Class 10 Science: जीव जनन कैसे करते हैं?

Revise the NCERT Class 10 Science chapter, जीव जनन कैसे करते हैं?, with these concise and well-organised revision notes. JAC Exam Prep (jac.jharkhandexamprep.com) provides NCERT Class 10 Science जीव जनन कैसे करते हैं? Revision Notes based on the latest NCERT syllabus. Download the PDF below and revise the chapter for school examinations, CBSE board examinations, and competitive exams such as JEE and NEET.

WhatsApp Channel
Join Now
Telegram Channel
Join Now

Chapter Overview

Class10
SubjectScience
Chapter Nameजीव जनन कैसे करते हैं?
Resource TypeRevision Notes
SyllabusNCERT
Suitable ForCBSE, JAC and other state boards

जीव जनन कैसे करते हैं? Revision Notes

1. जनन (Reproduction) क्या है? जीवों के लिए इसका क्या महत्व है?

उत्तर ⇒
जिस जैविक प्रक्रिया द्वारा सभी जीव अपने समान नई संतति (Offspring) उत्पन्न करते हैं, उसे जनन (Reproduction) कहते हैं। यह प्रत्येक जीव का एक महत्वपूर्ण लक्षण है। जनन के कारण किसी भी जीव की जाति (Species) का अस्तित्व बना रहता है तथा उसकी संख्या में वृद्धि होती है। यदि जीवों में जनन की प्रक्रिया न हो, तो समय के साथ सभी जीव समाप्त हो जाएंगे और पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।

जनन के दौरान माता-पिता के गुण संतानों में स्थानांतरित होते हैं, जिससे जीवों की प्रजाति की निरंतरता बनी रहती है। इसी प्रक्रिया के कारण जीवों में विविधता (Variation) भी उत्पन्न होती है, जो विकास (Evolution) का आधार मानी जाती है।

जनन का महत्व निम्नलिखित है—

(i) जीवों की संख्या में वृद्धि होती है।

(ii) प्रजाति का अस्तित्व बना रहता है।

(iii) माता-पिता के गुण संतानों में स्थानांतरित होते हैं।

(iv) जैव विविधता एवं विकास में सहायता मिलती है।

(v) पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता बनी रहती है।

2. जनन कितने प्रकार का होता है? समझाइए।

उत्तर ⇒
जीवों में मुख्यतः दो प्रकार का जनन पाया जाता है—

(i) अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
इस प्रकार के जनन में केवल एक जनक (Parent) भाग लेता है। इसमें युग्मकों (Gametes) का निर्माण तथा निषेचन (Fertilization) नहीं होता। इस प्रकार उत्पन्न संतति अपने जनक के लगभग समान होती है। यह जनन सरल, तीव्र तथा कम समय में अधिक संख्या में संतान उत्पन्न करने वाला होता है।

उदाहरण— अमीबा, हाइड्रा, यीस्ट, स्पाइरोगाइरा आदि।

(ii) लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)
इस प्रकार के जनन में नर एवं मादा दोनों जनक भाग लेते हैं। इसमें नर एवं मादा युग्मकों का निर्माण होता है तथा उनके संयोग (निषेचन) से युग्मनज (Zygote) बनता है, जिससे नई संतति विकसित होती है। इस प्रकार के जनन में संतानों में विविधता पाई जाती है।

उदाहरण— मनुष्य, अधिकांश पशु एवं पुष्पीय पौधे।

3. अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction) क्या है? इसकी विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर ⇒
जिस जनन प्रक्रिया में केवल एक जनक भाग लेता है तथा जिसमें युग्मकों का निर्माण एवं निषेचन नहीं होता, उसे अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction) कहते हैं। इस प्रकार के जनन में नई संतति सीधे जनक के शरीर से उत्पन्न होती है और अधिकांशतः जनक के समान होती है।

अलैंगिक जनन एक सरल एवं तीव्र प्रक्रिया है। यह मुख्य रूप से एककोशिकीय जीवों तथा कुछ निम्न श्रेणी के बहुकोशिकीय जीवों में पाया जाता है।

अलैंगिक जनन की प्रमुख विशेषताएँ—

(i) केवल एक जनक भाग लेता है।

(ii) युग्मकों का निर्माण नहीं होता।

(iii) निषेचन की आवश्यकता नहीं होती।

(iv) संतति जनक के लगभग समान होती है।

(v) यह कम समय में अधिक संतान उत्पन्न करता है।

(vi) इसमें विविधता बहुत कम होती है।

4. लैंगिक जनन (Sexual Reproduction) क्या है? इसकी विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर ⇒
जिस जनन प्रक्रिया में नर एवं मादा दोनों जनक भाग लेते हैं तथा नर एवं मादा युग्मकों के संयोग से नई संतति का निर्माण होता है, उसे लैंगिक जनन (Sexual Reproduction) कहते हैं।

इस प्रक्रिया में पहले नर एवं मादा युग्मकों का निर्माण होता है। इसके बाद निषेचन (Fertilization) द्वारा युग्मनज (Zygote) बनता है, जिससे भ्रूण तथा अंततः नई संतति विकसित होती है।

