Class 10 Geography: जल संसाधन
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Chapter Overview
| Class | 10 |
| Subject | Geography |
| Chapter Name | Water Resources जल संसाधन |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
जल संसाधन Revision Notes
1. जल संसाधन (Water Resources) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर ⇒
पृथ्वी पर उपलब्ध सभी प्रकार के जल स्रोत, जिनका उपयोग मानव, कृषि, उद्योग, पशुपालन एवं अन्य आवश्यक कार्यों के लिए किया जाता है, जल संसाधन (Water Resources) कहलाते हैं। जल मानव जीवन का सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। इसके बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। नदियाँ, झीलें, तालाब, कुएँ, भूजल, वर्षा का जल तथा जलाशय जल संसाधनों के प्रमुख स्रोत हैं।
झारखंड प्राकृतिक जल संसाधनों से समृद्ध राज्य है। यहाँ दामोदर, स्वर्णरेखा, बराकर, शंख, दक्षिण कोयल, उत्तर कोयल, अजय एवं मयूराक्षी जैसी अनेक नदियाँ बहती हैं। राज्य में वर्षा का अधिकांश जल बिना उपयोग के बह जाता है, इसलिए जल संरक्षण एवं जल प्रबंधन की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
जल संसाधनों का महत्व निम्नलिखित है—
(i) पेयजल की आवश्यकता पूरी करते हैं।
(ii) कृषि एवं सिंचाई का प्रमुख आधार हैं।
(iii) उद्योगों में जल का उपयोग होता है।
(iv) जल विद्युत उत्पादन में सहायक हैं।
(v) पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हैं।
2. झारखंड में जल संसाधनों का क्या महत्व है?
उत्तर ⇒
झारखंड में जल संसाधनों का आर्थिक एवं सामाजिक विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। राज्य की अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर है तथा कृषि का प्रमुख आधार जल है। नदियों, बाँधों, तालाबों एवं भूजल के माध्यम से सिंचाई की जाती है। इसके अतिरिक्त उद्योगों, जल विद्युत उत्पादन, पेयजल आपूर्ति एवं मत्स्य पालन के लिए भी जल संसाधनों का उपयोग किया जाता है।
झारखंड में पर्याप्त वर्षा होने के बावजूद वर्षा का अधिकांश जल बहकर अन्य राज्यों में चला जाता है। यदि जल का वैज्ञानिक ढंग से संरक्षण एवं संचयन किया जाए, तो राज्य में सिंचाई एवं पेयजल की समस्या काफी हद तक दूर की जा सकती है।
झारखंड में जल संसाधनों का महत्व निम्नलिखित है—
(i) कृषि एवं सिंचाई के लिए आवश्यक हैं।
(ii) पेयजल उपलब्ध कराते हैं।
(iii) उद्योगों को जल उपलब्ध कराते हैं।
(iv) जल विद्युत उत्पादन में सहायक हैं।
(v) मत्स्य पालन एवं पर्यटन को बढ़ावा देते हैं।
(vi) राज्य के आर्थिक विकास में योगदान देते हैं।
3. झारखंड की प्रमुख नदियों के नाम लिखिए।
उत्तर ⇒
झारखंड अनेक महत्वपूर्ण नदियों का उद्गम एवं प्रवाह क्षेत्र है। ये नदियाँ राज्य की कृषि, सिंचाई, पेयजल, जल विद्युत तथा औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अधिकांश नदियाँ छोटानागपुर पठार से निकलती हैं तथा पूर्वी भारत के विभिन्न राज्यों से होकर बहती हैं।
झारखंड की प्रमुख नदियाँ निम्नलिखित हैं—
(i) दामोदर नदी
(ii) स्वर्णरेखा नदी
(iii) बराकर नदी
(iv) शंख नदी
(v) दक्षिण कोयल नदी
(vi) उत्तर कोयल नदी
(vii) अजय नदी
(viii) मयूराक्षी नदी
(ix) करकरी नदी
(x) औरंगा नदी
इन नदियों का उपयोग सिंचाई, पेयजल, जल विद्युत उत्पादन तथा औद्योगिक कार्यों में किया जाता है। कई नदियों पर बाँध एवं बहुउद्देशीय परियोजनाएँ भी विकसित की गई हैं।
4. जल संरक्षण (Water Conservation) क्या है? इसकी आवश्यकता क्यों है?
उत्तर ⇒
जल का उचित एवं संतुलित उपयोग करना तथा भविष्य के लिए जल को सुरक्षित रखना जल संरक्षण (Water Conservation) कहलाता है। वर्तमान समय में बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिकीकरण, भूजल के अत्यधिक दोहन तथा जल प्रदूषण के कारण जल संकट की समस्या बढ़ती जा रही है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि जल का उपयोग सोच-समझकर करे तथा जल संरक्षण के उपाय अपनाए।
झारखंड में वर्षा पर्याप्त होती है, लेकिन वर्षा का अधिकांश जल बहकर निकल जाता है। यदि वर्षा जल का संचयन किया जाए तथा तालाबों एवं जलाशयों का विकास किया जाए, तो जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
जल संरक्षण की आवश्यकता निम्नलिखित है—
(i) भविष्य के लिए जल सुरक्षित रखने हेतु।
(ii) भूजल स्तर बनाए रखने हेतु।
(iii) कृषि एवं सिंचाई की आवश्यकता पूरी करने हेतु।
(iv) पेयजल संकट दूर करने हेतु।
(v) पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने हेतु।
(vi) जल की बर्बादी रोकने हेतु।
5. वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) क्या है?
