Class 10 Science: नियंत्रण और समन्वय
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Chapter Overview
| Class | 10 |
| Subject | Science |
| Chapter Name | नियंत्रण और समन्वय |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
नियंत्रण और समन्वय Revision Notes
1. पादप हार्मोन (Plant Hormones) क्या हैं?
उत्तर ⇒
पौधों में बनने वाले ऐसे विशेष रासायनिक पदार्थ, जो उनकी वृद्धि, विकास, कोशिका विभाजन, पुष्पन, फलन तथा विभिन्न जैविक क्रियाओं का नियंत्रण एवं समन्वय करते हैं, पादप हार्मोन कहलाते हैं। ये बहुत कम मात्रा में बनते हैं, लेकिन पूरे पौधे की वृद्धि एवं विकास को प्रभावित करते हैं। इनका निर्माण पौधों के विभिन्न भागों जैसे जड़, तना, पत्ती, कलियों तथा फलों में होता है और आवश्यकता के अनुसार ये एक भाग से दूसरे भाग तक पहुँचकर अपना कार्य करते हैं।
पादप हार्मोन पौधों की अनेक महत्वपूर्ण क्रियाओं जैसे बीज अंकुरण, कोशिका विभाजन, कोशिका वृद्धि, फलों का पकना, पत्तियों का झड़ना तथा जल की कमी के समय पौधों की सुरक्षा आदि का नियंत्रण करते हैं।
मुख्य पादप हार्मोन निम्नलिखित हैं—
(i) ऑक्सिन (Auxin)
(ii) जिबरेलिन (Gibberellin)
(iii) साइटोकाइनिन (Cytokinin)
(iv) एब्सिसिक अम्ल (Abscisic Acid)
(v) एथिलीन (Ethylene)
इन सभी हार्मोनों का पौधों के सामान्य विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान होता है।
2. पादप हार्मोन कितने प्रकार के होते हैं? उनके नाम लिखिए।
उत्तर ⇒
पादप हार्मोन मुख्यतः पाँच प्रकार के होते हैं। प्रत्येक हार्मोन का पौधों की वृद्धि एवं विकास में अलग-अलग कार्य होता है। कुछ हार्मोन पौधों की वृद्धि को बढ़ाते हैं, जबकि कुछ वृद्धि को नियंत्रित या रोकते हैं।
पादप हार्मोनों के नाम निम्नलिखित हैं—
(i) ऑक्सिन (Auxin) – कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाने तथा जड़ों के विकास में सहायक।
(ii) जिबरेलिन (Gibberellin) – तने की लंबाई बढ़ाने तथा बीज अंकुरण में सहायक।
(iii) साइटोकाइनिन (Cytokinin) – कोशिका विभाजन तथा नई शाखाओं एवं कलियों के विकास में सहायक।
(iv) एब्सिसिक अम्ल (ABA) – पौधों की वृद्धि को नियंत्रित करता है तथा जल की कमी होने पर रंध्रों को बंद करता है।
(v) एथिलीन (Ethylene) – फलों को पकाने तथा पत्तियों एवं फलों के झड़ने में सहायता करता है।
इन सभी हार्मोनों के संयुक्त प्रभाव से पौधों की वृद्धि एवं जीवन-चक्र सुचारु रूप से संचालित होता है।
3. मानव शरीर में नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर ⇒
मानव शरीर में विभिन्न अंगों तथा अंग-तंत्रों के कार्यों को नियंत्रित करना तथा उनके बीच उचित तालमेल स्थापित करना नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination) कहलाता है। हमारे शरीर में अनेक प्रकार की क्रियाएँ जैसे चलना, दौड़ना, बोलना, सोचना, भोजन करना, श्वसन करना तथा बाहरी वातावरण के अनुसार प्रतिक्रिया देना लगातार होती रहती हैं। इन सभी क्रियाओं का सही समय पर और सही ढंग से संचालन नियंत्रण एवं समन्वय के कारण ही संभव होता है।
मानव शरीर में नियंत्रण एवं समन्वय का कार्य मुख्यतः दो तंत्रों द्वारा किया जाता है—
(i) तंत्रिका तंत्र (Nervous System)
(ii) अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System)
तंत्रिका तंत्र त्वरित (Fast) प्रतिक्रिया देता है, जबकि अंतःस्रावी तंत्र हार्मोनों के माध्यम से अपेक्षाकृत धीमी लेकिन दीर्घकालिक (Long-lasting) प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है। दोनों तंत्र मिलकर शरीर की सभी जैविक क्रियाओं का संचालन करते हैं।
4. उद्दीपन (Stimulus) तथा प्रतिक्रिया (Response) किसे कहते हैं?
