Class 10 Economics: विकास

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Chapter Overview

Class10
SubjectEconomics 
Chapter Nameविकास
Resource TypeRevision Notes
SyllabusNCERT
Suitable ForCBSE, JAC and other state boards

विकास Revision Notes

1. अर्थव्यवस्था (Economy) क्या है?

उत्तर ⇒ अर्थव्यवस्था उस प्रणाली को कहते हैं जिसमें लोग अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति एवं आजीविका के लिए उत्पादन, वितरण तथा उपभोग जैसी आर्थिक गतिविधियाँ करते हैं। किसी देश की अर्थव्यवस्था उसके संसाधनों, श्रम, उद्योग, व्यापार एवं सेवाओं पर आधारित होती है। अर्थव्यवस्था का मुख्य उद्देश्य लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति करना तथा देश के आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।

(i) उत्पादन, वितरण एवं उपभोग पर आधारित होती है।

(ii) लोगों की आजीविका से जुड़ी होती है।

(iii) संसाधनों का उपयोग करती है।

(iv) आर्थिक विकास में सहायता करती है।

(v) लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति करती है।

2. विकास (Development) या प्रगति क्या है?

उत्तर ⇒ विकास का अर्थ केवल आय में वृद्धि नहीं, बल्कि लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार से है। इसमें बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, समान अवसर, सुरक्षा, सम्मान एवं उच्च जीवन-स्तर जैसे तत्व शामिल होते हैं। प्रत्येक व्यक्ति, समुदाय एवं देश के लिए विकास का अर्थ अलग-अलग हो सकता है क्योंकि सभी की आवश्यकताएँ एवं प्राथमिकताएँ भिन्न होती हैं।

(i) जीवन की गुणवत्ता में सुधार को विकास कहते हैं।

(ii) केवल आय बढ़ना ही विकास नहीं है।

(iii) शिक्षा एवं स्वास्थ्य भी विकास के भाग हैं।

(iv) प्रत्येक व्यक्ति के लिए विकास का अर्थ अलग हो सकता है।

(v) बेहतर जीवन-स्तर विकास का उद्देश्य है।

3. विकास के लक्ष्य भिन्न-भिन्न एवं परस्पर विरोधी कैसे होते हैं?

उत्तर ⇒ प्रत्येक व्यक्ति, समूह एवं समाज की आवश्यकताएँ अलग-अलग होती हैं, इसलिए उनके विकास के लक्ष्य भी अलग होते हैं। कई बार एक व्यक्ति या समूह का विकास दूसरे व्यक्ति या समूह के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है। उदाहरण के लिए, नदी पर बाँध बनने से बिजली एवं सिंचाई की सुविधा मिलती है, लेकिन इससे अनेक लोगों का विस्थापन भी हो सकता है। इसलिए विकास के लक्ष्य कई बार परस्पर विरोधी होते हैं।

(i) प्रत्येक व्यक्ति के विकास के लक्ष्य अलग होते हैं।

(ii) आवश्यकताएँ एवं प्राथमिकताएँ भिन्न होती हैं।

(iii) एक का लाभ दूसरे का नुकसान बन सकता है।

(iv) विकास के लक्ष्य हमेशा समान नहीं होते।

(v) विकास में संतुलन आवश्यक है।

4. बेहतर जीवन के लिए आय के अतिरिक्त किन-किन चीज़ों की आवश्यकता होती है?

उत्तर ⇒ बेहतर जीवन के लिए केवल अधिक आय पर्याप्त नहीं होती। परिवार का सहयोग, स्थायी रोजगार, अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ, सुरक्षा, समानता, सम्मान तथा शांतिपूर्ण वातावरण भी आवश्यक हैं। धन से भौतिक वस्तुएँ खरीदी जा सकती हैं, लेकिन प्रेम, सम्मान, मानसिक शांति एवं सुरक्षा की भावना धन से प्राप्त नहीं की जा सकती। इसलिए विकास का मूल्यांकन केवल आय के आधार पर नहीं किया जा सकता।

(i) परिवार का सहयोग।

(ii) स्थायी रोजगार।

(iii) शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएँ।

(iv) सुरक्षा एवं सम्मान।

(v) शांतिपूर्ण वातावरण।

5. नौकरी चुनते समय केवल वेतन ही क्यों पर्याप्त नहीं होता?

