Class 10 Science: प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन

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Chapter Overview

Class10
SubjectScience
Chapter Nameप्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन
Resource TypeRevision Notes
SyllabusNCERT
Suitable ForCBSE, JAC and other state boards

प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन Revision Notes

1. प्राकृतिक संसाधन (Natural Resources) क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर ⇒
प्रकृति से प्राप्त वे सभी पदार्थ, ऊर्जा स्रोत एवं प्राकृतिक साधन, जिनका उपयोग मनुष्य तथा अन्य जीव अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए करते हैं, प्राकृतिक संसाधन (Natural Resources) कहलाते हैं। ये संसाधन बिना किसी मानवीय निर्माण के प्रकृति द्वारा उपलब्ध कराए जाते हैं। पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व तथा मानव सभ्यता के विकास में प्राकृतिक संसाधनों की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है।

प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग भोजन, वस्त्र, आवास, उद्योग, परिवहन, कृषि तथा ऊर्जा उत्पादन जैसे अनेक कार्यों में किया जाता है। कुछ संसाधन सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं, इसलिए उनका विवेकपूर्ण उपयोग करना आवश्यक है। यदि इनका अंधाधुंध दोहन किया जाए, तो भविष्य में इनकी कमी हो सकती है।

प्राकृतिक संसाधनों के प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं—

(i) वायु (Air)

(ii) जल (Water)

(iii) मिट्टी (Soil)

(iv) वन (Forest)

(v) खनिज (Minerals)

(vi) कोयला एवं पेट्रोलियम

(vii) प्राकृतिक गैस

प्राकृतिक संसाधनों का महत्व—

(i) मानव जीवन की मूल आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं।

(ii) कृषि एवं उद्योगों का आधार हैं।

(iii) ऊर्जा के प्रमुख स्रोत हैं।

(iv) आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

(v) पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता बनाए रखते हैं।

2. प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण क्यों आवश्यक है?

उत्तर ⇒
प्राकृतिक संसाधन प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं। इनका उपयोग मनुष्य हजारों वर्षों से करता आ रहा है, लेकिन वर्तमान समय में बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिकीकरण तथा आधुनिक तकनीक के कारण इनका अत्यधिक दोहन किया जा रहा है। अनेक संसाधन जैसे कोयला, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं। यदि इनका उपयोग बिना योजना के किया गया, तो भविष्य की पीढ़ियों के लिए इनकी उपलब्धता संकट में पड़ सकती है।

प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण केवल वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए भी आवश्यक है। संसाधनों का संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग ही सतत विकास (Sustainable Development) का आधार है।

प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता निम्नलिखित है—

(i) संसाधनों की उपलब्धता भविष्य के लिए बनी रहती है।

(ii) पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है।

(iii) जैव विविधता का संरक्षण होता है।

(iv) प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है।

(v) सतत विकास को बढ़ावा मिलता है।

3. प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण किस प्रकार किया जा सकता है?

उत्तर ⇒
प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण एक सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए सरकार, समाज तथा प्रत्येक नागरिक को मिलकर कार्य करना चाहिए। संसाधनों का आवश्यकता अनुसार उपयोग करना, उनका दुरुपयोग रोकना तथा वैकल्पिक संसाधनों को अपनाना संरक्षण के प्रमुख उपाय हैं।

आज जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण, वृक्षारोपण तथा पुनर्चक्रण (Recycling) जैसे उपायों के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं—

(i) संसाधनों का मितव्ययी एवं विवेकपूर्ण उपयोग करना।

(ii) अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना।

(iii) वर्षा जल का संग्रहण करना।

(iv) ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग बढ़ाना।

(v) जल, बिजली एवं ईंधन की बचत करना।

(vi) पुनः उपयोग (Reuse) एवं पुनर्चक्रण (Recycle) को अपनाना।

(vii) पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना।

4. संसाधनों के दीर्घकालीन (Long-term) उपयोग के लिए बनाई गई योजनाओं के क्या लाभ हैं?

उत्तर ⇒
प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग के लिए यदि योजनाएँ दीर्घकालीन दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर बनाई जाएँ, तो संसाधनों का संतुलित उपयोग संभव होता है। ऐसी योजनाओं का उद्देश्य केवल वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति करना नहीं होता, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी संसाधनों को सुरक्षित रखना होता है।

दीर्घकालीन योजनाओं में पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों का पुनर्भरण (Replenishment), जैव विविधता का संरक्षण तथा आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

दीर्घकालीन योजनाओं के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—

(i) प्राकृतिक संसाधनों का लंबे समय तक उपयोग संभव होता है।

(ii) पर्यावरणीय क्षति कम होती है।

(iii) भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधन सुरक्षित रहते हैं।

(iv) जैव विविधता का संरक्षण होता है।

(v) सतत एवं संतुलित विकास को बढ़ावा मिलता है।

(vi) आर्थिक एवं सामाजिक विकास में स्थिरता आती है।

5. अल्पकालीन (Short-term) संसाधन उपयोग योजनाओं के क्या लाभ हैं?

