Class 10 History: भूमण्डलीकृत विश्व का बनना

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Chapter Overview

Class10
SubjectHistory 
Chapter NameMaking of a Global World
भूमण्डलीकृत विश्व का बनना
Resource TypeRevision Notes
SyllabusNCERT
Suitable ForCBSE, JAC and other state boards

भूमण्डलीकृत विश्व का बनना Revision Notes

1. भूमंडलीकरण (Globalisation) क्या है?

उत्तर ⇒ भूमंडलीकरण वह प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत विश्व के विभिन्न देश आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं तकनीकी रूप से एक-दूसरे से जुड़ते हैं। इसके माध्यम से वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी, तकनीक तथा सूचनाओं का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आदान-प्रदान होता है। भूमंडलीकरण से देशों के बीच व्यापार बढ़ता है, नई तकनीकों का विकास होता है तथा विश्व एक वैश्विक बाजार के रूप में विकसित होता है। आधुनिक परिवहन एवं संचार के साधनों ने इस प्रक्रिया को और अधिक गति प्रदान की है।

(i) देशों के बीच आर्थिक संबंध मजबूत होते हैं।

(ii) वस्तुओं एवं सेवाओं का आदान-प्रदान बढ़ता है।

(iii) पूँजी एवं तकनीक का प्रवाह होता है।

(iv) अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलता है।

(v) विश्व एक वैश्विक बाजार के रूप में विकसित होता है।

2. वैश्वीकरण (Globalization) क्या है?

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाएँ एक-दूसरे से जुड़ती हैं। इसके अंतर्गत वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी एवं तकनीक का एक देश से दूसरे देश में प्रवाह होता है। वैश्वीकरण के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश तथा संचार में तेजी आई है। इसके परिणामस्वरूप विश्व के विभिन्न देशों के बीच आर्थिक सहयोग एवं प्रतिस्पर्धा दोनों में वृद्धि हुई है।

(i) देशों की अर्थव्यवस्थाएँ परस्पर जुड़ती हैं।

(ii) अंतरराष्ट्रीय व्यापार बढ़ता है।

(iii) पूँजी एवं तकनीक का आदान-प्रदान होता है।

(iv) वैश्विक बाजार का विकास होता है।

(v) आर्थिक विकास को गति मिलती है।

3. आयात शुल्क (Tariff) क्या है?

उत्तर ⇒ आयात शुल्क वह कर या शुल्क है जो किसी दूसरे देश से आयात की जाने वाली वस्तुओं पर लगाया जाता है। यह शुल्क देश की सीमा, बंदरगाह या हवाई अड्डे पर वसूला जाता है। सरकार घरेलू उद्योगों की रक्षा करने तथा विदेशी वस्तुओं के आयात को नियंत्रित करने के लिए आयात शुल्क लगाती है। आयात शुल्क बढ़ने से विदेशी वस्तुएँ महँगी हो जाती हैं और देशी उद्योगों को लाभ मिलता है।

(i) विदेशी वस्तुओं पर लगाया जाने वाला कर है।

(ii) सीमा या बंदरगाह पर वसूला जाता है।

(iii) घरेलू उद्योगों की रक्षा करता है।

(iv) विदेशी वस्तुएँ महँगी हो जाती हैं।

(v) आयात को नियंत्रित करने में सहायता करता है।

4. विनिमय दर (Exchange Rate) क्या है? इसके प्रकार लिखिए।

उत्तर ⇒ विनिमय दर वह व्यवस्था है जिसके माध्यम से एक देश की मुद्रा का मूल्य दूसरे देश की मुद्रा के सापेक्ष निर्धारित किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं विदेशी निवेश के लिए विनिमय दर अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इसके आधार पर विभिन्न देशों के बीच वस्तुओं एवं सेवाओं का मूल्य तय किया जाता है।

विनिमय दर के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं—

(i) स्थिर विनिमय दर (Fixed Exchange Rate)

(ii) लचीली या परिवर्तनशील विनिमय दर (Flexible Exchange Rate)

स्थिर विनिमय दर में सरकार विनिमय दर को नियंत्रित करती है, जबकि लचीली विनिमय दर में विदेशी मुद्रा बाजार की माँग एवं आपूर्ति के अनुसार दर निर्धारित होती है।

5. रेशम मार्ग (Silk Route) क्या था? इसका महत्व लिखिए।

उत्तर ⇒ रेशम मार्ग प्राचीन काल का व्यापारिक एवं सांस्कृतिक मार्गों का विशाल जाल था, जो एशिया, यूरोप एवं उत्तरी अफ्रीका को जोड़ता था। इसका नाम चीन के प्रसिद्ध रेशम (Silk) के कारण पड़ा, क्योंकि इस मार्ग से रेशम का सबसे अधिक व्यापार होता था। इस मार्ग के माध्यम से केवल वस्तुओं का ही नहीं, बल्कि धर्म, संस्कृति, भाषा, विचार एवं तकनीक का भी आदान-प्रदान हुआ। बौद्ध धर्म, ईसाई धर्म एवं इस्लाम के प्रसार में भी रेशम मार्ग की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

(i) यह प्राचीन व्यापारिक मार्ग था।

(ii) एशिया, यूरोप एवं उत्तरी अफ्रीका को जोड़ता था।

(iii) रेशम, मसाले एवं कपड़ों का व्यापार होता था।

(iv) धर्म एवं संस्कृति का प्रसार हुआ।

(v) वैश्विक संपर्क एवं व्यापार को बढ़ावा मिला।

6. रेशम मार्ग (Silk Route) का वैश्वीकरण में क्या योगदान था?

