Class 10 Geography: खनिज और ऊर्जा संसाधन

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Chapter Overview

Class10
SubjectGeography 
Chapter NameMinerals and Energy Resources
खनिज और ऊर्जा संसाधन
Resource TypeRevision Notes
SyllabusNCERT
Suitable ForCBSE, JAC and other state boards

खनिज और ऊर्जा संसाधन Revision Notes

1. खनिज संसाधन (Mineral Resources) से आप क्या समझते हैं?

उत्तर ⇒
पृथ्वी की सतह तथा उसके भीतर प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले ऐसे पदार्थ, जिनका आर्थिक महत्व हो तथा जिनका उपयोग उद्योगों, निर्माण कार्यों एवं दैनिक जीवन में किया जाता है, खनिज संसाधन (Mineral Resources) कहलाते हैं। खनिज प्रकृति की अमूल्य संपदा हैं तथा इनके निर्माण में लाखों वर्ष लगते हैं। इसलिए इन्हें अनवीकरणीय (Non-renewable) संसाधन माना जाता है। आधुनिक उद्योगों, परिवहन, ऊर्जा उत्पादन एवं आर्थिक विकास का आधार खनिज संसाधन ही हैं।

झारखंड भारत का प्रमुख खनिज उत्पादक राज्य है। यहाँ कोयला, लौह अयस्क, ताँबा, यूरेनियम, बॉक्साइट, अभ्रक, चूना पत्थर, डोलोमाइट तथा ग्रेफाइट जैसे अनेक खनिज पाए जाते हैं। इसी कारण झारखंड को “भारत का खनिज भंडार” (Mineral Storehouse of India) भी कहा जाता है।

खनिज संसाधनों का महत्व निम्नलिखित है—

(i) उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध कराते हैं।

(ii) ऊर्जा उत्पादन में सहायक हैं।

(iii) रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं।

(iv) देश के आर्थिक विकास में योगदान देते हैं।

(v) आधारभूत संरचना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

2. झारखंड में खनिज संसाधनों का क्या महत्व है?

उत्तर ⇒
झारखंड भारत के सबसे समृद्ध खनिज राज्यों में से एक है। राज्य की अर्थव्यवस्था का बड़ा भाग खनिज संसाधनों पर आधारित है। यहाँ कोयला, लौह अयस्क, ताँबा, यूरेनियम, अभ्रक एवं बॉक्साइट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। इन खनिजों के कारण राज्य में इस्पात, ताप विद्युत, सीमेंट एवं अन्य भारी उद्योगों का विकास हुआ है।

खनिज संसाधनों से राज्य सरकार को राजस्व प्राप्त होता है तथा लाखों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है। जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद एवं रामगढ़ जैसे औद्योगिक क्षेत्रों का विकास भी खनिज संपदा के कारण हुआ है।

झारखंड में खनिज संसाधनों का महत्व निम्नलिखित है—

(i) औद्योगिक विकास का आधार हैं।

(ii) रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं।

(iii) राज्य की आय में वृद्धि करते हैं।

(iv) इस्पात एवं ऊर्जा उद्योगों को बढ़ावा देते हैं।

(v) आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

3. खनिजों का वर्गीकरण (Classification of Minerals) कीजिए।

उत्तर ⇒
खनिजों का वर्गीकरण उनके रासायनिक गुणों एवं उपयोग के आधार पर किया जाता है। सामान्यतः खनिजों को धात्विक (Metallic) तथा अधात्विक (Non-metallic) दो प्रमुख वर्गों में बाँटा जाता है। धात्विक खनिजों से धातुएँ प्राप्त होती हैं, जबकि अधात्विक खनिजों से धातु प्राप्त नहीं होती।

झारखंड में दोनों प्रकार के खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। लौह अयस्क, ताँबा एवं मैंगनीज धात्विक खनिज हैं, जबकि अभ्रक, चूना पत्थर एवं डोलोमाइट अधात्विक खनिजों के प्रमुख उदाहरण हैं।

धात्विक खनिजअधात्विक खनिज
लौह अयस्कअभ्रक
ताँबाचूना पत्थर
मैंगनीजडोलोमाइट
बॉक्साइटग्रेफाइट

4. धात्विक (Metallic) एवं अधात्विक (Non-Metallic) खनिजों में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒
खनिजों को उनके गुणों के आधार पर धात्विक एवं अधात्विक खनिजों में विभाजित किया जाता है। धात्विक खनिजों से धातुएँ प्राप्त होती हैं तथा इनका उपयोग मशीन, वाहन एवं उद्योगों में किया जाता है। दूसरी ओर अधात्विक खनिजों से धातु प्राप्त नहीं होती तथा इनका उपयोग सीमेंट, काँच, विद्युत उपकरण एवं रासायनिक उद्योगों में किया जाता है।

धात्विक खनिजअधात्विक खनिज
(i) इनमें धातु प्राप्त होती है।(i) इनमें धातु प्राप्त नहीं होती।
(ii) ये कठोर एवं चमकीले होते हैं।(ii) सामान्यतः चमक कम होती है।
(iii) उद्योगों में धातु निर्माण हेतु उपयोग होते हैं।(iii) सीमेंट, काँच एवं रसायन उद्योग में उपयोग होते हैं।
(iv) उदाहरण— लौह अयस्क, ताँबा, मैंगनीज।(iv) उदाहरण— अभ्रक, चूना पत्थर, डोलोमाइट।

5. ऊर्जा संसाधन (Energy Resources) से आप क्या समझते हैं?

