Class 10 History: भारत में राष्ट्रवाद
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Chapter Overview
| Class | 10 |
| Subject | History |
| Chapter Name | Nationalism in India भारत में राष्ट्रवाद |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
भारत में राष्ट्रवाद Revision Notes
1. भारत में राष्ट्रवाद से आप क्या समझते हैं?
उत्तर ⇒ भारत में राष्ट्रवाद वह भावना है जिसके अंतर्गत विभिन्न धर्मों, भाषाओं, जातियों एवं संस्कृतियों के लोग स्वयं को एक राष्ट्र का नागरिक मानते हैं तथा देश की स्वतंत्रता, एकता एवं अखंडता के लिए कार्य करते हैं। भारत में राष्ट्रवाद का विकास मुख्य रूप से ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध संघर्ष के दौरान हुआ। अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों, आर्थिक शोषण तथा राजनीतिक अत्याचारों ने भारतीयों में एकता की भावना उत्पन्न की। महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक, सुभाष चंद्र बोस, जवाहरलाल नेहरू तथा अन्य नेताओं ने राष्ट्रीय चेतना को मजबूत किया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान किसानों, मजदूरों, विद्यार्थियों, महिलाओं एवं व्यापारियों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
(i) राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित हुई।
(ii) अंग्रेजी शासन का विरोध बढ़ा।
(iii) स्वतंत्रता आंदोलन को बल मिला।
(iv) सभी वर्गों की भागीदारी बढ़ी।
(v) भारत एक संगठित राष्ट्र के रूप में उभरा।
2. भारत में राष्ट्रवाद के विकास के प्रमुख कारण लिखिए।
उत्तर ⇒ भारत में राष्ट्रवाद का विकास अनेक सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक कारणों से हुआ। अंग्रेजों की शोषणकारी नीतियों, आर्थिक दोहन, सामाजिक भेदभाव तथा राजनीतिक दमन ने भारतीयों को एकजुट किया। आधुनिक शिक्षा, प्रेस, रेलवे, डाक एवं तार व्यवस्था तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना ने भी राष्ट्रीय चेतना को मजबूत किया। महात्मा गांधी के नेतृत्व में चलाए गए आंदोलनों ने राष्ट्रवाद को जन-जन तक पहुँचाया।
भारत में राष्ट्रवाद के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—
(i) ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियाँ।
(ii) आर्थिक शोषण।
(iii) आधुनिक शिक्षा का प्रसार।
(iv) प्रेस एवं समाचार पत्रों का विकास।
(v) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना।
(vi) महात्मा गांधी के नेतृत्व वाले आंदोलन।
(vii) राष्ट्रीय एकता एवं स्वतंत्रता की भावना।
3. प्रथम विश्व युद्ध (1914–1918) का भारत पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर ⇒ प्रथम विश्व युद्ध का भारत की आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ा। युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार ने युद्ध का खर्च पूरा करने के लिए भारतीयों पर करों का बोझ बढ़ा दिया। आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भारी वृद्धि हुई, जिससे महँगाई बढ़ गई। गाँवों से लोगों को जबरन सेना में भर्ती किया गया। इसी अवधि में अकाल एवं फ्लू महामारी के कारण लाखों लोगों की मृत्यु हुई। इन परिस्थितियों से भारतीयों में अंग्रेजी शासन के प्रति असंतोष बढ़ा और राष्ट्रवाद की भावना मजबूत हुई। यही कारण था कि युद्ध के बाद स्वतंत्रता आंदोलन और अधिक व्यापक बन गया।
(i) करों में वृद्धि हुई।
(ii) महँगाई तेजी से बढ़ी।
(iii) जबरन सैनिक भर्ती की गई।
(iv) अकाल एवं महामारी फैली।
(v) राष्ट्रवाद की भावना मजबूत हुई।
4. रॉलेट एक्ट (1919) क्या था? यह भारतीयों के लिए अन्यायपूर्ण क्यों माना गया?
