Class 9 Economics Revision Notes

भारत में खाद्य सुरक्षा

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Chapter Overview

Class9
SubjectEconomics 
Chapter Nameभारत में खाद्य सुरक्षा
Resource TypeRevision Notes
SyllabusNCERT
Suitable ForCBSE, JAC and other state boards

भारत में खाद्य सुरक्षा Revision Notes

1. खाद्य सुरक्षा क्या है? इसके मुख्य आयामों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ खाद्य सुरक्षा का अर्थ है कि सभी लोगों को हर समय पर्याप्त, सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति भोजन के अभाव का सामना न करे। खाद्य सुरक्षा के तीन प्रमुख आयाम हैं—खाद्य उपलब्धता, खाद्य तक पहुँच तथा भोजन खरीदने की सामर्थ्य। खाद्य उपलब्धता का संबंध उत्पादन, आयात और सरकारी भंडार से है। खाद्य तक पहुँच का अर्थ सभी लोगों को भोजन उपलब्ध होना है, जबकि भोजन खरीदने की सामर्थ्य का अर्थ है कि लोगों के पास पौष्टिक भोजन खरीदने के लिए पर्याप्त आय हो।

(i) पर्याप्त भोजन उपलब्ध होना चाहिए।

(ii) भोजन सुरक्षित एवं पौष्टिक होना चाहिए।

(iii) खाद्य उपलब्धता आवश्यक है।

(iv) सभी लोगों की भोजन तक पहुँच होनी चाहिए।

(v) भोजन खरीदने की क्षमता होनी चाहिए।

2. खाद्य सुरक्षा किन बातों पर निर्भर करती है? खाद्य सुरक्षा कब सुनिश्चित होती है?

उत्तर ⇒ खाद्य सुरक्षा सार्वजनिक वितरण प्रणाली, सरकारी सतर्कता तथा संकट की स्थिति में सरकार द्वारा उठाए गए प्रभावी कदमों पर निर्भर करती है। किसी देश में खाद्य सुरक्षा तभी सुनिश्चित मानी जाती है जब सभी लोगों के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद्य उपलब्ध हो, प्रत्येक व्यक्ति के पास स्वीकार्य गुणवत्ता का भोजन खरीदने की क्षमता हो तथा खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और वितरण में कोई बाधा न हो। इन तीनों शर्तों के पूरा होने पर ही खाद्य सुरक्षा प्रभावी रूप से स्थापित होती है।

(i) सार्वजनिक वितरण प्रणाली महत्वपूर्ण है।

(ii) सरकारी सतर्कता आवश्यक है।

(iii) पर्याप्त खाद्य उपलब्ध होना चाहिए।

(iv) भोजन खरीदने की क्षमता होनी चाहिए।

(v) वितरण में बाधा नहीं होनी चाहिए।

3. खाद्य सुरक्षा क्यों आवश्यक है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ खाद्य सुरक्षा इसलिए आवश्यक है क्योंकि प्राकृतिक आपदाओं, सूखा, बाढ़, भूकंप, सुनामी, फसल खराब होने अथवा महामारी जैसी परिस्थितियों में खाद्यान्न की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ जाती हैं और गरीब तथा सामान्य आय वाले लोग भी भोजन खरीदने में असमर्थ हो सकते हैं। खाद्य सुरक्षा व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि संकट के समय भी पर्याप्त भोजन उपलब्ध रहे, कीमतें नियंत्रण में रहें तथा भुखमरी और अकाल जैसी स्थितियाँ उत्पन्न न हों।

(i) आपदा के समय भोजन उपलब्ध रहता है।

(ii) कीमतों पर नियंत्रण रहता है।

(iii) भुखमरी रोकी जा सकती है।

(iv) अकाल की संभावना कम होती है।

(v) सभी लोगों को राहत मिलती है।

4. प्राकृतिक आपदाओं के समय खाद्य सुरक्षा कैसे प्रभावित होती है?