उत्तर ⇒
वे सभी प्राकृतिक संसाधन जिनसे ऊर्जा प्राप्त की जाती है तथा जिनका उपयोग बिजली उत्पादन, परिवहन, उद्योग एवं घरेलू कार्यों में किया जाता है, ऊर्जा संसाधन (Energy Resources) कहलाते हैं। आधुनिक जीवन में ऊर्जा का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इसके बिना उद्योग, कृषि, परिवहन एवं संचार का विकास संभव नहीं है।

झारखंड ऊर्जा संसाधनों की दृष्टि से भी समृद्ध राज्य है। यहाँ कोयला सबसे प्रमुख ऊर्जा संसाधन है। इसके अतिरिक्त जल विद्युत, सौर ऊर्जा एवं बायोमास ऊर्जा का भी उपयोग किया जा रहा है। भविष्य में ऊर्जा की बढ़ती मांग को देखते हुए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विकास पर विशेष बल दिया जा रहा है।

ऊर्जा संसाधनों का महत्व निम्नलिखित है—

(i) उद्योगों को ऊर्जा उपलब्ध कराते हैं।

(ii) बिजली उत्पादन का आधार हैं।

(iii) परिवहन व्यवस्था को संचालित करते हैं।

(iv) आर्थिक विकास को गति देते हैं।

(v) आधुनिक जीवन को सुचारु बनाते हैं।

6. ऊर्जा संसाधनों का वर्गीकरण (Classification of Energy Resources) कीजिए।

उत्तर ⇒
ऊर्जा संसाधनों को उनकी उपलब्धता एवं पुनः प्राप्त होने की क्षमता के आधार पर दो प्रमुख वर्गों में विभाजित किया जाता है— नवीकरणीय (Renewable) एवं अनवीकरणीय (Non-Renewable) ऊर्जा संसाधन। नवीकरणीय ऊर्जा वे स्रोत हैं जिन्हें बार-बार प्राप्त किया जा सकता है, जबकि अनवीकरणीय ऊर्जा संसाधन सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं और इनके बनने में लाखों वर्ष लगते हैं।

झारखंड में कोयला सबसे प्रमुख अनवीकरणीय ऊर्जा संसाधन है। वहीं सौर ऊर्जा, जल विद्युत एवं बायोमास ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनअनवीकरणीय ऊर्जा संसाधन
सौर ऊर्जाकोयला
पवन ऊर्जापेट्रोलियम
जल विद्युतप्राकृतिक गैस
बायोमास ऊर्जालिग्नाइट

7. झारखंड में कोयले (Coal) का क्या महत्व है?

उत्तर ⇒
कोयला झारखंड का सबसे महत्वपूर्ण खनिज एवं ऊर्जा संसाधन है। राज्य में भारत के कुल कोयला भंडार का बड़ा भाग पाया जाता है। कोयले का उपयोग मुख्य रूप से ताप विद्युत उत्पादन, इस्पात उद्योग, सीमेंट उद्योग तथा अन्य भारी उद्योगों में किया जाता है। झारखंड के झरिया, बोकारो, उत्तर करनपुरा, दक्षिण करनपुरा तथा गिरिडीह प्रमुख कोयला क्षेत्र हैं।

झरिया कोयला क्षेत्र विशेष रूप से उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोल (Coking Coal) के लिए प्रसिद्ध है, जिसका उपयोग इस्पात उद्योग में किया जाता है। कोयला झारखंड की अर्थव्यवस्था एवं औद्योगिक विकास का आधार माना जाता है।

कोयले का महत्व निम्नलिखित है—

(i) ताप विद्युत उत्पादन का प्रमुख स्रोत है।

(ii) इस्पात उद्योग के लिए आवश्यक है।

(iii) उद्योगों को ऊर्जा उपलब्ध कराता है।

(iv) रोजगार के अवसर प्रदान करता है।

(v) राज्य की आय में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

8. झारखंड के प्रमुख कोयला क्षेत्रों (Coalfields) के नाम लिखिए।

उत्तर ⇒
झारखंड भारत का प्रमुख कोयला उत्पादक राज्य है। यहाँ उच्च गुणवत्ता वाले कोयले के विशाल भंडार पाए जाते हैं। राज्य के कोयला क्षेत्रों से देश के अनेक ताप विद्युत गृहों एवं इस्पात उद्योगों को कोयले की आपूर्ति की जाती है। इन क्षेत्रों के कारण धनबाद, बोकारो एवं रामगढ़ जैसे औद्योगिक नगरों का विकास हुआ है।

झारखंड के प्रमुख कोयला क्षेत्र निम्नलिखित हैं—

(i) झरिया कोयला क्षेत्र (धनबाद)

(ii) बोकारो कोयला क्षेत्र

(iii) उत्तर करनपुरा कोयला क्षेत्र

(iv) दक्षिण करनपुरा कोयला क्षेत्र

(v) गिरिडीह कोयला क्षेत्र

(vi) रामगढ़ कोयला क्षेत्र

इन कोयला क्षेत्रों का महत्व—

(i) देश को ऊर्जा उपलब्ध कराते हैं।

(ii) इस्पात उद्योगों को कोकिंग कोल प्रदान करते हैं।

(iii) लाखों लोगों को रोजगार देते हैं।

(iv) औद्योगिक विकास को बढ़ावा देते हैं।

9. झरिया कोयला क्षेत्र (Jharia Coalfield) का परिचय दीजिए।

उत्तर ⇒
झरिया कोयला क्षेत्र झारखंड के धनबाद जिले में स्थित है। यह भारत का सबसे महत्वपूर्ण कोकिंग कोल (Coking Coal) उत्पादक क्षेत्र है। यहाँ से प्राप्त कोयला उच्च गुणवत्ता का होता है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से लौह एवं इस्पात उद्योगों में किया जाता है। झरिया से बोकारो, जमशेदपुर, दुर्गापुर तथा राउरकेला जैसे इस्पात संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति की जाती है।

हालाँकि झरिया क्षेत्र कई वर्षों से भूमिगत आग (Underground Coal Fire) की समस्या से भी प्रभावित है। इसके बावजूद यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण कोयला क्षेत्रों में गिना जाता है।

झरिया कोयला क्षेत्र का महत्व निम्नलिखित है—

(i) भारत का प्रमुख कोकिंग कोल क्षेत्र है।

(ii) इस्पात उद्योगों को कोयला उपलब्ध कराता है।

(iii) देश की ऊर्जा सुरक्षा में योगदान देता है।

(iv) बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार प्रदान करता है।

(v) झारखंड की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है।

10. लौह अयस्क (Iron Ore) का महत्व एवं झारखंड में इसके प्रमुख क्षेत्र लिखिए।

उत्तर ⇒
लौह अयस्क भारत का सबसे महत्वपूर्ण धात्विक खनिज है। इससे लोहा एवं इस्पात का निर्माण किया जाता है। मशीनों, रेलवे, भवन निर्माण, वाहन, पुल तथा विभिन्न औद्योगिक उपकरणों के निर्माण में लौह अयस्क का उपयोग होता है। इसलिए इसे औद्योगिक विकास का आधार माना जाता है।

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित नोआमुंडी, गुवा, किरीबुरू, मेघाहातुबुरू एवं चिरिया भारत के प्रमुख लौह अयस्क क्षेत्र हैं। यहाँ से निकाला गया लौह अयस्क जमशेदपुर, बोकारो तथा देश के अन्य इस्पात संयंत्रों को भेजा जाता है।

लौह अयस्क का महत्व निम्नलिखित है—

(i) इस्पात उद्योग का प्रमुख कच्चा माल है।

(ii) मशीन एवं वाहन निर्माण में उपयोग होता है।

(iii) औद्योगिक विकास को बढ़ावा देता है।

(iv) निर्यात द्वारा विदेशी मुद्रा अर्जित होती है।

(v) झारखंड की अर्थव्यवस्था एवं रोजगार में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

11. झारखंड में लौह अयस्क (Iron Ore) के प्रमुख क्षेत्र कौन-कौन से हैं?