उत्तर ⇒
पर्यावरण या शरीर के भीतर होने वाला ऐसा कोई भी परिवर्तन, जो किसी जीव में प्रतिक्रिया उत्पन्न करे, उद्दीपन (Stimulus) कहलाता है। उद्दीपन के प्रभाव में जीव जो कार्य करता है, उसे प्रतिक्रिया (Response) कहते हैं।
उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति का हाथ गलती से गर्म वस्तु को छू लेता है, तो गर्मी एक उद्दीपन है और तुरंत हाथ को पीछे खींच लेना उसकी प्रतिक्रिया है।
उद्दीपन बाहरी भी हो सकते हैं, जैसे—प्रकाश, ध्वनि, ताप, स्पर्श आदि तथा आंतरिक भी हो सकते हैं, जैसे—भूख, प्यास, दर्द आदि।
जीवों के लिए उद्दीपन के प्रति उचित प्रतिक्रिया देना आवश्यक होता है, क्योंकि इससे वे स्वयं की रक्षा कर पाते हैं तथा अपने वातावरण के अनुसार अनुकूलन कर सकते हैं।
5. तंत्रिका तंत्र (Nervous System) क्या है? इसके प्रमुख भागों के नाम लिखिए।
उत्तर ⇒
शरीर के विभिन्न अंगों के कार्यों का नियंत्रण, समन्वय तथा उद्दीपनों के प्रति त्वरित प्रतिक्रिया कराने वाले तंत्र को तंत्रिका तंत्र (Nervous System) कहते हैं। यह शरीर के सभी अंगों को आपस में जोड़कर सूचनाओं का आदान-प्रदान करता है।
तंत्रिका तंत्र के प्रमुख भाग निम्नलिखित हैं—
(i) केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System – CNS)
इसमें मस्तिष्क (Brain) तथा मेरुरज्जु (Spinal Cord) शामिल हैं।
(ii) परिधीय तंत्रिका तंत्र (Peripheral Nervous System – PNS)
इसमें मस्तिष्क तथा मेरुरज्जु से निकलने वाली सभी तंत्रिकाएँ शामिल होती हैं।
तंत्रिका तंत्र का मुख्य कार्य शरीर के सभी अंगों तक संदेश पहुँचाना, उद्दीपनों को ग्रहण करना तथा उचित प्रतिक्रिया उत्पन्न करना है।
6. न्यूरॉन (Neuron) क्या है? इसकी संरचना एवं कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒
न्यूरॉन (Neuron) तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई (Structural and Functional Unit) है। यह विशेष प्रकार की कोशिका होती है, जो तंत्रिका आवेग (Nerve Impulse) का संचरण करती है।
एक सामान्य न्यूरॉन के तीन प्रमुख भाग होते हैं—
(i) डेंड्राइट (Dendrite)
(ii) कोशिका काय (Cell Body)
(iii) अक्षतंतु (Axon)
न्यूरॉन के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—
(i) उद्दीपनों को ग्रहण करना।
(ii) तंत्रिका आवेग उत्पन्न करना।
(iii) मस्तिष्क एवं शरीर के विभिन्न अंगों के बीच संदेश पहुँचाना।
(iv) शरीर की विभिन्न क्रियाओं का समन्वय स्थापित करना।
मानव शरीर में करोड़ों न्यूरॉन पाए जाते हैं, जो मिलकर पूरे तंत्रिका तंत्र का निर्माण करते हैं।
7. मस्तिष्क (Brain) के प्रमुख भागों के नाम लिखिए।
उत्तर ⇒
मस्तिष्क मानव शरीर का सबसे महत्वपूर्ण नियंत्रण केंद्र है। यह शरीर की सभी ऐच्छिक एवं अनैच्छिक क्रियाओं का संचालन करता है।
मस्तिष्क के तीन प्रमुख भाग हैं—
(i) प्रमस्तिष्क (Cerebrum) – सोचने, स्मरण करने, सीखने तथा ऐच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण करता है।
(ii) अनुमस्तिष्क (Cerebellum) – शरीर का संतुलन बनाए रखता है तथा मांसपेशियों के समन्वय का कार्य करता है।
(iii) मेदुला ऑब्लोंगेटा (Medulla Oblongata) – श्वसन, हृदयगति, रक्तचाप तथा अन्य अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण करता है।
इन तीनों भागों के समन्वित कार्य से मानव शरीर सामान्य रूप से कार्य करता है.
8. मस्तिष्क (Brain) के विभिन्न भागों के कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒
मस्तिष्क मानव शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। यह शरीर की सभी ऐच्छिक एवं अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण एवं समन्वय करता है। मस्तिष्क को मुख्यतः तीन भागों में बाँटा गया है और प्रत्येक भाग का कार्य अलग-अलग होता है।
(i) प्रमस्तिष्क (Cerebrum)
यह मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है। यह सोचने, समझने, स्मरण शक्ति, सीखने, बोलने, निर्णय लेने तथा ऐच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण करता है। आँख, कान, नाक, जीभ एवं त्वचा से प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण भी यही करता है।
(ii) अनुमस्तिष्क (Cerebellum)
यह शरीर का संतुलन बनाए रखता है तथा चलने, दौड़ने, लिखने, साइकिल चलाने जैसी क्रियाओं में मांसपेशियों के बीच समन्वय स्थापित करता है।
(iii) मेडुला ऑब्लोंगेटा (Medulla Oblongata)
यह श्वसन, हृदयगति, रक्तचाप, निगलना, छींकना, खाँसी आदि अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण करता है। यही कारण है कि इसे जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक भाग माना जाता है।
9. प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action) क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर ⇒
किसी उद्दीपन के प्रति बिना सोचे-समझे तथा बहुत कम समय में होने वाली स्वतः प्रतिक्रिया को प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action) कहते हैं। यह क्रिया मुख्यतः मेरुरज्जु (Spinal Cord) द्वारा नियंत्रित होती है, इसलिए इसमें मस्तिष्क की तत्काल आवश्यकता नहीं होती।
प्रतिवर्ती क्रिया शरीर की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह हमें अचानक होने वाले खतरों से बचाने का कार्य करती है।
उदाहरण—
(i) गर्म वस्तु को छूते ही हाथ तुरंत पीछे खींच लेना।
(ii) आँख में धूल जाने पर पलकों का तुरंत बंद हो जाना।
(iii) तेज प्रकाश पड़ने पर पुतली का सिकुड़ जाना।
(iv) सुई चुभने पर हाथ या पैर तुरंत हटा लेना।
प्रतिवर्ती क्रिया में संदेश संवेदन तंत्रिका द्वारा मेरुरज्जु तक पहुँचता है तथा वहाँ से प्रेरक तंत्रिका द्वारा संबंधित अंग तक भेज दिया जाता है।
10. प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc) क्या है?
