Class 10 Economics: वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था

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Chapter Overview

Class10
SubjectEconomics 
Chapter Nameवैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था
Resource TypeRevision Notes
SyllabusNCERT
Suitable ForCBSE, JAC and other state boards

वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था Revision Notes

1. वैश्वीकरण (Globalisation) क्या है?

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाएँ व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी एवं सेवाओं के माध्यम से आपस में अधिक जुड़ जाती हैं और पूरा विश्व एक एकीकृत बाज़ार का रूप ले लेता है। इससे वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी एवं तकनीक का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आदान-प्रदान बढ़ता है तथा देशों के बीच आर्थिक संबंध मजबूत होते हैं।

(i) विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाएँ आपस में जुड़ती हैं।

(ii) व्यापार एवं निवेश में वृद्धि होती है।

(iii) तकनीक का आदान-प्रदान होता है।

(iv) विश्व एकीकृत बाज़ार बनता है।

(v) अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंध मजबूत होते हैं।

2. उदारीकरण (Liberalisation) क्या है?

उत्तर ⇒ उदारीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें सरकार व्यापार, उद्योग एवं निवेश पर लगाए गए अनावश्यक नियंत्रण, नियम एवं प्रतिबंधों को कम या समाप्त कर देती है, ताकि निजी क्षेत्र एवं विदेशी निवेश को बढ़ावा मिल सके। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ती है तथा आर्थिक विकास को गति मिलती है।

(i) व्यापार पर नियंत्रण कम किए जाते हैं।

(ii) निजी क्षेत्र को अधिक स्वतंत्रता मिलती है।

(iii) विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलता है।

(iv) प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।

(v) आर्थिक विकास को गति मिलती है।

3. निजीकरण (Privatisation) क्या है?

उत्तर ⇒ निजीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों, संस्थानों या सेवाओं का स्वामित्व अथवा प्रबंधन निजी क्षेत्र को सौंप देती है। इसका उद्देश्य कार्यकुशलता बढ़ाना, निवेश आकर्षित करना तथा आर्थिक गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाना होता है।

(i) सार्वजनिक क्षेत्र का स्वामित्व निजी क्षेत्र को दिया जाता है।

(ii) कार्यकुशलता बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।

(iii) निजी निवेश को बढ़ावा मिलता है।

(iv) आर्थिक गतिविधियाँ तेज होती हैं।

(v) उद्योगों का बेहतर प्रबंधन संभव होता है।

4. विदेशी व्यापार (Foreign Trade) क्या है?

उत्तर ⇒ विदेशी व्यापार वह प्रक्रिया है जिसमें वस्तुओं एवं सेवाओं का एक देश से दूसरे देश के बीच आयात एवं निर्यात किया जाता है। इसके माध्यम से उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँचने का अवसर मिलता है तथा उपभोक्ताओं को विभिन्न देशों की वस्तुएँ उपलब्ध होती हैं। विदेशी व्यापार वैश्वीकरण का प्रमुख आधार है।

(i) देशों के बीच वस्तुओं एवं सेवाओं का व्यापार होता है।

(ii) आयात एवं निर्यात शामिल होते हैं।

(iii) अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँच मिलती है।

(iv) उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलते हैं।

(v) वैश्वीकरण को बढ़ावा मिलता है।

5. निवेश (Investment) एवं विदेशी निवेश (Foreign Investment) क्या है?

उत्तर ⇒ भूमि, भवन, मशीन, उपकरण एवं अन्य परिसंपत्तियों की खरीद पर किया गया व्यय निवेश कहलाता है। जब कोई विदेशी कंपनी या बहुराष्ट्रीय कंपनी किसी अन्य देश में पूँजी लगाती है, तो उसे विदेशी निवेश कहते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना, व्यवसाय का विस्तार करना तथा लाभ अर्जित करना होता है।

(i) परिसंपत्तियों पर किया गया व्यय निवेश कहलाता है।

(ii) विदेशी कंपनियों द्वारा पूँजी लगाना विदेशी निवेश है।

(iii) उत्पादन क्षमता बढ़ती है।

(iv) रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।

(v) आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।

6. वैश्वीकरण कैसे कार्य करता है?