उत्तर ⇒
वर्षा के जल को एकत्रित करके उसका उपयोग भविष्य में पेयजल, सिंचाई अथवा भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) के लिए करना वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) कहलाता है। यह जल संरक्षण का सबसे प्रभावी एवं सरल उपाय माना जाता है। वर्षा के जल को घरों की छतों, तालाबों, कुओं, जलाशयों एवं विशेष संरचनाओं में संग्रहित किया जाता है।
झारखंड में अच्छी वर्षा होने के बावजूद जल का बड़ा भाग बहकर नष्ट हो जाता है। यदि प्रत्येक गाँव एवं शहर में वर्षा जल संचयन को अपनाया जाए, तो भूजल स्तर बढ़ेगा तथा जल संकट की समस्या काफी कम हो सकती है।
वर्षा जल संचयन के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—
(i) भूजल स्तर में वृद्धि होती है।
(ii) पेयजल की उपलब्धता बढ़ती है।
(iii) सिंचाई के लिए जल उपलब्ध रहता है।
(iv) जल संकट को कम करने में सहायता मिलती है।
(v) जल का संरक्षण एवं सदुपयोग होता है।
(vi) पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।
6. जल संकट (Water Scarcity) क्या है? इसके प्रमुख कारण लिखिए।
उत्तर ⇒
जब किसी क्षेत्र में लोगों की आवश्यकताओं की तुलना में जल की उपलब्धता कम हो जाती है, तब उस स्थिति को जल संकट (Water Scarcity) कहा जाता है। वर्तमान समय में जल संकट विश्व की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक बन चुका है। बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण, औद्योगीकरण, भूजल का अत्यधिक दोहन तथा जल प्रदूषण इसके प्रमुख कारण हैं। झारखंड में पर्याप्त वर्षा होने के बावजूद वर्षा जल का उचित संरक्षण नहीं होने के कारण कई क्षेत्रों में गर्मियों के दौरान जल संकट उत्पन्न हो जाता है।
यदि समय रहते जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन जैसे उपाय नहीं अपनाए गए, तो भविष्य में पेयजल एवं सिंचाई की समस्या और अधिक गंभीर हो सकती है।
जल संकट के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—
(i) बढ़ती जनसंख्या।
(ii) भूजल का अत्यधिक दोहन।
(iii) वर्षा जल का उचित संरक्षण न होना।
(iv) जल प्रदूषण।
(v) वनों की कटाई।
(vi) जल का अनियंत्रित एवं अपव्ययी उपयोग।
7. झारखंड में सिंचाई (Irrigation) का क्या महत्व है?
उत्तर ⇒
झारखंड की अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर है, इसलिए सिंचाई का राज्य की कृषि व्यवस्था में विशेष महत्व है। यद्यपि राज्य में पर्याप्त वर्षा होती है, लेकिन वर्षा केवल कुछ महीनों तक ही सीमित रहती है। वर्षा समाप्त होने के बाद फसलों की सिंचाई के लिए नदियों, बाँधों, तालाबों, कुओं एवं नलकूपों का उपयोग किया जाता है।
सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने से किसान वर्ष में एक से अधिक फसलें उगा सकते हैं तथा कृषि उत्पादन में वृद्धि होती है। इसलिए झारखंड के आर्थिक विकास में सिंचाई की महत्वपूर्ण भूमिका है।
सिंचाई का महत्व निम्नलिखित है—
(i) कृषि उत्पादन में वृद्धि होती है।
(ii) वर्ष भर खेती संभव होती है।
(iii) किसानों की आय बढ़ती है।
(iv) सूखे के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
(v) खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि होती है।
(vi) ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
8. झारखंड में सिंचाई के प्रमुख साधन कौन-कौन से हैं?
उत्तर ⇒
झारखंड में सिंचाई के लिए प्राकृतिक एवं कृत्रिम दोनों प्रकार के जल स्रोतों का उपयोग किया जाता है। राज्य की नदियाँ, बाँध, तालाब, कुएँ, नलकूप तथा जलाशय सिंचाई के प्रमुख साधन हैं। कई क्षेत्रों में लिफ्ट सिंचाई योजनाओं के माध्यम से भी किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
सरकार द्वारा नई सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण तथा पुराने तालाबों एवं जलाशयों के पुनरुद्धार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
झारखंड में सिंचाई के प्रमुख साधन निम्नलिखित हैं—
(i) नदियाँ।
(ii) बाँध एवं जलाशय।
(iii) तालाब।
(iv) कुएँ।
(v) नलकूप (ट्यूबवेल)।
(vi) लिफ्ट सिंचाई योजनाएँ।
(vii) चेक डैम।
9. दामोदर घाटी निगम (Damodar Valley Corporation – DVC) का परिचय दीजिए।
उत्तर ⇒
दामोदर घाटी निगम (Damodar Valley Corporation – DVC) की स्थापना वर्ष 1948 में दामोदर नदी घाटी के समग्र विकास के उद्देश्य से की गई थी। यह भारत की पहली बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं में से एक है। इस परियोजना का उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, जल विद्युत उत्पादन, औद्योगिक विकास तथा जल संरक्षण करना है।
झारखंड एवं पश्चिम बंगाल के अनेक क्षेत्रों को इस परियोजना से लाभ प्राप्त होता है। दामोदर नदी को पहले “बंगाल का शोक” कहा जाता था, क्योंकि इसमें बार-बार बाढ़ आती थी। DVC के निर्माण के बाद बाढ़ नियंत्रण में काफी सफलता मिली है।
दामोदर घाटी निगम के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—
(i) बाढ़ नियंत्रण।
(ii) सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना।
(iii) जल विद्युत उत्पादन।
(iv) औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना।
(v) जल संरक्षण एवं प्रबंधन।
(vi) मत्स्य पालन एवं पर्यटन का विकास।
10. बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना (Multipurpose River Valley Project) क्या है?
