Class 10 Geography: संसाधन एवं विकास
Revise the NCERT Class 10 Geography chapter, संसाधन एवं विकास, with these concise and well-organised revision notes. JAC Exam Prep (jac.jharkhandexamprep.com) provides NCERT Class 10 Geography संसाधन एवं विकास Revision Notes based on the latest NCERT syllabus. Download the PDF below and revise the chapter for school examinations, CBSE board examinations, and competitive exams such as JEE and NEET.
Chapter Overview
| Class | 10 |
| Subject | Geography |
| Chapter Name | संसाधन एवं विकास |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
संसाधन एवं विकास Revision Notes
1. प्राकृतिक संसाधन (Natural Resources) क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर ⇒
प्रकृति द्वारा मनुष्य एवं अन्य सभी जीवों को बिना किसी मानवीय निर्माण के प्राप्त होने वाले पदार्थ, ऊर्जा स्रोत तथा प्राकृतिक साधनों को प्राकृतिक संसाधन (Natural Resources) कहा जाता है। ये संसाधन पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। मनुष्य अपनी दैनिक आवश्यकताओं जैसे भोजन, जल, आवास, वस्त्र, ऊर्जा, कृषि, उद्योग तथा परिवहन के लिए प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर रहता है।
प्राकृतिक संसाधनों का निर्माण प्रकृति द्वारा लाखों वर्षों में होता है। इनमें से कुछ संसाधन असीमित एवं नवीकरणीय होते हैं, जबकि कुछ सीमित एवं अनवीकरणीय होते हैं। इसलिए इनका विवेकपूर्ण उपयोग करना आवश्यक है, ताकि वर्तमान के साथ-साथ भविष्य की पीढ़ियाँ भी इनका लाभ उठा सकें।
प्राकृतिक संसाधनों के प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं—
(i) वायु (Air)
(ii) जल (Water)
(iii) मिट्टी (Soil)
(iv) वन (Forest)
(v) वन्य जीव (Wildlife)
(vi) खनिज (Minerals)
(vii) कोयला, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस
प्राकृतिक संसाधनों का महत्व—
(i) मानव जीवन की मूल आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं।
(ii) कृषि एवं उद्योगों का आधार हैं।
(iii) ऊर्जा के प्रमुख स्रोत हैं।
(iv) आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
(v) पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता बनाए रखते हैं।
2. प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन (Management of Natural Resources) क्या है?
उत्तर ⇒
प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक, संतुलित तथा योजनाबद्ध ढंग से उपयोग, संरक्षण एवं विकास करना प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन (Management of Natural Resources) कहलाता है। इसका मुख्य उद्देश्य वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी संसाधनों को सुरक्षित रखना है।
आज बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिकीकरण तथा संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के कारण अनेक प्राकृतिक संसाधन तेजी से समाप्त हो रहे हैं। यदि इनका उचित प्रबंधन नहीं किया गया, तो आने वाले समय में जल, वन, खनिज तथा ऊर्जा संसाधनों की गंभीर कमी हो सकती है। इसलिए संसाधनों का उपयोग आवश्यकता के अनुसार तथा पर्यावरण को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—
(i) संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना।
(ii) पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना।
(iii) जैव विविधता का संरक्षण करना।
(iv) भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों को सुरक्षित रखना।
(v) सतत विकास (Sustainable Development) को बढ़ावा देना।
3. प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण क्यों आवश्यक है?