उत्तर ⇒ रॉलेट एक्ट वर्ष 1919 में ब्रिटिश सरकार द्वारा पारित किया गया एक दमनकारी कानून था। इस कानून के अनुसार किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाए तथा बिना पर्याप्त प्रमाण के दो वर्ष तक जेल में रखा जा सकता था। भारतीय नेताओं ने इसका कड़ा विरोध किया क्योंकि यह नागरिक स्वतंत्रता के विरुद्ध था। महात्मा गांधी ने इसे “काला कानून” कहा तथा इसके विरोध में देशव्यापी सत्याग्रह एवं हड़ताल का आह्वान किया। इस कानून ने भारतीयों में अंग्रेजी शासन के प्रति आक्रोश उत्पन्न किया और राष्ट्रीय आंदोलन को नई दिशा दी।
(i) 1919 में लागू किया गया।
(ii) बिना मुकदमे जेल भेजने का अधिकार था।
(iii) नागरिक स्वतंत्रता का हनन हुआ।
(iv) गांधीजी ने इसका विरोध किया।
(v) राष्ट्रव्यापी आंदोलन प्रारंभ हुआ।
5. सत्याग्रह (Satyagraha) क्या है? इसके प्रमुख सिद्धांत लिखिए।
उत्तर ⇒ सत्याग्रह महात्मा गांधी द्वारा प्रतिपादित एक अहिंसात्मक संघर्ष की पद्धति है। इसका अर्थ है “सत्य पर दृढ़ रहना”। गांधीजी का विश्वास था कि यदि उद्देश्य सत्य एवं न्यायपूर्ण हो, तो बिना हिंसा के भी अन्याय का विरोध किया जा सकता है। सत्याग्रह में नैतिक शक्ति, आत्मबल एवं अहिंसा का विशेष महत्व होता है। इसका उद्देश्य विरोधी को बलपूर्वक हराना नहीं, बल्कि उसकी अंतरात्मा को जगाकर सत्य स्वीकार करने के लिए प्रेरित करना है। सत्याग्रह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे प्रभावी हथियार बना।
सत्याग्रह के प्रमुख सिद्धांत निम्नलिखित हैं—
(i) सत्य पर विश्वास।
(ii) अहिंसा का पालन।
(iii) अन्याय का शांतिपूर्ण विरोध।
(iv) प्रतिशोध की भावना का त्याग।
(v) नैतिक शक्ति के माध्यम से संघर्ष।
6. चंपारण सत्याग्रह (1917) का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ चंपारण सत्याग्रह महात्मा गांधी का भारत में पहला सफल सत्याग्रह आंदोलन था। यह आंदोलन 1917 में बिहार के चंपारण जिले में नील की खेती करने वाले किसानों की समस्याओं को लेकर शुरू किया गया। अंग्रेज बागान मालिक किसानों को जबरन नील की खेती करने के लिए बाध्य करते थे तथा उनका आर्थिक शोषण करते थे। गांधीजी ने किसानों को संगठित किया और उनकी समस्याओं की जाँच कराई। अंततः ब्रिटिश सरकार को किसानों के पक्ष में निर्णय लेना पड़ा। इस आंदोलन से गांधीजी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली तथा भारतीयों का उन पर विश्वास बढ़ा।
(i) वर्ष 1917 में प्रारंभ हुआ।
(ii) स्थान – चंपारण (बिहार)।
(iii) नील किसानों की समस्या से संबंधित था।
(iv) गांधीजी का पहला सफल सत्याग्रह था।
(v) किसानों को राहत प्राप्त हुई।
7. खेड़ा सत्याग्रह (1918) का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ खेड़ा सत्याग्रह वर्ष 1918 में गुजरात के खेड़ा जिले में महात्मा गांधी के नेतृत्व में चलाया गया। उस वर्ष फसल खराब होने के कारण किसान लगान देने की स्थिति में नहीं थे, फिर भी ब्रिटिश सरकार उनसे पूरा कर वसूलना चाहती थी। गांधीजी ने किसानों से अपील की कि वे शांतिपूर्वक अन्यायपूर्ण कर का विरोध करें। किसानों की एकता एवं सत्याग्रह के कारण सरकार को अंततः कर वसूली में राहत देनी पड़ी। इस आंदोलन ने किसानों में आत्मविश्वास बढ़ाया तथा राष्ट्रवादी आंदोलन को मजबूत किया।
(i) वर्ष 1918 में प्रारंभ हुआ।
(ii) स्थान – खेड़ा (गुजरात)।
(iii) फसल खराब होने के कारण आंदोलन हुआ।
(iv) लगान माफी की मांग की गई।
(v) सरकार ने किसानों को राहत प्रदान की।
8. अहमदाबाद मिल मजदूर सत्याग्रह (1918) का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ अहमदाबाद मिल मजदूर सत्याग्रह वर्ष 1918 में गुजरात के अहमदाबाद में महात्मा गांधी के नेतृत्व में चलाया गया। इस आंदोलन का उद्देश्य कपड़ा मिल के मजदूरों को उचित मजदूरी दिलाना था। मिल मालिक मजदूरों का वेतन बढ़ाने के पक्ष में नहीं थे, जबकि महँगाई के कारण मजदूरों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी। गांधीजी ने मजदूरों को अहिंसात्मक हड़ताल करने की सलाह दी तथा स्वयं उपवास रखकर आंदोलन का नेतृत्व किया। अंततः मिल मालिकों ने मजदूरों की मांग स्वीकार कर ली। यह गांधीजी का तीसरा सफल सत्याग्रह माना जाता है।
(i) वर्ष 1918 में हुआ।
(ii) स्थान – अहमदाबाद (गुजरात)।
(iii) मजदूरी बढ़ाने की मांग की गई।
(iv) गांधीजी ने उपवास किया।
(v) मजदूरों की मांग स्वीकार की गई।
9. जलियाँवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919) का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन अमृतसर के जलियाँवाला बाग में हजारों लोग शांतिपूर्ण सभा के लिए एकत्र हुए थे। उसी समय जनरल रेजिनाल्ड डायर अपने सैनिकों के साथ वहाँ पहुँचा और बिना किसी चेतावनी के निहत्थी भीड़ पर गोलियाँ चलाने का आदेश दे दिया। बाग चारों ओर से घिरा हुआ था, इसलिए लोग बाहर नहीं निकल सके। इस गोलीबारी में सैकड़ों निर्दोष लोग मारे गए तथा हजारों घायल हुए। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया और भारतीयों के मन में अंग्रेजी शासन के प्रति गहरा आक्रोश उत्पन्न हुआ।
(i) घटना 13 अप्रैल 1919 को हुई।
(ii) स्थान – अमृतसर का जलियाँवाला बाग।
(iii) जनरल डायर ने गोली चलाने का आदेश दिया।
(iv) सैकड़ों लोग मारे गए।
(v) राष्ट्रीय आंदोलन को नई गति मिली।
10. जलियाँवाला बाग हत्याकांड का भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर ⇒ जलियाँवाला बाग हत्याकांड भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण मोड़ सिद्ध हुआ। इस घटना के बाद भारतीयों का अंग्रेजी शासन से विश्वास पूरी तरह समाप्त हो गया। पूरे देश में विरोध प्रदर्शन, हड़तालें एवं सभाएँ आयोजित की गईं। महात्मा गांधी ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष को और तेज करने का निर्णय लिया। अनेक राष्ट्रवादी नेताओं ने ब्रिटिश सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की। इस घटना ने लाखों भारतीयों को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ दिया तथा राष्ट्रवाद की भावना को अत्यंत मजबूत बनाया।
(i) अंग्रेजी शासन के प्रति विश्वास समाप्त हुआ।
(ii) राष्ट्रवाद की भावना बढ़ी।
(iii) विरोध प्रदर्शन तेज हुए।
(iv) स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा मिली।
(v) जनता बड़ी संख्या में आंदोलन से जुड़ी।
11. खिलाफत आंदोलन (Khilafat Movement) क्या था?
