Class 10 History: औद्योगीकरण का युग

Revise the NCERT Class 10 History chapter, Age of Industrialisation, with these concise and well-organised revision notes. JAC Exam Prep (jac.jharkhandexamprep.com) provides NCERT Class 10 History Age of Industrialisation Revision Notes based on the latest NCERT syllabus. Download the PDF below and revise the chapter for school examinations, CBSE board examinations, and competitive exams such as JEE and NEET.

WhatsApp Channel
Join Now
Telegram Channel
Join Now

Chapter Overview

Class10
SubjectHistory 
Chapter NameAge of Industrialisation
औद्योगीकरण का युग
Resource TypeRevision Notes
SyllabusNCERT
Suitable ForCBSE, JAC and other state boards

औद्योगीकरण का युग Revision Notes

1. औद्योगीकरण का युग (Age of Industrialisation) क्या है?

उत्तर ⇒ औद्योगीकरण का युग वह काल है जिसमें हस्तनिर्मित वस्तुओं के स्थान पर मशीनों द्वारा बड़े पैमाने पर उत्पादन होने लगा तथा कारखानों एवं आधुनिक तकनीक का विकास हुआ। इस परिवर्तन के कारण कृषि प्रधान समाज धीरे-धीरे औद्योगिक समाज में बदल गया। लगभग 1760 से 1840 ई. के बीच का समय औद्योगिक क्रांति का प्रमुख काल माना जाता है। इस युग में उत्पादन, व्यापार, परिवहन तथा लोगों के जीवन में व्यापक परिवर्तन हुए। मशीनों के प्रयोग से उत्पादन तेज़ हुआ तथा विश्व अर्थव्यवस्था के विकास को नई दिशा मिली।

(i) मशीनों द्वारा उत्पादन प्रारम्भ हुआ।

(ii) कारखानों का विकास हुआ।

(iii) कृषि समाज औद्योगिक समाज में बदला।

(iv) उत्पादन एवं व्यापार में वृद्धि हुई।

(v) आधुनिक उद्योगों का विकास हुआ।

2. औद्योगीकरण से पहले की व्यवस्था (आदि-औद्योगीकरण) क्या थी?

उत्तर ⇒ औद्योगीकरण से पहले उत्पादन मुख्यतः गाँवों एवं कारीगरों के घरों में होता था। इस व्यवस्था को आदि-औद्योगीकरण (Proto-Industrialisation) कहा जाता है। इसमें उत्पादन फैक्ट्रियों में नहीं, बल्कि किसानों एवं दस्तकारों द्वारा घरों में किया जाता था। उत्पादन पर व्यापारिक गिल्डों का नियंत्रण रहता था तथा तैयार वस्तुएँ व्यापारियों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचती थीं। यह व्यवस्था औद्योगिक क्रांति से पहले यूरोप में व्यापक रूप से प्रचलित थी।

(i) उत्पादन घरों एवं गाँवों में होता था।

(ii) फैक्ट्री प्रणाली विकसित नहीं हुई थी।

(iii) गिल्डों का नियंत्रण था।

(iv) किसान एवं दस्तकार उत्पादन करते थे।

(v) अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए वस्तुएँ बनाई जाती थीं।

3. आदि-औद्योगीकरण (Proto-Industrialisation) क्या था?

उत्तर ⇒ आदि-औद्योगीकरण वह अवस्था थी जो कारखानों की स्थापना से पहले अस्तित्व में थी। इस व्यवस्था में बड़े पैमाने पर उत्पादन तो होता था, लेकिन यह उत्पादन कारखानों के बजाय गाँवों में रहने वाले कारीगरों एवं किसानों के घरों में किया जाता था। व्यापारी कच्चा माल उपलब्ध कराते थे और तैयार वस्तुओं को बाजार में बेचते थे। इतिहासकार इस व्यवस्था को औद्योगीकरण की प्रारम्भिक अवस्था मानते हैं।

(i) कारखानों से पहले की उत्पादन व्यवस्था थी।

(ii) गाँवों में उत्पादन होता था।

(iii) व्यापारी उत्पादन को नियंत्रित करते थे।

(iv) कारीगर एवं किसान कार्य करते थे।

(v) अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा मिला।

4. आदि-औद्योगीकरण के विकास के प्रमुख कारण लिखिए।

उत्तर ⇒ 17वीं एवं 18वीं शताब्दी में विश्व व्यापार के विस्तार के कारण वस्तुओं की माँग तेजी से बढ़ी। शहरों में गिल्डों के कठोर नियमों के कारण व्यापारी उत्पादन का विस्तार नहीं कर पा रहे थे। दूसरी ओर गाँवों में किसानों की आय कम हो रही थी, इसलिए वे अतिरिक्त रोजगार की तलाश में थे। व्यापारियों ने उन्हें कच्चा माल एवं अग्रिम धन देकर उत्पादन करवाना शुरू किया। इसी प्रक्रिया से आदि-औद्योगीकरण का विकास हुआ।

(i) विश्व व्यापार का विस्तार।

(ii) वस्तुओं की माँग में वृद्धि।

(iii) गिल्डों के कठोर नियम।

(iv) किसानों की घटती आय।

(v) व्यापारियों द्वारा अग्रिम धन उपलब्ध कराना।

5. शहरों के व्यापारी गाँवों की ओर क्यों गए?