उत्तर ⇒
प्राकृतिक संसाधन प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं। मनुष्य अपने जीवन की लगभग सभी आवश्यकताओं के लिए इन पर निर्भर रहता है। वर्तमान समय में बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण, औद्योगिकीकरण तथा आधुनिक तकनीक के कारण प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है। अनेक संसाधन जैसे कोयला, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं और इनके बनने में लाखों वर्ष लगते हैं।
यदि इन संसाधनों का अनियंत्रित उपयोग जारी रहा, तो भविष्य में इनकी गंभीर कमी हो सकती है। इसलिए इनका संरक्षण करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि पर्यावरण संतुलित रहे तथा आने वाली पीढ़ियाँ भी इनका लाभ उठा सकें।
प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता निम्नलिखित है—
(i) संसाधनों की उपलब्धता लंबे समय तक बनी रहती है।
(ii) पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है।
(iii) जैव विविधता का संरक्षण होता है।
(iv) प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है।
(v) सतत विकास को बढ़ावा मिलता है।
4. प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रमुख उपाय लिखिए।
उत्तर ⇒
प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। यदि संसाधनों का आवश्यकता से अधिक उपयोग किया जाए, तो वे शीघ्र समाप्त हो सकते हैं। इसलिए इनके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक, सामाजिक तथा व्यक्तिगत स्तर पर अनेक उपाय अपनाने आवश्यक हैं। जल, वन, मिट्टी एवं ऊर्जा जैसे संसाधनों का संतुलित उपयोग पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं—
(i) जल, बिजली एवं ईंधन का अनावश्यक उपयोग न करना।
(ii) अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना।
(iii) वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) अपनाना।
(iv) 3R (Reduce, Reuse, Recycle) सिद्धांत का पालन करना।
(v) नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग बढ़ाना।
(vi) प्लास्टिक एवं अन्य प्रदूषणकारी पदार्थों का कम उपयोग करना।
(vii) पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना।
5. संसाधनों के दीर्घकालीन (Long-term) प्रबंधन की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर ⇒
दीर्घकालीन संसाधन प्रबंधन का अर्थ है प्राकृतिक संसाधनों का इस प्रकार उपयोग करना कि वर्तमान आवश्यकताएँ भी पूरी हों और भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी संसाधन सुरक्षित रहें। यदि केवल वर्तमान लाभ को ध्यान में रखकर संसाधनों का अत्यधिक दोहन किया जाएगा, तो आने वाले समय में गंभीर संसाधन संकट उत्पन्न हो सकता है।
दीर्घकालीन योजनाओं में संसाधनों के संरक्षण, पुनर्भरण, पर्यावरणीय संतुलन तथा जैव विविधता की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यही सतत विकास का मूल आधार है।
दीर्घकालीन संसाधन प्रबंधन के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—
(i) प्राकृतिक संसाधन लंबे समय तक उपलब्ध रहते हैं।
(ii) भविष्य की पीढ़ियों के हित सुरक्षित रहते हैं।
(iii) पर्यावरणीय संतुलन बना रहता है।
(iv) जैव विविधता का संरक्षण होता है।
(v) आर्थिक एवं सामाजिक विकास निरंतर बना रहता है।
(vi) सतत विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता मिलती है।
6. गंगा कार्य परियोजना (Ganga Action Plan) क्या है? इसके प्रमुख उद्देश्य लिखिए।
उत्तर ⇒
गंगा कार्य परियोजना (Ganga Action Plan – GAP) भारत सरकार द्वारा वर्ष 1985 में प्रारम्भ की गई एक महत्वपूर्ण पर्यावरण संरक्षण योजना है। इस योजना का उद्देश्य गंगा नदी के बढ़ते प्रदूषण को रोकना तथा इसके जल की गुणवत्ता में सुधार करना था। गंगा भारत की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक है, जिस पर करोड़ों लोगों का जीवन, कृषि, उद्योग तथा धार्मिक आस्था निर्भर करती है। लेकिन औद्योगिक अपशिष्ट, घरेलू सीवेज, धार्मिक गतिविधियों तथा ठोस कचरे के कारण इसका जल निरंतर प्रदूषित होता जा रहा था।
इस योजना के अंतर्गत गंदे जल के शोधन संयंत्र (Sewage Treatment Plants) स्थापित किए गए, उद्योगों के अपशिष्टों पर नियंत्रण लगाया गया तथा लोगों को नदी संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।
गंगा कार्य परियोजना के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—
(i) गंगा नदी के जल को प्रदूषण मुक्त बनाना।
(ii) घरेलू एवं औद्योगिक अपशिष्टों को नदी में जाने से रोकना।
(iii) जल की गुणवत्ता में सुधार करना।
(iv) जलीय जीवों एवं जैव विविधता का संरक्षण करना।
(v) लोगों में स्वच्छ नदी के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना।
7. वन (Forest) हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर ⇒
वन प्रकृति की अमूल्य संपत्ति हैं। ये केवल लकड़ी, ईंधन एवं औषधियाँ ही नहीं प्रदान करते, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वन अनेक प्रकार के पशु-पक्षियों एवं सूक्ष्मजीवों का प्राकृतिक आवास हैं। ये वर्षा लाने, मिट्टी के कटाव को रोकने, जल चक्र को संतुलित रखने तथा वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा बनाए रखने में सहायता करते हैं।
