Class 10 Economics: उपभोक्ता अधिकार
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Chapter Overview
| Class | 10 |
| Subject | Economics |
| Chapter Name | उपभोक्ता अधिकार |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
उपभोक्ता अधिकार Revision Notes
1. उपभोक्ता (Consumer) किसे कहते हैं?
उत्तर ⇒ वह व्यक्ति जो अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वस्तुओं या सेवाओं को खरीदता अथवा उनका उपयोग करता है, उपभोक्ता कहलाता है। उपभोक्ता वस्तुओं एवं सेवाओं का अंतिम उपयोगकर्ता होता है। उपभोक्ता के हितों की रक्षा के लिए कानून द्वारा अनेक अधिकार प्रदान किए गए हैं।
(i) वस्तुएँ एवं सेवाएँ खरीदता है।
(ii) अंतिम उपयोगकर्ता होता है।
(iii) अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करता है।
(iv) उपभोक्ता संरक्षण कानून से सुरक्षित होता है।
(v) उपभोक्ता अधिकार प्राप्त होते हैं।
2. उत्पादक (Producer) किसे कहते हैं?
उत्तर ⇒ वह व्यक्ति, समूह या संस्था जो बाज़ार में बेचने के लिए वस्तुओं अथवा सेवाओं का निर्माण या उत्पादन करती है, उत्पादक कहलाती है। उत्पादक का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं की पूर्ति करना तथा लाभ अर्जित करना होता है।
(i) वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन करता है।
(ii) बाज़ार में बिक्री के लिए कार्य करता है।
(iii) उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है।
(iv) लाभ अर्जित करना उद्देश्य होता है।
(v) अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण भाग है।
3. उपभोक्ता अधिकार (Consumer Rights) क्या हैं?
उत्तर ⇒ उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए कानून द्वारा दिए गए अधिकारों को उपभोक्ता अधिकार कहा जाता है। इन अधिकारों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को शोषण से बचाना, सही जानकारी उपलब्ध कराना तथा उचित न्याय एवं क्षतिपूर्ति दिलाना है।
(i) सुरक्षा का अधिकार।
(ii) सूचना का अधिकार।
(iii) चुनने का अधिकार।
(iv) सुने जाने एवं क्षतिपूर्ति का अधिकार।
(v) उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार।
4. उपभोक्ताओं के प्रमुख अधिकार लिखिए।
उत्तर ⇒ उपभोक्ताओं की सुरक्षा एवं हितों की रक्षा के लिए उपभोक्ता संरक्षण कानून के अंतर्गत अनेक अधिकार प्रदान किए गए हैं। इन अधिकारों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित, जागरूक एवं सशक्त बनाना है।
(i) सुरक्षा का अधिकार।
(ii) सूचना का अधिकार।
(iii) चुनने का अधिकार।
(iv) सुने जाने का अधिकार।
(v) क्षतिपूर्ति एवं उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार।
5. बाज़ार में उपभोक्ताओं का शोषण किन-किन तरीकों से किया जाता है?