उत्तर ⇒ शहरों में व्यापारिक गिल्डों का उत्पादन एवं व्यापार पर पूर्ण नियंत्रण था। ये गिल्ड नए व्यापारियों को व्यवसाय में प्रवेश नहीं करने देती थीं तथा उत्पादन एवं कीमतों को नियंत्रित करती थीं। इसके कारण व्यापारी अपने व्यापार का विस्तार नहीं कर पा रहे थे। दूसरी ओर गाँवों में श्रमिक आसानी से उपलब्ध थे तथा वहाँ उत्पादन अपेक्षाकृत कम लागत पर कराया जा सकता था। इसलिए व्यापारी गाँवों की ओर चले गए और किसानों एवं कारीगरों से वस्तुओं का उत्पादन करवाने लगे।

(i) गिल्डों का कठोर नियंत्रण।

(ii) नए व्यापारियों पर प्रतिबंध।

(iii) गाँवों में सस्ता श्रम उपलब्ध था।

(iv) उत्पादन का विस्तार संभव था।

(v) व्यापारियों को अधिक लाभ प्राप्त हुआ।

6. गाँवों के किसानों ने आदि-औद्योगिक उत्पादन का कार्य क्यों स्वीकार किया?

उत्तर ⇒ 17वीं एवं 18वीं शताब्दी में गाँवों के छोटे किसान एवं काश्तकार आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे थे। साझा भूमि (कॉमन्स) की घेराबंदी होने से उनकी आय के स्रोत कम हो गए थे। ऐसे समय में व्यापारियों ने उन्हें कच्चा माल एवं अग्रिम धन (पेशगी) देकर वस्तुओं का उत्पादन करने का अवसर दिया। किसान खेती के साथ-साथ घर पर ही उत्पादन कार्य करके अतिरिक्त आय अर्जित करने लगे। इससे उनके पूरे परिवार को रोजगार मिला तथा जीवनयापन में सहायता मिली।

(i) किसानों की आय कम हो गई थी।

(ii) साझा भूमि की घेराबंदी हुई।

(iii) व्यापारियों ने अग्रिम धन दिया।

(iv) खेती के साथ अतिरिक्त रोजगार मिला।

(v) पूरे परिवार को काम मिला।

7. आदि-औद्योगिक व्यवस्था में कपड़ा उत्पादन की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ आदि-औद्योगिक व्यवस्था में कपड़ा उत्पादन कई चरणों में पूरा होता था। व्यापारी सबसे पहले स्टेपलर से ऊन खरीदता था। इसके बाद ऊन गाँवों में रहने वाले सूत कातने वालों के पास भेजी जाती थी। तैयार धागा बुनकरों को दिया जाता था, जो कपड़ा बुनते थे। इसके बाद कपड़ा फुलर के पास धोने एवं मोटा करने के लिए भेजा जाता था। फिर रंगाई एवं अंतिम फिनिशिंग के बाद व्यापारी तैयार कपड़े को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचता था।

(i) व्यापारी ऊन खरीदता था।

(ii) सूत कताई गाँवों में होती थी।

(iii) बुनकर कपड़ा तैयार करते थे।

(iv) फुलर कपड़े की फिनिशिंग करता था।

(v) तैयार कपड़ा निर्यात किया जाता था।

8. कारखानों (Factories) का उदय कैसे हुआ?

उत्तर ⇒ विश्व में सबसे पहले आधुनिक कारखानों की स्थापना 1730 के दशक में इंग्लैंड में हुई। 18वीं शताब्दी के अंत तक कारखानों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। उत्पादन की सभी प्रक्रियाएँ एक ही स्थान पर होने लगीं, जिससे उत्पादन पर नियंत्रण आसान हो गया। मशीनों एवं भाप शक्ति के प्रयोग से उत्पादन तेज़ हुआ तथा औद्योगिक क्रांति को गति मिली। 19वीं शताब्दी की शुरुआत तक कारखाने इंग्लैंड के औद्योगिक विकास का प्रमुख आधार बन चुके थे।

(i) सबसे पहले इंग्लैंड में कारखाने स्थापित हुए।

(ii) मशीनों का प्रयोग बढ़ा।

(iii) उत्पादन एक ही स्थान पर होने लगा।

(iv) उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई।

(v) औद्योगिक क्रांति को गति मिली।

9. कारखाना प्रणाली (Factory System) के प्रमुख लाभ लिखिए।

उत्तर ⇒ कारखाना प्रणाली के अंतर्गत उत्पादन की सभी प्रक्रियाएँ एक ही स्थान पर होती थीं। इससे मालिकों के लिए उत्पादन की निगरानी करना, गुणवत्ता बनाए रखना तथा श्रमिकों पर नियंत्रण रखना आसान हो गया। मशीनों के प्रयोग से उत्पादन की गति बढ़ी तथा लागत में कमी आई। इस प्रणाली ने बड़े पैमाने पर वस्तुओं के निर्माण को संभव बनाया और आधुनिक उद्योगों के विकास का मार्ग प्रशस्त किया।

(i) उत्पादन पर बेहतर नियंत्रण।

(ii) गुणवत्ता बनाए रखना आसान।

(iii) श्रमिकों की निगरानी संभव।

(iv) उत्पादन लागत में कमी।

(v) बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव हुआ।

10. कपास उद्योग (Cotton Industry) को नए औद्योगिक युग का प्रतीक क्यों कहा जाता है?