यदि वनों की अंधाधुंध कटाई होती रही, तो जलवायु परिवर्तन, बाढ़, सूखा, मिट्टी का कटाव तथा जैव विविधता का विनाश जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
वनों का महत्व निम्नलिखित है—
(i) ऑक्सीजन प्रदान करते हैं तथा कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करते हैं।
(ii) वर्षा एवं जल चक्र को प्रभावित करते हैं।
(iii) मिट्टी के कटाव को रोकते हैं।
(iv) अनेक जीवों का प्राकृतिक आवास हैं।
(v) औषधियाँ, लकड़ी एवं अन्य वन उत्पाद उपलब्ध कराते हैं।
(vi) पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हैं।
8. वनों की कटाई (Deforestation) के प्रमुख कारण एवं दुष्प्रभाव लिखिए।
उत्तर ⇒
वनों को बड़े पैमाने पर काटने या नष्ट करने की प्रक्रिया को वनों की कटाई (Deforestation) कहते हैं। बढ़ती जनसंख्या, कृषि भूमि का विस्तार, उद्योगों की स्थापना, सड़क एवं बाँध निर्माण तथा शहरीकरण के कारण वनों की कटाई लगातार बढ़ रही है।
वनों के नष्ट होने से केवल पेड़ों की संख्या ही कम नहीं होती, बल्कि सम्पूर्ण पारिस्थितिक तंत्र प्रभावित होता है। अनेक जीवों का प्राकृतिक आवास समाप्त हो जाता है तथा पर्यावरणीय असंतुलन उत्पन्न होने लगता है।
वनों की कटाई के प्रमुख कारण—
(i) कृषि भूमि का विस्तार।
(ii) उद्योगों एवं कारखानों की स्थापना।
(iii) सड़क, रेलवे एवं बाँध निर्माण।
(iv) अवैध लकड़ी कटाई।
(v) शहरीकरण एवं जनसंख्या वृद्धि।
वनों की कटाई के प्रमुख दुष्प्रभाव—
(i) जैव विविधता में कमी आती है।
(ii) मिट्टी का कटाव बढ़ता है।
(iii) वर्षा में कमी आ सकती है।
(iv) वैश्विक ऊष्मीकरण बढ़ता है।
(v) वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो जाता है।
9. वन्य जीवन (Wildlife) संरक्षण क्यों आवश्यक है?
उत्तर ⇒
वन्य जीव प्रकृति के महत्वपूर्ण घटक हैं। वे खाद्य श्रृंखला, आहार-जाल तथा पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वर्तमान समय में अवैध शिकार, वनों की कटाई, प्रदूषण तथा प्राकृतिक आवास के विनाश के कारण अनेक वन्य जीव विलुप्त होने की कगार पर पहुँच गए हैं।
यदि वन्य जीवों का संरक्षण नहीं किया गया, तो पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ जाएगा और जैव विविधता पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इसलिए सरकार द्वारा राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य एवं जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र स्थापित किए गए हैं।
वन्य जीवन संरक्षण का महत्व निम्नलिखित है—
(i) जैव विविधता का संरक्षण होता है।
(ii) पारिस्थितिक संतुलन बना रहता है।
(iii) संकटग्रस्त प्रजातियाँ सुरक्षित रहती हैं।
(iv) वैज्ञानिक अनुसंधान में सहायता मिलती है।
(v) प्राकृतिक धरोहर का संरक्षण होता है।
10. जैव विविधता (Biodiversity) क्या है? इसका संरक्षण क्यों आवश्यक है?
उत्तर ⇒
पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी प्रकार के पौधों, पशुओं, सूक्ष्मजीवों तथा अन्य जीवित प्रजातियों की विविधता को जैव विविधता (Biodiversity) कहते हैं। इसमें जीवों की संख्या, उनकी प्रजातियाँ तथा उनके आनुवंशिक एवं पारिस्थितिक विभिन्नता शामिल होती है।
जैव विविधता स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र का आधार है। प्रत्येक जीव प्रकृति में कोई-न-कोई महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि किसी एक प्रजाति का भी अत्यधिक ह्रास होता है, तो इसका प्रभाव सम्पूर्ण खाद्य श्रृंखला एवं पर्यावरण पर पड़ता है।
जैव विविधता संरक्षण के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—
(i) पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए।
(ii) विलुप्त होती प्रजातियों की रक्षा के लिए।
(iii) औषधीय एवं आर्थिक संसाधनों के संरक्षण के लिए।
(iv) भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित रखने हेतु।
(v) सतत विकास एवं पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए।
11. चिपको आंदोलन (Chipko Movement) क्या था? इसका महत्व लिखिए।
उत्तर ⇒
चिपको आंदोलन भारत का प्रसिद्ध पर्यावरण संरक्षण आंदोलन था, जिसकी शुरुआत वर्ष 1973 में उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) के चमोली जिले में हुई। इस आंदोलन में ग्रामीण लोगों, विशेषकर महिलाओं ने पेड़ों को कटने से बचाने के लिए उनसे चिपककर विरोध किया। इसी कारण इस आंदोलन का नाम ‘चिपको आंदोलन’ पड़ा। इस आंदोलन में सुंदरलाल बहुगुणा, चंडी प्रसाद भट्ट तथा स्थानीय ग्रामीणों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य वनों की अंधाधुंध कटाई को रोकना, पर्यावरण की रक्षा करना तथा स्थानीय लोगों के अधिकारों की सुरक्षा करना था। इस आंदोलन के कारण पूरे देश में वन संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ी तथा सरकार को वन संरक्षण संबंधी नीतियों पर पुनर्विचार करना पड़ा।
चिपको आंदोलन का महत्व निम्नलिखित है—
(i) वनों की कटाई पर नियंत्रण लगाने में सहायता मिली।
(ii) पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ी।
(iii) स्थानीय समुदाय की भागीदारी को महत्व मिला।
(iv) जैव विविधता के संरक्षण को बढ़ावा मिला।
(v) वृक्षारोपण एवं वन संरक्षण की भावना मजबूत हुई।
12. वनों के संरक्षण में स्थानीय लोगों की क्या भूमिका है?
