Class 10 Science: आनुवंशिकी और जैव विकास

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Chapter Overview

Class10
SubjectScience
Chapter Nameआनुवंशिकी और जैव विकास
Resource TypeRevision Notes
SyllabusNCERT
Suitable ForCBSE, JAC and other state boards

आनुवंशिकी और जैव विकास Revision Notes

1. आनुवंशिकी (Genetics) क्या है? इसका महत्व लिखिए।

उत्तर ⇒
जीवविज्ञान की वह शाखा, जिसमें जीवों के वंशागति (Heredity) तथा विभिन्नता (Variation) का अध्ययन किया जाता है, उसे आनुवंशिकी (Genetics) कहते हैं। इस विज्ञान के अंतर्गत यह अध्ययन किया जाता है कि माता-पिता के गुण किस प्रकार उनकी संतानों में स्थानांतरित होते हैं तथा संतानों में विभिन्नताएँ क्यों उत्पन्न होती हैं।

आनुवंशिकी के जनक ग्रेगर जॉन मेंडल (Gregor Johann Mendel) माने जाते हैं। उन्होंने मटर के पौधों पर प्रयोग करके आनुवंशिकता के नियमों का प्रतिपादन किया। आज आनुवंशिकी का उपयोग चिकित्सा, कृषि, जैव-प्रौद्योगिकी तथा अपराध विज्ञान जैसे अनेक क्षेत्रों में किया जा रहा है।

आनुवंशिकी का महत्व निम्नलिखित है—

(i) माता-पिता से संतानों में गुणों के स्थानांतरण को समझने में सहायता मिलती है।

(ii) आनुवंशिक रोगों के अध्ययन एवं उपचार में उपयोगी है।

(iii) नई एवं उन्नत फसल किस्मों के विकास में सहायता मिलती है।

(iv) जैव विकास (Evolution) को समझने का आधार प्रदान करती है।

(v) जीवों की समानता एवं विभिन्नता का वैज्ञानिक अध्ययन संभव होता है।

2. आनुवंशिक गुण (Inherited Traits) क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर ⇒
वे गुण, जो माता-पिता से जीन (Genes) के माध्यम से उनकी संतानों में स्थानांतरित होते हैं, आनुवंशिक गुण (Inherited Traits) कहलाते हैं। ये गुण पीढ़ी-दर-पीढ़ी संचरित होते रहते हैं और प्रत्येक जीव की पहचान तथा विशेषताओं का निर्धारण करते हैं।

आनुवंशिक गुणों का नियंत्रण गुणसूत्रों (Chromosomes) पर उपस्थित जीनों द्वारा होता है। प्रत्येक संतान अपने माता-पिता दोनों से जीन प्राप्त करती है, इसलिए उसमें दोनों के कुछ-न-कुछ गुण दिखाई देते हैं।

आनुवंशिक गुणों के उदाहरण—

(i) आँखों का रंग।

(ii) बालों का रंग एवं प्रकार।

(iii) त्वचा का रंग।

(iv) रक्त समूह (Blood Group)।

(v) शरीर की लंबाई की प्रवृत्ति।

आनुवंशिक गुणों का महत्व—

(i) जीवों की पहचान निर्धारित करते हैं।

(ii) संतानों में माता-पिता की समानता बनाए रखते हैं।

(iii) जैव विकास एवं प्राकृतिक चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

(iv) प्रजाति की निरंतरता बनाए रखते हैं।

3. जैव विकास (Evolution) क्या है? इसका महत्व लिखिए।

उत्तर ⇒
जीवों में लाखों वर्षों के दौरान होने वाले क्रमिक एवं स्थायी परिवर्तनों की प्रक्रिया, जिसके परिणामस्वरूप नई-नई प्रजातियों का निर्माण होता है, जैव विकास (Evolution) कहलाता है। दूसरे शब्दों में, जीवों की उत्पत्ति, उनके पूर्वजों तथा समय के साथ उनमें होने वाले परिवर्तन का वैज्ञानिक अध्ययन जैव विकास कहलाता है।

जैव विकास की अवधारणा को वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन (Charles Darwin) ने प्राकृतिक वरण (Natural Selection) के सिद्धांत द्वारा स्पष्ट किया। उनके अनुसार जो जीव अपने वातावरण के अनुसार स्वयं को अनुकूलित कर लेते हैं, वही जीवित रहते हैं तथा अपनी संतानों में अपने उपयोगी गुणों का स्थानांतरण करते हैं।

जैव विकास का महत्व निम्नलिखित है—

(i) जीवों की उत्पत्ति एवं विकास को समझने में सहायता मिलती है।

(ii) विभिन्न जीवों के बीच संबंधों का ज्ञान होता है।

(iii) नई प्रजातियों के निर्माण की प्रक्रिया स्पष्ट होती है।

(iv) जीवों में अनुकूलन (Adaptation) का कारण समझ में आता है।

(v) वर्गीकरण (Classification) का वैज्ञानिक आधार प्राप्त होता है।

4. जैव विकास एवं वर्गीकरण (Evolution and Classification) में क्या संबंध है?

उत्तर ⇒
जैव विकास एवं वर्गीकरण का आपस में बहुत गहरा संबंध है। जीवों का वर्गीकरण उनके समान एवं असमान लक्षणों के आधार पर किया जाता है। जिन जीवों के लक्षण अधिक समान होते हैं, उनका पूर्वज भी समान माना जाता है। इसलिए वर्गीकरण, जैव विकास के प्रमाणों पर आधारित होता है।

यदि दो जीवों की संरचना, शरीर रचना तथा अन्य विशेषताएँ समान हैं, तो यह माना जाता है कि उनका विकास किसी समान पूर्वज से हुआ है। इसी कारण आधुनिक वर्गीकरण प्रणाली विकासवाद (Evolution) को ध्यान में रखकर बनाई गई है।