लैंगिक जनन की प्रमुख विशेषताएँ—

(i) इसमें दो जनक भाग लेते हैं।

(ii) नर एवं मादा युग्मकों का निर्माण होता है।

(iii) निषेचन आवश्यक होता है।

(iv) संतानों में आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है।

(v) यह विकास (Evolution) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

(vi) यह उच्च श्रेणी के पौधों एवं जन्तुओं में पाया जाता है।

5. अलैंगिक एवं लैंगिक जनन में अंतर लिखिए।

अलैंगिक जननलैंगिक जनन
(i) इसमें केवल एक जनक भाग लेता है।(i) इसमें दो जनक भाग लेते हैं।
(ii) युग्मकों का निर्माण नहीं होता।(ii) नर एवं मादा युग्मकों का निर्माण होता है।
(iii) निषेचन नहीं होता।(iii) निषेचन आवश्यक होता है।
(iv) संतति जनक के समान होती है।(iv) संतानों में विविधता पाई जाती है।
(v) यह सरल एवं तीव्र प्रक्रिया है।(v) यह अपेक्षाकृत जटिल प्रक्रिया है।
(vi) उदाहरण—अमीबा, हाइड्रा, यीस्ट।(vi) उदाहरण—मनुष्य, पक्षी, पुष्पीय पौधे।

6. द्विखंडन (Binary Fission) क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर ⇒
द्विखंडन (Binary Fission) अलैंगिक जनन की एक सरल एवं सामान्य विधि है। इस प्रक्रिया में एक जनक जीव दो समान संतानों में विभाजित हो जाता है। सबसे पहले जनक कोशिका का केन्द्रक (Nucleus) विभाजित होता है, उसके बाद कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm) दो बराबर भागों में बँट जाता है। परिणामस्वरूप एक जनक से दो नई संतानें बनती हैं।

द्विखंडन मुख्यतः अनुकूल परिस्थितियों में होता है तथा इसमें नई संतानों का आनुवंशिक गुण जनक के समान होता है। यह प्रक्रिया बहुत कम समय में पूरी हो जाती है, इसलिए जीवों की संख्या तेजी से बढ़ती है।

उदाहरण—

(i) अमीबा (Amoeba)

(ii) पैरामीशियम (Paramecium)

(iii) जीवाणु (Bacteria)

द्विखंडन की विशेषताएँ—

(i) इसमें केवल एक जनक भाग लेता है।

(ii) निषेचन की आवश्यकता नहीं होती।

(iii) एक जनक से दो संतानें बनती हैं।

(iv) संतानें जनक के समान होती हैं।

7. मुकुलन (Budding) क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर ⇒
मुकुलन (Budding) अलैंगिक जनन की एक ऐसी विधि है, जिसमें जनक जीव के शरीर पर एक छोटा उभार (मुकुल) बनता है। यह मुकुल कोशिका विभाजन द्वारा धीरे-धीरे विकसित होता है और पूर्ण विकसित होने पर जनक से अलग होकर स्वतंत्र जीव बन जाता है।

मुकुलन की प्रक्रिया में जनक जीव को कोई विशेष हानि नहीं होती तथा एक ही जनक से समय-समय पर अनेक संतानें उत्पन्न हो सकती हैं। यह प्रक्रिया मुख्यतः अनुकूल परिस्थितियों में होती है।

उदाहरण—

(i) हाइड्रा (Hydra)

(ii) यीस्ट (Yeast)

मुकुलन की विशेषताएँ—

(i) केवल एक जनक भाग लेता है।

(ii) निषेचन नहीं होता।

(iii) जनक के शरीर पर मुकुल बनता है।

(iv) संतान जनक के समान होती है।

(v) यह अलैंगिक जनन की सरल विधि है।

8. पुनर्जनन (Regeneration) क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर ⇒
पुनर्जनन (Regeneration) वह प्रक्रिया है, जिसमें किसी जीव का शरीर यदि कई भागों में कट जाए, तो प्रत्येक भाग से एक नया पूर्ण जीव बन सकता है। यह क्षमता केवल कुछ विशेष जीवों में ही पाई जाती है।

इस प्रक्रिया में शरीर की विशेष कोशिकाएँ तेजी से विभाजित होकर नए ऊतकों एवं अंगों का निर्माण करती हैं। इसलिए शरीर का प्रत्येक भाग एक स्वतंत्र जीव के रूप में विकसित हो सकता है।

उदाहरण—

(i) प्लैनेरिया (Planaria)

(ii) हाइड्रा (Hydra)

पुनर्जनन की विशेषताएँ—

(i) शरीर का कटा हुआ भाग नया जीव बना सकता है।

(ii) यह केवल कुछ विशेष जीवों में पाया जाता है।

(iii) इसमें निषेचन की आवश्यकता नहीं होती।

(iv) यह अलैंगिक जनन की एक विशेष विधि है।

9. विखंडन (Fragmentation) क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर ⇒
विखंडन (Fragmentation) अलैंगिक जनन की वह प्रक्रिया है, जिसमें किसी जीव का शरीर कई छोटे-छोटे टुकड़ों (Fragments) में टूट जाता है तथा प्रत्येक टुकड़ा अनुकूल परिस्थितियों में एक नए जीव का निर्माण कर देता है।

यह प्रक्रिया मुख्यतः सरल संरचना वाले बहुकोशिकीय जीवों में पाई जाती है। प्रत्येक खंड में नई कोशिकाएँ बनती हैं और वह धीरे-धीरे पूर्ण जीव का रूप ले लेता है।

उदाहरण—

(i) स्पाइरोगाइरा (Spirogyra)

विखंडन की विशेषताएँ—

(i) शरीर कई टुकड़ों में टूट जाता है।

(ii) प्रत्येक टुकड़ा नया जीव बनाता है।

(iii) केवल एक जनक भाग लेता है।

(iv) निषेचन की आवश्यकता नहीं होती।

10. बीजाणु निर्माण (Spore Formation) क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर ⇒
बीजाणु निर्माण (Spore Formation) अलैंगिक जनन की एक महत्वपूर्ण विधि है, जिसमें जीव विशेष प्रकार के सूक्ष्म, हल्के एवं मोटी भित्ति वाले बीजाणु (Spores) बनाते हैं। ये बीजाणु प्रतिकूल परिस्थितियों में भी जीवित रहते हैं। अनुकूल वातावरण मिलने पर प्रत्येक बीजाणु अंकुरित होकर नया जीव बनाता है।

