Class 10 Geography: कृषि
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Chapter Overview
| Class | 10 |
| Subject | Geography |
| Chapter Name | कृषि |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
कृषि Revision Notes
1. भारत को कृषि प्रधान देश क्यों कहा जाता है?
उत्तर ⇒
भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा भाग कृषि पर आधारित है। आज भी भारत की बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि एवं उससे जुड़े कार्यों पर निर्भर है। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश लोगों की आजीविका का मुख्य साधन खेती है। कृषि न केवल देशवासियों के लिए खाद्यान्न उपलब्ध कराती है, बल्कि अनेक उद्योगों के लिए आवश्यक कच्चा माल भी प्रदान करती है।
भारत में गेहूँ, धान, गन्ना, जूट, कपास, चाय, कॉफी, दलहन, तिलहन, फल एवं सब्जियों जैसी अनेक फसलों का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जाता है। कृषि क्षेत्र रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ राष्ट्रीय आय, विदेशी मुद्रा अर्जन तथा औद्योगिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसी कारण कृषि को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।
भारत को कृषि प्रधान देश कहे जाने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—
(i) देश की बड़ी जनसंख्या कृषि पर निर्भर है।
(ii) कृषि राष्ट्रीय आय में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
(iii) उद्योगों को आवश्यक कच्चा माल उपलब्ध कराती है।
(iv) देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
(v) कृषि उत्पादों के निर्यात से विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।
(vi) ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत है।
2. भारतीय कृषि की विविधता को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर ⇒
भारत एक विशाल देश है, जहाँ जलवायु, मिट्टी, वर्षा, स्थलाकृति तथा प्राकृतिक परिस्थितियों में अत्यधिक विविधता पाई जाती है। यही कारण है कि देश के विभिन्न भागों में अलग-अलग प्रकार की कृषि तथा विभिन्न फसलों की खेती की जाती है। कहीं धान की खेती अधिक होती है तो कहीं गेहूँ, कपास, गन्ना, चाय या कॉफी का उत्पादन प्रमुख होता है।
भारतीय कृषि की विविधता केवल प्राकृतिक परिस्थितियों पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि सिंचाई की सुविधा, कृषि तकनीक, किसानों की आर्थिक स्थिति तथा बाजार की उपलब्धता भी इसे प्रभावित करती है।
भारतीय कृषि की विविधता को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं—
(i) वर्षा की मात्रा – अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में धान तथा कम वर्षा वाले क्षेत्रों में बाजरा एवं ज्वार की खेती होती है।
(ii) मिट्टी का प्रकार – काली मिट्टी में कपास, जलोढ़ मिट्टी में धान एवं गेहूँ तथा लाल मिट्टी में मोटे अनाज उगाए जाते हैं।
(iii) जलवायु – तापमान एवं आर्द्रता के अनुसार विभिन्न फसलों का उत्पादन किया जाता है।
(iv) सिंचाई की सुविधा – जहाँ सिंचाई उपलब्ध है वहाँ अधिक उत्पादन एवं गहन कृषि संभव होती है।
(v) कृषि तकनीक – उन्नत बीज, उर्वरक एवं आधुनिक मशीनों के प्रयोग से कृषि उत्पादन बढ़ता है।
(vi) बाजार एवं परिवहन – बाजार की उपलब्धता के अनुसार किसान व्यावसायिक फसलों का चयन करते हैं.
3. कृषि को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ क्यों कहा जाता है?
उत्तर ⇒
भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। देश की बड़ी आबादी कृषि एवं इससे संबंधित कार्यों पर निर्भर रहती है। कृषि न केवल लोगों को भोजन उपलब्ध कराती है, बल्कि वस्त्र उद्योग, चीनी उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, जूट उद्योग तथा कपड़ा उद्योग जैसे अनेक उद्योगों को आवश्यक कच्चा माल भी प्रदान करती है।
कृषि के माध्यम से लाखों लोगों को रोजगार प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त चाय, कॉफी, मसाले, चावल, कपास एवं अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात से देश को विदेशी मुद्रा भी प्राप्त होती है। इसलिए कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास का आधार मानी जाती है।
कृषि को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—
(i) देश की बड़ी आबादी को रोजगार प्रदान करती है।
(ii) राष्ट्रीय आय में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
(iii) उद्योगों के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराती है।
(iv) खाद्यान्न उत्पादन का प्रमुख स्रोत है।
(v) विदेशी मुद्रा अर्जित करने में सहायता करती है।
(vi) ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाती है।
4. भारतीय कृषि की निम्न उत्पादकता के प्रमुख कारण लिखिए।
उत्तर ⇒
भारत में कृषि का महत्व बहुत अधिक होने के बावजूद कई क्षेत्रों में कृषि की उत्पादकता अपेक्षाकृत कम है। इसका मुख्य कारण आधुनिक कृषि तकनीकों का सीमित उपयोग, मानसूनी वर्षा पर अत्यधिक निर्भरता तथा छोटे एवं बिखरे हुए खेत हैं। इसके अतिरिक्त अनेक किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे उन्नत बीज, सिंचाई एवं आधुनिक उपकरणों का पर्याप्त उपयोग नहीं कर पाते।
यदि आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जाए तथा सिंचाई एवं कृषि शिक्षा का विस्तार हो, तो कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।
भारतीय कृषि की निम्न उत्पादकता के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—
(i) परंपरागत कृषि पद्धतियों का अधिक उपयोग।
(ii) मानसूनी वर्षा पर अत्यधिक निर्भरता।
(iii) आधुनिक कृषि तकनीकों का सीमित प्रयोग।
(iv) उन्नत बीज एवं उर्वरकों का कम उपयोग।
(v) छोटे एवं बिखरे हुए कृषि जोत।
(vi) किसानों की आर्थिक समस्याएँ।
(vii) पर्याप्त सिंचाई सुविधाओं का अभाव।
5. भारतीय कृषि की दो सबसे बड़ी समस्याएँ लिखिए।
उत्तर ⇒
भारतीय कृषि के सामने अनेक चुनौतियाँ हैं, लेकिन इनमें दो समस्याएँ सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। पहली समस्या आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों का सभी क्षेत्रों तक पर्याप्त विस्तार न होना तथा दूसरी समस्या प्रति हेक्टेयर उत्पादन का अपेक्षाकृत कम होना है। इन समस्याओं के कारण कृषि से किसानों को अपेक्षित आय प्राप्त नहीं हो पाती तथा देश की कृषि क्षमता का पूरा उपयोग भी नहीं हो पाता।
इन समस्याओं के समाधान के लिए आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत बीज, सिंचाई सुविधाओं, कृषि ऋण तथा किसानों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराना आवश्यक है।
भारतीय कृषि की प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं—
(i) आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों का सीमित प्रसार।
(ii) प्रति हेक्टेयर कृषि उत्पादन कम होना।
(iii) मानसूनी वर्षा पर अत्यधिक निर्भरता।
(iv) सिंचाई सुविधाओं की कमी।
(v) छोटे एवं बिखरे हुए खेत।
(vi) किसानों की आर्थिक एवं तकनीकी समस्याएँ।
6. प्रारंभिक जीविका कृषि (Primitive Subsistence Farming) किसे कहते हैं?