उत्तर ⇒
प्रतिवर्ती क्रिया के दौरान तंत्रिका आवेग जिस निश्चित मार्ग से होकर गुजरता है, उसे प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc) कहते हैं। यह प्रतिवर्ती क्रिया को बहुत कम समय में पूरा करने में सहायता करता है।
प्रतिवर्ती चाप के प्रमुख भाग निम्नलिखित हैं—
(i) ग्राही (Receptor)
(ii) संवेदन तंत्रिका (Sensory Neuron)
(iii) मेरुरज्जु (Spinal Cord)
(iv) प्रेरक तंत्रिका (Motor Neuron)
(v) कार्यकारी अंग (Effector)
प्रतिवर्ती चाप का मुख्य कार्य शरीर को अचानक होने वाले खतरों से तुरंत बचाना है। इस प्रक्रिया में संदेश सीधे मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित होता है, इसलिए प्रतिक्रिया बहुत तेज होती है।
11. मानव शरीर में अंतःस्रावी ग्रंथियाँ (Endocrine Glands) क्या हैं?
उत्तर ⇒
मानव शरीर में ऐसी ग्रंथियाँ जिनमें कोई वाहिनी (Duct) नहीं होती और जो अपने द्वारा निर्मित हार्मोन को सीधे रक्त में छोड़ती हैं, अंतःस्रावी ग्रंथियाँ (Endocrine Glands) कहलाती हैं। इन ग्रंथियों द्वारा स्रावित हार्मोन शरीर की वृद्धि, विकास, उपापचय (Metabolism), प्रजनन तथा विभिन्न अंगों के कार्यों का नियंत्रण एवं समन्वय करते हैं।
अंतःस्रावी ग्रंथियों से निकलने वाले हार्मोन रक्त के माध्यम से शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचते हैं और आवश्यकता के अनुसार उनका कार्य नियंत्रित करते हैं।
मानव शरीर की प्रमुख अंतःस्रावी ग्रंथियाँ निम्नलिखित हैं—
(i) पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland)
(ii) थायरॉयड ग्रंथि (Thyroid Gland)
(iii) पैराथायरॉयड ग्रंथि (Parathyroid Gland)
(iv) अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal Gland)
(v) अग्न्याशय (Pancreas)
(vi) वृषण (Testis)
(vii) अंडाशय (Ovary)
12. हार्मोन (Hormone) क्या हैं? इनके प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒
हार्मोन शरीर में बनने वाले विशेष प्रकार के रासायनिक संदेशवाहक (Chemical Messengers) होते हैं, जिनका निर्माण अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा किया जाता है। ये हार्मोन रक्त के माध्यम से शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचते हैं तथा उनकी क्रियाओं का नियंत्रण एवं समन्वय करते हैं।
हार्मोन बहुत कम मात्रा में बनते हैं, लेकिन उनका प्रभाव पूरे शरीर पर पड़ता है।
हार्मोनों के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—
(i) शरीर की वृद्धि एवं विकास का नियंत्रण करना।
(ii) उपापचय (Metabolism) को नियंत्रित करना।
(iii) प्रजनन क्रियाओं का संचालन करना।
(iv) रक्त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करना।
(v) शरीर को तनाव एवं आपातकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार करना।
(vi) विभिन्न अंगों के बीच समन्वय स्थापित करना।
13. पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland) को ‘मास्टर ग्रंथि’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर ⇒
पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland) को ‘मास्टर ग्रंथि (Master Gland)’ कहा जाता है, क्योंकि यह शरीर की अधिकांश अन्य अंतःस्रावी ग्रंथियों के कार्यों को नियंत्रित करती है। यह मस्तिष्क के आधार भाग में स्थित एक छोटी-सी ग्रंथि होती है।
पीयूष ग्रंथि अनेक प्रकार के हार्मोन स्रावित करती है, जो शरीर की वृद्धि, प्रजनन, दुग्धस्राव तथा अन्य ग्रंथियों के कार्यों का नियंत्रण करते हैं।
इसके प्रमुख कार्य हैं—
(i) वृद्धि हार्मोन (Growth Hormone) का स्राव करना।
(ii) थायरॉयड, अधिवृक्क तथा जनन ग्रंथियों की क्रियाओं को नियंत्रित करना।
(iii) शरीर की सामान्य वृद्धि एवं विकास को नियंत्रित करना।
(iv) विभिन्न हार्मोनों के स्राव का समन्वय करना।
14. थायरॉयड ग्रंथि (Thyroid Gland) क्या है? इसके कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒
थायरॉयड ग्रंथि गर्दन के अगले भाग में श्वासनली के दोनों ओर स्थित एक महत्वपूर्ण अंतःस्रावी ग्रंथि है। यह थायरॉक्सिन (Thyroxine) नामक हार्मोन का स्राव करती है।
थायरॉक्सिन हार्मोन के निर्माण के लिए आयोडीन (Iodine) आवश्यक होता है।
थायरॉयड ग्रंथि के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—
(i) शरीर के उपापचय (Metabolism) को नियंत्रित करना।