बीजाणु बहुत हल्के होते हैं, इसलिए ये वायु द्वारा दूर-दूर तक फैल जाते हैं और नए स्थानों पर पहुँचकर नए जीवों का निर्माण करते हैं।

उदाहरण—

(i) राइजोपस (Rhizopus)

(ii) फफूंद (Fungi)

बीजाणु निर्माण की विशेषताएँ—

(i) बड़ी संख्या में बीजाणु बनते हैं।

(ii) बीजाणुओं पर मोटी सुरक्षात्मक भित्ति होती है।

(iii) प्रतिकूल परिस्थितियों में भी जीवित रहते हैं।

(iv) अनुकूल परिस्थितियों में नया जीव बनाते हैं।

11. कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation) क्या है? इसके प्रमुख प्रकार लिखिए।

उत्तर ⇒
कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation) पौधों में होने वाला अलैंगिक जनन का एक महत्वपूर्ण प्रकार है। इस प्रक्रिया में पौधे के कायिक अंगों जैसे जड़, तना या पत्ती से नए पौधे का निर्माण होता है। इसमें बीज बनने की आवश्यकता नहीं होती। नई संतति अपने जनक पौधे के समान गुणों वाली होती है।

कायिक प्रवर्धन प्राकृतिक तथा कृत्रिम दोनों प्रकार से होता है। कृषि एवं बागवानी में इसका व्यापक उपयोग किया जाता है क्योंकि इससे कम समय में अधिक संख्या में पौधे तैयार किए जा सकते हैं।

कायिक प्रवर्धन के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं—

(i) प्राकृतिक कायिक प्रवर्धन

(ii) कृत्रिम कायिक प्रवर्धन

इसका महत्व—

(i) उत्तम गुणों वाले पौधों की संख्या बढ़ाई जाती है।

(ii) कम समय में अधिक पौधे तैयार किए जाते हैं।

(iii) बीजरहित पौधों का संवर्धन किया जाता है।

(iv) नई पौध जनक पौधे के समान गुणों वाली होती है।

12. प्राकृतिक कायिक प्रवर्धन (Natural Vegetative Propagation) क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर ⇒
जब पौधों में जड़, तना अथवा पत्तियों से बिना किसी मानवीय सहायता के नए पौधे उत्पन्न होते हैं, तो इसे प्राकृतिक कायिक प्रवर्धन कहते हैं। यह अलैंगिक जनन की प्राकृतिक विधि है।

कुछ पौधों में भूमिगत तनों, कुछ में जड़ों तथा कुछ में पत्तियों से नई कलियाँ विकसित होकर नए पौधे बन जाते हैं।

उदाहरण—

(i) आलू – तना द्वारा

(ii) अदरक – प्रकंद (Rhizome) द्वारा

(iii) प्याज – बल्ब द्वारा

(iv) शकरकंद – जड़ द्वारा

(v) ब्रायोफिलम – पत्ती द्वारा

प्राकृतिक कायिक प्रवर्धन से बनने वाले पौधे अपने जनक के समान होते हैं तथा शीघ्र वृद्धि करते हैं।

13. कृत्रिम कायिक प्रवर्धन (Artificial Vegetative Propagation) क्या है? इसके प्रमुख प्रकार लिखिए।

उत्तर ⇒
जब मनुष्य अपनी आवश्यकता के अनुसार कृत्रिम विधियों द्वारा पौधों का कायिक प्रवर्धन करता है, तो उसे कृत्रिम कायिक प्रवर्धन कहते हैं। इस विधि का उपयोग कृषि, बागवानी तथा फल उत्पादन में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

कृत्रिम कायिक प्रवर्धन की प्रमुख विधियाँ हैं—

(i) कटिंग (Cutting)

(ii) लेयरिंग या गूटी (Layering)

(iii) कलम बाँधना या ग्राफ्टिंग (Grafting)

(iv) ऊतक संवर्धन (Tissue Culture)

कृत्रिम कायिक प्रवर्धन के लाभ—

(i) कम समय में अधिक पौधे प्राप्त होते हैं।

(ii) उत्तम गुणवत्ता वाले पौधे तैयार किए जाते हैं।

(iii) रोग प्रतिरोधी पौधे विकसित किए जा सकते हैं।

(iv) बीजरहित पौधों का भी संवर्धन संभव होता है।

14. ऊतक संवर्धन (Tissue Culture) क्या है? इसके लाभ लिखिए।

उत्तर ⇒
ऊतक संवर्धन (Tissue Culture) एक आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी विधि है, जिसमें पौधे के किसी छोटे ऊतक या कोशिका को पोषक माध्यम (Nutrient Medium) में उगाकर नया पौधा तैयार किया जाता है। इस विधि से बहुत कम समय में हजारों समान गुणों वाले पौधे तैयार किए जा सकते हैं।

ऊतक संवर्धन के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—

(i) कम समय में अधिक संख्या में पौधे तैयार होते हैं।

(ii) रोगमुक्त पौधे प्राप्त किए जा सकते हैं।

(iii) दुर्लभ एवं विलुप्तप्राय पौधों का संरक्षण किया जा सकता है।

(iv) पूरे वर्ष पौधों का उत्पादन किया जा सकता है।

(v) सभी पौधे समान गुणों वाले होते हैं।

15. पुष्प (Flower) क्या है? इसका क्या महत्व है?