उत्तर ⇒
झारखंड भारत के प्रमुख लौह अयस्क उत्पादक राज्यों में से एक है। राज्य के पश्चिमी सिंहभूम जिले में उच्च गुणवत्ता का हेमेटाइट (Hematite) लौह अयस्क पाया जाता है। यह लौह अयस्क इस्पात उद्योग के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। झारखंड से निकाला गया लौह अयस्क देश के विभिन्न इस्पात संयंत्रों के साथ-साथ विदेशों में भी निर्यात किया जाता है।

लौह अयस्क की उपलब्धता के कारण झारखंड में टाटा स्टील (जमशेदपुर) तथा बोकारो इस्पात संयंत्र जैसे बड़े उद्योगों का विकास हुआ है। यह राज्य की अर्थव्यवस्था एवं औद्योगिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार है।

झारखंड के प्रमुख लौह अयस्क क्षेत्र निम्नलिखित हैं—

(i) नोआमुंडी

(ii) गुवा

(iii) किरीबुरू

(iv) मेघाहातुबुरू

(v) चिरिया

(vi) मनोहरपुर क्षेत्र

12. झारखंड में ताँबा (Copper) के उत्पादन का महत्व लिखिए।

उत्तर ⇒
ताँबा एक महत्वपूर्ण अलौह धातु (Non-Ferrous Metal) है, जिसका उपयोग विद्युत उपकरणों, तारों, इलेक्ट्रॉनिक सामान, मशीनों तथा मिश्रधातुओं के निर्माण में किया जाता है। झारखंड ताँबा उत्पादन की दृष्टि से देश के प्रमुख राज्यों में से एक है। राज्य का घाटशिला (पूर्वी सिंहभूम) क्षेत्र ताँबा उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।

घाटशिला के निकट मुसाबनी, राखा, केन्दाडीह एवं सुरदा जैसी खदानों से ताँबा निकाला जाता है। इन खदानों के कारण क्षेत्र में खनन एवं धातु उद्योगों का विकास हुआ है तथा हजारों लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है।

ताँबे का महत्व निम्नलिखित है—

(i) विद्युत तारों के निर्माण में उपयोग होता है।

(ii) इलेक्ट्रॉनिक उद्योग का प्रमुख कच्चा माल है।

(iii) मशीन निर्माण में उपयोग किया जाता है।

(iv) मिश्रधातुओं के निर्माण में प्रयुक्त होता है।

(v) औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

13. झारखंड में अभ्रक (Mica) का महत्व लिखिए।

उत्तर ⇒
अभ्रक (Mica) एक महत्वपूर्ण अधात्विक खनिज है, जो अपनी चमक, तापरोधी क्षमता तथा विद्युत रोधन (Electrical Insulation) गुणों के लिए प्रसिद्ध है। झारखंड का कोडरमा जिला लंबे समय तक “विश्व की अभ्रक राजधानी” (Mica Capital of the World) के नाम से प्रसिद्ध रहा है। इसके अतिरिक्त गिरिडीह एवं हजारीबाग क्षेत्रों में भी अभ्रक पाया जाता है।

अभ्रक का उपयोग विद्युत उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, रंग, सौंदर्य प्रसाधन तथा अंतरिक्ष तकनीक में किया जाता है। यद्यपि वर्तमान समय में इसका उत्पादन पहले की तुलना में कम हुआ है, फिर भी इसका औद्योगिक महत्व बना हुआ है।

अभ्रक का महत्व निम्नलिखित है—

(i) विद्युत रोधन सामग्री के रूप में उपयोग होता है।

(ii) इलेक्ट्रॉनिक उद्योग में प्रयुक्त होता है।

(iii) सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण में उपयोग होता है।

(iv) तापरोधी पदार्थ के रूप में कार्य करता है।

(v) निर्यात द्वारा विदेशी मुद्रा अर्जित होती है।

14. झारखंड में यूरेनियम (Uranium) का उत्पादन कहाँ होता है? इसका महत्व लिखिए।

उत्तर ⇒
यूरेनियम एक अत्यंत महत्वपूर्ण रेडियोधर्मी खनिज है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy) के उत्पादन में किया जाता है। झारखंड भारत का प्रमुख यूरेनियम उत्पादक राज्य है। राज्य के पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा (Jadugoda) क्षेत्र में भारत की प्रमुख यूरेनियम खदान स्थित है।

यहाँ से निकाले गए यूरेनियम का उपयोग देश के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है। यूरेनियम का उपयोग वैज्ञानिक अनुसंधान एवं रक्षा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

यूरेनियम का महत्व निम्नलिखित है—

(i) परमाणु ऊर्जा उत्पादन में उपयोग होता है।

(ii) स्वच्छ ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत है।

(iii) वैज्ञानिक अनुसंधान में उपयोग किया जाता है।

(iv) देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करता है।

(v) रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण खनिज है।

15. झारखंड में बॉक्साइट (Bauxite) का महत्व लिखिए।

उत्तर ⇒
बॉक्साइट एल्यूमिनियम का प्रमुख अयस्क है। इससे एल्यूमिनियम धातु प्राप्त की जाती है, जिसका उपयोग विमान, रेल, विद्युत तार, रसोई के बर्तन, पैकेजिंग उद्योग तथा मशीन निर्माण में किया जाता है। झारखंड के लोहरदगा, गुमला एवं लातेहार जिलों में बॉक्साइट के महत्वपूर्ण भंडार पाए जाते हैं।