(ii) शरीर की वृद्धि एवं विकास में सहायता करना।
(iii) ऊर्जा उत्पादन की गति को नियंत्रित करना।
(iv) शारीरिक एवं मानसिक विकास में सहायता करना।
(v) शरीर का तापमान नियंत्रित रखना।
15. आयोडीन की कमी से कौन-सा रोग होता है? इसके लक्षण लिखिए।
उत्तर ⇒
शरीर में आयोडीन की कमी होने पर थायरॉक्सिन हार्मोन का निर्माण पर्याप्त मात्रा में नहीं हो पाता। इसके कारण घेंघा रोग (Goitre) हो जाता है।
इस रोग में थायरॉयड ग्रंथि का आकार बढ़ जाता है और गर्दन के सामने सूजन दिखाई देने लगती है।
घेंघा रोग के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं—
(i) गर्दन में सूजन आ जाना।
(ii) शारीरिक वृद्धि धीमी होना।
(iii) मानसिक विकास प्रभावित होना।
(iv) थकान एवं कमजोरी महसूस होना।
(v) उपापचय की गति कम हो जाना।
इस रोग से बचाव के लिए आयोडीन युक्त नमक का नियमित सेवन करना चाहिए।
16. अग्न्याशय (Pancreas) क्या है? इसके प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒
अग्न्याशय (Pancreas) मानव शरीर की एक मिश्रित ग्रंथि (Mixed Gland) है, क्योंकि यह अंतःस्रावी (Endocrine) तथा बहिःस्रावी (Exocrine) दोनों प्रकार के कार्य करती है। यह आमाशय के पीछे स्थित होती है। अग्न्याशय पाचन के लिए अग्नाशयी रस (Pancreatic Juice) का स्राव करता है तथा साथ ही इंसुलिन और ग्लूकागॉन जैसे महत्वपूर्ण हार्मोन भी बनाता है।
अग्न्याशय के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—
(i) इंसुलिन हार्मोन का स्राव करके रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करना।
(ii) ग्लूकागॉन हार्मोन का स्राव करके आवश्यकता पड़ने पर रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ाना।
(iii) पाचन एंजाइमों का निर्माण करना, जो कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन तथा वसा के पाचन में सहायता करते हैं।
(iv) शरीर के सामान्य उपापचय (Metabolism) को संतुलित बनाए रखना।
17. मधुमेह (Diabetes Mellitus) क्या है? इसके कारण एवं लक्षण लिखिए।
उत्तर ⇒
मधुमेह (Diabetes Mellitus) एक ऐसा रोग है, जिसमें शरीर में इंसुलिन हार्मोन की कमी हो जाती है या शरीर इंसुलिन का सही प्रकार से उपयोग नहीं कर पाता। इसके कारण रक्त में ग्लूकोज (शर्करा) की मात्रा सामान्य से अधिक बढ़ जाती है।
मधुमेह होने के प्रमुख कारण—
(i) अग्न्याशय द्वारा पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का निर्माण न होना।
(ii) आनुवंशिक कारण।
(iii) असंतुलित भोजन एवं मोटापा।
(iv) शारीरिक श्रम की कमी।
मधुमेह के प्रमुख लक्षण—
(i) बार-बार प्यास लगना।
(ii) बार-बार मूत्र आना।
(iii) अधिक भूख लगना।
(iv) शरीर का वजन कम होना।
(v) घावों का देर से भरना।
(vi) कमजोरी एवं थकान महसूस होना।
18. एड्रिनेलिन (Adrenaline) हार्मोन क्या है? इसके प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒
एड्रिनेलिन (Adrenaline) हार्मोन का स्राव अधिवृक्क (Adrenal) ग्रंथि द्वारा किया जाता है। यह हार्मोन अचानक उत्पन्न होने वाली आपातकालीन परिस्थितियों जैसे भय, क्रोध, तनाव तथा दुर्घटना के समय शरीर को तुरंत कार्य करने के लिए तैयार करता है। इसलिए इसे आपातकालीन हार्मोन (Emergency Hormone) भी कहा जाता है।
एड्रिनेलिन हार्मोन के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—
(i) हृदय की धड़कन तेज करना।
(ii) रक्तचाप बढ़ाना।
(iii) श्वसन की गति बढ़ाना।
(iv) मांसपेशियों तक अधिक रक्त पहुँचाना।
(v) शरीर को तुरंत कार्य करने के लिए तैयार करना।
(vi) तनावपूर्ण परिस्थितियों में ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ाना।
19. पौधों में प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) क्या है?
उत्तर ⇒
प्रकाश के प्रभाव में पौधों के किसी भाग का वृद्धि करते हुए मुड़ना प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) कहलाता है। यह मुख्य रूप से ऑक्सिन हार्मोन के कारण होता है।
जब पौधे पर एक दिशा से प्रकाश पड़ता है, तब ऑक्सिन हार्मोन तने के छायादार भाग में अधिक मात्रा में एकत्र हो जाता है। इससे उस भाग की कोशिकाएँ अधिक लंबी हो जाती हैं और तना प्रकाश की ओर मुड़ जाता है।
उदाहरण—
(i) गमले में रखा पौधा खिड़की की ओर झुक जाता है।
(ii) सूर्य की ओर बढ़ते हुए पौधों के तने प्रकाशानुवर्तन का उदाहरण हैं।
20. गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism) क्या है?