उत्तर ⇒
कुछ परिस्थितियों में प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग के लिए अल्पकालीन योजनाएँ भी बनाई जाती हैं। इनका उद्देश्य सीमित समय में आवश्यकताओं की पूर्ति करना तथा संसाधनों का नियंत्रित उपयोग सुनिश्चित करना होता है। यदि इन योजनाओं को वैज्ञानिक ढंग से लागू किया जाए, तो पर्यावरण पर कम दुष्प्रभाव पड़ता है।

अल्पकालीन योजनाओं में संसाधनों के पुनर्भरण के लिए पर्याप्त अवसर मिलता है तथा पर्यावरणीय क्षति को नियंत्रित करना अपेक्षाकृत आसान होता है।

अल्पकालीन योजनाओं के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—

(i) संसाधनों पर अनावश्यक दबाव कम पड़ता है।

(ii) पर्यावरण को कम नुकसान पहुँचता है।

(iii) संसाधनों के पुनः पूरण के लिए पर्याप्त समय मिलता है।

(iv) पर्यावरणीय प्रभावों का मूल्यांकन करना आसान होता है।

(v) आवश्यकता के अनुसार योजनाओं में परिवर्तन किया जा सकता है।

(vi) स्थानीय संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव होता है।

6. नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy) क्या है? इसके लाभ एवं हानियाँ लिखिए।

उत्तर ⇒
परमाणु के नाभिक के विखंडन (Nuclear Fission) अथवा संलयन (Nuclear Fusion) से प्राप्त होने वाली ऊर्जा को नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy) कहते हैं। वर्तमान समय में मुख्य रूप से यूरेनियम (Uranium) जैसे रेडियोधर्मी तत्वों के नाभिकीय विखंडन से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न की जाती है। जब यूरेनियम के नाभिक पर धीमे न्यूट्रॉन की बमबारी की जाती है, तो वह दो छोटे नाभिकों में टूट जाता है और अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है।

नाभिकीय ऊर्जा का उपयोग बिजली उत्पादन, चिकित्सा, वैज्ञानिक अनुसंधान तथा अंतरिक्ष कार्यक्रमों में किया जाता है। यद्यपि यह ऊर्जा अत्यधिक प्रभावी होती है, फिर भी इसके उपयोग में विशेष सावधानी आवश्यक होती है।

नाभिकीय ऊर्जा के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—

(i) बहुत कम ईंधन से अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है।

(ii) बिजली उत्पादन में उपयोगी है।

(iii) जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होती है।

(iv) वायु प्रदूषण अपेक्षाकृत कम होता है।

इसकी प्रमुख हानियाँ—

(i) रेडियोधर्मी विकिरण का खतरा रहता है।

(ii) दुर्घटना होने पर व्यापक जन-धन की हानि हो सकती है।

(iii) रेडियोधर्मी अपशिष्टों का सुरक्षित निपटान कठिन होता है।

(iv) नाभिकीय संयंत्रों की स्थापना में अत्यधिक खर्च होता है।

7. जीवमंडल (Biosphere) क्या है?

उत्तर ⇒
पृथ्वी का वह भाग जहाँ जीवन संभव है तथा जहाँ सभी प्रकार के जीव-जंतु, पौधे एवं सूक्ष्मजीव पाए जाते हैं, जीवमंडल (Biosphere) कहलाता है। यह पृथ्वी के स्थलमंडल (Lithosphere), जलमंडल (Hydrosphere) तथा वायुमंडल (Atmosphere) का संयुक्त जीवन क्षेत्र है।

जीवमंडल अनेक छोटे-बड़े पारिस्थितिक तंत्रों (Ecosystems) से मिलकर बना है। इसमें सभी जीव एक-दूसरे तथा अपने वातावरण के साथ निरंतर क्रिया-प्रतिक्रिया करते रहते हैं। जीवमंडल ही पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता का आधार है।

जीवमंडल का महत्व निम्नलिखित है—

(i) सभी जीवों का प्राकृतिक आवास है।

(ii) जैव विविधता का संरक्षण करता है।

(iii) पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखता है।

(iv) ऊर्जा प्रवाह एवं पोषक तत्वों के चक्र को संचालित करता है।

(v) पृथ्वी पर जीवन को संभव बनाता है।

8. वन उत्पाद (Forest Products) क्या हैं? किन्हीं दो वन उत्पादों के नाम तथा उनके उपयोग लिखिए।

उत्तर ⇒
वनों से प्राप्त होने वाले सभी उपयोगी पदार्थों को वन उत्पाद (Forest Products) कहा जाता है। ये उत्पाद मानव जीवन, उद्योगों तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। वनों से लकड़ी के अतिरिक्त औषधियाँ, गोंद, रबर, फल, शहद, तेंदू पत्ता, बाँस आदि अनेक उपयोगी वस्तुएँ प्राप्त होती हैं।

वन उत्पाद अनेक उद्योगों के लिए कच्चे माल का कार्य करते हैं तथा लाखों लोगों को रोजगार भी प्रदान करते हैं।

दो प्रमुख वन उत्पाद एवं उनके उपयोग—

(i) तेंदू पत्ता – बीड़ी उद्योग में उपयोग किया जाता है।

(ii) बाँस एवं यूकेलिप्टस – कागज उद्योग में कच्चे माल के रूप में उपयोग किए जाते हैं।

वन उत्पादों का महत्व—

(i) ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं।

(ii) अनेक उद्योगों का आधार हैं।

(iii) रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं।

(iv) औषधियों के निर्माण में उपयोगी हैं।

9. रेडियोधर्मिता (Radioactivity) क्या है?