उत्तर ⇒ प्राकृतिक आपदाओं जैसे सूखा, बाढ़ और भूकंप के कारण खाद्यान्न उत्पादन में कमी आ जाती है। उत्पादन घटने से प्रभावित क्षेत्रों में खाद्य पदार्थों की उपलब्धता कम हो जाती है और उनकी कीमतें बढ़ जाती हैं। गरीब एवं सामान्य आय वाले लोग महँगा भोजन खरीदने में असमर्थ हो जाते हैं। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो भुखमरी और अंततः अकाल की संभावना उत्पन्न हो सकती है। इसलिए आपदा के समय प्रभावी खाद्य सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत आवश्यक होती है।

(i) खाद्यान्न उत्पादन घटता है।

(ii) भोजन की कमी होती है।

(iii) कीमतें बढ़ जाती हैं।

(iv) गरीब लोग भोजन नहीं खरीद पाते।

(v) अकाल की संभावना बढ़ती है।

5. 1943 के बंगाल अकाल एवं कोविड-19 महामारी से खाद्य सुरक्षा के संबंध में क्या सीख मिलती है?

उत्तर ⇒ वर्ष 1943 का बंगाल अकाल भारत के इतिहास का सबसे भीषण अकाल था, जिसमें लगभग 30 लाख लोगों की मृत्यु हुई। वहीं कोविड-19 महामारी के दौरान आवागमन पर प्रतिबंध और वस्तुओं की आपूर्ति में बाधा उत्पन्न हुई, जिससे खाद्य उपलब्धता और वितरण प्रभावित हुआ। ये दोनों घटनाएँ यह स्पष्ट करती हैं कि प्राकृतिक आपदाएँ और महामारी खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं। इसलिए ऐसी परिस्थितियों में प्रभावी सरकारी व्यवस्था और खाद्य भंडारण अत्यंत आवश्यक है।

(i) बंगाल अकाल अत्यंत भीषण था।

(ii) लाखों लोगों की मृत्यु हुई।

(iii) कोविड-19 से वितरण प्रभावित हुआ।

(iv) आपूर्ति में बाधा आई।

(v) खाद्य सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक है।

6. खाद्य-असुरक्षित समूहों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ खाद्य-असुरक्षित समूह वे लोग हैं जिन्हें पर्याप्त और पौष्टिक भोजन नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हो पाता। ग्रामीण क्षेत्रों में भूमिहीन मजदूर, पारंपरिक दस्तकार तथा निराश्रित लोग इस श्रेणी में आते हैं। शहरी क्षेत्रों में कम वेतन वाले और अनियमित रोजगार करने वाले परिवार अधिक खाद्य-असुरक्षित होते हैं। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़े वर्गों के कुछ समूह भी सामाजिक और आर्थिक कारणों से खाद्य असुरक्षा का सामना करते हैं।

(i) भूमिहीन मजदूर प्रभावित होते हैं।

(ii) कम वेतन वाले श्रमिक असुरक्षित होते हैं।

(iii) अनुसूचित जाति एवं जनजाति प्रभावित होती हैं।

(iv) अनियमित रोजगार वाले परिवार प्रभावित होते हैं।

(v) सामाजिक एवं आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं।

7. भारत के किन क्षेत्रों में खाद्य-असुरक्षा अधिक पाई जाती है?

उत्तर ⇒ भारत के कुछ आर्थिक रूप से पिछड़े तथा प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में खाद्य-असुरक्षा अधिक पाई जाती है। इनमें उत्तर प्रदेश के पूर्वी एवं दक्षिण-पूर्वी भाग, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश तथा महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में गरीबी, सीमित रोजगार, प्राकृतिक आपदाएँ तथा सामाजिक पिछड़ापन खाद्य-असुरक्षा के प्रमुख कारण हैं।

(i) आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्र अधिक प्रभावित हैं।

(ii) बिहार एवं झारखंड प्रमुख हैं।

(iii) ओडिशा एवं छत्तीसगढ़ प्रभावित हैं।

(iv) प्राकृतिक आपदाएँ कारण हैं।

(v) गरीबी खाद्य-असुरक्षा बढ़ाती है।

8. दीर्घकालिक भुखमरी एवं मौसमी भुखमरी में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ दीर्घकालिक भुखमरी तब होती है जब व्यक्ति लंबे समय तक पर्याप्त एवं पौष्टिक भोजन प्राप्त नहीं कर पाता। इसका मुख्य कारण अत्यंत कम आय तथा भोजन खरीदने में असमर्थता है। दूसरी ओर मौसमी भुखमरी कृषि कार्यों या अनियमित रोजगार की मौसमी प्रकृति से जुड़ी होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में फसल चक्र तथा शहरी क्षेत्रों में मौसमी रोजगार के कारण लोगों को कुछ समय तक पर्याप्त भोजन उपलब्ध नहीं हो पाता।