उत्तर ⇒ प्रथम विश्व युद्ध के बाद तुर्की के खलीफा की स्थिति कमजोर हो गई थी। भारत के मुस्लिम नेताओं ने खलीफा के अधिकारों की रक्षा के लिए खिलाफत आंदोलन प्रारंभ किया। मार्च 1919 में बंबई में खिलाफत समिति का गठन किया गया। मौलाना मोहम्मद अली एवं शौकत अली इसके प्रमुख नेता थे। महात्मा गांधी ने हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूत करने तथा राष्ट्रीय आंदोलन को व्यापक बनाने के उद्देश्य से इस आंदोलन का समर्थन किया। इससे भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को नया जनसमर्थन प्राप्त हुआ।
(i) प्रथम विश्व युद्ध के बाद प्रारंभ हुआ।
(ii) खलीफा के अधिकारों की रक्षा इसका उद्देश्य था।
(iii) मोहम्मद अली एवं शौकत अली प्रमुख नेता थे।
(iv) गांधीजी ने इसका समर्थन किया।
(v) हिंदू-मुस्लिम एकता को बल मिला।
12. महात्मा गांधी ने खिलाफत आंदोलन का समर्थन क्यों किया?
उत्तर ⇒ महात्मा गांधी का मानना था कि अंग्रेजी शासन के विरुद्ध सफल राष्ट्रीय आंदोलन के लिए हिंदू एवं मुस्लिम समुदायों की एकता आवश्यक है। रॉलेट सत्याग्रह के बाद वे एक अखिल भारतीय जनआंदोलन प्रारंभ करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने खिलाफत आंदोलन का समर्थन किया और इसे असहयोग आंदोलन से जोड़ दिया। इससे बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल हुआ तथा स्वतंत्रता संघर्ष को व्यापक जनसमर्थन मिला। गांधीजी का उद्देश्य राष्ट्रीय एकता स्थापित कर स्वराज प्राप्त करना था।
(i) हिंदू-मुस्लिम एकता स्थापित करना।
(ii) राष्ट्रीय आंदोलन को मजबूत बनाना।
(iii) अंग्रेजी शासन का विरोध करना।
(iv) असहयोग आंदोलन को जनसमर्थन दिलाना।
(v) स्वराज प्राप्ति के लिए जनता को संगठित करना।
13. असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement) क्या था?
उत्तर ⇒ असहयोग आंदोलन महात्मा गांधी के नेतृत्व में प्रारम्भ किया गया पहला अखिल भारतीय जन आंदोलन था। इसका उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के साथ किसी भी प्रकार का सहयोग समाप्त कर स्वराज प्राप्त करना था। गांधीजी का विश्वास था कि भारत में अंग्रेजी शासन भारतीयों के सहयोग से ही चल रहा है। यदि भारतीय अपना सहयोग वापस ले लें, तो ब्रिटिश शासन अधिक समय तक नहीं टिक सकेगा। कांग्रेस ने दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन में इस आंदोलन को स्वीकृति दी तथा जनवरी 1921 से इसे पूरे देश में प्रारम्भ किया गया। इस आंदोलन में विद्यार्थियों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं तथा व्यापारियों ने सक्रिय भाग लिया।
(i) महात्मा गांधी के नेतृत्व में प्रारम्भ हुआ।
(ii) उद्देश्य – स्वराज प्राप्त करना।
(iii) ब्रिटिश शासन का शांतिपूर्ण विरोध किया गया।
(iv) पूरे देश में जनभागीदारी हुई।
(v) राष्ट्रीय आंदोलन को नई दिशा मिली।
14. असहयोग आंदोलन के प्रमुख कार्यक्रम लिखिए।
उत्तर ⇒ असहयोग आंदोलन के अंतर्गत महात्मा गांधी ने लोगों से ब्रिटिश सरकार की संस्थाओं एवं वस्तुओं का बहिष्कार करने की अपील की। लोगों से सरकारी स्कूल, कॉलेज, अदालत, नौकरी एवं विदेशी वस्तुओं का त्याग करने को कहा गया। विदेशी कपड़ों की होली जलाई गई तथा शराब की दुकानों पर पिकेटिंग की गई। स्वदेशी वस्तुओं एवं खादी के उपयोग को बढ़ावा दिया गया। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य ब्रिटिश शासन की आर्थिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था को कमजोर करना था।
असहयोग आंदोलन के प्रमुख कार्यक्रम निम्नलिखित थे—
(i) सरकारी विद्यालयों एवं कॉलेजों का बहिष्कार।
(ii) विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार।
(iii) सरकारी नौकरियों से त्यागपत्र।
(iv) अदालतों का बहिष्कार।
(v) खादी एवं स्वदेशी वस्तुओं का प्रचार।
(vi) शराब की दुकानों पर पिकेटिंग।
