Class 10 Geography: विनिर्माण उद्योग
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Chapter Overview
| Class | 10 |
| Subject | Geography |
| Chapter Name | विनिर्माण उद्योग |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
विनिर्माण उद्योग Revision Notes
1. विनिर्माण (Manufacturing) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर ⇒
प्राकृतिक या कृषि से प्राप्त कच्चे माल का विभिन्न वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रक्रियाओं द्वारा प्रसंस्करण (Processing) करके उपयोगी एवं मूल्यवान वस्तुओं का निर्माण करना विनिर्माण (Manufacturing) कहलाता है। विनिर्माण प्रक्रिया के माध्यम से साधारण कच्चे पदार्थों को तैयार उत्पादों में बदल दिया जाता है, जिससे उनका उपयोग एवं आर्थिक मूल्य दोनों बढ़ जाते हैं।
उदाहरण के लिए कपास से सूत एवं कपड़ा, गन्ने से चीनी, लौह अयस्क से इस्पात तथा लकड़ी से फर्नीचर का निर्माण विनिर्माण के अंतर्गत आता है। विनिर्माण उद्योग किसी भी देश के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन तथा आर्थिक उन्नति का प्रमुख आधार होता है। विकसित देशों की आर्थिक प्रगति में विनिर्माण उद्योग का महत्वपूर्ण योगदान होता है।
विनिर्माण का महत्व निम्नलिखित है—
(i) कच्चे माल का मूल्य बढ़ाता है।
(ii) लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार प्रदान करता है।
(iii) औद्योगिक एवं आर्थिक विकास को गति देता है।
(iv) निर्यात बढ़ाकर विदेशी मुद्रा अर्जित करता है।
(v) देश के जीवन स्तर में सुधार लाता है।
2. उद्योगों के स्थानीयकरण (Localization of Industries) के प्रमुख कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒
उद्योगों की स्थापना किसी भी स्थान पर बिना कारण नहीं की जाती। उद्योग वहीं स्थापित किए जाते हैं जहाँ उत्पादन के लिए आवश्यक सुविधाएँ आसानी से उपलब्ध हों। इन सुविधाओं को उद्योगों के स्थानीयकरण के कारक कहा जाता है। यदि आवश्यक संसाधन एवं सुविधाएँ उपलब्ध हों, तो उद्योग कम लागत में अधिक उत्पादन कर सकते हैं।
उद्योगों के स्थानीयकरण के प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं—
(i) कच्चे माल की उपलब्धता – जिन उद्योगों में भारी कच्चे माल की आवश्यकता होती है, वे प्रायः कच्चे माल के निकट स्थापित किए जाते हैं।
(ii) शक्ति (ऊर्जा) के साधन – उद्योगों के संचालन के लिए बिजली, कोयला, जलविद्युत आदि की आवश्यकता होती है।
(iii) यातायात एवं परिवहन – कच्चे माल लाने एवं तैयार माल को बाजार तक पहुँचाने के लिए अच्छी परिवहन व्यवस्था आवश्यक है।
(iv) पूँजी की उपलब्धता – उद्योगों की स्थापना एवं संचालन के लिए पर्याप्त पूँजी आवश्यक होती है।
(v) श्रमिकों की उपलब्धता – कुशल एवं अकुशल श्रमिक उद्योगों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
(vi) बाजार की निकटता – तैयार उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार का निकट होना लाभदायक होता है।
3. नई औद्योगिक नीति (New Industrial Policy) के मुख्य बिंदुओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒
भारत सरकार ने वर्ष 1991 में नई औद्योगिक नीति लागू की, जिसका उद्देश्य औद्योगिक विकास को गति देना, निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन देना तथा भारतीय उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाना था। इस नीति के माध्यम से उद्योगों पर सरकारी नियंत्रण कम किया गया तथा विदेशी निवेश एवं आधुनिक तकनीक को बढ़ावा दिया गया।
नई औद्योगिक नीति के कारण भारतीय उद्योगों में प्रतिस्पर्धा बढ़ी तथा अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत में निवेश करना प्रारंभ किया।
नई औद्योगिक नीति के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं—
(i) वैश्वीकरण (Globalization) को बढ़ावा दिया गया।
(ii) निजीकरण (Privatization) को प्रोत्साहित किया गया।
(iii) विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) की अनुमति बढ़ाई गई।
(iv) औद्योगिक लाइसेंस प्रणाली में ढील दी गई।
(v) निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई गई।
(vi) आधुनिक तकनीक एवं प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहन मिला।
4. कृषि आधारित उद्योग (Agro-based Industries) किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर ⇒
वे उद्योग जिनके लिए आवश्यक कच्चा माल कृषि से प्राप्त होता है, कृषि आधारित उद्योग (Agro-based Industries) कहलाते हैं। ये उद्योग किसानों द्वारा उत्पादित फसलों का उपयोग करके विभिन्न उपयोगी वस्तुओं का निर्माण करते हैं। कृषि आधारित उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने तथा किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भारत में कृषि आधारित उद्योगों का विशेष महत्व है क्योंकि देश की अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर है।
कृषि आधारित उद्योगों के प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं—
(i) चीनी उद्योग
(ii) सूती वस्त्र उद्योग
(iii) जूट उद्योग
(iv) खाद्य प्रसंस्करण उद्योग
(v) चाय एवं कॉफी उद्योग
कृषि आधारित उद्योगों का महत्व—
(i) किसानों को रोजगार एवं आय उपलब्ध कराते हैं।
(ii) कृषि उत्पादों का मूल्य बढ़ाते हैं।
(iii) ग्रामीण उद्योगों का विकास करते हैं।
(iv) निर्यात बढ़ाने में सहायता करते हैं।
5. सार्वजनिक उद्योग (Public Sector Industries) किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर ⇒
वे उद्योग जिनका स्वामित्व, नियंत्रण एवं संचालन केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार द्वारा किया जाता है, सार्वजनिक उद्योग (Public Sector Industries) कहलाते हैं। इन उद्योगों की स्थापना का मुख्य उद्देश्य केवल लाभ कमाना नहीं होता, बल्कि देश का औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन तथा आधारभूत उद्योगों का विकास करना भी होता है।
सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों में सरकार पूँजी निवेश करती है तथा उनका प्रबंधन भी सरकारी संस्थाओं द्वारा किया जाता है।
सार्वजनिक उद्योगों के प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं—
(i) भिलाई इस्पात संयंत्र
(ii) दुर्गापुर इस्पात संयंत्र
(iii) राउरकेला इस्पात संयंत्र
(iv) भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL)
(v) बोकारो इस्पात संयंत्र
सार्वजनिक उद्योगों का महत्व—
(i) देश के औद्योगिक विकास में योगदान देते हैं।
(ii) बड़े पैमाने पर रोजगार प्रदान करते हैं।
(iii) आधारभूत उद्योगों का विकास करते हैं।
(iv) राष्ट्रीय आर्थिक विकास को गति प्रदान करते हैं।
6. वस्त्र उद्योग (Textile Industry) का भारतीय अर्थव्यवस्था में क्या योगदान है?