उत्तर ⇒ औद्योगिक क्रांति के प्रारम्भिक चरण में कपास उद्योग सबसे तेजी से विकसित होने वाला उद्योग था। मशीनों के प्रयोग से कपास की कताई एवं बुनाई पहले की तुलना में बहुत तेज़ हो गई। 1760 से 1787 के बीच ब्रिटेन में कच्चे कपास के आयात में कई गुना वृद्धि हुई। कपास उद्योग की सफलता ने अन्य उद्योगों में भी मशीनों के उपयोग को प्रोत्साहित किया। इसलिए कपास उद्योग को नए औद्योगिक युग का प्रतीक माना जाता है।

(i) सबसे तेजी से विकसित उद्योग था।

(ii) मशीनों का व्यापक उपयोग हुआ।

(iii) उत्पादन में भारी वृद्धि हुई।

(iv) कपास का आयात बढ़ा।

(v) औद्योगिक क्रांति को नई दिशा मिली।

11. औद्योगिक परिवर्तन की गति धीमी क्यों थी?

उत्तर ⇒ औद्योगिक क्रांति के दौरान सभी उद्योगों में मशीनों का प्रयोग एक साथ नहीं हुआ। नई मशीनें अत्यधिक महँगी थीं तथा उन्हें खरीदने और स्थापित करने में अधिक पूँजी की आवश्यकता होती थी। कई मशीनें जल्दी खराब हो जाती थीं और उनकी मरम्मत पर भी अधिक खर्च आता था। अनेक उद्योगपति नई तकनीक अपनाने में जोखिम महसूस करते थे। इसलिए परंपरागत उद्योगों एवं हस्तशिल्प का महत्व लंबे समय तक बना रहा और औद्योगिक परिवर्तन धीरे-धीरे आगे बढ़ा।

(i) नई मशीनें महँगी थीं।

(ii) उद्योगपति निवेश करने से हिचकते थे।

(iii) मशीनों की मरम्मत महँगी थी।

(iv) पारंपरिक उद्योग अभी भी सक्रिय थे।

(v) तकनीकी परिवर्तन धीरे-धीरे हुए।

12. भाप इंजन (Steam Engine) के प्रसार की गति धीमी क्यों थी?

उत्तर ⇒ जेम्स वॉट ने 1771 ई. में भाप इंजन में महत्वपूर्ण सुधार किया, लेकिन प्रारम्भिक वर्षों में इसका उपयोग सीमित रहा। मशीनें महँगी थीं तथा उद्योगपति उन पर अधिक पूँजी निवेश नहीं करना चाहते थे। इसके अतिरिक्त इंजन का रखरखाव भी कठिन एवं खर्चीला था। 19वीं शताब्दी की शुरुआत तक इंग्लैंड में भाप इंजनों की संख्या बहुत कम थी। इससे स्पष्ट होता है कि नई तकनीकों को उद्योगों में अपनाने की प्रक्रिया धीरे-धीरे हुई।

(i) भाप इंजन महँगा था।

(ii) उद्योगपति निवेश से बचते थे।

(iii) रखरखाव कठिन था।

(iv) शुरुआती वर्षों में कम उपयोग हुआ।

(v) तकनीकी परिवर्तन धीरे-धीरे हुए।

13. 19वीं शताब्दी में यूरोप के उद्योगपति मशीनों की अपेक्षा हाथ के श्रम को अधिक क्यों पसंद करते थे?

उत्तर ⇒ विक्टोरियन ब्रिटेन में बड़ी संख्या में सस्ते मजदूर उपलब्ध थे, इसलिए उद्योगपतियों को मशीनों पर अधिक खर्च करने की आवश्यकता नहीं महसूस होती थी। कई उद्योगों में काम मौसमी होता था, इसलिए स्थायी मशीनें खरीदना लाभदायक नहीं था। इसके अलावा बाजार में हाथ से बनी सुंदर एवं विशेष डिजाइन वाली वस्तुओं की अधिक माँग थी, जिन्हें मशीनें आसानी से नहीं बना सकती थीं। इसी कारण उद्योगपति लंबे समय तक हाथ के श्रम को प्राथमिकता देते रहे।

(i) सस्ते मजदूर आसानी से उपलब्ध थे।

(ii) मशीनें महँगी थीं।

(iii) कई उद्योग मौसमी थे।

(iv) हस्तनिर्मित वस्तुओं की अधिक माँग थी।

(v) मशीनों की सीमाएँ थीं।

14. औद्योगीकरण का मजदूरों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर ⇒ औद्योगीकरण के प्रारम्भिक दौर में मजदूरों का जीवन अत्यंत कठिन था। नौकरी की तलाश में हजारों लोग गाँवों से शहरों की ओर आने लगे। उन्हें कम मजदूरी, लंबे कार्य घंटे तथा असुरक्षित कार्यस्थलों में काम करना पड़ता था। कई उद्योगों में काम मौसमी होने के कारण मजदूर अक्सर बेरोजगार हो जाते थे। बेरोजगारी, महँगाई एवं खराब जीवन परिस्थितियों के कारण उनका जीवन संघर्षपूर्ण बना रहा।

(i) कम मजदूरी मिलती थी।

(ii) लंबे समय तक कार्य करना पड़ता था।

(iii) बेरोजगारी की समस्या थी।

(iv) जीवन स्तर निम्न था।

(v) शहरों की ओर पलायन बढ़ा।

15. भारतीय कपड़े का युग (Age of Indian Textiles) क्या था?

उत्तर ⇒ मशीन उद्योग के विकास से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सूती एवं रेशमी वस्त्रों का विशेष स्थान था। भारत में उच्च गुणवत्ता वाला कपास पैदा होता था, जिससे उत्कृष्ट कपड़े बनाए जाते थे। भारतीय व्यापारी सूरत, मछलीपट्टनम एवं हुगली जैसे बंदरगाहों से एशिया, यूरोप एवं अफ्रीका के देशों में वस्त्रों का निर्यात करते थे। भारतीय वस्त्र अपनी गुणवत्ता एवं सुंदरता के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध थे।

(i) भारतीय वस्त्र विश्वभर में प्रसिद्ध थे।

(ii) सूती एवं रेशमी कपड़ों का निर्यात होता था।

(iii) उत्कृष्ट गुणवत्ता का कपास उपलब्ध था।

(iv) प्रमुख बंदरगाहों से व्यापार होता था।

(v) भारत अंतरराष्ट्रीय वस्त्र व्यापार का प्रमुख केंद्र था।

16. ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन के बाद भारतीय बुनकरों की स्थिति कैसी हो गई?

