Class 9 Economics Revision Notes

संसाधन के रूप में लोग

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Chapter Overview

Class9
SubjectEconomics 
Chapter Nameसंसाधन के रूप में लोग
Resource TypeRevision Notes
SyllabusNCERT
Suitable ForCBSE, JAC and other state boards

संसाधन के रूप में लोग Revision Notes

1. मानव संसाधन एवं मानव पूँजी क्या है? दोनों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर ⇒ मानव संसाधन से तात्पर्य उन लोगों से है जिन्हें शिक्षा, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से कुशल एवं उत्पादक बनाया गया हो। जब सामान्य जनसंख्या में शिक्षा, कौशल और स्वास्थ्य पर निवेश किया जाता है, तब वह मानव पूँजी में परिवर्तित हो जाती है। मानव पूँजी व्यक्ति के ज्ञान, कौशल, प्रशिक्षण और कार्यक्षमता का संग्रह है, जो उत्पादन क्षमता को बढ़ाता है। यही कारण है कि किसी देश के आर्थिक विकास में मानव संसाधन को सबसे महत्वपूर्ण संसाधन माना जाता है।

(i) मानव संसाधन उत्पादक जनसंख्या है।

(ii) शिक्षा एवं स्वास्थ्य से मानव पूँजी बनती है।

(iii) मानव पूँजी ज्ञान एवं कौशल का भंडार है।

(iv) उत्पादन क्षमता बढ़ाती है।

(v) आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

2. मानव पूँजी निर्माण क्या है? इसके महत्व का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ मौजूदा मानव संसाधन को शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशिक्षण के माध्यम से अधिक कुशल एवं उत्पादक बनाना मानव पूँजी निर्माण कहलाता है। यह भौतिक पूँजी की तरह ही देश की उत्पादन क्षमता बढ़ाता है। शिक्षित और स्वस्थ व्यक्ति अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करते हैं तथा उनकी आय में वृद्धि होती है। मानव पूँजी निर्माण से समाज को भी लाभ मिलता है क्योंकि कुशल लोग अपने ज्ञान और अनुभव से दूसरों की उत्पादकता बढ़ाने में सहायता करते हैं। इसलिए यह किसी भी राष्ट्र के आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार है।

(i) शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर आधारित है।

(ii) उत्पादन क्षमता बढ़ाता है।

(iii) आय में वृद्धि करता है।

(iv) समाज को लाभ पहुँचाता है।

(v) आर्थिक विकास का आधार है।

3. मानव पूँजी में निवेश के लाभों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ मानव पूँजी में निवेश का अर्थ शिक्षा, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य पर खर्च करना है। इससे व्यक्ति का ज्ञान, कौशल और कार्यक्षमता बढ़ती है। शिक्षित एवं प्रशिक्षित लोग अधिक उत्पादक होते हैं और बेहतर आय अर्जित करते हैं। स्वस्थ व्यक्ति लंबे समय तक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त समाज को भी लाभ मिलता है क्योंकि कुशल लोग अपने ज्ञान और अनुभव से दूसरों की सहायता करते हैं तथा राष्ट्रीय उत्पादन में वृद्धि करते हैं। इस प्रकार मानव पूँजी में निवेश व्यक्ति और समाज दोनों के लिए लाभदायक है।

(i) उत्पादकता बढ़ती है।

(ii) आय में वृद्धि होती है।

(iii) स्वास्थ्य बेहतर होता है।

(iv) समाज को लाभ मिलता है।

(v) राष्ट्रीय उत्पादन बढ़ता है।

4. मानव संसाधन को अन्य संसाधनों से श्रेष्ठ क्यों माना जाता है?

उत्तर ⇒ मानव संसाधन को सबसे महत्वपूर्ण संसाधन माना जाता है क्योंकि भूमि, मशीनें और अन्य भौतिक संसाधन स्वयं उत्पादन नहीं कर सकते। उनका उपयोग मनुष्य ही अपने ज्ञान, कौशल और अनुभव के आधार पर करता है। शिक्षित एवं प्रशिक्षित व्यक्ति उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करके उत्पादन और उत्पादकता दोनों बढ़ाते हैं। इसलिए मानव संसाधन ही अन्य सभी संसाधनों को उपयोगी बनाता है तथा आर्थिक विकास की दिशा निर्धारित करता है।

(i) मानव संसाधन अन्य संसाधनों का उपयोग करता है।

(ii) ज्ञान एवं कौशल से उत्पादन बढ़ता है।

(iii) मशीनें स्वयं कार्य नहीं कर सकतीं।

(iv) भूमि का उचित उपयोग संभव होता है।

(v) मानव सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है।

5. भारत में जनसंख्या को दायित्व से परिसंपत्ति कैसे बनाया जा सकता है?