(i) दीर्घकालिक भुखमरी लंबे समय तक रहती है।

(ii) इसका कारण कम आय है।

(iii) मौसमी भुखमरी रोजगार से जुड़ी होती है।

(iv) कृषि चक्र इसका कारण है।

(v) दोनों खाद्य-असुरक्षा के रूप हैं।

9. सहायिकी (सब्सिडी) क्या है? इसका महत्व बताइए।

उत्तर ⇒ सहायिकी या सब्सिडी वह आर्थिक सहायता है जो सरकार उत्पादकों या उपभोक्ताओं के हित में प्रदान करती है। इसका उद्देश्य बाजार मूल्य और वास्तविक लागत के बीच अंतर की पूर्ति करना होता है। सब्सिडी के माध्यम से उत्पादकों की आय सुरक्षित रहती है तथा उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तुएँ कम कीमत पर उपलब्ध होती हैं। इस प्रकार सब्सिडी खाद्य सुरक्षा बनाए रखने और गरीबों को राहत प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

(i) सरकार आर्थिक सहायता देती है।

(ii) उत्पादकों को लाभ मिलता है।

(iii) उपभोक्ताओं को सस्ती वस्तुएँ मिलती हैं।

(iv) कीमतों को नियंत्रित किया जाता है।

(v) खाद्य सुरक्षा मजबूत होती है।

10. भारत में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के प्रमुख घटकों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ भारत में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था मुख्य रूप से दो प्रमुख घटकों पर आधारित है—बफ़र स्टॉक तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS)। बफ़र स्टॉक के माध्यम से सरकार खाद्यान्न का भंडारण करती है ताकि संकट के समय उसकी उपलब्धता बनी रहे। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से यही अनाज उचित मूल्य की दुकानों द्वारा गरीब परिवारों तक पहुँचाया जाता है। इन दोनों व्यवस्थाओं के कारण देश में खाद्य उपलब्धता सुनिश्चित होती है तथा गरीबों को सस्ती दरों पर खाद्यान्न प्राप्त होता है।

(i) बफ़र स्टॉक महत्वपूर्ण है।

(ii) सार्वजनिक वितरण प्रणाली आवश्यक है।

(iii) सरकारी भंडारण किया जाता है।

(iv) गरीबों को सस्ता अनाज मिलता है।

(v) खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

11. बफ़र स्टॉक क्या है? इसका उद्देश्य एवं आवश्यकता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ बफ़र स्टॉक भारतीय खाद्य निगम (FCI) के माध्यम से सरकार द्वारा किसानों से खरीदे गए गेहूँ और चावल का सरकारी भंडार है। यह अनाज अधिशेष उत्पादन वाले राज्यों से खरीदकर सरकारी गोदामों में सुरक्षित रखा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य खाद्यान्न की कमी वाले क्षेत्रों में अनाज उपलब्ध कराना तथा गरीब परिवारों को बाज़ार मूल्य से कम कीमत पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। बफ़र स्टॉक सूखा, बाढ़, अकाल तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं के समय खाद्य सुरक्षा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

(i) FCI द्वारा अनाज का भंडारण किया जाता है।

(ii) किसानों से गेहूँ एवं चावल खरीदे जाते हैं।

(iii) संकट के समय अनाज उपलब्ध कराया जाता है।

(iv) गरीबों को सस्ता अनाज मिलता है।

(v) खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

12. अत्यधिक बफ़र स्टॉक के नुकसान बताइए।

उत्तर ⇒ आवश्यकता से अधिक बफ़र स्टॉक रखने से कई समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। लंबे समय तक गोदामों में रखे रहने से अनाज की गुणवत्ता प्रभावित होती है तथा उसके खराब होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त भंडारण, रख-रखाव और सुरक्षा पर सरकार को भारी व्यय करना पड़ता है। अत्यधिक भंडारण से संसाधनों का उचित उपयोग नहीं हो पाता। इसलिए सुझाव दिया जाता है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कुछ समय तक स्थिर रखा जाए ताकि अनावश्यक भंडारण की समस्या कम हो सके।

(i) अनाज की बर्बादी होती है।

(ii) गुणवत्ता में गिरावट आती है।

(iii) भंडारण पर अधिक खर्च होता है।

(iv) संसाधनों का उचित उपयोग नहीं होता।

(v) अत्यधिक स्टॉक समस्या बन जाता है।

13. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) क्या है? यह कैसे कार्य करती है?