उत्तर ⇒
वनों के संरक्षण में स्थानीय लोगों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। जो लोग वनों के आसपास रहते हैं, वे अपनी दैनिक आवश्यकताओं जैसे ईंधन, चारा, फल, औषधियाँ एवं जल के लिए सीधे वनों पर निर्भर रहते हैं। इसलिए वे वनों की वास्तविक स्थिति को अच्छी तरह समझते हैं और उनका संरक्षण भी बेहतर ढंग से कर सकते हैं।
यदि स्थानीय लोगों को वन प्रबंधन में सहभागी बनाया जाए, तो अवैध कटाई, आगजनी तथा वन्य जीवों के शिकार जैसी समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। संयुक्त वन प्रबंधन (Joint Forest Management) इसी सिद्धांत पर आधारित है।
स्थानीय लोगों की प्रमुख भूमिकाएँ निम्नलिखित हैं—
(i) अवैध कटाई एवं शिकार को रोकना।
(ii) वृक्षारोपण कार्यक्रमों में भाग लेना।
(iii) वन आग से सुरक्षा करना।
(iv) वन संसाधनों का सीमित एवं संतुलित उपयोग करना।
(v) जैव विविधता के संरक्षण में सहयोग देना।
13. संयुक्त वन प्रबंधन (Joint Forest Management) क्या है?
उत्तर ⇒
संयुक्त वन प्रबंधन (Joint Forest Management – JFM) वन संरक्षण की एक ऐसी योजना है, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों एवं वन विभाग की संयुक्त भागीदारी से वनों का संरक्षण एवं विकास किया जाता है। इस योजना का उद्देश्य वनों की सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आवश्यकताओं एवं आजीविका का भी ध्यान रखना है।
इस योजना के अंतर्गत गाँव के लोग वन संरक्षण का कार्य करते हैं और बदले में उन्हें वन उत्पादों का सीमित उपयोग करने तथा वनों से प्राप्त आय का कुछ भाग दिया जाता है। इससे लोगों में वन संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी एवं जागरूकता बढ़ती है।
संयुक्त वन प्रबंधन के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—
(i) वनों की सुरक्षा बेहतर होती है।
(ii) स्थानीय लोगों को रोजगार एवं आय प्राप्त होती है।
(iii) अवैध कटाई एवं शिकार में कमी आती है।
(iv) जैव विविधता का संरक्षण होता है।
(v) सरकार एवं जनता के बीच सहयोग बढ़ता है।
14. जल संरक्षण (Water Conservation) क्यों आवश्यक है?
