Class 10 Science: तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण
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Chapter Overview
| Class | 10 |
| Subject | Science |
| Chapter Name | तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
तत्वों का आवर्त वर्गीकरण (Subjective Questions)
1. न्यूलैंड के अष्टक सिद्धांत की सीमाएँ लिखिए।
उत्तर:
न्यूलैंड द्वारा प्रतिपादित अष्टक सिद्धांत की प्रमुख सीमाएँ निम्नलिखित हैं—
(i) यह सिद्धांत केवल कैल्सियम (Ca) तक के तत्वों पर ही लागू होता है। कैल्सियम के बाद प्रत्येक आठवें तत्व के गुण पहले तत्व से मेल नहीं खाते।
(ii) बाद में खोजे गए अनेक नए तत्वों के गुण इस सिद्धांत के अनुरूप नहीं थे।
(iii) कुछ तत्वों को समायोजित करने के लिए न्यूलैंड ने दो तत्वों को एक ही स्थान पर रख दिया तथा कई असमान गुणों वाले तत्वों को एक ही समूह में शामिल कर दिया।
उदाहरण:
कोबाल्ट (Co) तथा निकेल (Ni) को फ्लुओरीन (F), क्लोरीन (Cl) तथा ब्रोमीन (Br) के साथ एक ही समूह में रखा गया, जबकि इनके गुणधर्म एक-दूसरे से भिन्न हैं। इसी प्रकार आयरन (Fe) को कोबाल्ट एवं निकेल से अलग स्थान दिया गया, जबकि इनके गुणों में समानता पाई जाती है।
2. तत्वों के आवर्त वर्गीकरण के लिए परमाणु द्रव्यमान की अपेक्षा परमाणु संख्या को बेहतर आधार क्यों माना गया है?
उत्तर:
परमाणु संख्या किसी तत्व के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या को दर्शाती है। परमाणु संख्या बढ़ने के साथ-साथ तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास भी नियमित रूप से बदलता है। चूँकि किसी तत्व के रासायनिक एवं भौतिक गुण उसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर निर्भर करते हैं, इसलिए तत्वों का वर्गीकरण परमाणु संख्या के आधार पर अधिक वैज्ञानिक एवं उपयुक्त माना जाता है।
3. नाइट्रोजन (परमाणु संख्या 7) तथा फॉस्फोरस (परमाणु संख्या 15) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए। इनमें अधिक विद्युतऋणात्मक तत्व कौन-सा है और क्यों?
उत्तर:
नाइट्रोजन (N): 2, 5
फॉस्फोरस (P): 2, 8, 5
इन दोनों में नाइट्रोजन (N) अधिक विद्युतऋणात्मक है, क्योंकि इसका परमाणु आकार फॉस्फोरस की अपेक्षा छोटा होता है। छोटे परमाणु आकार के कारण नाभिक का आकर्षण बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर अधिक होता है, जिससे नाइट्रोजन इलेक्ट्रॉनों को अधिक आसानी से अपनी ओर आकर्षित करता है।
4. तत्वों का वर्गीकरण किस प्रकार किया गया है? आवर्त तथा समूह क्या हैं?
उत्तर:
आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों का वर्गीकरण उनके बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक तथा इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर किया गया है। समान रासायनिक गुणों वाले तत्वों को एक ही समूह में रखा गया है।
समूह (Group):
आधुनिक आवर्त सारणी के ऊर्ध्वाधर (Vertical) स्तंभों को समूह कहा जाता है। कुल 18 समूह होते हैं।
आवर्त (Period):
आधुनिक आवर्त सारणी की क्षैतिज (Horizontal) पंक्तियों को आवर्त कहा जाता है। कुल 7 आवर्त होते हैं।
5. धनायन (Cation) का आकार परमाणु से छोटा क्यों होता है?