एल्यूमिनियम हल्की, मजबूत तथा जंगरोधी धातु है, इसलिए आधुनिक उद्योगों में इसकी माँग लगातार बढ़ रही है। बॉक्साइट के खनन से झारखंड के अनेक लोगों को रोजगार मिलता है तथा राज्य की अर्थव्यवस्था को भी लाभ होता है।

बॉक्साइट का महत्व निम्नलिखित है—

(i) एल्यूमिनियम निर्माण का प्रमुख कच्चा माल है।

(ii) विमान एवं परिवहन उद्योग में उपयोग होता है।

(iii) विद्युत उद्योग में प्रयुक्त होता है।

(iv) रोजगार एवं आय का महत्वपूर्ण स्रोत है।

(v) औद्योगिक एवं आर्थिक विकास में योगदान देता है।

16. झारखंड में चूना पत्थर (Limestone) का महत्व लिखिए।

उत्तर ⇒
चूना पत्थर (Limestone) एक महत्वपूर्ण अधात्विक खनिज है। इसका उपयोग मुख्य रूप से सीमेंट उद्योग, लौह एवं इस्पात उद्योग, रासायनिक उद्योग तथा भवन निर्माण कार्यों में किया जाता है। झारखंड के पलामू, गढ़वा, राँची, सिंहभूम एवं हजारीबाग जिलों में चूना पत्थर के महत्वपूर्ण भंडार पाए जाते हैं।

चूना पत्थर इस्पात उद्योग में अशुद्धियों को हटाने (Flux) के रूप में भी प्रयुक्त होता है। झारखंड में सीमेंट उद्योगों के विकास में इस खनिज का महत्वपूर्ण योगदान है। निर्माण कार्यों में इसकी बढ़ती मांग के कारण इसका आर्थिक महत्व लगातार बढ़ रहा है।

चूना पत्थर का महत्व निम्नलिखित है—

(i) सीमेंट निर्माण का प्रमुख कच्चा माल है।

(ii) इस्पात उद्योग में उपयोग होता है।

(iii) भवन निर्माण कार्यों में प्रयुक्त होता है।

(iv) रासायनिक उद्योग में उपयोग किया जाता है।

(v) औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

17. ताप विद्युत (Thermal Power) क्या है? झारखंड में इसके प्रमुख केंद्रों के नाम लिखिए।

उत्तर ⇒
कोयला, पेट्रोलियम अथवा प्राकृतिक गैस जैसे ईंधनों को जलाकर उत्पन्न ऊष्मा से बनाई जाने वाली विद्युत को ताप विद्युत (Thermal Power) कहते हैं। भारत में बिजली उत्पादन का सबसे बड़ा स्रोत ताप विद्युत है। झारखंड में प्रचुर मात्रा में कोयला उपलब्ध होने के कारण ताप विद्युत उत्पादन का विशेष महत्व है।

राज्य में कई ताप विद्युत गृह स्थापित किए गए हैं, जो झारखंड के साथ-साथ अन्य राज्यों को भी बिजली उपलब्ध कराते हैं। इन परियोजनाओं ने औद्योगिक विकास को गति प्रदान की है।

झारखंड के प्रमुख ताप विद्युत केंद्र निम्नलिखित हैं—

(i) पतरातू ताप विद्युत स्टेशन (रामगढ़)

(ii) तेनुघाट ताप विद्युत परियोजना (बोकारो)

(iii) बोकारो ताप विद्युत केंद्र

(iv) मैथन ताप विद्युत परियोजनाएँ (DVC क्षेत्र)

(v) कोडरमा ताप विद्युत परियोजना

18. जल विद्युत एवं ताप विद्युत में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒
जल विद्युत एवं ताप विद्युत दोनों ही बिजली उत्पादन के प्रमुख स्रोत हैं, लेकिन इनके उत्पादन की विधि एवं ऊर्जा स्रोत अलग-अलग होते हैं। जल विद्युत नदियों एवं बाँधों के जल से उत्पन्न होती है, जबकि ताप विद्युत कोयला, पेट्रोलियम अथवा गैस जैसे ईंधनों को जलाकर उत्पन्न की जाती है।

जल विद्युतताप विद्युत
(i) जल की शक्ति से उत्पन्न होती है।(i) कोयला या अन्य ईंधन जलाकर उत्पन्न होती है।
(ii) नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है।(ii) अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत पर आधारित है।
(iii) पर्यावरण प्रदूषण कम होता है।(iii) वायु प्रदूषण अधिक होता है।
(iv) बाँधों एवं नदियों पर निर्भर करती है।(iv) कोयले एवं ईंधन की उपलब्धता पर निर्भर करती है।
(v) संचालन लागत अपेक्षाकृत कम होती है।(v) ईंधन की लागत अधिक होती है।

19. नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) का महत्व लिखिए।

उत्तर ⇒
नवीकरणीय ऊर्जा वे ऊर्जा स्रोत हैं जो प्रकृति में लगातार उपलब्ध रहते हैं तथा बार-बार उपयोग किए जा सकते हैं। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल विद्युत एवं बायोमास इसके प्रमुख उदाहरण हैं। वर्तमान समय में ऊर्जा की बढ़ती मांग एवं पर्यावरण प्रदूषण को देखते हुए इन ऊर्जा स्रोतों का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

झारखंड में सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएँ हैं। राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित योजनाओं को बढ़ावा दे रही है ताकि बिजली की उपलब्धता बढ़ाई जा सके तथा पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम हो।

नवीकरणीय ऊर्जा का महत्व निम्नलिखित है—

(i) पर्यावरण के अनुकूल होती है।

(ii) प्रदूषण कम करती है।

(iii) ऊर्जा का सतत स्रोत है।

(iv) जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करती है।

(v) भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक है।

20. झारखंड में खनन (Mining) का आर्थिक महत्व लिखिए।

उत्तर ⇒
झारखंड की अर्थव्यवस्था में खनन उद्योग का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। राज्य में कोयला, लौह अयस्क, ताँबा, बॉक्साइट, अभ्रक एवं यूरेनियम जैसे बहुमूल्य खनिजों का बड़े पैमाने पर खनन किया जाता है। इन खनिजों के कारण इस्पात, ऊर्जा, सीमेंट तथा अन्य भारी उद्योगों का विकास हुआ है।