उत्तर ⇒ रेशम मार्ग ने प्राचीन काल में विभिन्न देशों के बीच व्यापार एवं सांस्कृतिक संबंधों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह मार्ग चीन को भारत, मध्य एशिया, पश्चिम एशिया एवं यूरोप से जोड़ता था। इसके माध्यम से रेशम, मसाले, कपास, चीनी मिट्टी के बर्तन एवं बहुमूल्य वस्तुओं का व्यापार होता था। साथ ही धर्म, भाषा, कला, विज्ञान एवं तकनीकी ज्ञान का भी आदान-प्रदान हुआ। इस प्रकार रेशम मार्ग ने प्रारम्भिक वैश्वीकरण की नींव रखी।

(i) अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा मिला।

(ii) विभिन्न संस्कृतियों का आदान-प्रदान हुआ।

(iii) धर्म एवं विचारों का प्रसार हुआ।

(iv) एशिया एवं यूरोप के बीच संपर्क बढ़ा।

(v) प्रारम्भिक वैश्वीकरण का विकास हुआ।

7. भोजन के माध्यम से वैश्वीकरण को कैसे समझाया जा सकता है?

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण का प्रभाव हमारे दैनिक भोजन में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। आज भारत में आलू, टमाटर, मक्का, मिर्च, मूंगफली जैसी अनेक फसलें उगाई जाती हैं, जबकि इनका मूल स्थान अमेरिका महाद्वीप था। इसी प्रकार भारत के मसाले, चाय एवं कॉफी विश्व के अनेक देशों में लोकप्रिय हैं। इससे स्पष्ट होता है कि विभिन्न देशों के बीच खाद्य पदार्थों का आदान-प्रदान वैश्वीकरण की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण भाग है।

(i) नई फसलें विभिन्न देशों में पहुँचीं।

(ii) खाद्य पदार्थों का वैश्विक व्यापार बढ़ा।

(iii) लोगों की खान-पान की आदतों में परिवर्तन आया।

(iv) कृषि उत्पादन में विविधता आई।

(v) देशों के बीच सांस्कृतिक संपर्क बढ़ा।

8. अमेरिका से विश्व के अन्य देशों में कौन-कौन सी प्रमुख फसलें पहुँचीं?

उत्तर ⇒ अमेरिका की खोज के बाद अनेक नई फसलें विश्व के विभिन्न देशों में पहुँचीं। इन फसलों ने कृषि उत्पादन एवं लोगों के भोजन में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए। भारत सहित एशिया और यूरोप के अनेक देशों में इन फसलों की खेती प्रारम्भ हुई, जिससे खाद्य सुरक्षा एवं कृषि विकास को बढ़ावा मिला।

अमेरिका से विश्व में पहुँची प्रमुख फसलें निम्नलिखित हैं—

(i) आलू।

(ii) टमाटर।

(iii) मक्का।

(iv) मिर्च।

(v) मूंगफली।

(vi) कोको।

(vii) तंबाकू।

9. कॉर्न लॉ (Corn Laws) क्या था?

उत्तर ⇒ कॉर्न लॉ ब्रिटेन में लागू ऐसे कानून थे जिनका उद्देश्य विदेशी अनाज के आयात को नियंत्रित करना तथा देश के बड़े जमींदारों के हितों की रक्षा करना था। इन कानूनों के कारण विदेशी अनाज पर भारी आयात शुल्क लगाया जाता था, जिससे अनाज महँगा हो जाता था। उद्योगपतियों एवं मजदूरों ने इन कानूनों का विरोध किया क्योंकि महँगे अनाज के कारण जीवन-यापन की लागत बढ़ जाती थी। अंततः 1846 ई. में कॉर्न लॉ समाप्त कर दिया गया, जिससे मुक्त व्यापार को बढ़ावा मिला।

(i) ब्रिटेन में लागू किया गया था।

(ii) विदेशी अनाज पर आयात शुल्क लगाया जाता था।

(iii) जमींदारों के हितों की रक्षा करता था।

(iv) मजदूर एवं उद्योगपति इसके विरोधी थे।

(v) 1846 में इसे समाप्त कर दिया गया।

10. वैश्विक कृषि अर्थव्यवस्था (Global Agricultural Economy) का विकास कैसे हुआ?