उत्तर ⇒
पुष्प (Flower) पुष्पीय पौधों का जनन अंग (Reproductive Organ) है। इसी में नर एवं मादा जनन अंग पाए जाते हैं, जिनके द्वारा लैंगिक जनन सम्पन्न होता है। परागण तथा निषेचन के बाद पुष्प से फल एवं बीज का निर्माण होता है।

पुष्प का महत्व निम्नलिखित है—

(i) यह पौधों में लैंगिक जनन का प्रमुख अंग है।

(ii) परागण एवं निषेचन की प्रक्रिया यहीं होती है।

(iii) फल एवं बीज का निर्माण करता है।

(iv) पौधों की नई पीढ़ी उत्पन्न करने में सहायता करता है।

(v) अनेक पुष्प कीटों को आकर्षित कर परागण में सहायता करते हैं।

16. एक प्रारूपी (Typical) पुष्प के विभिन्न भागों के नाम लिखिए।

उत्तर ⇒
एक प्रारूपी (Typical) पुष्प पौधे का जनन अंग होता है। इसमें चार प्रमुख चक्र (Whorls) पाए जाते हैं। इनमें से दो चक्र सहायक (Accessory) तथा दो चक्र आवश्यक (Essential) जनन अंग होते हैं। ये सभी भाग मिलकर परागण, निषेचन तथा फल एवं बीज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

एक प्रारूपी पुष्प के प्रमुख भाग निम्नलिखित हैं—

(i) बाह्यदलपुंज (Calyx)

(ii) दलपुंज (Corolla)

(iii) पुमंग (Androecium)

(iv) जायांग (Gynoecium)

इनके अतिरिक्त पुष्प में पुष्पासन (Thalamus) तथा पुष्पवृंत (Pedicel) भी पाए जाते हैं। एक पूर्ण पुष्प में ये सभी भाग उपस्थित रहते हैं।

17. पुमंग (Androecium) क्या है? इसकी संरचना एवं कार्य लिखिए।

उत्तर ⇒
पुमंग (Androecium) पुष्प का नर जनन अंग है। यह अनेक पुंकेसरों (Stamens) से मिलकर बना होता है। प्रत्येक पुंकेसर के दो मुख्य भाग होते हैं—

(i) परागकोश (Anther)

(ii) तंतु (Filament)

परागकोश में परागकण (Pollen Grains) बनते हैं। परागकणों में नर युग्मक (Male Gametes) उपस्थित होते हैं, जो निषेचन की प्रक्रिया में भाग लेते हैं।

पुमंग के प्रमुख कार्य—

(i) परागकणों का निर्माण करना।

(ii) नर युग्मकों का निर्माण करना।

(iii) परागण की प्रक्रिया में भाग लेना।

(iv) निषेचन के लिए मादा जनन अंग तक परागकण पहुँचाना।

18. जायांग (Gynoecium) क्या है? इसकी संरचना एवं कार्य लिखिए।

उत्तर ⇒
जायांग (Gynoecium) पुष्प का मादा जनन अंग है। यह एक या एक से अधिक अंडपों (Carpels) से मिलकर बना होता है। प्रत्येक अंडप के तीन मुख्य भाग होते हैं—

(i) वर्तिकाग्र (Stigma)

(ii) वर्तिका (Style)

(iii) अंडाशय (Ovary)

अंडाशय के भीतर बीजांड (Ovules) पाए जाते हैं, जिनमें मादा युग्मक (Egg Cell) उपस्थित होता है।

जायांग के प्रमुख कार्य—

(i) मादा युग्मक का निर्माण करना।

(ii) परागकणों को ग्रहण करना।

(iii) निषेचन की प्रक्रिया सम्पन्न कराना।

(iv) निषेचन के बाद फल एवं बीज का निर्माण करना।

19. परागण (Pollination) क्या है?

उत्तर ⇒
पुष्प के परागकोश (Anther) से परागकणों का उसी प्रजाति के पुष्प के वर्तिकाग्र (Stigma) तक पहुँचने की प्रक्रिया को परागण (Pollination) कहते हैं। यह लैंगिक जनन की पहली महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। परागण के बिना निषेचन संभव नहीं होता।

परागण विभिन्न माध्यमों जैसे वायु, जल, कीट, पक्षी तथा अन्य जीवों द्वारा सम्पन्न होता है।

परागण का महत्व—

(i) निषेचन की प्रक्रिया को संभव बनाता है।

(ii) बीज एवं फल के निर्माण में सहायता करता है।

(iii) पौधों की नई पीढ़ी उत्पन्न करता है।

(iv) कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

20. परागण कितने प्रकार का होता है? समझाइए।

उत्तर ⇒
परागण मुख्यतः दो प्रकार का होता है—

(i) स्वपरागण (Self Pollination)
जब किसी पुष्प के परागकण उसी पुष्प अथवा उसी पौधे के दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं, तो उसे स्वपरागण कहते हैं।

विशेषताएँ—

  • केवल एक पौधे की आवश्यकता होती है।
  • संतानों में विविधता कम होती है।
  • शुद्ध वंश (Pure Line) बनाए रखने में सहायक होता है।

उदाहरण— मटर, गेहूँ, धान।

(ii) परपरागण (Cross Pollination)
जब किसी पुष्प के परागकण उसी प्रजाति के दूसरे पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं, तो उसे परपरागण कहते हैं।

विशेषताएँ—

  • दो पौधों की आवश्यकता होती है।
  • संतानों में आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है।
  • नई एवं अधिक अनुकूल किस्मों का विकास होता है।

उदाहरण— मक्का, पपीता, नारियल, खजूर।

21. निषेचन (Fertilization) क्या है?