दोनों के संबंध के प्रमुख बिंदु—

(i) समान लक्षण समान पूर्वज का संकेत देते हैं।

(ii) वर्गीकरण विकास के क्रम को समझने में सहायता करता है।

(iii) जीवों के विकासक्रम का अध्ययन सरल हो जाता है।

(iv) विभिन्न प्रजातियों के बीच संबंध स्पष्ट होते हैं।

(v) जैव विविधता को वैज्ञानिक ढंग से व्यवस्थित किया जाता है।

5. उत्परिवर्तन (Mutation) क्या है? इसके प्रमुख कारण लिखिए।

उत्तर ⇒
जब किसी जीव के DNA अथवा जीन में अचानक स्थायी परिवर्तन हो जाता है, तो उसे उत्परिवर्तन (Mutation) कहते हैं। उत्परिवर्तन के कारण जीवों में नए लक्षण उत्पन्न होते हैं। ये परिवर्तन कभी लाभदायक, कभी हानिकारक तथा कभी-कभी तटस्थ भी हो सकते हैं।

उत्परिवर्तन जैव विकास का एक महत्वपूर्ण कारण माना जाता है, क्योंकि इसके द्वारा नई-नई आनुवंशिक विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं।

उत्परिवर्तन के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—

(i) DNA की प्रतिकृति (Replication) में त्रुटि।

(ii) एक्स-किरणें (X-rays) एवं गामा किरणें।

(iii) पराबैंगनी किरणें (UV Rays)।

(iv) रासायनिक पदार्थों का प्रभाव।

(v) अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis) के समय परिवर्तन।

उत्परिवर्तन का महत्व—

  • नई प्रजातियों के निर्माण में सहायक।
  • जैव विकास का आधार।
  • आनुवंशिक विविधता उत्पन्न करता है।

6. हम अपने माता-पिता के समान क्यों होते हैं?

उत्तर ⇒
प्रत्येक संतान अपने माता-पिता से आधे-आधे गुणसूत्र (Chromosomes) प्राप्त करती है। गुणसूत्रों पर स्थित जीन (Genes) ही माता-पिता के गुणों को संतानों तक पहुँचाते हैं। यही कारण है कि बच्चे अपने माता-पिता के समान दिखाई देते हैं।

हालाँकि प्रत्येक संतान अपने माता-पिता दोनों से अलग-अलग जीन प्राप्त करती है, इसलिए वह पूरी तरह किसी एक के समान नहीं होती। उसमें माता एवं पिता दोनों के गुणों का मिश्रण दिखाई देता है।

माता-पिता के समान होने के कारण—

(i) जीनों का वंशानुगत संचरण।

(ii) गुणसूत्रों का आधा-आधा योगदान।

(iii) DNA द्वारा आनुवंशिक सूचना का स्थानांतरण।

(iv) प्रभावी एवं अप्रभावी जीनों का संयोजन।

(v) आनुवंशिक लक्षणों की पीढ़ी-दर-पीढ़ी निरंतरता।

7. डार्विन का प्राकृतिक वरण (Natural Selection) सिद्धांत क्या है?

उत्तर ⇒
चार्ल्स डार्विन ने प्राकृतिक वरण (Natural Selection) का सिद्धांत प्रस्तुत किया। उनके अनुसार सभी जीव अपनी क्षमता से अधिक संतान उत्पन्न करते हैं, लेकिन भोजन, स्थान एवं संसाधन सीमित होते हैं। इसलिए जीवों के बीच अस्तित्व के लिए संघर्ष (Struggle for Existence) होता है।

जो जीव वातावरण के अनुसार अधिक अनुकूलित होते हैं, वे जीवित रहते हैं तथा अपनी संतानों में अपने लाभदायक गुणों का स्थानांतरण करते हैं। धीरे-धीरे यही गुण पूरी प्रजाति में फैल जाते हैं।

डार्विन सिद्धांत के प्रमुख बिंदु—

(i) अधिक संतान उत्पन्न होना।

(ii) अस्तित्व के लिए संघर्ष।

(iii) प्राकृतिक वरण।

(iv) योग्यतम की उत्तरजीविता (Survival of the Fittest)।

(v) नई प्रजातियों का निर्माण।

8. जैव वर्गीकरण (Biological Classification) के विभिन्न स्तरों के नाम लिखिए।

उत्तर ⇒
जीवों को उनके समान एवं असमान लक्षणों के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में बाँटने की प्रक्रिया जैव वर्गीकरण (Biological Classification) कहलाती है। वर्गीकरण के प्रत्येक स्तर को टैक्सोन (Taxon) कहा जाता है।

जैव वर्गीकरण के प्रमुख स्तर निम्नलिखित हैं—

(i) जगत (Kingdom)

(ii) संघ / फाइलम (Phylum)

(iii) वर्ग (Class)

(iv) गण (Order)

(v) कुल (Family)

(vi) वंश (Genus)

(vii) जाति (Species)

इनमें जाति (Species) सबसे छोटी तथा जगत (Kingdom) सबसे बड़ी वर्गीकरण इकाई है।

9. उपार्जित लक्षण (Acquired Characters) क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर ⇒
वे लक्षण जो किसी जीव में उसके जीवनकाल के दौरान वातावरण, अभ्यास, भोजन, श्रम अथवा अन्य बाहरी कारणों से विकसित होते हैं, उपार्जित लक्षण (Acquired Characters) कहलाते हैं। ये लक्षण केवल उसी जीव तक सीमित रहते हैं तथा उसकी संतानों में वंशानुगत रूप से स्थानांतरित नहीं होते।

उदाहरण—

(i) व्यायाम करने से मांसपेशियों का मजबूत होना।

(ii) धूप में रहने से त्वचा का काला पड़ना।

(iii) किसी भाषा या कला का सीखना।

उपार्जित लक्षणों की विशेषताएँ—

(i) जीवनकाल में विकसित होते हैं।

(ii) जीनों में परिवर्तन नहीं करते।

(iii) संतानों में स्थानांतरित नहीं होते।

(iv) वातावरण पर निर्भर होते हैं।

10. पक्षियों का विकास डायनासोर से क्यों माना जाता है?