उत्तर ⇒ नौकरी चुनते समय व्यक्ति केवल वेतन नहीं देखता, बल्कि कार्य का वातावरण, परिवार के लिए शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएँ, नौकरी की सुरक्षा तथा भविष्य में आगे बढ़ने के अवसरों को भी महत्व देता है। यदि वेतन अधिक हो लेकिन कार्य का वातावरण तनावपूर्ण हो या परिवार के लिए आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध न हों, तो वह नौकरी बेहतर नहीं मानी जाती। इसलिए विकास एवं बेहतर जीवन के लिए आय के साथ अन्य सुविधाएँ भी आवश्यक होती हैं।

(i) वेतन के साथ कार्य का वातावरण भी महत्वपूर्ण है।

(ii) परिवार के लिए सुविधाएँ आवश्यक हैं।

(iii) नौकरी की सुरक्षा महत्वपूर्ण होती है।

(iv) आगे बढ़ने के अवसर होने चाहिए।

(v) केवल अधिक आय ही बेहतर जीवन की गारंटी नहीं है।

6. देशों के बीच विकास की तुलना कैसे की जाती है?

उत्तर ⇒ विभिन्न देशों के विकास की तुलना करने के लिए एक समान मापदण्ड की आवश्यकता होती है। सामान्यतः प्रति व्यक्ति आय (औसत आय) को सबसे महत्वपूर्ण मापदण्ड माना जाता है। इसके साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सार्वजनिक सुविधाएँ, जीवन प्रत्याशा, शिशु मृत्यु दर तथा पर्यावरण जैसे सामाजिक संकेतकों को भी ध्यान में रखा जाता है। इन सभी मापदण्डों के आधार पर किसी देश के वास्तविक विकास का आकलन किया जाता है।

(i) प्रति व्यक्ति आय प्रमुख मापदण्ड है।

(ii) शिक्षा एवं स्वास्थ्य को भी महत्व दिया जाता है।

(iii) सार्वजनिक सुविधाओं का मूल्यांकन किया जाता है।

(iv) सामाजिक संकेतकों का उपयोग किया जाता है।

(v) समग्र विकास का आकलन किया जाता है।

7. देशों के विकास की तुलना के लिए आय को सबसे सामान्य मापदण्ड क्यों माना जाता है?

उत्तर ⇒ आय को विकास का सामान्य मापदण्ड इसलिए माना जाता है क्योंकि अधिक आय होने पर लोग भोजन, कपड़े, आवास, शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसी आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा कर सकते हैं। जिस देश की आय अधिक होती है, वहाँ सामान्यतः लोगों का जीवन-स्तर भी बेहतर होता है। हालांकि केवल आय के आधार पर विकास का सही आकलन नहीं किया जा सकता, फिर भी यह सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतक माना जाता है।

(i) आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायता मिलती है।

(ii) जीवन-स्तर बेहतर होता है।

(iii) आर्थिक स्थिति का पता चलता है।

(iv) देशों की तुलना आसान होती है।

(v) यह प्रमुख आर्थिक मापदण्ड है।

8. कुल आय (Total Income) क्या है?

उत्तर ⇒ किसी देश के सभी नागरिकों द्वारा एक निश्चित अवधि में अर्जित कुल आय के योग को उस देश की कुल आय कहते हैं। यह देश की समग्र आर्थिक आय को दर्शाती है। लेकिन विभिन्न देशों की जनसंख्या अलग-अलग होने के कारण केवल कुल आय के आधार पर विकास की तुलना करना उचित नहीं माना जाता।

(i) सभी नागरिकों की आय का योग होती है।

(ii) देश की कुल आर्थिक आय को दर्शाती है।

(iii) आर्थिक स्थिति का संकेत देती है।

(iv) तुलना के लिए अकेले पर्याप्त नहीं है।

(v) जनसंख्या का प्रभाव पड़ता है।

9. औसत आय (Average Income) या प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) क्या है?

उत्तर ⇒ जब किसी देश की कुल आय को उसकी कुल जनसंख्या से भाग दिया जाता है, तो उसे औसत आय या प्रति व्यक्ति आय कहते हैं। यह बताती है कि औसतन एक व्यक्ति की आय कितनी है। देशों के बीच विकास की तुलना के लिए कुल आय की अपेक्षा प्रति व्यक्ति आय अधिक उपयुक्त मापदण्ड मानी जाती है।

प्रति व्यक्ति आय = देश की कुल आय ÷ कुल जनसंख्या

(i) कुल आय को जनसंख्या से भाग देकर प्राप्त होती है।

(ii) औसतन एक व्यक्ति की आय बताती है।

(iii) विकास की तुलना का प्रमुख आधार है।

(iv) कुल आय से अधिक उपयोगी मापदण्ड है।

(v) आर्थिक स्थिति का सही संकेत देती है।

10. कुल आय की अपेक्षा प्रति व्यक्ति आय को अधिक उपयुक्त मापदण्ड क्यों माना जाता है?