उत्तर ⇒ 19वीं शताब्दी में परिवहन एवं संचार के विकास के कारण विश्व के विभिन्न देशों के बीच कृषि उत्पादों का व्यापार तेजी से बढ़ा। अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया एवं अर्जेंटीना जैसे देशों में बड़े पैमाने पर गेहूँ एवं अन्य कृषि उत्पादों का उत्पादन होने लगा। इन देशों से कृषि उत्पाद यूरोप भेजे जाने लगे, जिससे वैश्विक कृषि अर्थव्यवस्था का विकास हुआ। इस प्रक्रिया से किसानों, व्यापारियों एवं उद्योगों को नए बाजार प्राप्त हुए तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार का विस्तार हुआ।

(i) कृषि उत्पादों का अंतरराष्ट्रीय व्यापार बढ़ा।

(ii) परिवहन सुविधाओं का विकास हुआ।

(iii) नए बाजार विकसित हुए।

(iv) कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई।

(v) वैश्विक व्यापार को गति मिली।

11. तकनीकी प्रगति (Technological Advancement) ने वैश्वीकरण को कैसे बढ़ावा दिया?

उत्तर ⇒ 19वीं एवं 20वीं शताब्दी में परिवहन एवं संचार के क्षेत्र में हुई तकनीकी प्रगति ने वैश्वीकरण को नई गति प्रदान की। भाप के जहाज, रेलमार्ग, मोटर वाहन तथा बाद में हवाई परिवहन के विकास से वस्तुओं एवं लोगों का आवागमन तेज और सस्ता हो गया। टेलीग्राफ, टेलीफोन एवं आधुनिक संचार साधनों ने देशों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को सरल बना दिया। इन परिवर्तनों के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश एवं सांस्कृतिक संबंधों का तेजी से विस्तार हुआ।

(i) परिवहन तेज एवं सस्ता हुआ।

(ii) अंतरराष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि हुई।

(iii) संचार व्यवस्था विकसित हुई।

(iv) देशों के बीच संपर्क बढ़ा।

(v) वैश्वीकरण को गति मिली।

12. औपनिवेशिकवाद (Colonialism) क्या है?

उत्तर ⇒ औपनिवेशिकवाद वह व्यवस्था है जिसमें कोई शक्तिशाली देश किसी कमजोर देश या क्षेत्र पर राजनीतिक, आर्थिक एवं सैन्य नियंत्रण स्थापित कर उसका शोषण करता है। यूरोपीय देशों ने एशिया एवं अफ्रीका के अनेक देशों को अपना उपनिवेश बनाया। इन उपनिवेशों से कच्चा माल प्राप्त किया जाता था तथा तैयार वस्तुओं के लिए बाजार विकसित किए जाते थे। औपनिवेशिक शासन ने स्थानीय अर्थव्यवस्था एवं समाज पर गहरा प्रभाव डाला।

(i) शक्तिशाली देश कमजोर देशों पर शासन करते थे।

(ii) प्राकृतिक संसाधनों का शोषण किया जाता था।

(iii) कच्चे माल की प्राप्ति होती थी।

(iv) तैयार वस्तुओं के लिए बाजार मिलते थे।

(v) स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित होती थी।

13. अफ्रीका का बँटवारा (Scramble for Africa) क्यों हुआ?

उत्तर ⇒ 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में यूरोप के शक्तिशाली देशों ने अफ्रीका के प्राकृतिक संसाधनों एवं व्यापारिक अवसरों पर अधिकार प्राप्त करने के लिए वहाँ के क्षेत्रों का आपस में बँटवारा कर लिया। अफ्रीका में सोना, हीरा, हाथीदाँत तथा अन्य बहुमूल्य संसाधनों की प्रचुरता थी। इसके अतिरिक्त यूरोपीय देशों को अपने उद्योगों के लिए कच्चे माल एवं तैयार वस्तुओं के लिए नए बाजारों की आवश्यकता थी। इसी कारण अफ्रीका पर उपनिवेश स्थापित किए गए।

(i) प्राकृतिक संसाधनों की प्राप्ति।

(ii) कच्चे माल की आवश्यकता।

(iii) नए बाजारों की खोज।

(iv) साम्राज्य विस्तार की नीति।

(v) यूरोपीय देशों के बीच प्रतिस्पर्धा।

14. रिंडरपेस्ट (Rinderpest) क्या था?

उत्तर ⇒ रिंडरपेस्ट एक अत्यंत संक्रामक पशु रोग था, जो मुख्य रूप से गाय, बैल एवं अन्य मवेशियों में फैलता था। 19वीं शताब्दी के अंत में यह रोग एशिया से अफ्रीका पहुँचा और वहाँ लाखों पशुओं की मृत्यु हो गई। इसके कारण अफ्रीका की कृषि एवं पशुपालन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। खाद्यान्न उत्पादन घट गया और अनेक क्षेत्रों में भयंकर अकाल की स्थिति उत्पन्न हो गई। इस महामारी ने अफ्रीका की अर्थव्यवस्था एवं समाज पर गहरा प्रभाव डाला।

(i) यह पशुओं का संक्रामक रोग था।

(ii) लाखों पशुओं की मृत्यु हुई।

(iii) कृषि प्रभावित हुई।

(iv) खाद्यान्न संकट उत्पन्न हुआ।

(v) अफ्रीका की अर्थव्यवस्था कमजोर हुई।

15. अनुबंधित श्रमिक (Indentured Labour / गिरमिटिया मजदूर) कौन थे?