उत्तर ⇒
वैज्ञानिकों को प्राप्त जीवाश्मों (Fossils) के अध्ययन से यह प्रमाण मिला है कि कुछ डायनासोरों में पक्षियों जैसे अनेक लक्षण पाए जाते थे। आर्कियोप्टेरिक्स (Archaeopteryx) नामक जीवाश्म में दाँत, लंबी पूँछ तथा पंजों जैसे सरीसृपों के लक्षण थे, जबकि पंख एवं पर (Feathers) पक्षियों जैसे थे।

इसी कारण वैज्ञानिकों का मानना है कि आधुनिक पक्षियों का विकास कुछ विशेष प्रकार के डायनासोरों से हुआ है।

इसके प्रमुख प्रमाण निम्नलिखित हैं—

(i) जीवाश्मों में पंखों के चिन्ह मिलना।

(ii) अस्थियों की संरचना में समानता।

(iii) अग्रपादों का पंखों में परिवर्तन।

(iv) शरीर की बनावट में समान विकासक्रम।

(v) आर्कियोप्टेरिक्स को सरीसृप एवं पक्षी के बीच की संक्रमणीय कड़ी माना जाता है।

11. मेंडल (Mendel) ने मटर के पौधों पर किए गए प्रयोगों से क्या निष्कर्ष निकाले?

उत्तर ⇒
आधुनिक आनुवंशिकी के जनक ग्रेगर जॉन मेंडल (Gregor Johann Mendel) ने मटर (Pea Plant) के पौधों पर अनेक वर्षों तक प्रयोग किए। उन्होंने विपरीत लक्षणों वाले शुद्ध पौधों का संकरण (Hybridization) कराया और उनकी संततियों का अध्ययन किया। इन प्रयोगों से उन्होंने सिद्ध किया कि माता-पिता के लक्षण किसी द्रव के रूप में नहीं, बल्कि विशेष आनुवंशिक इकाइयों के रूप में संतानों में पहुँचते हैं। इन्हीं इकाइयों को आज जीन (Genes) कहा जाता है।

मेंडल के प्रयोगों ने आनुवंशिकता के वैज्ञानिक अध्ययन की नींव रखी तथा आज भी उनके सिद्धांत आधुनिक आनुवंशिकी का आधार माने जाते हैं।

मेंडल के प्रमुख निष्कर्ष निम्नलिखित हैं—

(i) प्रत्येक लक्षण का नियंत्रण आनुवंशिक कारकों (जीनों) द्वारा होता है।

(ii) प्रत्येक लक्षण के लिए दो कारक होते हैं, जिनमें एक माता तथा दूसरा पिता से प्राप्त होता है।

(iii) कुछ लक्षण प्रभावी (Dominant) तथा कुछ अप्रभावी (Recessive) होते हैं।

(iv) युग्मक बनते समय दोनों कारक अलग-अलग हो जाते हैं।

(v) विभिन्न लक्षण स्वतंत्र रूप से अगली पीढ़ी में पहुँचते हैं।

12. मेंडल ने मटर के पौधे के किन-किन सात लक्षणों का अध्ययन किया था?

उत्तर ⇒
मेंडल ने अपने प्रयोगों के लिए मटर (Pisum sativum) के पौधे का चयन किया, क्योंकि इसमें स्पष्ट विपरीत लक्षण पाए जाते थे, कृत्रिम परागण आसानी से कराया जा सकता था तथा इसकी पीढ़ी जल्दी तैयार हो जाती थी। उन्होंने कुल सात विपरीत लक्षणों का अध्ययन किया।

मेंडल द्वारा चुने गए सात प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं—

(i) पौधे की लंबाई – लंबा एवं बौना।

(ii) पुष्प का रंग – बैंगनी एवं सफेद।

(iii) बीज का आकार – गोल एवं झुर्रीदार।

(iv) बीज का रंग – पीला एवं हरा।

(v) फल का आकार – फूला हुआ एवं सिकुड़ा हुआ।

(vi) फल का रंग – हरा एवं पीला।

(vii) पुष्प की स्थिति – अक्षीय (Axial) एवं शीर्षस्थ (Terminal)।

इन सात लक्षणों के अध्ययन के आधार पर ही मेंडल ने आनुवंशिकता के महत्वपूर्ण नियमों की खोज की।

13. मेंडल की सफलता के प्रमुख कारण लिखिए।

उत्तर ⇒
मेंडल को आनुवंशिकी के क्षेत्र में सफलता संयोग से नहीं मिली, बल्कि उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण, उचित प्रयोग तथा सही पौधे के चयन के कारण मिली। उन्होंने अपने प्रयोगों में अत्यंत सावधानी एवं धैर्य का परिचय दिया।

मेंडल की सफलता के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—

(i) उन्होंने मटर के पौधे का उचित चयन किया।

(ii) उन्होंने केवल स्पष्ट विपरीत लक्षणों का अध्ययन किया।

(iii) शुद्ध नस्ल (Pure Breed) वाले पौधों का उपयोग किया।

(iv) कृत्रिम परागण द्वारा नियंत्रित संकरण कराया।

(v) बड़ी संख्या में पौधों पर प्रयोग किए।

(vi) प्राप्त परिणामों का गणितीय एवं सांख्यिकीय विश्लेषण किया।

(vii) प्रत्येक पीढ़ी का अलग-अलग अध्ययन किया।

इन्हीं कारणों से उनके निष्कर्ष वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित एवं विश्वसनीय सिद्ध हुए।

14. मेंडल का स्वतंत्र वर्गीकरण (Law of Independent Assortment) का नियम क्या है?

उत्तर ⇒
मेंडल का स्वतंत्र वर्गीकरण का नियम (Law of Independent Assortment) बताता है कि दो या दो से अधिक विभिन्न लक्षणों के जीन युग्मक निर्माण के समय एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से अलग होते हैं तथा नई संतति में स्वतंत्र रूप से संयोजित होते हैं।

अर्थात् किसी एक लक्षण का संचरण दूसरे लक्षण के संचरण को प्रभावित नहीं करता। यही कारण है कि संतानों में माता-पिता के गुणों के अनेक नए संयोजन देखने को मिलते हैं।

इस नियम के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं—

(i) प्रत्येक लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होता है।

(ii) एक लक्षण दूसरे लक्षण को प्रभावित नहीं करता।

(iii) युग्मकों में जीनों का स्वतंत्र वितरण होता है।

(iv) संतानों में नए लक्षणों के संयोजन उत्पन्न होते हैं।

(v) यह नियम द्विसंकर (Dihybrid) संकरण से सिद्ध हुआ।

15. जीनप्ररूप (Genotype) एवं फीनोटाइप (Phenotype) क्या हैं?