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण के अंतर्गत बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उत्पादन की विभिन्न प्रक्रियाएँ अलग-अलग देशों में करती हैं। वे सस्ती श्रमशक्ति, कच्चे माल एवं नए बाज़ारों का लाभ उठाती हैं तथा तैयार वस्तुओं को विश्व के विभिन्न देशों में बेचती हैं। इससे उत्पादन लागत कम होती है, व्यापार बढ़ता है तथा विश्व के देशों की अर्थव्यवस्थाएँ एक-दूसरे से अधिक जुड़ जाती हैं।

(i) उत्पादन के विभिन्न चरण अलग-अलग देशों में किए जाते हैं।

(ii) सस्ती श्रमशक्ति एवं संसाधनों का उपयोग होता है।

(iii) तैयार वस्तुएँ विश्वभर में बेची जाती हैं।

(iv) उत्पादन लागत कम होती है।

(v) वैश्विक व्यापार को बढ़ावा मिलता है।

7. उपभोक्ता विकल्पों में वृद्धि (Increase in Consumer Choices) क्या है?

उत्तर ⇒ जब बाज़ार में किसी वस्तु या सेवा के अनेक ब्रांड, मॉडल, डिज़ाइन एवं विभिन्न कीमतों के विकल्प उपलब्ध होते हैं, तो इसे उपभोक्ता विकल्पों में वृद्धि कहते हैं। वैश्वीकरण एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कारण उपभोक्ताओं को अपनी आवश्यकता एवं बजट के अनुसार वस्तुओं का चयन करने का अवसर मिलता है।

(i) वस्तुओं के अनेक विकल्प उपलब्ध होते हैं।

(ii) विभिन्न ब्रांड एवं मॉडल मिलते हैं।

(iii) अलग-अलग कीमतों पर वस्तुएँ उपलब्ध होती हैं।

(iv) उपभोक्ता अपनी पसंद से चयन कर सकता है।

(v) प्रतिस्पर्धा के कारण गुणवत्ता में सुधार होता है।

8. भारतीय बाज़ार में परिवर्तन के प्रमुख कारण लिखिए।

उत्तर ⇒ भारतीय बाज़ार में परिवर्तन का मुख्य कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियों का आगमन, उदारीकरण, तकनीकी विकास एवं विदेशी निवेश है। इन कारणों से बाज़ार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी, नई तकनीक आई, वस्तुओं की गुणवत्ता में सुधार हुआ तथा उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प उपलब्ध हुए।

(i) बहुराष्ट्रीय कंपनियों का आगमन।

(ii) उदारीकरण की नीति।

(iii) तकनीकी विकास।

(iv) विदेशी निवेश।

(v) प्रतिस्पर्धा एवं उपभोक्ता विकल्पों में वृद्धि।

9. बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (MNCs) क्या हैं?

उत्तर ⇒ बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (Multinational Companies – MNCs) वे कंपनियाँ होती हैं जो एक से अधिक देशों में उत्पादन, व्यापार या सेवाओं का संचालन करती हैं। इन कंपनियों का मुख्यालय सामान्यतः एक देश में होता है, जबकि उनकी शाखाएँ एवं उत्पादन इकाइयाँ कई देशों में स्थापित होती हैं। इनका मुख्य उद्देश्य अधिक लाभ अर्जित करना एवं वैश्विक बाज़ार का विस्तार करना होता है।

(i) एक से अधिक देशों में कार्य करती हैं।

(ii) उत्पादन एवं व्यापार करती हैं।

(iii) वैश्विक बाज़ार में कार्यरत होती हैं।

(iv) अधिक लाभ अर्जित करना उद्देश्य होता है।

(v) अनेक देशों में शाखाएँ होती हैं।

10. बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (MNCs) दूसरे देशों में क्यों जाती हैं?

उत्तर ⇒ बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अधिक लाभ कमाने, सस्ती श्रमशक्ति प्राप्त करने, कच्चे माल की उपलब्धता, नए बाज़ारों तक पहुँच तथा उत्पादन लागत कम करने के उद्देश्य से दूसरे देशों में जाती हैं। इसके अतिरिक्त वे आधुनिक संसाधनों एवं अनुकूल सरकारी नीतियों का लाभ उठाकर अपने व्यवसाय का विस्तार करती हैं।

(i) सस्ती श्रमशक्ति प्राप्त करने के लिए।

(ii) कच्चे माल की उपलब्धता के लिए।

(iii) नए बाज़ारों तक पहुँचने के लिए।

(iv) उत्पादन लागत कम करने के लिए।

(v) अधिक लाभ अर्जित करने के लिए।

11. बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (MNCs) उत्पादन इकाई कहाँ स्थापित करती हैं?