उत्तर ⇒ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) सरकार की वह व्यवस्था है जिसके माध्यम से भारतीय खाद्य निगम द्वारा अधिप्राप्त अनाज उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से गरीब परिवारों तक पहुँचाया जाता है। पहले FCI अनाज का बफ़र स्टॉक तैयार करता है, फिर राज्य सरकारों एवं वितरण एजेंसियों के माध्यम से राशन दुकानों तक अनाज पहुँचाया जाता है। राशन कार्डधारी परिवार निर्धारित मात्रा में सब्सिडी वाली दर पर गेहूँ, चावल, चीनी, मिट्टी का तेल आदि आवश्यक वस्तुएँ प्राप्त कर सकते हैं।

(i) FCI अनाज उपलब्ध कराता है।

(ii) राशन दुकानों के माध्यम से वितरण होता है।

(iii) उचित मूल्य पर अनाज मिलता है।

(iv) राशन कार्ड आवश्यक होता है।

(v) गरीब परिवारों को लाभ मिलता है।

14. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के उद्देश्य एवं महत्व का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ सार्वजनिक वितरण प्रणाली का मुख्य उद्देश्य गरीब वर्गों को सस्ती दरों पर खाद्यान्न एवं आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध कराना है। यह व्यवस्था खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ बाज़ार में खाद्यान्न की कीमतों को नियंत्रित रखने में भी सहायता करती है। देशभर में लाखों उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लाभार्थियों तक खाद्यान्न पहुँचाया जाता है। इस प्रकार PDS निर्धनों के जीवन स्तर में सुधार लाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

(i) गरीबों को सस्ता अनाज उपलब्ध कराती है।

(ii) खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

(iii) कीमतों को नियंत्रित रखने में सहायता करती है।

(iv) पूरे देश में संचालित होती है।

(v) निर्धनों के जीवन स्तर में सुधार करती है।

15. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की प्रमुख समस्याओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ सार्वजनिक वितरण प्रणाली के संचालन में कई समस्याएँ देखी जाती हैं। कुछ राशन दुकानदार अधिक लाभ कमाने के लिए सरकारी अनाज को खुले बाजार में बेच देते हैं। कई स्थानों पर घटिया गुणवत्ता का अनाज वितरित किया जाता है तथा राशन दुकानें नियमित समय पर नहीं खुलतीं। इन समस्याओं के कारण लोगों का विश्वास कम होता है और PDS से अनाज की माँग घट जाती है। परिणामस्वरूप भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में अनाज का अत्यधिक भंडार जमा हो जाता है।

(i) अनाज की कालाबाज़ारी होती है।

(ii) घटिया गुणवत्ता का अनाज मिलता है।

(iii) राशन दुकानें नियमित नहीं खुलतीं।

(iv) लोगों का विश्वास कम होता है।

(v) गोदामों में अनाज जमा हो जाता है।

16. भारतीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ भारतीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 का उद्देश्य देश के लोगों को सस्ती दरों पर खाद्य एवं पोषण संबंधी सुरक्षा उपलब्ध कराना है ताकि वे सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सकें। इस अधिनियम के अंतर्गत लगभग 75 प्रतिशत ग्रामीण तथा 50 प्रतिशत शहरी जनसंख्या को पात्र परिवारों के रूप में शामिल किया गया है। इस व्यवस्था के माध्यम से पात्र परिवारों को रियायती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है तथा खाद्य सुरक्षा को कानूनी आधार प्रदान किया गया है।