(vii) सरकारी उपाधियों का त्याग।
15. शहरों में असहयोग आंदोलन का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर ⇒ असहयोग आंदोलन का प्रारम्भ शहरों से हुआ। हजारों विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूल एवं कॉलेज छोड़ दिए तथा अनेक शिक्षकों ने अपने पदों से त्यागपत्र दिया। वकीलों ने अदालतों में मुकदमे लड़ना बंद कर दिया। विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया गया तथा विदेशी कपड़ों की सार्वजनिक रूप से होली जलाई गई। शराब की दुकानों के सामने पिकेटिंग की गई। इन गतिविधियों के कारण विदेशी कपड़ों के आयात में भारी कमी आई तथा भारतीय उद्योगों और खादी को बढ़ावा मिला। कुछ समय बाद वैकल्पिक संस्थाओं की कमी एवं खादी की अधिक कीमत के कारण शहरों में आंदोलन की गति धीमी पड़ गई।
(i) विद्यार्थियों ने स्कूल-कॉलेज छोड़े।
(ii) वकीलों ने अदालतों का बहिष्कार किया।
(iii) विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार हुआ।
(iv) खादी एवं स्वदेशी वस्तुओं का प्रचार हुआ।
(v) विदेशी कपड़ों का आयात कम हुआ।
16. अवध किसान आंदोलन का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ असहयोग आंदोलन के दौरान उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में किसानों ने जमींदारों एवं तालुकदारों के अत्याचारों के विरुद्ध आंदोलन किया। इस आंदोलन का नेतृत्व बाबा रामचंद्र ने किया। किसानों की मुख्य शिकायतें अधिक लगान, बेगार तथा भूमि से बेदखली थीं। किसानों ने लगान कम करने, बेगार समाप्त करने तथा जमींदारों के सामाजिक बहिष्कार की मांग की। बाद में जवाहरलाल नेहरू ने भी किसानों की समस्याओं का अध्ययन किया और अवध किसान सभा के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
(i) नेतृत्व – बाबा रामचंद्र।
(ii) अधिक लगान का विरोध किया गया।
(iii) बेगार समाप्त करने की मांग की गई।
(iv) अवध किसान सभा का गठन हुआ।
(v) किसानों में राष्ट्रीय चेतना विकसित हुई।
17. असहयोग आंदोलन को महात्मा गांधी ने क्यों वापस ले लिया?
उत्तर ⇒ फरवरी 1922 में उत्तर प्रदेश के चौरी-चौरा में प्रदर्शनकारियों एवं पुलिस के बीच हिंसक घटना हुई। क्रोधित भीड़ ने पुलिस थाने में आग लगा दी, जिससे कई पुलिसकर्मियों की मृत्यु हो गई। महात्मा गांधी अहिंसा के कट्टर समर्थक थे। उनका मानना था कि स्वतंत्रता आंदोलन पूर्णतः अहिंसक होना चाहिए। हिंसा की इस घटना से वे अत्यंत दुखी हुए और उन्हें लगा कि जनता अभी सत्याग्रह के सिद्धांतों के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। इसलिए उन्होंने फरवरी 1922 में असहयोग आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया।
(i) चौरी-चौरा में हिंसा हुई।
(ii) पुलिस थाना जला दिया गया।
(iii) कई पुलिसकर्मियों की मृत्यु हुई।
(iv) गांधीजी अहिंसा के समर्थक थे।
(v) फरवरी 1922 में आंदोलन वापस ले लिया गया।
18. चौरी-चौरा की घटना (1922) क्या थी?
उत्तर ⇒ 5 फरवरी 1922 को उत्तर प्रदेश के चौरी-चौरा नामक स्थान पर असहयोग आंदोलन के दौरान प्रदर्शन कर रहे लोगों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चला दी, जिससे भीड़ उग्र हो गई। क्रोधित लोगों ने पुलिस थाने को आग लगा दी, जिसमें लगभग 22 पुलिसकर्मियों की मृत्यु हो गई। महात्मा गांधी अहिंसा के कट्टर समर्थक थे। उन्होंने इस घटना को आंदोलन की मूल भावना के विरुद्ध माना और असहयोग आंदोलन को तुरंत वापस लेने का निर्णय लिया। यह घटना भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई।
(i) घटना 5 फरवरी 1922 को हुई।
(ii) स्थान – चौरी-चौरा (उत्तर प्रदेश)।
(iii) पुलिस थाने में आग लगा दी गई।
(iv) 22 पुलिसकर्मियों की मृत्यु हुई।
(v) गांधीजी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया।
19. साइमन कमीशन (Simon Commission) क्या था? इसका विरोध क्यों किया गया?