उत्तर ⇒
जल पृथ्वी पर जीवन का आधार है। सभी जीवित प्राणियों, कृषि, उद्योग तथा घरेलू कार्यों के लिए जल आवश्यक है। वर्तमान समय में बढ़ती जनसंख्या, भूजल का अत्यधिक दोहन, वर्षा में कमी तथा जल प्रदूषण के कारण स्वच्छ जल की उपलब्धता लगातार घट रही है। यदि समय रहते जल संरक्षण के उपाय नहीं अपनाए गए, तो भविष्य में गंभीर जल संकट उत्पन्न हो सकता है।
जल संरक्षण का अर्थ केवल जल की बचत करना नहीं है, बल्कि उपलब्ध जल का उचित एवं वैज्ञानिक उपयोग करना भी है। प्रत्येक व्यक्ति को जल की एक-एक बूंद का महत्व समझना चाहिए।
जल संरक्षण के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—
(i) भविष्य के लिए जल उपलब्ध रहता है।
(ii) भूजल स्तर में वृद्धि होती है।
(iii) सूखे की समस्या कम होती है।
(iv) कृषि एवं सिंचाई में सहायता मिलती है।
(v) पर्यावरणीय संतुलन बना रहता है।
15. वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) क्या है? इसके प्रमुख लाभ लिखिए।
उत्तर ⇒
वर्षा के जल को एकत्र करके भविष्य में उपयोग के लिए सुरक्षित रखने की प्रक्रिया को वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) कहा जाता है। इसमें वर्षा के जल को घरों की छतों, तालाबों, कुओं, टैंकों अथवा विशेष संरचनाओं में संग्रहित किया जाता है। यह जल बाद में घरेलू उपयोग, सिंचाई तथा भूजल पुनर्भरण के लिए प्रयोग किया जाता है।
भारत जैसे देश में, जहाँ कई क्षेत्रों में जल की कमी रहती है, वर्षा जल संचयन जल संरक्षण का अत्यंत प्रभावी उपाय माना जाता है।
वर्षा जल संचयन के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—
(i) भूजल स्तर बढ़ता है।
(ii) जल संकट की समस्या कम होती है।
(iii) सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध रहता है।
(iv) बाढ़ एवं जलभराव की समस्या कम होती है।
(v) प्राकृतिक जल स्रोतों पर दबाव कम पड़ता है।
(vi) जल का सदुपयोग एवं संरक्षण सुनिश्चित होता है।
16. जल संग्रहण (Water Harvesting) क्या है? इसके प्रमुख उद्देश्य लिखिए।
उत्तर ⇒
वर्षा के जल अथवा अन्य प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त जल को वैज्ञानिक एवं योजनाबद्ध तरीके से एकत्र करके भविष्य में उपयोग के लिए सुरक्षित रखने की प्रक्रिया को जल संग्रहण (Water Harvesting) कहते हैं। भारत के अनेक क्षेत्रों में वर्षा केवल कुछ महीनों तक होती है, जबकि पूरे वर्ष जल की आवश्यकता बनी रहती है। इसलिए वर्षा के जल को संरक्षित करना अत्यंत आवश्यक है।
जल संग्रहण के लिए तालाब, कुएँ, चेक डैम, जलाशय, छतों से वर्षा जल संग्रहण प्रणाली तथा पारंपरिक जल संरक्षण तकनीकों का उपयोग किया जाता है। इससे भूजल स्तर बढ़ता है तथा जल संकट की समस्या कम होती है।
जल संग्रहण के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—
(i) वर्षा जल का संरक्षण करना।
(ii) भूजल स्तर में वृद्धि करना।
(iii) सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध कराना।
(iv) जल संकट एवं सूखे की समस्या को कम करना।
(v) प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण करना।
17. कोयला एवं पेट्रोलियम जैसे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण क्यों आवश्यक है?
उत्तर ⇒
कोयला एवं पेट्रोलियम ऊर्जा के प्रमुख स्रोत हैं, लेकिन ये अनवीकरणीय (Non-Renewable) प्राकृतिक संसाधन हैं। इनका निर्माण लाखों वर्षों में होता है, जबकि वर्तमान समय में इनका उपयोग अत्यधिक तेजी से किया जा रहा है। यदि इनका विवेकपूर्ण उपयोग नहीं किया गया, तो भविष्य में इनके भंडार समाप्त हो सकते हैं।
इनके दहन से कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड तथा अन्य प्रदूषक गैसें निकलती हैं, जो वायु प्रदूषण एवं वैश्विक ऊष्मीकरण का कारण बनती हैं। इसलिए इनका सीमित एवं वैज्ञानिक उपयोग आवश्यक है।
इनके संरक्षण की आवश्यकता निम्नलिखित है—
(i) ये सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं।
(ii) भविष्य की पीढ़ियों के लिए इन्हें सुरक्षित रखना आवश्यक है।
(iii) वायु प्रदूषण को कम किया जा सकता है।
(iv) वैश्विक ऊष्मीकरण पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
(v) वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा मिलता है।
18. बाँध (Dam) क्या है? इसके प्रमुख लाभ लिखिए।
उत्तर ⇒
नदी के जल को रोककर एक बड़े जलाशय का निर्माण करने वाली संरचना को बाँध (Dam) कहा जाता है। बाँधों का निर्माण मुख्य रूप से सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन, पेयजल आपूर्ति तथा बाढ़ नियंत्रण के उद्देश्य से किया जाता है। भारत में भाखड़ा नांगल बाँध, हीराकुंड बाँध तथा टिहरी बाँध प्रमुख उदाहरण हैं।
बाँधों से जल का नियंत्रित उपयोग संभव होता है, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होती है तथा अनेक क्षेत्रों में वर्षभर जल उपलब्ध रहता है।
बाँधों के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—
(i) सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराते हैं।
(ii) जलविद्युत (Hydroelectricity) का उत्पादन होता है।
(iii) बाढ़ नियंत्रण में सहायता मिलती है।