उत्तर ⇒
जिस कृषि पद्धति में किसान अपने तथा अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए सीमित मात्रा में फसल का उत्पादन करता है, उसे प्रारंभिक जीविका कृषि (Primitive Subsistence Farming) कहते हैं। यह कृषि मुख्य रूप से परंपरागत उपकरणों जैसे हल, कुदाल, फावड़ा तथा बैलों की सहायता से की जाती है। इस प्रकार की कृषि में आधुनिक मशीनों, उन्नत बीजों एवं रासायनिक उर्वरकों का बहुत कम उपयोग किया जाता है।
इस कृषि का उद्देश्य बाजार में फसल बेचना नहीं, बल्कि परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति करना होता है। भारत के अनेक आदिवासी एवं पर्वतीय क्षेत्रों में आज भी इस प्रकार की कृषि देखने को मिलती है।
प्रारंभिक जीविका कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
(i) उत्पादन केवल परिवार की आवश्यकताओं के लिए किया जाता है।
(ii) परंपरागत कृषि उपकरणों का उपयोग होता है।
(iii) आधुनिक तकनीकों का प्रयोग बहुत कम होता है।
(iv) प्रति हेक्टेयर उत्पादन अपेक्षाकृत कम होता है।
(v) अतिरिक्त उत्पादन बाजार में बहुत कम बेचा जाता है।
7. जीवन निर्वाह कृषि (Subsistence Farming) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर ⇒
जीवन निर्वाह कृषि वह कृषि है, जिसमें किसान मुख्य रूप से अपने परिवार के भोजन एवं दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए खेती करता है। इस प्रकार की कृषि में उत्पादन का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं होता, बल्कि परिवार का जीवन-यापन करना होता है। यदि कुछ अतिरिक्त उत्पादन होता भी है, तो उसे स्थानीय बाजार में बेच दिया जाता है।
इस कृषि में सामान्यतः छोटे खेत, पारंपरिक कृषि उपकरण, सीमित सिंचाई तथा कम पूँजी का उपयोग किया जाता है। विकासशील देशों में इस प्रकार की कृषि अधिक प्रचलित है।
जीवन निर्वाह कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
(i) उत्पादन परिवार की आवश्यकताओं के लिए किया जाता है।
(ii) छोटे एवं बिखरे हुए खेत होते हैं।
(iii) आधुनिक कृषि तकनीकों का सीमित उपयोग होता है।
(iv) उत्पादन अपेक्षाकृत कम होता है।
(v) अतिरिक्त उत्पादन बहुत कम मात्रा में बाजार में बेचा जाता है।
8. भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का क्या महत्व है?
उत्तर ⇒
भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत की बड़ी आबादी प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। कृषि देश को खाद्यान्न उपलब्ध कराती है तथा अनेक उद्योगों के लिए आवश्यक कच्चा माल भी प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त कृषि निर्यात के माध्यम से विदेशी मुद्रा अर्जित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
भारत के आर्थिक विकास, ग्रामीण रोजगार तथा खाद्य सुरक्षा के लिए कृषि सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। यही कारण है कि कृषि को भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार कहा जाता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्व निम्नलिखित है—
(i) देश को खाद्यान्न उपलब्ध कराती है।
(ii) लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करती है।
(iii) उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध कराती है।
(iv) राष्ट्रीय आय में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
(v) विदेशी मुद्रा अर्जित करने में सहायता करती है।
(vi) ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाती है।
9. भारत में गहन कृषि (Intensive Farming) के लिए कौन-कौन सी सुविधाएँ उपलब्ध हैं?