उत्तर ⇒ बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अपनी उत्पादन इकाइयाँ ऐसे स्थानों पर स्थापित करती हैं जहाँ बाज़ार के निकटता, सस्ती एवं कुशल श्रमशक्ति, कच्चे माल, भूमि, बिजली तथा परिवहन जैसी सुविधाएँ आसानी से उपलब्ध हों। इसके अतिरिक्त वे ऐसे देशों को प्राथमिकता देती हैं जहाँ सरकार की नीतियाँ उद्योगों एवं विदेशी निवेश के अनुकूल हों। इससे उत्पादन लागत कम होती है तथा अधिक लाभ प्राप्त होता है।

(i) बाज़ार के निकट स्थानों पर।

(ii) जहाँ सस्ती श्रमशक्ति उपलब्ध हो।

(iii) जहाँ कच्चा माल एवं संसाधन आसानी से मिलें।

(iv) जहाँ सरकारी नीतियाँ अनुकूल हों।

(v) उत्पादन लागत कम करने के उद्देश्य से।

12. बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) के कार्य करने के प्रमुख तरीके लिखिए।

उत्तर ⇒ बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ विभिन्न देशों में अपने व्यवसाय का विस्तार करने के लिए अनेक तरीकों का उपयोग करती हैं। वे स्थानीय कंपनियों के साथ साझेदारी करती हैं, स्थानीय कंपनियों का अधिग्रहण करती हैं तथा छोटे उत्पादकों को उत्पादन के लिए ऑर्डर देकर अपने ब्रांड के नाम से वस्तुओं का विपणन करती हैं।

(i) स्थानीय कंपनियों के साथ संयुक्त उत्पादन।

(ii) स्थानीय कंपनियों का अधिग्रहण।

(iii) छोटे उत्पादकों को उत्पादन के लिए ऑर्डर देना।

(iv) आधुनिक तकनीक का उपयोग।

(v) वैश्विक उत्पादन नेटवर्क का निर्माण।

13. बहुराष्ट्रीय उत्पादन (Multinational Production) के प्रमुख लाभ लिखिए।

उत्तर ⇒ बहुराष्ट्रीय उत्पादन से उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता एवं अधिक विकल्प वाली वस्तुएँ प्राप्त होती हैं। आधुनिक तकनीक का विकास होता है, रोजगार के अवसर बढ़ते हैं तथा विदेशी निवेश के कारण आर्थिक विकास को गति मिलती है। इसके साथ ही स्थानीय उद्योगों में प्रतिस्पर्धा एवं कार्यकुशलता भी बढ़ती है।

(i) उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलते हैं।

(ii) आधुनिक तकनीक का विकास होता है।

(iii) रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।

(iv) उत्पादन लागत कम हो सकती है।

(v) विदेशी निवेश एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।

14. बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) से होने वाले प्रमुख लाभ लिखिए।

उत्तर ⇒ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आगमन से देश में नई तकनीक, पूँजी एवं आधुनिक उत्पादन पद्धतियों का विकास होता है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, वस्तुओं की गुणवत्ता में सुधार होता है तथा उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प उपलब्ध होते हैं। प्रतिस्पर्धा बढ़ने से उद्योगों की कार्यक्षमता भी बढ़ती है।

(i) नई तकनीक का विकास।

(ii) रोजगार के अवसरों में वृद्धि।

(iii) वस्तुओं की गुणवत्ता में सुधार।

(iv) उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प।

(v) आर्थिक विकास को बढ़ावा।

15. बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) से होने वाली प्रमुख हानियाँ लिखिए।

उत्तर ⇒ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कारण छोटे एवं स्थानीय उद्योगों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। कई बार स्थानीय उद्योग बंद हो जाते हैं तथा रोजगार में अस्थिरता उत्पन्न होती है। लाभ कमाने की प्रवृत्ति के कारण सामाजिक हितों की उपेक्षा भी हो सकती है तथा आर्थिक असमानता बढ़ने की संभावना रहती है।

(i) छोटे उद्योगों पर प्रतिस्पर्धा का दबाव बढ़ता है।

(ii) स्थानीय उद्योग बंद हो सकते हैं।

(iii) रोजगार में अस्थिरता आ सकती है।

(iv) आर्थिक असमानता बढ़ सकती है।

(v) सामाजिक हितों की उपेक्षा हो सकती है।

16. विदेशी व्यापार बाज़ारों का एकीकरण कैसे करता है?