उत्तर ⇒
भारत का वस्त्र उद्योग (Textile Industry) देश का सबसे महत्वपूर्ण एवं सबसे बड़ा उद्योगों में से एक है। यह कृषि के बाद सबसे अधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाला उद्योग माना जाता है। इस उद्योग से करोड़ों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त होता है। वस्त्र उद्योग देश के औद्योगिक उत्पादन, राष्ट्रीय आय तथा विदेशी व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
सूती, ऊनी, रेशमी एवं कृत्रिम वस्त्रों का उत्पादन भारत के विभिन्न राज्यों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। भारतीय वस्त्रों की गुणवत्ता एवं विविधता के कारण विश्व बाजार में भी इनकी अच्छी माँग है। यही कारण है कि वस्त्र उद्योग भारत के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वस्त्र उद्योग का भारतीय अर्थव्यवस्था में योगदान निम्नलिखित है—
(i) कृषि के बाद सबसे अधिक रोजगार प्रदान करता है।
(ii) औद्योगिक उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
(iii) विदेशी मुद्रा अर्जित करने में सहायता करता है।
(iv) सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान देता है।
(v) कपास, जूट एवं रेशम उत्पादकों को बाजार उपलब्ध कराता है।
7. संयुक्त अथवा सहकारी उद्योग (Joint/Co-operative Industry) क्या है?
उत्तर ⇒
जब किसी उद्योग का संचालन दो या दो से अधिक व्यक्तियों, सहकारी समितियों अथवा सरकार एवं निजी क्षेत्र के संयुक्त प्रयास से किया जाता है, तो उसे संयुक्त अथवा सहकारी उद्योग कहा जाता है। ऐसे उद्योगों का उद्देश्य केवल लाभ कमाना नहीं होता, बल्कि सदस्यों के आर्थिक विकास एवं सामाजिक कल्याण को भी बढ़ावा देना होता है।
सहकारी उद्योगों में सभी सदस्य पूँजी लगाते हैं तथा उद्योग के लाभ एवं प्रबंधन में भाग लेते हैं। भारत में दुग्ध उद्योग के क्षेत्र में सहकारी आंदोलन का सबसे सफल उदाहरण अमूल (AMUL) है।
संयुक्त अथवा सहकारी उद्योग की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
(i) दो या दो से अधिक व्यक्तियों अथवा संस्थाओं द्वारा संचालित होते हैं।
(ii) लाभ एवं उत्तरदायित्व सभी सदस्यों में बाँटा जाता है।
(iii) सदस्यों के आर्थिक हितों की रक्षा की जाती है।
(iv) लोकतांत्रिक ढंग से प्रबंधन किया जाता है।
(v) अमूल इसका प्रमुख उदाहरण है।
8. सार्वजनिक उद्योग एवं निजी उद्योग में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒
उद्योगों का वर्गीकरण स्वामित्व के आधार पर भी किया जाता है। जिन उद्योगों का संचालन सरकार करती है, वे सार्वजनिक उद्योग कहलाते हैं, जबकि जिन उद्योगों का स्वामित्व एवं संचालन किसी व्यक्ति, कंपनी या निजी संस्था के हाथों में होता है, उन्हें निजी उद्योग कहा जाता है।
| सार्वजनिक उद्योग | निजी उद्योग |
|---|---|
| (i) सरकार द्वारा संचालित होते हैं। | (i) निजी व्यक्ति या कंपनी द्वारा संचालित होते हैं। |
| (ii) उद्देश्य राष्ट्रीय विकास भी होता है। | (ii) मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है। |
| (iii) पूँजी सरकार लगाती है। | (iii) पूँजी निजी निवेशकों द्वारा लगाई जाती है। |
| (iv) उदाहरण – भिलाई, बोकारो, राउरकेला इस्पात संयंत्र। | (iv) उदाहरण – टाटा स्टील, रिलायंस इंडस्ट्रीज। |
9. सूती वस्त्र उद्योग (Cotton Textile Industry) की प्रमुख समस्याएँ लिखिए।
उत्तर ⇒
सूती वस्त्र उद्योग भारत का प्रमुख उद्योग है, लेकिन वर्तमान समय में इसे अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पुरानी मशीनें, आधुनिक तकनीकों का सीमित उपयोग, कृत्रिम रेशों की बढ़ती माँग तथा बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण इस उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हुई है।
इसके अतिरिक्त उत्पादन लागत बढ़ने तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के कारण भी इस उद्योग के सामने नई चुनौतियाँ उत्पन्न हुई हैं।
सूती वस्त्र उद्योग की प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं—
(i) पुरानी मशीनों एवं तकनीकों का उपयोग।
(ii) कृत्रिम रेशों की बढ़ती माँग।
(iii) बिजली की अनियमित आपूर्ति।
(iv) उत्पादन लागत में वृद्धि।
(v) श्रमिकों को आधुनिक प्रशिक्षण का अभाव।
(vi) अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का बढ़ना।
10. औद्योगिक क्षेत्रों में पर्यावरण प्रदूषण रोकने के लिए प्रमुख सुझाव लिखिए।
उत्तर ⇒
औद्योगीकरण से आर्थिक विकास होता है, लेकिन यदि उद्योगों का संचालन वैज्ञानिक ढंग से नहीं किया जाए, तो वायु, जल, ध्वनि एवं मिट्टी प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। इसलिए उद्योगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रभावी उपाय अपनाना आवश्यक है।
सरकार द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के लिए विभिन्न नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन प्रत्येक उद्योग के लिए अनिवार्य है।
औद्योगिक क्षेत्रों में पर्यावरण प्रदूषण रोकने के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं—
(i) कारखानों की चिमनियों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाए जाएँ।
(ii) औद्योगिक अपशिष्टों का शोधन (Treatment) करके ही जल स्रोतों में छोड़ा जाए।