उत्तर ⇒
गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में पौधों के किसी भाग की वृद्धि की दिशा में होने वाले परिवर्तन को गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism) कहते हैं।
गुरुत्वानुवर्तन दो प्रकार का होता है—
(i) धनात्मक गुरुत्वानुवर्तन (Positive Geotropism):
जड़ें गुरुत्वाकर्षण की दिशा में नीचे की ओर बढ़ती हैं, इसलिए वे धनात्मक गुरुत्वानुवर्तन प्रदर्शित करती हैं।
(ii) ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्तन (Negative Geotropism):
तना गुरुत्वाकर्षण के विपरीत ऊपर की ओर बढ़ता है, इसलिए वह ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्तन प्रदर्शित करता है।
गुरुत्वानुवर्तन पौधों को मिट्टी में मजबूती से स्थापित करने तथा जल एवं खनिजों के अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
21. पौधों में रासायनिक समन्वय (Chemical Coordination) क्या है?
उत्तर ⇒
पौधों में विभिन्न जैविक क्रियाओं का नियंत्रण तथा समन्वय पादप हार्मोनों द्वारा किया जाता है। इस प्रक्रिया को रासायनिक समन्वय (Chemical Coordination) कहते हैं। पौधों में तंत्रिका तंत्र नहीं होता, इसलिए वे अपने कार्यों का नियंत्रण हार्मोनों के माध्यम से करते हैं।
पादप हार्मोन पौधों की वृद्धि, कोशिका विभाजन, बीज अंकुरण, पुष्पन, फलन, पत्तियों के झड़ने तथा फलों के पकने जैसी अनेक क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।
रासायनिक समन्वय का महत्व—
(i) पौधों की वृद्धि एवं विकास का नियंत्रण।
(ii) वातावरण के अनुसार प्रतिक्रिया उत्पन्न करना।
(iii) बीजों के अंकुरण एवं सुप्तावस्था का नियंत्रण।
(iv) फलों के पकने एवं पत्तियों के गिरने का नियंत्रण।
(v) पौधों को प्रतिकूल परिस्थितियों में जीवित रहने में सहायता देना।
22. पौधों में उद्दीपन (Stimulus) के प्रति प्रतिक्रिया कैसे होती है?
उत्तर ⇒
पौधों में तंत्रिका तंत्र नहीं होता, फिर भी वे प्रकाश, जल, गुरुत्वाकर्षण, स्पर्श तथा रसायनों जैसे उद्दीपनों के प्रति प्रतिक्रिया करते हैं। यह प्रतिक्रिया पादप हार्मोनों की सहायता से होती है।
जब कोई उद्दीपन पौधे पर प्रभाव डालता है, तब संबंधित भाग में हार्मोनों का वितरण बदल जाता है। इससे कोशिकाओं की वृद्धि की गति में परिवर्तन होता है और पौधे का वह भाग उद्दीपन की ओर अथवा उससे विपरीत दिशा में मुड़ जाता है।
उदाहरण—
(i) प्रकाश की ओर तने का मुड़ना।
(ii) जड़ों का जल की ओर बढ़ना।
(iii) लता का सहारे से लिपटना।
(iv) छुई-मुई के पौधे की पत्तियों का स्पर्श करने पर बंद हो जाना।
23. स्पर्शानुवर्तन (Thigmotropism) क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर ⇒
स्पर्श के प्रभाव से पौधों के किसी भाग की वृद्धि की दिशा में होने वाले परिवर्तन को स्पर्शानुवर्तन (Thigmotropism) कहते हैं। यह मुख्यतः लता वाले पौधों में पाया जाता है।
जब किसी लता का अग्रभाग किसी सहारे के संपर्क में आता है, तब स्पर्श वाले भाग की अपेक्षा विपरीत भाग की कोशिकाएँ अधिक बढ़ती हैं। परिणामस्वरूप लता सहारे के चारों ओर लिपट जाती है।
उदाहरण—
(i) मटर की लता।
(ii) अंगूर की बेल।
(iii) लौकी एवं कद्दू की लताएँ।
स्पर्शानुवर्तन पौधों को ऊपर चढ़ने तथा अधिक प्रकाश प्राप्त करने में सहायता करता है।
24. जलीयानुवर्तन (Hydrotropism) क्या है?
उत्तर ⇒
जल के प्रभाव में पौधों के किसी भाग, विशेषकर जड़ों, की वृद्धि की दिशा में होने वाले परिवर्तन को जलीयानुवर्तन (Hydrotropism) कहते हैं।
पौधों की जड़ें मिट्टी में उपस्थित जल की दिशा में बढ़ती हैं ताकि पौधे को पर्याप्त जल प्राप्त हो सके।
उदाहरण—
सूखी मिट्टी की अपेक्षा नम मिट्टी की ओर जड़ों का बढ़ना जलीयानुवर्तन का प्रमुख उदाहरण है।
जलीयानुवर्तन पौधों के जीवित रहने के लिए अत्यंत आवश्यक प्रक्रिया है।
25. रासायनिकानुवर्तन (Chemotropism) क्या है?