उत्तर ⇒
भारत में बढ़ती जनसंख्या तथा सीमित कृषि योग्य भूमि के कारण गहन कृषि (Intensive Farming) का विकास हुआ है। गहन कृषि में कम भूमि पर अधिक उत्पादन प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है। इसके लिए सिंचाई, उन्नत बीज, उर्वरक, आधुनिक मशीनें तथा उपजाऊ मिट्टी जैसी सुविधाएँ आवश्यक होती हैं।
भारत के मैदानी क्षेत्रों में जलोढ़ मिट्टी अत्यंत उपजाऊ है। हिमालय से निकलने वाली नदियों के कारण सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है। इन सुविधाओं के कारण देश के अनेक भागों में गहन कृषि सफलतापूर्वक की जाती है।
गहन कृषि के लिए उपलब्ध प्रमुख सुविधाएँ निम्नलिखित हैं—
(i) उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी।
(ii) सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था।
(iii) उन्नत बीज एवं रासायनिक उर्वरक।
(iv) आधुनिक कृषि मशीनें।
(v) अनुकूल जलवायु।
(vi) कृषि अनुसंधान एवं वैज्ञानिक तकनीक।
10. कृषि कार्य का मुख्य उद्देश्य क्या है? समझाइए।
उत्तर ⇒
कृषि का मुख्य उद्देश्य मनुष्य एवं पशुओं के लिए भोजन उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही कृषि उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध कराती है, रोजगार के अवसर प्रदान करती है तथा देश की आर्थिक उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कृषि से प्राप्त उत्पादों का निर्यात करके विदेशी मुद्रा भी अर्जित की जाती है।
आज कृषि केवल भोजन उत्पादन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह देश के औद्योगिक विकास, व्यापार, रोजगार तथा खाद्य सुरक्षा का भी प्रमुख आधार बन चुकी है।
कृषि कार्य के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—
(i) खाद्यान्न उत्पादन करना।
(ii) उद्योगों के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराना।
(iii) लोगों को रोजगार प्रदान करना।
(iv) राष्ट्रीय आय में वृद्धि करना।
(v) कृषि उत्पादों के निर्यात से विदेशी मुद्रा अर्जित करना।
(vi) देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना।
11. व्यापारिक कृषि (Commercial Farming) एवं निर्वाह कृषि (Subsistence Farming) में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒
कृषि को उद्देश्य एवं उत्पादन के आधार पर विभिन्न प्रकारों में बाँटा जाता है। व्यापारिक कृषि का उद्देश्य अधिक उत्पादन करके बाजार में फसल बेचकर लाभ कमाना होता है, जबकि निर्वाह कृषि का उद्देश्य किसान एवं उसके परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति करना होता है। व्यापारिक कृषि में आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज, रासायनिक उर्वरक तथा सिंचाई का अधिक उपयोग किया जाता है, जबकि निर्वाह कृषि में परंपरागत साधनों का प्रयोग अधिक होता है।
| व्यापारिक कृषि | निर्वाह कृषि |
|---|---|
| (i) लाभ कमाने के उद्देश्य से की जाती है। | (i) परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए की जाती है। |
| (ii) आधुनिक तकनीक का अधिक उपयोग होता है। | (ii) परंपरागत कृषि पद्धति अपनाई जाती है। |
| (iii) उत्पादन अधिक होता है। | (iii) उत्पादन अपेक्षाकृत कम होता है। |
| (iv) उन्नत बीज, उर्वरक एवं मशीनों का उपयोग होता है। | (iv) आधुनिक साधनों का सीमित उपयोग होता है। |
| (v) फसल बाजार में बेची जाती है। | (v) अधिकांश उत्पादन परिवार द्वारा उपयोग किया जाता है। |
12. गहन कृषि (Intensive Farming) की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर ⇒
गहन कृषि (Intensive Farming) वह कृषि पद्धति है, जिसमें कम भूमि पर अधिक उत्पादन प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है। बढ़ती जनसंख्या तथा सीमित कृषि योग्य भूमि वाले देशों में यह कृषि पद्धति अधिक प्रचलित है। इसमें उन्नत बीज, सिंचाई, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक तथा आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग किया जाता है।
भारत के पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश तथा अन्य सिंचित क्षेत्रों में गहन कृषि का व्यापक विकास हुआ है। इस कृषि पद्धति से प्रति हेक्टेयर उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
गहन कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
(i) कम भूमि पर अधिक उत्पादन प्राप्त किया जाता है।
(ii) उन्नत बीज एवं आधुनिक तकनीक का उपयोग होता है।
(iii) सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था रहती है।
(iv) रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशकों का प्रयोग किया जाता है।
(v) प्रति हेक्टेयर उत्पादन अधिक होता है।
(vi) श्रम एवं पूँजी का अधिक निवेश किया जाता है।
13. शुद्ध राष्ट्रीय आय में कृषि उत्पादों के योगदान की चर्चा कीजिए।
उत्तर ⇒
भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। कृषि देश की शुद्ध राष्ट्रीय आय (Net National Income) में उल्लेखनीय योगदान देती है। इसके माध्यम से देश को खाद्यान्न प्राप्त होता है, उद्योगों को कच्चा माल मिलता है तथा लाखों लोगों को रोजगार उपलब्ध होता है। कृषि उत्पादों के निर्यात से विदेशी मुद्रा अर्जित होती है, जिससे देश के आर्थिक विकास को गति मिलती है।
चाय, कॉफी, मसाले, चावल, कपास, जूट, गन्ना तथा अन्य कृषि उत्पादों का निर्यात भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कृषि उत्पादों का राष्ट्रीय आय में योगदान निम्नलिखित है—
(i) राष्ट्रीय आय में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
(ii) विदेशी मुद्रा अर्जित करने में सहायता करता है।
(iii) उद्योगों के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराता है।
(iv) ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराता है।
(v) देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
14. हरित क्रांति (Green Revolution) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर ⇒
भारत में वर्ष 1960 के दशक में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्नत बीज, रासायनिक उर्वरकों, सिंचाई सुविधाओं तथा आधुनिक कृषि तकनीकों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया। इस परिवर्तन को हरित क्रांति (Green Revolution) कहा जाता है। हरित क्रांति का सबसे अधिक प्रभाव पंजाब, हरियाणा एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में देखा गया।
हरित क्रांति के कारण विशेष रूप से गेहूँ एवं धान के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और भारत खाद्यान्न उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने लगा। भारत में हरित क्रांति के जनक डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन माने जाते हैं।
हरित क्रांति के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—
(i) खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि हुई।
(ii) कृषि में आधुनिक तकनीकों का विकास हुआ।
(iii) किसानों की आय में वृद्धि हुई।
(iv) खाद्यान्न के आयात पर निर्भरता कम हुई।
(v) देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बना।
15. भारत विश्व का एक अग्रणी चाय निर्यातक देश क्यों है?