उत्तर ⇒
जब किसी नदी पर इस प्रकार की परियोजना विकसित की जाती है जिससे एक साथ अनेक कार्य जैसे सिंचाई, जल विद्युत उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण, पेयजल आपूर्ति, मत्स्य पालन एवं पर्यटन का विकास हो सके, तो उसे बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना कहा जाता है। ऐसी परियोजनाएँ किसी क्षेत्र के समग्र आर्थिक एवं सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
झारखंड में दामोदर घाटी निगम (DVC), तेनुघाट बाँध तथा चांडिल बाँध जैसी परियोजनाएँ राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। इनसे कृषि, उद्योग एवं बिजली उत्पादन को भी बढ़ावा मिला है।
बहुउद्देशीय परियोजनाओं के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—
(i) सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होती है।
(ii) जल विद्युत का उत्पादन होता है।
(iii) बाढ़ नियंत्रण में सहायता मिलती है।
(iv) पेयजल की उपलब्धता बढ़ती है।
(v) मत्स्य पालन एवं पर्यटन को बढ़ावा मिलता है।
(vi) क्षेत्र के आर्थिक एवं सामाजिक विकास को गति मिलती है।
11. तेनुघाट बाँध (Tenughat Dam) का परिचय दीजिए।
उत्तर ⇒
तेनुघाट बाँध झारखंड के बोकारो जिले में दामोदर नदी पर निर्मित एक महत्वपूर्ण बाँध है। इसका निर्माण राज्य में सिंचाई, जल संरक्षण तथा औद्योगिक उपयोग के लिए किया गया है। यह झारखंड के प्रमुख जलाशयों में से एक है। तेनुघाट बाँध से बोकारो स्टील प्लांट सहित अनेक औद्योगिक क्षेत्रों को जल की आपूर्ति की जाती है। इसके अतिरिक्त इससे आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा भी उपलब्ध होती है।
यह बाँध वर्षा के जल का संग्रह करके जल संकट को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साथ ही यह मत्स्य पालन एवं पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
तेनुघाट बाँध का महत्व निम्नलिखित है—
(i) सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराता है।
(ii) उद्योगों को जल की आपूर्ति करता है।
(iii) वर्षा जल का संरक्षण करता है।
(iv) मत्स्य पालन को बढ़ावा देता है।
(v) क्षेत्रीय विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
12. चांडिल बाँध (Chandil Dam) का परिचय दीजिए।
उत्तर ⇒
चांडिल बाँध झारखंड के सरायकेला-खरसावाँ जिले में स्वर्णरेखा नदी पर निर्मित एक महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय परियोजना है। यह स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना का प्रमुख भाग है। इस बाँध का उद्देश्य सिंचाई, पेयजल आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण तथा जल संरक्षण करना है।
चांडिल बाँध से झारखंड के अनेक क्षेत्रों में कृषि विकास को बढ़ावा मिला है। इसके अतिरिक्त यह जलाशय प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बन गया है। यहाँ प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक भ्रमण के लिए आते हैं।
चांडिल बाँध का महत्व निम्नलिखित है—
(i) सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराता है।
(ii) बाढ़ नियंत्रण में सहायता करता है।
(iii) पेयजल की आपूर्ति करता है।
(iv) पर्यटन को बढ़ावा देता है।
(v) जल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
13. झारखंड में भूजल (Groundwater) का क्या महत्व है?
उत्तर ⇒
भूजल वह जल है जो वर्षा के जल के भूमि के अंदर रिसने से धरती की सतह के नीचे एकत्रित हो जाता है। झारखंड में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में पेयजल तथा सिंचाई के लिए भूजल का व्यापक उपयोग किया जाता है। कुएँ, चापाकल एवं नलकूप भूजल प्राप्त करने के प्रमुख साधन हैं।
बढ़ती जनसंख्या एवं जल के अत्यधिक उपयोग के कारण कई क्षेत्रों में भूजल स्तर नीचे जा रहा है। इसलिए वर्षा जल संचयन एवं जल संरक्षण के माध्यम से भूजल का पुनर्भरण (Recharge) करना आवश्यक है।
भूजल का महत्व निम्नलिखित है—
(i) पेयजल का प्रमुख स्रोत है।
(ii) सिंचाई में उपयोग किया जाता है।
(iii) सूखे के समय जल उपलब्ध कराता है।
(iv) ग्रामीण क्षेत्रों की जल आवश्यकता पूरी करता है।
(v) कृषि एवं उद्योगों के विकास में सहायक है।
14. जल प्रदूषण (Water Pollution) क्या है? इसके प्रमुख कारण लिखिए।
उत्तर ⇒
जब नदियों, तालाबों, झीलों, भूजल अथवा अन्य जल स्रोतों में हानिकारक पदार्थ मिल जाने से जल की गुणवत्ता खराब हो जाती है, तब उसे जल प्रदूषण (Water Pollution) कहा जाता है। प्रदूषित जल मानव स्वास्थ्य, कृषि तथा जलीय जीवों के लिए हानिकारक होता है।
झारखंड में औद्योगिक अपशिष्ट, खनन गतिविधियाँ, घरेलू गंदा पानी तथा रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग के कारण कई जल स्रोत प्रदूषित हो रहे हैं। इसलिए जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखना आवश्यक है।
जल प्रदूषण के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—
(i) औद्योगिक अपशिष्ट।
(ii) घरेलू गंदे जल का नदियों में प्रवाह।
(iii) खनन गतिविधियाँ।
(iv) रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का उपयोग।
(v) प्लास्टिक एवं ठोस कचरे का जल स्रोतों में फेंकना।
(vi) सीवेज का बिना शोधन के जल में छोड़ना।
15. जल प्रदूषण को रोकने के प्रमुख उपाय लिखिए।
उत्तर ⇒
जल जीवन का आधार है, इसलिए जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना अत्यंत आवश्यक है। यदि जल स्रोत प्रदूषित हो जाएँ, तो मानव स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग तथा जलीय जीवों पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। जल प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