उत्तर ⇒ बाज़ार में कुछ विक्रेता अनुचित व्यापारिक तरीकों का उपयोग करके उपभोक्ताओं का शोषण करते हैं। इनमें कम तौलना, अधिक मूल्य वसूलना, मिलावटी या दोषपूर्ण वस्तुएँ बेचना, भ्रामक विज्ञापन देना तथा छिपे हुए शुल्क वसूलना प्रमुख हैं। इनसे उपभोक्ताओं को आर्थिक एवं मानसिक हानि होती है।
(i) कम तौलना।
(ii) MRP से अधिक मूल्य वसूलना।
(iii) मिलावटी एवं दोषपूर्ण वस्तुएँ बेचना।
(iv) भ्रामक विज्ञापन देना।
(v) छिपे हुए शुल्क वसूलना।
6. उपभोक्ताओं के शोषण के प्रमुख कारण लिखिए।
उत्तर ⇒ उपभोक्ताओं का शोषण मुख्यतः जानकारी की कमी, भ्रामक विज्ञापनों, नकली एवं मिलावटी वस्तुओं, माप-तौल में धोखाधड़ी तथा उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरूकता के अभाव के कारण होता है। कई बार शिकायत निवारण की कमजोर व्यवस्था भी उपभोक्ताओं के शोषण को बढ़ावा देती है।
(i) जानकारी का अभाव।
(ii) भ्रामक विज्ञापन।
(iii) नकली एवं घटिया वस्तुओं की बिक्री।
(iv) माप-तौल में धोखाधड़ी।
(v) उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरूकता की कमी।
7. बाज़ार में नियमों एवं विनियमों की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर ⇒ बाज़ार हमेशा निष्पक्ष रूप से कार्य नहीं करता, इसलिए उपभोक्ताओं, श्रमिकों एवं पर्यावरण की सुरक्षा के लिए नियम एवं विनियम आवश्यक होते हैं। ये नियम अनुचित व्यापारिक गतिविधियों पर रोक लगाते हैं तथा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हैं।
(i) उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए।
(ii) अनुचित व्यापार पर रोक लगाने के लिए।
(iii) असंगठित श्रमिकों की सुरक्षा के लिए।
(iv) पर्यावरण संरक्षण के लिए।
(v) निष्पक्ष व्यापार सुनिश्चित करने के लिए।
8. उपभोक्ता आंदोलन (Consumer Movement) क्या है?
उत्तर ⇒ उपभोक्ता आंदोलन एक सामाजिक आंदोलन है जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को शोषण एवं अनुचित व्यापारिक व्यवहार से बचाना तथा उनके अधिकारों की रक्षा करना है। यह आंदोलन उपभोक्ताओं में जागरूकता फैलाने तथा विक्रेताओं एवं उत्पादकों को उनकी जिम्मेदारियों का बोध कराने के लिए प्रारंभ किया गया।
(i) उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा करता है।
(ii) जागरूकता फैलाता है।
(iii) अनुचित व्यापार का विरोध करता है।
(iv) विक्रेताओं को जिम्मेदार बनाता है।
(v) उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने में सहायता करता है।
9. उपभोक्ता आंदोलन की आवश्यकता क्यों पड़ी?
उत्तर ⇒ पहले उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए कोई प्रभावी कानूनी व्यवस्था नहीं थी। विक्रेता अनुचित व्यापारिक व्यवहार अपनाते थे तथा उपभोक्ताओं का शोषण करते थे। इसी कारण उपभोक्ताओं की सुरक्षा, जागरूकता एवं अधिकारों की रक्षा के लिए उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत हुई।
(i) उपभोक्ताओं का शोषण हो रहा था।
(ii) कानूनी सुरक्षा का अभाव था।
(iii) अनुचित व्यापारिक व्यवहार बढ़ रहे थे।
(iv) जागरूकता की आवश्यकता थी।
(v) उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा आवश्यक थी।
10. भारत में उपभोक्ता आंदोलन का उदय कैसे हुआ?
उत्तर ⇒ भारत में उपभोक्ता आंदोलन एक सामाजिक शक्ति के रूप में विकसित हुआ। 1960 के दशक में खाद्य पदार्थों की कमी, जमाखोरी, कालाबाज़ारी एवं मिलावट जैसी समस्याओं के कारण उपभोक्ताओं में असंतोष बढ़ा। 1970 के दशक में विभिन्न उपभोक्ता संगठनों ने जागरूकता अभियान चलाए और अंततः उपभोक्ता संरक्षण कानून लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
(i) खाद्य संकट एवं जमाखोरी के कारण आंदोलन शुरू हुआ।
(ii) मिलावट एवं कालाबाज़ारी का विरोध किया गया।
(iii) उपभोक्ता संगठनों की भूमिका बढ़ी।
(iv) जागरूकता अभियान चलाए गए।
(v) उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा को बल मिला।
11. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (COPRA) क्या है?