उत्तर ⇒ अनुबंधित श्रमिक या गिरमिटिया मजदूर वे भारतीय मजदूर थे जिन्हें एक निश्चित अवधि के अनुबंध (Agreement) के आधार पर ब्रिटिश उपनिवेशों में काम करने के लिए भेजा जाता था। इन श्रमिकों को फिजी, मॉरीशस, त्रिनिदाद, गुयाना, सूरीनाम तथा दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में गन्ना, चाय एवं रबर के बागानों में कार्य करना पड़ता था। उन्हें कम मजदूरी, कठिन श्रम एवं अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं के प्रसार में इन श्रमिकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

(i) अनुबंध के आधार पर विदेश भेजे जाते थे।

(ii) इन्हें गिरमिटिया मजदूर कहा जाता था।

(iii) बागानों एवं खेतों में कार्य करते थे।

(iv) कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताते थे।

(v) भारतीय संस्कृति के प्रसार में योगदान दिया।

16. भारतीय व्यापारियों (Indian Traders) ने वैश्विक दुनिया के निर्माण में क्या योगदान दिया?

उत्तर ⇒ वैश्विक दुनिया के निर्माण में भारतीय व्यापारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्राचीन एवं मध्यकाल से ही भारतीय व्यापारी एशिया, अफ्रीका तथा यूरोप के अनेक देशों के साथ व्यापार करते थे। वे मसाले, सूती वस्त्र, रेशम, नील, चाय एवं अन्य वस्तुओं का निर्यात करते थे। 19वीं शताब्दी में भारतीय व्यापारी दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका एवं अन्य उपनिवेशों तक पहुँचे और वहाँ व्यापारिक नेटवर्क स्थापित किए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के विस्तार तथा भारतीय संस्कृति के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

(i) विदेशी देशों के साथ व्यापार किया।

(ii) भारतीय वस्तुओं का निर्यात बढ़ाया।

(iii) नए व्यापारिक नेटवर्क स्थापित किए।

(iv) भारतीय संस्कृति का प्रसार किया।

(v) वैश्विक व्यापार को बढ़ावा दिया।

17. प्रथम विश्व युद्ध (1914–1918) के प्रमुख कारण लिखिए।

उत्तर ⇒ प्रथम विश्व युद्ध विश्व इतिहास का पहला व्यापक युद्ध था, जो 1914 में प्रारम्भ हुआ। इसके प्रमुख कारण यूरोपीय देशों के बीच साम्राज्यवादी प्रतिस्पर्धा, सैन्यवाद, गुप्त संधियाँ तथा उग्र राष्ट्रवाद थे। 28 जून 1914 को ऑस्ट्रिया के युवराज आर्कड्यूक फ्रांज फर्डिनेंड की हत्या के बाद युद्ध प्रारम्भ हो गया। यह युद्ध लगभग चार वर्षों तक चला और इसमें अनेक देशों ने भाग लिया।

प्रथम विश्व युद्ध के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे—

(i) साम्राज्यवाद।

(ii) उग्र राष्ट्रवाद।

(iii) सैन्यवाद।

(iv) गुप्त संधियाँ।

(v) फ्रांज फर्डिनेंड की हत्या।

18. प्रथम विश्व युद्ध का विश्व अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर ⇒ प्रथम विश्व युद्ध ने विश्व की अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया। युद्ध के कारण उद्योग, व्यापार एवं कृषि उत्पादन में भारी गिरावट आई। अनेक देशों पर भारी कर्ज का बोझ बढ़ गया तथा महँगाई और बेरोजगारी में वृद्धि हुई। युद्ध के बाद अमेरिका विश्व का प्रमुख आर्थिक शक्ति बनकर उभरा, जबकि यूरोप के अनेक देश आर्थिक संकट से जूझने लगे। इस युद्ध ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था को भी प्रभावित किया।

(i) व्यापार प्रभावित हुआ।

(ii) उद्योगों को नुकसान पहुँचा।

(iii) महँगाई बढ़ी।

(iv) बेरोजगारी में वृद्धि हुई।

(v) अमेरिका आर्थिक शक्ति बनकर उभरा।

19. महामंदी (Great Depression) क्या थी?