(iii) ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए आधुनिक उपकरणों का उपयोग किया जाए।
(iv) वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया जाए।
(v) ठोस एवं रासायनिक कचरे का वैज्ञानिक ढंग से निपटान किया जाए।
(vi) पर्यावरण संरक्षण संबंधी सरकारी नियमों का सख्ती से पालन किया जाए।
11. स्वामित्व के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण उदाहरण सहित कीजिए।
उत्तर ⇒
उद्योगों का वर्गीकरण उनके स्वामित्व (Ownership) के आधार पर भी किया जाता है। स्वामित्व के अनुसार उद्योगों को चार प्रमुख वर्गों में बाँटा गया है। प्रत्येक वर्ग में उद्योगों का संचालन एवं प्रबंधन अलग-अलग प्रकार से किया जाता है। इससे उद्योगों के कार्य करने की व्यवस्था तथा उद्देश्य भी अलग होते हैं।
स्वामित्व के आधार पर उद्योगों के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं—
(i) सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग (Public Sector Industries) – इन उद्योगों का स्वामित्व एवं संचालन सरकार द्वारा किया जाता है।
उदाहरण – भिलाई इस्पात संयंत्र, बोकारो इस्पात संयंत्र, भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL)।
(ii) निजी क्षेत्र के उद्योग (Private Sector Industries) – इन उद्योगों का स्वामित्व किसी व्यक्ति, निजी कंपनी अथवा निजी संस्था के पास होता है।
उदाहरण – टाटा स्टील, रिलायंस इंडस्ट्रीज।
(iii) सहकारी क्षेत्र के उद्योग (Co-operative Sector Industries) – इन उद्योगों का संचालन सहकारी समितियों द्वारा किया जाता है।
उदाहरण – अमूल डेयरी, सहकारी चीनी मिलें।
(iv) संयुक्त क्षेत्र के उद्योग (Joint Sector Industries) – इन उद्योगों में सरकार एवं निजी क्षेत्र दोनों मिलकर पूँजी निवेश एवं संचालन करते हैं।
उदाहरण – ऑयल इंडिया लिमिटेड।
12. भारत में सिले-सिलाए वस्त्र (Readymade Garments) उद्योग का विकास कहाँ-कहाँ हुआ है?
उत्तर ⇒
भारत का सिले-सिलाए वस्त्र उद्योग (Readymade Garment Industry) देश के सबसे तेजी से विकसित होने वाले उद्योगों में से एक है। यह उद्योग बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराता है तथा भारत के निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देता है। यह उद्योग मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में विकसित हुआ है जहाँ कुशल श्रमिक, परिवहन, बाजार तथा निर्यात की सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
देश के विभिन्न महानगरों एवं औद्योगिक नगरों में रेडीमेड वस्त्र उद्योग का विशेष विकास हुआ है।
सिले-सिलाए वस्त्र उद्योग के प्रमुख केंद्र निम्नलिखित हैं—
(i) जयपुर
(ii) सूरत
(iii) लखनऊ
(iv) लुधियाना
(v) श्रीनगर
(vi) कोलकाता
(vii) मेरठ
(viii) मुरादाबाद
(ix) आगरा
(x) बुलंदशहर
इन केंद्रों में वस्त्र निर्माण, होजरी उद्योग तथा निर्यात आधारित उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जाता है।
13. वैश्वीकरण (Globalization) का लघु उद्योगों पर क्या प्रभाव पड़ा है?
उत्तर ⇒
वैश्वीकरण (Globalization) के कारण भारत का बाजार विश्व के अन्य देशों के लिए खुल गया। इससे विदेशी कंपनियों के उत्पाद भारतीय बाजार में आने लगे। एक ओर उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिले, वहीं दूसरी ओर देश के लघु एवं कुटीर उद्योगों के सामने कड़ी प्रतिस्पर्धा उत्पन्न हो गई।
विदेशी कंपनियाँ आधुनिक तकनीक, बेहतर गुणवत्ता एवं बड़े पैमाने पर उत्पादन के कारण कम कीमत पर वस्तुएँ उपलब्ध कराती हैं। इसके कारण अनेक छोटे उद्योग प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाए और कई उद्योग बंद भी हो गए।
वैश्वीकरण का लघु उद्योगों पर प्रभाव निम्नलिखित है—
(i) विदेशी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा बढ़ गई।
(ii) अनेक लघु उद्योग बंद हो गए।
(iii) कई उद्योगों में कर्मचारियों की छँटनी हुई।
(iv) आधुनिक तकनीक अपनाने की आवश्यकता बढ़ी।
(v) गुणवत्तापूर्ण उत्पादन पर अधिक ध्यान देना पड़ा।
(vi) कुछ उद्योगों को निर्यात के नए अवसर भी प्राप्त हुए।
14. एल्यूमिनियम उद्योग (Aluminium Industry) के लिए सस्ती विद्युत आपूर्ति क्यों आवश्यक है?
उत्तर ⇒
एल्यूमिनियम उद्योग एक विद्युत-प्रधान उद्योग (Power Intensive Industry) है। एल्यूमिनियम का निर्माण बॉक्साइट अयस्क से विद्युत अपघटन (Electrolysis) की प्रक्रिया द्वारा किया जाता है, जिसमें अत्यधिक मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है। इसलिए इस उद्योग की स्थापना प्रायः उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ सस्ती एवं निरंतर विद्युत उपलब्ध हो।
एल्यूमिनियम निर्माण की कुल उत्पादन लागत का लगभग 30 से 40 प्रतिशत भाग केवल बिजली पर खर्च होता है। इसलिए यदि बिजली महँगी हो, तो उत्पादन लागत भी काफी बढ़ जाती है।
सस्ती विद्युत की आवश्यकता के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—
(i) एल्यूमिनियम निर्माण में अत्यधिक बिजली की आवश्यकता होती है।
(ii) उत्पादन लागत का बड़ा भाग बिजली पर खर्च होता है।
(iii) सस्ती बिजली से उत्पादन लागत कम होती है।
(iv) उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ती है।
(v) निरंतर विद्युत आपूर्ति से उत्पादन बाधित नहीं होता।
15. बहुराष्ट्रीय कंपनी (Multinational Company) किसे कहते हैं?