उत्तर ⇒
किसी जीव के शरीर में उपस्थित जीनों का वास्तविक आनुवंशिक संगठन जीनप्ररूप (Genotype) कहलाता है, जबकि उन जीनों के प्रभाव से बाहरी रूप में दिखाई देने वाले लक्षण फीनोटाइप (Phenotype) कहलाते हैं।

उदाहरण के लिए यदि किसी पौधे का जीनप्ररूप TT या Tt है, तो उसका फीनोटाइप लंबा (Tall) होगा, क्योंकि T प्रभावी जीन है।

जीनप्ररूप एवं फीनोटाइप में अंतर—

(i) जीनप्ररूप आनुवंशिक संरचना है, जबकि फीनोटाइप बाहरी लक्षण है।

(ii) जीनप्ररूप सीधे दिखाई नहीं देता, जबकि फीनोटाइप दिखाई देता है।

(iii) जीनप्ररूप वातावरण से बहुत कम प्रभावित होता है, जबकि फीनोटाइप वातावरण से प्रभावित हो सकता है।

(iv) जीनप्ररूप जीनों द्वारा निर्धारित होता है, जबकि फीनोटाइप जीन एवं वातावरण दोनों से प्रभावित होता है।

16. आण्विक जातिवृत्त (Molecular Phylogeny) क्या है?

उत्तर ⇒
जीवों के DNA, RNA तथा प्रोटीनों के अध्ययन के आधार पर उनके विकासक्रम (Evolutionary Relationship) एवं समान पूर्वजों की पहचान करने की विधि को आण्विक जातिवृत्त (Molecular Phylogeny) कहते हैं।

आधुनिक विज्ञान में जीवों के DNA अनुक्रम (DNA Sequence) की तुलना करके यह पता लगाया जाता है कि दो जीवों का विकास किस समान पूर्वज से हुआ है। जिन जीवों के DNA में अधिक समानता होती है, वे विकास की दृष्टि से अधिक निकट संबंधी माने जाते हैं।

आण्विक जातिवृत्त का महत्व निम्नलिखित है—

(i) जीवों के विकासक्रम का अध्ययन करने में सहायता मिलती है।

(ii) समान पूर्वजों की पहचान की जा सकती है।

(iii) वर्गीकरण को अधिक वैज्ञानिक बनाया जा सकता है।

(iv) नई प्रजातियों के संबंधों का पता लगाया जा सकता है।

(v) आधुनिक जैव-विकास के अध्ययन का महत्वपूर्ण आधार है।

17. वे कौन-से तरीके हैं जिनके द्वारा किसी विशेष लक्षण वाले जीवों की संख्या समष्टि में बढ़ सकती है?

उत्तर ⇒
किसी समष्टि (Population) में यदि कोई विशेष लक्षण जीवों के लिए लाभदायक सिद्ध होता है, तो समय के साथ उस लक्षण वाले जीवों की संख्या बढ़ने लगती है। यह प्रक्रिया प्राकृतिक चयन तथा आनुवंशिक परिवर्तनों के कारण होती है।

ऐसे प्रमुख तरीके निम्नलिखित हैं—

(i) आनुवंशिक विभिन्नता (Genetic Variation) का उत्पन्न होना।

(ii) प्राकृतिक वरण (Natural Selection)।

(iii) उत्परिवर्तन (Mutation)।

(iv) आनुवंशिक विचलन (Genetic Drift)।

(v) जीन प्रवाह (Gene Flow)।

(vi) अनुकूल वातावरण में अधिक प्रजनन।

इन प्रक्रियाओं के कारण लाभदायक लक्षण धीरे-धीरे पूरी समष्टि में फैल जाते हैं।

18. गुणसूत्र (Chromosome) क्या है?

उत्तर ⇒
कोशिका के केन्द्रक (Nucleus) में पाए जाने वाले धागेनुमा DNA एवं प्रोटीन से बने संरचनाओं को गुणसूत्र (Chromosomes) कहते हैं। गुणसूत्रों पर ही जीन उपस्थित होते हैं, जो आनुवंशिक लक्षणों को नियंत्रित करते हैं।

कोशिका विभाजन के समय क्रोमेटिन तंतु संघनित होकर गुणसूत्र का निर्माण करते हैं। मनुष्य की प्रत्येक कायिक कोशिका में 46 गुणसूत्र (23 जोड़े) पाए जाते हैं।

गुणसूत्रों के प्रमुख कार्य—

(i) आनुवंशिक गुणों का वहन करना।

(ii) DNA एवं जीनों को सुरक्षित रखना।

(iii) कोशिका विभाजन में सहायता करना।

(iv) संतानों में लक्षणों का स्थानांतरण करना।

19. जीन (Gene) क्या है? यह कहाँ पाया जाता है?

उत्तर ⇒
जीन (Gene) DNA का वह छोटा कार्यात्मक भाग है, जो किसी विशेष लक्षण का नियंत्रण करता है। जीन को आनुवंशिकता की मूल इकाई (Unit of Heredity) कहा जाता है।

जीन गुणसूत्रों पर एक निश्चित स्थान (Locus) पर स्थित होते हैं तथा माता-पिता से संतानों में गुणों के स्थानांतरण के लिए उत्तरदायी होते हैं।

जीन के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—

(i) आनुवंशिक सूचना का संग्रह करना।

(ii) माता-पिता के गुणों को संतानों तक पहुँचाना।

(iii) प्रोटीन संश्लेषण का नियंत्रण करना।

(iv) शरीर के विभिन्न लक्षणों का निर्धारण करना।

20. विभिन्नता (Variation) क्या है? इसके क्या लाभ हैं?

उत्तर ⇒
एक ही प्रजाति के जीवों में पाए जाने वाले लक्षणों के अंतर को विभिन्नता (Variation) कहते हैं। कोई भी दो जीव पूरी तरह समान नहीं होते। विभिन्नता आनुवंशिक कारणों, उत्परिवर्तन तथा वातावरण के प्रभाव से उत्पन्न होती है।

जैव विकास की दृष्टि से विभिन्नता अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही प्राकृतिक चयन एवं नई प्रजातियों के निर्माण का आधार बनती है।

विभिन्नता के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—

(i) जीवों को बदलते वातावरण के अनुसार अनुकूलन करने में सहायता मिलती है।

(ii) नई प्रजातियों के निर्माण का आधार बनती है।

(iii) प्राकृतिक चयन को संभव बनाती है।

(iv) किसी प्रजाति के विलुप्त होने की संभावना कम हो जाती है।

(v) जैव विकास की प्रक्रिया को गति मिलती है।

21. नई स्पीशीज (Species) के उद्भव में कौन-कौन से कारक सहायक होते हैं?