उत्तर ⇒
कुछ विशेष तत्वों के अस्थिर परमाणु नाभिक स्वतः टूटकर अल्फा (α), बीटा (β) तथा गामा (γ) किरणों का उत्सर्जन करते हैं। इस प्राकृतिक प्रक्रिया को रेडियोधर्मिता (Radioactivity) कहते हैं। यूरेनियम, रेडियम तथा थोरियम जैसे तत्व स्वाभाविक रूप से रेडियोधर्मी होते हैं।

रेडियोधर्मिता का उपयोग चिकित्सा, विद्युत उत्पादन, कृषि एवं वैज्ञानिक अनुसंधान में किया जाता है। लेकिन अत्यधिक रेडियोधर्मी विकिरण मानव शरीर के लिए अत्यंत हानिकारक होते हैं।

रेडियोधर्मिता के प्रमुख उपयोग—

(i) कैंसर के उपचार में।

(ii) नाभिकीय ऊर्जा उत्पादन में।

(iii) वैज्ञानिक अनुसंधान में।

(iv) कृषि एवं खाद्य संरक्षण में।

इसके दुष्प्रभाव—

(i) कोशिकाओं को क्षति पहुँचती है।

(ii) कैंसर का खतरा बढ़ता है।

(iii) आनुवंशिक विकार उत्पन्न हो सकते हैं।

(iv) पर्यावरण प्रदूषित हो सकता है।

10. जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) क्या हैं? इनके प्रमुख उपयोग एवं हानियाँ लिखिए।

उत्तर ⇒
लाखों-करोड़ों वर्ष पूर्व मृत पौधों एवं जीवों के अवशेषों के उच्च ताप एवं दाब के प्रभाव से बनने वाले ईंधनों को जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) कहते हैं। कोयला, पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस इसके प्रमुख उदाहरण हैं। ये ऊर्जा के अनवीकरणीय (Non-Renewable) स्रोत हैं, क्योंकि इनके बनने में लाखों वर्ष लगते हैं।

वर्तमान समय में जीवाश्म ईंधनों का उपयोग परिवहन, उद्योग, बिजली उत्पादन एवं घरेलू कार्यों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इनके अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण प्रदूषण एवं वैश्विक ऊष्मीकरण जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।

जीवाश्म ईंधनों के प्रमुख उपयोग—

(i) बिजली उत्पादन में।

(ii) वाहनों के ईंधन के रूप में।

(iii) उद्योगों में ऊर्जा स्रोत के रूप में।

(iv) घरेलू ईंधन के रूप में।

जीवाश्म ईंधनों की प्रमुख हानियाँ—

(i) ये सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं।

(ii) इनके दहन से वायु प्रदूषण होता है।

(iii) कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती है।

(iv) वैश्विक ऊष्मीकरण एवं जलवायु परिवर्तन को बढ़ावा मिलता है।

11. पर्यावरण को बचाने के लिए 3R (Reduce, Reuse, Recycle) का क्या महत्व है?

उत्तर ⇒
प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के लिए 3R सिद्धांत (Reduce, Reuse, Recycle) को सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है। इसका उद्देश्य संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना, कचरे की मात्रा कम करना तथा उपयोग की गई वस्तुओं का पुनः प्रयोग एवं पुनर्चक्रण करना है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में 3R सिद्धांत को अपनाए, तो प्राकृतिक संसाधनों की बचत के साथ-साथ पर्यावरण को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।

3R का अर्थ निम्नलिखित है—

(i) Reduce (कम उपयोग करें) – आवश्यकता के अनुसार ही वस्तुओं का उपयोग करें।

(ii) Reuse (पुनः उपयोग करें) – उपयोग की गई वस्तुओं को दोबारा प्रयोग करें।

(iii) Recycle (पुनर्चक्रण करें) – पुराने पदार्थों से नई उपयोगी वस्तुएँ तैयार करें।

3R सिद्धांत के प्रमुख लाभ—

(i) प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होता है।

(ii) कचरे की मात्रा कम होती है।

(iii) पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रित होता है।

(iv) ऊर्जा एवं धन की बचत होती है।

(v) सतत विकास (Sustainable Development) को बढ़ावा मिलता है।

12. मानव की कौन-कौन सी गतिविधियाँ गंगा नदी को प्रदूषित करती हैं?