उत्तर ⇒ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (Consumer Protection Act – COPRA) वर्ष 1986 में भारत सरकार द्वारा लागू किया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना, उनके शोषण को रोकना तथा उपभोक्ता विवादों का त्वरित एवं प्रभावी समाधान प्रदान करना है। इस अधिनियम के अंतर्गत उपभोक्ताओं को विभिन्न अधिकार तथा शिकायत निवारण की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है।
(i) वर्ष 1986 में लागू किया गया।
(ii) उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा करता है।
(iii) उपभोक्ता शोषण पर रोक लगाता है।
(iv) शिकायत निवारण की व्यवस्था प्रदान करता है।
(v) उपभोक्ताओं को कानूनी सुरक्षा देता है।
12. COPRA का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर ⇒ COPRA का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना, अनुचित व्यापारिक व्यवहारों पर रोक लगाना तथा उपभोक्ताओं को त्वरित न्याय एवं क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराना है। यह कानून उपभोक्ताओं को जागरूक एवं सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
(i) उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा करना।
(ii) अनुचित व्यापार पर रोक लगाना।
(iii) उपभोक्ताओं को न्याय दिलाना।
(iv) क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराना।
(v) उपभोक्ता जागरूकता बढ़ाना।
13. COPRA के अंतर्गत त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र लिखिए।
उत्तर ⇒ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (COPRA) के अंतर्गत उपभोक्ता विवादों के समाधान के लिए त्रिस्तरीय न्यायिक व्यवस्था स्थापित की गई है। यह व्यवस्था जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करती है, जिससे उपभोक्ताओं को सरल एवं त्वरित न्याय प्राप्त हो सके।
| आयोग | कार्य क्षेत्र |
|---|---|
| जिला आयोग (District Commission) | ₹1 करोड़ तक के दावों की सुनवाई करता है। |
| राज्य आयोग (State Commission) | ₹1 करोड़ से ₹10 करोड़ तक के दावों की सुनवाई करता है। |
| राष्ट्रीय आयोग (National Commission) | ₹10 करोड़ से अधिक के दावों की सुनवाई करता है। |
14. उपभोक्ताओं के प्रमुख कर्तव्य लिखिए।
उत्तर ⇒ उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी पालन करना चाहिए। वस्तु खरीदते समय उसकी गुणवत्ता, मूल्य एवं मानक चिह्नों की जाँच करनी चाहिए तथा खरीद की रसीद सुरक्षित रखनी चाहिए। किसी भी प्रकार की खराब वस्तु या सेवा मिलने पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
(i) गुणवत्ता एवं मानक चिह्न (ISI, AGMARK) की जाँच करें।
(ii) कैश मेमो/रसीद अवश्य लें।
(iii) गारंटी एवं वारंटी कार्ड सुरक्षित रखें।
(iv) खराब वस्तु मिलने पर शिकायत करें।
(v) अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें।
15. सूचना का अधिकार (Right to Information) क्या है?
उत्तर ⇒ सूचना का अधिकार उपभोक्ताओं को वस्तुओं एवं सेवाओं से संबंधित आवश्यक जानकारी प्राप्त करने का अधिकार देता है। उपभोक्ता को वस्तु का मूल्य, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि (Expiry Date), बैच संख्या, निर्माता का नाम एवं पता, उपयोग की विधि आदि जानने का अधिकार है। सही जानकारी मिलने से उपभोक्ता उचित निर्णय ले सकता है तथा आवश्यकता पड़ने पर शिकायत भी कर सकता है।
(i) वस्तु की सही जानकारी प्राप्त करने का अधिकार।
(ii) MRP, निर्माण एवं समाप्ति तिथि जानने का अधिकार।
(iii) निर्माता की जानकारी प्राप्त करने का अधिकार।
(iv) वस्तु के उपयोग एवं सावधानियों की जानकारी।
(v) सही निर्णय लेने में सहायता मिलती है।
16. उपभोक्ताओं के लिए सूचना का अधिकार क्यों आवश्यक है?
उत्तर ⇒ सूचना का अधिकार उपभोक्ताओं को वस्तुओं एवं सेवाओं के बारे में सही एवं पूर्ण जानकारी प्राप्त करने का अधिकार देता है। इससे उपभोक्ता वस्तु की गुणवत्ता, मूल्य, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि (Expiry Date), निर्माता का नाम एवं उपयोग संबंधी निर्देशों को जानकर सही निर्णय ले सकता है। यदि वस्तु में कोई कमी हो, तो उपभोक्ता शिकायत कर सकता है तथा मुआवज़े की माँग भी कर सकता है।
(i) सही एवं पूर्ण जानकारी प्राप्त होती है।
(ii) अच्छी गुणवत्ता वाली वस्तु चुनने में सहायता मिलती है।
(iii) MRP से अधिक मूल्य वसूले जाने से बचाव होता है।
(iv) दोषपूर्ण वस्तु पर शिकायत की जा सकती है।
(v) उपभोक्ता के अधिकारों की रक्षा होती है।
17. सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act, 2005) क्या है?