उत्तर ⇒
नर युग्मक (Male Gamete) तथा मादा युग्मक (Female Gamete) के आपस में संयोग करने की प्रक्रिया को निषेचन (Fertilization) कहते हैं। यह लैंगिक जनन की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। निषेचन के फलस्वरूप युग्मनज (Zygote) का निर्माण होता है, जिससे आगे चलकर भ्रूण (Embryo) तथा नया जीव विकसित होता है।

पुष्पीय पौधों में निषेचन अंडाशय के भीतर स्थित बीजांड (Ovule) में होता है। मनुष्य तथा अन्य जन्तुओं में निषेचन के बाद भ्रूण का विकास प्रारम्भ हो जाता है।

निषेचन का महत्व निम्नलिखित है—

(i) युग्मनज (Zygote) का निर्माण होता है।

(ii) नई संतति का विकास प्रारम्भ होता है।

(iii) माता-पिता के आनुवंशिक गुण संतानों में पहुँचते हैं।

(iv) जीवों में विविधता उत्पन्न होती है।

(v) प्रजाति का अस्तित्व बना रहता है।

22. द्वि-निषेचन (Double Fertilization) क्या है?

उत्तर ⇒
द्वि-निषेचन (Double Fertilization) पुष्पीय पौधों की एक विशेष प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में परागनलिका (Pollen Tube) द्वारा दो नर युग्मक बीजांड तक पहुँचते हैं। इनमें से एक नर युग्मक अंड कोशिका (Egg Cell) से मिलकर युग्मनज (Zygote) बनाता है, जबकि दूसरा नर युग्मक द्वितीयक केन्द्रक (Secondary Nucleus) से मिलकर प्राथमिक भ्रूणपोष (Primary Endosperm Nucleus) का निर्माण करता है।

इसी कारण इस प्रक्रिया को द्वि-निषेचन कहा जाता है।

द्वि-निषेचन का महत्व—

(i) भ्रूण का निर्माण होता है।

(ii) भ्रूणपोष (Endosperm) बनता है।

(iii) विकसित होते भ्रूण को पोषण प्राप्त होता है।

(iv) यह केवल आवृतबीजी (Angiosperms) पौधों में पाया जाता है।

23. निषेचन के बाद पुष्प में कौन-कौन से परिवर्तन होते हैं?

उत्तर ⇒
निषेचन के बाद पुष्प के विभिन्न भागों में अनेक महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं। ये परिवर्तन फल एवं बीज के निर्माण के लिए आवश्यक होते हैं।

निषेचन के बाद होने वाले प्रमुख परिवर्तन निम्नलिखित हैं—

(i) युग्मनज (Zygote) भ्रूण (Embryo) में विकसित हो जाता है।

(ii) बीजांड (Ovule) बीज (Seed) में परिवर्तित हो जाता है।

(iii) अंडाशय (Ovary) फल (Fruit) में परिवर्तित हो जाता है।

(iv) अंडाशय की भित्ति फलभित्ति (Pericarp) बन जाती है।

(v) बाह्यदल एवं दल सामान्यतः सूखकर गिर जाते हैं।

(vi) भ्रूणपोष (Endosperm) विकसित होकर भ्रूण को पोषण प्रदान करता है।

इन परिवर्तनों के परिणामस्वरूप पूर्ण विकसित फल एवं बीज का निर्माण होता है।

24. बीज (Seed) क्या है? इसकी संरचना एवं महत्व लिखिए।

उत्तर ⇒
निषेचन के बाद बीजांड (Ovule) के विकसित होकर बनने वाली संरचना को बीज (Seed) कहते हैं। बीज में नया पौधा विकसित करने की क्षमता होती है। अनुकूल परिस्थितियाँ मिलने पर बीज अंकुरित होकर नए पौधे का निर्माण करता है।

बीज के प्रमुख भाग निम्नलिखित हैं—

(i) बीजावरण (Seed Coat)

(ii) भ्रूण (Embryo)

(iii) बीजपत्र (Cotyledons)

बीज का महत्व—

(i) नए पौधे का निर्माण करता है।

(ii) भ्रूण की रक्षा करता है।

(iii) भोजन का संग्रह करता है।

(iv) पौधों के प्रसार में सहायता करता है।

(v) कृषि उत्पादन का आधार है।

25. फल (Fruit) क्या है? इसका महत्व लिखिए।

उत्तर ⇒
निषेचन के बाद अंडाशय (Ovary) के विकसित होकर बनने वाली संरचना को फल (Fruit) कहते हैं। फल के भीतर बीज सुरक्षित रहते हैं। फल का मुख्य कार्य बीजों की रक्षा करना तथा उनके प्रसार में सहायता करना है।

फल विभिन्न आकार, रंग एवं प्रकार के होते हैं और अनेक फल भोजन के रूप में भी उपयोग किए जाते हैं।

फल का महत्व निम्नलिखित है—

(i) बीजों की सुरक्षा करता है।

(ii) बीजों के प्रसार में सहायता करता है।

(iii) नए पौधों के निर्माण में सहायक होता है।

(iv) मनुष्य एवं पशुओं के लिए पौष्टिक भोजन का स्रोत है।

(v) कृषि एवं बागवानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

26. मानव जनन तंत्र (Human Reproductive System) क्या है?

