाम है। जब समाज के प्रत्येक वर्ग को सम्मान एवं प्रतिनिधित्व मिलता है, तब राष्ट्रीय एकता, शांति एवं लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा होती है। बेल्जियम एवं श्रीलंका के उदाहरण यह स्पष्ट करते हैं कि सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की सफलता एवं देश की स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है।
(i) लोकतंत्र में सभी की भागीदारी आवश्यक है।
(ii) बहुसंख्यकवाद से बचना चाहिए।
(iii) सभी समुदायों का सम्मान होना चाहिए।
(iv) राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है।
(v) सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की सफलता का आधार है।
31. सत्ता की साझेदारी का झारखंड में क्या महत्व है?
उत्तर ⇒ झारखंड एक बहुभाषी, बहुजातीय एवं जनजातीय बहुल राज्य है। यहाँ विभिन्न समुदायों, जनजातियों एवं सामाजिक वर्गों के बीच सामंजस्य बनाए रखने के लिए सत्ता की साझेदारी आवश्यक है। पंचायती राज व्यवस्था, अनुसूचित जनजातियों एवं अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण तथा स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करती है। इससे सामाजिक न्याय, लोकतंत्र एवं राज्य के संतुलित विकास को बढ़ावा मिलता है।
(i) सभी समुदायों को प्रतिनिधित्व मिलता है।
(ii) जनजातीय अधिकारों की रक्षा होती है।
(iii) स्थानीय स्वशासन मजबूत होता है।
(iv) सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिलता है।
(v) लोकतंत्र सुदृढ़ होता है।
32. सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र को कैसे मजबूत बनाती है?
उत्तर ⇒ सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र को मजबूत बनाती है क्योंकि इससे शासन में सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित होती है। जब विभिन्न सामाजिक, भाषायी एवं धार्मिक समुदायों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जाता है, तो सरकार अधिक उत्तरदायी एवं पारदर्शी बनती है। इससे जनता का लोकतंत्र पर विश्वास बढ़ता है तथा शासन अधिक प्रभावी बनता है।
(i) सभी वर्गों की भागीदारी बढ़ती है।
(ii) सरकार अधिक उत्तरदायी बनती है।
(iii) जनता का विश्वास मजबूत होता है।
(iv) लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा होती है।
(v) शासन अधिक प्रभावी बनता है।
33. संघीय व्यवस्था (Federal System) और सत्ता की साझेदारी में क्या संबंध है?
उत्तर ⇒ संघीय व्यवस्था सत्ता की साझेदारी का महत्वपूर्ण रूप है। इसमें संविधान के अनुसार केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया जाता है। प्रत्येक स्तर की सरकार अपने अधिकार क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से कार्य करती है। इससे प्रशासन अधिक प्रभावी होता है तथा विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को शासन में भागीदारी का अवसर मिलता है।
(i) केंद्र एवं राज्य के बीच शक्तियों का विभाजन होता है।
(ii) संविधान अधिकार निर्धारित करता है।
(iii) स्थानीय आवश्यकताओं पर ध्यान दिया जाता है।
(iv) लोकतंत्र मजबूत होता है।
(v) सत्ता का विकेंद्रीकरण होता है।
34. लोकतंत्र में अल्पसंख्यकों की भागीदारी क्यों आवश्यक है?
उत्तर ⇒ लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक समान अधिकार रखता है। यदि अल्पसंख्यकों को शासन में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलता, तो उनमें असंतोष एवं अलगाव की भावना उत्पन्न हो सकती है। सत्ता की साझेदारी के माध्यम से अल्पसंख्यकों को भी निर्णय प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिलता है। इससे समानता, सामाजिक न्याय एवं राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है।
(i) समान अधिकार सुनिश्चित होते हैं।
(ii) भेदभाव की संभावना कम होती है।
(iii) सामाजिक सद्भाव बढ़ता है।
(iv) राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है।
(v) लोकतंत्र अधिक समावेशी बनता है।
35. गठबंधन सरकार (Coalition Government) सत्ता की साझेदारी का उदाहरण कैसे है?
उत्तर ⇒ जब किसी एक राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तब दो या दो से अधिक दल मिलकर सरकार बनाते हैं। इसे गठबंधन सरकार कहते हैं। इसमें सभी दल मिलकर निर्णय लेते हैं तथा सत्ता की जिम्मेदारियों का बँटवारा करते हैं। इस प्रकार गठबंधन सरकार सत्ता की साझेदारी का व्यावहारिक उदाहरण है।
(i) कई दल मिलकर सरकार बनाते हैं।
(ii) सत्ता का बँटवारा होता है।
(iii) सामूहिक निर्णय लिए जाते हैं।
(iv) लोकतांत्रिक सहयोग बढ़ता है।
(v) सभी दलों को प्रतिनिधित्व मिलता है।
36. दबाव समूह (Pressure Groups) सत्ता की साझेदारी में कैसे योगदान देते हैं?