उत्तर ⇒ विभिन्न देशों की जनसंख्या समान नहीं होती। यदि केवल कुल आय के आधार पर तुलना की जाए, तो अधिक जनसंख्या वाले देश अधिक समृद्ध दिखाई दे सकते हैं, जबकि वहाँ प्रति व्यक्ति आय कम हो सकती है। इसलिए प्रति व्यक्ति आय प्रत्येक नागरिक की औसत आय को दर्शाती है और देशों के विकास की अधिक सही तुलना करने में सहायता करती है।

(i) जनसंख्या का प्रभाव समाप्त हो जाता है।

(ii) प्रत्येक व्यक्ति की औसत आय ज्ञात होती है।

(iii) देशों की सही तुलना संभव होती है।

(iv) आर्थिक स्थिति का वास्तविक चित्र मिलता है।

(v) यह अधिक विश्वसनीय मापदण्ड है।

11. देशों के विकास के अन्य प्रमुख मापदण्ड लिखिए।

उत्तर ⇒ किसी देश के विकास का आकलन केवल प्रति व्यक्ति आय के आधार पर नहीं किया जा सकता। विकास का सही मूल्यांकन करने के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, सार्वजनिक सुविधाएँ, जीवन प्रत्याशा, शिशु मृत्यु दर, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छ पर्यावरण तथा सामाजिक सुरक्षा जैसे अन्य मापदण्डों को भी ध्यान में रखा जाता है। ये सभी संकेतक लोगों के जीवन की वास्तविक गुणवत्ता को दर्शाते हैं।

(i) स्वास्थ्य सेवाएँ।

(ii) शिक्षा एवं साक्षरता।

(iii) सार्वजनिक सुविधाएँ।

(iv) जीवन प्रत्याशा एवं शिशु मृत्यु दर।

(v) स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण।

12. उच्च आय होने का अर्थ हमेशा बेहतर विकास क्यों नहीं होता?

उत्तर ⇒ किसी देश की आय अधिक होने का अर्थ यह नहीं है कि वहाँ के सभी लोगों का जीवन बेहतर है। यदि लोगों को अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ, स्वच्छ पेयजल, रोजगार एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध नहीं है, तो केवल अधिक आय से वास्तविक विकास संभव नहीं माना जाएगा। इसलिए मानव कल्याण एवं जीवन की गुणवत्ता आय से अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।

(i) केवल आय से विकास का सही आकलन नहीं होता।

(ii) शिक्षा एवं स्वास्थ्य भी आवश्यक हैं।

(iii) सार्वजनिक सुविधाएँ महत्वपूर्ण हैं।

(iv) मानव कल्याण को प्राथमिकता दी जाती है।

(v) जीवन की गुणवत्ता विकास का मुख्य आधार है।

13. विश्व बैंक देशों का वर्गीकरण किस आधार पर करता है?

उत्तर ⇒ विश्व बैंक अपनी विश्व विकास रिपोर्ट में देशों का वर्गीकरण उनकी प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) के आधार पर करता है। इसी आधार पर देशों को उच्च आय, मध्य आय एवं निम्न आय वाले देशों की श्रेणियों में रखा जाता है। इससे विभिन्न देशों के आर्थिक विकास की तुलना करना आसान हो जाता है।

(i) प्रति व्यक्ति आय के आधार पर वर्गीकरण किया जाता है।

(ii) विश्व विकास रिपोर्ट में इसका उल्लेख होता है।

(iii) उच्च, मध्य एवं निम्न आय वर्ग बनाए जाते हैं।

(iv) देशों की तुलना आसान होती है।

(v) आर्थिक विकास का आकलन किया जाता है।

14. प्रति व्यक्ति आय के आधार पर देशों का वर्गीकरण लिखिए।

उत्तर ⇒ विश्व बैंक देशों को उनकी प्रति व्यक्ति आय के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में विभाजित करता है। अधिक प्रति व्यक्ति आय वाले देशों को विकसित या उच्च आय वाले देश माना जाता है, जबकि कम प्रति व्यक्ति आय वाले देशों को निम्न आय वाले देश कहा जाता है। भारत वर्तमान में मध्य आय वर्ग के देशों में शामिल है।