खनन उद्योग से राज्य सरकार को राजस्व प्राप्त होता है तथा लाखों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है। इसके साथ ही परिवहन, व्यापार एवं अन्य सेवा क्षेत्रों का भी विकास होता है। हालांकि, खनन कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण एवं पुनर्वनीकरण पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

खनन का आर्थिक महत्व निम्नलिखित है—

(i) रोजगार के अवसर प्रदान करता है।

(ii) राज्य की आय में वृद्धि करता है।

(iii) उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध कराता है।

(iv) औद्योगिक एवं आधारभूत विकास को बढ़ावा देता है।

(v) निर्यात एवं विदेशी मुद्रा अर्जित करने में सहायता करता है।

(vi) क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति प्रदान करता है।

21. झारखंड में खनन के पर्यावरणीय प्रभाव (Environmental Impacts of Mining) लिखिए।

उत्तर ⇒
खनन झारखंड की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन अनियंत्रित एवं वैज्ञानिक ढंग से न किए जाने वाले खनन के कारण पर्यावरण पर अनेक प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं। खनन के लिए बड़े पैमाने पर वनों की कटाई की जाती है, जिससे जैव विविधता प्रभावित होती है। खदानों से निकलने वाली धूल एवं धुआँ वायु प्रदूषण बढ़ाते हैं, जबकि खनिज अपशिष्ट जल स्रोतों को प्रदूषित करते हैं। भूमि की उर्वरता कम होने के कारण कृषि भी प्रभावित होती है।

झारखंड के धनबाद, रामगढ़, बोकारो एवं पश्चिमी सिंहभूम जैसे खनन क्षेत्रों में इन समस्याओं को देखा जा सकता है। इसलिए खनन के साथ पर्यावरण संरक्षण एवं पुनर्वनीकरण आवश्यक है।

खनन के प्रमुख पर्यावरणीय प्रभाव निम्नलिखित हैं—

(i) वनों की कटाई होती है।

(ii) वायु एवं जल प्रदूषण बढ़ता है।

(iii) भूमि की उर्वरता कम होती है।

(iv) वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट होता है।

(v) पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होता है।

22. खनिज संसाधनों के संरक्षण (Conservation of Mineral Resources) की आवश्यकता क्यों है?

उत्तर ⇒
खनिज संसाधन प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं। इनके निर्माण में लाखों वर्ष लगते हैं, इसलिए इन्हें अनवीकरणीय संसाधन कहा जाता है। यदि इनका अत्यधिक एवं अव्यवस्थित दोहन किया जाए, तो भविष्य में इनकी कमी हो सकती है। इसलिए खनिजों का विवेकपूर्ण उपयोग एवं संरक्षण आवश्यक है।

झारखंड जैसे खनिज सम्पन्न राज्य में वैज्ञानिक खनन, पुनर्चक्रण (Recycling), नई तकनीकों का उपयोग तथा खनिजों की बर्बादी रोककर इनके संरक्षण को सुनिश्चित किया जा सकता है। इससे आने वाली पीढ़ियों के लिए भी खनिज उपलब्ध रहेंगे।

खनिज संरक्षण की आवश्यकता निम्नलिखित है—

(i) भविष्य के लिए खनिज सुरक्षित रखने हेतु।

(ii) प्राकृतिक संसाधनों की बर्बादी रोकने हेतु।

(iii) पर्यावरण संरक्षण के लिए।

(iv) सतत विकास सुनिश्चित करने हेतु।

(v) औद्योगिक विकास को निरंतर बनाए रखने हेतु।

23. ऊर्जा संरक्षण (Energy Conservation) क्या है? इसके प्रमुख उपाय लिखिए।

उत्तर ⇒
ऊर्जा का आवश्यकता अनुसार एवं विवेकपूर्ण उपयोग करना तथा अनावश्यक अपव्यय को रोकना ऊर्जा संरक्षण (Energy Conservation) कहलाता है। वर्तमान समय में ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ रही है, जबकि कोयला, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस जैसे संसाधन सीमित हैं। इसलिए ऊर्जा का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

झारखंड जैसे औद्योगिक राज्य में ऊर्जा की खपत अधिक होती है। यदि ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग किया जाए तथा नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दिया जाए, तो ऊर्जा की बचत की जा सकती है।

ऊर्जा संरक्षण के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं—

(i) बिजली का अनावश्यक उपयोग न करना।

(ii) ऊर्जा दक्ष (Energy Efficient) उपकरणों का उपयोग करना।

(iii) सौर एवं पवन ऊर्जा को बढ़ावा देना।

(iv) सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करना।

(v) उद्योगों में आधुनिक ऊर्जा बचत तकनीकों का उपयोग करना।

(vi) लोगों में ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना।

24. झारखंड में सौर ऊर्जा (Solar Energy) का महत्व लिखिए।

उत्तर ⇒
सौर ऊर्जा सूर्य से प्राप्त होने वाली स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा है। झारखंड में वर्ष के अधिकांश समय पर्याप्त धूप उपलब्ध रहती है, इसलिए यहाँ सौर ऊर्जा के विकास की अच्छी संभावनाएँ हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर लाइट, सोलर पंप एवं सोलर स्ट्रीट लाइट जैसी योजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सौर ऊर्जा के उपयोग से कोयले एवं अन्य जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होती है तथा पर्यावरण प्रदूषण भी घटता है। यह दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम बन रही है।

सौर ऊर्जा का महत्व निम्नलिखित है—

(i) स्वच्छ एवं प्रदूषण रहित ऊर्जा स्रोत है।

(ii) नवीकरणीय ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है।

(iii) बिजली की बचत होती है।

(iv) ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली उपलब्ध कराती है।

(v) पर्यावरण संरक्षण में सहायक है।

25. झारखंड की अर्थव्यवस्था में खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों का योगदान लिखिए।

उत्तर ⇒
झारखंड भारत का प्रमुख खनिज एवं ऊर्जा संसाधन सम्पन्न राज्य है। यहाँ उपलब्ध कोयला, लौह अयस्क, ताँबा, बॉक्साइट, यूरेनियम एवं अन्य खनिजों के कारण राज्य में इस्पात, बिजली, सीमेंट एवं भारी उद्योगों का विकास हुआ है। खनिजों के उत्पादन एवं निर्यात से राज्य सरकार को राजस्व प्राप्त होता है तथा लाखों लोगों को रोजगार मिलता है।