उत्तर ⇒
वे कंपनियाँ जिनका मुख्यालय किसी एक देश में होता है, लेकिन उनका उत्पादन, व्यापार एवं सेवाएँ अनेक देशों में फैली होती हैं, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (Multinational Companies – MNCs) कहलाती हैं। इन कंपनियों के पास विशाल पूँजी, आधुनिक तकनीक तथा विश्वव्यापी व्यापार नेटवर्क होता है।
बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ विभिन्न देशों में कारखाने स्थापित करती हैं, रोजगार उपलब्ध कराती हैं तथा आधुनिक तकनीकों का विकास करती हैं। भारत में आर्थिक उदारीकरण के बाद अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने निवेश किया है।
बहुराष्ट्रीय कंपनियों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
(i) अनेक देशों में व्यापार एवं उत्पादन करती हैं।
(ii) विशाल पूँजी एवं आधुनिक तकनीक का उपयोग करती हैं।
(iii) अंतरराष्ट्रीय बाजार में कार्य करती हैं।
(iv) बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर प्रदान करती हैं।
(v) वैश्विक व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा देती हैं।
उदाहरण – पेप्सी, कोका-कोला, सैमसंग, एलजी, नोकिया, टोयोटा आदि।
16. भारत में रेडीमेड वस्त्र पार्क (Apparel Park) की स्थापना क्यों की गई?
उत्तर ⇒
भारत सरकार ने रेडीमेड वस्त्रों (Readymade Garments) के उत्पादन एवं निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रेडीमेड वस्त्र पार्क (Apparel Park) की स्थापना की। इन पार्कों में वस्त्र उद्योग से संबंधित सभी आवश्यक सुविधाएँ जैसे आधुनिक मशीनें, परिवहन, गोदाम, बिजली, जल तथा निर्यात की व्यवस्था एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाती हैं। इससे उत्पादन लागत कम होती है तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय वस्त्रों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ती है।
देश का पहला रेडीमेड वस्त्र पार्क तमिलनाडु के तिरुपुर के एट्टीवरम्पलायम गाँव में स्थापित किया गया था। इस पार्क ने रेडीमेड वस्त्रों के उत्पादन एवं निर्यात को नई गति प्रदान की।
रेडीमेड वस्त्र पार्क की स्थापना के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—
(i) रेडीमेड वस्त्रों के निर्यात को बढ़ावा देना।
(ii) आधुनिक उत्पादन सुविधाएँ उपलब्ध कराना।
(iii) रोजगार के नए अवसर उत्पन्न करना।
(iv) वस्त्र उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाना।
(v) विदेशी मुद्रा अर्जित करना।
17. उपभोक्ता उद्योग (Consumer Industry) किसे कहते हैं?
उत्तर ⇒
वे उद्योग जिनमें निर्मित वस्तुओं का उपयोग उपभोक्ता सीधे अपने दैनिक जीवन में करते हैं, उन्हें उपभोक्ता उद्योग (Consumer Industry) कहा जाता है। इन उद्योगों द्वारा तैयार वस्तुएँ किसी अन्य उद्योग के लिए कच्चा माल नहीं होतीं, बल्कि सीधे लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं।
उपभोक्ता उद्योग लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन उद्योगों में दैनिक उपयोग की वस्तुओं का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है।
उपभोक्ता उद्योगों के प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं—
(i) दंतमंजन उद्योग।
(ii) कागज उद्योग।
(iii) पंखा एवं विद्युत उपकरण उद्योग।
(iv) साबुन उद्योग।
(v) रेडीमेड वस्त्र उद्योग।
(vi) जूता एवं घरेलू उपयोग की वस्तुओं के उद्योग।
उपभोक्ता उद्योगों का महत्व—
(i) दैनिक आवश्यकताओं की वस्तुएँ उपलब्ध कराते हैं।
(ii) रोजगार के अवसर बढ़ाते हैं।
(iii) औद्योगिक उत्पादन में योगदान देते हैं।
(iv) लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाते हैं।
18. भारत में पटसन (जूट) उद्योग की प्रमुख समस्याएँ लिखिए।
उत्तर ⇒
भारत विश्व के प्रमुख जूट उत्पादक देशों में से एक है, लेकिन वर्तमान समय में जूट उद्योग अनेक समस्याओं का सामना कर रहा है। कृत्रिम रेशों (Synthetic Fibres) के बढ़ते उपयोग, उत्पादन लागत में वृद्धि तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा के कारण इस उद्योग का विकास प्रभावित हुआ है।
इसके अतिरिक्त जूट से बने उत्पाद अपेक्षाकृत महंगे होने के कारण इनकी माँग भी कम होती जा रही है। इसलिए इस उद्योग के आधुनिकीकरण एवं नए उत्पादों के विकास की आवश्यकता है।
जूट उद्योग की प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं—
(i) जूट से बनी वस्तुओं की माँग में कमी।
(ii) कृत्रिम रेशों से बनी वस्तुओं की बढ़ती लोकप्रियता।
(iii) उत्पादन लागत अधिक होना।
(iv) अंतरराष्ट्रीय बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा।
(v) पुरानी मशीनों एवं तकनीकों का उपयोग।
(vi) निर्यात बाजार में चुनौतियाँ।
19. पश्मीना ऊन (Pashmina Wool) किस प्रकार तैयार किया जाता है?
उत्तर ⇒
पश्मीना ऊन विश्व की सबसे मुलायम एवं उच्च गुणवत्ता वाली ऊन में से एक मानी जाती है। यह विशेष प्रकार की पहाड़ी बकरियों के शरीर पर उगने वाले अत्यंत मुलायम रोएँ (Fine Hair) से प्राप्त की जाती है। ये बकरियाँ मुख्य रूप से हिमालयी क्षेत्रों, विशेषकर लद्दाख एवं कश्मीर में पाई जाती हैं।
सर्दियों में इन बकरियों के शरीर पर अत्यंत महीन एवं गर्म रोएँ विकसित होते हैं। इन्हें सावधानीपूर्वक एकत्र करके साफ किया जाता है तथा फिर इनसे धागा एवं उच्च गुणवत्ता वाले शॉल, स्वेटर तथा अन्य ऊनी वस्त्र तैयार किए जाते हैं।
पश्मीना ऊन की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
(i) अत्यंत मुलायम एवं हल्की होती है।
(ii) अधिक गर्माहट प्रदान करती है।
(iii) उच्च गुणवत्ता की ऊन मानी जाती है।
(iv) इससे पश्मीना शॉल एवं ऊनी वस्त्र बनाए जाते हैं।
(v) विश्व बाजार में इसकी बहुत अधिक माँग है।
20. तापीय प्रदूषण (Thermal Pollution) क्या है?