(i) उच्च आय वाले देश।

(ii) मध्य आय वाले देश।

(iii) निम्न आय वाले देश।

(iv) वर्गीकरण प्रति व्यक्ति आय पर आधारित है।

(v) भारत मध्य आय वर्ग में आता है।

15. विकास के प्रमुख संकेतक (Indicators of Development) लिखिए।

उत्तर ⇒ विकास के स्तर को मापने के लिए अनेक आर्थिक एवं सामाजिक संकेतकों का उपयोग किया जाता है। इनमें प्रति व्यक्ति आय, सकल घरेलू उत्पाद (GDP), सकल राष्ट्रीय आय (GNI), शिशु मृत्यु दर, साक्षरता दर, जीवन प्रत्याशा, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सार्वजनिक सुविधाएँ प्रमुख हैं। इन संकेतकों के आधार पर किसी देश के समग्र विकास का मूल्यांकन किया जाता है।

(i) प्रति व्यक्ति आय।

(ii) सकल घरेलू उत्पाद (GDP)।

(iii) सकल राष्ट्रीय आय (GNI)।

(iv) शिशु मृत्यु दर एवं साक्षरता दर।

(v) शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सार्वजनिक सुविधाएँ।

16. सकल घरेलू उत्पाद (GDP – Gross Domestic Product) क्या है?

उत्तर ⇒ सकल घरेलू उत्पाद (GDP) किसी देश की सीमाओं के भीतर एक निश्चित अवधि (आमतौर पर एक वर्ष) में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को कहते हैं। यह किसी देश की अर्थव्यवस्था के आकार एवं आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण संकेतक है। यदि किसी देश का GDP अधिक होता है, तो उसकी अर्थव्यवस्था सामान्यतः मजबूत मानी जाती है। हालांकि GDP केवल आर्थिक उत्पादन को दर्शाता है, लोगों के जीवन-स्तर एवं खुशहाली को पूरी तरह नहीं बताता।

(i) देश में उत्पादित अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं का कुल मूल्य है।

(ii) एक निश्चित अवधि के लिए मापा जाता है।

(iii) अर्थव्यवस्था का प्रमुख संकेतक है।

(iv) आर्थिक उत्पादन को दर्शाता है।

(v) जीवन-स्तर का पूर्ण मापदण्ड नहीं है।

17. सकल राष्ट्रीय आय (GNI – Gross National Income) क्या है?

उत्तर ⇒ सकल राष्ट्रीय आय (GNI) से आशय देश के नागरिकों द्वारा एक निश्चित अवधि में अर्जित कुल आय से है। इसमें देश के भीतर अर्जित आय के साथ-साथ विदेशों से प्राप्त आय भी शामिल होती है। यह किसी देश की कुल राष्ट्रीय आय का व्यापक चित्र प्रस्तुत करती है तथा आर्थिक विकास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

(i) देश के नागरिकों की कुल आय होती है।

(ii) विदेशों से अर्जित आय भी शामिल होती है।

(iii) राष्ट्रीय आय का व्यापक मापदण्ड है।

(iv) आर्थिक विकास का संकेत देती है।

(v) देश की आय का समग्र चित्र प्रस्तुत करती है।

18. शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate) क्या है?

उत्तर ⇒ शिशु मृत्यु दर से तात्पर्य किसी वर्ष में जन्मे प्रत्येक 1,000 जीवित शिशुओं में से एक वर्ष की आयु पूरी करने से पहले मर जाने वाले बच्चों की संख्या से है। यह किसी देश की स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण स्तर एवं चिकित्सा सुविधाओं का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। कम शिशु मृत्यु दर बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था का संकेत देती है।

(i) प्रति 1,000 जीवित जन्म पर आधारित होती है।

(ii) एक वर्ष से पहले मरने वाले शिशुओं की संख्या बताती है।

(iii) स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख संकेतक है।

(iv) पोषण स्तर को दर्शाती है।

(v) कम दर बेहतर विकास का संकेत है।

19. साक्षरता दर (Literacy Rate) क्या है?

उत्तर ⇒ साक्षरता दर से तात्पर्य 7 वर्ष या उससे अधिक आयु के उन लोगों के प्रतिशत से है जो पढ़-लिख सकते हैं। यह किसी देश की शिक्षा व्यवस्था एवं मानव विकास का महत्वपूर्ण संकेतक है। अधिक साक्षरता दर से लोगों में जागरूकता बढ़ती है तथा आर्थिक एवं सामाजिक विकास को गति मिलती है।

(i) 7 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों पर आधारित होती है।

(ii) पढ़ने-लिखने की क्षमता को दर्शाती है।

(iii) शिक्षा का प्रमुख संकेतक है।

(iv) मानव विकास को प्रभावित करती है।

(v) जागरूक समाज के निर्माण में सहायक है।

20. निवल उपस्थिति अनुपात (Net Attendance Ratio) क्या है?