उत्तर ⇒ महामंदी विश्व इतिहास का सबसे बड़ा आर्थिक संकट था, जिसकी शुरुआत 1929 में अमेरिका के शेयर बाजार के पतन से हुई। इसके बाद विश्व के अनेक देशों में उद्योग बंद होने लगे, व्यापार घट गया तथा लाखों लोग बेरोजगार हो गए। किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिला और आर्थिक गतिविधियाँ धीमी पड़ गईं। महामंदी का प्रभाव लगभग पूरे विश्व पर पड़ा तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारी गिरावट आई।

(i) शुरुआत 1929 में हुई।

(ii) शेयर बाजार के पतन से प्रारम्भ हुई।

(iii) उद्योग एवं व्यापार प्रभावित हुए।

(iv) बेरोजगारी बढ़ी।

(v) विश्व अर्थव्यवस्था संकट में आ गई।

20. महामंदी (1929) का भारत पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर ⇒ महामंदी का भारत की कृषि एवं व्यापार पर गहरा प्रभाव पड़ा। कृषि उत्पादों की कीमतों में भारी गिरावट आई, जिससे किसानों की आय कम हो गई। किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ गया तथा अनेक क्षेत्रों में आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया। दूसरी ओर, ब्रिटिश सरकार किसानों से पहले की तरह कर वसूलती रही। इससे किसानों में असंतोष बढ़ा और वे राष्ट्रीय आंदोलन की ओर आकर्षित हुए। भारतीय व्यापार एवं निर्यात भी प्रभावित हुआ।

(i) कृषि उत्पादों की कीमतें घट गईं।

(ii) किसानों की आय कम हुई।

(iii) कर्ज का बोझ बढ़ा।

(iv) व्यापार एवं निर्यात प्रभावित हुआ।

(v) राष्ट्रीय आंदोलन को बल मिला।

21. बृहत उत्पादन (Mass Production) क्या है?

उत्तर ⇒ बृहत उत्पादन वह औद्योगिक प्रणाली है जिसमें मशीनों एवं आधुनिक तकनीक की सहायता से कम समय में बड़े पैमाने पर वस्तुओं का उत्पादन किया जाता है। इस प्रणाली का विकास 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में हुआ। इसके कारण उत्पादन लागत कम हुई, वस्तुएँ सस्ती हुईं तथा अधिक लोगों तक पहुँचने लगीं। बृहत उत्पादन ने औद्योगिक विकास एवं वैश्विक व्यापार को नई गति प्रदान की।

(i) बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है।

(ii) आधुनिक मशीनों का उपयोग होता है।

(iii) उत्पादन लागत कम होती है।

(iv) वस्तुएँ सस्ती होती हैं।

(v) वैश्विक व्यापार को बढ़ावा मिलता है।

22. हेनरी फोर्ड (Henry Ford) का बृहत उत्पादन में क्या योगदान था?

उत्तर ⇒ हेनरी फोर्ड अमेरिका के प्रसिद्ध उद्योगपति थे। उन्होंने मोटरगाड़ी निर्माण में असेंबली लाइन (Assembly Line) प्रणाली का प्रयोग किया, जिससे कम समय में अधिक संख्या में मोटरगाड़ियों का निर्माण संभव हुआ। इस तकनीक के कारण उत्पादन लागत कम हुई तथा आम लोग भी मोटरगाड़ी खरीदने लगे। हेनरी फोर्ड की उत्पादन पद्धति को बाद में अनेक उद्योगों ने अपनाया और यह आधुनिक औद्योगिक विकास का आधार बनी।

(i) असेंबली लाइन प्रणाली शुरू की।

(ii) उत्पादन की गति बढ़ाई।

(iii) लागत कम की।

(iv) मोटरगाड़ियाँ सस्ती हुईं।

(v) आधुनिक उद्योगों को नई दिशा मिली।

23. द्वितीय विश्व युद्ध (1939–1945) का विश्व अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर ⇒ द्वितीय विश्व युद्ध ने विश्व की अर्थव्यवस्था को व्यापक रूप से प्रभावित किया। युद्ध के कारण अनेक देशों के उद्योग, परिवहन एवं व्यापार व्यवस्था नष्ट हो गई। लाखों लोगों की मृत्यु हुई तथा भारी आर्थिक नुकसान हुआ। युद्ध के बाद अमेरिका एवं सोवियत संघ महाशक्ति बनकर उभरे। अनेक देशों के पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग की आवश्यकता महसूस हुई, जिसके परिणामस्वरूप विश्व बैंक एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी संस्थाओं की स्थापना हुई।

(i) उद्योग एवं व्यापार प्रभावित हुए।

(ii) भारी आर्थिक क्षति हुई।

(iii) अमेरिका महाशक्ति बना।

(iv) अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग बढ़ा।

(v) नई आर्थिक संस्थाओं की स्थापना हुई।

24. ब्रेटन वुड्स सम्मेलन (Bretton Woods Conference) क्या था?

उत्तर ⇒ ब्रेटन वुड्स सम्मेलन जुलाई 1944 में अमेरिका के ब्रेटन वुड्स नामक स्थान पर आयोजित किया गया। इस सम्मेलन का उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विश्व की आर्थिक व्यवस्था को पुनः संगठित करना था। सम्मेलन में कई देशों ने भाग लिया और अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए नई संस्थाओं के गठन पर सहमति बनी। इसी सम्मेलन के परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) एवं विश्व बैंक (World Bank) की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ।

(i) जुलाई 1944 में आयोजित हुआ।

(ii) स्थान – ब्रेटन वुड्स (अमेरिका)।

(iii) युद्ध के बाद आर्थिक व्यवस्था पर विचार हुआ।

(iv) IMF एवं विश्व बैंक की स्थापना का निर्णय हुआ।

(v) अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग को बढ़ावा मिला।

25. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) एवं विश्व बैंक (World Bank) की स्थापना क्यों की गई?