उत्तर ⇒
जब उद्योगों, ताप विद्युत गृहों अथवा अन्य औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अत्यधिक गर्म जल को बिना ठंडा किए सीधे नदियों, तालाबों अथवा अन्य जल स्रोतों में छोड़ दिया जाता है, तो जल का तापमान बढ़ जाता है। इस प्रकार उत्पन्न प्रदूषण को तापीय प्रदूषण (Thermal Pollution) कहा जाता है।
जल का तापमान बढ़ने से उसमें घुली हुई ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, जिससे मछलियों, सूक्ष्म जीवों एवं अन्य जलीय जीवों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए उद्योगों से निकलने वाले गर्म जल का शोधन एवं शीतलन आवश्यक है।
तापीय प्रदूषण के प्रमुख दुष्प्रभाव निम्नलिखित हैं—
(i) जल का तापमान बढ़ जाता है।
(ii) घुलित ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है।
(iii) मछलियाँ एवं जलीय जीव प्रभावित होते हैं।
(iv) सूक्ष्म जलीय वनस्पतियाँ एवं जीव नष्ट हो सकते हैं।
(v) जल पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बिगड़ जाता है।
21. झारखंड एवं पश्चिम बंगाल में लौह-इस्पात उद्योग (Iron and Steel Industry) के प्रमुख केंद्र कौन-कौन से हैं? किसी एक केंद्र की स्थापना के कारण लिखिए।
उत्तर ⇒
लौह एवं इस्पात उद्योग भारत का सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत उद्योग है। झारखंड एवं पश्चिम बंगाल में लौह अयस्क, कोयला, जल तथा परिवहन जैसी आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता के कारण अनेक बड़े इस्पात संयंत्र स्थापित किए गए हैं। इन उद्योगों ने दोनों राज्यों के औद्योगिक विकास एवं रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
झारखंड के प्रमुख लौह-इस्पात केंद्र—
(i) जमशेदपुर
(ii) बोकारो
पश्चिम बंगाल के प्रमुख लौह-इस्पात केंद्र—
(i) दुर्गापुर
(ii) बर्नपुर
(iii) कुल्टी
जमशेदपुर इस्पात संयंत्र की स्थापना के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—
(i) लौह अयस्क की प्राप्ति नोआमुंडी, गुरुमहिसानी एवं बदाम पहाड़ से होती है।
(ii) कोयले की आपूर्ति झरिया एवं रानीगंज से होती है।
(iii) चूना पत्थर एवं डोलोमाइट निकटवर्ती क्षेत्रों से प्राप्त होते हैं।
(iv) स्वर्णरेखा एवं खरकई नदियों से पर्याप्त जल उपलब्ध होता है।
(v) कोलकाता–मुंबई रेलमार्ग पर स्थित होने के कारण उत्कृष्ट परिवहन सुविधा उपलब्ध है।
(vi) पर्याप्त श्रमिक एवं बाजार की सुविधा उपलब्ध है।
22. पश्चिम बंगाल में जूट उद्योग (Jute Industry) का विकास मुख्यतः किस क्षेत्र में हुआ है?
उत्तर ⇒
भारत का अधिकांश जूट उद्योग पश्चिम बंगाल में विकसित हुआ है। यहाँ की अधिकांश जूट मिलें हुगली नदी के दोनों किनारों पर लगभग 98 किलोमीटर लंबी एवं 3 किलोमीटर चौड़ी पट्टी में स्थित हैं। इस क्षेत्र में जूट उद्योग के विकास के लिए कच्चा माल, जल, श्रमिक, परिवहन तथा कोलकाता बंदरगाह जैसी सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
हुगली नदी के किनारे स्थित होने के कारण जल की पर्याप्त उपलब्धता रहती है तथा कोलकाता बंदरगाह के माध्यम से तैयार जूट उत्पादों का निर्यात भी आसानी से किया जाता है।
इस क्षेत्र में जूट उद्योग के विकास के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—
(i) जूट उत्पादन वाले क्षेत्रों की निकटता।
(ii) हुगली नदी से पर्याप्त जल की उपलब्धता।
(iii) सस्ते एवं कुशल श्रमिकों की उपलब्धता।
(iv) कोलकाता बंदरगाह की सुविधा।
(v) उत्कृष्ट रेल एवं सड़क परिवहन व्यवस्था।
(vi) विशाल घरेलू एवं विदेशी बाजार की उपलब्धता।
23. लौह एवं इस्पात उद्योग (Iron and Steel Industry) को आधारभूत उद्योग (Basic Industry) क्यों कहा जाता है?
उत्तर ⇒
लौह एवं इस्पात उद्योग को आधारभूत उद्योग अथवा अन्य उद्योगों की जननी (Mother Industry) कहा जाता है, क्योंकि लगभग सभी छोटे एवं बड़े उद्योगों को मशीनें, उपकरण, औजार तथा विभिन्न प्रकार की धातु सामग्री इसी उद्योग से प्राप्त होती है। यदि लौह एवं इस्पात उद्योग का विकास नहीं होगा, तो अन्य उद्योगों का विकास भी संभव नहीं होगा।
रेलवे, ऑटोमोबाइल, जहाज निर्माण, भवन निर्माण, मशीन निर्माण, विद्युत उपकरण तथा रक्षा उद्योग सभी किसी-न-किसी रूप में इस्पात पर निर्भर हैं।
लौह एवं इस्पात उद्योग को आधारभूत उद्योग कहे जाने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—
(i) अन्य उद्योगों के लिए मशीनें एवं उपकरण उपलब्ध कराता है।
(ii) भारी एवं हल्के उद्योगों का आधार है।
(iii) औद्योगिक विकास को गति प्रदान करता है।
(iv) आधारभूत संरचना (Infrastructure) के निर्माण में उपयोगी है।
(v) रेलवे, परिवहन एवं निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री प्रदान करता है।
(vi) देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
24. सूती वस्त्र उद्योग (Cotton Textile Industry) के स्थानीयकरण के प्रमुख कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒
सूती वस्त्र उद्योग भारत के सबसे पुराने एवं महत्वपूर्ण उद्योगों में से एक है। इस उद्योग की स्थापना ऐसे स्थानों पर की जाती है जहाँ कपास, श्रमिक, बिजली, परिवहन एवं बाजार जैसी आवश्यक सुविधाएँ आसानी से उपलब्ध हों।
प्रारंभ में अधिकांश सूती वस्त्र मिलें कपास उत्पादक क्षेत्रों के निकट स्थापित की गई थीं, लेकिन वर्तमान समय में परिवहन एवं बिजली की सुविधा के कारण इनका विस्तार अन्य क्षेत्रों में भी हुआ है।
सूती वस्त्र उद्योग के स्थानीयकरण के प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं—
(i) कपास (कच्चे माल) की उपलब्धता।
(ii) सस्ते एवं कुशल श्रमिकों की उपलब्धता।
(iii) पर्याप्त बिजली की सुविधा।
(iv) विकसित परिवहन व्यवस्था।
(v) बड़े बाजार की उपलब्धता।
(vi) आर्द्र जलवायु, जिससे धागा टूटता नहीं है।
25. औद्योगीकरण (Industrialization) का देश के आर्थिक विकास में क्या महत्व है?