उत्तर ⇒ निवल उपस्थिति अनुपात से तात्पर्य किसी निश्चित आयु वर्ग (जैसे 14–15 वर्ष) के उन बच्चों के प्रतिशत से है जो वास्तव में विद्यालय में पढ़ रहे हैं। यह शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति एवं विद्यालय तक पहुँच का महत्वपूर्ण संकेतक है। इससे शिक्षा की उपलब्धता एवं प्रभावशीलता का आकलन किया जाता है।

(i) विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों का प्रतिशत बताता है।

(ii) निश्चित आयु वर्ग पर आधारित होता है।

(iii) शिक्षा की उपलब्धता का संकेतक है।

(iv) विद्यालयी उपस्थिति का आकलन करता है।

(v) मानव विकास का महत्वपूर्ण मापदण्ड है।

21. विकास के लिए अन्य सामाजिक संकेतक क्यों आवश्यक हैं?

उत्तर ⇒ किसी देश का विकास केवल आय से निर्धारित नहीं किया जा सकता। यदि लोगों को अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ, स्वच्छ पेयजल, सुरक्षित वातावरण एवं सार्वजनिक सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं, तो अधिक आय होने के बावजूद वास्तविक विकास नहीं माना जा सकता। इसलिए स्वास्थ्य, शिक्षा, समानता, जीवन प्रत्याशा एवं सार्वजनिक सुविधाओं जैसे सामाजिक संकेतकों को भी विकास मापने में शामिल किया जाता है।

(i) केवल आय विकास का सही मापदण्ड नहीं है।

(ii) शिक्षा एवं स्वास्थ्य महत्वपूर्ण हैं।

(iii) सार्वजनिक सुविधाओं का महत्व है।

(iv) जीवन की गुणवत्ता का आकलन होता है।

(v) मानव कल्याण को प्राथमिकता दी जाती है।

22. विकसित देश (Developed Country) की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर ⇒ विकसित देश वे देश होते हैं जहाँ प्रति व्यक्ति आय अधिक होती है तथा लोगों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ एवं आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध होती हैं। इन देशों में उन्नत तकनीक, विकसित उद्योग, उच्च जीवन-स्तर एवं अधिक जीवन प्रत्याशा पाई जाती है। विकसित देशों में मानव विकास का स्तर सामान्यतः अधिक होता है।

(i) उच्च प्रति व्यक्ति आय।

(ii) उन्नत तकनीक एवं विकसित उद्योग।

(iii) बेहतर स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाएँ।

(iv) उच्च जीवन-स्तर।

(v) अधिक जीवन प्रत्याशा।

23. विकासशील देश (Developing Country) की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर ⇒ विकासशील देश वे देश होते हैं जहाँ आर्थिक विकास की प्रक्रिया जारी रहती है। इन देशों में प्रति व्यक्ति आय अपेक्षाकृत कम होती है तथा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं औद्योगिक विकास अभी पूर्ण रूप से विकसित नहीं होते। इन देशों में गरीबी, बेरोजगारी एवं आधारभूत सुविधाओं की कमी जैसी समस्याएँ भी देखने को मिलती हैं।

(i) प्रति व्यक्ति आय अपेक्षाकृत कम होती है।

(ii) औद्योगिक विकास सीमित होता है।

(iii) शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएँ अपेक्षाकृत कम विकसित होती हैं।

(iv) जीवन-स्तर अपेक्षाकृत निम्न होता है।

(v) आर्थिक विकास की प्रक्रिया जारी रहती है।

24. विकसित एवं विकासशील देशों में अंतर लिखिए।

उत्तर ⇒ विकसित एवं विकासशील देशों में मुख्य अंतर आर्थिक, सामाजिक एवं मानव विकास के स्तर का होता है। विकसित देशों में आय, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं जीवन-स्तर अधिक बेहतर होता है, जबकि विकासशील देशों में इन क्षेत्रों में अभी भी सुधार की आवश्यकता होती है।

विकसित देशविकासशील देश
प्रति व्यक्ति आय अधिक होती है।प्रति व्यक्ति आय कम होती है।
आधुनिक उद्योग एवं तकनीक विकसित होती है।औद्योगिक विकास अपेक्षाकृत कम होता है।
स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाएँ बेहतर होती हैं।स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाओं में कमी होती है।
जीवन-स्तर उच्च होता है।जीवन-स्तर अपेक्षाकृत निम्न होता है।
जीवन प्रत्याशा अधिक होती है।जीवन प्रत्याशा अपेक्षाकृत कम होती है।

25. बॉडी मास इंडेक्स (BMI) क्या है?