उत्तर ⇒ ब्रिटिश सरकार ने 1927 में भारत के संवैधानिक सुधारों की समीक्षा के लिए साइमन कमीशन की नियुक्ति की। इस आयोग की सबसे बड़ी कमी यह थी कि इसमें एक भी भारतीय सदस्य शामिल नहीं था। इससे पूरे देश में भारी असंतोष फैल गया। कांग्रेस, मुस्लिम लीग तथा अन्य राजनीतिक दलों ने इसका बहिष्कार किया और “साइमन वापस जाओ” के नारे लगाए। इस विरोध ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की तथा स्वराज की मांग और अधिक मजबूत हुई।
(i) गठन – 1927 ई.।
(ii) कोई भारतीय सदस्य नहीं था।
(iii) पूरे देश में विरोध हुआ।
(iv) “साइमन वापस जाओ” के नारे लगे।
(v) राष्ट्रीय आंदोलन को नई गति मिली।
20. लाहौर अधिवेशन (1929) का महत्व लिखिए।
उत्तर ⇒ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन दिसंबर 1929 में आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की। इस अधिवेशन में पहली बार पूर्ण स्वराज (Complete Independence) को कांग्रेस का लक्ष्य घोषित किया गया। यह निर्णय लिया गया कि 26 जनवरी 1930 को पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा और भारतीय जनता पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त करने की शपथ लेगी। इसी अधिवेशन के निर्णयों के आधार पर आगे चलकर सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारम्भ किया गया।
(i) दिसंबर 1929 में आयोजित हुआ।
(ii) अध्यक्ष – जवाहरलाल नेहरू।
(iii) पूर्ण स्वराज का लक्ष्य घोषित किया गया।
(iv) 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाने का निर्णय हुआ।
(v) सविनय अवज्ञा आंदोलन का मार्ग प्रशस्त हुआ।
21. सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) क्या था?
उत्तर ⇒ सविनय अवज्ञा आंदोलन 1930 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में प्रारम्भ किया गया। इस आंदोलन का उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के अन्यायपूर्ण कानूनों का शांतिपूर्ण उल्लंघन करके स्वराज प्राप्त करना था। इसकी शुरुआत दांडी मार्च और नमक कानून तोड़ने से हुई। इस आंदोलन में किसानों, मजदूरों, महिलाओं, विद्यार्थियों एवं व्यापारियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। लोगों ने नमक बनाया, कर देने से इनकार किया तथा विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया। ब्रिटिश सरकार ने आंदोलन को दबाने के लिए हजारों लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
(i) प्रारम्भ – 1930 ई.।
(ii) नेतृत्व – महात्मा गांधी।
(iii) नमक कानून तोड़ा गया।
(iv) अन्यायपूर्ण कानूनों का उल्लंघन किया गया।
(v) देशव्यापी जनभागीदारी हुई।
22. दांडी मार्च (Dandi March) का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ 12 मार्च 1930 को महात्मा गांधी ने अपने 78 स्वयंसेवकों के साथ गुजरात के साबरमती आश्रम से दांडी तक लगभग 240 मील (390 किमी) की पदयात्रा प्रारम्भ की। यह यात्रा 24 दिनों तक चली। 6 अप्रैल 1930 को गांधीजी ने समुद्र के किनारे नमक बनाकर ब्रिटिश नमक कानून का उल्लंघन किया। इसी घटना से सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत हुई। दांडी मार्च ने पूरे देश में राष्ट्रीय चेतना फैलाने तथा अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जनता को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
(i) प्रारम्भ – 12 मार्च 1930।
(ii) स्थान – साबरमती से दांडी।
(iii) 78 स्वयंसेवकों ने भाग लिया।
(iv) 6 अप्रैल 1930 को नमक कानून तोड़ा गया।
(v) सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारम्भ हुआ।
23. नमक सत्याग्रह (Salt Satyagraha) का महत्व लिखिए।
उत्तर ⇒ नमक सत्याग्रह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की सबसे प्रभावशाली घटनाओं में से एक था। महात्मा गांधी ने नमक जैसे सामान्य एवं दैनिक उपयोग की वस्तु को आंदोलन का आधार बनाया, क्योंकि नमक पर लगाए गए कर से देश का प्रत्येक नागरिक प्रभावित होता था। 6 अप्रैल 1930 को गांधीजी ने दांडी पहुँचकर नमक बनाकर ब्रिटिश कानून का उल्लंघन किया। इस घटना के बाद पूरे देश में लोगों ने नमक कानून तोड़ा और सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया। इस आंदोलन ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाया तथा महिलाओं, किसानों, मजदूरों और विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाई।
(i) नमक कानून का उल्लंघन किया गया।
(ii) आंदोलन पूरे देश में फैल गया।
(iii) जनता की व्यापक भागीदारी हुई।
(iv) ब्रिटिश शासन का विरोध तेज हुआ।
(v) राष्ट्रीय आंदोलन को नई शक्ति मिली।
24. सविनय अवज्ञा आंदोलन में किसानों की क्या भूमिका थी?
उत्तर ⇒ सविनय अवज्ञा आंदोलन में किसानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अनेक क्षेत्रों में किसानों ने अत्यधिक लगान एवं अन्य करों का विरोध किया। उन्होंने सरकारी कर देने से इनकार किया तथा ब्रिटिश प्रशासन के विरुद्ध शांतिपूर्ण आंदोलन चलाया। गुजरात, उत्तर प्रदेश एवं आंध्र प्रदेश सहित अनेक राज्यों में किसानों ने गांधीजी के नेतृत्व का समर्थन किया। हालाँकि कुछ स्थानों पर किसानों की अपेक्षाएँ कांग्रेस की नीतियों से अलग थीं, फिर भी उन्होंने आंदोलन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
(i) करों का विरोध किया।
(ii) लगान देने से इनकार किया।
(iii) गांधीजी का समर्थन किया।
(iv) ग्रामीण क्षेत्रों में आंदोलन फैलाया।
(v) राष्ट्रीय आंदोलन को मजबूत बनाया।
25. सविनय अवज्ञा आंदोलन में महिलाओं की भूमिका लिखिए।
उत्तर ⇒ सविनय अवज्ञा आंदोलन में महिलाओं ने पहली बार बड़ी संख्या में सक्रिय भाग लिया। उन्होंने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया, शराब की दुकानों के सामने धरना दिया तथा नमक कानून तोड़ने में भाग लिया। अनेक महिलाओं ने जेल यात्राएँ भी कीं। सरोजिनी नायडू, कमलादेवी चट्टोपाध्याय तथा अन्य महिला नेताओं ने आंदोलन का नेतृत्व किया। महिलाओं की भागीदारी से राष्ट्रीय आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन प्राप्त हुआ तथा समाज में महिलाओं की राजनीतिक भूमिका भी मजबूत हुई।
(i) विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया।
(ii) नमक कानून तोड़ा।
(iii) धरना एवं प्रदर्शन में भाग लिया।
(iv) अनेक महिलाओं ने जेल यात्रा की।
(v) राष्ट्रीय आंदोलन को व्यापक समर्थन मिला।
26. गांधी-इरविन समझौता (1931) क्या था?
