Class 10 Science: विद्युतधारा के चुम्बकीय प्रभाव
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Chapter Overview
| Class | 10 |
| Subject | Science |
| Chapter Name | विद्युतधारा के चुम्बकीय प्रभाव |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव (Subjective Questions)
1. विद्युत चुंबकीय प्रेरण से क्या समझते हैं?
उत्तर:
जब किसी चालक के चारों ओर स्थित चुंबकीय क्षेत्र में परिवर्तन किया जाता है और उसके परिणामस्वरूप उस चालक में विद्युत धारा उत्पन्न हो जाती है, तो इस घटना को विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) कहते हैं। इस सिद्धांत की खोज माइकल फैराडे ने की थी।
2. विद्युत मोटर के उपयोग लिखिए।
उत्तर:
विद्युत मोटर का उपयोग अनेक विद्युत उपकरणों में किया जाता है, जैसे—
(i) विद्युत पंखों में।
(ii) रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) में।
(iii) विद्युत मिश्रक (मिक्सर) में।
(iv) वाशिंग मशीन में।
(v) जल पंप तथा अन्य घरेलू विद्युत उपकरणों में।
3. चुंबकत्व की वास्तविक पहचान क्या है?
उत्तर:
चुंबक की वास्तविक पहचान उसके ध्रुवों के व्यवहार से होती है। यदि दो चुंबकों के सजातीय ध्रुव (N-N या S-S) पास लाने पर प्रतिकर्षण तथा विजातीय ध्रुव (N-S) पास लाने पर आकर्षण उत्पन्न हो, तो यह चुंबकत्व की वास्तविक पहचान है।
4. विद्युत फ्यूज क्या है? यह किस मिश्रधातु का बना होता है?
उत्तर:
फ्यूज एक सुरक्षा उपकरण है, जिसका उपयोग विद्युत परिपथ को अतिधारा (Overload) तथा लघुपथन (Short Circuit) से सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है। जब परिपथ में आवश्यकता से अधिक धारा प्रवाहित होती है, तो फ्यूज तार गर्म होकर पिघल जाता है और परिपथ को तोड़ देता है।
फ्यूज तार सामान्यतः टिन तथा ताँबे (या टिन एवं सीसा) की मिश्रधातु से बनाया जाता है, जिसका गलनांक कम होता है।
5. विद्युत चुंबक के चुंबकत्व की तीव्रता किन-किन बातों पर निर्भर करती है?
उत्तर:
विद्युत चुंबक की चुंबकत्व की तीव्रता निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करती है—
(i) परिनालिका (कुंडली) के फेरों की संख्या: फेरों की संख्या बढ़ाने पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता बढ़ जाती है।
(ii) विद्युत धारा का मान: धारा का मान बढ़ने पर चुंबकीय क्षेत्र अधिक प्रबल हो जाता है।
(iii) क्रोड (Core) की प्रकृति: यदि परिनालिका के भीतर नरम लोहे का क्रोड रखा जाए, तो अधिक शक्तिशाली विद्युत चुंबक प्राप्त होता है।
6. विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव से संबंधित दक्षिण-हस्त अंगूठा नियम लिखिए।
उत्तर:
दक्षिण-हस्त अंगूठा नियम के अनुसार, यदि किसी सीधे धारावाही चालक को दाहिने हाथ से इस प्रकार पकड़ें कि अंगूठा विद्युत धारा की दिशा को दर्शाए, तो मुड़ी हुई उँगलियाँ चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा को प्रदर्शित करती हैं।
7. फ्लेमिंग का वामहस्त नियम लिखिए।
उत्तर:
फ्लेमिंग के वामहस्त नियम के अनुसार, यदि बाएँ हाथ के अंगूठे, तर्जनी तथा मध्यमा को एक-दूसरे के लंबवत फैलाया जाए तथा—
- तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा,
- मध्यमा विद्युत धारा की दिशा,
को प्रदर्शित करे, तो अंगूठा चालक पर लगने वाले बल अथवा उसकी गति की दिशा को प्रदर्शित करता है।

8. विद्युत धारा की प्रबलता की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
किसी चालक के अनुप्रस्थ काट से प्रति सेकंड प्रवाहित होने वाले विद्युत आवेश की मात्रा को विद्युत धारा की प्रबलता कहते हैं।
यदि किसी चालक में t सेकंड में Q कुलाम आवेश प्रवाहित होता है, तो—
I =Q/t
जहाँ,
- I = विद्युत धारा
- Q = विद्युत आवेश
- t = समय
9. चुंबक किसे कहते हैं?