उत्तर ⇒
औद्योगीकरण किसी भी देश के आर्थिक एवं सामाजिक विकास का प्रमुख आधार माना जाता है। उद्योगों की स्थापना से कच्चे माल का बेहतर उपयोग होता है, रोजगार के अवसर बढ़ते हैं तथा राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है। औद्योगीकरण के कारण देश में आधुनिक तकनीकों का विकास होता है और लोगों के जीवन स्तर में सुधार आता है।
भारत जैसे विकासशील देश में औद्योगीकरण गरीबी कम करने, बेरोजगारी दूर करने तथा निर्यात बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए औद्योगिक विकास को आर्थिक प्रगति का प्रमुख साधन माना जाता है।
औद्योगीकरण के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—
(i) बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उत्पन्न होते हैं।
(ii) राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है।
(iii) निर्यात बढ़ने से विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।
(iv) आधुनिक तकनीक एवं वैज्ञानिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
(v) लोगों के जीवन स्तर में सुधार होता है।
(vi) देश के समग्र आर्थिक विकास को गति मिलती है।
26. लघु उद्योग (Small Scale Industries) किसे कहते हैं? इनके प्रमुख लाभ लिखिए।
उत्तर ⇒
वे उद्योग जिनकी स्थापना कम पूँजी, कम श्रमिकों तथा सीमित संसाधनों के आधार पर की जाती है, लघु उद्योग (Small Scale Industries) कहलाते हैं। इन उद्योगों में उत्पादन का स्तर अपेक्षाकृत कम होता है तथा आधुनिक भारी मशीनों की अपेक्षा छोटे उपकरणों एवं स्थानीय श्रमिकों का अधिक उपयोग किया जाता है। भारत में लघु उद्योग ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
लघु उद्योग कम पूँजी में अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराते हैं तथा स्थानीय कच्चे माल एवं पारंपरिक कौशल का उपयोग करके क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देते हैं।
लघु उद्योगों के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—
(i) कम पूँजी में स्थापित किए जा सकते हैं।
(ii) स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराते हैं।
(iii) ग्रामीण एवं कुटीर उद्योगों का विकास करते हैं।
(iv) स्थानीय कच्चे माल का उपयोग करते हैं।
(v) क्षेत्रीय आर्थिक विकास में योगदान देते हैं।
(vi) निर्यात बढ़ाने में सहायता करते हैं।
27. भारी उद्योग (Heavy Industries) किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर ⇒
वे उद्योग जिनमें अत्यधिक पूँजी, विशाल मशीनों, उन्नत तकनीक तथा बड़े पैमाने पर कच्चे माल का उपयोग किया जाता है, भारी उद्योग (Heavy Industries) कहलाते हैं। इन उद्योगों द्वारा मुख्यतः मशीनें, इस्पात, भारी उपकरण तथा अन्य औद्योगिक सामग्री का निर्माण किया जाता है।
भारी उद्योग किसी भी देश के औद्योगिक विकास की आधारशिला माने जाते हैं, क्योंकि अन्य अनेक उद्योग इन्हीं पर निर्भर रहते हैं।
भारी उद्योगों के प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं—
(i) लौह एवं इस्पात उद्योग।
(ii) मशीन निर्माण उद्योग।
(iii) जहाज निर्माण उद्योग।
(iv) भारी विद्युत उपकरण उद्योग (BHEL)।
(v) सीमेंट उद्योग।
भारी उद्योगों का महत्व—
(i) औद्योगिक विकास को गति प्रदान करते हैं।
(ii) अन्य उद्योगों के लिए मशीनें उपलब्ध कराते हैं।
(iii) आधारभूत संरचना के विकास में सहायता करते हैं।
(iv) राष्ट्रीय आय एवं रोजगार में वृद्धि करते हैं।
28. कुटीर उद्योग (Cottage Industries) क्या हैं? इनके महत्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒
वे उद्योग जो घर अथवा छोटे स्तर पर परिवार के सदस्यों की सहायता से पारंपरिक उपकरणों द्वारा चलाए जाते हैं, कुटीर उद्योग (Cottage Industries) कहलाते हैं। इन उद्योगों में कम पूँजी लगती है तथा स्थानीय कच्चे माल का उपयोग किया जाता है।
भारत में हस्तकरघा, मिट्टी के बर्तन, बाँस एवं लकड़ी के सामान, कालीन, हस्तशिल्प तथा हाथ से बने वस्त्र कुटीर उद्योगों के प्रमुख उदाहरण हैं। ये उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने तथा पारंपरिक कला एवं संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कुटीर उद्योगों का महत्व निम्नलिखित है—
(i) ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराते हैं।
(ii) कम पूँजी में स्थापित किए जा सकते हैं।
(iii) पारंपरिक कला एवं हस्तशिल्प को बढ़ावा देते हैं।
(iv) स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हैं।
(v) ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाते हैं।
29. उद्योगों से होने वाले प्रमुख पर्यावरणीय प्रदूषणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒
औद्योगिक विकास आर्थिक प्रगति के लिए आवश्यक है, लेकिन उद्योगों से निकलने वाले धुएँ, रासायनिक अपशिष्ट, शोर तथा ठोस कचरे के कारण पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यदि इनका उचित प्रबंधन नहीं किया जाए, तो वायु, जल, मिट्टी एवं ध्वनि प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो जाती हैं।
इसलिए उद्योगों में आधुनिक प्रदूषण नियंत्रण तकनीकों का उपयोग करना तथा पर्यावरण संरक्षण के नियमों का पालन करना आवश्यक है।
उद्योगों से होने वाले प्रमुख प्रदूषण निम्नलिखित हैं—
(i) वायु प्रदूषण।
(ii) जल प्रदूषण।
(iii) ध्वनि प्रदूषण।
(iv) मिट्टी प्रदूषण।
(v) तापीय प्रदूषण।
इनके दुष्प्रभाव—
(i) मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
(ii) जलीय जीवों एवं वनस्पतियों को नुकसान होता है।
(iii) पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ता है।
(iv) प्राकृतिक संसाधनों की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