उत्तर ⇒ सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान ब्रिटिश सरकार और महात्मा गांधी के बीच 5 मार्च 1931 को गांधी-इरविन समझौता हुआ। इस समझौते के अनुसार कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित करने पर सहमति दी, जबकि सरकार ने राजनीतिक बंदियों को रिहा करने तथा शांतिपूर्ण ढंग से नमक बनाने की अनुमति देने का आश्वासन दिया। इस समझौते के बाद महात्मा गांधी ने लंदन में आयोजित दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया। यह समझौता भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की एक महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि माना जाता है।
(i) 5 मार्च 1931 को हुआ।
(ii) गांधीजी एवं लॉर्ड इरविन के बीच हुआ।
(iii) आंदोलन अस्थायी रूप से स्थगित किया गया।
(iv) राजनीतिक बंदियों को रिहा किया गया।
(v) गांधीजी ने गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया।
27. सविनय अवज्ञा आंदोलन को अंततः क्यों वापस ले लिया गया?
उत्तर ⇒ सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान ब्रिटिश सरकार ने हजारों आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर लिया तथा आंदोलन को कठोरता से दबाने का प्रयास किया। दूसरे गोलमेज सम्मेलन की असफलता तथा सरकार की दमनकारी नीतियों के कारण आंदोलन अपेक्षित सफलता प्राप्त नहीं कर सका। अंततः 1934 में महात्मा गांधी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन वापस लेने की घोषणा की। यद्यपि आंदोलन समाप्त हो गया, लेकिन इसने भारतीय जनता में राष्ट्रीय चेतना को अत्यंत मजबूत किया तथा स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा प्रदान की।
(i) सरकार ने कठोर दमन किया।
(ii) हजारों लोग गिरफ्तार हुए।
(iii) गोलमेज सम्मेलन सफल नहीं हुआ।
(iv) 1934 में आंदोलन समाप्त किया गया।
(v) राष्ट्रीय चेतना और अधिक मजबूत हुई।
28. गोलमेज सम्मेलन (Round Table Conference) क्या था?
उत्तर ⇒ भारत की संवैधानिक समस्याओं पर विचार-विमर्श करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने लंदन में 1930 से 1932 के बीच तीन गोलमेज सम्मेलनों का आयोजन किया। इन सम्मेलनों में भारत के विभिन्न राजनीतिक दलों, रियासतों तथा सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया। महात्मा गांधी ने केवल दूसरे गोलमेज सम्मेलन (1931) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया। लेकिन इन सम्मेलनों में भारत को पूर्ण स्वराज देने पर कोई सहमति नहीं बन सकी। इसलिए ये सम्मेलन भारतीयों की अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर सके।
(i) आयोजन लंदन में हुआ।
(ii) कुल तीन गोलमेज सम्मेलन आयोजित हुए।
(iii) गांधीजी ने दूसरे सम्मेलन में भाग लिया।
(iv) भारत की संवैधानिक समस्याओं पर चर्चा हुई।
(v) पूर्ण स्वराज का प्रश्न हल नहीं हुआ।
29. पूना पैक्ट (Poona Pact) क्या था?
उत्तर ⇒ पूना पैक्ट 24 सितंबर 1932 को महात्मा गांधी एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर के बीच हुआ एक महत्वपूर्ण समझौता था। ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्ज़े मैकडोनाल्ड द्वारा घोषित सांप्रदायिक पुरस्कार (Communal Award) में दलितों के लिए पृथक निर्वाचन की व्यवस्था की गई थी। महात्मा गांधी ने इसका विरोध करते हुए यरवदा जेल में आमरण अनशन प्रारंभ किया। इसके बाद गांधीजी एवं डॉ. अम्बेडकर के बीच समझौता हुआ, जिसे पूना पैक्ट कहा जाता है। इस समझौते के अनुसार पृथक निर्वाचन समाप्त कर संयुक्त निर्वाचन में अनुसूचित जातियों के लिए अधिक सीटें आरक्षित की गईं।
(i) 24 सितंबर 1932 को हुआ।
(ii) गांधीजी एवं डॉ. अम्बेडकर के बीच समझौता हुआ।
(iii) पृथक निर्वाचन का विरोध किया गया।
(iv) अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण बढ़ाया गया।
(v) संयुक्त निर्वाचन प्रणाली स्वीकार की गई।
30. भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) क्या था?