उत्तर ⇒
नई प्रजाति (Species) का निर्माण एक धीरे-धीरे होने वाली विकासात्मक प्रक्रिया है, जिसे जाति उद्भवन (Speciation) कहते हैं। जब किसी जीव-समूह में लंबे समय तक आनुवंशिक परिवर्तन होते रहते हैं और वे अपने मूल समूह से इतने भिन्न हो जाते हैं कि आपस में सफल प्रजनन नहीं कर पाते, तब नई स्पीशीज का निर्माण होता है। यह प्रक्रिया लाखों वर्षों में पूर्ण होती है।

नई स्पीशीज के निर्माण में निम्नलिखित कारक सहायक होते हैं—

(i) आनुवंशिक विभिन्नता (Genetic Variation)

(ii) उत्परिवर्तन (Mutation)

(iii) प्राकृतिक वरण (Natural Selection)

(iv) आनुवंशिक विचलन (Genetic Drift)

(v) भौगोलिक पृथक्करण (Geographical Isolation)

(vi) जीन प्रवाह (Gene Flow) का रुकना।

इन सभी कारकों के संयुक्त प्रभाव से नई-नई प्रजातियों का विकास होता है।

22. लिंग गुणसूत्र (Sex Chromosomes) क्या हैं? मनुष्य में लिंग निर्धारण कैसे होता है?

उत्तर ⇒
मनुष्य की प्रत्येक कायिक कोशिका में 23 जोड़े (46) गुणसूत्र पाए जाते हैं। इनमें से 22 जोड़े सामान्य गुणसूत्र (Autosomes) तथा एक जोड़ा लिंग गुणसूत्र (Sex Chromosomes) होता है। यही गुणसूत्र बच्चे का लिंग निर्धारित करते हैं।

महिला में लिंग गुणसूत्र XX होते हैं, जबकि पुरुष में XY होते हैं। स्त्री द्वारा बनने वाले सभी अंडाणुओं में केवल X गुणसूत्र होता है, जबकि पुरुष के आधे शुक्राणुओं में X तथा आधे में Y गुणसूत्र होता है।

यदि निषेचन के समय—

  • X शुक्राणु + X अंडाणु = XX (लड़की)
  • Y शुक्राणु + X अंडाणु = XY (लड़का)

अतः मनुष्य में बच्चे का लिंग पिता के शुक्राणु द्वारा निर्धारित होता है।

लिंग गुणसूत्रों का महत्व—

(i) बच्चे का लिंग निर्धारित करते हैं।

(ii) कुछ आनुवंशिक रोगों का नियंत्रण भी करते हैं।

(iii) लैंगिक लक्षणों के विकास में सहायता करते हैं।

23. गुणसूत्र (Chromosome) का नामांकित चित्र बनाइए।

उत्तर ⇒
गुणसूत्र (Chromosome) कोशिका के केन्द्रक में पाया जाने वाला धागेनुमा संरचना है। यह DNA एवं प्रोटीन से मिलकर बना होता है। कोशिका विभाजन के समय यह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

गुणसूत्र के प्रमुख भाग निम्नलिखित हैं—

(i) क्रोमेटिड (Chromatid)

(ii) सेंट्रोमियर (Centromere)

(iii) टेलोमियर (Telomere)

सरल नामांकित चित्र—

गुणसूत्रों पर ही जीन स्थित होते हैं, जो आनुवंशिक लक्षणों का नियंत्रण करते हैं।

24. जेनेटिक्स (Genetics) या आनुवंशिकी किसे कहते हैं?

उत्तर ⇒
जेनेटिक्स (Genetics) जीवविज्ञान की वह शाखा है, जिसमें जीवों के वंशागति (Heredity) एवं विभिन्नता (Variation) का अध्ययन किया जाता है। इसके अंतर्गत यह समझा जाता है कि माता-पिता के गुण किस प्रकार उनकी संतानों में पहुँचते हैं तथा नई पीढ़ियों में विभिन्नताएँ क्यों उत्पन्न होती हैं।

आधुनिक आनुवंशिकी के जनक ग्रेगर जॉन मेंडल माने जाते हैं। उनके प्रयोगों के आधार पर आज आनुवंशिकी चिकित्सा, कृषि, जैव-प्रौद्योगिकी तथा अपराध विज्ञान जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

आनुवंशिकी का महत्व—

(i) आनुवंशिक रोगों का अध्ययन।

(ii) उन्नत फसल किस्मों का विकास।

(iii) जैव विकास को समझना।

(iv) DNA एवं जीनों का अध्ययन।

(v) वंशानुगत लक्षणों का विश्लेषण।

25. जीन कोश (Gene Pool) क्या है?

उत्तर ⇒
किसी विशेष प्रजाति की समस्त जनसंख्या (Population) में उपस्थित सभी जीनों के कुल संग्रह को जीन कोश (Gene Pool) कहते हैं। दूसरे शब्दों में, किसी आबादी के सभी सदस्यों के आनुवंशिक पदार्थ (Genetic Material) का कुल योग जीन कोश कहलाता है।

जीन कोश में जितनी अधिक विभिन्नता होगी, उस प्रजाति के बदलते वातावरण में जीवित रहने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।

जीन कोश का महत्व—

(i) आनुवंशिक विविधता बनाए रखता है।

(ii) प्राकृतिक चयन को प्रभावित करता है।

(iii) नई प्रजातियों के निर्माण में सहायक होता है।

(iv) जैव विकास का आधार बनता है।

(v) पर्यावरणीय परिवर्तनों के प्रति अनुकूलन में सहायता करता है।

26. बाघों की संख्या में कमी आनुवंशिकी की दृष्टि से चिंता का विषय क्यों है?