उत्तर ⇒ विदेशी व्यापार के माध्यम से विभिन्न देशों के उत्पादक अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में बेच सकते हैं तथा अन्य देशों से वस्तुओं एवं सेवाओं का आयात कर सकते हैं। इससे देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं एवं तकनीक का आदान-प्रदान बढ़ता है। प्रतिस्पर्धा में वृद्धि होती है, वस्तुओं की गुणवत्ता सुधरती है तथा विभिन्न देशों के बाज़ार आपस में जुड़कर एकीकृत हो जाते हैं।

(i) अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँच मिलती है।

(ii) आयात-निर्यात में वृद्धि होती है।

(iii) प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।

(iv) वस्तुओं की गुणवत्ता में सुधार होता है।

(v) विभिन्न देशों के बाज़ार एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं।

17. वैश्वीकरण के प्रमुख आयाम (Dimensions of Globalisation) लिखिए।

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके अंतर्गत सेवाओं, निवेश, प्रौद्योगिकी एवं लोगों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आदान-प्रदान भी शामिल है। इन सभी माध्यमों से विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाएँ एक-दूसरे से अधिक जुड़ती हैं तथा वैश्विक आर्थिक सहयोग को बढ़ावा मिलता है।

(i) वस्तुओं का आदान-प्रदान।

(ii) सेवाओं का आदान-प्रदान।

(iii) विदेशी निवेश।

(iv) प्रौद्योगिकी का प्रसार।

(v) लोगों का अंतरराष्ट्रीय आवागमन।

18. वैश्वीकरण को संभव बनाने वाले प्रमुख कारक लिखिए।

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण को गति देने में परिवहन एवं संचार तकनीक का विकास, सूचना प्रौद्योगिकी (IT), इंटरनेट, उपग्रह संचार तथा सरकार द्वारा व्यापार अवरोधों को कम करने जैसी नीतियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन कारणों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं निवेश पहले की तुलना में अधिक सरल एवं तेज हो गया है।

(i) परिवहन तकनीक का विकास।

(ii) सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT)।

(iii) इंटरनेट एवं कंप्यूटर का उपयोग।

(iv) व्यापार अवरोधों में कमी।

(v) आयात-निर्यात को प्रोत्साहन।

19. व्यापार अवरोधक (Trade Barrier) क्या है?

उत्तर ⇒ व्यापार अवरोधक वे उपाय हैं जिनका उपयोग सरकार विदेशी व्यापार को नियंत्रित करने अथवा उस पर प्रतिबंध लगाने के लिए करती है। आयात शुल्क (Import Duty), आयात कोटा एवं अन्य प्रतिबंध इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इनका उद्देश्य घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से सुरक्षा प्रदान करना होता है।

(i) विदेशी व्यापार को नियंत्रित करते हैं।

(ii) आयात शुल्क इसका प्रमुख उदाहरण है।

(iii) घरेलू उद्योगों की रक्षा करते हैं।

(iv) विदेशी वस्तुओं के प्रवेश को सीमित करते हैं।

(v) सरकार द्वारा लागू किए जाते हैं।

20. स्वतंत्रता के बाद (1950–1990) भारत ने व्यापार अवरोधक क्यों लगाए?

उत्तर ⇒ स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में नए उद्योग विकसित हो रहे थे। यदि उस समय विदेशी कंपनियों को बिना किसी प्रतिबंध के व्यापार करने दिया जाता, तो भारतीय उद्योग विदेशी प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं कर पाते। इसलिए सरकार ने आयात पर नियंत्रण एवं व्यापार अवरोध लगाए, ताकि घरेलू उद्योगों को संरक्षण मिल सके और वे मजबूत बन सकें।

(i) नए उद्योगों की सुरक्षा के लिए।

(ii) विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए।

(iii) घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए।

(iv) आत्मनिर्भरता विकसित करने के लिए।

(v) औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन देने के लिए।

21. 1991 के बाद भारत की आर्थिक नीतियों में क्या परिवर्तन हुए?