उत्तर ⇒ भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का अंतिम एवं सबसे व्यापक जन आंदोलन था। इसे 8 अगस्त 1942 को मुंबई के ग्वालिया टैंक मैदान (वर्तमान अगस्त क्रांति मैदान) में आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक में महात्मा गांधी के नेतृत्व में प्रारंभ किया गया। गांधीजी ने इस अवसर पर “करो या मरो” (Do or Die) का प्रसिद्ध नारा दिया। आंदोलन का उद्देश्य ब्रिटिश शासन को भारत छोड़ने के लिए बाध्य करना था। आंदोलन शुरू होते ही गांधीजी सहित कांग्रेस के सभी प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया, फिर भी पूरे देश में जनता ने आंदोलन जारी रखा।
(i) 8 अगस्त 1942 को प्रारंभ हुआ।
(ii) गांधीजी ने “करो या मरो” का नारा दिया।
(iii) ब्रिटिश शासन समाप्त करने की मांग की गई।
(iv) प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।
(v) जनता ने व्यापक रूप से भाग लिया।
31. भारत छोड़ो आंदोलन का महत्व लिखिए।
उत्तर ⇒ भारत छोड़ो आंदोलन ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को निर्णायक दिशा प्रदान की। इस आंदोलन में विद्यार्थियों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं तथा युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। यद्यपि ब्रिटिश सरकार ने कठोर दमन किया, फिर भी भारतीय जनता की स्वतंत्रता प्राप्त करने की इच्छा और अधिक मजबूत हो गई। इस आंदोलन के बाद अंग्रेजों को यह स्पष्ट हो गया कि भारत पर अधिक समय तक शासन करना संभव नहीं है। अंततः 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ।
(i) स्वतंत्रता आंदोलन निर्णायक चरण में पहुँचा।
(ii) जनता की व्यापक भागीदारी हुई।
(iii) अंग्रेजी शासन की नींव कमजोर हुई।
(iv) राष्ट्रीय एकता मजबूत हुई।
(v) स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त हुआ।
32. भारत में राष्ट्रवाद के विकास में महात्मा गांधी की भूमिका लिखिए।
उत्तर ⇒ महात्मा गांधी ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को जन आंदोलन का रूप दिया। उन्होंने सत्याग्रह, अहिंसा एवं असहयोग के माध्यम से अंग्रेजी शासन का विरोध किया। चंपारण, खेड़ा, अहमदाबाद, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन तथा भारत छोड़ो आंदोलन जैसे आंदोलनों का सफल नेतृत्व कर उन्होंने किसानों, मजदूरों, महिलाओं एवं विद्यार्थियों को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा। गांधीजी के नेतृत्व ने राष्ट्रवाद को गाँव-गाँव तक पहुँचाया तथा भारतीयों में आत्मविश्वास एवं राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित की।
(i) सत्याग्रह एवं अहिंसा का मार्ग अपनाया।
(ii) राष्ट्रीय आंदोलन को जन आंदोलन बनाया।
(iii) सभी वर्गों को आंदोलन से जोड़ा।
(iv) राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया।
(v) स्वतंत्रता संग्राम का प्रभावी नेतृत्व किया।
33. भारत में राष्ट्रवाद के विकास में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की भूमिका लिखिए।
उत्तर ⇒ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को हुई। प्रारम्भ में इसका उद्देश्य भारतीयों की समस्याओं को सरकार के समक्ष शांतिपूर्ण ढंग से रखना था, लेकिन धीरे-धीरे यह भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख संगठन बन गई। कांग्रेस ने विभिन्न आंदोलनों के माध्यम से लोगों में राष्ट्रीय चेतना विकसित की तथा किसानों, मजदूरों, विद्यार्थियों, महिलाओं एवं व्यापारियों को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा। महात्मा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन तथा भारत छोड़ो आंदोलन का सफल संचालन किया। कांग्रेस ने भारतीयों में एकता, लोकतंत्र एवं स्वराज की भावना को मजबूत किया।
(i) स्थापना 1885 में हुई।
(ii) राष्ट्रीय चेतना का विकास किया।
(iii) स्वतंत्रता आंदोलनों का नेतृत्व किया।
(iv) सभी वर्गों को आंदोलन से जोड़ा।
(v) स्वराज की मांग को मजबूत बनाया।
34. भारत में राष्ट्रवाद के विकास में किसानों की भूमिका लिखिए।
उत्तर ⇒ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में किसानों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। अंग्रेजों की अधिक लगान, बेगार, जमींदारी शोषण एवं आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसान राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ते गए। चंपारण सत्याग्रह, खेड़ा सत्याग्रह तथा अवध किसान आंदोलन जैसे आंदोलनों में किसानों ने सक्रिय भाग लिया। महात्मा गांधी ने किसानों की समस्याओं को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़कर उन्हें स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। किसानों की भागीदारी से राष्ट्रीय आंदोलन गाँव-गाँव तक पहुँच गया।
(i) लगान एवं शोषण का विरोध किया।
(ii) सत्याग्रह आंदोलनों में भाग लिया।
(iii) राष्ट्रीय आंदोलन को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचाया।
(iv) गांधीजी का समर्थन किया।
(v) स्वतंत्रता संग्राम को जन आंदोलन बनाया।
35. भारत में राष्ट्रवाद के विकास में मजदूरों एवं महिलाओं की भूमिका लिखिए।
उत्तर ⇒ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में मजदूरों एवं महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। मजदूरों ने हड़तालों एवं आंदोलनों के माध्यम से ब्रिटिश शासन का विरोध किया। महिलाओं ने विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार, नमक सत्याग्रह, धरना-प्रदर्शन एवं सभाओं में सक्रिय भाग लिया। सरोजिनी नायडू, कमलादेवी चट्टोपाध्याय, कस्तूरबा गांधी आदि महिला नेताओं ने राष्ट्रीय आंदोलन को मजबूत बनाया। इनके योगदान से स्वतंत्रता आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन प्राप्त हुआ।