झारखंड में नदियों एवं जलाशयों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए औद्योगिक अपशिष्टों का शोधन, वर्षा जल संरक्षण तथा जन-जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
जल प्रदूषण रोकने के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं—
(i) औद्योगिक अपशिष्टों का शोधन करके ही जल स्रोतों में छोड़ा जाए।
(ii) घरेलू गंदे जल का उचित प्रबंधन किया जाए।
(iii) नदियों एवं तालाबों में कचरा न फेंका जाए।
(iv) रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का संतुलित उपयोग किया जाए।
(v) वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दिया जाए।
(vi) लोगों में जल संरक्षण एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए।
16. स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना (Subarnarekha Multipurpose Project) का परिचय दीजिए।
उत्तर ⇒
स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना झारखंड की प्रमुख नदी घाटी परियोजनाओं में से एक है। यह परियोजना स्वर्णरेखा नदी पर विकसित की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य सिंचाई, पेयजल आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण तथा क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना है। इस परियोजना के अंतर्गत चांडिल बाँध एवं ईचा बाँध का निर्माण किया गया है। इससे झारखंड के साथ-साथ ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल के कुछ क्षेत्रों को भी लाभ प्राप्त होता है।
यह परियोजना कृषि उत्पादन बढ़ाने, जल संरक्षण करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। साथ ही इससे मत्स्य पालन एवं पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है।
स्वर्णरेखा परियोजना के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—
(i) सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराती है।
(ii) बाढ़ नियंत्रण में सहायता करती है।
(iii) पेयजल की आपूर्ति करती है।
(iv) मत्स्य पालन को बढ़ावा देती है।
(v) क्षेत्रीय आर्थिक विकास में योगदान देती है।
17. दामोदर नदी (Damodar River) का परिचय दीजिए।
उत्तर ⇒
दामोदर नदी झारखंड की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक है। इसका उद्गम छोटानागपुर पठार के पलामू क्षेत्र से माना जाता है। यह झारखंड से होकर पश्चिम बंगाल में प्रवेश करती है और अंततः हुगली नदी में मिल जाती है। पहले इस नदी में बार-बार आने वाली भीषण बाढ़ के कारण इसे “बंगाल का शोक” कहा जाता था।
दामोदर घाटी निगम (DVC) की स्थापना के बाद इस नदी पर कई बाँध एवं जलाशय बनाए गए, जिससे बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, जल विद्युत उत्पादन एवं औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिला। बोकारो एवं धनबाद जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के विकास में इस नदी की महत्वपूर्ण भूमिका है।
दामोदर नदी का महत्व निम्नलिखित है—
(i) सिंचाई का प्रमुख स्रोत है।
(ii) जल विद्युत उत्पादन में सहायक है।
(iii) उद्योगों को जल उपलब्ध कराती है।
(iv) बाढ़ नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
(v) क्षेत्रीय आर्थिक विकास में योगदान देती है।
18. झारखंड में जल संरक्षण की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर ⇒
झारखंड में औसतन अच्छी वर्षा होती है, फिर भी राज्य के अनेक क्षेत्रों में गर्मियों के मौसम में जल संकट उत्पन्न हो जाता है। इसका मुख्य कारण वर्षा जल का पर्याप्त संरक्षण न होना, भूजल का अत्यधिक दोहन तथा जल स्रोतों का उचित प्रबंधन न होना है। यदि वर्षा के जल को तालाबों, बाँधों एवं जलाशयों में संग्रहित किया जाए, तो पूरे वर्ष जल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है।
जल संरक्षण से कृषि, पेयजल, उद्योग तथा पर्यावरण सभी को लाभ मिलता है। इसलिए जल का विवेकपूर्ण उपयोग तथा वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है।
जल संरक्षण की आवश्यकता निम्नलिखित है—
(i) भविष्य के लिए जल सुरक्षित रखने हेतु।
(ii) भूजल स्तर बनाए रखने हेतु।
(iii) सिंचाई की सुविधा बढ़ाने हेतु।
(iv) पेयजल संकट दूर करने हेतु।
(v) पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने हेतु।
(vi) जल की बर्बादी रोकने हेतु।
19. झारखंड में जल संसाधनों के विकास में बाँधों की भूमिका लिखिए।
उत्तर ⇒
झारखंड में बाँध जल संसाधनों के विकास का महत्वपूर्ण आधार हैं। राज्य में तेनुघाट बाँध, चांडिल बाँध, मैथन बाँध, पंचेत बाँध तथा अन्य जलाशयों के माध्यम से वर्षा जल का संग्रह किया जाता है। इन बाँधों से सिंचाई, पेयजल, उद्योगों के लिए जल आपूर्ति तथा बाढ़ नियंत्रण जैसी अनेक सुविधाएँ प्राप्त होती हैं।
बाँधों के कारण किसानों को वर्ष भर सिंचाई की सुविधा मिलती है, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होती है। साथ ही मत्स्य पालन, पर्यटन एवं स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं।
बाँधों की प्रमुख भूमिकाएँ निम्नलिखित हैं—
(i) वर्षा जल का संग्रह करते हैं।
(ii) सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराते हैं।
(iii) बाढ़ नियंत्रण में सहायता करते हैं।
(iv) उद्योगों एवं शहरों को जल उपलब्ध कराते हैं।
(v) मत्स्य पालन एवं पर्यटन को बढ़ावा देते हैं।