उत्तर ⇒ भारत में लंबे समय तक बढ़ती जनसंख्या को दायित्व माना गया, लेकिन उचित निवेश के माध्यम से इसे परिसंपत्ति में बदला जा सकता है। इसके लिए सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना, आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण देना तथा वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। जब लोग शिक्षित, स्वस्थ और कुशल बनते हैं, तो वे अधिक उत्पादन करते हैं और देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इस प्रकार जनसंख्या देश की सबसे बड़ी शक्ति बन सकती है।

(i) शिक्षा का विस्तार आवश्यक है।

(ii) स्वास्थ्य सेवाएँ बढ़ानी चाहिए।

(iii) कौशल प्रशिक्षण देना चाहिए।

(iv) वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना चाहिए।

(v) जनसंख्या परिसंपत्ति बन सकती है।

6. सकारात्मक एवं नकारात्मक चक्र (Cycle) को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ सकारात्मक चक्र तब बनता है जब शिक्षित और स्वस्थ माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर अधिक ध्यान देते हैं। इससे अगली पीढ़ी अधिक सक्षम और उत्पादक बनती है। इसके विपरीत अशिक्षित एवं अस्वस्थ माता-पिता अपने बच्चों को पर्याप्त शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ नहीं दे पाते, जिससे गरीबी और पिछड़ापन बना रहता है। इसे नकारात्मक चक्र कहा जाता है। इस प्रकार शिक्षा और स्वास्थ्य समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

(i) शिक्षित परिवार सकारात्मक चक्र बनाते हैं।

(ii) बच्चों की शिक्षा पर निवेश होता है।

(iii) अशिक्षा नकारात्मक चक्र उत्पन्न करती है।

(iv) गरीबी बनी रहती है।

(v) शिक्षा एवं स्वास्थ्य विकास के आधार हैं।

7. जापान के विकास में मानव पूँजी की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ जापान प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से समृद्ध नहीं है, फिर भी वह विश्व के विकसित देशों में शामिल है। इसका मुख्य कारण वहाँ की सरकार द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य तथा तकनीकी प्रशिक्षण पर किया गया निवेश है। जापान के लोगों ने अपने ज्ञान, कौशल और तकनीक के आधार पर उपलब्ध संसाधनों का कुशल उपयोग किया। वे आवश्यक प्राकृतिक संसाधनों का आयात करके उच्च गुणवत्ता का उत्पादन करते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि मानव पूँजी किसी भी देश के विकास का सबसे महत्वपूर्ण आधार है।

(i) प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं।

(ii) शिक्षा पर अधिक निवेश किया गया।

(iii) तकनीकी कौशल विकसित किया गया।

(iv) उच्च उत्पादन संभव हुआ।

(v) मानव पूँजी विकास का आधार बनी।

8. अर्थव्यवस्था के तीन प्रमुख क्षेत्रकों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ अर्थव्यवस्था की गतिविधियों को तीन प्रमुख क्षेत्रकों में बाँटा गया है। प्राथमिक क्षेत्रक प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित होता है, जैसे कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और खनन। द्वितीयक क्षेत्रक में कच्चे माल से वस्तुओं का निर्माण किया जाता है, जैसे उद्योग और विनिर्माण। तृतीयक क्षेत्रक सेवाएँ प्रदान करता है, जैसे परिवहन, बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और संचार। तीनों क्षेत्रक मिलकर देश की अर्थव्यवस्था को संचालित करते हैं।

(i) प्राथमिक क्षेत्रक प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित है।