उत्तर ⇒ ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा बंगाल एवं अन्य क्षेत्रों में राजनीतिक सत्ता स्थापित करने के बाद भारतीय बुनकरों की स्थिति लगातार खराब होती गई। कंपनी ने व्यापार पर अपना एकाधिकार स्थापित कर लिया तथा बुनकरों को केवल उसी को कपड़ा बेचने के लिए बाध्य किया। गुमाश्ताओं के माध्यम से बुनकरों की निगरानी की जाती थी और उन्हें बहुत कम कीमत पर कपड़ा बेचने के लिए विवश किया जाता था। शोषण से परेशान होकर अनेक बुनकरों ने गाँव छोड़ दिए, कुछ ने करघे बंद कर दिए तथा कई लोग खेती या मजदूरी करने लगे।

(i) कंपनी ने व्यापार पर एकाधिकार स्थापित किया।

(ii) बुनकरों को कम कीमत मिलती थी।

(iii) गुमाश्ताओं द्वारा शोषण किया जाता था।

(iv) अनेक बुनकरों ने गाँव छोड़ दिए।

(v) हस्तकरघा उद्योग कमजोर हो गया।

17. गुमाश्ता (Gomastha) कौन था? उसकी क्या भूमिका थी?

उत्तर ⇒ गुमाश्ता ईस्ट इंडिया कंपनी का वेतनभोगी कर्मचारी होता था, जिसे भारतीय बुनकरों पर नियंत्रण रखने के लिए नियुक्त किया जाता था। उसका कार्य बुनकरों को अग्रिम धन देना, उनसे कपड़ा खरीदना, उत्पादन की निगरानी करना तथा कंपनी के नियमों का पालन कराना था। कई गुमाश्ता बुनकरों के साथ कठोर व्यवहार करते थे और समय पर माल न देने पर उन्हें दंडित भी करते थे। इस कारण बुनकरों में कंपनी के प्रति असंतोष बढ़ गया।

(i) कंपनी का कर्मचारी था।

(ii) बुनकरों की निगरानी करता था।

(iii) अग्रिम धन देता था।

(iv) तैयार कपड़ा एकत्र करता था।

(v) बुनकरों का शोषण करता था।

18. भारत में मैनचेस्टर के कपड़ों के आगमन का भारतीय बुनकरों पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर ⇒ 19वीं शताब्दी में ब्रिटेन के मैनचेस्टर में मशीनों से बने सस्ते कपड़े भारत आने लगे। इन कपड़ों की कीमत हाथ से बने भारतीय कपड़ों की तुलना में कम थी। परिणामस्वरूप भारतीय वस्त्रों की माँग घटने लगी और बुनकरों का निर्यात बाजार लगभग समाप्त हो गया। बाद में भारतीय बाजार भी विदेशी कपड़ों से भर गया। इससे भारतीय हस्तकरघा उद्योग को भारी नुकसान हुआ और लाखों बुनकरों की आजीविका प्रभावित हुई।

(i) भारतीय कपड़ों की माँग घट गई।

(ii) विदेशी कपड़ों का आयात बढ़ा।

(iii) बुनकरों की आय कम हो गई।

(iv) निर्यात बाजार समाप्त हो गया।

(v) हस्तकरघा उद्योग कमजोर पड़ा।

19. भारत में आधुनिक उद्योगों की शुरुआत कैसे हुई?

उत्तर ⇒ भारत में आधुनिक उद्योगों की शुरुआत 19वीं शताब्दी के मध्य में हुई। 1854 में बंबई में पहली सूती कपड़ा मिल स्थापित की गई। इसके बाद बंगाल में जूट मिल, अहमदाबाद में सूती मिल तथा मद्रास में कताई एवं बुनाई मिलों की स्थापना हुई। भारतीय उद्योगपतियों जैसे जमशेदजी टाटा, द्वारकानाथ टैगोर, डिनशॉ पेटिट, सेठ हुकुमचंद एवं जी.डी. बिड़ला ने भारतीय उद्योगों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

(i) 1854 में पहली सूती मिल स्थापित हुई।

(ii) जूट एवं कपड़ा उद्योग विकसित हुए।

(iii) भारतीय उद्योगपतियों ने निवेश किया।

(iv) आधुनिक उद्योगों का विस्तार हुआ।

(v) रोजगार के अवसर बढ़े।

20. भारत में फैक्ट्री मजदूरों की उत्पत्ति कैसे हुई?

उत्तर ⇒ भारत में आधुनिक उद्योगों के विकास के साथ बड़ी संख्या में मजदूर गाँवों से शहरों की ओर आने लगे। अधिकांश मजदूर किसान एवं कारीगर परिवारों से थे, जिन्हें गाँवों में पर्याप्त रोजगार नहीं मिल पाता था। वे बंबई, कलकत्ता, कानपुर एवं अहमदाबाद जैसे औद्योगिक नगरों की मिलों एवं कारखानों में काम करने लगे। मजदूरों की भर्ती प्रायः जॉबर के माध्यम से होती थी, जो उन्हें काम दिलाने एवं शहर में बसने में सहायता करता था।

(i) मजदूर गाँवों से शहर आए।

(ii) अधिकांश किसान एवं कारीगर थे।

(iii) औद्योगिक नगरों में रोजगार मिला।

(iv) जॉबर भर्ती का कार्य करता था।

(v) औद्योगिक श्रमिक वर्ग का विकास हुआ।

21. जॉबर (Jobber) कौन था? उसकी क्या भूमिका थी?