उत्तर ⇒
भारत विश्व के प्रमुख चाय उत्पादक एवं निर्यातक देशों में से एक है। भारत के असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु तथा केरल जैसे राज्यों में चाय उत्पादन के लिए अनुकूल जलवायु, पर्याप्त वर्षा, उपयुक्त तापमान तथा पहाड़ी ढालें उपलब्ध हैं। इन प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण यहाँ उच्च गुणवत्ता वाली चाय का उत्पादन होता है।
भारतीय चाय अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता, स्वाद एवं सुगंध के कारण विश्व बाजार में अत्यधिक लोकप्रिय है। यही कारण है कि भारत बड़ी मात्रा में चाय का निर्यात करके विदेशी मुद्रा अर्जित करता है।
भारत के अग्रणी चाय निर्यातक होने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—
(i) चाय उत्पादन के लिए अनुकूल जलवायु उपलब्ध है।
(ii) उच्च गुणवत्ता वाली चाय का उत्पादन होता है।
(iii) विश्व बाजार में भारतीय चाय की अधिक माँग है।
(iv) पर्याप्त मात्रा में चाय का उत्पादन किया जाता है।
(v) चाय निर्यात से देश को विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।
16. शुष्क क्षेत्र (Dry Region) से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर ⇒
जिन क्षेत्रों में वार्षिक वर्षा 75 सेंटीमीटर से कम होती है, उन्हें शुष्क क्षेत्र (Dry Region) कहा जाता है। इन क्षेत्रों में वर्षा बहुत कम तथा अनियमित होती है, जिसके कारण कृषि करना कठिन होता है। जल की कमी के कारण यहाँ सिंचाई के विशेष साधनों की आवश्यकता पड़ती है। भारत के राजस्थान के पश्चिमी भाग, गुजरात के कुछ क्षेत्र तथा दक्कन के कुछ भाग शुष्क क्षेत्रों के अंतर्गत आते हैं।
इन क्षेत्रों में कम पानी में उगने वाली फसलें जैसे बाजरा, ज्वार, चना तथा दालों की खेती अधिक की जाती है। शुष्क क्षेत्रों में जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन का विशेष महत्व होता है।
शुष्क क्षेत्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
(i) वार्षिक वर्षा 75 सेमी से कम होती है।
(ii) जल की कमी बनी रहती है।
(iii) सिंचाई पर अधिक निर्भरता होती है।
(iv) सूखा पड़ने की संभावना अधिक रहती है।
(v) कम पानी वाली फसलें उगाई जाती हैं।
17. जल दुर्लभता (Water Scarcity) क्या है? इसके प्रमुख कारण लिखिए।
उत्तर ⇒
जब किसी क्षेत्र में उपलब्ध जल की मात्रा वहाँ की आवश्यकताओं की तुलना में कम हो जाती है, तो इस स्थिति को जल दुर्लभता (Water Scarcity) कहते हैं। वर्तमान समय में बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिकीकरण, शहरीकरण तथा भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण जल दुर्लभता एक गंभीर समस्या बन गई है।
जल की कमी केवल कम वर्षा के कारण ही नहीं होती, बल्कि जल का अनुचित उपयोग, प्रदूषण तथा असमान वितरण भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए जल संरक्षण एवं जल का विवेकपूर्ण उपयोग अत्यंत आवश्यक है।
जल दुर्लभता के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—
(i) भूजल का अत्यधिक दोहन।
(ii) जल का अनुचित प्रबंधन।
(iii) जनसंख्या में तीव्र वृद्धि।
(iv) औद्योगिकीकरण एवं शहरीकरण।
(v) जल स्रोतों का प्रदूषण।
(vi) वर्षा का असमान वितरण।
18. नगदी फसल (Cash Crop) एवं रोपण फसल (Plantation Crop) में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒
नगदी फसल एवं रोपण फसल दोनों ही व्यापारिक कृषि के अंतर्गत आती हैं, लेकिन इनके उत्पादन की पद्धति एवं उद्देश्य में अंतर होता है। नगदी फसल मुख्य रूप से अधिक लाभ कमाने के उद्देश्य से उगाई जाती है, जबकि रोपण फसल बड़े-बड़े बागानों (Plantations) में आधुनिक तकनीकों एवं संगठित प्रबंधन के साथ उगाई जाती है।
| नगदी फसल | रोपण फसल |
|---|---|
| (i) लाभ कमाने के उद्देश्य से उगाई जाती है। | (i) बड़े-बड़े बागानों में उगाई जाती है। |
| (ii) छोटे या बड़े दोनों खेतों में उगाई जा सकती है। | (ii) बड़े फार्मों एवं बागानों में उत्पादन होता है। |
| (iii) उदाहरण – तंबाकू, मसाले, गन्ना। | (iii) उदाहरण – चाय, कॉफी, रबर। |
| (iv) उत्पादन बाजार में बिक्री के लिए किया जाता है। | (iv) आधुनिक प्रबंधन एवं मजदूरों की सहायता से उत्पादन किया जाता है। |
19. मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताएँ क्या हैं?