उत्तर ⇒
गंगा भारत की सबसे महत्वपूर्ण एवं पवित्र नदियों में से एक है, लेकिन बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिकीकरण तथा मानव की लापरवाही के कारण इसका जल लगातार प्रदूषित होता जा रहा है। गंगा नदी में घरेलू कचरा, औद्योगिक अपशिष्ट तथा धार्मिक गतिविधियों से उत्पन्न अवशेषों के मिलने से जल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

जल प्रदूषण के कारण गंगा में रहने वाले जलीय जीवों का जीवन संकट में पड़ गया है तथा मानव स्वास्थ्य पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

गंगा नदी को प्रदूषित करने वाली प्रमुख गतिविधियाँ निम्नलिखित हैं—

(i) नदी में स्नान एवं कपड़े धोना।

(ii) घरेलू गंदे जल एवं सीवेज का प्रवाह।

(iii) उद्योगों से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट।

(iv) मृत व्यक्तियों की राख एवं शवों का विसर्जन।

(v) प्लास्टिक एवं अन्य ठोस कचरे का नदी में फेंकना।

(vi) कृषि क्षेत्रों से रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का बहकर नदी में पहुँचना।

13. ग्रीनहाउस प्रभाव (Greenhouse Effect) क्या है? इसके दुष्प्रभाव लिखिए।

उत्तर ⇒
पृथ्वी के वायुमंडल में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), मीथेन (CH₄), नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) तथा जलवाष्प जैसी गैसें सूर्य से आने वाली ऊष्मा को अवशोषित करके उसे पृथ्वी के वायुमंडल में रोक लेती हैं। इस प्रक्रिया को ग्रीनहाउस प्रभाव (Greenhouse Effect) कहते हैं।

सामान्य मात्रा में ग्रीनहाउस प्रभाव पृथ्वी का तापमान संतुलित बनाए रखता है, लेकिन इन गैसों की मात्रा अधिक होने पर पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ने लगता है, जिसे वैश्विक ऊष्मीकरण (Global Warming) कहा जाता है।

ग्रीनहाउस प्रभाव के प्रमुख दुष्प्रभाव—

(i) पृथ्वी का औसत तापमान बढ़ जाता है।

(ii) हिमनद (Glaciers) तेजी से पिघलने लगते हैं।

(iii) समुद्र का जलस्तर बढ़ जाता है।

(iv) बाढ़ एवं सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ सकती हैं।

(v) कृषि उत्पादन प्रभावित होता है।

(vi) मानव एवं जीव-जंतुओं के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

14. पर्यावरण संरक्षण के प्रमुख उपाय लिखिए।

उत्तर ⇒
पर्यावरण संरक्षण का अर्थ है प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना तथा प्रदूषण को नियंत्रित करके पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना। वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण, वनों की कटाई एवं जलवायु परिवर्तन को देखते हुए पर्यावरण संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है।

यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे सकारात्मक परिवर्तन करे, तो पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।

पर्यावरण संरक्षण के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं—

(i) अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना।

(ii) जल एवं बिजली की बचत करना।

(iii) प्लास्टिक का उपयोग कम करना।

(iv) 3R सिद्धांत (Reduce, Reuse, Recycle) अपनाना।

(v) सार्वजनिक परिवहन एवं CNG जैसे स्वच्छ ईंधनों का उपयोग करना।

(vi) उद्योगों के अपशिष्टों का वैज्ञानिक ढंग से निपटान करना।

(vii) लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना।

15. जीवाश्म ईंधनों का विवेकपूर्ण उपयोग क्यों आवश्यक है?

उत्तर ⇒
जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस ऊर्जा के प्रमुख स्रोत हैं, लेकिन ये अनवीकरणीय संसाधन (Non-Renewable Resources) हैं। इनका निर्माण लाखों वर्षों में होता है, जबकि वर्तमान समय में इनका उपयोग अत्यधिक तेजी से किया जा रहा है। यदि इनका अनियंत्रित उपयोग जारी रहा, तो भविष्य में इनकी कमी हो सकती है।

इसके अतिरिक्त, जीवाश्म ईंधनों के दहन से कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड एवं अन्य प्रदूषक गैसें निकलती हैं, जो वायु प्रदूषण एवं वैश्विक ऊष्मीकरण का प्रमुख कारण हैं।

जीवाश्म ईंधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता निम्नलिखित है—

(i) ये सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं।

(ii) भविष्य की पीढ़ियों के लिए इन्हें सुरक्षित रखना आवश्यक है।

(iii) वायु प्रदूषण कम किया जा सकता है।

(iv) वैश्विक ऊष्मीकरण को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है।

(v) ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा मिलता है।

(vi) पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास संभव होता है.

16. बाघ संरक्षण योजना (Project Tiger) क्या है? इसका उद्देश्य लिखिए।

उत्तर ⇒
भारत में बाघों की घटती संख्या को देखते हुए भारत सरकार ने बाघ संरक्षण योजना (Project Tiger) प्रारम्भ की। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बाघों तथा उनके प्राकृतिक आवास (Habitat) का संरक्षण करना है। वनों की अंधाधुंध कटाई, अवैध शिकार तथा प्राकृतिक आवास के नष्ट होने के कारण बाघों की संख्या लगातार घट रही थी। इसलिए इस योजना के अंतर्गत देश के विभिन्न भागों में टाइगर रिजर्व (Tiger Reserve) स्थापित किए गए, जहाँ बाघों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाता है।

बाघ केवल एक वन्य जीव ही नहीं, बल्कि वन पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि बाघों की संख्या कम हो जाती है, तो खाद्य श्रृंखला तथा जैव विविधता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

बाघ संरक्षण योजना के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—

(i) बाघों की संख्या में वृद्धि करना।

(ii) उनके प्राकृतिक आवास का संरक्षण करना।

(iii) अवैध शिकार पर रोक लगाना।

(iv) जैव विविधता की रक्षा करना।

(v) वन पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखना।

17. वन उत्पादों के प्रमुख दावेदार कौन-कौन हैं?