उत्तर ⇒ वर्ष 1991 के बाद भारत सरकार ने उदारीकरण, निजीकरण एवं वैश्वीकरण (LPG) की नीति अपनाई। सरकार ने व्यापार एवं निवेश पर लगे अनेक प्रतिबंधों को हटाया, विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश की अनुमति दी तथा आयात-निर्यात को सरल बनाया। इन सुधारों से भारतीय अर्थव्यवस्था अधिक खुली एवं प्रतिस्पर्धात्मक बनी।

(i) उदारीकरण की नीति अपनाई गई।

(ii) व्यापार पर लगे प्रतिबंध कम किए गए।

(iii) विदेशी निवेश को प्रोत्साहन मिला।

(iv) आयात-निर्यात आसान हुआ।

(v) अर्थव्यवस्था अधिक प्रतिस्पर्धी बनी।

22. उदारीकरण के बाद भारत में क्या परिवर्तन हुए?

उत्तर ⇒ उदारीकरण के बाद भारत में विदेशी कंपनियों के लिए निवेश करना आसान हो गया। वस्तुओं एवं सेवाओं के आयात-निर्यात में वृद्धि हुई, प्रतिस्पर्धा बढ़ी तथा उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलने लगे। भारतीय उद्योगों ने भी आधुनिक तकनीक अपनाकर अपनी गुणवत्ता एवं उत्पादन क्षमता में सुधार किया।

(i) विदेशी निवेश बढ़ा।

(ii) आयात-निर्यात में वृद्धि हुई।

(iii) प्रतिस्पर्धा बढ़ी।

(iv) उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिले।

(v) उद्योगों की गुणवत्ता में सुधार हुआ।

23. विश्व व्यापार संगठन (WTO) क्या है?

उत्तर ⇒ विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization – WTO) एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच मुक्त एवं निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देना है। यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार से संबंधित नियम निर्धारित करता है तथा सदस्य देशों द्वारा इन नियमों के पालन की निगरानी करता है। विश्व के अधिकांश देश इसके सदस्य हैं।

(i) अंतरराष्ट्रीय व्यापार से संबंधित संस्था है।

(ii) व्यापार के नियम निर्धारित करती है।

(iii) सदस्य देशों की निगरानी करती है।

(iv) मुक्त व्यापार को बढ़ावा देती है।

(v) अधिकांश देश इसके सदस्य हैं।

24. विश्व व्यापार संगठन (WTO) की प्रमुख आलोचनाएँ लिखिए।

उत्तर ⇒ WTO की आलोचना इसलिए की जाती है क्योंकि विकसित देश कई बार अपने हितों की रक्षा के लिए व्यापार अवरोध बनाए रखते हैं, जबकि विकासशील देशों पर इन्हें हटाने का दबाव डालते हैं। इससे असमान प्रतिस्पर्धा उत्पन्न होती है तथा विकासशील देशों के किसानों एवं छोटे उत्पादकों को नुकसान उठाना पड़ता है।

(i) विकसित देश दोहरे मापदंड अपनाते हैं।

(ii) विकासशील देशों पर अधिक दबाव डाला जाता है।

(iii) असमान प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।

(iv) कृषि क्षेत्र प्रभावित होता है।

(v) छोटे उत्पादकों को नुकसान होता है।

25. भारतीय अर्थव्यवस्था पर वैश्वीकरण का उपभोक्ताओं पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण के कारण भारतीय उपभोक्ताओं को अनेक नए ब्रांड एवं बेहतर गुणवत्ता वाली वस्तुएँ उपलब्ध हुईं। बाज़ार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से कई वस्तुओं की कीमतों में कमी आई तथा उपभोक्ताओं के पास अपनी पसंद एवं बजट के अनुसार वस्तुएँ चुनने के अधिक विकल्प उपलब्ध हुए। इससे जीवन-स्तर में भी सुधार हुआ।