उत्तर ⇒
मनुष्य के जीवन एवं अस्तित्व के लिए जिन आवश्यकताओं की पूर्ति अनिवार्य होती है, उन्हें मूलभूत आवश्यकताएँ (Basic Needs) कहा जाता है। इनके बिना मानव जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। प्रत्येक व्यक्ति को स्वस्थ एवं सम्मानजनक जीवन जीने के लिए भोजन, वस्त्र एवं आवास की आवश्यकता होती है।
वर्तमान समय में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल तथा स्वच्छ वातावरण को भी जीवन की महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में शामिल किया जाता है। किसी भी राष्ट्र के विकास का स्तर इस बात से भी आँका जाता है कि वहाँ के नागरिकों की मूलभूत आवश्यकताएँ किस सीमा तक पूरी हो रही हैं।
मनुष्य की प्रमुख मूलभूत आवश्यकताएँ निम्नलिखित हैं—
(i) भोजन (रोटी)
(ii) वस्त्र (कपड़ा)
(iii) आवास (मकान)
(iv) शिक्षा
(v) स्वास्थ्य सुविधाएँ
(vi) स्वच्छ पेयजल एवं स्वच्छ पर्यावरण
20. भारतीय लोगों की आजीविका का मुख्य आधार क्या है?
उत्तर ⇒
भारत की अधिकांश ग्रामीण जनसंख्या की आजीविका का मुख्य आधार कृषि है। देश के करोड़ों लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती, पशुपालन, डेयरी, बागवानी, मत्स्य पालन तथा कृषि से जुड़े अन्य व्यवसायों पर निर्भर हैं। कृषि केवल रोजगार का साधन ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारशिला भी है।
भारत में कृषि से खाद्यान्न, फल, सब्जियाँ, तिलहन, दलहन, गन्ना, कपास, जूट तथा अन्य कृषि उत्पाद प्राप्त होते हैं। कृषि आधारित उद्योगों को भी आवश्यक कच्चा माल इसी क्षेत्र से मिलता है। इसलिए कृषि भारतीय लोगों की आजीविका का सबसे महत्वपूर्ण साधन मानी जाती है।
भारतीय लोगों की आजीविका में कृषि का महत्व निम्नलिखित है—
(i) अधिकांश लोगों को रोजगार प्रदान करती है।
(ii) ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है।
(iii) खाद्यान्न उत्पादन का मुख्य स्रोत है।
(iv) कृषि आधारित उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध कराती है।
(v) राष्ट्रीय आय एवं विदेशी मुद्रा अर्जित करने में योगदान देती है।
21. स्वतंत्रता के बाद पंचवर्षीय योजनाओं में कृषि के विकास के लिए कौन-कौन से महत्त्वपूर्ण कदम उठाए गए?
उत्तर ⇒
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत सरकार ने कृषि के विकास को विशेष महत्व दिया। देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने तथा किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से अनेक महत्वपूर्ण कार्यक्रम प्रारम्भ किए गए। आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा दिया गया, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किया गया तथा किसानों को उन्नत बीज, उर्वरक एवं ऋण उपलब्ध कराए गए।
इन योजनाओं के परिणामस्वरूप कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई तथा भारत खाद्यान्न उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ा।
कृषि विकास के लिए उठाए गए प्रमुख कदम निम्नलिखित हैं—
(i) उन्नत एवं उच्च उत्पादकता वाले बीजों का विकास।
(ii) सिंचाई सुविधाओं का विस्तार।
(iii) रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के उपयोग को बढ़ावा।
(iv) हरित क्रांति कार्यक्रम का सफल संचालन।
(v) किसानों के लिए कृषि ऋण एवं किसान क्रेडिट कार्ड की व्यवस्था।
(vi) आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग को प्रोत्साहन।
22. भारत में उगाई जाने वाली प्रमुख खाद्य एवं व्यावसायिक फसलों के नाम लिखिए।
उत्तर ⇒
भारत कृषि प्रधान देश है, जहाँ विभिन्न जलवायु एवं मिट्टी के कारण अनेक प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं। इन फसलों को मुख्य रूप से खाद्य फसलें तथा व्यावसायिक (नकदी) फसलें दो वर्गों में बाँटा जाता है। खाद्य फसलों का उत्पादन भोजन की आवश्यकता पूरी करने के लिए किया जाता है, जबकि व्यावसायिक फसलें उद्योगों एवं व्यापार के उद्देश्य से उगाई जाती हैं।
प्रमुख खाद्य फसलें—
(i) धान
(ii) गेहूँ
(iii) मक्का
(iv) ज्वार
(v) बाजरा
(vi) रागी
(vii) दलहन
(viii) तिलहन
प्रमुख व्यावसायिक फसलें—
(i) गन्ना
(ii) चाय
(iii) कॉफी
(iv) कपास
(v) जूट
(vi) रबर
(vii) तंबाकू
(viii) मसाले
23. रबी फसलें (Rabi Crops) क्या हैं? चार उदाहरण दीजिए।
उत्तर ⇒
जिन फसलों की बुवाई शीत ऋतु में अक्टूबर से दिसंबर के बीच की जाती है तथा जिनकी कटाई ग्रीष्म ऋतु में मार्च से अप्रैल या अप्रैल से जून के बीच होती है, उन्हें रबी फसलें (Rabi Crops) कहा जाता है। इन फसलों के लिए ठंडी जलवायु तथा पकने के समय शुष्क एवं गर्म मौसम उपयुक्त होता है।
उत्तर भारत में रबी फसलों के उत्पादन में सिंचाई की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। रबी फसलें देश के खाद्यान्न उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।
रबी फसलों के प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं—
(i) गेहूँ
(ii) जौ
(iii) चना
(iv) मटर
(v) सरसों
(vi) अलसी
24. फसल प्रारूप (Cropping Pattern) किसे कहते हैं?