20. जल संसाधनों के संरक्षण में नागरिकों की भूमिका लिखिए।
उत्तर ⇒
जल संरक्षण केवल सरकार का कार्य नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी भी है। यदि प्रत्येक व्यक्ति जल का सावधानीपूर्वक उपयोग करे तथा अनावश्यक बर्बादी रोके, तो भविष्य में जल संकट की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। घरों, विद्यालयों एवं सार्वजनिक स्थानों पर वर्षा जल संचयन की व्यवस्था अपनाना भी आवश्यक है।
झारखंड जैसे राज्य में जहाँ वर्षा पर्याप्त होती है, वहाँ जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता अत्यंत महत्वपूर्ण है। नागरिकों के सहयोग से जल स्रोतों को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखा जा सकता है।
नागरिकों की प्रमुख भूमिकाएँ निम्नलिखित हैं—
(i) जल की अनावश्यक बर्बादी रोकना।
(ii) वर्षा जल संचयन को अपनाना।
(iii) जल स्रोतों को स्वच्छ रखना।
(iv) नदियों एवं तालाबों में कचरा न डालना।
(v) वृक्षारोपण को बढ़ावा देना।
(vi) जल संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना।
21. मैथन बाँध (Maithon Dam) का परिचय दीजिए।
उत्तर ⇒
मैथन बाँध झारखंड के धनबाद जिले के निकट बराकर नदी पर निर्मित एक महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय बाँध है। इसका निर्माण दामोदर घाटी निगम (DVC) द्वारा किया गया है। इस बाँध का मुख्य उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, जल विद्युत उत्पादन तथा जल संरक्षण करना है। मैथन बाँध झारखंड एवं पश्चिम बंगाल के अनेक क्षेत्रों को लाभ पहुँचाता है।
इस बाँध से उत्पादित जल विद्युत का उपयोग घरेलू एवं औद्योगिक कार्यों में किया जाता है। इसके अतिरिक्त यह बाँध पर्यटन एवं मत्स्य पालन का भी प्रमुख केंद्र है। वर्षा ऋतु में अतिरिक्त जल का संग्रह कर यह बाँध बाढ़ की समस्या को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मैथन बाँध का महत्व निम्नलिखित है—
(i) जल विद्युत का उत्पादन करता है।
(ii) बाढ़ नियंत्रण में सहायता करता है।
(iii) सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराता है।
(iv) मत्स्य पालन को बढ़ावा देता है।
(v) पर्यटन के विकास में सहायक है।
22. पंचेत बाँध (Panchet Dam) का परिचय दीजिए।
उत्तर ⇒
पंचेत बाँध झारखंड एवं पश्चिम बंगाल की सीमा पर दामोदर नदी पर निर्मित एक प्रमुख बहुउद्देशीय बाँध है। इसका निर्माण भी दामोदर घाटी निगम (DVC) के अंतर्गत किया गया था। इस परियोजना का उद्देश्य दामोदर नदी में आने वाली बाढ़ को नियंत्रित करना, सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराना तथा जल विद्युत उत्पादन करना है।
पंचेत बाँध झारखंड के औद्योगिक क्षेत्रों तथा कृषि विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके कारण आसपास के क्षेत्रों में जल संरक्षण, मत्स्य पालन एवं पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है।
पंचेत बाँध के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—
(i) बाढ़ नियंत्रण में सहायता करता है।
(ii) सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराता है।
(iii) जल विद्युत उत्पादन करता है।
(iv) जल संरक्षण में सहायक है।
(v) कृषि एवं औद्योगिक विकास को बढ़ावा देता है।
23. जल विद्युत (Hydroelectric Power) क्या है? इसका महत्व लिखिए।
उत्तर ⇒
बहते अथवा संग्रहित जल की शक्ति से उत्पन्न की जाने वाली विद्युत ऊर्जा को जल विद्युत (Hydroelectric Power) कहा जाता है। यह ऊर्जा का स्वच्छ, नवीकरणीय एवं पर्यावरण-अनुकूल स्रोत है। भारत में अनेक बाँधों एवं नदी घाटी परियोजनाओं के माध्यम से जल विद्युत का उत्पादन किया जाता है।
झारखंड में दामोदर घाटी निगम की परियोजनाओं तथा विभिन्न बाँधों के माध्यम से जल विद्युत उत्पादन किया जाता है। जल विद्युत से उद्योगों, कृषि एवं घरेलू क्षेत्रों को बिजली उपलब्ध होती है तथा जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होती है।
जल विद्युत का महत्व निम्नलिखित है—
(i) स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा का स्रोत है।
(ii) पर्यावरण प्रदूषण कम करती है।
(iii) उद्योगों एवं कृषि को बिजली उपलब्ध कराती है।
(iv) जीवाश्म ईंधनों की बचत होती है।
(v) आर्थिक विकास को गति मिलती है।
24. झारखंड में जल संसाधनों के समुचित प्रबंधन (Water Resource Management) की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर ⇒
झारखंड में पर्याप्त वर्षा होने के बावजूद वर्षा का अधिकांश जल बिना उपयोग के बह जाता है। दूसरी ओर गर्मियों में कई क्षेत्रों में पेयजल एवं सिंचाई की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इसलिए जल का वैज्ञानिक एवं योजनाबद्ध उपयोग करना आवश्यक है। इसे ही जल संसाधन प्रबंधन कहा जाता है।
जल संसाधनों का उचित प्रबंधन करने से वर्षा जल का संरक्षण, भूजल का पुनर्भरण, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार तथा जल की बर्बादी को रोका जा सकता है। इससे राज्य के कृषि एवं औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
जल संसाधन प्रबंधन के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—
(i) जल का संतुलित उपयोग करना।
(ii) वर्षा जल का संरक्षण करना।
(iii) भूजल स्तर बनाए रखना।
(iv) सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना।
(v) जल संकट को कम करना।
(vi) भविष्य के लिए जल सुरक्षित रखना।
25. झारखंड में जल संसाधनों का कृषि विकास में क्या योगदान है?