उत्तर ⇒ जॉबर वह व्यक्ति होता था जो कारखानों के लिए मजदूरों की भर्ती करता था। वह प्रायः मिल का पुराना एवं विश्वसनीय कर्मचारी होता था। जॉबर अपने गाँव या आसपास के क्षेत्रों से मजदूरों को शहर लाता था तथा उन्हें कारखानों में काम दिलाता था। वह नए मजदूरों को रहने की व्यवस्था करने एवं आवश्यकता पड़ने पर आर्थिक सहायता भी देता था। धीरे-धीरे जॉबर का प्रभाव बढ़ गया और कई बार वह मजदूरों से नौकरी दिलाने के बदले पैसे एवं उपहार भी लेने लगा।

(i) मजदूरों की भर्ती करता था।

(ii) गाँवों से श्रमिक लाता था।

(iii) नौकरी दिलाने में सहायता करता था।

(iv) मजदूरों का मार्गदर्शन करता था।

(v) कई बार अपने पद का दुरुपयोग भी करता था।

22. भारत में प्रारम्भिक उद्योगों के विकास में भारतीय उद्योगपतियों का योगदान लिखिए।

उत्तर ⇒ भारत में आधुनिक उद्योगों के विकास में अनेक भारतीय उद्योगपतियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। द्वारकानाथ टैगोर, जमशेदजी नुसरवानजी टाटा, डिनशॉ पेटिट, सेठ हुकुमचंद तथा जी.डी. बिड़ला जैसे उद्योगपतियों ने व्यापार से अर्जित पूँजी को उद्योगों में निवेश किया। उन्होंने सूती वस्त्र, जूट, इस्पात एवं अन्य उद्योगों की स्थापना कर भारत के औद्योगिक विकास को गति प्रदान की। इन उद्योगों से रोजगार के अवसर बढ़े तथा भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत हुई।

(i) आधुनिक उद्योगों की स्थापना की।

(ii) भारतीय पूँजी का निवेश किया।

(iii) रोजगार के अवसर बढ़ाए।

(iv) औद्योगिक विकास को गति दी।

(v) भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया।

23. प्रथम विश्व युद्ध का भारतीय उद्योगों पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर ⇒ प्रथम विश्व युद्ध (1914–1918) के दौरान ब्रिटेन के कारखाने युद्ध सामग्री के निर्माण में व्यस्त हो गए। परिणामस्वरूप भारत में ब्रिटिश निर्मित वस्तुओं का आयात कम हो गया। इस स्थिति का लाभ भारतीय उद्योगों को मिला। भारतीय कारखानों में जूट की बोरियाँ, वर्दियाँ, तंबू, जूते एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन बढ़ गया। नए कारखाने स्थापित हुए, पुराने कारखानों में अधिक पालियों में कार्य होने लगा तथा रोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई।

(i) ब्रिटिश वस्तुओं का आयात घटा।

(ii) भारतीय उद्योगों का उत्पादन बढ़ा।

(iii) नए कारखाने स्थापित हुए।

(iv) रोजगार के अवसर बढ़े।

(v) औद्योगिक विकास को गति मिली।

24. 20वीं शताब्दी में हथकरघा उद्योग का पुनरुत्थान कैसे हुआ?

उत्तर ⇒ मशीनों के बढ़ते उपयोग के बावजूद 20वीं शताब्दी में भारतीय हथकरघा उद्योग का पुनरुत्थान हुआ। बुनकरों ने फ्लाई शटल जैसी नई तकनीक अपनाई, जिससे उत्पादन की गति बढ़ी और श्रम की बचत हुई। इसके अतिरिक्त हाथ से बनी विशेष डिज़ाइन वाली साड़ियों, लुंगियों एवं अन्य वस्त्रों की माँग बनी रही, जिन्हें मशीनें आसानी से तैयार नहीं कर सकती थीं। इस कारण हथकरघा उद्योग लंबे समय तक अस्तित्व में बना रहा।

(i) फ्लाई शटल का प्रयोग बढ़ा।

(ii) उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई।

(iii) विशेष डिज़ाइन वाले वस्त्रों की माँग बनी रही।

(iv) हस्तकरघा उद्योग सुरक्षित रहा।

(v) बुनकरों को रोजगार मिलता रहा।

25. विज्ञापन (Advertisements) ने औद्योगीकरण में क्या भूमिका निभाई?

उत्तर ⇒ औद्योगीकरण के साथ वस्तुओं का उत्पादन बढ़ा, इसलिए उन्हें बेचने के लिए नए उपभोक्ताओं की आवश्यकता थी। इस उद्देश्य से विज्ञापनों का व्यापक उपयोग किया गया। कंपनियों ने आकर्षक लेबल, कैलेंडर तथा पोस्टरों के माध्यम से अपने उत्पादों का प्रचार किया। भारतीय ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए देवी-देवताओं, राजाओं एवं सांस्कृतिक प्रतीकों के चित्रों का प्रयोग किया गया। विज्ञापनों ने लोगों में नई आवश्यकताएँ उत्पन्न कीं तथा उपभोक्ता संस्कृति के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

(i) नए उपभोक्ता तैयार किए।

(ii) उत्पादों का प्रचार किया।

(iii) आकर्षक लेबल एवं कैलेंडर बनाए।

(iv) बिक्री में वृद्धि हुई।

(v) उपभोक्ता संस्कृति का विकास हुआ.