उत्तर ⇒ बॉडी मास इंडेक्स (BMI) एक वैज्ञानिक मापदण्ड है जिसका उपयोग किसी व्यक्ति के पोषण स्तर एवं शारीरिक वजन का आकलन करने के लिए किया जाता है। इसे व्यक्ति के वजन (किलोग्राम) को उसकी ऊँचाई (मीटर) के वर्ग से भाग देकर निकाला जाता है। BMI के आधार पर यह पता लगाया जाता है कि व्यक्ति अल्प-पोषित, सामान्य या अधिक वजन वाला है।

BMI = वजन (किलोग्राम) ÷ ऊँचाई² (मीटर)

(i) पोषण स्तर का वैज्ञानिक मापदण्ड है।

(ii) वजन एवं ऊँचाई के आधार पर निकाला जाता है।

(iii) स्वास्थ्य की स्थिति का संकेत देता है।

(iv) अल्प-पोषण एवं अधिक वजन की पहचान करता है।

(v) स्वास्थ्य मूल्यांकन में उपयोगी है।

26. BMI (Body Mass Index) से क्या पता चलता है?

उत्तर ⇒ BMI (बॉडी मास इंडेक्स) के माध्यम से यह पता लगाया जाता है कि किसी व्यक्ति का वजन उसकी ऊँचाई के अनुसार सामान्य है या नहीं। यदि BMI बहुत कम होता है, तो व्यक्ति अल्प-पोषित माना जाता है। यदि BMI सामान्य सीमा में होता है, तो व्यक्ति का पोषण स्तर उचित माना जाता है। वहीं BMI अधिक होने पर व्यक्ति अधिक वजन (Overweight) या मोटापे का शिकार माना जाता है। इस प्रकार BMI व्यक्ति के स्वास्थ्य एवं पोषण की स्थिति का महत्वपूर्ण संकेतक है।

(i) पोषण स्तर का पता चलता है।

(ii) कम BMI अल्प-पोषण का संकेत है।

(iii) सामान्य BMI उचित स्वास्थ्य दर्शाता है।

(iv) अधिक BMI अधिक वजन का संकेत है।

(v) स्वास्थ्य मूल्यांकन में सहायक है।

27. मानव विकास सूचकांक (Human Development Index – HDI) क्या है?

उत्तर ⇒ मानव विकास सूचकांक (HDI) एक समग्र मापदण्ड है जिसके आधार पर किसी देश के विकास का आकलन किया जाता है। यह केवल आय पर आधारित नहीं होता, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य एवं प्रति व्यक्ति आय जैसे महत्वपूर्ण संकेतकों को भी ध्यान में रखता है। HDI का उद्देश्य लोगों के जीवन की वास्तविक गुणवत्ता एवं मानव विकास के स्तर को मापना है।

(i) यह विकास का समग्र मापदण्ड है।

(ii) शिक्षा को महत्व देता है।

(iii) स्वास्थ्य को शामिल करता है।

(iv) प्रति व्यक्ति आय का उपयोग करता है।

(v) मानव विकास का स्तर बताता है।

28. मानव विकास सूचकांक (HDI) में किन-किन संकेतकों को शामिल किया जाता है?

उत्तर ⇒ मानव विकास सूचकांक तैयार करते समय तीन प्रमुख संकेतकों को आधार बनाया जाता है—स्वास्थ्य, शिक्षा एवं प्रति व्यक्ति आय। स्वास्थ्य का आकलन जीवन प्रत्याशा से, शिक्षा का आकलन स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता से तथा जीवन-स्तर का आकलन प्रति व्यक्ति आय से किया जाता है। इन तीनों संकेतकों के आधार पर किसी देश के मानव विकास का स्तर निर्धारित किया जाता है।

(i) स्वास्थ्य (जीवन प्रत्याशा)।

(ii) शिक्षा।

(iii) प्रति व्यक्ति आय।

(iv) जीवन-स्तर का आकलन।

(v) समग्र मानव विकास का मूल्यांकन।

29. मानव विकास सूचकांक में भारत का स्थान लिखिए।

उत्तर ⇒ 2025 की मानव विकास रिपोर्ट (HDR) के अनुसार भारत 193 देशों में 130वें स्थान पर है। यह दर्शाता है कि भारत ने शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आय के क्षेत्र में प्रगति की है, लेकिन अभी भी मानव विकास के स्तर को और बेहतर बनाने की आवश्यकता है।

(i) 2025 मानव विकास रिपोर्ट पर आधारित है।

(ii) भारत का स्थान 130वाँ है।

(iii) कुल 193 देशों की रैंकिंग की गई।

(iv) शिक्षा एवं स्वास्थ्य में सुधार हुआ है।

(v) आगे और विकास की आवश्यकता है।

30. विकास की धारणीयता (Sustainable Development) क्या है?