(iv) पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित होती है।
(v) मत्स्य पालन एवं पर्यटन को बढ़ावा मिलता है।
19. बड़े बाँधों से होने वाली प्रमुख समस्याएँ लिखिए।
उत्तर ⇒
यद्यपि बड़े बाँधों से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं, फिर भी इनके निर्माण से कई सामाजिक एवं पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। बड़े जलाशयों के निर्माण के कारण विशाल भूमि क्षेत्र जलमग्न हो जाते हैं, जिससे गाँव, खेत तथा वन प्रभावित होते हैं। अनेक लोगों को अपना घर छोड़कर अन्य स्थानों पर जाना पड़ता है।
इसके अतिरिक्त बाँधों के कारण नदियों के प्राकृतिक प्रवाह में परिवर्तन होता है, जिससे जलीय जीवों एवं पारिस्थितिक तंत्र पर भी प्रभाव पड़ता है।
बड़े बाँधों की प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं—
(i) लोगों का बड़े पैमाने पर विस्थापन होता है।
(ii) वन एवं कृषि भूमि जलमग्न हो जाती है।
(iii) जैव विविधता प्रभावित होती है।
(iv) निर्माण लागत बहुत अधिक होती है।
(v) पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो सकता है।
(vi) नदी के प्राकृतिक प्रवाह में परिवर्तन आता है।
20. प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में प्रत्येक नागरिक की क्या भूमिका होनी चाहिए?
उत्तर ⇒
प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण केवल सरकार का कार्य नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी भी है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में संसाधनों का सोच-समझकर उपयोग करे, तो प्राकृतिक संसाधनों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। जल, बिजली, ईंधन तथा अन्य संसाधनों की बचत करके हम पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
आज पर्यावरण संरक्षण जन-भागीदारी के बिना संभव नहीं है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
प्रत्येक नागरिक की प्रमुख भूमिकाएँ निम्नलिखित हैं—
(i) जल एवं बिजली की बचत करना।
(ii) वृक्षारोपण करना एवं पेड़ों की रक्षा करना।
(iii) प्लास्टिक का कम उपयोग करना।
(iv) 3R (Reduce, Reuse, Recycle) सिद्धांत अपनाना।
(v) प्राकृतिक संसाधनों का अनावश्यक दोहन रोकना।
(vi) पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज में जागरूकता फैलाना।
(vii) वन्य जीवों एवं जैव विविधता के संरक्षण में सहयोग करना।
21. वन्य जीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuary) क्या है? इसका महत्व लिखिए।
उत्तर ⇒
वन्य जीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuary) वह संरक्षित क्षेत्र है, जहाँ वन्य जीवों एवं उनके प्राकृतिक आवास (Habitat) की सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध किए जाते हैं। इन क्षेत्रों में वन्य जीवों का शिकार करना, उन्हें पकड़ना तथा उनके प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुँचाना कानूनन अपराध है। भारत सरकार एवं राज्य सरकारें जैव विविधता के संरक्षण के लिए विभिन्न वन्य जीव अभयारण्यों की स्थापना करती हैं।
वन्य जीव अभयारण्य केवल जानवरों की सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित बनाए रखने के लिए भी आवश्यक हैं। यहाँ अनेक दुर्लभ एवं विलुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण किया जाता है।
वन्य जीव अभयारण्य का महत्व निम्नलिखित है—
(i) वन्य जीवों की सुरक्षा होती है।
(ii) विलुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण किया जाता है।
(iii) जैव विविधता बनी रहती है।
(iv) प्राकृतिक आवास सुरक्षित रहता है।
(v) वैज्ञानिक अनुसंधान एवं पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा मिलता है।
22. राष्ट्रीय उद्यान (National Park) क्या है? वन्य जीव अभयारण्य से इसका अंतर लिखिए।
उत्तर ⇒
राष्ट्रीय उद्यान (National Park) वह संरक्षित क्षेत्र है, जहाँ वनस्पतियों, वन्य जीवों तथा सम्पूर्ण प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण किया जाता है। इन क्षेत्रों में मानव गतिविधियों पर कड़ा नियंत्रण रहता है तथा लकड़ी काटना, शिकार करना, चराई करना एवं संसाधनों का दोहन प्रतिबंधित होता है।
राष्ट्रीय उद्यानों का उद्देश्य केवल वन्य जीवों की सुरक्षा करना नहीं, बल्कि सम्पूर्ण प्राकृतिक पर्यावरण एवं जैव विविधता का संरक्षण करना होता है।
| राष्ट्रीय उद्यान | वन्य जीव अभयारण्य |
|---|---|
| (i) सम्पूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण किया जाता है। | (i) मुख्य रूप से वन्य जीवों का संरक्षण किया जाता है। |
| (ii) मानव गतिविधियों पर अधिक प्रतिबंध होता है। | (ii) कुछ सीमित मानवीय गतिविधियों की अनुमति हो सकती है। |
| (iii) चराई एवं संसाधनों का उपयोग सामान्यतः प्रतिबंधित होता है। | (iii) कुछ परिस्थितियों में सीमित उपयोग की अनुमति दी जा सकती है। |
| (iv) संरक्षण के नियम अधिक कठोर होते हैं। | (iv) संरक्षण के नियम अपेक्षाकृत कम कठोर होते हैं। |
23. जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserve) क्या है?