उत्तर:
जब कोई परमाणु एक या अधिक इलेक्ट्रॉन त्याग देता है, तो वह धनायन (Cation) बन जाता है। इलेक्ट्रॉन त्यागने पर बाहरी इलेक्ट्रॉन कोश समाप्त हो सकता है तथा नाभिक का आकर्षण शेष इलेक्ट्रॉनों पर बढ़ जाता है। परिणामस्वरूप परमाणु का आकार घट जाता है। इसलिए धनायन का आकार उसके मूल परमाणु से छोटा होता है।
6. न्यूलैंड का अष्टक नियम लिखिए।
उत्तर:
सन् 1866 में अंग्रेज वैज्ञानिक जॉन न्यूलैंड ने तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमान के क्रम में व्यवस्थित किया। उन्होंने पाया कि प्रत्येक आठवें तत्व के गुण पहले तत्व के गुणों से मिलते-जुलते हैं। उन्होंने इसकी तुलना संगीत के अष्टक से की। इसी कारण इसे न्यूलैंड का अष्टक नियम (Newlands’ Law of Octaves) कहा जाता है।
7. डॉबेराइनर ने तत्वों का वर्गीकरण किस आधार पर किया था?
उत्तर:
डॉबेराइनर ने समान रासायनिक गुणों वाले तत्वों को तीन-तीन तत्वों के समूह में व्यवस्थित किया, जिन्हें त्रिक (Triads) कहा जाता है।
उन्होंने बताया कि यदि त्रिक के तत्वों को परमाणु द्रव्यमान के बढ़ते क्रम में रखा जाए, तो बीच वाले तत्व का परमाणु द्रव्यमान अन्य दो तत्वों के परमाणु द्रव्यमानों के औसत के लगभग बराबर होता है।
8. आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति कैसे बदलती है?
उत्तर:
आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर संयोजकता कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ती जाती है तथा परमाणु अपने अष्टक को पूरा करने के लिए कम इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता महसूस करता है। इसलिए इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति (Electron Affinity) बढ़ती जाती है।
9. आधुनिक आवर्त सारणी में तत्व की स्थिति का उसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से क्या संबंध है?
उत्तर:
आधुनिक आवर्त सारणी में किसी तत्व की स्थिति उसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर आधारित होती है।
(i) किसी तत्व के संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या उसके समूह का निर्धारण करती है।
(ii) किसी तत्व के इलेक्ट्रॉन कोशों (Shells) की संख्या उसके आवर्त का निर्धारण करती है।
इस प्रकार इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर ही किसी तत्व की आवर्त सारणी में सही स्थिति निर्धारित की जाती है।
10. मेंडलीव की आवर्त सारणी की प्रमुख विसंगतियाँ लिखिए।
उत्तर:
मेंडलीव की आवर्त सारणी की प्रमुख सीमाएँ निम्नलिखित हैं—
(i) हाइड्रोजन का निश्चित स्थान निर्धारित नहीं किया जा सका।
(ii) समस्थानिकों (Isotopes) के लिए उपयुक्त स्थान नहीं था।
(iii) नोबल गैसों के लिए प्रारंभ में कोई स्थान नहीं था।
(iv) कुछ स्थानों पर परमाणु द्रव्यमान के बढ़ते क्रम का पालन नहीं किया गया, जैसे— कोबाल्ट एवं निकेल।
(v) दुर्लभ मृदा तत्वों (Rare Earth Elements) का उचित स्थान निर्धारित नहीं किया जा सका।
11. मेंडलीफ ने तत्वों का वर्गीकरण किस आधार पर किया था?