उत्तर ⇒ द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विश्व की अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाने तथा विभिन्न देशों के आर्थिक विकास में सहायता करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) एवं विश्व बैंक की स्थापना की गई। IMF का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मुद्रा व्यवस्था को स्थिर रखना एवं वित्तीय संकट से जूझ रहे देशों को सहायता देना है। विश्व बैंक विकासशील देशों को विकास परियोजनाओं के लिए ऋण एवं आर्थिक सहायता प्रदान करता है। इन दोनों संस्थाओं ने वैश्विक आर्थिक सहयोग को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

(i) विश्व अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाने के लिए।

(ii) आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए।

(iii) वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए।

(iv) अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रोत्साहित करने के लिए।

(v) विकासशील देशों की सहायता के लिए।

26. नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था (New International Economic Order – NIEO) क्या थी?

उत्तर ⇒ नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था (NIEO) एक ऐसी अवधारणा थी जिसे विकासशील देशों ने 1970 के दशक में प्रस्तुत किया। इसका उद्देश्य विकसित एवं विकासशील देशों के बीच आर्थिक असमानता को कम करना तथा विश्व व्यापार में समान अवसर उपलब्ध कराना था। विकासशील देशों की मांग थी कि उन्हें उचित मूल्य, आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में अधिक भागीदारी मिले। इस व्यवस्था का उद्देश्य विश्व अर्थव्यवस्था को अधिक न्यायसंगत एवं संतुलित बनाना था।

(i) आर्थिक असमानता कम करने का प्रयास।

(ii) विकासशील देशों को समान अवसर।

(iii) उचित व्यापार व्यवस्था की मांग।

(iv) तकनीकी एवं वित्तीय सहायता पर बल।

(v) न्यायपूर्ण वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थापना।

27. बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (Multinational Companies – MNCs) क्या हैं?

उत्तर ⇒ बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ वे कंपनियाँ होती हैं जिनका मुख्यालय एक देश में होता है, लेकिन उनका उत्पादन, व्यापार एवं सेवाएँ अनेक देशों में संचालित होती हैं। ये कंपनियाँ विभिन्न देशों में निवेश करती हैं तथा स्थानीय लोगों को रोजगार प्रदान करती हैं। आधुनिक वैश्वीकरण में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। हालाँकि इनके कारण स्थानीय उद्योगों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना भी करना पड़ता है।

(i) अनेक देशों में कार्य करती हैं।

(ii) विदेशी निवेश को बढ़ावा देती हैं।

(iii) रोजगार के अवसर उपलब्ध कराती हैं।

(iv) वैश्विक व्यापार का विस्तार करती हैं।

(v) स्थानीय उद्योगों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाती हैं।

28. चीन का वैश्विक अर्थव्यवस्था में उदय कैसे हुआ?

उत्तर ⇒ वर्ष 1978 के बाद चीन ने अपनी आर्थिक नीतियों में महत्वपूर्ण सुधार किए। उसने विदेशी निवेश को प्रोत्साहन दिया, विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) स्थापित किए तथा उद्योगों एवं निर्यात को बढ़ावा दिया। कम लागत पर बड़े पैमाने पर उत्पादन के कारण चीन विश्व का प्रमुख विनिर्माण केंद्र बन गया। आज चीन विश्व व्यापार एवं वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

(i) आर्थिक सुधार लागू किए।

(ii) विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया।

(iii) विशेष आर्थिक क्षेत्र स्थापित किए।

(iv) निर्यात में वृद्धि हुई।

(v) विश्व का प्रमुख विनिर्माण केंद्र बना।

29. वैश्वीकरण के प्रमुख लाभ लिखिए।

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण के कारण विश्व के विभिन्न देशों के बीच व्यापार, निवेश एवं तकनीकी सहयोग में वृद्धि हुई है। आधुनिक तकनीक एवं संचार के विकास से लोगों को नई वस्तुएँ, सेवाएँ एवं रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। वैश्वीकरण ने आर्थिक विकास को गति दी तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत बनाया। हालांकि इसके साथ प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है, फिर भी इसके अनेक सकारात्मक प्रभाव दिखाई देते हैं।

वैश्वीकरण के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—

(i) अंतरराष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि।

(ii) विदेशी निवेश को बढ़ावा।

(iii) रोजगार के नए अवसर।

(iv) आधुनिक तकनीक का विकास।

(v) उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प।

(vi) आर्थिक विकास में तेजी।

30. वैश्वीकरण की प्रमुख हानियाँ लिखिए।

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण के अनेक लाभ होने के साथ-साथ कुछ हानियाँ भी हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बढ़ते प्रभाव से छोटे एवं स्थानीय उद्योगों को कठिन प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। आर्थिक असमानता बढ़ सकती है तथा कुछ क्षेत्रों में बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसके अतिरिक्त स्थानीय संस्कृति एवं पारंपरिक उद्योग भी प्रभावित होते हैं। इसलिए वैश्वीकरण के लाभों के साथ उसकी चुनौतियों को भी समझना आवश्यक है।