(i) मजदूरों ने हड़तालें कीं।
(ii) महिलाओं ने सत्याग्रह में भाग लिया।
(iii) विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया।
(iv) राष्ट्रीय आंदोलन को व्यापक समर्थन मिला।
(v) महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ी।
36. भारत में राष्ट्रवाद के विकास में झारखंड का योगदान लिखिए।
उत्तर ⇒ झारखंड की धरती ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन एवं राष्ट्रवाद के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यहाँ के अनेक वीर स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष किया। भगवान बिरसा मुंडा ने आदिवासियों को संगठित कर ब्रिटिश शासन एवं शोषण के विरुद्ध उलगुलान (महाविद्रोह) का नेतृत्व किया। सिद्धू-कान्हू, चाँद-भैरव, तिलका मांझी तथा शेख भिखारी जैसे वीरों ने भी स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया। इनके आंदोलनों ने राष्ट्रीय चेतना को मजबूत किया तथा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा प्रदान की।
(i) बिरसा मुंडा ने उलगुलान का नेतृत्व किया।
(ii) सिद्धू-कान्हू ने संथाल विद्रोह किया।
(iii) तिलका मांझी ने अंग्रेजों का विरोध किया।
(iv) शेख भिखारी ने स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया।
(v) झारखंड में राष्ट्रवाद की भावना मजबूत हुई।
37. भारत में राष्ट्रवाद के विकास के प्रमुख कारण लिखिए।
उत्तर ⇒ भारत में राष्ट्रवाद का विकास अनेक सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक कारणों से हुआ। ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियाँ, आर्थिक शोषण, आधुनिक शिक्षा का प्रसार, समाचार पत्रों का विकास तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना ने राष्ट्रीय चेतना को मजबूत किया। महात्मा गांधी के नेतृत्व में चलाए गए जन आंदोलनों ने राष्ट्रवाद को पूरे देश में फैलाया। विभिन्न वर्गों की भागीदारी के कारण स्वतंत्रता आंदोलन एक राष्ट्रीय आंदोलन बन गया।
(i) ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियाँ।
(ii) आर्थिक शोषण।
(iii) आधुनिक शिक्षा का प्रसार।
(iv) समाचार पत्रों का विकास।
(v) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना।
(vi) गांधीजी के नेतृत्व वाले आंदोलन।
38. भारत में राष्ट्रवाद के विकास के प्रमुख परिणाम लिखिए।
उत्तर ⇒ भारत में राष्ट्रवाद के विकास से भारतीयों में राष्ट्रीय एकता एवं स्वतंत्रता की भावना मजबूत हुई। विभिन्न धर्मों, भाषाओं एवं जातियों के लोग एक मंच पर आए। स्वतंत्रता आंदोलन पूरे देश में फैल गया तथा अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जनसमर्थन बढ़ा। अंततः लंबे संघर्ष एवं बलिदानों के बाद 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। राष्ट्रवाद ने आधुनिक भारत के निर्माण एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
(i) राष्ट्रीय एकता मजबूत हुई।
(ii) स्वतंत्रता आंदोलन सफल हुआ।
(iii) अंग्रेजी शासन समाप्त हुआ।
(iv) भारत स्वतंत्र राष्ट्र बना।
(v) लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित हुई।
39. भारत में राष्ट्रवाद अध्याय से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर ⇒ भारत में राष्ट्रवाद का इतिहास हमें एकता, त्याग, अहिंसा एवं देशभक्ति का संदेश देता है। स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने व्यक्तिगत हितों का त्याग कर देश की आजादी के लिए संघर्ष किया। महात्मा गांधी ने सत्य एवं अहिंसा के माध्यम से यह सिद्ध किया कि बिना हिंसा के भी अन्याय का विरोध किया जा सकता है। यह अध्याय हमें राष्ट्रीय एकता बनाए रखने, लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करने तथा देश के विकास में सक्रिय योगदान देने की प्रेरणा देता है।
(i) राष्ट्रीय एकता का महत्व।
(ii) सत्य एवं अहिंसा का पालन।
(iii) देशभक्ति की भावना।
(iv) लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान।
(v) राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी।
40. ‘भारत में राष्ट्रवाद’ अध्याय का निष्कर्ष लिखिए।
उत्तर ⇒ भारत में राष्ट्रवाद का विकास भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक था। महात्मा गांधी के नेतृत्व में सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन तथा भारत छोड़ो आंदोलन ने देश के करोड़ों लोगों को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा। किसानों, मजदूरों, महिलाओं, विद्यार्थियों एवं विभिन्न सामाजिक वर्गों की भागीदारी ने राष्ट्रीय आंदोलन को जन आंदोलन बना दिया। अंततः भारतीयों की एकता, संघर्ष एवं बलिदान के परिणामस्वरूप 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। यह अध्याय हमें राष्ट्रीय एकता, लोकतंत्र, सत्य, अहिंसा एवं देशभक्ति के मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता है।
More Class 10 History Revision Notes
| Chapter 1: यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय |
| Chapter 2: भारत में राष्ट्रवाद |
| Chapter 3: भूमण्डलीकृत विश्व का बनना |
| Chapter 4: औद्योगीकरण का युग |
| Chapter 5: मुद्रण संस्कृति और आधुनिक दुनिया |