उत्तर:
मेंडलीफ ने तत्वों का वर्गीकरण उनके परमाणु द्रव्यमान तथा रासायनिक गुणों के आधार पर किया। उन्होंने तत्वों को परमाणु द्रव्यमान के बढ़ते क्रम में इस प्रकार व्यवस्थित किया कि समान रासायनिक गुणों वाले तत्व एक ही समूह में आ जाएँ।
12. डॉबेराइनर के वर्गीकरण की सीमाएँ लिखिए।
उत्तर:
डॉबेराइनर के त्रिक सिद्धांत की प्रमुख सीमाएँ निम्नलिखित हैं—
(i) उस समय ज्ञात सभी तत्वों का वर्गीकरण त्रिक के आधार पर नहीं किया जा सका।
(ii) यह नियम केवल कुछ ही तत्वों पर लागू होता था।
(iii) उस समय ज्ञात तत्वों में केवल कुछ ही त्रिक बनाए जा सके।
13. आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु त्रिज्या क्यों घटती है?
उत्तर:
आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु क्रमांक बढ़ता है, जिससे नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या भी बढ़ जाती है। इलेक्ट्रॉन उसी कोश में जुड़ते हैं, इसलिए नाभिक का आकर्षण बढ़ता है और इलेक्ट्रॉन नाभिक के अधिक निकट आ जाते हैं। परिणामस्वरूप परमाणु का आकार तथा परमाणु त्रिज्या घट जाती है।
14. उत्कृष्ट (नोबल) गैसों को अलग समूह में क्यों रखा गया है?
उत्तर:
उत्कृष्ट गैसों के बाह्यतम कोश पूर्ण रूप से भरे होते हैं। इसलिए इनकी संयोजकता शून्य होती है तथा ये सामान्य परिस्थितियों में रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग नहीं लेतीं। इनके विशिष्ट गुणों के कारण इन्हें आधुनिक आवर्त सारणी में समूह 18 में अलग स्थान दिया गया है।
15. आपके अनुसार उत्कृष्ट गैसों को अलग समूह में क्यों रखा गया है?
उत्तर:
उत्कृष्ट गैसें अत्यंत स्थिर एवं अभिक्रियाहीन होती हैं। इनके बाह्यतम कोश पूर्ण होने के कारण इन्हें इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने, त्यागने या साझा करने की आवश्यकता नहीं होती। इसलिए इनके गुण अन्य सभी तत्वों से भिन्न होते हैं। इसी कारण इन्हें आधुनिक आवर्त सारणी में अलग समूह (समूह 18) में रखा गया है।
16. समूह में ऊपर से नीचे जाने पर इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति कैसे बदलती है?
उत्तर:
समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु का आकार बढ़ता है तथा संयोजकता इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होते जाते हैं। नाभिक का आकर्षण कम होने के कारण बाहरी इलेक्ट्रॉनों को निकालना आसान हो जाता है। इसलिए इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति बढ़ती जाती है।
17. समूह में ऊपर से नीचे जाने पर संयोजकता किस प्रकार परिवर्तित होती है?
उत्तर:
किसी समूह में ऊपर से नीचे जाने पर बाहरी कोश में उपस्थित संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान रहती है। इसलिए समूह के सभी तत्वों की संयोजकता समान रहती है।
उदाहरण—
- समूह 1 के सभी तत्वों की संयोजकता 1 होती है।
- समूह 2 के सभी तत्वों की संयोजकता 2 होती है।
18. समूह में ऊपर से नीचे जाने पर इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति कैसे बदलती है?
उत्तर:
समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु का आकार बढ़ता है तथा बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से अधिक दूर हो जाते हैं। परिणामस्वरूप नाभिक का आकर्षण कम हो जाता है। इसलिए बाहरी इलेक्ट्रॉन को आकर्षित करने की क्षमता घटती है और इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति कम होती जाती है।
19. आधुनिक आवर्त नियम लिखिए।
उत्तर:
आधुनिक आवर्त नियम के अनुसार—
“तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांक के आवर्ती फलन (Periodic Function) होते हैं।”
अर्थात जब तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के अनुसार व्यवस्थित किया जाता है, तो उनके गुण निश्चित अंतराल पर पुनः दोहराए जाते हैं।
20. आधुनिक आवर्त सारणी की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
आधुनिक आवर्त सारणी की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
(i) इसमें तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के आधार पर व्यवस्थित किया गया है।
(ii) इसमें कुल 7 आवर्त तथा 18 समूह हैं।
(iii) एक ही समूह के तत्वों के रासायनिक गुण समान होते हैं।
(iv) किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु क्रमांक क्रमशः बढ़ता है।
(v) समस्थानिकों (Isotopes) को एक ही स्थान दिया गया है।
(vi) उत्कृष्ट गैसों को अलग समूह 18 में रखा गया है।
21. आधुनिक आवर्त सारणी में समूह तथा आवर्त की संख्या कितनी है?