उत्तर ⇒
वनों से प्राप्त होने वाले विभिन्न संसाधनों एवं वन उत्पादों पर अनेक लोगों एवं संस्थाओं का अधिकार एवं हित जुड़ा होता है। इन्हें वन उत्पादों के दावेदार (Stakeholders) कहा जाता है। प्रत्येक दावेदार वन संसाधनों का उपयोग अलग-अलग उद्देश्यों के लिए करता है। इसलिए वनों के संरक्षण एवं उपयोग के समय सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखना आवश्यक होता है।

वन उत्पादों के प्रमुख दावेदार निम्नलिखित हैं—

(i) वनों के अंदर एवं आसपास रहने वाले स्थानीय लोग, जो ईंधन, चारा, फल एवं लकड़ी के लिए वन पर निर्भर रहते हैं।

(ii) वन विभाग, जो वनों का संरक्षण एवं प्रबंधन करता है।

(iii) उद्योगपति, जो कागज, फर्नीचर, बीड़ी तथा अन्य उद्योगों के लिए वन उत्पादों का उपयोग करते हैं।

(iv) पर्यावरणविद् एवं वन्यजीव संरक्षण संगठन, जो जैव विविधता एवं प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए कार्य करते हैं।

वन उत्पादों के संरक्षण का महत्व—

(i) स्थानीय लोगों की आजीविका सुरक्षित रहती है।

(ii) जैव विविधता का संरक्षण होता है।

(iii) वन संसाधनों का संतुलित उपयोग संभव होता है।

(iv) पर्यावरणीय संतुलन बना रहता है।

18. घुमंतु चरवाहों को राष्ट्रीय उद्यानों में प्रवेश से रोकने का क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर ⇒
राष्ट्रीय उद्यानों एवं संरक्षित वनों में जैव विविधता की रक्षा के उद्देश्य से कई स्थानों पर घुमंतु चरवाहों के प्रवेश पर रोक लगाई गई। प्रारम्भ में यह माना गया कि इससे वनों का संरक्षण बेहतर होगा, लेकिन बाद में यह देखा गया कि कुछ क्षेत्रों में इसके विपरीत प्रभाव भी पड़े।

जहाँ पहले पशु नियमित रूप से घास चरते थे, वहाँ घास अत्यधिक लंबी होकर जमीन पर गिरने लगी। इसके कारण नई घास का विकास प्रभावित हुआ तथा कई स्थानों पर वनस्पतियों की प्राकृतिक वृद्धि बाधित हो गई। इससे यह स्पष्ट हुआ कि स्थानीय समुदायों की पारंपरिक भूमिका भी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

इसके प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं—

(i) घास अत्यधिक बढ़कर भूमि पर गिरने लगी।

(ii) नई घास का विकास प्रभावित हुआ।

(iii) कुछ क्षेत्रों में जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

(iv) स्थानीय समुदायों की भूमिका का महत्व सामने आया।

(v) संरक्षण एवं स्थानीय भागीदारी दोनों की आवश्यकता महसूस हुई।

19. अमृता देवी बिश्नोई पुरस्कार किसकी स्मृति में दिया जाता है?

उत्तर ⇒
अमृता देवी बिश्नोई पुरस्कार पर्यावरण एवं वन संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों या संस्थाओं को प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार अमृता देवी बिश्नोई की स्मृति में दिया जाता है, जिन्होंने वर्ष 1731 में राजस्थान के खेजड़ली गाँव में खेजड़ी वृक्षों की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था।

अमृता देवी के साथ 363 बिश्नोई पुरुषों एवं महिलाओं ने भी वृक्षों की रक्षा करते हुए अपना जीवन न्योछावर कर दिया। उनका यह बलिदान विश्व इतिहास में पर्यावरण संरक्षण का एक अद्वितीय उदाहरण माना जाता है।

इस पुरस्कार का महत्व निम्नलिखित है—

(i) पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना।

(ii) वन एवं वन्यजीव संरक्षण को प्रोत्साहित करना।

(iii) प्रकृति संरक्षण में योगदान देने वालों का सम्मान करना।

(iv) समाज को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करना।

20. गंगा नदी का प्रदूषण (Pollution of Ganga River) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर ⇒
गंगा भारत की सबसे महत्वपूर्ण एवं पवित्र नदियों में से एक है। इसका उद्गम हिमालय के गंगोत्री हिमनद से होता है और यह लगभग 2500 किलोमीटर की यात्रा करके बंगाल की खाड़ी में मिलती है। करोड़ों लोगों की आस्था एवं जीवन इस नदी से जुड़ा हुआ है, लेकिन वर्तमान समय में गंगा गंभीर प्रदूषण की समस्या का सामना कर रही है।

घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट, कृषि रसायन, धार्मिक गतिविधियाँ तथा ठोस कचरे के कारण गंगा का जल लगातार प्रदूषित हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप जल में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा घटती है तथा जलीय जीवों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

गंगा प्रदूषण के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—

(i) घरेलू गंदे जल एवं सीवेज का प्रवाह।

(ii) उद्योगों से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट।

(iii) मृत व्यक्तियों की राख एवं शवों का विसर्जन।

(iv) प्लास्टिक एवं ठोस कचरे का नदी में फेंकना।

(v) कृषि क्षेत्रों से बहकर आने वाले उर्वरक एवं कीटनाशक।

गंगा प्रदूषण के दुष्प्रभाव—

(i) पेयजल की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

(ii) मछलियों एवं अन्य जलीय जीवों की संख्या घटती है।

(iii) जलजनित रोगों का खतरा बढ़ता है।

(iv) पर्यावरण एवं जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

21. वनों को ‘जैव विविधता के विशिष्ट स्थल (Biodiversity Hotspots)’ क्यों कहा जाता है?

उत्तर ⇒
वन पृथ्वी पर जैव विविधता के सबसे समृद्ध क्षेत्र हैं। यहाँ विभिन्न प्रकार के पौधे, पशु, पक्षी, कीट, कवक, सूक्ष्मजीव तथा अनेक दुर्लभ एवं संकटग्रस्त प्रजातियाँ निवास करती हैं। किसी क्षेत्र में जितनी अधिक जीवों की विभिन्न प्रजातियाँ पाई जाती हैं, वह क्षेत्र जैव विविधता की दृष्टि से उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी कारण वनों को ‘जैव विविधता के विशिष्ट स्थल (Biodiversity Hotspots)’ कहा जाता है।

वन केवल जीव-जंतुओं का आवास ही नहीं हैं, बल्कि जलवायु संतुलन, वर्षा, मिट्टी संरक्षण तथा ऑक्सीजन उत्पादन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि वनों का विनाश होता है, तो अनेक जीवों की प्रजातियाँ विलुप्त हो सकती हैं और पारिस्थितिक संतुलन भी बिगड़ सकता है।

वनों का महत्व निम्नलिखित है—

(i) अनेक जीवों का प्राकृतिक आवास हैं।

(ii) जैव विविधता का संरक्षण करते हैं।

(iii) पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हैं।

(iv) मिट्टी के कटाव को रोकते हैं।

(v) वर्षा एवं जल चक्र को प्रभावित करते हैं।

(vi) ऑक्सीजन प्रदान करते हैं तथा कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करते हैं।

22. संसाधनों के संपोषण (Sustainable Management) के लिए आप अपनी जीवन शैली में कौन-कौन से परिवर्तन करेंगे?

उत्तर ⇒
प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य भी है। यदि हम अपनी दैनिक जीवनशैली में छोटे-छोटे सकारात्मक परिवर्तन करें, तो प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण तथा पर्यावरण की सुरक्षा संभव है। संसाधनों का आवश्यकता के अनुसार उपयोग करना तथा अनावश्यक बर्बादी रोकना सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मैं अपनी जीवनशैली में निम्नलिखित परिवर्तन अपनाऊँगा—

(i) जल एवं बिजली का अनावश्यक उपयोग नहीं करूँगा।

(ii) 3R (Reduce, Reuse, Recycle) सिद्धांत का पालन करूँगा।

(iii) प्लास्टिक का उपयोग कम करूँगा।

(iv) अधिक से अधिक वृक्षारोपण करूँगा।

(v) सार्वजनिक परिवहन अथवा साइकिल का उपयोग करूँगा।

(vi) वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दूँगा।

(vii) जीवाश्म ईंधनों का सीमित उपयोग करूँगा।

(viii) पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करूँगा।

23. पर्यावरण-मित्र (Eco-friendly) बनने के लिए आप अपनी आदतों में क्या परिवर्तन करेंगे?

उत्तर ⇒
पर्यावरण-मित्र वह व्यक्ति होता है, जो अपने दैनिक जीवन में ऐसे कार्य करता है जिससे पर्यावरण को कम-से-कम हानि पहुँचे। वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण एवं प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन को देखते हुए प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनना आवश्यक है।

यदि हम अपनी छोटी-छोटी आदतों में सुधार करें, तो पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

पर्यावरण-मित्र बनने के लिए मैं निम्नलिखित आदतें अपनाऊँगा—

(i) अधिक से अधिक वृक्ष लगाऊँगा।

(ii) पॉलीथीन की जगह कपड़े या जूट के थैले का उपयोग करूँगा।

(iii) जल एवं बिजली की बचत करूँगा।

(iv) कचरे को इधर-उधर नहीं फैलाऊँगा।

(v) प्लास्टिक का उपयोग कम करूँगा।

(vi) स्वच्छ ईंधनों का उपयोग करूँगा।

(vii) सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करूँगा।

(viii) पर्यावरण संरक्षण के प्रति अन्य लोगों को भी प्रेरित करूँगा।

24. प्लास्टिक का पुनर्चक्रण (Recycling) क्या है? क्या इसका पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है?