कोयले के विशाल भंडार के कारण झारखंड देश के ऊर्जा उत्पादन में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसलिए खनिज एवं ऊर्जा संसाधन राज्य के आर्थिक विकास की रीढ़ माने जाते हैं।

खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों का योगदान निम्नलिखित है—

(i) औद्योगिक विकास को गति देते हैं।

(ii) रोजगार के अवसर बढ़ाते हैं।

(iii) राज्य की आय में वृद्धि करते हैं।

(iv) बिजली उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

(v) आधारभूत संरचना के विकास में सहायता करते हैं।

(vi) झारखंड को भारत के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में स्थान दिलाते हैं।

26. झारखंड में प्राकृतिक गैस (Natural Gas) का महत्व लिखिए।

उत्तर ⇒
प्राकृतिक गैस (Natural Gas) एक महत्वपूर्ण जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) है। यह पेट्रोलियम के साथ अथवा स्वतंत्र रूप से पृथ्वी के अंदर पाई जाती है। प्राकृतिक गैस को स्वच्छ ईंधन माना जाता है, क्योंकि इसके उपयोग से कोयले एवं पेट्रोलियम की तुलना में कम प्रदूषण होता है। इसका उपयोग बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग, रासायनिक उद्योग तथा घरेलू ईंधन के रूप में किया जाता है।

झारखंड में प्राकृतिक गैस के बड़े भंडार नहीं हैं, इसलिए राज्य अपनी आवश्यकता के अनुसार अन्य राज्यों से गैस प्राप्त करता है। भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए प्राकृतिक गैस का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

प्राकृतिक गैस का महत्व निम्नलिखित है—

(i) स्वच्छ ईंधन है।

(ii) बिजली उत्पादन में उपयोग होती है।

(iii) उर्वरक उद्योग का प्रमुख कच्चा माल है।

(iv) वायु प्रदूषण कम करती है।

(v) औद्योगिक विकास में सहायक है।

27. झारखंड में पेट्रोलियम (Petroleum) का महत्व लिखिए।

उत्तर ⇒
पेट्रोलियम आधुनिक उद्योग एवं परिवहन का प्रमुख ऊर्जा स्रोत है। इससे पेट्रोल, डीजल, मिट्टी का तेल, एलपीजी, डामर तथा अनेक पेट्रो-रासायनिक पदार्थ प्राप्त होते हैं। झारखंड में पेट्रोलियम के बड़े भंडार नहीं हैं, इसलिए राज्य अपनी आवश्यकता के अनुसार अन्य राज्यों से इसकी आपूर्ति प्राप्त करता है।

पेट्रोलियम का उपयोग परिवहन, उद्योग, कृषि मशीनों एवं बिजली उत्पादन में किया जाता है। वर्तमान समय में इसकी बढ़ती खपत के कारण ऊर्जा संरक्षण एवं वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विकास पर विशेष बल दिया जा रहा है।

पेट्रोलियम का महत्व निम्नलिखित है—

(i) परिवहन का प्रमुख ईंधन है।

(ii) उद्योगों में व्यापक उपयोग होता है।

(iii) पेट्रो-रासायनिक उद्योग का आधार है।

(iv) कृषि कार्यों में उपयोग होता है।

(v) आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

28. खनिज संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग (Judicious Use of Mineral Resources) की आवश्यकता क्यों है?

उत्तर ⇒
खनिज संसाधन सीमित एवं अनवीकरणीय प्राकृतिक संसाधन हैं। इनके निर्माण में लाखों वर्ष लगते हैं, इसलिए इनका अत्यधिक दोहन भविष्य में गंभीर संकट उत्पन्न कर सकता है। खनिजों का विवेकपूर्ण उपयोग करने से उनका लंबे समय तक लाभ उठाया जा सकता है तथा प्राकृतिक संतुलन भी बना रहता है।

झारखंड जैसे खनिज सम्पन्न राज्य में वैज्ञानिक खनन, पुनर्चक्रण (Recycling), आधुनिक तकनीकों का उपयोग तथा खनिजों की बर्बादी रोकना अत्यंत आवश्यक है। इससे आर्थिक विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है।

विवेकपूर्ण उपयोग के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—

(i) खनिजों की बर्बादी कम होती है।

(ii) भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधन सुरक्षित रहते हैं।

(iii) पर्यावरण संरक्षण होता है।

(iv) सतत विकास को बढ़ावा मिलता है।

(v) औद्योगिक विकास निरंतर बना रहता है।

29. झारखंड में ऊर्जा संसाधनों के विकास की संभावनाएँ लिखिए।

उत्तर ⇒
झारखंड ऊर्जा संसाधनों की दृष्टि से भारत का महत्वपूर्ण राज्य है। यहाँ कोयले के विशाल भंडार उपलब्ध हैं, जिनके आधार पर ताप विद्युत उत्पादन किया जाता है। इसके अतिरिक्त राज्य में जल विद्युत, सौर ऊर्जा तथा बायोमास ऊर्जा के विकास की भी पर्याप्त संभावनाएँ हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। आने वाले समय में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विकास से ऊर्जा संकट को कम किया जा सकता है तथा पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

ऊर्जा विकास की प्रमुख संभावनाएँ निम्नलिखित हैं—

(i) सौर ऊर्जा का विस्तार।

(ii) जल विद्युत परियोजनाओं का विकास।

(iii) बायोमास ऊर्जा का उपयोग।

(iv) ताप विद्युत उत्पादन में वृद्धि।

(v) ऊर्जा संरक्षण तकनीकों का विकास।

(vi) स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना।

30. खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों के संरक्षण में नागरिकों की भूमिका लिखिए।

उत्तर ⇒
खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का भी कर्तव्य है। यदि लोग बिजली, पेट्रोल, डीजल एवं अन्य ऊर्जा स्रोतों का आवश्यकता अनुसार उपयोग करें तथा प्राकृतिक संसाधनों की बर्बादी रोकें, तो इनका संरक्षण संभव है। साथ ही ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग एवं नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाकर भी महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।

झारखंड जैसे खनिज सम्पन्न राज्य में नागरिकों की जागरूकता प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं सतत विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