उत्तर ⇒ सूचना का अधिकार अधिनियम (Right to Information Act – RTI), अक्टूबर 2005 में लागू किया गया। यह कानून प्रत्येक नागरिक को सरकारी विभागों एवं संस्थाओं से सूचना प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करता है। इसका उद्देश्य सरकारी कार्यों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ाना तथा भ्रष्टाचार को कम करना है।
(i) वर्ष 2005 में लागू किया गया।
(ii) सरकारी सूचनाएँ प्राप्त करने का अधिकार देता है।
(iii) पारदर्शिता बढ़ाता है।
(iv) जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
(v) भ्रष्टाचार कम करने में सहायक है।
18. चुनने का अधिकार (Right to Choose) क्या है?
उत्तर ⇒ चुनने का अधिकार उपभोक्ता को अपनी पसंद एवं आवश्यकता के अनुसार किसी भी वस्तु या सेवा का स्वतंत्र रूप से चयन करने का अधिकार देता है। कोई भी विक्रेता उपभोक्ता को अनावश्यक वस्तु खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। यह अधिकार उपभोक्ता को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष खरीदारी सुनिश्चित करता है।
(i) उपभोक्ता अपनी पसंद से वस्तु चुन सकता है।
(ii) किसी वस्तु को खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
(iii) स्वतंत्र खरीदारी का अधिकार मिलता है।
(iv) अनुचित व्यापारिक व्यवहार पर रोक लगती है।
(v) उपभोक्ता के हितों की रक्षा होती है।
19. क्षतिपूर्ति निवारण का अधिकार (Right to Seek Redressal) क्या है?
उत्तर ⇒ यदि किसी उपभोक्ता को दोषपूर्ण वस्तु, खराब सेवा या अनुचित व्यापारिक व्यवहार के कारण हानि होती है, तो उसे न्याय एवं मुआवज़ा प्राप्त करने का अधिकार होता है। इसे क्षतिपूर्ति निवारण का अधिकार कहते हैं। उपभोक्ता अपनी शिकायत उपभोक्ता आयोग में दर्ज कर सकता है तथा आवश्यक होने पर मुआवज़े की माँग भी कर सकता है।
(i) शिकायत दर्ज कराने का अधिकार।
(ii) मुआवज़ा प्राप्त करने का अधिकार।
(iii) अनुचित व्यापार के विरुद्ध न्याय मिलता है।
(iv) उपभोक्ता आयोग में शिकायत की जा सकती है।
(v) उपभोक्ता के हितों की रक्षा होती है।
20. उपभोक्ता शिकायत कैसे दर्ज कर सकता है?
उत्तर ⇒ उपभोक्ता वस्तु या सेवा में कमी होने पर संबंधित उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कर सकता है। शिकायत व्यक्तिगत अथवा समूह के रूप में की जा सकती है। उपभोक्ता चाहे तो वकील की सहायता ले सकता है या स्वयं भी शिकायत प्रस्तुत कर सकता है। वर्तमान समय में ऑनलाइन शिकायत एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई की सुविधा भी उपलब्ध है।
(i) उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज की जा सकती है।
(ii) व्यक्तिगत या सामूहिक शिकायत की जा सकती है।
(iii) वकील के साथ या बिना वकील के शिकायत की जा सकती है।
(iv) ऑनलाइन शिकायत की सुविधा उपलब्ध है।
(v) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई संभव है।
21. उपभोक्ता हितों की रक्षा में उपभोक्ता संगठनों की क्या भूमिका है?