उत्तर ⇒
किसी क्षेत्र में वर्षभर विभिन्न मौसमों के अनुसार अलग-अलग फसलों को उगाने की व्यवस्था को फसल प्रारूप (Cropping Pattern) कहा जाता है। भारत में जलवायु, वर्षा तथा तापमान के आधार पर मुख्य रूप से तीन प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं। प्रत्येक फसल का अपना निश्चित बुवाई एवं कटाई का समय होता है।
फसल प्रारूप के माध्यम से भूमि का उचित उपयोग किया जाता है तथा कृषि उत्पादन में वृद्धि होती है।
भारत की प्रमुख फसलें निम्नलिखित हैं—
(i) खरीफ फसल – वर्षा ऋतु में बोई जाती है। (धान, मक्का, बाजरा)
(ii) रबी फसल – शीत ऋतु में बोई जाती है। (गेहूँ, चना, सरसों)
(iii) जायद फसल – खरीफ एवं रबी के बीच ग्रीष्म ऋतु में उगाई जाती है। (खीरा, ककड़ी, तरबूज)
25. अजैव संसाधन (Abiotic Resources) किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर ⇒
वे प्राकृतिक संसाधन जो निर्जीव (Non-living) पदार्थों से बने होते हैं तथा जिनमें जीवन नहीं होता, उन्हें अजैव संसाधन (Abiotic Resources) कहा जाता है। ये संसाधन प्रकृति में मानव जीवन एवं अन्य जीवों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। पृथ्वी पर उपलब्ध जल, वायु, चट्टानें, मिट्टी तथा खनिज इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
अजैव संसाधन कृषि, उद्योग, ऊर्जा उत्पादन तथा निर्माण कार्यों में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं। इनके संरक्षण एवं संतुलित उपयोग से ही सतत विकास संभव है।
अजैव संसाधनों के प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं—
(i) जल
(ii) वायु
(iii) मिट्टी
(iv) चट्टानें
(v) खनिज
(vi) सूर्य का प्रकाश
(vii) ताप एवं जलवायु
अजैव संसाधनों का महत्व—
(i) कृषि के लिए आधार प्रदान करते हैं।
(ii) उद्योगों के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराते हैं।
(iii) ऊर्जा उत्पादन में उपयोगी हैं।
(iv) मानव जीवन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
26. बफर स्टॉक (Buffer Stock) क्या है?
उत्तर ⇒
बफर स्टॉक (Buffer Stock) वह खाद्यान्न भंडार है, जिसे भारत सरकार भविष्य की आवश्यकताओं, प्राकृतिक आपदाओं तथा गरीब लोगों को सस्ती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सुरक्षित रखती है। यह भंडारण मुख्य रूप से भारतीय खाद्य निगम (Food Corporation of India – FCI) द्वारा किया जाता है। सरकार किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूँ एवं धान जैसे खाद्यान्न खरीदकर गोदामों में सुरक्षित रखती है।
जब देश के किसी भाग में सूखा, बाढ़, अकाल या अन्य प्राकृतिक आपदा आती है अथवा बाजार में खाद्यान्न की कमी हो जाती है, तब इसी बफर स्टॉक का उपयोग किया जाता है। इससे खाद्यान्न की उपलब्धता बनी रहती है तथा कीमतों को नियंत्रित करने में भी सहायता मिलती है।
बफर स्टॉक के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—
(i) खाद्यान्न का सुरक्षित भंडारण करना।
(ii) प्राकृतिक आपदाओं के समय खाद्यान्न उपलब्ध कराना।
(iii) सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए अनाज उपलब्ध कराना।
(iv) बाजार में खाद्यान्न की कीमतों को नियंत्रित करना।
(v) किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद सुनिश्चित करना।
27. ऑपरेशन फ्लड (Operation Flood) क्या है?
उत्तर ⇒
ऑपरेशन फ्लड (Operation Flood) भारत में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए चलाया गया एक राष्ट्रीय कार्यक्रम था। इसकी शुरुआत वर्ष 1970 में की गई। इस योजना का मुख्य उद्देश्य दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करना, दुग्ध उत्पादकों की आय बढ़ाना तथा देश में दूध की उपलब्धता सुनिश्चित करना था। इस कार्यक्रम के माध्यम से दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया तथा दूध के संग्रहण, प्रसंस्करण एवं विपणन की आधुनिक व्यवस्था विकसित की गई।
इस कार्यक्रम के कारण भारत विश्व के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक देशों में शामिल हो गया। इस अभियान के प्रमुख सूत्रधार डॉ. वर्गीज कुरियन थे, जिन्हें भारत में श्वेत क्रांति का जनक कहा जाता है।
ऑपरेशन फ्लड के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—
(i) दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करना।
(ii) दुग्ध उत्पादकों की आय बढ़ाना।
(iii) सहकारी दुग्ध समितियों का विकास करना।
(iv) दूध की उपलब्धता बढ़ाना।
(v) ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाना।
28. श्वेत क्रांति (White Revolution) क्या है?