उत्तर ⇒ विकास की धारणीयता का अर्थ ऐसा विकास है जिससे वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति हो, लेकिन भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं एवं संसाधनों से समझौता न करना पड़े। इस प्रकार का विकास पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग तथा दीर्घकालीन विकास पर आधारित होता है। इसका उद्देश्य आर्थिक विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना है।

(i) वर्तमान एवं भविष्य दोनों की आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाता है।

(ii) पर्यावरण संरक्षण पर बल दिया जाता है।

(iii) संसाधनों का संतुलित उपयोग किया जाता है।

(iv) दीर्घकालीन विकास को बढ़ावा मिलता है।

(v) सतत विकास का लक्ष्य प्राप्त होता है।

31. विकास की धारणीयता की मुख्य विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर ⇒ विकास की धारणीयता का उद्देश्य वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति करते हुए भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना है। इसके अंतर्गत संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग, पर्यावरण संरक्षण, नवीकरणीय संसाधनों को बढ़ावा, पुनर्चक्रण (Recycling) तथा वैकल्पिक संसाधनों की खोज पर विशेष बल दिया जाता है। सतत विकास आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है।

(i) संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग किया जाता है।

(ii) पर्यावरण संरक्षण पर बल दिया जाता है।

(iii) नवीकरणीय संसाधनों का अधिक उपयोग किया जाता है।

(iv) पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग को बढ़ावा दिया जाता है।

(v) भविष्य की पीढ़ियों के हितों की रक्षा की जाती है।

32. विकास की धारणीयता क्यों आवश्यक है?

उत्तर ⇒ प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं और यदि उनका अत्यधिक दोहन किया जाए, तो भविष्य में उनकी कमी हो सकती है। पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन एवं वनों की कटाई जैसी समस्याएँ मानव जीवन के लिए खतरा बन रही हैं। इसलिए ऐसा विकास आवश्यक है जो पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए वर्तमान एवं भविष्य दोनों पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा कर सके। यही सतत या धारणीय विकास का मूल उद्देश्य है।

(i) प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा होती है।

(ii) पर्यावरण प्रदूषण कम होता है।

(iii) भविष्य की पीढ़ियों का हित सुरक्षित रहता है।

(iv) जलवायु परिवर्तन के प्रभाव कम किए जा सकते हैं।

(v) संतुलित विकास संभव होता है।

33. प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रमुख उपाय लिखिए।

उत्तर ⇒ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए उनका संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग करना आवश्यक है। जल, वन एवं खनिजों का अनावश्यक दोहन रोकना चाहिए। अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना, नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना, वर्षा जल संचयन अपनाना तथा पुनर्चक्रण (Recycling) को प्रोत्साहित करना संरक्षण के प्रमुख उपाय हैं। इन प्रयासों से पर्यावरण संतुलित रहता है तथा संसाधनों की उपलब्धता भविष्य में भी बनी रहती है।

(i) संसाधनों का संतुलित उपयोग करना चाहिए।

(ii) वृक्षारोपण को बढ़ावा देना चाहिए।

(iii) नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना चाहिए।

(iv) वर्षा जल संचयन अपनाना चाहिए।

(v) पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग करना चाहिए।

34. नवीकरणीय (Renewable) एवं अनवीकरणीय (Non-Renewable) संसाधनों में अंतर लिखिए।

उत्तर ⇒ नवीकरणीय संसाधन वे होते हैं जो प्रकृति द्वारा पुनः प्राप्त किए जा सकते हैं, जबकि अनवीकरणीय संसाधन सीमित मात्रा में उपलब्ध होते हैं और एक बार समाप्त होने पर उन्हें दोबारा प्राप्त करना संभव नहीं होता। इसलिए अनवीकरणीय संसाधनों का सावधानीपूर्वक उपयोग करना आवश्यक है।

नवीकरणीय संसाधनअनवीकरणीय संसाधन
पुनः प्राप्त किए जा सकते हैं।दोबारा प्राप्त नहीं किए जा सकते।
लंबे समय तक उपलब्ध रहते हैं।सीमित मात्रा में उपलब्ध होते हैं।
पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं।अत्यधिक उपयोग से समाप्त हो सकते हैं।
उदाहरण – सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा।उदाहरण – कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस।

35. पुनर्चक्रण (Recycling) का क्या महत्व है?