उत्तर ⇒
मानव शरीर में जनन (Reproduction) की प्रक्रिया को सम्पन्न करने वाले अंगों के समूह को मानव जनन तंत्र (Human Reproductive System) कहते हैं। इसका मुख्य कार्य नई संतति उत्पन्न करना तथा मानव जाति की निरंतरता बनाए रखना है। मानव जनन तंत्र पुरुष एवं स्त्री में अलग-अलग होता है तथा दोनों के जनन अंग मिलकर लैंगिक जनन की प्रक्रिया को पूरा करते हैं।

पुरुष जनन तंत्र में शुक्राणुओं का निर्माण होता है, जबकि स्त्री जनन तंत्र में अंडाणुओं का निर्माण तथा निषेचन के बाद भ्रूण का विकास होता है।

मानव जनन तंत्र का महत्व—

(i) नई संतति उत्पन्न करना।

(ii) प्रजाति का अस्तित्व बनाए रखना।

(iii) नर एवं मादा युग्मकों का निर्माण करना।

(iv) निषेचन एवं भ्रूण विकास को संभव बनाना।

27. पुरुष जनन तंत्र (Male Reproductive System) के प्रमुख अंगों के नाम लिखिए।

उत्तर ⇒
पुरुष जनन तंत्र अनेक अंगों से मिलकर बना होता है। इन अंगों का मुख्य कार्य शुक्राणुओं का निर्माण, उनका संग्रह तथा उन्हें स्त्री जनन तंत्र तक पहुँचाना है। पुरुष जनन तंत्र किशोरावस्था के बाद पूर्ण रूप से विकसित होता है।

पुरुष जनन तंत्र के प्रमुख अंग निम्नलिखित हैं—

(i) वृषण (Testes)

(ii) अधिवृषण (Epididymis)

(iii) शुक्रवाहिका (Vas Deferens)

(iv) वीर्य पुटिका (Seminal Vesicle)

(v) प्रोस्टेट ग्रंथि (Prostate Gland)

(vi) मूत्रमार्ग (Urethra)

(vii) शिश्न (Penis)

पुरुष जनन तंत्र के कार्य—

  • शुक्राणुओं का निर्माण करना।
  • शुक्राणुओं का पोषण एवं संग्रह करना।
  • शुक्राणुओं को स्त्री जनन तंत्र तक पहुँचाना।

28. स्त्री जनन तंत्र (Female Reproductive System) के प्रमुख अंगों के नाम लिखिए।

उत्तर ⇒
स्त्री जनन तंत्र का मुख्य कार्य अंडाणुओं का निर्माण करना, निषेचन के लिए उपयुक्त वातावरण प्रदान करना तथा भ्रूण का विकास करना है। यह तंत्र कई महत्वपूर्ण अंगों से मिलकर बना होता है।

स्त्री जनन तंत्र के प्रमुख अंग निम्नलिखित हैं—

(i) अंडाशय (Ovary)

(ii) अंडवाहिनी या फैलोपियन नलिका (Fallopian Tube)

(iii) गर्भाशय (Uterus)

(iv) गर्भाशय ग्रीवा (Cervix)

(v) योनि (Vagina)

स्त्री जनन तंत्र के प्रमुख कार्य—

(i) अंडाणुओं का निर्माण करना।

(ii) निषेचन के लिए स्थान उपलब्ध कराना।

(iii) भ्रूण का पोषण एवं विकास करना।

(iv) प्रसव के समय शिशु को जन्म देना।

29. निषेचन (Fertilization) मनुष्य में कहाँ होता है?

उत्तर ⇒
मनुष्य में निषेचन (Fertilization) सामान्यतः अंडवाहिनी (Fallopian Tube) में होता है। इस प्रक्रिया में पुरुष के शुक्राणु तथा स्त्री के अंडाणु का संयोग होता है। दोनों युग्मकों के मिलने से युग्मनज (Zygote) बनता है।

युग्मनज लगातार विभाजित होकर भ्रूण का निर्माण करता है। इसके बाद भ्रूण गर्भाशय में पहुँचकर उसकी दीवार से जुड़ जाता है और वहीं उसका विकास प्रारम्भ होता है।

निषेचन का महत्व—

(i) युग्मनज का निर्माण होता है।

(ii) नई संतति का विकास प्रारम्भ होता है।

(iii) माता-पिता के गुण संतानों में स्थानांतरित होते हैं।

(iv) मानव जाति की निरंतरता बनी रहती है।

30. गर्भधारण (Pregnancy) क्या है?

उत्तर ⇒
निषेचन के बाद जब युग्मनज (Zygote) गर्भाशय की दीवार में स्थापित होकर भ्रूण के रूप में विकसित होने लगता है, तो इस अवस्था को गर्भधारण (Pregnancy) कहते हैं। मनुष्य में गर्भधारण की अवधि लगभग 9 महीने या 280 दिन होती है।

इस अवधि में भ्रूण का विकास धीरे-धीरे पूर्ण शिशु के रूप में होता है। भ्रूण को माता के शरीर से भोजन एवं ऑक्सीजन अपरा (Placenta) के माध्यम से प्राप्त होती है।

गर्भधारण का महत्व—

(i) भ्रूण का पूर्ण विकास होता है।

(ii) शिशु को पोषण एवं सुरक्षा प्राप्त होती है।

(iii) जन्म तक भ्रूण गर्भाशय में सुरक्षित रहता है।

(iv) मानव जीवन की निरंतरता बनी रहती है.

31. अपरा (Placenta) क्या है? इसके प्रमुख कार्य लिखिए।

उत्तर ⇒
अपरा (Placenta) एक विशेष अस्थायी अंग (Temporary Organ) है, जो गर्भावस्था के दौरान माता एवं भ्रूण के बीच विकसित होता है। यह गर्भाशय की दीवार से जुड़ा रहता है तथा गर्भनाल (Umbilical Cord) के माध्यम से भ्रूण से जुड़ा होता है। अपरा के द्वारा माता एवं भ्रूण के बीच पोषक पदार्थों, ऑक्सीजन तथा अपशिष्ट पदार्थों का आदान-प्रदान होता है।

अपरा के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—

(i) माता के रक्त से भ्रूण को ऑक्सीजन पहुँचाना।

(ii) भ्रूण को भोजन एवं आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराना।

(iii) भ्रूण से कार्बन डाइऑक्साइड एवं अपशिष्ट पदार्थों को माता के रक्त में पहुँचाना।

(iv) भ्रूण की सुरक्षा करना।

(v) गर्भावस्था के लिए आवश्यक कुछ हार्मोनों का स्राव करना।

इस प्रकार अपरा भ्रूण के विकास एवं पोषण के लिए अत्यंत आवश्यक अंग है।

32. गर्भनाल (Umbilical Cord) क्या है? इसका क्या कार्य है?