(i) वर्ष 2013 में लागू हुआ।

(ii) सस्ती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है।

(iii) ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों को लाभ मिलता है।

(iv) खाद्य सुरक्षा को कानूनी आधार मिला।

(v) सम्मानजनक जीवन का उद्देश्य है।

17. खाद्य सुरक्षा संबंधी प्रमुख सरकारी कार्यक्रमों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ भारत सरकार ने खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अनेक योजनाएँ लागू की हैं। इनमें सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), दोपहर का भोजन (Mid-Day Meal), महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम (MGNREGA), एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS), काम के बदले अनाज (Food for Work), अंत्योदय अन्न योजना (AAY) तथा अन्नपूर्णा योजना (APS) प्रमुख हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य गरीबों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा अन्य कमजोर वर्गों को खाद्य एवं पोषण सुरक्षा प्रदान करना है।

(i) PDS महत्वपूर्ण योजना है।

(ii) मिड-डे मील बच्चों के लिए है।

(iii) MGNREGA रोजगार उपलब्ध कराता है।

(iv) ICDS पोषण सहायता देता है।

(v) AAY एवं APS गरीबों के लिए हैं।

18. खाद्य सुरक्षा में सहकारी समितियों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ सहकारी समितियाँ खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये निर्धनों को सस्ती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराती हैं तथा किसानों और उपभोक्ताओं के बीच संतुलन बनाए रखती हैं। तमिलनाडु में सहकारी समितियाँ बड़ी संख्या में राशन दुकानें संचालित करती हैं। दिल्ली की मदर डेयरी तथा गुजरात का अमूल नियंत्रित दरों पर आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध कराते हैं। इस प्रकार सहकारी समितियाँ सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पूरक बनकर स्थानीय स्तर पर खाद्य उपलब्धता बढ़ाती हैं।

(i) सस्ती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराती हैं।

(ii) PDS की पूरक हैं।

(iii) किसानों को लाभ पहुँचाती हैं।

(iv) उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तुएँ देती हैं।

(v) स्थानीय खाद्य सुरक्षा मजबूत करती हैं।

19. महाराष्ट्र में अनाज बैंक (ADS) की भूमिका का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ महाराष्ट्र में एकेडमी ऑफ डेवलपमेंट साइंस (ADS) नामक गैर-सरकारी संस्था ने अनाज बैंक स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह संस्था स्वयंसेवी संगठनों की सहायता से अनाज बैंक स्थापित करती है तथा खाद्य सुरक्षा से संबंधित प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित करती है। इसके अतिरिक्त यह सरकारी नीतियों को प्रभावित करने का भी प्रयास करती है। इस मॉडल को महाराष्ट्र में एक सफल और नवीन खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है।

(i) ADS एक गैर-सरकारी संस्था है।

(ii) अनाज बैंक स्थापित करने में सहायता करती है।

(iii) प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाती है।

(iv) खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देती है।

(v) सफल मॉडल के रूप में पहचानी गई है।

20. ‘भारत में खाद्य सुरक्षा’ अध्याय से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर ⇒ यह अध्याय हमें सिखाता है कि प्रत्येक नागरिक को पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना किसी भी राष्ट्र की प्राथमिक जिम्मेदारी है। खाद्य सुरक्षा केवल खाद्यान्न उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके उचित भंडारण, वितरण तथा लोगों की खरीदने की क्षमता से भी जुड़ी है। सरकार की विभिन्न योजनाएँ, बफ़र स्टॉक, सार्वजनिक वितरण प्रणाली तथा सहकारी समितियाँ खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन सभी प्रयासों से भूख, कुपोषण और खाद्य-असुरक्षा को कम किया जा सकता है।

(i) सभी के लिए भोजन आवश्यक है।

(ii) खाद्य सुरक्षा बहुआयामी व्यवस्था है।

(iii) सरकारी योजनाएँ महत्वपूर्ण हैं।

(iv) PDS एवं बफ़र स्टॉक उपयोगी हैं।

(v) भूख और कुपोषण रोकना आवश्यक है।

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Chapter 1: पालमपुर गाँव की कहानी
Chapter 2: संसाधन के रूप में लोग
Chapter 3: निर्धनता: एक चुनौती
Chapter 4: भारत में खाद्य सुरक्षा

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