उत्तर ⇒
यदि किसी प्रजाति के जीवों की संख्या बहुत कम हो जाती है, तो उनका जीन कोश (Gene Pool) भी सीमित हो जाता है। इसके कारण आनुवंशिक विभिन्नता (Genetic Variation) कम हो जाती है। विभिन्नता कम होने पर बदलते वातावरण, नई बीमारियों तथा प्राकृतिक आपदाओं से उस प्रजाति के जीवों के बचने की संभावना भी कम हो जाती है।

बाघों की संख्या में लगातार कमी आने से उनके विलुप्त (Extinct) होने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए उनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

बाघों की संख्या कम होने के दुष्परिणाम—

(i) आनुवंशिक विविधता में कमी।

(ii) अंतःप्रजनन (Inbreeding) की संभावना बढ़ना।

(iii) रोगों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ना।

(iv) विलुप्त होने का खतरा।

(v) पारिस्थितिक संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव।

27. जाति उद्भवन (Speciation) क्या है? इसके प्रमुख कारण लिखिए।

उत्तर ⇒
जब किसी पुरानी प्रजाति से धीरे-धीरे एक नई प्रजाति का निर्माण होता है, तो इस प्रक्रिया को जाति उद्भवन (Speciation) कहते हैं। यह जैव विकास की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। नई प्रजाति बनने में लाखों वर्ष लग सकते हैं।

जाति उद्भवन के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—

(i) आनुवंशिक विभिन्नता।

(ii) उत्परिवर्तन।

(iii) प्राकृतिक वरण।

(iv) भौगोलिक पृथक्करण।

(v) आनुवंशिक विचलन।

(vi) प्रजनन पृथक्करण।

इन कारणों से दो समूह धीरे-धीरे इतने भिन्न हो जाते हैं कि वे आपस में सफल प्रजनन नहीं कर पाते।

28. प्रभावी (Dominant) एवं अप्रभावी (Recessive) लक्षण क्या हैं?

उत्तर ⇒
जब किसी लक्षण के दो जीन एक साथ उपस्थित होते हैं, तब जो जीन अपना प्रभाव व्यक्त करता है उसे प्रभावी (Dominant) जीन कहते हैं, जबकि जिसका प्रभाव छिप जाता है उसे अप्रभावी (Recessive) जीन कहते हैं।

उदाहरण के लिए मटर के पौधे में लंबा (T) प्रभावी तथा बौना (t) अप्रभावी लक्षण है। इसलिए TT एवं Tt दोनों पौधे लंबे होंगे, जबकि केवल tt पौधा बौना होगा।

प्रभावी एवं अप्रभावी लक्षणों की विशेषताएँ—

(i) प्रभावी जीन अपना प्रभाव तुरंत दिखाता है।

(ii) अप्रभावी जीन केवल समान जोड़ी (tt) में ही व्यक्त होता है।

(iii) प्रभावी लक्षण F₁ पीढ़ी में दिखाई देता है।

(iv) अप्रभावी लक्षण सामान्यतः F₂ पीढ़ी में प्रकट होता है।

(v) मेंडल के प्रयोगों द्वारा इनका सिद्धांत स्थापित किया गया।

29. क्या भौतिक पृथक्करण (Geographical Isolation) अलैंगिक जनन वाले जीवों के जाति-उद्भव का प्रमुख कारक हो सकता है? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒
हाँ, कुछ परिस्थितियों में भौतिक पृथक्करण (Geographical Isolation) अलैंगिक जनन करने वाले जीवों के जाति-उद्भव (Speciation) का प्रमुख कारक हो सकता है, लेकिन इसका प्रभाव लैंगिक जनन करने वाले जीवों की अपेक्षा कम होता है। जब किसी जीव की आबादी पर्वत, नदी, समुद्र, रेगिस्तान अथवा अन्य प्राकृतिक बाधाओं के कारण अलग-अलग क्षेत्रों में विभाजित हो जाती है, तब प्रत्येक समूह अपने-अपने वातावरण के अनुसार अलग प्रकार से विकसित होने लगता है।

समय के साथ उत्परिवर्तन, प्राकृतिक वरण तथा आनुवंशिक परिवर्तन इन समूहों में अलग-अलग होते रहते हैं। परिणामस्वरूप दोनों समूहों के लक्षणों में इतना अंतर आ सकता है कि वे नई प्रजातियों का रूप धारण कर लें।

भौतिक पृथक्करण के प्रभाव निम्नलिखित हैं—

(i) जीवों के बीच जीनों का आदान-प्रदान रुक जाता है।

(ii) प्रत्येक समूह अलग वातावरण के अनुसार अनुकूलित होता है।

(iii) आनुवंशिक विभिन्नता बढ़ने लगती है।

(iv) नई प्रजातियों के निर्माण की संभावना बढ़ जाती है।

(v) जैव विकास की प्रक्रिया को गति मिलती है।

30. क्या तितली और चमगादड़ के पंख समजात अंग (Homologous Organs) हैं? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒
नहीं, तितली और चमगादड़ के पंख समजात अंग (Homologous Organs) नहीं हैं। इन्हें समरूप अंग (Analogous Organs) कहा जाता है। समरूप अंग वे अंग होते हैं जिनका कार्य समान होता है, लेकिन उनकी उत्पत्ति (Origin), आंतरिक संरचना तथा विकासक्रम अलग-अलग होता है।

तितली के पंख काइटिन (Chitin) से बने होते हैं और वे कीटों के बाह्य कंकाल का भाग हैं, जबकि चमगादड़ के पंख अग्रपाद (Forelimbs) के परिवर्तित रूप हैं, जिनमें अस्थियाँ, मांसपेशियाँ तथा त्वचा पाई जाती हैं।

समरूप अंगों की विशेषताएँ—

(i) कार्य समान होता है।

(ii) उत्पत्ति भिन्न होती है।

(iii) आंतरिक संरचना अलग होती है।

(iv) यह अभिसारी विकास (Convergent Evolution) का प्रमाण है।

अन्य उदाहरण—

  • पक्षी एवं तितली के पंख।
  • मछली एवं व्हेल के तैरने वाले अंग।

31. यदि किसी अलैंगिक जनन करने वाली समष्टि के 10% जीवों में लक्षण A तथा 90% जीवों में लक्षण B पाया जाता है, तो कौन-सा लक्षण पहले उत्पन्न हुआ होगा? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒
यदि किसी समष्टि के 90% जीवों में लक्षण B तथा केवल 10% जीवों में लक्षण A पाया जाता है, तो यह माना जाएगा कि लक्षण B पहले उत्पन्न हुआ होगा।