नागरिकों की प्रमुख भूमिका निम्नलिखित है—

(i) बिजली की बचत करना।

(ii) खनिज संसाधनों का अनावश्यक उपयोग न करना।

(iii) सौर एवं अन्य नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना।

(iv) पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहना।

(v) पुनर्चक्रण (Recycling) को बढ़ावा देना।

(vi) प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति दूसरों को प्रेरित करना।

31. झारखंड में ऊर्जा संसाधनों के विकास में दामोदर घाटी निगम (DVC) की भूमिका लिखिए।

उत्तर ⇒
दामोदर घाटी निगम (Damodar Valley Corporation – DVC) की स्थापना वर्ष 1948 में दामोदर नदी घाटी के समग्र विकास के उद्देश्य से की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, जल विद्युत उत्पादन, ताप विद्युत उत्पादन तथा औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है। झारखंड के कोयला क्षेत्रों एवं औद्योगिक नगरों के विकास में DVC की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

DVC द्वारा संचालित ताप विद्युत एवं जल विद्युत परियोजनाएँ झारखंड सहित पूर्वी भारत के अनेक राज्यों को बिजली उपलब्ध कराती हैं। इससे उद्योगों, कृषि एवं घरेलू क्षेत्रों में ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित होती है।

DVC की प्रमुख भूमिकाएँ निम्नलिखित हैं—

(i) जल एवं ताप विद्युत का उत्पादन करना।

(ii) बाढ़ नियंत्रण करना।

(iii) सिंचाई सुविधाओं का विकास करना।

(iv) औद्योगिक क्षेत्रों को बिजली उपलब्ध कराना।

(v) क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देना।

32. झारखंड में खनिज आधारित उद्योग (Mineral-Based Industries) कौन-कौन से हैं?

उत्तर ⇒
झारखंड में खनिजों की प्रचुर उपलब्धता के कारण अनेक खनिज आधारित उद्योग स्थापित हुए हैं। ये उद्योग राज्य के आर्थिक विकास, रोजगार एवं औद्योगिकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लौह अयस्क, कोयला, चूना पत्थर एवं बॉक्साइट जैसे खनिज इन उद्योगों के प्रमुख कच्चे माल हैं।

जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद, रामगढ़ एवं राँची जैसे औद्योगिक क्षेत्रों का विकास खनिज संसाधनों के कारण ही संभव हुआ है।

झारखंड के प्रमुख खनिज आधारित उद्योग निम्नलिखित हैं—

(i) लौह एवं इस्पात उद्योग।

(ii) ताप विद्युत उद्योग।

(iii) सीमेंट उद्योग।

(iv) एल्यूमिनियम उद्योग।

(v) ताँबा उद्योग।

(vi) कोक उद्योग।

(vii) मशीन निर्माण उद्योग।

33. खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों का सतत विकास (Sustainable Development) में क्या महत्व है?

उत्तर ⇒
सतत विकास का अर्थ है प्राकृतिक संसाधनों का ऐसा उपयोग जिससे वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति हो तथा भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी संसाधन सुरक्षित रहें। खनिज एवं ऊर्जा संसाधन औद्योगिक विकास के आधार हैं, लेकिन इनके अनियंत्रित दोहन से पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुँच सकता है। इसलिए इनका संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग आवश्यक है।

झारखंड में वैज्ञानिक खनन, पुनर्वनीकरण, ऊर्जा संरक्षण तथा नवीकरणीय ऊर्जा के विकास के माध्यम से सतत विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है।

सतत विकास में खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों का महत्व निम्नलिखित है—

(i) औद्योगिक विकास को गति देते हैं।

(ii) रोजगार के अवसर बढ़ाते हैं।

(iii) आर्थिक विकास में योगदान देते हैं।

(iv) संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करते हैं।

(v) पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देते हैं।

(vi) भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधन सुरक्षित रखते हैं।

34. झारखंड में खनिज संसाधनों के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ लिखिए।

उत्तर ⇒
झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है, लेकिन खनिज संसाधनों के दोहन के साथ अनेक चुनौतियाँ भी जुड़ी हुई हैं। अवैध खनन, पर्यावरण प्रदूषण, वनों की कटाई, भूमि क्षरण एवं खनिजों का तेजी से समाप्त होना प्रमुख समस्याएँ हैं। कई क्षेत्रों में खनन के कारण स्थानीय लोगों का विस्थापन भी हुआ है।

इन समस्याओं के समाधान के लिए वैज्ञानिक खनन, पर्यावरण संरक्षण, पुनर्वनीकरण तथा खनिजों के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता है।

प्रमुख चुनौतियाँ निम्नलिखित हैं—

(i) अवैध खनन।

(ii) वनों की कटाई।

(iii) पर्यावरण प्रदूषण।

(iv) भूमि क्षरण।

(v) स्थानीय लोगों का विस्थापन।

(vi) खनिज संसाधनों का अत्यधिक दोहन।

35. खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों के संरक्षण के प्रमुख उपाय लिखिए।

उत्तर ⇒
खनिज एवं ऊर्जा संसाधन सीमित प्राकृतिक संपदा हैं। इनका संरक्षण आर्थिक विकास एवं पर्यावरणीय संतुलन दोनों के लिए आवश्यक है। आधुनिक तकनीकों के उपयोग, वैज्ञानिक खनन, पुनर्चक्रण तथा ऊर्जा संरक्षण के माध्यम से इन संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देकर अनवीकरणीय संसाधनों पर निर्भरता कम की जा सकती है।

झारखंड में खनन के बाद पुनर्वनीकरण, ऊर्जा दक्ष तकनीकों का उपयोग तथा जन-जागरूकता कार्यक्रम संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

संरक्षण के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं—

(i) वैज्ञानिक एवं नियंत्रित खनन करना।

(ii) खनिजों का पुनर्चक्रण (Recycling) बढ़ाना।

(iii) ऊर्जा का विवेकपूर्ण उपयोग करना।

(iv) सौर एवं अन्य नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना।

(v) खनन के बाद वृक्षारोपण करना।

(vi) पर्यावरण संरक्षण कानूनों का पालन करना।

(vii) लोगों में संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना।

36. झारखंड में नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के विकास की आवश्यकता क्यों है?