उत्तर:
आधुनिक आवर्त सारणी में कुल 18 समूह (Groups) तथा 7 आवर्त (Periods) होते हैं।
- समूह ऊर्ध्वाधर (Vertical) स्तम्भ होते हैं।
- आवर्त क्षैतिज (Horizontal) पंक्तियाँ होती हैं।
22. आधुनिक आवर्त सारणी में किसी तत्व की स्थिति कैसे ज्ञात की जाती है?
उत्तर:
आधुनिक आवर्त सारणी में किसी तत्व की स्थिति उसके परमाणु क्रमांक तथा इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर निर्धारित की जाती है।
(i) संयोजकता कोशों (Shells) की संख्या तत्व का आवर्त बताती है।
(ii) संयोजकता इलेक्ट्रॉनों (Valence Electrons) की संख्या तत्व का समूह निर्धारित करती है।
23. आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर धात्विक गुणों में क्या परिवर्तन होता है?
उत्तर:
आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु द्वारा इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति घटती जाती है। इसलिए धात्विक गुण कम होते जाते हैं, जबकि अधात्विक गुण बढ़ते जाते हैं।
उदाहरण के लिए, तीसरे आवर्त में सोडियम (Na) से क्लोरीन (Cl) की ओर जाने पर धात्विक गुणों में लगातार कमी आती है।
24. समूह में ऊपर से नीचे जाने पर धात्विक गुणों में क्या परिवर्तन होता है?
उत्तर:
समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु का आकार बढ़ता है तथा इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति भी बढ़ती है। इसलिए धात्विक गुण बढ़ते जाते हैं, जबकि अधात्विक गुण कम हो जाते हैं।
25. आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या में क्या परिवर्तन होता है?
उत्तर:
किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर प्रत्येक अगले तत्व में संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या एक-एक करके बढ़ती जाती है।
उदाहरण (तीसरा आवर्त):
Na = 1, Mg = 2, Al = 3, Si = 4, P = 5, S = 6, Cl = 7, Ar = 8
26. समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार में क्या परिवर्तन होता है?
उत्तर:
समूह में ऊपर से नीचे जाने पर प्रत्येक अगले तत्व में एक नया इलेक्ट्रॉन कोश जुड़ता जाता है। इसलिए परमाणु का आकार (परमाणु त्रिज्या) बढ़ता जाता है।
27. आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु आकार में क्या परिवर्तन होता है?
उत्तर:
आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु क्रमांक बढ़ता है, जिससे नाभिकीय आकर्षण भी बढ़ जाता है। परिणामस्वरूप इलेक्ट्रॉन नाभिक के अधिक निकट आ जाते हैं और परमाणु आकार घटता जाता है।
28. आधुनिक आवर्त सारणी में हाइड्रोजन का स्थान विशेष क्यों माना जाता है?