अलैंगिक जनन में संतति लगभग अपने जनक के समान होती है तथा आनुवंशिक परिवर्तन बहुत कम होते हैं। यदि कोई लक्षण लंबे समय से किसी समष्टि में उपस्थित है, तो वह धीरे-धीरे अधिकांश जीवों में फैल जाता है। इसके विपरीत, नया उत्पन्न होने वाला लक्षण प्रारम्भ में केवल कुछ ही जीवों में पाया जाता है।

अतः 90% जीवों में उपस्थित लक्षण B पुराना तथा मूल लक्षण माना जाएगा, जबकि 10% जीवों में उपस्थित लक्षण A अपेक्षाकृत नया या बाद में उत्पन्न हुआ लक्षण माना जाएगा।

इसका कारण निम्नलिखित है—

(i) अलैंगिक जनन में संतानों में समानता अधिक होती है।

(ii) पुराने लक्षण अधिक संख्या में पाए जाते हैं।

(iii) नए लक्षण उत्परिवर्तन के कारण सीमित जीवों में दिखाई देते हैं।

(iv) प्राकृतिक चयन के अनुसार लाभदायक लक्षण धीरे-धीरे पूरी आबादी में फैलते हैं।

32. संतति में नर एवं मादा जनकों का आनुवंशिक योगदान बराबर कैसे सुनिश्चित होता है?

उत्तर ⇒
लैंगिक जनन में नर एवं मादा दोनों जनक संतति को समान आनुवंशिक योगदान देते हैं। मनुष्य की प्रत्येक कायिक कोशिका में 46 गुणसूत्र (23 जोड़े) होते हैं। अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis) के दौरान नर एवं मादा दोनों के युग्मकों (Gametes) में गुणसूत्रों की संख्या आधी होकर 23 रह जाती है।

निषेचन (Fertilization) के समय नर का एक शुक्राणु तथा मादा का एक अंडाणु आपस में मिलते हैं। दोनों अपने-अपने 23-23 गुणसूत्र प्रदान करते हैं। परिणामस्वरूप बनने वाले युग्मनज (Zygote) में पुनः 46 गुणसूत्र हो जाते हैं।

आनुवंशिक योगदान बराबर होने के प्रमुख कारण—

(i) नर एवं मादा दोनों 23-23 गुणसूत्र प्रदान करते हैं।

(ii) दोनों के जीन संतति में समान रूप से पहुँचते हैं।

(iii) अर्द्धसूत्री विभाजन गुणसूत्रों की संख्या को आधा कर देता है।

(iv) निषेचन के समय दोनों युग्मकों का समान योगदान होता है।

(v) इसी कारण संतान में माता एवं पिता दोनों के गुण दिखाई देते हैं।

33. जीवाश्म (Fossils) क्या हैं? जैव विकास के अध्ययन में इनका क्या महत्व है?

उत्तर ⇒
पृथ्वी की चट्टानों में सुरक्षित प्राचीन जीवों अथवा पौधों के अवशेष, छाप या उनके शरीर के कठोर भागों को जीवाश्म (Fossils) कहा जाता है। ये लाखों-करोड़ों वर्ष पहले जीवित रहे जीवों के प्रमाण होते हैं। जीवाश्मों का अध्ययन करने वाले विज्ञान को जीवाश्म विज्ञान (Palaeontology) कहते हैं।

जीवाश्म हमें यह जानकारी देते हैं कि प्राचीन समय में कौन-कौन से जीव पृथ्वी पर रहते थे, उनकी संरचना कैसी थी तथा समय के साथ उनमें किस प्रकार परिवर्तन हुआ। इसलिए जीवाश्मों को जैव विकास का सबसे महत्वपूर्ण प्रमाण माना जाता है।

जीवाश्मों का महत्व निम्नलिखित है—

(i) जीवों के विकासक्रम (Evolution) की जानकारी प्राप्त होती है।

(ii) विलुप्त (Extinct) जीवों के बारे में जानकारी मिलती है।

(iii) जीवों के समान पूर्वज (Common Ancestor) का पता चलता है।

(iv) पृथ्वी की आयु एवं चट्टानों के निर्माण काल का अनुमान लगाया जाता है।

(v) नई प्रजातियों के विकास का प्रमाण प्राप्त होता है।

34. समजात अंग (Homologous Organs) क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर ⇒
वे अंग जिनकी आंतरिक संरचना एवं उत्पत्ति समान होती है, लेकिन उनके कार्य अलग-अलग होते हैं, उन्हें समजात अंग (Homologous Organs) कहते हैं। ऐसे अंग यह प्रमाणित करते हैं कि संबंधित जीवों का विकास किसी समान पूर्वज से हुआ है।

समजात अंग अपसारी विकास (Divergent Evolution) का प्रमाण माने जाते हैं। इन अंगों की मूल संरचना एक जैसी होती है, परंतु वातावरण एवं आवश्यकताओं के अनुसार इनके कार्य बदल जाते हैं।

उदाहरण—

(i) मनुष्य का हाथ।

(ii) घोड़े का अगला पैर।

(iii) व्हेल का फ्लिपर।

(iv) चमगादड़ का पंख।

इन सभी की अस्थियों की मूल संरचना समान होती है, लेकिन इनके कार्य अलग-अलग होते हैं।

समजात अंगों की विशेषताएँ—

(i) उत्पत्ति समान होती है।

(ii) आंतरिक संरचना समान होती है।

(iii) कार्य अलग-अलग होते हैं।

(iv) अपसारी विकास का प्रमाण हैं।

35. समरूप अंग (Analogous Organs) क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर ⇒
वे अंग जिनका कार्य समान होता है, लेकिन उनकी उत्पत्ति एवं आंतरिक संरचना अलग-अलग होती है, उन्हें समरूप अंग (Analogous Organs) कहते हैं। ऐसे अंग विभिन्न जीवों में समान वातावरण के कारण विकसित होते हैं।

समरूप अंग अभिसारी विकास (Convergent Evolution) का प्रमाण माने जाते हैं। इनका विकास अलग-अलग पूर्वजों से हुआ होता है, लेकिन समान कार्य करने के कारण इनमें बाहरी समानता दिखाई देती है।