उत्तर ⇒ उपभोक्ता संगठन उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाते हैं तथा शिकायत दर्ज कराने में सहायता करते हैं। ये संगठन अनुचित व्यापारिक व्यवहार के विरुद्ध आवाज़ उठाते हैं, उपभोक्ताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा सरकार पर उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कानून एवं नीतियाँ बनाने का दबाव डालते हैं।
(i) उपभोक्ता जागरूकता फैलाते हैं।
(ii) शिकायत दर्ज कराने में सहायता करते हैं।
(iii) उपभोक्ताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
(iv) अनुचित व्यापारिक व्यवहार का विरोध करते हैं।
(v) सरकार पर प्रभावी कानून बनाने का दबाव डालते हैं।
22. उपभोक्ता निवारण प्रणाली (Consumer Redressal System) की प्रमुख सीमाएँ लिखिए।
उत्तर ⇒ उपभोक्ता निवारण प्रणाली उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने का महत्वपूर्ण माध्यम है, किन्तु इसकी कुछ सीमाएँ भी हैं। शिकायतों के निपटारे में अधिक समय लगना, कानूनी प्रक्रिया का जटिल होना तथा कई मामलों में रसीद या प्रमाण के अभाव में उपभोक्ताओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
(i) शिकायतों के निपटारे में अधिक समय लगता है।
(ii) प्रक्रिया जटिल एवं खर्चीली हो सकती है।
(iii) कई बार वकील की आवश्यकता पड़ती है।
(iv) रसीद या प्रमाण का अभाव समस्या बनता है।
(v) असंगठित क्षेत्र में नियमों का पालन कमजोर होता है।
23. उपभोक्ता को न्याय प्राप्त करने के लिए कहाँ जाना चाहिए?
उत्तर ⇒ यदि किसी उपभोक्ता के अधिकारों का उल्लंघन होता है या उसे दोषपूर्ण वस्तु अथवा खराब सेवा प्राप्त होती है, तो वह उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज करा सकता है। दावे की राशि के अनुसार मामला जिला आयोग, राज्य आयोग या राष्ट्रीय आयोग में प्रस्तुत किया जाता है।
(i) जिला उपभोक्ता आयोग।
(ii) राज्य उपभोक्ता आयोग।
(iii) राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग।
(iv) ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज की जा सकती है।
(v) आवश्यक होने पर उच्च आयोग में अपील की जा सकती है।
24. जागरूक उपभोक्ता बनने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर ⇒ एक जागरूक उपभोक्ता को वस्तु खरीदते समय उसकी गुणवत्ता, मूल्य, निर्माण एवं समाप्ति तिथि तथा मानक चिह्नों की जाँच करनी चाहिए। प्रत्येक खरीदारी की रसीद सुरक्षित रखनी चाहिए तथा किसी भी प्रकार की खराब वस्तु या सेवा मिलने पर तुरंत शिकायत दर्ज करनी चाहिए।
(i) ISI, AGMARK जैसे मानक चिह्न देखें।
(ii) MRP एवं Expiry Date जाँचें।
(iii) कैश मेमो/रसीद अवश्य लें।
(iv) भ्रामक विज्ञापनों से सावधान रहें।
(v) आवश्यकता पड़ने पर शिकायत दर्ज करें।
25. ‘उपभोक्ता अधिकार’ अध्याय का निष्कर्ष लिखिए।
उत्तर ⇒ उपभोक्ता अधिकार प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा एवं हितों की रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों की जानकारी होना आवश्यक है, ताकि वे अनुचित व्यापारिक व्यवहार का विरोध कर सकें। जागरूक उपभोक्ता ही अपने अधिकारों का सही उपयोग कर सकता है तथा निष्पक्ष एवं पारदर्शी बाज़ार व्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
(i) उपभोक्ता अधिकारों की जानकारी आवश्यक है।
(ii) उपभोक्ताओं को अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।
(iii) अनुचित व्यापारिक व्यवहार का विरोध करना चाहिए।
(iv) शिकायत निवारण प्रणाली का उपयोग करना चाहिए।
(v) जागरूक उपभोक्ता ही सुरक्षित उपभोक्ता होता है।
26. सुरक्षा का अधिकार (Right to Safety) क्या है?