उत्तर ⇒
रासायनिक पदार्थों के प्रभाव में पौधों के किसी भाग की वृद्धि की दिशा में होने वाले परिवर्तन को रासायनिकानुवर्तन (Chemotropism) कहते हैं।
यह प्रक्रिया मुख्यतः पौधों के प्रजनन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उदाहरण—
परागकण (Pollen Grain) से निकलने वाली परागनलिका (Pollen Tube) अंडाशय की ओर उपस्थित रासायनिक पदार्थों के प्रभाव से बढ़ती है। यह रासायनिकानुवर्तन का प्रमुख उदाहरण है।
26. छुई-मुई (Mimosa pudica) की पत्तियाँ स्पर्श करने पर बंद क्यों हो जाती हैं?
उत्तर ⇒
छुई-मुई (Mimosa pudica) की पत्तियाँ स्पर्श करने पर तुरंत बंद हो जाती हैं। यह वृद्धि संबंधी गति नहीं बल्कि नास्टिक गति (Nastic Movement) है।
स्पर्श होने पर पत्तियों के आधार (Pulvinus) की कोशिकाओं से जल बाहर निकल जाता है, जिससे उनका तुर्गदाब (Turgor Pressure) कम हो जाता है। परिणामस्वरूप पत्तियाँ मुड़कर बंद हो जाती हैं।
कुछ समय बाद कोशिकाएँ पुनः जल ग्रहण कर लेती हैं और पत्तियाँ फिर से खुल जाती हैं।
27. नास्टिक गति (Nastic Movement) क्या है?
उत्तर ⇒
पौधों में ऐसी गति, जो उद्दीपन की दिशा पर निर्भर नहीं करती, नास्टिक गति (Nastic Movement) कहलाती है।
यह गति मुख्यतः कोशिकाओं के तुर्गदाब में परिवर्तन के कारण होती है तथा इसमें वृद्धि की कोई भूमिका नहीं होती।
उदाहरण—
(i) छुई-मुई की पत्तियों का स्पर्श करने पर बंद होना।
(ii) कुछ फूलों का दिन में खिलना और रात में बंद होना।
28. अनुवर्तन (Tropism) एवं नास्टिक गति (Nastic Movement) में अंतर लिखिए।
| अनुवर्तन (Tropism) | नास्टिक गति (Nastic Movement) |
|---|---|
| (i) यह वृद्धि पर आधारित गति है। | (i) यह वृद्धि पर आधारित नहीं होती। |
| (ii) यह उद्दीपन की दिशा पर निर्भर करती है। | (ii) यह उद्दीपन की दिशा पर निर्भर नहीं करती। |
| (iii) इसकी गति स्थायी होती है। | (iii) इसकी गति अस्थायी होती है। |
| (iv) उदाहरण—प्रकाशानुवर्तन, गुरुत्वानुवर्तन। | (iv) उदाहरण—छुई-मुई की पत्तियों का बंद होना। |
29. मानव शरीर में हार्मोन तथा तंत्रिका तंत्र में अंतर लिखिए।
| हार्मोन (Hormones) | तंत्रिका तंत्र (Nervous System) |
|---|---|
| (i) हार्मोन रासायनिक संदेशवाहक होते हैं। | (i) तंत्रिका तंत्र विद्युत आवेगों द्वारा संदेश भेजता है। |
| (ii) इनका प्रभाव अपेक्षाकृत धीमा होता है। | (ii) इसकी प्रतिक्रिया बहुत तेज होती है। |
| (iii) प्रभाव लंबे समय तक रहता है। | (iii) प्रभाव अल्प समय तक रहता है। |
| (iv) हार्मोन रक्त के माध्यम से कार्य करते हैं। | (iv) तंत्रिकाएँ सीधे संदेश पहुँचाती हैं। |
30. नियंत्रण एवं समन्वय का जीवों के लिए क्या महत्व है?