उत्तर:
चुंबक वह पदार्थ है, जो लोहे, निकेल, कोबाल्ट तथा अन्य चुंबकीय पदार्थों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यदि किसी चुंबक को स्वतंत्र रूप से लटकाया जाए, तो वह सदैव उत्तर-दक्षिण दिशा में स्थिर हो जाता है।
प्रत्येक चुंबक के दो ध्रुव होते हैं—
(i) उत्तरी ध्रुव (North Pole)
(ii) दक्षिणी ध्रुव (South Pole)
10. दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद क्यों नहीं करतीं?
उत्तर:
यदि दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद करें, तो प्रतिच्छेदन बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दो दिशाएँ प्राप्त होंगी, जो असंभव है। इसलिए दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी भी एक-दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करतीं।
11. दिष्ट धारा (DC) के कुछ स्रोतों के नाम लिखिए।
उत्तर:
दिष्ट धारा (Direct Current) के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं—
(i) विद्युत सेल (Electric Cell)
(ii) बैटरी (Battery)
(iii) डी.सी. जनित्र (DC Generator)
(iv) सौर सेल (Solar Cell)
12. विद्युत जनित्र (Electric Generator) का सिद्धांत लिखिए।
उत्तर:
विद्युत जनित्र विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के सिद्धांत पर कार्य करता है। जब किसी चालक को चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है, तो उसमें विद्युत धारा प्रेरित होती है। इस प्रकार विद्युत जनित्र यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
13. प्रत्यावर्ती धारा (AC) की दो हानियाँ लिखिए।
उत्तर:
प्रत्यावर्ती धारा की प्रमुख हानियाँ निम्नलिखित हैं—
(i) इससे विद्युत लेपन (Electroplating) तथा बैटरियों का आवेशन (Charging) नहीं किया जा सकता।
(ii) इसका उपयोग विद्युत अपघटन (Electrolysis) की प्रक्रियाओं में सीधे नहीं किया जा सकता।
14. लघुपथन (Short Circuit) से क्या समझते हैं?
उत्तर:
जब किसी कारणवश जीवित (Live) तार तथा उदासीन (Neutral) तार आपस में सीधे संपर्क में आ जाते हैं, तो परिपथ का प्रतिरोध बहुत कम हो जाता है और उसमें अत्यधिक विद्युत धारा प्रवाहित होने लगती है। इस स्थिति को लघुपथन (Short Circuit) कहते हैं।
लघुपथन के कारण अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिससे विद्युत उपकरणों के खराब होने तथा आग लगने का खतरा रहता है।
15. विद्युत बल्ब में निष्क्रिय गैस क्यों भरी जाती है?
उत्तर:
विद्युत बल्ब के अंदर टंगस्टन का एक पतला फिलामेंट होता है, जो विद्युत धारा प्रवाहित होने पर अत्यधिक गर्म होकर प्रकाश उत्पन्न करता है। यदि बल्ब के भीतर ऑक्सीजन उपस्थित हो, तो टंगस्टन का फिलामेंट ऑक्सीकरण के कारण शीघ्र जल जाएगा।
इसी कारण बल्ब के अंदर आर्गन (Argon) अथवा नाइट्रोजन (Nitrogen) जैसी निष्क्रिय गैसें भरी जाती हैं, जिससे फिलामेंट सुरक्षित रहता है और बल्ब का जीवनकाल बढ़ जाता है।
16. विद्युत चुंबक तथा स्थायी चुंबक में अंतर लिखिए।
| विद्युत चुंबक | स्थायी चुंबक |
|---|---|
| (i) इसका चुंबकत्व केवल विद्युत धारा प्रवाहित होने तक रहता है। | (i) इसका चुंबकत्व स्थायी होता है। |
| (ii) इसकी चुंबकीय शक्ति को आवश्यकता अनुसार बढ़ाया या घटाया जा सकता है। | (ii) इसकी चुंबकीय शक्ति लगभग स्थिर रहती है। |
| (iii) धारा की दिशा बदलने पर इसके ध्रुव भी बदल जाते हैं। | (iii) इसके ध्रुव स्थायी रहते हैं। |
| (iv) इसे सामान्यतः नरम लोहे के क्रोड से बनाया जाता है। | (iv) इसे इस्पात या कठोर चुंबकीय पदार्थों से बनाया जाता है। |
17. परिनालिका की सहायता से स्थायी चुंबक कैसे बनाया जाता है?