उत्तर ⇒ पुनर्चक्रण का अर्थ उपयोग की गई वस्तुओं को दोबारा संसाधित करके पुनः उपयोग योग्य बनाना है। इससे प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है, कचरे की मात्रा कम होती है तथा पर्यावरण प्रदूषण घटता है। पुनर्चक्रण सतत विकास का महत्वपूर्ण अंग है क्योंकि यह संसाधनों के संरक्षण एवं पर्यावरण सुरक्षा दोनों में सहायता करता है।

(i) प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है।

(ii) कचरे की मात्रा कम होती है।

(iii) पर्यावरण प्रदूषण घटता है।

(iv) संसाधनों का पुनः उपयोग संभव होता है।

(v) सतत विकास को बढ़ावा मिलता है।

36. पर्यावरण संरक्षण में नागरिकों की क्या भूमिका है?

उत्तर ⇒ पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का भी कर्तव्य है। नागरिकों को जल, वन एवं ऊर्जा जैसे प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए। अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना, प्लास्टिक का कम उपयोग करना, स्वच्छता बनाए रखना तथा पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करना आवश्यक है। जब प्रत्येक नागरिक अपने दायित्व का पालन करता है, तभी सतत विकास का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

(i) प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए।

(ii) अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना चाहिए।

(iii) प्लास्टिक का कम उपयोग करना चाहिए।

(iv) स्वच्छ पर्यावरण बनाए रखना चाहिए।

(v) पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलानी चाहिए।

37. विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन क्यों आवश्यक है?

उत्तर ⇒ आर्थिक विकास किसी भी देश की प्रगति के लिए आवश्यक है, लेकिन यदि विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन किया जाए और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाया जाए, तो भविष्य में गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए विकास करते समय पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। यही संतुलन सतत विकास की मूल भावना है।

(i) प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा होती है।

(ii) पर्यावरण प्रदूषण कम होता है।

(iii) भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधन सुरक्षित रहते हैं।

(iv) आर्थिक एवं पर्यावरणीय संतुलन बना रहता है।

(v) सतत विकास को बढ़ावा मिलता है।

38. विकास के प्रमुख मापदण्डों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ किसी देश के विकास का आकलन करने के लिए अनेक आर्थिक एवं सामाजिक मापदण्डों का उपयोग किया जाता है। इनमें प्रति व्यक्ति आय, शिक्षा, स्वास्थ्य, जीवन प्रत्याशा, शिशु मृत्यु दर, सार्वजनिक सुविधाएँ, मानव विकास सूचकांक (HDI) तथा स्वच्छ पर्यावरण प्रमुख हैं। इन सभी संकेतकों के आधार पर किसी देश के वास्तविक विकास एवं लोगों के जीवन-स्तर का मूल्यांकन किया जाता है।

(i) प्रति व्यक्ति आय।

(ii) शिक्षा एवं स्वास्थ्य।

(iii) मानव विकास सूचकांक।

(iv) सार्वजनिक सुविधाएँ।

(v) स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण।

39. ‘विकास’ अध्याय से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर ⇒ यह अध्याय हमें सिखाता है कि विकास का अर्थ केवल आय बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है। शिक्षा, स्वास्थ्य, समान अवसर, पर्यावरण संरक्षण तथा मानव कल्याण भी विकास के महत्वपूर्ण आधार हैं। हमें ऐसा विकास अपनाना चाहिए जिससे वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति हो और भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी प्राकृतिक संसाधन सुरक्षित रहें।

(i) केवल आय ही विकास नहीं है।

(ii) मानव कल्याण सबसे महत्वपूर्ण है।

(iii) शिक्षा एवं स्वास्थ्य आवश्यक हैं।

(iv) पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए।

(v) सतत विकास अपनाना चाहिए।

40. ‘विकास’ अध्याय का निष्कर्ष लिखिए।

उत्तर ⇒ ‘विकास’ अध्याय यह स्पष्ट करता है कि किसी देश की वास्तविक प्रगति का आकलन केवल आर्थिक वृद्धि से नहीं किया जा सकता। विकास का उद्देश्य लोगों को बेहतर जीवन, समान अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ तथा सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना है। सतत विकास, प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग एवं मानव कल्याण ही वास्तविक विकास की पहचान हैं। इसलिए आर्थिक विकास के साथ सामाजिक न्याय एवं पर्यावरण संरक्षण पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।

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Chapter 1: विकास
Chapter 2: भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक
Chapter 3: मुद्रा और साख
Chapter 4: वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था
Chapter 5: उपभोक्ता अधिकार

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