30. भारत के औद्योगिक विकास में विनिर्माण उद्योगों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒
विनिर्माण उद्योग भारत के आर्थिक विकास का प्रमुख आधार हैं। ये उद्योग कच्चे माल को तैयार वस्तुओं में परिवर्तित करके उनके मूल्य में वृद्धि करते हैं। विनिर्माण उद्योगों के विकास से रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि होती है तथा देश की राष्ट्रीय आय एवं विदेशी व्यापार को मजबूती मिलती है।
भारत में वस्त्र उद्योग, लौह एवं इस्पात उद्योग, सीमेंट उद्योग, चीनी उद्योग, जूट उद्योग तथा ऑटोमोबाइल उद्योग जैसे विनिर्माण उद्योग देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। विकसित एवं आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के निर्माण में इन उद्योगों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विनिर्माण उद्योगों का महत्व निम्नलिखित है—
(i) कच्चे माल का मूल्य बढ़ाते हैं।
(ii) बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराते हैं।
(iii) राष्ट्रीय आय में वृद्धि करते हैं।
(iv) निर्यात बढ़ाकर विदेशी मुद्रा अर्जित करते हैं।
(v) औद्योगिकीकरण एवं आर्थिक विकास को गति प्रदान करते हैं।
(vi) देश को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
31. सीमेंट उद्योग (Cement Industry) के स्थानीयकरण के प्रमुख कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒
सीमेंट उद्योग भारत का एक महत्वपूर्ण आधारभूत उद्योग है। इस उद्योग में चूना पत्थर, जिप्सम, सिलिका तथा कोयले जैसे भारी कच्चे माल का उपयोग किया जाता है। इसलिए सीमेंट कारखाने प्रायः उन क्षेत्रों में स्थापित किए जाते हैं जहाँ कच्चा माल आसानी से उपलब्ध हो। इसके अतिरिक्त बिजली, परिवहन, श्रमिक तथा बाजार की सुविधा भी उद्योग की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
भारत में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु तथा गुजरात सीमेंट उत्पादन के प्रमुख राज्य हैं।
सीमेंट उद्योग के स्थानीयकरण के प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं—
(i) चूना पत्थर की पर्याप्त उपलब्धता।
(ii) कोयला एवं बिजली की सुविधा।
(iii) सस्ता एवं कुशल श्रम।
(iv) विकसित परिवहन व्यवस्था।
(v) बड़े बाजार की उपलब्धता।
(vi) पर्याप्त जल की व्यवस्था।
32. चीनी उद्योग (Sugar Industry) को कृषि आधारित उद्योग क्यों कहा जाता है?
उत्तर ⇒
चीनी उद्योग का मुख्य कच्चा माल गन्ना है, जो कृषि से प्राप्त होता है। इसलिए चीनी उद्योग को कृषि आधारित उद्योग कहा जाता है। गन्ना भारी तथा शीघ्र खराब होने वाला कच्चा माल है, इसलिए चीनी मिलें प्रायः गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के निकट स्थापित की जाती हैं। इससे परिवहन लागत कम होती है तथा गन्ने की गुणवत्ता भी बनी रहती है।
भारत विश्व के प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में से एक है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, बिहार एवं तमिलनाडु इसके प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।
चीनी उद्योग का महत्व निम्नलिखित है—
(i) किसानों को अपनी फसल का बाजार उपलब्ध कराता है।
(ii) ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार प्रदान करता है।
(iii) कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देता है।
(iv) राष्ट्रीय आय में योगदान देता है।
(v) गुड़, शीरा एवं एथेनॉल जैसे सह-उत्पाद भी प्राप्त होते हैं।
33. सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) उद्योग का महत्व लिखिए।
उत्तर ⇒
सूचना प्रौद्योगिकी (IT) उद्योग आधुनिक भारत का तेजी से विकसित होने वाला उद्योग है। इस उद्योग के माध्यम से कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर, इंटरनेट, डिजिटल सेवाएँ एवं सूचना प्रबंधन से संबंधित कार्य किए जाते हैं। भारत आज विश्व के प्रमुख आईटी सेवा प्रदाता देशों में शामिल है।
आईटी उद्योग ने रोजगार के नए अवसर उत्पन्न किए हैं तथा भारत की विदेशी मुद्रा आय में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, चेन्नई, गुरुग्राम एवं नोएडा इसके प्रमुख केंद्र हैं।
सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग का महत्व निम्नलिखित है—
(i) उच्च शिक्षित युवाओं को रोजगार प्रदान करता है।
(ii) विदेशी मुद्रा अर्जित करने में सहायता करता है।
(iii) डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है।
(iv) संचार एवं सूचना प्रणाली को मजबूत बनाता है।
(v) भारत की वैश्विक पहचान को सुदृढ़ करता है।
34. औद्योगिक विकास (Industrial Development) से होने वाले प्रमुख लाभ लिखिए।
उत्तर ⇒
औद्योगिक विकास किसी भी देश की आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार होता है। उद्योगों के विकास से उत्पादन बढ़ता है, रोजगार के अवसर उत्पन्न होते हैं तथा लोगों की आय में वृद्धि होती है। इसके साथ ही देश में परिवहन, संचार एवं आधारभूत संरचनाओं का भी विकास होता है।
औद्योगिक विकास कृषि एवं सेवा क्षेत्रों के विकास में भी सहायक होता है तथा देश को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
औद्योगिक विकास के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—
(i) रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
(ii) राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है।
(iii) औद्योगिक उत्पादन में बढ़ोतरी होती है।
(iv) निर्यात बढ़ने से विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।
(v) लोगों के जीवन स्तर में सुधार होता है।
(vi) आधारभूत संरचना का विकास होता है।
35. भारत में विनिर्माण उद्योगों के विकास के लिए क्या सुझाव दिए जा सकते हैं?