उत्तर ⇒ सुरक्षा का अधिकार उपभोक्ता को ऐसी वस्तुओं एवं सेवाओं से सुरक्षा प्रदान करता है जो उसके जीवन एवं स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती हैं। निर्माता एवं विक्रेता का दायित्व है कि वे सुरक्षित, मानक एवं गुणवत्तापूर्ण वस्तुएँ उपलब्ध कराएँ। उपभोक्ता को ISI, AGMARK, FSSAI जैसे मानक चिह्न वाले उत्पादों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
(i) जीवन एवं स्वास्थ्य की सुरक्षा करता है।
(ii) दोषपूर्ण वस्तुओं से बचाता है।
(iii) मानक गुणवत्ता वाले उत्पादों को बढ़ावा देता है।
(iv) सुरक्षित वस्तुएँ खरीदने का अधिकार देता है।
(v) उपभोक्ता हितों की रक्षा करता है।
27. सुने जाने का अधिकार (Right to be Heard) क्या है?
उत्तर ⇒ सुने जाने का अधिकार उपभोक्ता को यह सुनिश्चित करता है कि उसकी शिकायतों एवं समस्याओं पर उचित मंच पर निष्पक्ष रूप से विचार किया जाए। यदि किसी उपभोक्ता के अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो वह अपनी शिकायत उपभोक्ता आयोग में प्रस्तुत कर सकता है तथा उसकी शिकायत की सुनवाई की जाती है।
(i) शिकायत रखने का अधिकार देता है।
(ii) उपभोक्ता आयोग में सुनवाई सुनिश्चित करता है।
(iii) निष्पक्ष न्याय दिलाने में सहायक है।
(iv) उपभोक्ता की आवाज़ को महत्व देता है।
(v) अधिकारों की रक्षा करता है।
28. उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार (Right to Consumer Education) क्या है?
उत्तर ⇒ उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों, कर्तव्यों एवं कानूनी उपायों की जानकारी प्राप्त करने का अधिकार देता है। जागरूक उपभोक्ता ही सही निर्णय ले सकता है तथा अपने साथ होने वाले शोषण का प्रभावी ढंग से विरोध कर सकता है।
(i) उपभोक्ता अधिकारों की जानकारी देता है।
(ii) कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाता है।
(iii) शोषण से बचने में सहायता करता है।
(iv) सही निर्णय लेने में मदद करता है।
(v) कानूनी जानकारी उपलब्ध कराता है।
29. ISI चिह्न (ISI Mark) क्या है?
उत्तर ⇒ ISI चिह्न भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा जारी किया जाने वाला गुणवत्ता प्रमाणन चिह्न है। यह दर्शाता है कि संबंधित उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों के अनुरूप है। उपभोक्ताओं को विद्युत उपकरणों एवं अन्य मानक उत्पादों की खरीद करते समय ISI चिह्न अवश्य देखना चाहिए।
(i) BIS द्वारा जारी किया जाता है।
(ii) गुणवत्ता एवं सुरक्षा का प्रतीक है।
(iii) मानक उत्पाद की पहचान कराता है।
(iv) उपभोक्ता का विश्वास बढ़ाता है।
(v) सुरक्षित खरीदारी में सहायक है।
30. AGMARK चिह्न (AGMARK) क्या है?
उत्तर ⇒ AGMARK कृषि एवं खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता प्रमाणित करने वाला सरकारी मानक चिह्न है। यह दर्शाता है कि संबंधित कृषि उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों की जाँच के बाद प्रमाणित किया गया है। घी, मसाले, दालें एवं खाद्य तेल जैसे उत्पादों पर AGMARK चिह्न देखा जा सकता है।
(i) कृषि उत्पादों का गुणवत्ता चिह्न है।
(ii) सरकार द्वारा प्रमाणित किया जाता है।
(iii) खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करता है।
(iv) उपभोक्ता का विश्वास बढ़ाता है।
(v) सुरक्षित एवं मानक उत्पाद की पहचान कराता है।
31. MRP (Maximum Retail Price) क्या है?
उत्तर ⇒ MRP (Maximum Retail Price) वह अधिकतम मूल्य है जिसे किसी वस्तु के लिए उपभोक्ता से वसूला जा सकता है। यह मूल्य निर्माता द्वारा वस्तु के पैकेट पर अंकित किया जाता है। कोई भी दुकानदार MRP से अधिक कीमत नहीं ले सकता। यदि कोई विक्रेता अधिक मूल्य वसूलता है, तो उपभोक्ता शिकायत दर्ज करा सकता है।
(i) अधिकतम खुदरा मूल्य होता है।
(ii) पैकेट पर अंकित रहता है।
(iii) MRP से अधिक मूल्य नहीं लिया जा सकता।
(iv) उपभोक्ता का आर्थिक शोषण रोकता है।
(v) अधिक मूल्य वसूलने पर शिकायत की जा सकती है।
32. एक्सपायरी डेट (Expiry Date) का क्या महत्व है?