उत्तर ⇒ दबाव समूह ऐसे संगठित समूह होते हैं जो सरकार की नीतियों को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं। किसान संगठन, मजदूर संघ, व्यापारी संगठन एवं कर्मचारी संघ अपने सदस्यों के हितों की रक्षा के लिए सरकार पर दबाव डालते हैं। इनके सुझाव एवं माँगें नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस प्रकार वे अप्रत्यक्ष रूप से सत्ता की साझेदारी में भाग लेते हैं।
(i) सरकार की नीतियों को प्रभावित करते हैं।
(ii) विभिन्न वर्गों के हितों की रक्षा करते हैं।
(iii) लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ाते हैं।
(iv) जनमत का निर्माण करते हैं।
(v) नीति निर्माण में सहयोग करते हैं।
37. सत्ता की साझेदारी के प्रमुख लाभ लिखिए।
उत्तर ⇒ सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र को मजबूत बनाने के साथ-साथ सामाजिक एवं राजनीतिक स्थिरता भी प्रदान करती है। इससे विभिन्न समुदायों के बीच सहयोग एवं विश्वास बढ़ता है तथा सत्ता के केंद्रीकरण पर रोक लगती है। यह व्यवस्था सभी नागरिकों को समान अवसर एवं प्रतिनिधित्व प्रदान करती है।
(i) लोकतंत्र मजबूत होता है।
(ii) सामाजिक संघर्ष कम होते हैं।
(iii) राष्ट्रीय एकता बढ़ती है।
(iv) सत्ता के दुरुपयोग पर रोक लगती है।
(v) सभी वर्गों को समान अवसर मिलते हैं।
38. सत्ता की साझेदारी के अभाव के दुष्परिणाम लिखिए।
उत्तर ⇒ यदि किसी देश में सत्ता की साझेदारी नहीं होती, तो बहुसंख्यक समुदाय अपने हितों को दूसरों पर थोप सकता है। इससे अल्पसंख्यकों में असंतोष, भेदभाव एवं अलगाव की भावना उत्पन्न होती है। परिणामस्वरूप सामाजिक संघर्ष, हिंसा एवं राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है। श्रीलंका इसका प्रमुख उदाहरण है।
(i) सामाजिक संघर्ष बढ़ते हैं।
(ii) भेदभाव की भावना विकसित होती है।
(iii) राष्ट्रीय एकता कमजोर होती है।
(iv) राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है।
(v) हिंसा एवं गृहयुद्ध की संभावना बढ़ जाती है।
39. सत्ता की साझेदारी के प्रमुख कारण एवं उद्देश्य लिखिए।
उत्तर ⇒ सत्ता की साझेदारी का मुख्य उद्देश्य लोकतंत्र को मजबूत बनाना, सभी समुदायों को समान प्रतिनिधित्व देना तथा सामाजिक एवं राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना है। यह व्यवस्था विभिन्न वर्गों के बीच सहयोग एवं विश्वास को बढ़ाती है और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करती है।
प्रमुख उद्देश्य
(i) लोकतंत्र को मजबूत बनाना।
(ii) सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देना।
(iii) सामाजिक संघर्ष कम करना।
(iv) राष्ट्रीय एकता बनाए रखना।
(v) सत्ता के दुरुपयोग को रोकना।
40. ‘सत्ता की साझेदारी’ अध्याय का निष्कर्ष लिखिए।
उत्तर ⇒ सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र का एक मूलभूत सिद्धांत है। यह केवल सत्ता का बँटवारा नहीं, बल्कि सभी नागरिकों को समान सम्मान एवं शासन में भागीदारी देने की व्यवस्था है। बेल्जियम और श्रीलंका के उदाहरण स्पष्ट करते हैं कि जहाँ सत्ता की साझेदारी अपनाई जाती है वहाँ शांति, स्थिरता एवं लोकतांत्रिक विकास होता है, जबकि इसके अभाव में संघर्ष एवं अस्थिरता उत्पन्न होती है। इसलिए एक सफल लोकतंत्र के लिए सत्ता की साझेदारी अत्यंत आवश्यक है।