उत्तर:
हाइड्रोजन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1 है। इसमें क्षार धातुओं (समूह 1) तथा हैलोजन (समूह 17) दोनों के कुछ गुण पाए जाते हैं।
- यह एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर H⁺ आयन बना सकता है।
- यह एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके H⁻ आयन भी बना सकता है।
इसी कारण आधुनिक आवर्त सारणी में हाइड्रोजन का स्थान विशिष्ट (Unique) माना जाता है।
29. परमाणु त्रिज्या (Atomic Radius) किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी परमाणु के नाभिक के केंद्र से उसके सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन कोश तक की दूरी को परमाणु त्रिज्या (Atomic Radius) कहते हैं।
परमाणु त्रिज्या का उपयोग परमाणु के आकार की तुलना करने के लिए किया जाता है।
30. आधुनिक आवर्त सारणी के प्रमुख लाभ लिखिए।
उत्तर:
आधुनिक आवर्त सारणी के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—
(i) तत्वों का वर्गीकरण परमाणु क्रमांक के आधार पर किया गया है।
(ii) समस्थानिकों (Isotopes) को उचित स्थान प्राप्त हुआ है।
(iii) तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को आसानी से समझा जा सकता है।
(iv) किसी तत्व के भौतिक एवं रासायनिक गुणों का अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है।
(v) नए तत्वों को उचित स्थान देना सरल हो गया है।
(vi) यह मेंडलीफ की आवर्त सारणी की अधिकांश विसंगतियों को दूर करती है।
31. संयोजकता इलेक्ट्रॉन (Valence Electrons) किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी परमाणु के सबसे बाहरी कोश (Outer Shell) में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों को संयोजकता इलेक्ट्रॉन (Valence Electrons) कहते हैं। यही इलेक्ट्रॉन किसी तत्व के रासायनिक गुणों तथा संयोजकता का निर्धारण करते हैं।
उदाहरण:
सोडियम (Na) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1 है। अतः इसके सबसे बाहरी कोश में 1 संयोजकता इलेक्ट्रॉन होता है।
32. आधुनिक आवर्त सारणी में आवर्त संख्या किससे निर्धारित होती है?
उत्तर:
किसी तत्व के परमाणु में उपस्थित इलेक्ट्रॉन कोशों (Shells) की संख्या उस तत्व के आवर्त (Period) को निर्धारित करती है।
उदाहरण:
मैग्नीशियम (Mg) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 2 है। इसमें तीन इलेक्ट्रॉन कोश हैं, इसलिए यह तीसरे आवर्त में स्थित है।
33. आधुनिक आवर्त सारणी में समूह संख्या किससे निर्धारित होती है?
उत्तर:
किसी तत्व के सबसे बाहरी कोश में उपस्थित संयोजकता इलेक्ट्रॉनों (Valence Electrons) की संख्या उसके समूह (Group) का निर्धारण करती है।
उदाहरण के लिए—
- Na (2,8,1) → समूह 1
- Mg (2,8,2) → समूह 2
- Cl (2,8,7) → समूह 17
34. आवर्त सारणी में धातुएँ एवं अधातुएँ कहाँ स्थित होती हैं?
उत्तर:
आधुनिक आवर्त सारणी में—
(i) धातुएँ मुख्यतः बाईं ओर तथा मध्य भाग में स्थित होती हैं।
(ii) अधातुएँ दाईं ओर स्थित होती हैं।
(iii) उपधातुएँ (Metalloids) धातुओं एवं अधातुओं के बीच सीढ़ीनुमा (Zig-Zag) रेखा के पास स्थित होती हैं।
35. आधुनिक आवर्त सारणी का महत्व लिखिए।
उत्तर:
आधुनिक आवर्त सारणी का विज्ञान एवं रसायन विज्ञान में अत्यधिक महत्व है।
इसके प्रमुख महत्व निम्नलिखित हैं—
(i) तत्वों का वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित वर्गीकरण प्रस्तुत करती है।
(ii) किसी तत्व के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास एवं संयोजकता का अनुमान लगाने में सहायता करती है।
(iii) तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुणों का अध्ययन सरल बनाती है।
(iv) नए तत्वों के गुणों का पूर्वानुमान लगाने में सहायता करती है।
(v) विभिन्न तत्वों के बीच समानता एवं असमानता को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करती है।
(vi) आधुनिक रसायन विज्ञान के अध्ययन का आधार मानी जाती है।