उत्तर ⇒ एक्सपायरी डेट वह अंतिम तिथि होती है जिसके बाद किसी वस्तु, विशेषकर दवाओं एवं खाद्य पदार्थों का उपयोग सुरक्षित नहीं माना जाता। उपभोक्ता को वस्तु खरीदने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट अवश्य देखनी चाहिए। एक्सपायर उत्पाद बेचना कानूनन अपराध है तथा इसके विरुद्ध शिकायत की जा सकती है।
(i) सुरक्षित उपयोग की अंतिम तिथि होती है।
(ii) दवाओं एवं खाद्य पदार्थों के लिए महत्वपूर्ण है।
(iii) एक्सपायर वस्तु का उपयोग हानिकारक हो सकता है।
(iv) खरीदने से पहले जाँच करनी चाहिए।
(v) एक्सपायर वस्तु बेचने पर शिकायत की जा सकती है।
33. बैच संख्या (Batch Number) क्या है?
उत्तर ⇒ बैच संख्या किसी उत्पाद की पहचान के लिए दी गई विशेष संख्या होती है। इसके माध्यम से निर्माता किसी विशेष उत्पादन बैच की जानकारी प्राप्त कर सकता है। यदि किसी उत्पाद में दोष पाया जाता है, तो बैच संख्या के आधार पर उसकी पहचान एवं जाँच की जा सकती है।
(i) उत्पाद की पहचान संख्या होती है।
(ii) निर्माण बैच की जानकारी देती है।
(iii) दोषपूर्ण वस्तु की पहचान में सहायक होती है।
(iv) गुणवत्ता नियंत्रण में उपयोगी है।
(v) उपभोक्ता शिकायत में महत्वपूर्ण होती है।
34. मानक चिह्न (Standard Marks) क्यों महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर ⇒ मानक चिह्न यह सुनिश्चित करते हैं कि वस्तु निर्धारित गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों के अनुरूप है। ISI, AGMARK, FSSAI, Hallmark जैसे चिह्न उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित उत्पाद चुनने में सहायता करते हैं। इन चिह्नों से नकली एवं घटिया वस्तुओं की पहचान करना भी आसान हो जाता है।
(i) गुणवत्ता की पहचान कराते हैं।
(ii) सुरक्षित उत्पाद चुनने में सहायता करते हैं।
(iii) नकली वस्तुओं से बचाते हैं।
(iv) उपभोक्ता का विश्वास बढ़ाते हैं।
(v) मानक उत्पाद की गारंटी देते हैं।
35. FSSAI (एफएसएसएआई) चिह्न क्या है?
उत्तर ⇒ FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) भारत का खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण है। इसका चिह्न यह दर्शाता है कि संबंधित खाद्य उत्पाद निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार तैयार किया गया है। खाद्य पदार्थ खरीदते समय उपभोक्ता को FSSAI लाइसेंस संख्या एवं चिह्न अवश्य देखना चाहिए।
(i) खाद्य सुरक्षा का मानक चिह्न है।
(ii) खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करता है।
(iii) भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है।
(iv) सुरक्षित खाद्य पदार्थ की पहचान कराता है।
(v) उपभोक्ता स्वास्थ्य की रक्षा करता है।
36. हॉलमार्क (Hallmark) क्या है?