26. उत्पाद लेबल (Product Labels) का क्या महत्व था?

उत्तर ⇒ औद्योगीकरण के दौर में उत्पाद लेबल का उपयोग वस्तुओं की पहचान एवं बिक्री बढ़ाने के लिए किया जाता था। मैनचेस्टर के उद्योगपति अपने कपड़ों के बंडलों पर कंपनी का नाम, उत्पादन स्थान तथा आकर्षक चित्रों वाले लेबल लगाते थे। इन लेबलों का उद्देश्य ग्राहकों में विश्वास पैदा करना तथा उत्पाद की गुणवत्ता का संदेश देना था। भारतीय बाजार को आकर्षित करने के लिए कई लेबलों पर देवी-देवताओं तथा सांस्कृतिक प्रतीकों के चित्र भी बनाए जाते थे। इससे ग्राहकों का विश्वास बढ़ता था और उत्पादों की बिक्री में वृद्धि होती थी।

(i) उत्पाद की पहचान कराते थे।

(ii) ग्राहकों का विश्वास बढ़ाते थे।

(iii) गुणवत्ता का संदेश देते थे।

(iv) बिक्री बढ़ाने में सहायता करते थे।

(v) आकर्षक चित्रों का उपयोग किया जाता था।

27. विज्ञापनों में देवी-देवताओं एवं राजाओं की तस्वीरों का उपयोग क्यों किया जाता था?

उत्तर ⇒ औद्योगीकरण के समय कंपनियाँ अपने उत्पादों को लोकप्रिय बनाने के लिए विज्ञापनों एवं लेबलों पर देवी-देवताओं, राजाओं एवं प्रतिष्ठित व्यक्तियों की तस्वीरें छापती थीं। भारतीय समाज में धार्मिक एवं सांस्कृतिक भावनाओं का विशेष महत्व था, इसलिए इन चित्रों के माध्यम से लोगों का विश्वास जीतने का प्रयास किया जाता था। राजाओं एवं प्रतिष्ठित व्यक्तियों की तस्वीरें यह संदेश देती थीं कि उत्पाद उच्च गुणवत्ता का है तथा प्रतिष्ठित लोगों द्वारा भी उपयोग किया जाता है।

(i) ग्राहकों का विश्वास जीतने के लिए।

(ii) धार्मिक भावनाओं को आकर्षित करने के लिए।

(iii) उत्पाद की गुणवत्ता दर्शाने के लिए।

(iv) बिक्री बढ़ाने के लिए।

(v) उत्पाद को लोकप्रिय बनाने के लिए।

28. भारतीय निर्माताओं ने राष्ट्रवाद का उपयोग विज्ञापनों में कैसे किया?

उत्तर ⇒ स्वदेशी आंदोलन के दौरान भारतीय उद्योगपतियों ने अपने उत्पादों के प्रचार में राष्ट्रवादी विचारों का उपयोग किया। विज्ञापनों में लोगों से विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने तथा स्वदेशी वस्तुएँ खरीदने की अपील की जाती थी। इन विज्ञापनों का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं था, बल्कि भारतीय उद्योगों को प्रोत्साहन देना तथा राष्ट्रीय भावना को मजबूत करना भी था। इससे स्वदेशी आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिला और भारतीय उत्पादों की माँग बढ़ी।

(i) स्वदेशी वस्तुओं का प्रचार किया।

(ii) विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का संदेश दिया।

(iii) राष्ट्रवादी भावना को बढ़ावा दिया।

(iv) भारतीय उद्योगों को प्रोत्साहित किया।

(v) स्वदेशी आंदोलन को समर्थन मिला।

29. औद्योगीकरण का भारत पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर ⇒ औद्योगीकरण ने भारत की अर्थव्यवस्था एवं समाज पर गहरा प्रभाव डाला। आधुनिक उद्योगों की स्थापना से रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हुए तथा शहरीकरण को बढ़ावा मिला। दूसरी ओर, ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियों के कारण भारतीय हस्तकरघा एवं कुटीर उद्योगों को भारी नुकसान हुआ। धीरे-धीरे भारतीय उद्योगपतियों ने आधुनिक उद्योगों की स्थापना की और देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। औद्योगीकरण ने भारत में आर्थिक एवं सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया को तेज़ किया।

(i) आधुनिक उद्योगों का विकास हुआ।

(ii) रोजगार के अवसर बढ़े।

(iii) शहरीकरण को बढ़ावा मिला।

(iv) हस्तकरघा उद्योग प्रभावित हुआ।

(v) भारतीय उद्योगपतियों का उदय हुआ।

30. औद्योगीकरण के प्रमुख लाभ एवं हानियाँ लिखिए।

उत्तर ⇒ औद्योगीकरण ने उत्पादन क्षमता, व्यापार एवं तकनीकी विकास को नई दिशा दी। मशीनों के प्रयोग से वस्तुएँ कम समय में अधिक मात्रा में बनने लगीं तथा रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हुए। वहीं दूसरी ओर प्रारम्भिक काल में श्रमिकों का शोषण, प्रदूषण, बेरोजगारी एवं कुटीर उद्योगों का पतन जैसी समस्याएँ भी सामने आईं। इसलिए औद्योगीकरण के सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों प्रभाव देखने को मिलते हैं।

औद्योगीकरण के प्रमुख लाभ

(i) उत्पादन में वृद्धि।

(ii) तकनीकी विकास।

(iii) व्यापार का विस्तार।

(iv) रोजगार के अवसर।

(v) परिवहन एवं संचार का विकास।

औद्योगीकरण की प्रमुख हानियाँ

(i) श्रमिकों का शोषण।

(ii) कुटीर उद्योगों का पतन।

(iii) बेरोजगारी की समस्या।

(iv) प्रदूषण में वृद्धि।

(v) सामाजिक असमानता।

31. औद्योगीकरण के विकास में इंग्लैंड का क्या योगदान था?