(ii) द्वितीयक क्षेत्रक वस्तुओं का निर्माण करता है।

(iii) तृतीयक क्षेत्रक सेवाएँ प्रदान करता है।

(iv) तीनों क्षेत्रक परस्पर जुड़े हैं।

(v) अर्थव्यवस्था के विकास में योगदान देते हैं।

9. बाज़ार क्रियाएँ एवं गैर-बाज़ार क्रियाओं में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ बाज़ार क्रियाएँ वे आर्थिक गतिविधियाँ हैं जिनमें वस्तुओं या सेवाओं के बदले वेतन, मजदूरी या लाभ प्राप्त होता है। इनमें उत्पादन और सरकारी सेवाएँ भी शामिल हैं। इसके विपरीत गैर-बाज़ार क्रियाएँ वे कार्य हैं जो स्वयं के उपभोग के लिए किए जाते हैं तथा जिनके लिए कोई प्रत्यक्ष भुगतान नहीं मिलता। उदाहरण के रूप में घरेलू कार्य तथा स्व-उपभोग हेतु उत्पादन को गैर-बाज़ार क्रियाओं में शामिल किया जाता है।

(i) बाज़ार क्रियाओं में भुगतान मिलता है।

(ii) लाभ कमाना उद्देश्य होता है।

(iii) गैर-बाज़ार क्रियाओं में भुगतान नहीं मिलता।

(iv) स्व-उपभोग के लिए कार्य किए जाते हैं।

(v) दोनों आर्थिक गतिविधियों के प्रकार हैं।

10. परिवारों में श्रम विभाजन तथा महिलाओं की श्रम-बाज़ार में स्थिति का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ ऐतिहासिक और सामाजिक कारणों से परिवारों में महिलाओं और पुरुषों के बीच श्रम का विभाजन देखा जाता है। सामान्यतः महिलाएँ घरेलू कार्य तथा बच्चों की देखभाल करती हैं, जबकि पुरुष आय अर्जित करने वाले कार्य करते हैं। घरेलू कार्यों के लिए महिलाओं को कोई भुगतान नहीं मिलता, इसलिए उनका योगदान राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं होता। श्रम-बाज़ार में कार्य करने वाली महिलाओं को शिक्षा और कौशल के आधार पर रोजगार मिलता है, लेकिन उन्हें अक्सर कम वेतन, अस्थायी रोजगार तथा सामाजिक सुरक्षा की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

(i) परिवारों में श्रम विभाजन होता है।

(ii) महिलाएँ घरेलू कार्य करती हैं।

(iii) घरेलू कार्य का भुगतान नहीं मिलता।

(iv) श्रम-बाज़ार में असमानताएँ हैं।

(v) शिक्षा एवं कौशल से अवसर बढ़ते हैं।

11. जनसंख्या की गुणवत्ता क्या है? इसके प्रमुख घटकों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ जनसंख्या की गुणवत्ता से अभिप्राय लोगों की शिक्षा, स्वास्थ्य तथा कौशल के स्तर से है। किसी देश की आर्थिक प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि वहाँ के लोग कितने शिक्षित, स्वस्थ और कुशल हैं। जनसंख्या की गुणवत्ता के तीन प्रमुख घटक हैं—साक्षरता दर, जीवन प्रत्याशा द्वारा व्यक्त स्वास्थ्य स्तर तथा लोगों का कौशल निर्माण। यदि किसी देश की जनसंख्या इन तीनों दृष्टियों से मजबूत होती है, तो वह देश की उत्पादन क्षमता और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है। इसलिए अच्छी जनसंख्या गुणवत्ता किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी परिसंपत्ति मानी जाती है।

(i) साक्षरता जनसंख्या गुणवत्ता का आधार है।

(ii) अच्छा स्वास्थ्य आवश्यक है।

(iii) कौशल विकास महत्वपूर्ण है।

(iv) आर्थिक विकास में सहायता मिलती है।

(v) जनसंख्या परिसंपत्ति बनती है।

12. शिक्षा का महत्व स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ शिक्षा व्यक्ति के ज्ञान, कौशल और कार्यक्षमता में वृद्धि करती है। शिक्षित व्यक्ति को बेहतर रोजगार, व्यवसाय तथा करियर के अवसर प्राप्त होते हैं, जिससे उसकी आय बढ़ती है। शिक्षा व्यक्ति में नई आकांक्षाएँ और आत्मविश्वास उत्पन्न करती है। इसके अतिरिक्त शिक्षित नागरिक समाज, संस्कृति तथा प्रशासन के विकास में भी योगदान देते हैं। जब अधिक लोग शिक्षित होते हैं, तो देश का उत्पादन और राष्ट्रीय आय बढ़ती है तथा लोगों का जीवन स्तर भी बेहतर होता है। इसलिए शिक्षा मानव संसाधन विकास का सबसे महत्वपूर्ण साधन है।