उत्तर ⇒
भारत में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने तथा दूध के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के उद्देश्य से चलाए गए आंदोलन को श्वेत क्रांति (White Revolution) कहा जाता है। यह क्रांति मुख्य रूप से ऑपरेशन फ्लड के माध्यम से सफल हुई। इसके कारण दूध के उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई तथा भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बन गया।
श्वेत क्रांति ने ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों किसानों एवं पशुपालकों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। दुग्ध सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त होने लगा।
श्वेत क्रांति के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—
(i) दुग्ध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
(ii) किसानों एवं पशुपालकों की आय बढ़ी।
(iii) ग्रामीण रोजगार के अवसर बढ़े।
(iv) दूध की उपलब्धता में सुधार हुआ।
(v) भारत विश्व का अग्रणी दुग्ध उत्पादक देश बना।
29. भारत में उपजाई जाने वाली दो खाद्य, दो नकदी एवं दो रेशेदार फसलों के नाम लिखिए।
उत्तर ⇒
भारत की कृषि विविधतापूर्ण है। यहाँ विभिन्न प्रकार की खाद्य, नकदी एवं रेशेदार फसलें उगाई जाती हैं। खाद्य फसलें भोजन की आवश्यकता पूरी करती हैं, नकदी फसलें व्यापार एवं उद्योगों के लिए उगाई जाती हैं तथा रेशेदार फसलों से वस्त्र उद्योग के लिए कच्चा माल प्राप्त होता है।
दो प्रमुख खाद्य फसलें—
(i) धान
(ii) गेहूँ
दो प्रमुख नकदी फसलें—
(i) चाय
(ii) कॉफी
दो प्रमुख रेशेदार फसलें—
(i) कपास
(ii) जूट
इन फसलों का महत्व—
(i) खाद्य फसलें भोजन उपलब्ध कराती हैं।
(ii) नकदी फसलें किसानों की आय बढ़ाती हैं।
(iii) रेशेदार फसलें वस्त्र उद्योग का आधार हैं।
(iv) कृषि उत्पादों से विदेशी मुद्रा अर्जित होती है।
30. जायद फसल (Zaid Crop) किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर ⇒
जायद फसल (Zaid Crop) वे फसलें हैं, जिन्हें रबी एवं खरीफ फसलों के बीच ग्रीष्म ऋतु में कम अवधि के लिए उगाया जाता है। इनकी बुवाई सामान्यतः मार्च से अप्रैल के बीच होती है तथा कटाई जून तक कर ली जाती है। जायद फसलों की खेती मुख्य रूप से सिंचाई पर निर्भर होती है, क्योंकि इस समय वर्षा नहीं होती।
इन फसलों का उत्पादन किसानों को अतिरिक्त आय प्रदान करता है तथा भूमि का वर्षभर उपयोग सुनिश्चित करता है। जायद फसलों की अवधि कम होने के कारण ये शीघ्र तैयार हो जाती हैं।
जायद फसलों के प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं—
(i) खीरा
(ii) ककड़ी
(iii) तरबूज
(iv) खरबूजा
(v) लौकी
(vi) सब्जियों की अनेक फसलें
जायद फसलों का महत्व—
(i) किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होती है।
(ii) भूमि का बेहतर उपयोग होता है।
(iii) गर्मियों में ताजी सब्जियाँ एवं फल उपलब्ध होते हैं।
(iv) कृषि उत्पादन में वृद्धि होती है।
31. धान, गेहूँ, गन्ना, चाय, कपास एवं जूट के उत्पादन करने वाले दो-दो प्रमुख राज्यों के नाम लिखिए।
उत्तर ⇒
भारत में विभिन्न प्रकार की जलवायु, मिट्टी एवं वर्षा की परिस्थितियाँ पाई जाती हैं। इसलिए अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग फसलों का उत्पादन अधिक मात्रा में होता है। प्रत्येक फसल के लिए विशेष प्रकार की जलवायु एवं मिट्टी की आवश्यकता होती है। इसी कारण कुछ राज्य विशेष फसलों के उत्पादन में अग्रणी माने जाते हैं।
प्रमुख फसलें एवं उनके उत्पादन करने वाले राज्य निम्नलिखित हैं—
| फसल | दो प्रमुख उत्पादक राज्य |
|---|---|
| धान | पश्चिम बंगाल, बिहार |
| गेहूँ | पंजाब, उत्तर प्रदेश |
| गन्ना | उत्तर प्रदेश, पंजाब |
| चाय | असम, पश्चिम बंगाल |
| कपास | महाराष्ट्र, गुजरात |
| जूट | पश्चिम बंगाल, बिहार |
इन राज्यों में अनुकूल जलवायु, उपजाऊ मिट्टी, सिंचाई की सुविधा तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के कारण इन फसलों का अधिक उत्पादन होता है।
32. खाद्य सुरक्षा (Food Security) किसे कहते हैं?
उत्तर ⇒
जब प्रत्येक व्यक्ति को हर समय पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित, पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उचित मूल्य पर उपलब्ध हो तथा वह स्वस्थ जीवन जी सके, तो इसे खाद्य सुरक्षा (Food Security) कहते हैं। खाद्य सुरक्षा का उद्देश्य केवल भोजन उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को संतुलित एवं पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना भी है।
भारत सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), बफर स्टॉक तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम जैसी योजनाओं के माध्यम से गरीब एवं जरूरतमंद लोगों तक खाद्यान्न पहुँचाती है।
खाद्य सुरक्षा का महत्व निम्नलिखित है—
(i) प्रत्येक व्यक्ति को पर्याप्त भोजन उपलब्ध होता है।
(ii) कुपोषण एवं भूखमरी की समस्या कम होती है।
(iii) गरीब लोगों को सस्ती दर पर खाद्यान्न मिलता है।
(iv) आपदा के समय खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा सकता है।
(v) देश में सामाजिक एवं आर्थिक स्थिरता बनी रहती है।
33. भारत कपास का आयातक एवं निर्यातक दोनों क्यों है?