उत्तर ⇒
झारखंड की अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर है, इसलिए जल संसाधनों का कृषि विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। सिंचाई के लिए नदियों, बाँधों, तालाबों, जलाशयों एवं भूजल का उपयोग किया जाता है। पर्याप्त जल उपलब्ध होने से किसान धान, गेहूँ, मक्का, दलहन, तिलहन एवं सब्जियों जैसी विभिन्न फसलों की खेती कर सकते हैं।
यदि जल संसाधनों का वैज्ञानिक ढंग से विकास एवं संरक्षण किया जाए, तो राज्य में कृषि उत्पादन एवं किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। जल संसाधन खाद्य सुरक्षा एवं ग्रामीण विकास के लिए भी अत्यंत आवश्यक हैं।
कृषि विकास में जल संसाधनों का योगदान निम्नलिखित है—
(i) सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराते हैं।
(ii) कृषि उत्पादन में वृद्धि करते हैं।
(iii) वर्ष भर खेती को संभव बनाते हैं।
(iv) किसानों की आय बढ़ाने में सहायता करते हैं।
(v) खाद्यान्न उत्पादन को बढ़ावा देते हैं।
(vi) ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाते हैं।
26. झारखंड में जल संसाधनों के विकास में तालाबों एवं जलाशयों का महत्व लिखिए।
उत्तर ⇒
झारखंड में तालाब एवं जलाशय जल संरक्षण के पारंपरिक एवं प्रभावी साधन हैं। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा के जल को संग्रहित करने के लिए प्राचीन समय से तालाबों का निर्माण किया जाता रहा है। इनसे सिंचाई, पेयजल, पशुपालन तथा मत्स्य पालन की आवश्यकताएँ पूरी होती हैं। वर्तमान समय में सरकार द्वारा पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार तथा नए जलाशयों का निर्माण भी किया जा रहा है।
तालाब एवं जलाशय वर्षा के अतिरिक्त जल को संग्रहित करके भूजल स्तर बनाए रखने में भी सहायता करते हैं। इनके कारण गर्मियों के मौसम में भी जल की उपलब्धता बनी रहती है।
तालाबों एवं जलाशयों का महत्व निम्नलिखित है—
(i) वर्षा जल का संरक्षण करते हैं।
(ii) सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराते हैं।
(iii) भूजल स्तर बनाए रखने में सहायक हैं।
(iv) मत्स्य पालन को बढ़ावा देते हैं।
(v) पेयजल एवं पशुपालन के लिए जल उपलब्ध कराते हैं।
27. जल संसाधनों के अति दोहन (Overexploitation of Water Resources) के दुष्परिणाम लिखिए।
उत्तर ⇒
जल संसाधनों का आवश्यकता से अधिक एवं अनियंत्रित उपयोग जल संसाधनों का अति दोहन कहलाता है। वर्तमान समय में बढ़ती जनसंख्या, कृषि, उद्योग एवं शहरीकरण के कारण भूजल एवं सतही जल का अत्यधिक उपयोग किया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप अनेक क्षेत्रों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है तथा जल संकट की समस्या गंभीर होती जा रही है।
झारखंड में भी कुछ क्षेत्रों में चापाकलों एवं नलकूपों के अत्यधिक उपयोग के कारण भूजल स्तर प्रभावित हुआ है। इसलिए जल का संतुलित उपयोग एवं वर्षा जल संचयन आवश्यक है।
जल संसाधनों के अति दोहन के प्रमुख दुष्परिणाम निम्नलिखित हैं—
(i) भूजल स्तर में गिरावट आती है।
(ii) पेयजल संकट उत्पन्न होता है।
(iii) कृषि उत्पादन प्रभावित होता है।
(iv) जल स्रोत सूखने लगते हैं।
(v) पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ता है।
(vi) भविष्य में जल की कमी बढ़ जाती है।
28. झारखंड में जल संसाधनों के संरक्षण में वनों की क्या भूमिका है?
उत्तर ⇒
वन जल संरक्षण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वृक्ष वर्षा के जल को भूमि में समाहित होने में सहायता करते हैं, जिससे भूजल स्तर बना रहता है। वन मिट्टी के कटाव को रोकते हैं तथा नदियों एवं जलाशयों में गाद (Silt) के जमाव को कम करते हैं। इसके अतिरिक्त वन वर्षा को भी प्रभावित करते हैं।
झारखंड के घने साल वन राज्य के जल स्रोतों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। यदि वनों की अंधाधुंध कटाई होती है, तो नदियों का जलस्तर कम हो सकता है तथा जल संकट की समस्या बढ़ सकती है।
जल संरक्षण में वनों की भूमिका निम्नलिखित है—
(i) भूजल स्तर बनाए रखते हैं।
(ii) वर्षा को प्रभावित करते हैं।
(iii) मिट्टी के कटाव को रोकते हैं।
(iv) नदियों एवं जलाशयों की सुरक्षा करते हैं।
(v) पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हैं।
29. झारखंड में जल संसाधनों के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ लिखिए।
उत्तर ⇒
झारखंड प्राकृतिक जल संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद जल प्रबंधन की अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। वर्षा का अधिकांश जल बिना संग्रहित हुए बह जाता है। कई क्षेत्रों में जल प्रदूषण, भूजल का अत्यधिक दोहन, वनों की कटाई तथा जल स्रोतों का अतिक्रमण गंभीर समस्याएँ बन चुकी हैं।
यदि इन समस्याओं का समय पर समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में पेयजल एवं सिंचाई की समस्या और अधिक गंभीर हो सकती है। इसलिए वैज्ञानिक जल प्रबंधन एवं जन-जागरूकता आवश्यक है।
झारखंड में जल संसाधनों की प्रमुख चुनौतियाँ निम्नलिखित हैं—
(i) वर्षा जल का अपर्याप्त संरक्षण।
(ii) भूजल का अत्यधिक दोहन।
(iii) जल प्रदूषण।
(iv) वनों की कटाई।
(v) जल स्रोतों का अतिक्रमण।
(vi) जल का अपव्यय।
(vii) जल प्रबंधन की कमी।
30. जल संरक्षण में विद्यार्थियों की भूमिका लिखिए।
उत्तर ⇒
विद्यार्थी समाज में जागरूकता फैलाने की महत्वपूर्ण शक्ति होते हैं। वे विद्यालय, परिवार एवं समाज में जल संरक्षण का संदेश देकर लोगों को जल बचाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। जल का अनावश्यक उपयोग रोकना, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना तथा जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखना विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
झारखंड जैसे राज्य में जहाँ कृषि एवं ग्रामीण जीवन जल पर निर्भर है, वहाँ विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी जल संरक्षण अभियान को सफल बना सकती है। छोटी-छोटी आदतें भविष्य में बड़े परिवर्तन ला सकती हैं।
विद्यार्थियों की प्रमुख भूमिका निम्नलिखित है—
(i) जल की बर्बादी रोकना।
(ii) वर्षा जल संचयन के प्रति जागरूकता फैलाना।
(iii) जल स्रोतों को स्वच्छ रखना।
(iv) वृक्षारोपण कार्यक्रमों में भाग लेना।
(v) लोगों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित करना।
(vi) जल का विवेकपूर्ण उपयोग करना।
31. जल संसाधनों के संरक्षण में सरकार की भूमिका लिखिए।
उत्तर ⇒
जल संसाधनों का संरक्षण एवं विकास किसी भी राज्य के सतत विकास के लिए आवश्यक है। झारखंड सरकार जल संरक्षण, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, वर्षा जल संचयन तथा भूजल संरक्षण के लिए अनेक योजनाएँ संचालित कर रही है। राज्य में नए बाँध, चेक डैम, तालाब एवं जलाशयों का निर्माण किया जा रहा है तथा पुराने जल स्रोतों का जीर्णोद्धार भी किया जा रहा है। इसके साथ ही जल प्रदूषण रोकने तथा लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
सरकार द्वारा जल संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन कृषि, उद्योग एवं पेयजल की आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सरकार की प्रमुख भूमिकाएँ निम्नलिखित हैं—
(i) नए बाँध एवं जलाशयों का निर्माण करना।
(ii) वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना।
(iii) जल संरक्षण योजनाएँ लागू करना।
(iv) जल प्रदूषण पर नियंत्रण रखना।
(v) सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना।
(vi) लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना।
32. जल संसाधनों का औद्योगिक विकास में क्या महत्व है?