उत्तर ⇒ इंग्लैंड को औद्योगिक क्रांति का जन्मस्थान माना जाता है। सबसे पहले यहीं मशीनों द्वारा उत्पादन, कारखाना प्रणाली तथा भाप शक्ति का व्यापक उपयोग प्रारम्भ हुआ। स्पिनिंग जेनी, फ्लाइंग शटल तथा भाप इंजन जैसे आविष्कारों ने वस्त्र उद्योग में क्रांतिकारी परिवर्तन किया। इंग्लैंड के उद्योगों में उत्पादन तेजी से बढ़ा और वहाँ निर्मित वस्तुएँ विश्व के विभिन्न देशों में निर्यात होने लगीं। इंग्लैंड की औद्योगिक प्रगति ने अन्य देशों को भी औद्योगीकरण अपनाने के लिए प्रेरित किया।

(i) औद्योगिक क्रांति की शुरुआत इंग्लैंड में हुई।

(ii) कारखाना प्रणाली का विकास हुआ।

(iii) मशीनों का व्यापक उपयोग हुआ।

(iv) वस्त्र उद्योग में क्रांति आई।

(v) विश्व व्यापार का विस्तार हुआ।

32. भारत में औद्योगीकरण के विकास में झारखंड का क्या योगदान है?

उत्तर ⇒ झारखंड भारत के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में से एक है। यहाँ लौह अयस्क, कोयला, ताँबा, अभ्रक तथा बॉक्साइट जैसे खनिजों की प्रचुरता होने के कारण अनेक बड़े उद्योग स्थापित हुए हैं। जमशेदपुर में टाटा स्टील तथा बोकारो में इस्पात संयंत्र भारत के प्रमुख औद्योगिक केंद्र हैं। इसके अतिरिक्त धनबाद का कोयला उद्योग तथा राँची का भारी इंजीनियरिंग उद्योग देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। झारखंड के उद्योगों ने रोजगार, निर्यात तथा राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया।

(i) लौह एवं इस्पात उद्योग का विकास।

(ii) कोयला उत्पादन में अग्रणी राज्य।

(iii) खनिज संसाधनों की प्रचुरता।

(iv) बड़े औद्योगिक नगरों का विकास।

(v) राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान।

33. औद्योगीकरण के कारण समाज में क्या परिवर्तन आए?

उत्तर ⇒ औद्योगीकरण के कारण समाज में व्यापक आर्थिक एवं सामाजिक परिवर्तन हुए। बड़ी संख्या में लोग रोजगार की तलाश में गाँवों से शहरों की ओर जाने लगे, जिससे शहरीकरण बढ़ा। नए औद्योगिक एवं व्यापारी वर्ग का विकास हुआ तथा मजदूर वर्ग का विस्तार हुआ। शिक्षा, परिवहन एवं संचार के क्षेत्र में भी प्रगति हुई। हालांकि इसके साथ श्रमिकों का शोषण, प्रदूषण तथा सामाजिक असमानता जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न हुईं।

(i) शहरीकरण में वृद्धि हुई।

(ii) औद्योगिक एवं मजदूर वर्ग का विकास हुआ।

(iii) रोजगार के नए अवसर मिले।

(iv) परिवहन एवं संचार का विकास हुआ।

(v) सामाजिक परिवर्तन आए।

34. औद्योगीकरण के आर्थिक प्रभाव लिखिए।

उत्तर ⇒ औद्योगीकरण के कारण उत्पादन, व्यापार एवं राष्ट्रीय आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। मशीनों द्वारा कम समय में अधिक उत्पादन संभव हुआ, जिससे वस्तुओं की कीमतें कम हुईं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार का विस्तार हुआ तथा नए उद्योगों की स्थापना से रोजगार के अवसर बढ़े। दूसरी ओर छोटे कुटीर उद्योगों को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा और आर्थिक असमानता भी बढ़ी।

(i) उत्पादन में वृद्धि हुई।

(ii) व्यापार का विस्तार हुआ।

(iii) राष्ट्रीय आय बढ़ी।

(iv) रोजगार के अवसर बढ़े।

(v) कुटीर उद्योग प्रभावित हुए।

35. औद्योगीकरण के विकास में तकनीकी आविष्कारों का क्या महत्व था?

उत्तर ⇒ औद्योगिक क्रांति की सफलता में तकनीकी आविष्कारों की महत्वपूर्ण भूमिका थी। स्पिनिंग जेनी, फ्लाइंग शटल, भाप इंजन तथा अन्य मशीनों ने उत्पादन की गति कई गुना बढ़ा दी। इन आविष्कारों से उत्पादन लागत कम हुई, श्रम की बचत हुई तथा बड़े पैमाने पर वस्तुओं का निर्माण संभव हुआ। तकनीकी विकास ने आधुनिक उद्योगों की नींव रखी और विश्व व्यापार को नई दिशा प्रदान की।

(i) उत्पादन क्षमता बढ़ी।

(ii) मशीनों का विकास हुआ।

(iii) लागत में कमी आई।

(iv) उद्योगों का विस्तार हुआ।

(v) विश्व व्यापार को गति मिली.