(i) ज्ञान एवं कौशल बढ़ाती है।

(ii) रोजगार के अवसर बढ़ाती है।

(iii) आय में वृद्धि करती है।

(iv) जीवन स्तर सुधारती है।

(v) राष्ट्रीय विकास में योगदान देती है।

13. शिक्षा के क्षेत्र में सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ सरकार ने शिक्षा के प्रसार के लिए अनेक महत्वपूर्ण योजनाएँ शुरू की हैं। सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से 6 से 14 वर्ष के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया। सेतु पाठ्यक्रम (ब्रिज कोर्स) और स्कूल लौटा शिविर के द्वारा विद्यालय छोड़ चुके बच्चों को पुनः शिक्षा से जोड़ा गया। मिड डे मील योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इसके अतिरिक्त शिक्षा का अधिकार अधिनियम के माध्यम से 6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित की गई है।

(i) सर्व शिक्षा अभियान चलाया गया।

(ii) सेतु पाठ्यक्रम लागू किया गया।

(iii) स्कूल लौटा शिविर आयोजित किए गए।

(iv) मिड डे मील योजना लागू की गई।

(v) शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू है।

14. मृत्यु दर, जन्मदर एवं शिशु मृत्यु दर को परिभाषित कीजिए।

उत्तर ⇒ मृत्यु दर से अभिप्राय किसी निश्चित अवधि में प्रति 1000 जनसंख्या पर होने वाली कुल मृत्यु की संख्या से है। जन्मदर का अर्थ किसी निश्चित अवधि में प्रति 1000 जनसंख्या पर जन्म लेने वाले शिशुओं की संख्या है। शिशु मृत्यु दर प्रति 1000 जीवित जन्मों में एक वर्ष से कम आयु के शिशुओं की मृत्यु की संख्या को दर्शाती है। ये तीनों सूचक किसी देश की जनसंख्या की गुणवत्ता तथा स्वास्थ्य व्यवस्था का आकलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

(i) मृत्यु दर प्रति 1000 मृत्यु दर्शाती है।

(ii) जन्मदर प्रति 1000 जन्म दर्शाती है।

(iii) शिशु मृत्यु दर एक वर्ष से कम आयु के शिशुओं से संबंधित है।

(iv) स्वास्थ्य का संकेत देती है।

(v) जनसंख्या गुणवत्ता का मापदंड है।

15. बेरोज़गारी क्या है? कौन बेरोज़गार नहीं कहलाते?

उत्तर ⇒ बेरोज़गारी वह स्थिति है जिसमें काम करने की इच्छा और क्षमता रखने वाला व्यक्ति प्रचलित मजदूरी पर भी काम प्राप्त नहीं कर पाता। ऐसे व्यक्ति बेरोज़गार कहलाते हैं। इसके विपरीत जो लोग काम करना नहीं चाहते, जैसे केवल घरेलू कार्य करने वाली महिलाएँ, अथवा 15 वर्ष से कम और 59 वर्ष से अधिक आयु के लोग, बेरोज़गार की श्रेणी में शामिल नहीं किए जाते। बेरोज़गारी किसी देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में बाधा उत्पन्न करती है।

(i) काम न मिलने की स्थिति बेरोज़गारी है।

(ii) काम करने की इच्छा आवश्यक है।

(iii) घरेलू कार्य करने वाले बेरोज़गार नहीं माने जाते।

(iv) आयु सीमा का भी महत्व है।

(v) यह आर्थिक समस्या है।

16. मौसमी बेरोज़गारी का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ मौसमी बेरोज़गारी वह स्थिति है जिसमें लोगों को वर्ष के केवल कुछ महीनों तक ही रोजगार मिलता है तथा शेष समय वे बेरोज़गार रहते हैं। यह समस्या मुख्यतः कृषि क्षेत्र में दिखाई देती है। बुआई, निराई, कटाई और गहाई के समय श्रमिकों को काम मिलता है, लेकिन इन कार्यों के समाप्त होने के बाद उन्हें रोजगार नहीं मिलता। इस कारण उनकी आय अनिश्चित रहती है तथा आर्थिक कठिनाइयाँ उत्पन्न होती हैं।