उत्तर ⇒
उपयोग किए गए प्लास्टिक को एकत्र करके वैज्ञानिक प्रक्रिया द्वारा पुनः उपयोगी वस्तुओं में बदलने की प्रक्रिया को प्लास्टिक का पुनर्चक्रण (Plastic Recycling) कहते हैं। पुनर्चक्रण के माध्यम से प्लास्टिक से नई वस्तुएँ बनाई जाती हैं, जिससे नए प्लास्टिक के उत्पादन की आवश्यकता कम हो जाती है।

हालाँकि प्लास्टिक का पुनर्चक्रण उपयोगी है, लेकिन इसे बार-बार पुनर्चक्रित नहीं किया जा सकता। इसके अतिरिक्त, पुनर्चक्रण की प्रक्रिया में भी कुछ मात्रा में प्रदूषण उत्पन्न हो सकता है। इसलिए पुनर्चक्रण के साथ-साथ प्लास्टिक का उपयोग कम करना भी आवश्यक है।

प्लास्टिक पुनर्चक्रण के प्रमुख लाभ—

(i) प्लास्टिक कचरे की मात्रा कम होती है।

(ii) पर्यावरण प्रदूषण कम होता है।

(iii) प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है।

(iv) ऊर्जा की बचत होती है।

(v) कचरा प्रबंधन आसान हो जाता है।

25. जीवाश्म (Fossils) क्या हैं? जैव विकास के अध्ययन में इनका क्या महत्व है?

उत्तर ⇒
प्राचीन काल के जीवों अथवा पौधों के वे संरक्षित अवशेष, छाप अथवा चिन्ह जो चट्टानों में सुरक्षित रह जाते हैं, जीवाश्म (Fossils) कहलाते हैं। लाखों वर्षों पहले जीवों की मृत्यु के बाद विशेष परिस्थितियों में उनके शरीर के कठोर भाग सुरक्षित रह जाते हैं, जिन्हें जीवाश्म कहा जाता है।

जीवाश्म जैव विकास (Evolution) के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं। इनके अध्ययन से यह पता चलता है कि वर्तमान जीवों का विकास किस प्रकार हुआ तथा प्राचीन जीवों और आधुनिक जीवों के बीच क्या संबंध है।

जीवाश्मों का महत्व निम्नलिखित है—

(i) जैव विकास के प्रमाण प्रदान करते हैं।

(ii) विलुप्त जीवों की जानकारी देते हैं।

(iii) समान पूर्वज (Common Ancestor) का पता चलता है।

(iv) पृथ्वी के प्राचीन इतिहास का अध्ययन संभव होता है।

(v) जीवों के विकासक्रम को समझने में सहायता मिलती है।

26. जल संग्रहण की पारंपरिक व्यवस्था ‘खादिन पद्धति’ क्या है?

उत्तर ⇒
खादिन पद्धति (Khadin System) वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) की एक प्राचीन एवं पारंपरिक विधि है, जिसका विकास मुख्य रूप से राजस्थान के शुष्क एवं मरुस्थलीय क्षेत्रों में हुआ। इस पद्धति में वर्षा के जल को मिट्टी एवं पत्थरों से बने लंबे बाँध (Bund) द्वारा रोककर खेतों में एकत्र किया जाता है। वर्षा समाप्त होने के बाद यह जल धीरे-धीरे भूमि में समा जाता है, जिससे मिट्टी में पर्याप्त नमी बनी रहती है और किसान बिना अतिरिक्त सिंचाई के फसल उगा सकते हैं।

यह प्रणाली जल संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण है तथा भूजल स्तर बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आज भी राजस्थान के अनेक क्षेत्रों में इस पद्धति का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है।

खादिन पद्धति के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—

(i) वर्षा जल का संरक्षण होता है।

(ii) भूजल स्तर में वृद्धि होती है।

(iii) सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहता है।

(iv) मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है।

(v) जल की कमी वाले क्षेत्रों में कृषि को बढ़ावा मिलता है।

27. बड़े बाँधों (Large Dams) का विरोध क्यों किया जाता है?

उत्तर ⇒
बड़े बाँधों का निर्माण सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन तथा बाढ़ नियंत्रण के लिए किया जाता है। यद्यपि इनसे अनेक लाभ प्राप्त होते हैं, फिर भी इनके निर्माण के कारण सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। इसी कारण अनेक वैज्ञानिक, पर्यावरणविद् तथा सामाजिक संगठन बड़े बाँधों का विरोध करते हैं।

बड़े बाँधों के निर्माण से हजारों परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़ते हैं। इसके साथ ही विशाल वन क्षेत्र जलमग्न हो जाते हैं तथा अनेक वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो जाता है।

बड़े बाँधों से होने वाली प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं—