(i) वस्तुओं के अधिक विकल्प उपलब्ध हुए।

(ii) गुणवत्ता में सुधार हुआ।

(iii) कई वस्तुएँ सस्ती हुईं।

(iv) प्रतिस्पर्धा बढ़ी।

(v) उपभोक्ताओं का जीवन-स्तर बेहतर हुआ।

26. भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) का क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण के बाद बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत में बड़े पैमाने पर निवेश किया। इन कंपनियों ने उद्योग एवं सेवा क्षेत्र में नई तकनीक, आधुनिक प्रबंधन एवं पूँजी का निवेश किया, जिससे रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हुए। साथ ही स्थानीय आपूर्तिकर्ता कंपनियों को भी लाभ मिला तथा उत्पादन एवं गुणवत्ता में सुधार हुआ।

(i) विदेशी निवेश में वृद्धि हुई।

(ii) नई तकनीक का विकास हुआ।

(iii) रोजगार के अवसर बढ़े।

(iv) स्थानीय कंपनियों को लाभ मिला।

(v) उत्पादन एवं गुणवत्ता में सुधार हुआ।

27. वैश्वीकरण का भारतीय कंपनियों पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण के कारण भारतीय कंपनियों को विदेशी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ी। इससे अनेक भारतीय कंपनियों ने आधुनिक तकनीक अपनाई, उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार किया तथा अपनी कार्यकुशलता बढ़ाई। कुछ भारतीय कंपनियों ने विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी भी की और कई कंपनियाँ स्वयं बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ बन गईं।

(i) प्रतिस्पर्धा बढ़ी।

(ii) आधुनिक तकनीक अपनाई गई।

(iii) उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार हुआ।

(iv) विदेशी कंपनियों से सहयोग बढ़ा।

(v) कुछ भारतीय कंपनियाँ MNCs बनीं।

28. वैश्वीकरण का सेवा क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण से भारत के सेवा क्षेत्र का तेज़ी से विकास हुआ। सूचना प्रौद्योगिकी (IT), कॉल सेंटर, बीपीओ, संचार एवं डाटा सेवाओं में नए रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए। भारत से अनेक सेवाओं का निर्यात बढ़ा, जिससे राष्ट्रीय आय एवं विदेशी मुद्रा अर्जन में वृद्धि हुई।

(i) सूचना प्रौद्योगिकी का विकास हुआ।

(ii) कॉल सेंटर एवं BPO का विस्तार हुआ।

(iii) सेवाओं का निर्यात बढ़ा।

(iv) रोजगार के अवसर बढ़े।

(v) राष्ट्रीय आय में वृद्धि हुई।

29. वैश्वीकरण के प्रमुख नकारात्मक प्रभाव लिखिए।

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण का लाभ सभी वर्गों को समान रूप से नहीं मिला। छोटे एवं स्थानीय उद्योगों को विदेशी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा। कई छोटे उद्योग बंद हो गए, रोजगार में अस्थिरता बढ़ी तथा आय एवं संपत्ति की असमानता में वृद्धि हुई। किसानों एवं पारंपरिक उत्पादकों को भी अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

(i) छोटे उद्योग प्रभावित हुए।

(ii) रोजगार में अस्थिरता बढ़ी।

(iii) आय एवं संपत्ति की असमानता बढ़ी।

(iv) किसानों को नुकसान हुआ।

(v) बड़ी कंपनियों का प्रभाव बढ़ा।

30. विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए भारत सरकार ने कौन-कौन से कदम उठाए?

उत्तर ⇒ भारत सरकार ने विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZs) की स्थापना की, उद्योगों को करों में छूट प्रदान की तथा व्यापार एवं निवेश संबंधी नियमों को सरल बनाया। इसके अतिरिक्त विश्व स्तरीय आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं तथा कुछ श्रम कानूनों में लचीलापन लाकर विदेशी कंपनियों के लिए निवेश का अनुकूल वातावरण तैयार किया गया।

(i) विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZs) की स्थापना।

(ii) करों में छूट प्रदान की गई।

(iii) व्यापार एवं निवेश नियम सरल किए गए।

(iv) विश्व स्तरीय आधारभूत सुविधाएँ विकसित की गईं।

(v) विदेशी निवेश के लिए अनुकूल वातावरण बनाया गया।

26. भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) का क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण के बाद बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत में बड़े पैमाने पर निवेश किया। इन कंपनियों ने उद्योग एवं सेवा क्षेत्र में नई तकनीक, आधुनिक प्रबंधन एवं पूँजी का निवेश किया, जिससे रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हुए। साथ ही स्थानीय आपूर्तिकर्ता कंपनियों को भी लाभ मिला तथा उत्पादन एवं गुणवत्ता में सुधार हुआ।