36. औद्योगीकरण के विकास में वस्त्र उद्योग (Textile Industry) की भूमिका लिखिए।

उत्तर ⇒ वस्त्र उद्योग औद्योगिक क्रांति का सबसे पहला एवं सबसे महत्वपूर्ण उद्योग था। कपास की कताई एवं बुनाई में नई मशीनों के प्रयोग से उत्पादन में तेजी आई। इंग्लैंड का वस्त्र उद्योग विश्वभर में प्रसिद्ध हुआ तथा वहाँ निर्मित कपड़ों का निर्यात विभिन्न देशों में होने लगा। भारत में भी बाद में सूती मिलों की स्थापना हुई और वस्त्र उद्योग आधुनिक औद्योगिक विकास का प्रमुख आधार बना।

(i) औद्योगिक क्रांति का प्रमुख उद्योग था।

(ii) मशीनों से उत्पादन बढ़ा।

(iii) कपड़ों का निर्यात बढ़ा।

(iv) आधुनिक उद्योगों का विकास हुआ।

(v) रोजगार के अवसर बढ़े।

37. औद्योगीकरण के विकास में मशीनों की भूमिका लिखिए।

उत्तर ⇒ मशीनों ने औद्योगिक क्रांति को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इनके प्रयोग से उत्पादन की गति बढ़ी, समय एवं श्रम की बचत हुई तथा कम लागत में अधिक वस्तुओं का निर्माण संभव हुआ। मशीनों ने बड़े पैमाने पर उत्पादन को संभव बनाया, जिससे व्यापार एवं उद्योगों का विस्तार हुआ। हालांकि मशीनों के बढ़ते प्रयोग से कई पारंपरिक कारीगरों एवं हस्तशिल्प उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ा।

(i) उत्पादन में वृद्धि हुई।

(ii) समय एवं श्रम की बचत हुई।

(iii) लागत कम हुई।

(iv) बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव हुआ।

(v) उद्योगों का विस्तार हुआ।

38. औद्योगीकरण के विकास में भारतीय उद्योगपतियों का योगदान लिखिए।

उत्तर ⇒ भारतीय उद्योगपतियों ने आधुनिक उद्योगों की स्थापना कर भारत के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जमशेदजी टाटा, जी.डी. बिड़ला, डिनशॉ पेटिट, द्वारकानाथ टैगोर एवं सेठ हुकुमचंद जैसे उद्योगपतियों ने वस्त्र, इस्पात, जूट एवं अन्य उद्योगों का विकास किया। उन्होंने भारतीय पूँजी का उपयोग कर आधुनिक उद्योग स्थापित किए तथा देश में रोजगार एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया।

(i) आधुनिक उद्योगों की स्थापना की।

(ii) भारतीय पूँजी का निवेश किया।

(iii) रोजगार के अवसर बढ़ाए।

(iv) औद्योगिक विकास को गति दी।

(v) राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया।

39. औद्योगीकरण के प्रमुख कारण एवं परिणाम लिखिए।

उत्तर ⇒ औद्योगीकरण के प्रमुख कारणों में तकनीकी आविष्कार, मशीनों का विकास, व्यापार का विस्तार, कच्चे माल की उपलब्धता एवं पूँजी का संचय शामिल थे। इसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर उत्पादन प्रारम्भ हुआ, कारखानों का विकास हुआ तथा आधुनिक औद्योगिक समाज का निर्माण हुआ। साथ ही शहरीकरण, परिवहन एवं संचार का विकास हुआ, लेकिन श्रमिकों के शोषण एवं पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न हुईं।

प्रमुख कारण

(i) तकनीकी आविष्कार।

(ii) मशीनों का विकास।

(iii) व्यापार का विस्तार।

(iv) पूँजी की उपलब्धता।

(v) कच्चे माल की प्राप्ति।

प्रमुख परिणाम

(i) कारखानों का विकास।

(ii) बड़े पैमाने पर उत्पादन।

(iii) शहरीकरण।

(iv) रोजगार में वृद्धि।

(v) सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन।

40. ‘औद्योगीकरण का युग’ अध्याय का निष्कर्ष लिखिए।

उत्तर ⇒ औद्योगीकरण का युग मानव इतिहास का एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी काल था। इस युग में मशीनों, कारखानों एवं आधुनिक तकनीक के विकास ने उत्पादन, व्यापार एवं समाज की संरचना को पूरी तरह बदल दिया। इंग्लैंड से प्रारम्भ हुई औद्योगिक क्रांति का प्रभाव धीरे-धीरे पूरे विश्व पर पड़ा। भारत में भी आधुनिक उद्योगों का विकास हुआ, यद्यपि औपनिवेशिक नीतियों के कारण पारंपरिक उद्योगों को नुकसान पहुँचा। इसके बावजूद औद्योगीकरण ने आधुनिक आर्थिक विकास, शहरीकरण एवं तकनीकी प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया। यह अध्याय हमें औद्योगिक विकास के लाभों के साथ-साथ उससे उत्पन्न सामाजिक एवं आर्थिक चुनौतियों को भी समझने की प्रेरणा देता है।

More Class 10 History Revision Notes

Chapter 1: यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय
Chapter 2: भारत में राष्ट्रवाद
Chapter 3: भूमण्डलीकृत विश्व का बनना
Chapter 4: औद्योगीकरण का युग
Chapter 5: मुद्रण संस्कृति और आधुनिक दुनिया

Class 10 Notes by Subject

Mathematics
Science
Social Science
English
Hindi (Course A/B)
Sanskrit
Urdu
Disclaimer: If you are the copyright owner of any material featured on this page and wish to request its removal, please contact us at contact@sarkaridiary.in. We will review and respond to your request promptly.

Latest Updates