Class 10 Science: विद्युत धारा
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Chapter Overview
| Class | 10 |
| Subject | Science |
| Chapter Name | विद्युत धारा |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
विद्युत धारा
1. विद्युत आवेश क्या है? विद्युत आवेश कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर:
विद्युत आवेश पदार्थ के कुछ मूलभूत कणों का वह गुण है, जिसके कारण वे एक-दूसरे पर आकर्षण या प्रतिकर्षण बल लगाते हैं। उदाहरण के लिए, जब एबोनाइट की छड़ को ऊन से रगड़ा जाता है, तो एबोनाइट पर ऋण आवेश तथा ऊन पर धन आवेश उत्पन्न हो जाता है।
विद्युत आवेश मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं—
(i) धन आवेश (Positive Charge)
(ii) ऋण आवेश (Negative Charge)
2. विद्युत धारा क्या है? इसका SI मात्रक लिखिए।
उत्तर:
किसी चालक में विद्युत आवेश के प्रवाह की दर को विद्युत धारा (Electric Current) कहते हैं।
यदि किसी चालक में t सेकंड में Q कुलाम आवेश प्रवाहित होता है, तो

जहाँ,
- I = विद्युत धारा
- Q = विद्युत आवेश
- t = समय
विद्युत धारा का SI मात्रक एम्पीयर (Ampere) है।
3. विद्युत परिपथ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
विद्युत आवेश के निरंतर प्रवाह के लिए बनाए गए बंद मार्ग को विद्युत परिपथ (Electric Circuit) कहते हैं। जब परिपथ पूर्ण (Closed) होता है, तभी उसमें विद्युत धारा प्रवाहित होती है।

4. विद्युत बल्ब का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
परीक्षा में विद्युत बल्ब का नामांकित चित्र बनाते समय निम्नलिखित भागों को अवश्य दर्शाइए—
- काँच का बल्ब (Glass Bulb)
- फिलामेंट (Filament)
- सहायक तार (Support Wires)
- धातु संपर्क (Metal Contacts)
- आधार (Base)

5. विद्युत विभव तथा विभवांतर में अंतर लिखिए।
उत्तर:
विद्युत विभव (Electric Potential):
अनंत से किसी विद्युत क्षेत्र के एक बिंदु तक एकांक धन आवेश को लाने में किए गए कार्य को उस बिंदु का विद्युत विभव कहते हैं।
इसका SI मात्रक वोल्ट (Volt) है।
विभवांतर (Potential Difference):
किसी परिपथ के दो बिंदुओं के विभव के अंतर को विभवांतर कहते हैं।
इसका SI मात्रक भी वोल्ट (Volt) है।
6. विद्युत शक्ति (Electric Power) की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
कार्य करने की दर अथवा विद्युत ऊर्जा के उपभोग की दर को विद्युत शक्ति कहते हैं।
यदि कोई कार्य W जूल कार्य t सेकंड में करता है, तो—
शक्ति = W/t
शक्ति P को इस प्रकार व्यक्त करते हैं –
P = VI
P = VI = I2R =V2 /R
विद्युत शक्ति का SI मात्रक वाट (Watt) है।
7. विद्युत धारा की दिशा से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
परंपरागत रूप से विद्युत धारा की दिशा धन आवेश के प्रवाह की दिशा मानी जाती है। इसलिए धारा की दिशा इलेक्ट्रॉनों (ऋण आवेश) के वास्तविक प्रवाह की दिशा के विपरीत होती है।
8. विद्युत प्रतिरोधकता क्या है? इसका SI मात्रक लिखिए।
उत्तर:
किसी पदार्थ का वह गुण, जो उसमें विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है, विद्युत प्रतिरोधकता (Resistivity) कहलाता है।
धातुओं तथा मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता सामान्यतः कम होती है, इसलिए वे विद्युत के अच्छे चालक होते हैं।
विद्युत प्रतिरोधकता का SI मात्रक ओम-मीटर (Ω·m) है।
9. विद्युत परिपथ में फ्यूज तार का उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर:
फ्यूज तार का उपयोग विद्युत उपकरणों की सुरक्षा के लिए किया जाता है। जब परिपथ में आवश्यकता से अधिक विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो फ्यूज तार गर्म होकर पिघल जाता है और परिपथ को तोड़ देता है। इससे रेडियो, टीवी, पंखा, बल्ब आदि उपकरण सुरक्षित रहते हैं।
10. विद्युत संचरण के लिए प्रायः ताँबा (Copper) तथा एल्युमिनियम (Aluminium) के तारों का उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर:
विद्युत संचरण के लिए ताँबा तथा एल्युमिनियम के तारों का उपयोग निम्नलिखित कारणों से किया जाता है—
(i) इनकी विद्युत प्रतिरोधकता बहुत कम होती है।
(ii) ये विद्युत के अच्छे चालक होते हैं।
(iii) ये आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।
(iv) अन्य धातुओं की अपेक्षा इनकी लागत कम होती है।
(v) ये तार आसानी से बनाए जा सकते हैं।
11. एक वोल्ट की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
यदि किसी चालक के दो बिंदुओं के बीच 1 कुलाम आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में 1 जूल कार्य करना पड़े, तो उन दोनों बिंदुओं के बीच का विभवांतर 1 वोल्ट कहलाता है।