उत्तर ⇒
उद्योगों के संचालन के लिए जल एक आवश्यक प्राकृतिक संसाधन है। जल का उपयोग मशीनों को ठंडा करने, बिजली उत्पादन, रासायनिक प्रक्रियाओं, सफाई तथा विभिन्न औद्योगिक कार्यों में किया जाता है। झारखंड में बोकारो, जमशेदपुर, धनबाद एवं राँची जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में नदियों एवं जलाशयों से जल की आपूर्ति की जाती है।
यदि उद्योगों को पर्याप्त जल उपलब्ध न हो, तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसलिए जल संसाधनों का संरक्षण एवं उचित प्रबंधन औद्योगिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
औद्योगिक विकास में जल संसाधनों का महत्व निम्नलिखित है—
(i) उद्योगों को जल उपलब्ध कराते हैं।
(ii) बिजली उत्पादन में सहायता करते हैं।
(iii) उत्पादन प्रक्रिया को सुचारु बनाते हैं।
(iv) औद्योगिक विकास को बढ़ावा देते हैं।
(v) रोजगार एवं आर्थिक विकास में योगदान देते हैं।
33. जल संसाधनों का मत्स्य पालन (Fisheries) में क्या महत्व है?
उत्तर ⇒
झारखंड में नदियाँ, तालाब, बाँध एवं जलाशय मत्स्य पालन के प्रमुख आधार हैं। मत्स्य पालन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं आय का महत्वपूर्ण स्रोत है। राज्य सरकार मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएँ संचालित कर रही है।
तेनुघाट बाँध, चांडिल बाँध, मैथन बाँध तथा अन्य जलाशयों में बड़े पैमाने पर मछली पालन किया जाता है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है तथा राज्य की अर्थव्यवस्था को भी लाभ होता है।
मत्स्य पालन में जल संसाधनों का महत्व निम्नलिखित है—
(i) रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं।
(ii) ग्रामीण आय में वृद्धि करते हैं।
(iii) पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराते हैं।
(iv) स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाते हैं।
(v) जलाशयों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करते हैं।
34. जल संसाधनों का पर्यावरण संरक्षण में क्या योगदान है?
उत्तर ⇒
जल संसाधन पर्यावरण के प्रमुख घटकों में से एक हैं। नदियाँ, झीलें, तालाब एवं भूजल प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखते हैं। जल स्रोतों के कारण वनस्पतियाँ एवं वन्य जीव सुरक्षित रहते हैं तथा जैव विविधता का संरक्षण होता है। स्वच्छ जल मानव स्वास्थ्य एवं प्राकृतिक जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
यदि जल स्रोत प्रदूषित हो जाएँ या सूख जाएँ, तो पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ सकता है। इसलिए जल संरक्षण एवं जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखना आवश्यक है।
पर्यावरण संरक्षण में जल संसाधनों का योगदान निम्नलिखित है—
(i) जैव विविधता की रक्षा करते हैं।
(ii) वनस्पतियों एवं वन्य जीवों को जीवन प्रदान करते हैं।
(iii) पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हैं।
(iv) भूजल स्तर बनाए रखने में सहायता करते हैं।
(v) प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखते हैं।
35. जल संसाधनों के संरक्षण के प्रमुख उपाय लिखिए।
उत्तर ⇒
जल की बढ़ती मांग एवं घटती उपलब्धता को देखते हुए जल संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। यदि जल का विवेकपूर्ण उपयोग किया जाए तथा वर्षा जल का संरक्षण किया जाए, तो भविष्य में जल संकट से बचा जा सकता है। सरकार एवं नागरिकों के संयुक्त प्रयास से जल संसाधनों का प्रभावी संरक्षण संभव है।
झारखंड में तालाबों का पुनर्जीवन, चेक डैम निर्माण, वृक्षारोपण तथा वर्षा जल संचयन जैसी योजनाएँ जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
जल संरक्षण के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं—
(i) वर्षा जल संचयन को अपनाना।
(ii) जल का अनावश्यक उपयोग रोकना।
(iii) वृक्षारोपण को बढ़ावा देना।
(iv) तालाबों एवं जलाशयों का संरक्षण करना।
(v) भूजल का संतुलित उपयोग करना।
(vi) जल प्रदूषण को रोकना।
(vii) लोगों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना।
36. जल संसाधनों के संरक्षण में वनों की भूमिका लिखिए।
उत्तर ⇒
वन जल संसाधनों के संरक्षण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वृक्ष वर्षा के जल को भूमि में अवशोषित होने में सहायता करते हैं, जिससे भूजल स्तर बना रहता है। वन मिट्टी के कटाव को रोकते हैं तथा नदियों एवं जलाशयों में गाद (सिल्ट) के जमाव को कम करते हैं। इसके अलावा वन जलवायु को संतुलित रखते हैं और वर्षा की प्रक्रिया को भी प्रभावित करते हैं।
झारखंड के घने साल वन राज्य के जल स्रोतों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। यदि वनों की अंधाधुंध कटाई होती है, तो नदियों का जलस्तर घट सकता है, भूजल नीचे चला जाता है तथा जल संकट की समस्या बढ़ जाती है। इसलिए जल संरक्षण के लिए वन संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।
वनों की प्रमुख भूमिकाएँ निम्नलिखित हैं—
(i) भूजल स्तर बनाए रखते हैं।
(ii) वर्षा को प्रभावित करते हैं।
(iii) मिट्टी के कटाव को रोकते हैं।
(iv) नदियों एवं जलाशयों की रक्षा करते हैं।
(v) पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हैं।
37. जल संसाधनों के संरक्षण में जन-जागरूकता का क्या महत्व है?