उत्तर ⇒
नियंत्रण एवं समन्वय जीवों के जीवन की अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसके बिना शरीर के विभिन्न अंग स्वतंत्र रूप से कार्य करेंगे और जीवन की सामान्य क्रियाएँ संभव नहीं होंगी।
नियंत्रण एवं समन्वय का महत्व निम्नलिखित है—
(i) शरीर के सभी अंगों के कार्यों में तालमेल बनाए रखता है।
(ii) उद्दीपनों के प्रति उचित एवं त्वरित प्रतिक्रिया करने में सहायता करता है।
(iii) शरीर की वृद्धि एवं विकास को नियंत्रित करता है।
(iv) शरीर की आंतरिक क्रियाओं को संतुलित बनाए रखता है।
(v) जीवों को बदलते वातावरण के अनुसार अनुकूलन करने में सहायता करता है।
(vi) जीवन की सभी आवश्यक जैविक क्रियाओं का सुचारु संचालन सुनिश्चित करता है।
31. ऑक्सिन (Auxin) क्या है? इसके प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒
ऑक्सिन (Auxin) पौधों में पाया जाने वाला एक प्रमुख वृद्धिवर्धक (Growth Promoting) हार्मोन है। इसका निर्माण मुख्यतः तने एवं जड़ के शीर्ष भाग (Growing Tips) तथा विकसित होती पत्तियों में होता है। यह पौधों की वृद्धि एवं विकास को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ऑक्सिन के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—
(i) कोशिकाओं की लंबाई (Cell Elongation) बढ़ाता है।
(ii) तने की वृद्धि को प्रोत्साहित करता है।
(iii) जड़ों के निर्माण एवं विकास में सहायता करता है।
(iv) प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) तथा गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism) जैसी अनुवर्ती गतियों को नियंत्रित करता है।
(v) फलों के विकास तथा कुछ पौधों में बीजरहित फलों के निर्माण में सहायता करता है।
(vi) पत्तियों एवं फलों के समय से पहले गिरने को रोकता है।
इस प्रकार ऑक्सिन पौधों की सामान्य वृद्धि एवं विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हार्मोन है।
32. जिबरेलिन (Gibberellin) क्या है? इसके प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒
जिबरेलिन (Gibberellin) पौधों में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण वृद्धि हार्मोन है। यह विशेष रूप से तने की लंबाई बढ़ाने, बीजों के अंकुरण तथा पुष्पन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका उपयोग कृषि में भी पौधों की वृद्धि बढ़ाने के लिए किया जाता है।
जिबरेलिन के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—
(i) तने की लंबाई में वृद्धि करता है।
(ii) बीजों की सुप्तावस्था (Dormancy) समाप्त कर अंकुरण में सहायता करता है।
(iii) पौधों में पुष्पन एवं फलन को प्रोत्साहित करता है।
(iv) फलों के आकार में वृद्धि करता है।
(v) कुछ पौधों में जल्दी फूल आने में सहायता करता है।
(vi) कृषि उत्पादन बढ़ाने में उपयोगी है।
33. साइटोकाइनिन (Cytokinin) क्या है? इसके प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒
साइटोकाइनिन (Cytokinin) एक प्रमुख पादप हार्मोन है, जिसका निर्माण मुख्यतः जड़ों के अग्रभाग में होता है। यह कोशिका विभाजन (Cell Division) को बढ़ावा देता है तथा पौधों की नई शाखाओं एवं कलियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
साइटोकाइनिन के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—
(i) कोशिका विभाजन को प्रोत्साहित करता है।
(ii) नई शाखाओं एवं कलियों के विकास में सहायता करता है।
(iii) पत्तियों को लंबे समय तक हरा बनाए रखता है।
(iv) पौधों की वृद्धि एवं विकास में सहायता करता है।
(v) वृद्धावस्था (Senescence) की प्रक्रिया को धीमा करता है।
(vi) ऊतक संवर्धन (Tissue Culture) में इसका व्यापक उपयोग किया जाता है।
34. एब्सिसिक अम्ल (Abscisic Acid-ABA) क्या है? इसके प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒
एब्सिसिक अम्ल (ABA) एक वृद्धि अवरोधक (Growth Inhibitor) पादप हार्मोन है। यह पौधों की वृद्धि को नियंत्रित करता है तथा प्रतिकूल परिस्थितियों में पौधों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे पौधों का तनाव हार्मोन (Stress Hormone) भी कहा जाता है।
एब्सिसिक अम्ल के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—
(i) पौधों की वृद्धि को नियंत्रित एवं धीमा करता है।
(ii) बीजों एवं कलियों की सुप्तावस्था बनाए रखता है।
(iii) जल की कमी होने पर रंध्रों (Stomata) को बंद कर देता है।
(iv) पत्तियों एवं फलों के झड़ने में सहायता करता है।
(v) पौधों को सूखे जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों से बचाने में सहायता करता है।
35. एथिलीन (Ethylene) क्या है? इसके प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒
एथिलीन (Ethylene) एक गैसीय पादप हार्मोन है। यह मुख्यतः फलों के पकने तथा पौधों की परिपक्वता से संबंधित क्रियाओं को नियंत्रित करता है। अन्य पादप हार्मोनों की तुलना में यह गैस के रूप में कार्य करने वाला एकमात्र प्रमुख हार्मोन है।
एथिलीन के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—
(i) फलों को पकाने में सहायता करता है।
(ii) पत्तियों एवं फलों के झड़ने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है।
(iii) पुष्पों के मुरझाने में सहायता करता है।
(iv) फलों के रंग, स्वाद एवं सुगंध के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
(v) कृषि में कृत्रिम रूप से फलों को पकाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
36. मानव शरीर में हार्मोनों का क्या महत्व है?
उत्तर ⇒
हार्मोन शरीर में बनने वाले रासायनिक संदेशवाहक (Chemical Messengers) हैं, जो विभिन्न अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित किए जाते हैं। ये रक्त के माध्यम से शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचकर उनकी क्रियाओं का नियंत्रण एवं समन्वय करते हैं। हार्मोन बहुत कम मात्रा में बनते हैं, लेकिन इनका प्रभाव पूरे शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली पर पड़ता है।
हार्मोनों का महत्व निम्नलिखित है—
(i) शरीर की वृद्धि एवं विकास को नियंत्रित करते हैं।
(ii) उपापचय (Metabolism) की क्रियाओं का नियंत्रण करते हैं।
(iii) रक्त में शर्करा की मात्रा को संतुलित रखते हैं।
(iv) प्रजनन एवं लैंगिक विकास को नियंत्रित करते हैं।
(v) शरीर को तनाव एवं आपातकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार करते हैं।
(vi) विभिन्न अंगों के बीच समन्वय स्थापित करते हैं।
इस प्रकार हार्मोन शरीर की सामान्य वृद्धि, विकास तथा संतुलन बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
37. मानव शरीर में अंतःस्रावी ग्रंथियों के नाम लिखिए।
उत्तर ⇒
मानव शरीर में अनेक अंतःस्रावी ग्रंथियाँ पाई जाती हैं, जो विभिन्न प्रकार के हार्मोनों का स्राव करती हैं। ये हार्मोन शरीर की वृद्धि, विकास, उपापचय तथा विभिन्न जैविक क्रियाओं का नियंत्रण करते हैं।
मानव शरीर की प्रमुख अंतःस्रावी ग्रंथियाँ निम्नलिखित हैं—
(i) पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland)
(ii) थायरॉयड ग्रंथि (Thyroid Gland)
(iii) पैराथायरॉयड ग्रंथि (Parathyroid Gland)
(iv) अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal Gland)
(v) अग्न्याशय (Pancreas)
(vi) वृषण (Testis)
(vii) अंडाशय (Ovary)
इन सभी ग्रंथियों द्वारा स्रावित हार्मोन शरीर की विभिन्न क्रियाओं का समुचित नियंत्रण एवं समन्वय करते हैं।
38. पौधों में हार्मोन तथा मनुष्य में हार्मोन के कार्यों में क्या अंतर है?