उत्तर ⇒
भारत में विनिर्माण उद्योगों को और अधिक विकसित करने के लिए आधुनिक तकनीक, कुशल श्रमिक, पर्याप्त बिजली, गुणवत्तापूर्ण आधारभूत संरचना तथा निवेश को बढ़ावा देना आवश्यक है। साथ ही उद्योगों को पर्यावरण संरक्षण के नियमों का पालन करते हुए उत्पादन बढ़ाना चाहिए।
यदि सरकार, उद्योगपति एवं श्रमिक मिलकर कार्य करें, तो भारत वैश्विक विनिर्माण क्षेत्र में और अधिक मजबूत स्थान प्राप्त कर सकता है।
विनिर्माण उद्योगों के विकास के प्रमुख सुझाव निम्नलिखित हैं—
(i) आधुनिक मशीनों एवं तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जाए।
(ii) उद्योगों को पर्याप्त एवं सस्ती बिजली उपलब्ध कराई जाए।
(iii) कुशल श्रमिकों को प्रशिक्षण दिया जाए।
(iv) परिवहन एवं संचार सुविधाओं का विस्तार किया जाए।
(v) अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा दिया जाए।
(vi) पर्यावरण अनुकूल औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित किया जाए।
(vii) छोटे एवं मध्यम उद्योगों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।
36. भारत के औद्योगिक विकास में बहुराष्ट्रीय कंपनियों (Multinational Companies) की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒
बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (MNCs) वे कंपनियाँ होती हैं, जिनका मुख्यालय किसी एक देश में होता है, लेकिन उनका उत्पादन, व्यापार एवं सेवाएँ अनेक देशों में संचालित होती हैं। आर्थिक उदारीकरण के बाद भारत में अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने निवेश किया, जिससे देश के औद्योगिक विकास को नई गति मिली। इन कंपनियों ने आधुनिक तकनीक, पूँजी, प्रबंधन एवं वैश्विक बाजार तक पहुँच उपलब्ध कराई।
हालाँकि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आगमन से प्रतिस्पर्धा बढ़ी, लेकिन इससे भारतीय उद्योगों को अपनी गुणवत्ता एवं उत्पादन क्षमता में सुधार करने का अवसर भी मिला। आज भारत के ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी एवं दूरसंचार क्षेत्रों में इन कंपनियों का महत्वपूर्ण योगदान है।
बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—
(i) विदेशी निवेश में वृद्धि होती है।
(ii) आधुनिक तकनीक का विकास होता है।
(iii) रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होते हैं।
(iv) औद्योगिक उत्पादन एवं निर्यात बढ़ता है।
(v) वैश्विक बाजार तक पहुँच आसान होती है।
(vi) भारतीय उद्योगों में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ती है।
37. औद्योगिक प्रदूषण (Industrial Pollution) के प्रमुख प्रकार एवं उनके प्रभाव लिखिए।
उत्तर ⇒
उद्योगों से निकलने वाले धुएँ, रासायनिक अपशिष्ट, ध्वनि तथा ठोस कचरे के कारण पर्यावरण प्रदूषित होता है। इसे औद्योगिक प्रदूषण कहा जाता है। यदि उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण के उचित उपाय नहीं अपनाए जाएँ, तो इसका प्रभाव मानव स्वास्थ्य, वनस्पतियों, पशु-पक्षियों तथा प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ता है।
आज औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक हो गया है।
औद्योगिक प्रदूषण के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं—
(i) वायु प्रदूषण।
(ii) जल प्रदूषण।
(iii) ध्वनि प्रदूषण।
(iv) मिट्टी प्रदूषण।
(v) तापीय प्रदूषण।
औद्योगिक प्रदूषण के प्रमुख दुष्प्रभाव—
(i) श्वसन संबंधी रोगों में वृद्धि होती है।
(ii) जल स्रोत प्रदूषित हो जाते हैं।
(iii) जलीय जीवों एवं वनस्पतियों को नुकसान पहुँचता है।
(iv) मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है।
(v) पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ जाता है।
38. भारत के प्रमुख लौह एवं इस्पात उद्योग केंद्रों के नाम लिखिए।
उत्तर ⇒
लौह एवं इस्पात उद्योग भारत का सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत उद्योग है। इस उद्योग के विकास के लिए लौह अयस्क, कोयला, चूना पत्थर, जल, बिजली तथा परिवहन जैसी सुविधाओं की आवश्यकता होती है। भारत में अधिकांश इस्पात संयंत्र लौह अयस्क एवं कोयला क्षेत्रों के निकट स्थापित किए गए हैं।
इन उद्योगों ने देश के औद्योगिक विकास, रोजगार एवं आधारभूत संरचना के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
भारत के प्रमुख लौह एवं इस्पात उद्योग केंद्र निम्नलिखित हैं—
(i) जमशेदपुर (झारखंड)
(ii) बोकारो (झारखंड)
(iii) भिलाई (छत्तीसगढ़)
(iv) राउरकेला (ओडिशा)
(v) दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल)
(vi) बर्नपुर (पश्चिम बंगाल)
(vii) विशाखापट्टनम (आंध्र प्रदेश)
(viii) सलेम (तमिलनाडु)
39. भारत में सूती वस्त्र उद्योग के प्रमुख केंद्रों के नाम लिखिए।
उत्तर ⇒
सूती वस्त्र उद्योग भारत का सबसे पुराना एवं सबसे बड़ा उद्योगों में से एक है। इस उद्योग का विकास मुख्य रूप से कपास उत्पादक क्षेत्रों एवं बड़े व्यापारिक नगरों में हुआ है। वर्तमान समय में आधुनिक परिवहन एवं बिजली की सुविधाओं के कारण यह उद्योग देश के अनेक राज्यों में फैल चुका है।
भारत के सूती वस्त्र उद्योग घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ निर्यात में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
भारत के प्रमुख सूती वस्त्र उद्योग केंद्र निम्नलिखित हैं—
(i) मुंबई
(ii) अहमदाबाद
(iii) सूरत
(iv) कोयंबटूर
(v) कानपुर
(vi) नागपुर
(vii) इंदौर
(viii) चेन्नई
(ix) लुधियाना
(x) कोलकाता
40. ‘विनिर्माण उद्योग’ अध्याय का निष्कर्ष लिखिए।
उत्तर ⇒
विनिर्माण उद्योग किसी भी देश के आर्थिक विकास का आधार होता है। यह कच्चे माल को उपयोगी वस्तुओं में परिवर्तित करके उनके मूल्य में वृद्धि करता है तथा बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उत्पन्न करता है। भारत में लौह एवं इस्पात, वस्त्र, चीनी, सीमेंट, जूट, कागज, एल्यूमिनियम तथा सूचना प्रौद्योगिकी जैसे अनेक विनिर्माण उद्योग राष्ट्रीय आय, विदेशी व्यापार एवं औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
वर्तमान समय में वैश्वीकरण एवं आधुनिक तकनीकों के कारण भारतीय उद्योगों को नई चुनौतियों एवं अवसरों दोनों का सामना करना पड़ रहा है। यदि आधुनिक तकनीक, पर्यावरण संरक्षण, कुशल श्रमिक, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन एवं अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाए, तो भारत विश्व के अग्रणी औद्योगिक देशों में अपनी स्थिति और अधिक मजबूत बना सकता है। इसलिए विनिर्माण उद्योग देश के सतत आर्थिक विकास, आत्मनिर्भरता तथा रोजगार सृजन का प्रमुख आधार है।