उत्तर:
जब किसी स्टील की छड़ को परिनालिका (Solenoid) के भीतर रखकर उसमें कुछ समय तक विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो स्टील की छड़ चुंबकित हो जाती है। धारा बंद करने के बाद भी उसका चुंबकत्व बना रहता है। इस प्रकार परिनालिका की सहायता से स्थायी चुंबक बनाया जाता है।

18. 2 kW शक्ति का एक विद्युत तंदूर 220 V के घरेलू परिपथ में लगाया गया है, जबकि परिपथ का अनुमत धारा मान 5 A है। क्या होगा? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
दिया गया है—
- शक्ति (P) = 2 kW = 2000 W
- विभव (V) = 220 V
विद्युत धारा (I),
I = P/V = 2000/220 = 9.09 A
अर्थात् तंदूर लगभग 9.09 A धारा लेगा, जबकि परिपथ का अनुमत धारा मान केवल 5 A है। इसलिए अधिक धारा प्रवाहित होने पर फ्यूज तार पिघल जाएगा और परिपथ टूट जाएगा। इससे विद्युत तंदूर तथा अन्य उपकरण सुरक्षित रहेंगे।
19. 1.0 kW अंकित एक विद्युत हीटर 250 V स्रोत से जोड़ा गया है। वह कितनी विद्युत धारा ग्रहण करेगा?
उत्तर:
दिया गया है—
- शक्ति (P) = 1.0 kW = 1000 W
- विभव (V) = 250 V
विद्युत धारा,

अतः हीटर 4 एम्पीयर विद्युत धारा ग्रहण करेगा।
20. विद्युत चुंबक की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
विद्युत चुंबक की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
(i) इसका चुंबकत्व स्थायी नहीं होता, बल्कि केवल धारा प्रवाहित होने तक ही बना रहता है।
(ii) इसके एक सिरे पर उत्तरी ध्रुव तथा दूसरे सिरे पर दक्षिणी ध्रुव बनता है।
(iii) धारा की दिशा बदलने पर इसके ध्रुवों की स्थिति भी बदल जाती है।
(iv) इसकी चुंबकीय शक्ति परिनालिका के फेरों की संख्या, प्रवाहित धारा के मान तथा क्रोड की प्रकृति पर निर्भर करती है।
21. चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के तीन तरीकों की सूची बनाइए।
उत्तर:
चुंबकीय क्षेत्र निम्नलिखित तरीकों से उत्पन्न किया जा सकता है—
(i) प्राकृतिक अथवा कृत्रिम चुंबक द्वारा।
(ii) विद्युत चुंबक द्वारा।
(iii) विद्युत धारा प्रवाहित करने वाले सीधे चालक, वृत्ताकार कुंडली अथवा परिनालिका (Solenoid) द्वारा।
22. फ्यूज तार की तीन प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
फ्यूज तार की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
(i) इसका प्रतिरोध अपेक्षाकृत अधिक होता है।
(ii) इसका गलनांक (Melting Point) बहुत कम होता है।
(iii) अधिक धारा प्रवाहित होने पर यह शीघ्र पिघलकर परिपथ को तोड़ देता है तथा विद्युत उपकरणों की सुरक्षा करता है।
23. ताँबे की तार की कुंडली गैल्वेनोमीटर से जुड़ी है। यदि दण्ड चुंबक के साथ निम्नलिखित क्रियाएँ की जाएँ, तो क्या होगा?