उत्तर ⇒
पौधों एवं मनुष्यों दोनों में हार्मोन पाए जाते हैं, लेकिन इनके कार्यों में कुछ महत्वपूर्ण अंतर होता है।
पौधों के हार्मोन—
(i) पौधों की वृद्धि एवं विकास को नियंत्रित करते हैं।
(ii) बीज अंकुरण, पुष्पन एवं फलन को प्रभावित करते हैं।
(iii) प्रकाशानुवर्तन एवं गुरुत्वानुवर्तन जैसी गतियों का नियंत्रण करते हैं।
(iv) पत्तियों एवं फलों के झड़ने तथा फलों के पकने में सहायता करते हैं।
मनुष्य के हार्मोन—
(i) शरीर की वृद्धि एवं विकास का नियंत्रण करते हैं।
(ii) उपापचय (Metabolism) को नियंत्रित करते हैं।
(iii) रक्त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करते हैं।
(iv) प्रजनन एवं लैंगिक विकास को नियंत्रित करते हैं।
(v) विभिन्न अंगों के बीच समन्वय स्थापित करते हैं।
अतः दोनों में हार्मोन रासायनिक संदेशवाहक होते हैं, लेकिन उनके कार्य संबंधित जीवों की आवश्यकताओं के अनुसार भिन्न होते हैं।
39. नियंत्रण एवं समन्वय में तंत्रिका तंत्र तथा अंतःस्रावी तंत्र की संयुक्त भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒
मानव शरीर में नियंत्रण एवं समन्वय का कार्य मुख्यतः तंत्रिका तंत्र तथा अंतःस्रावी तंत्र मिलकर करते हैं। दोनों तंत्र एक-दूसरे के पूरक हैं और शरीर की सभी जैविक क्रियाओं को संतुलित बनाए रखते हैं।
तंत्रिका तंत्र उद्दीपनों के प्रति त्वरित (Fast) प्रतिक्रिया देता है, जबकि अंतःस्रावी तंत्र हार्मोनों के माध्यम से धीमी लेकिन दीर्घकालिक (Long-lasting) प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है।
दोनों तंत्रों की संयुक्त भूमिका निम्नलिखित है—
(i) शरीर के विभिन्न अंगों के बीच समन्वय स्थापित करना।
(ii) वातावरण के अनुसार उचित प्रतिक्रिया उत्पन्न करना।
(iii) शरीर की वृद्धि एवं विकास को नियंत्रित करना।
(iv) उपापचय तथा प्रजनन क्रियाओं का नियंत्रण करना।
(v) शरीर की आंतरिक परिस्थितियों को संतुलित बनाए रखना।
इस प्रकार तंत्रिका तंत्र एवं अंतःस्रावी तंत्र मिलकर शरीर की सभी आवश्यक क्रियाओं का सफल संचालन करते हैं।
40. नियंत्रण एवं समन्वय अध्याय का निष्कर्ष लिखिए।
उत्तर ⇒
नियंत्रण एवं समन्वय जीवों के जीवन की अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसके माध्यम से शरीर के सभी अंग एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाकर कार्य करते हैं। मानव शरीर में यह कार्य मुख्यतः तंत्रिका तंत्र एवं अंतःस्रावी तंत्र द्वारा किया जाता है, जबकि पौधों में पादप हार्मोन विभिन्न जैविक क्रियाओं का नियंत्रण करते हैं।
तंत्रिका तंत्र शरीर को उद्दीपनों के प्रति त्वरित प्रतिक्रिया देने में सहायता करता है, जबकि हार्मोन शरीर की वृद्धि, विकास, उपापचय तथा प्रजनन जैसी दीर्घकालिक क्रियाओं का नियंत्रण करते हैं। इसी प्रकार पौधों में ऑक्सिन, जिबरेलिन, साइटोकाइनिन, एब्सिसिक अम्ल एवं एथिलीन जैसे हार्मोन वृद्धि एवं विकास को नियंत्रित करते हैं।
अतः नियंत्रण एवं समन्वय के कारण ही जीव अपने वातावरण के अनुसार स्वयं को अनुकूलित कर पाते हैं तथा शरीर की सभी क्रियाएँ संतुलित एवं व्यवस्थित रूप से सम्पन्न होती हैं।