उत्तर ⇒ हॉलमार्क सोने एवं चाँदी के आभूषणों की शुद्धता प्रमाणित करने वाला आधिकारिक गुणवत्ता चिह्न है। भारत में यह प्रमाणन भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा प्रदान किया जाता है। हॉलमार्क चिह्न यह सुनिश्चित करता है कि आभूषण निर्धारित शुद्धता मानकों के अनुरूप है।
(i) सोने एवं चाँदी की शुद्धता का प्रमाण है।
(ii) BIS द्वारा जारी किया जाता है।
(iii) गुणवत्ता की गारंटी देता है।
(iv) उपभोक्ता को धोखाधड़ी से बचाता है।
(v) मानक आभूषण की पहचान कराता है।
37. उपभोक्ता को खरीदारी करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर ⇒ खरीदारी करते समय उपभोक्ता को वस्तु की गुणवत्ता, मूल्य, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि, मानक चिह्न एवं निर्माता की जानकारी अवश्य जाँचनी चाहिए। साथ ही कैश मेमो (रसीद) लेना, गारंटी/वारंटी कार्ड सुरक्षित रखना तथा MRP से अधिक मूल्य न देना भी आवश्यक है। इससे उपभोक्ता शोषण से बच सकता है।
(i) MRP एवं Expiry Date जाँचें।
(ii) ISI, AGMARK, FSSAI, Hallmark जैसे मानक चिह्न देखें।
(iii) कैश मेमो/रसीद अवश्य लें।
(iv) गारंटी एवं वारंटी कार्ड सुरक्षित रखें।
(v) दोषपूर्ण वस्तु मिलने पर शिकायत करें।
38. उपभोक्ता जागरूकता क्यों आवश्यक है?
उत्तर ⇒ उपभोक्ता जागरूकता आवश्यक है क्योंकि जागरूक उपभोक्ता अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों को समझता है तथा अनुचित व्यापारिक व्यवहार का विरोध कर सकता है। जागरूकता के कारण उपभोक्ता सही गुणवत्ता वाली वस्तुएँ खरीदता है, अधिक मूल्य देने से बचता है तथा आवश्यकता पड़ने पर शिकायत एवं मुआवज़े की माँग भी कर सकता है।
(i) उपभोक्ता अपने अधिकारों को जानता है।
(ii) शोषण से बचाव होता है।
(iii) सही वस्तु का चयन कर सकता है।
(iv) शिकायत दर्ज कराने में सक्षम होता है।
(v) सुरक्षित एवं समझदारीपूर्ण खरीदारी करता है।
39. उपभोक्ता अधिकार एवं कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक कैसे हैं?
उत्तर ⇒ उपभोक्ता अधिकार उपभोक्ता को सुरक्षा एवं न्याय प्रदान करते हैं, जबकि कर्तव्य उसे जिम्मेदार एवं जागरूक बनाते हैं। यदि उपभोक्ता अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी पालन करे, जैसे रसीद लेना, मानक चिह्न देखना एवं शिकायत दर्ज करना, तो वह अपने हितों की बेहतर रक्षा कर सकता है। इसलिए अधिकार एवं कर्तव्य दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
(i) अधिकार सुरक्षा प्रदान करते हैं।
(ii) कर्तव्य जिम्मेदारी का बोध कराते हैं।
(iii) जागरूकता बढ़ती है।
(iv) उपभोक्ता शोषण से बचता है।
(v) निष्पक्ष बाज़ार व्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।
40. ‘उपभोक्ता अधिकार’ अध्याय का निष्कर्ष लिखिए।
उत्तर ⇒ ‘उपभोक्ता अधिकार’ अध्याय हमें यह सिखाता है कि प्रत्येक उपभोक्ता को अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों की जानकारी होनी चाहिए। उपभोक्ता संरक्षण कानून, उपभोक्ता आयोग तथा विभिन्न उपभोक्ता संगठन उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए कार्य करते हैं। यदि उपभोक्ता जागरूक होकर मानक चिह्नों की जाँच करे, रसीद सुरक्षित रखे तथा आवश्यकता पड़ने पर अपने अधिकारों का प्रयोग करे, तो वह शोषण से बच सकता है। एक जागरूक उपभोक्ता ही सुरक्षित एवं सशक्त उपभोक्ता होता है।
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| Chapter 1: विकास |
| Chapter 2: भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक |
| Chapter 3: मुद्रा और साख |
| Chapter 4: वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था |
| Chapter 5: उपभोक्ता अधिकार |