उत्तर ⇒
जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserve) वह विस्तृत संरक्षित क्षेत्र है, जहाँ वनस्पतियों, वन्य जीवों, सूक्ष्मजीवों तथा उनके प्राकृतिक आवास का संरक्षण किया जाता है। इसका उद्देश्य केवल जैव विविधता की रक्षा करना ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग तथा सतत विकास को बढ़ावा देना भी है।
इन क्षेत्रों में अनुसंधान, पर्यावरण शिक्षा तथा स्थानीय समुदायों की भागीदारी को भी महत्व दिया जाता है। भारत में नीलगिरि, सुंदरबन, नंदा देवी एवं पंचमढ़ी प्रमुख जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र हैं।
जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र का महत्व निम्नलिखित है—
(i) जैव विविधता का संरक्षण होता है।
(ii) संकटग्रस्त प्रजातियों की सुरक्षा होती है।
(iii) वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा मिलता है।
(iv) प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग संभव होता है।
(v) पर्यावरणीय संतुलन बना रहता है।
24. वन संरक्षण (Forest Conservation) के प्रमुख उपाय लिखिए।
उत्तर ⇒
वन पृथ्वी के सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों में से एक हैं। इनके संरक्षण के बिना पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना संभव नहीं है। वर्तमान समय में वनों की कटाई, अवैध शिकार, जंगलों में आग तथा बढ़ती जनसंख्या के कारण वन क्षेत्र लगातार घट रहे हैं। इसलिए वनों का वैज्ञानिक एवं योजनाबद्ध संरक्षण आवश्यक है।
वन संरक्षण के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं—
(i) अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना।
(ii) अवैध कटाई पर सख्ती से रोक लगाना।
(iii) जंगलों में आग लगने से बचाव के उपाय करना।
(iv) संयुक्त वन प्रबंधन (JFM) को बढ़ावा देना।
(v) वन्य जीवों के शिकार पर रोक लगाना।
(vi) स्थानीय लोगों को वन संरक्षण में सहभागी बनाना।
(vii) लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना।
25. प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन (Overexploitation) क्या है? इसके दुष्प्रभाव लिखिए।
उत्तर ⇒
जब प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग उनकी पुनः पूर्ति (Replenishment) की क्षमता से अधिक मात्रा में किया जाता है, तो उसे प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन (Overexploitation) कहते हैं। बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिकीकरण तथा आधुनिक जीवनशैली के कारण आज प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है।
यदि संसाधनों का उपयोग इसी प्रकार होता रहा, तो भविष्य में जल, वन, खनिज एवं जीवाश्म ईंधनों की गंभीर कमी हो सकती है। इसके साथ ही पर्यावरणीय संतुलन भी प्रभावित होगा।
अंधाधुंध दोहन के प्रमुख दुष्प्रभाव निम्नलिखित हैं—
(i) प्राकृतिक संसाधनों की कमी हो जाती है।
(ii) जैव विविधता में गिरावट आती है।
(iii) पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है।
(iv) जलवायु परिवर्तन की समस्या बढ़ती है।
(v) भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों का संकट उत्पन्न हो सकता है।
(vi) सतत विकास प्रभावित होता है।
26. सतत विकास (Sustainable Development) क्या है? इसके प्रमुख सिद्धांत लिखिए।
उत्तर ⇒
सतत विकास (Sustainable Development) वह विकास है, जिसमें वर्तमान पीढ़ी अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति इस प्रकार करती है कि भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं एवं संसाधनों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति तथा पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना है। वर्तमान समय में बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिकीकरण तथा प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन को देखते हुए सतत विकास की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है।
सतत विकास के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग किया जाता है तथा पर्यावरण को कम-से-कम नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया जाता है।
सतत विकास के प्रमुख सिद्धांत निम्नलिखित हैं—
(i) प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग करना।
(ii) पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना।
(iii) नवीकरणीय संसाधनों का अधिक उपयोग करना।
(iv) प्रदूषण को कम करना।
(v) भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों का संरक्षण करना।