(i) चुंबक का उत्तरी ध्रुव पहले कुंडली के भीतर प्रवेश कराया जाए।
(ii) चुंबक को कुंडली से बाहर निकाला जाए।
(iii) चुंबक को कुंडली के भीतर स्थिर रखा जाए।
उत्तर:
(i) जब चुंबक का उत्तरी ध्रुव कुंडली के भीतर प्रवेश करता है, तो कुंडली में प्रेरित धारा उत्पन्न होती है और गैल्वेनोमीटर की सूई एक दिशा में विक्षेपित होती है।
(ii) जब चुंबक को कुंडली से बाहर निकाला जाता है, तो प्रेरित धारा की दिशा बदल जाती है। इसलिए गैल्वेनोमीटर की सूई विपरीत दिशा में विक्षेपित होती है।
(iii) यदि चुंबक कुंडली के भीतर स्थिर रखा जाए, तो चुंबकीय फ्लक्स में कोई परिवर्तन नहीं होता। इसलिए न तो प्रेरित धारा उत्पन्न होती है और न ही गैल्वेनोमीटर की सूई में कोई विक्षेप होता है।
24. किसी छड़ चुंबक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ बनाइए।
उत्तर:
परीक्षा में इस प्रश्न का उत्तर देते समय छड़ चुंबक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का नामांकित चित्र बनाइए। चित्र में यह स्पष्ट दिखाना चाहिए कि चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ चुंबक के बाहर उत्तरी ध्रुव (N) से निकलकर दक्षिणी ध्रुव (S) में प्रवेश करती हैं तथा चुंबक के भीतर दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर जाती हैं। इस प्रकार ये बंद वक्र (Closed Curves) बनाती हैं।

25. चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के गुण लिखिए।
उत्तर:
चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं—
(i) चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ सदैव बंद वक्र (Closed Curves) होती हैं।
(ii) जहाँ क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे के अधिक निकट होती हैं, वहाँ चुंबकीय क्षेत्र अधिक प्रबल होता है।
(iii) दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी भी एक-दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करतीं।
26. चुंबक के निकट लाने पर दिक्-सूचक (Compass Needle) की सूई विक्षेपित क्यों हो जाती है?
उत्तर:
दिक्-सूचक की सूई स्वयं एक छोटा चुंबक होती है, जिसके एक सिरे पर उत्तरी ध्रुव तथा दूसरे सिरे पर दक्षिणी ध्रुव होता है। जब इसे किसी चुंबक के निकट लाया जाता है, तो चुंबकीय आकर्षण अथवा प्रतिकर्षण के कारण उस पर बल लगता है। इसी कारण दिक्-सूचक की सूई अपनी मूल स्थिति से विक्षेपित हो जाती है।
27. पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
पृथ्वी एक विशाल चुंबक की भाँति व्यवहार करती है। इसका चुंबकीय दक्षिण ध्रुव भौगोलिक उत्तर दिशा के निकट तथा चुंबकीय उत्तर ध्रुव भौगोलिक दक्षिण दिशा के निकट स्थित होता है। इसी कारण स्वतंत्र रूप से लटकाई गई चुंबकीय सूई सदैव उत्तर-दक्षिण दिशा में स्थिर हो जाती है।
पृथ्वी के चुंबकीय अक्ष तथा भौगोलिक अक्ष के बीच लगभग 11.5° (लगभग 11°–12°) का कोण होता है।
28. परिनालिका में विद्युत धारा प्रवाहित होने पर उसका कौन-सा सिरा उत्तरी ध्रुव तथा कौन-सा सिरा दक्षिणी ध्रुव बनता है? समझाइए।
उत्तर:
परिनालिका के किसी सिरे को सामने से देखने पर यदि उसमें विद्युत धारा वामावर्त (Anticlockwise) दिशा में प्रवाहित होती हुई दिखाई दे, तो वह सिरा उत्तरी ध्रुव की भाँति व्यवहार करता है।
यदि उसी सिरे पर धारा दक्षिणावर्त (Clockwise) दिशा में प्रवाहित होती दिखाई दे, तो वह सिरा दक्षिणी ध्रुव की भाँति व्यवहार करता है।

29. परिनालिका चुंबक की भाँति कैसे व्यवहार करती है? क्या किसी छड़ चुंबक की सहायता से उसके ध्रुवों की पहचान की जा सकती है?