12. कूलॉम का नियम (Coulomb’s Law) क्या है?
उत्तर:
कूलॉम के नियम के अनुसार, दो बिंदु आवेशों के बीच लगने वाला विद्युत बल उनके आवेशों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
यदि दो आवेश q₁ एवं q₂ के बीच की दूरी r हो, तो उनके बीच लगने वाला बल—

जहाँ k समानुपाती नियतांक (Constant of Proportionality) है।
13. प्रतिरोध (Resistance) क्या है? इसका SI मात्रक लिखिए।
उत्तर:
किसी चालक का वह गुण, जो उसमें विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है, प्रतिरोध (Resistance) कहलाता है।
प्रतिरोध के कारण चालक में ऊष्मा उत्पन्न होती है तथा धारा का प्रवाह नियंत्रित होता है।
प्रतिरोध का SI मात्रक ओम (Ω) है।
14. चालक, अचालक, अर्द्धचालक तथा अतिचालक को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
(i) चालक (Conductor):
वे पदार्थ जिनमें विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित होती है, चालक कहलाते हैं।
उदाहरण: ताँबा, लोहा, चाँदी आदि।
(ii) अचालक (Insulator):
वे पदार्थ जिनमें विद्युत धारा प्रवाहित नहीं होती, अचालक कहलाते हैं।
उदाहरण: एबोनाइट, रबर, प्लास्टिक, काँच आदि।
(iii) अर्द्धचालक (Semiconductor):
वे पदार्थ जिनकी चालकता चालक और अचालक के बीच होती है, अर्द्धचालक कहलाते हैं।
उदाहरण: सिलिकॉन, जर्मेनियम, कार्बन आदि।
(iv) अतिचालक (Superconductor):
वे पदार्थ जिनमें अत्यंत निम्न ताप पर विद्युत प्रतिरोध लगभग शून्य हो जाता है और धारा बिना ऊर्जा क्षय के प्रवाहित होती है, अतिचालक कहलाते हैं।
उदाहरण: बेरियम तथा लैन्थेनम आधारित कुछ विशेष सिरेमिक पदार्थ।
15. घरेलू विद्युत परिपथों में श्रेणीक्रम (Series) संयोजन का उपयोग क्यों नहीं किया जाता है?
उत्तर:
घरेलू विद्युत परिपथों में उपकरणों को पार्श्वक्रम (Parallel) संयोजन में जोड़ा जाता है, क्योंकि—
(i) प्रत्येक उपकरण को समान विभवांतर प्राप्त होता है।
(ii) किसी एक उपकरण के खराब या फ्यूज हो जाने पर अन्य उपकरण सामान्य रूप से कार्य करते रहते हैं।
(iii) प्रत्येक उपकरण को अलग-अलग चालू एवं बंद किया जा सकता है।
यदि उपकरणों को श्रेणीक्रम (Series) में जोड़ा जाए, तो किसी एक उपकरण के खराब होने पर पूरा परिपथ बंद हो जाएगा और सभी उपकरण कार्य करना बंद कर देंगे। इसी कारण घरेलू विद्युत परिपथों में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग नहीं किया जाता है।