उदाहरण—

(i) तितली एवं पक्षी के पंख।

(ii) तितली एवं चमगादड़ के पंख।

(iii) मछली एवं व्हेल के तैरने वाले अंग।

समरूप अंगों की विशेषताएँ—

(i) कार्य समान होता है।

(ii) उत्पत्ति भिन्न होती है।

(iii) आंतरिक संरचना अलग होती है।

(iv) अभिसारी विकास का प्रमाण हैं।

36. समजात अंग एवं समरूप अंग में अंतर लिखिए।

समजात अंग (Homologous Organs)समरूप अंग (Analogous Organs)
(i) उत्पत्ति समान होती है।(i) उत्पत्ति भिन्न होती है।
(ii) आंतरिक संरचना समान होती है।(ii) आंतरिक संरचना भिन्न होती है।
(iii) कार्य अलग-अलग होते हैं।(iii) कार्य समान होते हैं।
(iv) अपसारी विकास का प्रमाण हैं।(iv) अभिसारी विकास का प्रमाण हैं।
(v) उदाहरण—मनुष्य का हाथ एवं चमगादड़ का पंख।(v) उदाहरण—तितली एवं पक्षी के पंख।

37. DNA (डी.एन.ए.) क्या है? इसका महत्व लिखिए।

उत्तर ⇒
DNA (Deoxyribonucleic Acid) वह आनुवंशिक पदार्थ है, जिसमें किसी जीव की सभी आनुवंशिक सूचनाएँ सुरक्षित रहती हैं। DNA गुणसूत्रों पर पाया जाता है तथा यही जीनों का निर्माण करता है। प्रत्येक जीव की शारीरिक बनावट, रंग, ऊँचाई, रक्त समूह तथा अन्य आनुवंशिक लक्षण DNA द्वारा नियंत्रित होते हैं।

DNA की संरचना दो कुंडलित श्रृंखलाओं (Double Helix) से बनी होती है, जिसकी खोज वॉटसन एवं क्रिक (Watson and Crick) ने 1953 में की थी।

DNA का महत्व निम्नलिखित है—

(i) आनुवंशिक सूचनाओं का संग्रह करता है।

(ii) माता-पिता के गुण संतानों तक पहुँचाता है।

(iii) प्रोटीन निर्माण को नियंत्रित करता है।

(iv) जैव विकास का आधार है।

(v) आनुवंशिक रोगों के अध्ययन में उपयोगी है।

38. DNA की प्रतिकृति (DNA Replication) क्या है?

उत्तर ⇒
कोशिका विभाजन से पहले DNA द्वारा अपनी ही समान प्रतिलिपि (Copy) बनाने की प्रक्रिया को DNA प्रतिकृति (DNA Replication) कहते हैं। इस प्रक्रिया के कारण बनने वाली नई कोशिकाओं में समान आनुवंशिक जानकारी पहुँचती है।

DNA प्रतिकृति के दौरान दोनों श्रृंखलाएँ अलग हो जाती हैं तथा प्रत्येक पुरानी श्रृंखला के आधार पर नई पूरक श्रृंखला बनती है। इस प्रकार दो समान DNA अणुओं का निर्माण होता है।

DNA प्रतिकृति का महत्व—

(i) आनुवंशिक सूचना सुरक्षित रहती है।

(ii) कोशिका विभाजन सफलतापूर्वक होता है।

(iii) संतानों में समान गुण पहुँचते हैं।

(iv) वृद्धि एवं विकास संभव होता है।

(v) जैव विकास में विभिन्नता उत्पन्न होने का आधार बनता है।

39. प्राकृतिक वरण (Natural Selection) एवं कृत्रिम वरण (Artificial Selection) में अंतर लिखिए।

प्राकृतिक वरण (Natural Selection)कृत्रिम वरण (Artificial Selection)
(i) यह प्रकृति द्वारा होता है।(i) यह मनुष्य द्वारा कराया जाता है।
(ii) योग्य जीव जीवित रहते हैं।(ii) मनुष्य उपयोगी गुणों वाले जीवों का चयन करता है।
(iii) इसमें मानव का हस्तक्षेप नहीं होता।(iii) इसमें मानव का हस्तक्षेप होता है।
(iv) जैव विकास का आधार है।(iv) नई नस्लों के विकास में उपयोगी है।
(v) उदाहरण—जंगल में जीवों का चयन।(v) उदाहरण—उन्नत फसल एवं पशु नस्लों का विकास।

40. ‘अनुवांशिकता एवं जैव विकास’ अध्याय का निष्कर्ष लिखिए।

उत्तर ⇒
अनुवांशिकता एवं जैव विकास जीवविज्ञान का अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। इसके माध्यम से यह समझ में आता है कि माता-पिता के गुण किस प्रकार उनकी संतानों में स्थानांतरित होते हैं तथा समय के साथ जीवों में विभिन्नताएँ कैसे उत्पन्न होती हैं। ग्रेगर जॉन मेंडल के प्रयोगों ने आनुवंशिकी की वैज्ञानिक नींव रखी, जबकि चार्ल्स डार्विन ने प्राकृतिक वरण के सिद्धांत द्वारा जैव विकास की व्याख्या की।

जीन, DNA, गुणसूत्र, उत्परिवर्तन, विभिन्नता तथा प्राकृतिक चयन जैसी प्रक्रियाएँ नई प्रजातियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जीवाश्म, समजात अंग तथा समरूप अंग जैव विकास के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं। इसलिए यह अध्याय न केवल बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि जीवों की उत्पत्ति, विकास तथा आनुवंशिक संबंधों को समझने के लिए भी अत्यंत उपयोगी है।

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Chapter 1: रासायनिक अभिक्रिया और समीकरण
Chapter 2: अम्ल, क्षार और लवण
Chapter 3: धातु और अधातु
Chapter 4: कार्बन और उसके यौगिक
Chapter 5: तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण
Chapter 6: जैव प्रक्रम
Chapter 7: नियंत्रण और समन्वय
Chapter 8: जीव जनन कैसे करते हैं?
Chapter 9: आनुवंशिकी और जैव विकास
Chapter 10: प्रकाश : परावर्तन और अपवर्तन
Chapter 11: मानव नेत्र और रंग-बिरंगा संसार
Chapter 12: विद्युत्
Chapter 13: विद्युतधारा के चुम्बकीय प्रभाव
Chapter 14: ऊर्जा के स्रोत
Chapter 15: हमारा पर्यावरण
Chapter 16: प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन

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