उत्तर ⇒
जल संरक्षण तभी सफल हो सकता है जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति इसके महत्व को समझे। जन-जागरूकता के माध्यम से लोगों को जल का विवेकपूर्ण उपयोग, वर्षा जल संचयन तथा जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। विद्यालयों, पंचायतों, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा सरकारी विभागों द्वारा समय-समय पर जल संरक्षण अभियान चलाए जाते हैं।
झारखंड में ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के पारंपरिक उपायों को पुनर्जीवित करने तथा लोगों को जल बचाने के लिए जागरूक करना आवश्यक है। जनभागीदारी से ही जल संकट की समस्या का स्थायी समाधान संभव है।
जन-जागरूकता का महत्व निम्नलिखित है—
(i) जल की बर्बादी कम होती है।
(ii) वर्षा जल संचयन को बढ़ावा मिलता है।
(iii) जल स्रोत स्वच्छ रहते हैं।
(iv) भूजल संरक्षण में सहायता मिलती है।
(v) जल संकट को कम करने में मदद मिलती है।
(vi) समाज में पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित होती है।
38. झारखंड में जल संसाधनों के समक्ष भविष्य की चुनौतियाँ लिखिए।
उत्तर ⇒
झारखंड प्राकृतिक जल संसाधनों से समृद्ध राज्य होने के बावजूद भविष्य में कई चुनौतियों का सामना कर सकता है। बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण, औद्योगिकीकरण तथा जल की बढ़ती माँग के कारण जल संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। दूसरी ओर जल प्रदूषण, भूजल का अत्यधिक दोहन तथा जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएँ भी जल उपलब्धता को प्रभावित कर रही हैं।
यदि समय रहते वैज्ञानिक जल प्रबंधन, वर्षा जल संचयन तथा जल संरक्षण के प्रभावी उपाय नहीं अपनाए गए, तो भविष्य में पेयजल एवं सिंचाई की समस्या और गंभीर हो सकती है।
भविष्य की प्रमुख चुनौतियाँ निम्नलिखित हैं—
(i) बढ़ती जनसंख्या के कारण जल की बढ़ती माँग।
(ii) भूजल स्तर में लगातार गिरावट।
(iii) जल प्रदूषण में वृद्धि।
(iv) जलवायु परिवर्तन का प्रभाव।
(v) वर्षा के असमान वितरण की समस्या।
(vi) जल स्रोतों का अतिक्रमण एवं क्षरण।
39. झारखंड के सतत विकास (Sustainable Development) में जल संसाधनों का क्या महत्व है?
उत्तर ⇒
सतत विकास का अर्थ है प्राकृतिक संसाधनों का ऐसा उपयोग जिससे वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताएँ पूरी हों और भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी संसाधन सुरक्षित रहें। जल संसाधन सतत विकास का आधार हैं। कृषि, उद्योग, पेयजल, ऊर्जा उत्पादन तथा पर्यावरण संरक्षण सभी जल पर निर्भर करते हैं।
झारखंड में यदि जल संसाधनों का वैज्ञानिक एवं संतुलित उपयोग किया जाए, तो राज्य में कृषि उत्पादन बढ़ेगा, उद्योगों का विकास होगा, पेयजल संकट कम होगा तथा पर्यावरणीय संतुलन भी बना रहेगा। इसलिए जल संरक्षण सतत विकास की महत्वपूर्ण शर्त है।
सतत विकास में जल संसाधनों का महत्व निम्नलिखित है—
(i) कृषि विकास को बढ़ावा देते हैं।
(ii) उद्योगों के विकास में सहायक हैं।
(iii) पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं।
(iv) पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हैं।
(v) भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षित रखते हैं।
(vi) राज्य के समग्र आर्थिक विकास में योगदान देते हैं।
40. ‘जल संसाधन’ अध्याय का निष्कर्ष लिखिए।
उत्तर ⇒
जल जीवन का आधार है तथा मानव, पशु-पक्षी, वनस्पतियों एवं समस्त जीव-जगत के अस्तित्व के लिए अनिवार्य प्राकृतिक संसाधन है। झारखंड राज्य नदियों, बाँधों, तालाबों एवं भूजल जैसे जल संसाधनों से समृद्ध है, फिर भी वर्षा जल का उचित संरक्षण एवं वैज्ञानिक प्रबंधन न होने के कारण कई क्षेत्रों में जल संकट उत्पन्न हो जाता है।
दामोदर घाटी निगम, स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना, तेनुघाट बाँध, चांडिल बाँध तथा अन्य सिंचाई परियोजनाएँ राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वर्षा जल संचयन, जल प्रदूषण पर नियंत्रण, वृक्षारोपण, भूजल संरक्षण तथा जन-जागरूकता के माध्यम से जल संसाधनों का संरक्षण किया जा सकता है। यदि सरकार, स्थानीय समुदाय एवं प्रत्येक नागरिक मिलकर जल बचाने का संकल्प लें, तो झारखंड में जल संसाधनों का सतत एवं संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है।