(i) वर्ष के कुछ महीनों में रोजगार मिलता है।

(ii) कृषि क्षेत्र में अधिक होती है।

(iii) शेष समय बेरोज़गारी रहती है।

(iv) आय अनिश्चित रहती है।

(v) आर्थिक कठिनाई बढ़ती है।

17. प्रच्छन्न बेरोज़गारी क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर ⇒ प्रच्छन्न बेरोज़गारी वह स्थिति है जिसमें आवश्यकता से अधिक लोग किसी कार्य में लगे रहते हैं, लेकिन अतिरिक्त लोगों के कार्य करने या हट जाने से उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। ऐसे लोग कार्य करते हुए दिखाई देते हैं, पर उनकी उत्पादकता शून्य होती है। उदाहरण के लिए यदि किसी खेत में पाँच लोगों की आवश्यकता हो, लेकिन वहाँ आठ लोग कार्य कर रहे हों, तो अतिरिक्त तीन लोग प्रच्छन्न बेरोज़गार कहलाएँगे। यह समस्या विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में पाई जाती है।

(i) आवश्यकता से अधिक लोग कार्य करते हैं।

(ii) उत्पादन में कोई वृद्धि नहीं होती।

(iii) अतिरिक्त श्रमिक प्रच्छन्न बेरोज़गार होते हैं।

(iv) कृषि क्षेत्र में अधिक पाई जाती है।

(v) उत्पादकता प्रभावित नहीं होती।

18. शिक्षित बेरोज़गारी क्या है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ शिक्षित बेरोज़गारी वह स्थिति है जिसमें शिक्षित युवक-युवतियाँ, जैसे मैट्रिक, स्नातक या स्नातकोत्तर डिग्रीधारी, अपनी योग्यता के अनुरूप रोजगार प्राप्त नहीं कर पाते। शिक्षा प्राप्त होने के बावजूद उपयुक्त नौकरी न मिलना इस प्रकार की बेरोज़गारी का प्रमुख कारण है। इससे युवाओं में निराशा, हताशा तथा आर्थिक असुरक्षा की भावना उत्पन्न होती है। यह समस्या विशेष रूप से विकासशील देशों में अधिक देखने को मिलती है।

(i) शिक्षित युवाओं को रोजगार नहीं मिलता।

(ii) योग्यता के अनुरूप नौकरी नहीं मिलती।

(iii) निराशा उत्पन्न होती है।

(iv) आर्थिक समस्या बढ़ती है।

(v) विकासशील देशों में अधिक पाई जाती है।

19. बेरोज़गारी के दुष्प्रभावों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ बेरोज़गारी के कारण मानव संसाधन का उचित उपयोग नहीं हो पाता, जिससे राष्ट्रीय उत्पादन प्रभावित होता है। इससे गरीबी, आर्थिक असुरक्षा तथा परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ता है। बेरोज़गार युवाओं में निराशा, हताशा तथा असंतोष की भावना विकसित होती है। स्वास्थ्य और शिक्षा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा अपराध और सामाजिक समस्याओं में वृद्धि हो सकती है। इसके अतिरिक्त बेरोज़गारी के कारण देश की आर्थिक विकास दर भी धीमी पड़ जाती है।

(i) मानव संसाधन की बर्बादी होती है।

(ii) गरीबी बढ़ती है।

(iii) युवाओं में निराशा आती है।

(iv) सामाजिक समस्याएँ बढ़ती हैं।

(v) आर्थिक विकास प्रभावित होता है।

20. ‘संसाधन के रूप में लोग’ अध्याय से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर ⇒ यह अध्याय हमें सिखाता है कि किसी देश की सबसे बड़ी शक्ति उसके लोग होते हैं। यदि शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशिक्षण पर उचित निवेश किया जाए, तो सामान्य जनसंख्या भी मानव पूँजी में बदल सकती है। मानव संसाधन का विकास उत्पादन, राष्ट्रीय आय तथा आर्थिक प्रगति को बढ़ाता है। साथ ही यह अध्याय शिक्षा के महत्व, रोजगार सृजन तथा बेरोज़गारी की समस्याओं को समझने में सहायता करता है। इससे स्पष्ट होता है कि विकसित मानव संसाधन ही किसी राष्ट्र की वास्तविक परिसंपत्ति है।

(i) मानव संसाधन सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है।

(ii) शिक्षा एवं स्वास्थ्य का महत्व समझ में आता है।

(iii) मानव पूँजी आर्थिक विकास का आधार है।

(iv) रोजगार सृजन आवश्यक है।

(v) विकसित मानव संसाधन राष्ट्र की परिसंपत्ति है।

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