उत्तर ⇒
गर्भनाल (Umbilical Cord) एक नलिकानुमा संरचना है, जो विकसित हो रहे भ्रूण को अपरा (Placenta) से जोड़ती है। इसके भीतर रक्त वाहिकाएँ होती हैं, जिनके माध्यम से माता एवं भ्रूण के बीच पदार्थों का आदान-प्रदान होता है।

गर्भनाल भ्रूण को तब तक पोषण एवं ऑक्सीजन उपलब्ध कराती है, जब तक उसका जन्म नहीं हो जाता।

गर्भनाल के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—

(i) भ्रूण तक ऑक्सीजन पहुँचाना।

(ii) भ्रूण को भोजन एवं पोषक तत्व उपलब्ध कराना।

(iii) भ्रूण से अपशिष्ट पदार्थों को अपरा तक पहुँचाना।

(iv) माता एवं भ्रूण के बीच पदार्थों का आदान-प्रदान कराना।

(v) भ्रूण के समुचित विकास में सहायता करना।

33. जनसंख्या नियंत्रण की आवश्यकता क्यों है?

उत्तर ⇒
वर्तमान समय में जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। यदि जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो भोजन, जल, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी हो सकती है। इसलिए जनसंख्या नियंत्रण प्रत्येक देश के विकास के लिए आवश्यक है।

छोटा एवं सुखी परिवार समाज तथा राष्ट्र दोनों के लिए लाभदायक होता है।

जनसंख्या नियंत्रण का महत्व निम्नलिखित है—

(i) प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग होता है।

(ii) बेरोजगारी एवं गरीबी में कमी आती है।

(iii) सभी लोगों को बेहतर शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलती हैं।

(iv) पर्यावरण संरक्षण में सहायता मिलती है।

(v) जीवन स्तर में सुधार होता है।

34. गर्भनिरोधक (Contraceptive) क्या हैं?

उत्तर ⇒
गर्भधारण को रोकने अथवा परिवार नियोजन के उद्देश्य से उपयोग किए जाने वाले साधनों एवं विधियों को गर्भनिरोधक (Contraceptives) कहते हैं। इनका उपयोग अनचाहे गर्भ से बचने तथा परिवार को सीमित रखने के लिए किया जाता है।

गर्भनिरोधक साधनों के उपयोग से माता एवं शिशु दोनों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है तथा जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण किया जा सकता है।

गर्भनिरोधक के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं—

(i) प्राकृतिक विधियाँ।

(ii) अवरोधक विधियाँ (जैसे—कंडोम)।

(iii) रासायनिक विधियाँ।

(iv) हार्मोनल गोलियाँ।

(v) शल्य चिकित्सा (नसबंदी)।

35. परिवार नियोजन (Family Planning) क्या है? इसका महत्व लिखिए।

उत्तर ⇒
परिवार की आवश्यकताओं एवं आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए बच्चों की संख्या एवं उनके जन्म के बीच उचित अंतर रखने की प्रक्रिया को परिवार नियोजन (Family Planning) कहते हैं। इसका उद्देश्य छोटा, स्वस्थ एवं सुखी परिवार बनाना है।

परिवार नियोजन से माता एवं बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार होता है तथा परिवार का आर्थिक एवं सामाजिक विकास भी बेहतर होता है।

परिवार नियोजन का महत्व निम्नलिखित है—

(i) जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण होता है।

(ii) माता एवं शिशु का स्वास्थ्य अच्छा रहता है।

(iii) परिवार का आर्थिक बोझ कम होता है।

(iv) बच्चों का उचित पालन-पोषण एवं शिक्षा संभव होती है।

(v) देश के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में सहायता मिलती है।

(vi) जीवन स्तर में सुधार होता है।

36. गर्भनिरोधक उपायों के प्रमुख प्रकार लिखिए।

उत्तर ⇒
अनचाहे गर्भधारण को रोकने तथा परिवार नियोजन को सफल बनाने के लिए जिन विभिन्न उपायों का उपयोग किया जाता है, उन्हें गर्भनिरोधक उपाय (Contraceptive Methods) कहते हैं। इन उपायों का उद्देश्य बच्चों के जन्म के बीच उचित अंतर रखना, माता एवं शिशु के स्वास्थ्य की रक्षा करना तथा जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना है।

गर्भनिरोधक उपायों के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं—

(i) प्राकृतिक विधियाँ – सुरक्षित अवधि (Safe Period), स्तनपान अवधि आदि।

(ii) अवरोधक विधियाँ – कंडोम, डायाफ्राम आदि।

(iii) रासायनिक विधियाँ – शुक्राणुनाशी क्रीम एवं जैली।

(iv) हार्मोनल विधियाँ – गर्भनिरोधक गोलियाँ एवं हार्मोन इंजेक्शन।

(v) गर्भाशय अंतःस्थापित युक्तियाँ (IUCD) – जैसे कॉपर-टी (Copper-T)।

(vi) शल्य चिकित्सा (Surgical Methods) – पुरुषों में नसबंदी (Vasectomy) तथा महिलाओं में नलिका बंधन (Tubectomy)।

37. कंडोम (Condom) के क्या लाभ हैं?