(i) बड़ी संख्या में लोगों का विस्थापन होता है।

(ii) किसानों एवं आदिवासियों की आजीविका प्रभावित होती है।

(iii) वनों एवं जैव विविधता का विनाश होता है।

(iv) निर्माण में अत्यधिक धन खर्च होता है।

(v) नदियों के प्राकृतिक प्रवाह में परिवर्तन आता है।

(vi) पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होता है।

28. यदि हमारे द्वारा उत्पन्न सभी कचरे जैव निम्नीकरणीय हों, तो क्या पर्यावरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒
यदि हमारे द्वारा उत्पन्न सभी कचरे जैव निम्नीकरणीय (Biodegradable) हों, तो उनका अपघटन बैक्टीरिया एवं कवक जैसे सूक्ष्मजीवों द्वारा आसानी से किया जा सकेगा। इससे कचरा लंबे समय तक पर्यावरण में जमा नहीं रहेगा तथा वह पुनः प्राकृतिक चक्र का हिस्सा बन जाएगा। इस प्रकार प्रदूषण की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।

फिर भी यह कहना उचित नहीं होगा कि पर्यावरण पर बिल्कुल कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यदि जैव निम्नीकरणीय कचरे की मात्रा अत्यधिक हो जाए, तो उसके अपघटन के दौरान दुर्गंध, रोग फैलाने वाले सूक्ष्मजीवों की वृद्धि तथा मीथेन जैसी गैसों का उत्सर्जन हो सकता है। इसलिए जैव निम्नीकरणीय कचरे का भी उचित प्रबंधन आवश्यक है।

जैव निम्नीकरणीय कचरे के उचित प्रबंधन के लाभ—

(i) पर्यावरण स्वच्छ रहता है।

(ii) खाद (Compost) बनाई जा सकती है।

(iii) मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है।

(iv) प्रदूषण कम होता है।

(v) प्राकृतिक पोषक चक्र बना रहता है।

29. हमें वन एवं वन्य जीवन का संरक्षण क्यों करना चाहिए?

उत्तर ⇒
वन एवं वन्य जीवन प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं। वन केवल लकड़ी एवं अन्य वन उत्पादों के स्रोत ही नहीं हैं, बल्कि वे जलवायु संतुलन, वर्षा, मिट्टी संरक्षण तथा जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वन्य जीव खाद्य श्रृंखला एवं पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में सहायक होते हैं।

यदि वनों की कटाई तथा वन्य जीवों का अवैध शिकार लगातार होता रहा, तो अनेक प्रजातियाँ विलुप्त हो जाएँगी और पर्यावरणीय संतुलन भी बिगड़ जाएगा। इसलिए वन एवं वन्य जीवन का संरक्षण वर्तमान एवं भविष्य दोनों के लिए आवश्यक है।

वन एवं वन्य जीवन संरक्षण के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—

(i) जैव विविधता का संरक्षण होता है।

(ii) पारिस्थितिक संतुलन बना रहता है।

(iii) जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है।

(iv) अनेक जीवों का प्राकृतिक आवास सुरक्षित रहता है।

(v) भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधन सुरक्षित रहते हैं।

(vi) औषधीय एवं आर्थिक दृष्टि से भी वन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

30. ‘प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन’ अध्याय का निष्कर्ष लिखिए।

उत्तर ⇒
प्राकृतिक संसाधन पृथ्वी पर जीवन के आधार हैं। वायु, जल, मिट्टी, वन, वन्य जीव, खनिज तथा जीवाश्म ईंधन जैसे संसाधन मानव जीवन एवं आर्थिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। लेकिन बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिकीकरण तथा संसाधनों के अनियंत्रित दोहन के कारण इनका अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है। इसलिए इनका वैज्ञानिक, संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग करना आवश्यक है।

सतत विकास (Sustainable Development) की अवधारणा इसी बात पर आधारित है कि वर्तमान पीढ़ी अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति इस प्रकार करे कि भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताएँ प्रभावित न हों। जल संरक्षण, वृक्षारोपण, वर्षा जल संचयन, 3R सिद्धांत (Reduce, Reuse, Recycle), वन एवं वन्य जीव संरक्षण तथा वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रमुख उपाय हैं।

प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक एवं सामाजिक कर्तव्य भी है। यदि हम सभी संसाधनों का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करें, तो पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को भी स्वच्छ एवं समृद्ध प्राकृतिक वातावरण प्राप्त होगा।

More Class 10 Science Revision Notes

Chapter 1: रासायनिक अभिक्रिया और समीकरण
Chapter 2: अम्ल, क्षार और लवण
Chapter 3: धातु और अधातु
Chapter 4: कार्बन और उसके यौगिक
Chapter 5: तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण
Chapter 6: जैव प्रक्रम
Chapter 7: नियंत्रण और समन्वय
Chapter 8: जीव जनन कैसे करते हैं?
Chapter 9: आनुवंशिकी और जैव विकास
Chapter 10: प्रकाश : परावर्तन और अपवर्तन
Chapter 11: मानव नेत्र और रंग-बिरंगा संसार
Chapter 12: विद्युत्
Chapter 13: विद्युतधारा के चुम्बकीय प्रभाव
Chapter 14: ऊर्जा के स्रोत
Chapter 15: हमारा पर्यावरण
Chapter 16: प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन

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