(i) विदेशी निवेश में वृद्धि हुई।

(ii) नई तकनीक का विकास हुआ।

(iii) रोजगार के अवसर बढ़े।

(iv) स्थानीय कंपनियों को लाभ मिला।

(v) उत्पादन एवं गुणवत्ता में सुधार हुआ।

27. वैश्वीकरण का भारतीय कंपनियों पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण के कारण भारतीय कंपनियों को विदेशी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ी। इससे अनेक भारतीय कंपनियों ने आधुनिक तकनीक अपनाई, उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार किया तथा अपनी कार्यकुशलता बढ़ाई। कुछ भारतीय कंपनियों ने विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी भी की और कई कंपनियाँ स्वयं बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ बन गईं।

(i) प्रतिस्पर्धा बढ़ी।

(ii) आधुनिक तकनीक अपनाई गई।

(iii) उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार हुआ।

(iv) विदेशी कंपनियों से सहयोग बढ़ा।

(v) कुछ भारतीय कंपनियाँ MNCs बनीं।

28. वैश्वीकरण का सेवा क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण से भारत के सेवा क्षेत्र का तेज़ी से विकास हुआ। सूचना प्रौद्योगिकी (IT), कॉल सेंटर, बीपीओ, संचार एवं डाटा सेवाओं में नए रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए। भारत से अनेक सेवाओं का निर्यात बढ़ा, जिससे राष्ट्रीय आय एवं विदेशी मुद्रा अर्जन में वृद्धि हुई।

(i) सूचना प्रौद्योगिकी का विकास हुआ।

(ii) कॉल सेंटर एवं BPO का विस्तार हुआ।

(iii) सेवाओं का निर्यात बढ़ा।

(iv) रोजगार के अवसर बढ़े।

(v) राष्ट्रीय आय में वृद्धि हुई।

29. वैश्वीकरण के प्रमुख नकारात्मक प्रभाव लिखिए।

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण का लाभ सभी वर्गों को समान रूप से नहीं मिला। छोटे एवं स्थानीय उद्योगों को विदेशी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा। कई छोटे उद्योग बंद हो गए, रोजगार में अस्थिरता बढ़ी तथा आय एवं संपत्ति की असमानता में वृद्धि हुई। किसानों एवं पारंपरिक उत्पादकों को भी अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

(i) छोटे उद्योग प्रभावित हुए।

(ii) रोजगार में अस्थिरता बढ़ी।

(iii) आय एवं संपत्ति की असमानता बढ़ी।

(iv) किसानों को नुकसान हुआ।

(v) बड़ी कंपनियों का प्रभाव बढ़ा।

30. विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए भारत सरकार ने कौन-कौन से कदम उठाए?

उत्तर ⇒ भारत सरकार ने विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZs) की स्थापना की, उद्योगों को करों में छूट प्रदान की तथा व्यापार एवं निवेश संबंधी नियमों को सरल बनाया। इसके अतिरिक्त विश्व स्तरीय आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं तथा कुछ श्रम कानूनों में लचीलापन लाकर विदेशी कंपनियों के लिए निवेश का अनुकूल वातावरण तैयार किया गया।

(i) विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZs) की स्थापना।

(ii) करों में छूट प्रदान की गई।

(iii) व्यापार एवं निवेश नियम सरल किए गए।

(iv) विश्व स्तरीय आधारभूत सुविधाएँ विकसित की गईं।

(v) विदेशी निवेश के लिए अनुकूल वातावरण बनाया गया।

36. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न्यायसंगत वैश्वीकरण लाने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं?