उत्तर ⇒
कंडोम एक सरल, सुरक्षित तथा प्रभावी गर्भनिरोधक साधन है। यह पुरुषों द्वारा उपयोग किया जाने वाला अवरोधक (Barrier) गर्भनिरोधक है, जो शुक्राणुओं को स्त्री जनन तंत्र में प्रवेश करने से रोकता है।

कंडोम के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—

(i) अनचाहे गर्भधारण से बचाव करता है।

(ii) एचआईवी/एड्स (HIV/AIDS) तथा अन्य यौन संचारित रोगों (STDs) से सुरक्षा प्रदान करता है।

(iii) इसका उपयोग सरल एवं सुरक्षित है।

(iv) इसके उपयोग से शरीर पर कोई विशेष दुष्प्रभाव नहीं पड़ता।

(v) यह आसानी से उपलब्ध एवं कम खर्चीला गर्भनिरोधक साधन है।

38. वासेक्टॉमी (Vasectomy) तथा ट्यूबेक्टॉमी (Tubectomy) में अंतर लिखिए।

वासेक्टॉमी (Vasectomy)ट्यूबेक्टॉमी (Tubectomy)
(i) यह पुरुषों में की जाने वाली नसबंदी है।(i) यह महिलाओं में की जाने वाली नसबंदी है।
(ii) इसमें शुक्रवाहिका (Vas Deferens) को काटकर बाँध दिया जाता है।(ii) इसमें अंडवाहिनी (Fallopian Tube) को काटकर बाँध दिया जाता है।
(iii) इससे शुक्राणु बाहर नहीं निकल पाते।(iii) इससे अंडाणु एवं शुक्राणु का मिलन नहीं हो पाता।
(iv) यह स्थायी गर्भनिरोधक विधि है।(iv) यह भी स्थायी गर्भनिरोधक विधि है।

39. किशोरावस्था (Adolescence) क्या है? इस अवस्था में होने वाले प्रमुख परिवर्तन लिखिए।

उत्तर ⇒
बाल्यावस्था और वयस्कावस्था के बीच की संक्रमण अवस्था को किशोरावस्था (Adolescence) कहते हैं। सामान्यतः यह अवस्था लगभग 11 से 19 वर्ष की आयु के बीच होती है। इस समय शरीर में हार्मोनों के प्रभाव से अनेक शारीरिक, मानसिक तथा भावनात्मक परिवर्तन होने लगते हैं।

किशोरावस्था में होने वाले प्रमुख परिवर्तन निम्नलिखित हैं—

(i) शरीर की लंबाई एवं वजन में तेजी से वृद्धि होती है।

(ii) जनन अंगों का पूर्ण विकास होने लगता है।

(iii) लड़कों में दाढ़ी-मूँछ निकलने लगती है तथा आवाज भारी हो जाती है।

(iv) लड़कियों में स्तनों का विकास होता है तथा मासिक धर्म प्रारम्भ हो जाता है।

(v) मानसिक एवं भावनात्मक परिवर्तन भी दिखाई देते हैं।

(vi) प्रजनन क्षमता का विकास होने लगता है।

40. ‘जीव जनन कैसे करते हैं’ अध्याय का निष्कर्ष लिखिए।

उत्तर ⇒
जनन प्रत्येक जीव का एक आवश्यक जैविक गुण है, जिसके द्वारा वह अपने समान नई संतति उत्पन्न करता है। इसी प्रक्रिया के कारण किसी भी प्रजाति का अस्तित्व बना रहता है तथा जीवन की निरंतरता बनी रहती है। जीवों में मुख्यतः अलैंगिक जनन एवं लैंगिक जनन दो प्रकार की जनन प्रक्रियाएँ पाई जाती हैं। अलैंगिक जनन सरल एवं तीव्र होता है, जबकि लैंगिक जनन से संतानों में आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है, जो विकास (Evolution) का आधार है।

मनुष्य तथा पुष्पीय पौधों में लैंगिक जनन की प्रक्रिया सुविकसित होती है। इसके साथ ही परिवार नियोजन एवं गर्भनिरोधक उपाय स्वस्थ परिवार, मातृ-शिशु स्वास्थ्य तथा जनसंख्या नियंत्रण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। अतः जनन केवल नई संतति उत्पन्न करने की प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि पृथ्वी पर जीवन के संरक्षण एवं विकास का आधार भी है।

More Class 10 Science Revision Notes

Chapter 1: रासायनिक अभिक्रिया और समीकरण
Chapter 2: अम्ल, क्षार और लवण
Chapter 3: धातु और अधातु
Chapter 4: कार्बन और उसके यौगिक
Chapter 5: तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण
Chapter 6: जैव प्रक्रम
Chapter 7: नियंत्रण और समन्वय
Chapter 8: जीव जनन कैसे करते हैं?
Chapter 9: आनुवंशिकी और जैव विकास
Chapter 10: प्रकाश : परावर्तन और अपवर्तन
Chapter 11: मानव नेत्र और रंग-बिरंगा संसार
Chapter 12: विद्युत्
Chapter 13: विद्युतधारा के चुम्बकीय प्रभाव
Chapter 14: ऊर्जा के स्रोत
Chapter 15: हमारा पर्यावरण
Chapter 16: प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन

Class 10 Notes by Subject

Mathematics
Science
Social Science
English
Hindi (Course A/B)
Sanskrit
Urdu
Disclaimer: If you are the copyright owner of any material featured on this page and wish to request its removal, please contact us at contact@sarkaridiary.in. We will review and respond to your request promptly.

Latest Updates