वैश्वीकरण की प्रमुख हानियाँ निम्नलिखित हैं—

(i) स्थानीय उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव।

(ii) बेरोजगारी की समस्या।

(iii) आर्थिक असमानता में वृद्धि।

(iv) बहुराष्ट्रीय कंपनियों का बढ़ता प्रभाव।

(v) स्थानीय संस्कृति एवं परंपराओं पर प्रभाव।

31. वैश्वीकरण का भारत पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर ⇒ 1991 में नई आर्थिक नीति लागू होने के बाद भारत में वैश्वीकरण की प्रक्रिया तेज हुई। विदेशी निवेश बढ़ा, उद्योगों का विस्तार हुआ तथा सूचना प्रौद्योगिकी, दूरसंचार एवं सेवा क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास हुआ। भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार मिले और निर्यात में वृद्धि हुई। इसके साथ ही विदेशी कंपनियों के आगमन से प्रतिस्पर्धा बढ़ी, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता की वस्तुएँ उपलब्ध होने लगीं। हालांकि छोटे उद्योगों को प्रतिस्पर्धा के कारण अनेक कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ा।

(i) विदेशी निवेश में वृद्धि हुई।

(ii) उद्योग एवं सेवा क्षेत्र का विकास हुआ।

(iii) रोजगार के नए अवसर मिले।

(iv) अंतरराष्ट्रीय व्यापार बढ़ा।

(v) स्थानीय उद्योगों में प्रतिस्पर्धा बढ़ी।

32. उदारीकरण (Liberalisation) क्या है?

उत्तर ⇒ उदारीकरण वह प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत सरकार उद्योग, व्यापार एवं निवेश पर लगाए गए अनावश्यक नियंत्रणों एवं प्रतिबंधों को कम करती है। इसका उद्देश्य निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करना, विदेशी निवेश आकर्षित करना तथा आर्थिक विकास को गति देना है। भारत में वर्ष 1991 से उदारीकरण की नीति लागू की गई, जिससे देश की अर्थव्यवस्था वैश्विक बाजार से अधिक जुड़ गई।

(i) सरकारी नियंत्रण कम किए जाते हैं।

(ii) निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलता है।

(iii) विदेशी निवेश बढ़ता है।

(iv) आर्थिक विकास को गति मिलती है।

(v) वैश्विक व्यापार का विस्तार होता है।

33. निजीकरण (Privatisation) क्या है?

उत्तर ⇒ निजीकरण वह प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों एवं सेवाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाती है या उनका स्वामित्व निजी कंपनियों को सौंपती है। इसका उद्देश्य उद्योगों की कार्यक्षमता बढ़ाना, निवेश को प्रोत्साहित करना तथा आर्थिक विकास को गति देना है। भारत में आर्थिक सुधारों के बाद निजीकरण की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया गया।

(i) निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ती है।

(ii) सरकारी नियंत्रण कम होता है।

(iii) उद्योगों की कार्यक्षमता बढ़ती है।

(iv) निवेश में वृद्धि होती है।

(v) आर्थिक सुधारों को बढ़ावा मिलता है।

34. विश्व व्यापार संगठन (WTO) क्या है?

उत्तर ⇒ विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization – WTO) की स्थापना 1 जनवरी 1995 को अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुचारु एवं नियमबद्ध बनाने के उद्देश्य से की गई। इसका मुख्यालय जिनेवा (स्विट्ज़रलैंड) में स्थित है। WTO सदस्य देशों के बीच व्यापार संबंधी विवादों का समाधान करता है तथा मुक्त एवं निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देता है। वर्तमान वैश्वीकरण में WTO की महत्वपूर्ण भूमिका है।

(i) स्थापना – 1 जनवरी 1995।

(ii) मुख्यालय – जिनेवा (स्विट्ज़रलैंड)।

(iii) अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देता है।

(iv) व्यापारिक विवादों का समाधान करता है।

(v) मुक्त व्यापार का समर्थन करता है।

35. वैश्वीकरण में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) की क्या भूमिका है?

उत्तर ⇒ सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) ने वैश्वीकरण को अत्यधिक गति प्रदान की है। इंटरनेट, मोबाइल फोन, ई-मेल, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विश्व के विभिन्न देशों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान कुछ ही क्षणों में संभव हो गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऑनलाइन शिक्षा, बैंकिंग, ई-कॉमर्स एवं डिजिटल सेवाओं का तेजी से विकास हुआ है। आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था में ICT की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

(i) संचार तेज एवं आसान हुआ।

(ii) ई-कॉमर्स का विकास हुआ।

(iii) ऑनलाइन व्यापार बढ़ा।

(iv) वैश्विक संपर्क मजबूत हुआ।

(v) डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला.

36. वैश्वीकरण में परिवहन एवं संचार के साधनों की क्या भूमिका है?