उत्तर ⇒
वर्तमान समय में कोयला, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस जैसे अनवीकरणीय ऊर्जा संसाधन तेजी से समाप्त हो रहे हैं। इनके अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण प्रदूषण एवं जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएँ भी बढ़ रही हैं। इसलिए झारखंड में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों जैसे सौर ऊर्जा, जल विद्युत एवं बायोमास ऊर्जा के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

झारखंड में वर्षभर पर्याप्त धूप उपलब्ध रहती है, जिससे सौर ऊर्जा उत्पादन की अच्छी संभावनाएँ हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर पंप, सोलर स्ट्रीट लाइट एवं रूफटॉप सोलर परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध होने के साथ-साथ कोयले पर निर्भरता भी कम होगी।

नवीकरणीय ऊर्जा के विकास की आवश्यकता निम्नलिखित है—

(i) ऊर्जा संकट को कम करने के लिए।

(ii) पर्यावरण प्रदूषण घटाने के लिए।

(iii) जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने के लिए।

(iv) सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए।

(v) स्वच्छ एवं सुरक्षित ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए।

37. झारखंड में खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों के संरक्षण में सरकार की भूमिका लिखिए।

उत्तर ⇒
झारखंड सरकार खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों के संरक्षण तथा उनके वैज्ञानिक उपयोग के लिए अनेक योजनाएँ संचालित कर रही है। सरकार द्वारा अवैध खनन पर नियंत्रण, वैज्ञानिक खनन को बढ़ावा, पर्यावरणीय नियमों का पालन, खनन के बाद पुनर्वनीकरण तथा नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का विकास किया जा रहा है। इसके साथ ही ऊर्जा संरक्षण एवं संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।

सरकार का उद्देश्य आर्थिक विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना है ताकि प्राकृतिक संसाधनों का लाभ वर्तमान एवं भविष्य दोनों पीढ़ियों को मिल सके।

सरकार की प्रमुख भूमिकाएँ निम्नलिखित हैं—

(i) अवैध खनन पर रोक लगाना।

(ii) वैज्ञानिक खनन को बढ़ावा देना।

(iii) खनन के बाद वृक्षारोपण कराना।

(iv) नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को प्रोत्साहित करना।

(v) पर्यावरण संरक्षण कानूनों का पालन कराना।

(vi) ऊर्जा संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता फैलाना।

38. खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों के संरक्षण में नागरिकों की भूमिका लिखिए।

उत्तर ⇒
प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण केवल सरकार का दायित्व नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी भी है। नागरिक यदि बिजली, पेट्रोल, डीजल एवं अन्य ऊर्जा स्रोतों का आवश्यकता के अनुसार उपयोग करें तथा प्राकृतिक संसाधनों की बर्बादी रोकें, तो खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों का संरक्षण संभव है। ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग, सार्वजनिक परिवहन अपनाना तथा सौर ऊर्जा का प्रयोग भी संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

झारखंड जैसे खनिज सम्पन्न राज्य में नागरिकों की भागीदारी संसाधनों के सतत उपयोग एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है।

नागरिकों की प्रमुख भूमिका निम्नलिखित है—

(i) बिजली की बचत करना।

(ii) खनिजों का अनावश्यक उपयोग न करना।

(iii) सौर एवं अन्य स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना।

(iv) पर्यावरण संरक्षण में सहयोग देना।

(v) पुनर्चक्रण (Recycling) को बढ़ावा देना।

(vi) प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना।

39. झारखंड के आर्थिक विकास में खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों का क्या योगदान है?

उत्तर ⇒
झारखंड की पहचान भारत के प्रमुख खनिज एवं औद्योगिक राज्यों में होती है। राज्य में उपलब्ध कोयला, लौह अयस्क, ताँबा, बॉक्साइट, यूरेनियम एवं अन्य खनिजों के कारण इस्पात, बिजली, सीमेंट एवं भारी उद्योगों का तीव्र विकास हुआ है। इन उद्योगों से लाखों लोगों को रोजगार मिलता है तथा राज्य सरकार को महत्वपूर्ण राजस्व प्राप्त होता है।

खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों के कारण झारखंड राष्ट्रीय औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। यदि इन संसाधनों का वैज्ञानिक एवं संतुलित उपयोग किया जाए, तो राज्य का सतत आर्थिक विकास और अधिक तेज़ी से हो सकता है।

आर्थिक विकास में प्रमुख योगदान निम्नलिखित है—

(i) औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मिलता है।

(ii) रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।

(iii) राज्य की आय में वृद्धि होती है।

(iv) बिजली उत्पादन को गति मिलती है।

(v) आधारभूत संरचना का विकास होता है।

(vi) निर्यात एवं व्यापार को बढ़ावा मिलता है।

40. ‘खनिज और ऊर्जा संसाधन’ अध्याय का निष्कर्ष लिखिए।

उत्तर ⇒
खनिज एवं ऊर्जा संसाधन किसी भी देश एवं राज्य के आर्थिक विकास की आधारशिला हैं। झारखंड प्राकृतिक खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है, जहाँ कोयला, लौह अयस्क, ताँबा, बॉक्साइट, यूरेनियम, अभ्रक एवं अन्य महत्वपूर्ण खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इन संसाधनों के कारण राज्य में इस्पात, ऊर्जा एवं अन्य भारी उद्योगों का व्यापक विकास हुआ है।

चूँकि अधिकांश खनिज एवं जीवाश्म ईंधन अनवीकरणीय संसाधन हैं, इसलिए उनका वैज्ञानिक एवं विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है। खनिज संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण, पुनर्चक्रण, वैज्ञानिक खनन, पुनर्वनीकरण तथा सौर एवं जल विद्युत जैसी नवीकरणीय ऊर्जा के विकास से झारखंड का सतत एवं संतुलित विकास सुनिश्चित किया जा सकता है। सरकार, उद्योगों एवं नागरिकों के संयुक्त प्रयास से प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण कर भविष्य की पीढ़ियों के लिए इन्हें सुरक्षित रखा जा सकता है।

More Class 10 Geography Revision Notes

Chapter 1: संसाधन एवं विकास
Chapter 2: वन और वन्य जीव संसाधन
Chapter 3: जल संसाधन
Chapter 4: कृषि
Chapter 5: खनिज और ऊर्जा संसाधन
Chapter 6: विनिर्माण उद्योग
Chapter 7: राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ

Class 10 Notes by Subject

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