उत्तर ⇒
भारत विश्व के प्रमुख कपास उत्पादक देशों में से एक है। यहाँ बड़ी मात्रा में कपास का उत्पादन होता है, इसलिए भारत कपास का निर्यात भी करता है। लेकिन भारतीय वस्त्र उद्योग में उच्च गुणवत्ता (Long Staple Cotton) वाली कपास की भी आवश्यकता होती है, जिसका उत्पादन देश में सीमित मात्रा में होता है। इसलिए ऐसी उच्च गुणवत्ता वाली कपास अन्य देशों से आयात करनी पड़ती है।
इसी कारण भारत एक ओर कपास का निर्यात करता है, तो दूसरी ओर उद्योगों की आवश्यकता पूरी करने के लिए कपास का आयात भी करता है।
इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—
(i) भारत में कपास का उत्पादन अधिक होता है।
(ii) अतिरिक्त कपास का निर्यात किया जाता है।
(iii) वस्त्र उद्योग के लिए उच्च गुणवत्ता वाली कपास की आवश्यकता होती है।
(iv) ऐसी कपास का देश में सीमित उत्पादन होता है।
(v) इसलिए भारत कपास का आयात एवं निर्यात दोनों करता है।
34. दक्षिण भारत में गन्ने की उपज उत्तर भारत की अपेक्षा अधिक क्यों होती है?
उत्तर ⇒
गन्ना एक उष्ण एवं उपोष्ण कटिबंधीय फसल है। इसके लिए लगभग 21°C से 27°C तापमान, पर्याप्त धूप, आर्द्र जलवायु तथा 75 से 100 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा उपयुक्त मानी जाती है। दक्षिण भारत में वर्षभर अपेक्षाकृत समान तापमान, अधिक आर्द्रता तथा लंबी वृद्धि अवधि उपलब्ध रहती है, जिससे गन्ने की फसल बेहतर विकसित होती है।
इसके विपरीत उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान तापमान कम हो जाता है, जिससे गन्ने की वृद्धि प्रभावित होती है।
दक्षिण भारत में अधिक उपज होने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—
(i) अनुकूल तापमान वर्षभर उपलब्ध रहता है।
(ii) जलवायु अधिक आर्द्र होती है।
(iii) फसल की वृद्धि अवधि अधिक होती है।
(iv) पर्याप्त सिंचाई एवं वर्षा उपलब्ध रहती है।
(v) उत्पादन की परिस्थितियाँ अधिक अनुकूल होती हैं।
35. दक्कन के पठार की काली मिट्टी में कपास की खेती अधिक क्यों होती है?
उत्तर ⇒
दक्कन के पठार में पाई जाने वाली काली मिट्टी (Regur Soil) कपास की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। यह मिट्टी ज्वालामुखीय चट्टानों से बनी होती है तथा इसमें नमी को लंबे समय तक बनाए रखने की क्षमता होती है। कपास की फसल को गहरी, उपजाऊ तथा नमी युक्त मिट्टी की आवश्यकता होती है, जो काली मिट्टी में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होती है।
इसके अतिरिक्त दक्कन क्षेत्र में पर्याप्त धूप, उपयुक्त तापमान तथा अनुकूल जलवायु भी कपास की अच्छी पैदावार में सहायक होती है।
काली मिट्टी में कपास की खेती अधिक होने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—
(i) मिट्टी में नमी बनाए रखने की क्षमता अधिक होती है।
(ii) यह गहरी एवं उपजाऊ होती है।
(iii) ज्वालामुखीय उत्पत्ति के कारण इसमें आवश्यक खनिज पाए जाते हैं।
(iv) पर्याप्त धूप एवं अनुकूल तापमान उपलब्ध रहता है।
(v) कपास की वृद्धि के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियाँ मिलती हैं.
36. वैश्विक प्रतिस्पर्धा (Global Competition) का सामना करने के लिए भारत को कौन-कौन से कदम उठाने चाहिए?
उत्तर ⇒
वर्तमान समय में वैश्वीकरण (Globalization) के कारण विश्व के सभी देशों के बीच व्यापार एवं कृषि क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारत को अपनी कृषि व्यवस्था को आधुनिक, वैज्ञानिक एवं प्रतिस्पर्धी बनाना आवश्यक है। यदि कृषि उत्पादन की गुणवत्ता एवं उत्पादकता में सुधार किया जाए, तो भारतीय कृषि उत्पाद विश्व बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं।
इसके लिए आधुनिक तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी, सिंचाई सुविधाओं, उन्नत बीज, कृषि अनुसंधान तथा बेहतर परिवहन व्यवस्था का विकास करना आवश्यक है। साथ ही किसानों को उचित मूल्य, ऋण एवं बाजार की सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाने चाहिए—
(i) आधुनिक कृषि तकनीकों का व्यापक उपयोग करना।
(ii) उच्च गुणवत्ता वाले बीज एवं जैव प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना।
(iii) सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना।
(iv) किसानों को सस्ती दर पर ऋण उपलब्ध कराना।
(v) सड़क, बिजली एवं परिवहन सुविधाओं का विकास करना।
(vi) राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार से किसानों को जोड़ना।
(vii) कृषि उत्पादों की गुणवत्ता एवं भंडारण व्यवस्था में सुधार करना।
(viii) किसानों को आधुनिक कृषि प्रशिक्षण प्रदान करना।