उत्तर:
जब किसी परिनालिका में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। इस कारण वह एक छड़ चुंबक की तरह व्यवहार करने लगती है तथा उसके दो ध्रुव बन जाते हैं।
परिनालिका के ध्रुवों की पहचान छड़ चुंबक की सहायता से की जा सकती है। यदि छड़ चुंबक का उत्तरी ध्रुव परिनालिका के किसी सिरे के निकट लाने पर आकर्षण हो, तो वह सिरा दक्षिणी ध्रुव होगा। यदि प्रतिकर्षण हो, तो वह सिरा उत्तरी ध्रुव होगा।
30. किसी सीधे धारावाही चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने वाला नियम लिखिए।
उत्तर:
दक्षिण-हस्त अंगूठा नियम के अनुसार, यदि किसी सीधे धारावाही चालक को दाहिने हाथ से इस प्रकार पकड़ें कि अंगूठा विद्युत धारा की दिशा को दर्शाए, तो मुड़ी हुई उँगलियाँ चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा को प्रदर्शित करती हैं। इसी नियम की सहायता से सीधे चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात की जाती है।

31. फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम लिखिए।
उत्तर:
फ्लेमिंग के दक्षिण-हस्त नियम के अनुसार, यदि दाएँ हाथ के अंगूठे, तर्जनी तथा मध्यमा को एक-दूसरे के लंबवत फैलाया जाए और—
- तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को,
- अंगूठा चालक की गति की दिशा को,
दर्शाए, तो मध्यमा प्रेरित विद्युत धारा की दिशा को प्रदर्शित करती है। इस नियम का उपयोग विद्युत जनित्र में प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
32. विद्युत मोटर का सिद्धांत लिखिए।
उत्तर:
विद्युत मोटर इस सिद्धांत पर कार्य करती है कि जब किसी धारावाही चालक को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर एक बल कार्य करता है, जिससे चालक गति करने लगता है। इस सिद्धांत के आधार पर विद्युत मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करती है।
33. विद्युत मोटर तथा विद्युत जनित्र में अंतर लिखिए।
| विद्युत मोटर | विद्युत जनित्र |
|---|---|
| (i) यह विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करती है। | (i) यह यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है। |
| (ii) यह फ्लेमिंग के वामहस्त नियम पर आधारित है। | (ii) यह फ्लेमिंग के दक्षिण-हस्त नियम पर आधारित है। |
| (iii) यह धारावाही चालक पर लगने वाले बल के सिद्धांत पर कार्य करती है। | (iii) यह विद्युत चुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है। |
| (iv) इसका उपयोग पंखे, मिक्सर, पंप आदि में किया जाता है। | (iv) इसका उपयोग विद्युत उत्पादन के लिए किया जाता है। |
34. विद्युत चुंबकीय प्रेरण क्या है?
उत्तर:
जब किसी चालक के निकट स्थित चुंबकीय क्षेत्र में परिवर्तन किया जाता है और उसके परिणामस्वरूप चालक में विद्युत धारा उत्पन्न हो जाती है, तो इस घटना को विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) कहते हैं। इस सिद्धांत की खोज माइकल फैराडे ने की थी।
35. घरेलू विद्युत परिपथ में अर्थिंग (Earthing) क्यों की जाती है?
उत्तर:
अर्थिंग का उद्देश्य विद्युत उपकरणों के धातु आवरण को सुरक्षा प्रदान करना है। यदि किसी कारणवश उपकरण के धातु भाग में विद्युत धारा आ जाए, तो अर्थिंग तार उसे सीधे पृथ्वी तक पहुँचा देता है। इससे विद्युत आघात (Electric Shock) से सुरक्षा मिलती है तथा दुर्घटना की संभावना कम हो जाती है।
36. घरेलू विद्युत परिपथ में लाइव तार, न्यूट्रल तार तथा अर्थ तार का क्या कार्य है?
उत्तर:
(i) लाइव (Live) तार: यह विद्युत स्रोत से उपकरण तक विद्युत धारा पहुँचाता है।
(ii) न्यूट्रल (Neutral) तार: यह विद्युत धारा को वापस स्रोत तक पहुँचाकर परिपथ को पूर्ण करता है।
(iii) अर्थ (Earth) तार: यह सुरक्षा के लिए लगाया जाता है तथा रिसाव धारा को पृथ्वी में प्रवाहित कर देता है, जिससे विद्युत आघात से बचाव होता है।