उत्तर ⇒ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न्यायसंगत वैश्वीकरण सुनिश्चित करने के लिए विश्व व्यापार संगठन (WTO) में निष्पक्ष एवं समान नियम बनाए जाने चाहिए। विकासशील देशों को अपने हितों की रक्षा के लिए आपसी सहयोग बढ़ाना चाहिए तथा विकसित देशों द्वारा अपनाई जाने वाली अनुचित व्यापार नीतियों का सामूहिक रूप से विरोध करना चाहिए। इससे वैश्वीकरण के लाभ सभी देशों तक समान रूप से पहुँच सकते हैं।

(i) WTO में न्यायसंगत नियम बनाए जाएँ।

(ii) विकासशील देशों को सहयोग करना चाहिए।

(iii) अनुचित व्यापार नीतियों का विरोध किया जाए।

(iv) सभी देशों को समान अवसर मिलें।

(v) वैश्वीकरण के लाभ समान रूप से वितरित हों।

37. ‘वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था’ अध्याय से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर ⇒ यह अध्याय हमें बताता है कि वैश्वीकरण ने विश्व के देशों को व्यापार, निवेश एवं तकनीक के माध्यम से आपस में जोड़ा है। इससे आर्थिक विकास, रोजगार एवं उपभोक्ताओं के विकल्पों में वृद्धि हुई है। साथ ही यह भी समझ में आता है कि वैश्वीकरण के लाभ सभी वर्गों तक समान रूप से पहुँचाने के लिए सरकार की सक्रिय भूमिका तथा न्यायसंगत नीतियाँ आवश्यक हैं।

(i) वैश्वीकरण देशों को जोड़ता है।

(ii) व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा मिलता है।

(iii) उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलते हैं।

(iv) आर्थिक विकास एवं रोजगार बढ़ते हैं।

(v) न्यायसंगत नीतियाँ आवश्यक हैं।

38. वैश्वीकरण के प्रमुख लाभ एवं हानियाँ लिखिए।

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण से उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता की वस्तुएँ, अधिक विकल्प एवं नई तकनीक प्राप्त होती है। रोजगार एवं विदेशी निवेश में वृद्धि होती है। दूसरी ओर छोटे उद्योगों पर प्रतिस्पर्धा का दबाव बढ़ता है, रोजगार में अस्थिरता आती है तथा आर्थिक असमानता बढ़ सकती है। इसलिए वैश्वीकरण के लाभों एवं चुनौतियों दोनों को समझना आवश्यक है।

लाभ :
(i) विदेशी निवेश में वृद्धि।

(ii) नई तकनीक का विकास।

(iii) रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।

(iv) उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलते हैं।

(v) उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होता है।

हानियाँ :
(i) छोटे उद्योग प्रभावित होते हैं।

(ii) रोजगार में अस्थिरता आती है।

(iii) आर्थिक असमानता बढ़ सकती है।

(iv) स्थानीय उत्पादकों को नुकसान होता है।

(v) बड़ी कंपनियों का प्रभुत्व बढ़ता है।

39. वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था का क्या संबंध है?

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व अर्थव्यवस्था से अधिक जुड़ गई है। विदेशी व्यापार, निवेश, तकनीक एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियों के माध्यम से भारत में उद्योग, सेवा क्षेत्र एवं उत्पादन का विकास हुआ है। इसके साथ ही भारतीय कंपनियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा, जिससे उनकी गुणवत्ता एवं कार्यकुशलता में सुधार हुआ।

(i) भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व से जुड़ी।

(ii) विदेशी निवेश में वृद्धि हुई।

(iii) उद्योग एवं सेवा क्षेत्र का विकास हुआ।

(iv) प्रतिस्पर्धा बढ़ी।

(v) गुणवत्ता एवं कार्यकुशलता में सुधार हुआ।

40. ‘वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था’ अध्याय का निष्कर्ष लिखिए।

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण आधुनिक विश्व की एक महत्वपूर्ण आर्थिक प्रक्रिया है जिसने व्यापार, निवेश, तकनीक एवं सेवाओं के माध्यम से विभिन्न देशों को आपस में जोड़ा है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था में अनेक सकारात्मक परिवर्तन हुए, जैसे—विदेशी निवेश, आधुनिक तकनीक, रोजगार एवं उपभोक्ता विकल्पों में वृद्धि। हालांकि छोटे उद्योगों एवं कमजोर वर्गों को कुछ चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। इसलिए आवश्यक है कि वैश्वीकरण की प्रक्रिया न्यायसंगत हो तथा इसके लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से पहुँचें।

More Class 10 Economics Revision Notes

Chapter 1: विकास
Chapter 2: भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक
Chapter 3: मुद्रा और साख
Chapter 4: वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था
Chapter 5: उपभोक्ता अधिकार

Class 10 Notes by Subject

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