(vi) आर्थिक एवं सामाजिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना।
27. जल प्रदूषण (Water Pollution) क्या है? इसके प्रमुख कारण लिखिए।
उत्तर ⇒
जब नदियों, तालाबों, झीलों, समुद्रों अथवा भूजल में हानिकारक पदार्थ मिल जाने के कारण जल की गुणवत्ता खराब हो जाती है और वह पीने, सिंचाई अथवा अन्य उपयोगों के लिए अनुपयुक्त हो जाता है, तो उसे जल प्रदूषण (Water Pollution) कहते हैं।
वर्तमान समय में जल प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या बन चुका है। उद्योगों से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट, घरेलू सीवेज, कृषि में प्रयुक्त उर्वरक एवं कीटनाशक तथा प्लास्टिक कचरा जल प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं।
जल प्रदूषण के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—
(i) उद्योगों से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट।
(ii) घरेलू सीवेज एवं गंदे जल का नदी-तालाबों में प्रवाह।
(iii) कृषि में रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग।
(iv) प्लास्टिक एवं ठोस कचरे का जल स्रोतों में फेंकना।
(v) धार्मिक गतिविधियों एवं मूर्ति विसर्जन से उत्पन्न प्रदूषण।
(vi) तेल एवं अन्य रासायनिक पदार्थों का जल में मिलना।
28. जल प्रदूषण को रोकने के प्रमुख उपाय लिखिए।
उत्तर ⇒
जल जीवन का आधार है, इसलिए जल स्रोतों को स्वच्छ बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। जल प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार, उद्योगों तथा आम नागरिकों को मिलकर कार्य करना चाहिए। जल स्रोतों में गंदगी एवं रासायनिक पदार्थों को जाने से रोकना सबसे प्रभावी उपाय है।
जल प्रदूषण रोकने के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं—
(i) उद्योगों के अपशिष्टों का शोधन (Treatment) करके ही जल स्रोतों में छोड़ा जाए।
(ii) घरेलू सीवेज का उचित प्रबंधन किया जाए।
(iii) प्लास्टिक एवं ठोस कचरे को नदियों एवं तालाबों में न फेंका जाए।
(iv) रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का संतुलित उपयोग किया जाए।
(v) लोगों को जल संरक्षण एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाए।
(vi) वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दिया जाए।
29. पर्यावरण संरक्षण में विद्यार्थियों की क्या भूमिका हो सकती है?
उत्तर ⇒
विद्यार्थी किसी भी समाज के भविष्य होते हैं। यदि वे प्रारंभ से ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बन जाएँ, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। विद्यालय स्तर से ही पर्यावरण शिक्षा, वृक्षारोपण तथा स्वच्छता कार्यक्रमों में भाग लेकर विद्यार्थी प्रकृति संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
छोटी-छोटी अच्छी आदतें, जैसे जल एवं बिजली की बचत, प्लास्टिक का कम उपयोग तथा स्वच्छता बनाए रखना, पर्यावरण संरक्षण में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती हैं।
विद्यार्थियों की प्रमुख भूमिकाएँ निम्नलिखित हैं—
(i) अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना।
(ii) जल एवं बिजली की बचत करना।
(iii) प्लास्टिक का उपयोग कम करना।
(iv) विद्यालय एवं आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखना।
(v) पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना।
(vi) 3R (Reduce, Reuse, Recycle) सिद्धांत का पालन करना।
30. ‘प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन’ अध्याय का निष्कर्ष लिखिए।
उत्तर ⇒
प्राकृतिक संसाधन मानव जीवन एवं पृथ्वी पर सभी जीवों के अस्तित्व का आधार हैं। जल, वायु, वन, मिट्टी, वन्य जीव, खनिज तथा ऊर्जा संसाधनों का संरक्षण किए बिना सतत विकास संभव नहीं है। वर्तमान समय में बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिकीकरण तथा प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित दोहन के कारण पर्यावरणीय समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं।
इन समस्याओं के समाधान के लिए प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक एवं संतुलित उपयोग, वर्षा जल संचयन, वन संरक्षण, वन्य जीव संरक्षण, 3R सिद्धांत तथा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। यदि प्रत्येक नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझते हुए पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे, तो वर्तमान एवं भविष्य दोनों पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सकता है। यही सतत विकास तथा स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है।