उत्तर ⇒ परिवहन एवं संचार के आधुनिक साधनों ने वैश्वीकरण को गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। तेज़ रेल, सड़क, जल एवं वायु परिवहन के कारण वस्तुओं का आयात-निर्यात सरल एवं कम खर्चीला हो गया है। इंटरनेट, मोबाइल, उपग्रह एवं डिजिटल संचार के माध्यम से विश्व के विभिन्न देशों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान कुछ ही क्षणों में संभव हो गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश एवं सांस्कृतिक संबंधों का तेजी से विस्तार हुआ है।

(i) अंतरराष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि हुई।

(ii) वस्तुओं का परिवहन आसान हुआ।

(iii) संचार व्यवस्था विकसित हुई।

(iv) देशों के बीच संपर्क बढ़ा।

(v) वैश्वीकरण को गति मिली।

37. वैश्वीकरण के विकास में भारत का क्या योगदान है?

उत्तर ⇒ भारत वैश्वीकरण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी, औषधि उद्योग, वस्त्र उद्योग, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग वस्तुएँ तथा सेवा क्षेत्र में भारत ने विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। भारतीय कंपनियाँ अनेक देशों में निवेश कर रही हैं तथा विदेशी कंपनियाँ भी भारत में निवेश कर रही हैं। इससे भारत का अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं आर्थिक विकास तेजी से बढ़ा है।

(i) सूचना प्रौद्योगिकी का विकास।

(ii) सेवा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति।

(iii) निर्यात में वृद्धि।

(iv) विदेशी निवेश को आकर्षित किया।

(v) वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया।

38. वैश्वीकरण के विकास में झारखंड का क्या योगदान है?

उत्तर ⇒ झारखंड खनिज संसाधनों से समृद्ध राज्य है, इसलिए वैश्वीकरण के दौर में इसका विशेष महत्व है। राज्य से लौह अयस्क, कोयला, ताँबा, बॉक्साइट एवं इस्पात का उत्पादन देश एवं विदेशों में भेजा जाता है। जमशेदपुर, बोकारो एवं राँची जैसे औद्योगिक नगर भारत की औद्योगिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। टाटा स्टील सहित अनेक उद्योगों ने झारखंड को वैश्विक औद्योगिक मानचित्र पर पहचान दिलाई है। इससे रोजगार, निवेश एवं व्यापार को बढ़ावा मिला है।

(i) खनिज संसाधनों का निर्यात।

(ii) इस्पात उद्योग का विकास।

(iii) विदेशी निवेश को बढ़ावा।

(iv) रोजगार के अवसरों में वृद्धि।

(v) राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई।

39. वैश्वीकरण के विकास के प्रमुख कारण एवं परिणाम लिखिए।

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण के विकास के पीछे परिवहन एवं संचार का विकास, औद्योगिक क्रांति, मुक्त व्यापार, बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विस्तार तथा आधुनिक तकनीक प्रमुख कारण रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप विश्व व्यापार में वृद्धि हुई, नई तकनीकों का विकास हुआ तथा देशों के बीच आर्थिक संबंध मजबूत हुए। दूसरी ओर, स्थानीय उद्योगों पर प्रतिस्पर्धा बढ़ी तथा आर्थिक असमानता जैसी समस्याएँ भी सामने आईं।

प्रमुख कारण

(i) परिवहन एवं संचार का विकास।

(ii) औद्योगिक क्रांति।

(iii) मुक्त व्यापार।

(iv) आधुनिक तकनीक।

(v) बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विस्तार।

प्रमुख परिणाम

(i) अंतरराष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि।

(ii) आर्थिक विकास को गति।

(iii) तकनीकी प्रगति।

(iv) वैश्विक संपर्क मजबूत हुआ।

(v) स्थानीय उद्योगों में प्रतिस्पर्धा बढ़ी।

40. ‘वैश्विक दुनिया का बनना’ अध्याय का निष्कर्ष लिखिए।

उत्तर ⇒ वैश्विक दुनिया का निर्माण कई सदियों में व्यापार, प्रवास, तकनीकी प्रगति, परिवहन एवं संचार के विकास के कारण संभव हुआ। रेशम मार्ग से लेकर आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी तक, विश्व लगातार एक-दूसरे के निकट आता गया। प्रथम एवं द्वितीय विश्व युद्ध, महामंदी, ब्रेटन वुड्स व्यवस्था तथा वैश्वीकरण जैसी घटनाओं ने विश्व अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी। आज विश्व के अधिकांश देश व्यापार, तकनीक एवं आर्थिक सहयोग के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यह अध्याय हमें वैश्वीकरण के लाभों एवं चुनौतियों दोनों को समझने तथा संतुलित आर्थिक विकास की आवश्यकता का संदेश देता है।

More Class 10 History Revision Notes

Chapter 1: यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय
Chapter 2: भारत में राष्ट्रवाद
Chapter 3: भूमण्डलीकृत विश्व का बनना
Chapter 4: औद्योगीकरण का युग
Chapter 5: मुद्रण संस्कृति और आधुनिक दुनिया

Class 10 Notes by Subject

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