Class 10 Science: मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार
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Chapter Overview
| Class | 10 |
| Subject | Science |
| Chapter Name | मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार
1. दो आँखों की क्या उपयोगिता है?
उत्तर:
दोनों आँखों से किसी वस्तु को देखने के निम्नलिखित लाभ हैं—
(i) वस्तु की दूरी का सही अनुमान लगाया जा सकता है।
(ii) वस्तु की त्रिविमीय (3-D) आकृति का स्पष्ट ज्ञान प्राप्त होता है।
(iii) दोनों आँखें बारी-बारी से क्षणभर के लिए विश्राम करती रहती हैं, जिससे देखने में सुविधा होती है।
2. दूर-दृष्टि दोष (Hypermetropia) से क्या अभिप्राय है? इस दोष का निवारण कैसे किया जाता है?
उत्तर:
दूर-दृष्टि दोष वह नेत्र-दोष है, जिसमें व्यक्ति दूर की वस्तुओं को स्पष्ट देख सकता है, लेकिन निकट की वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख पाता। इस स्थिति में निकट की वस्तु का प्रतिबिंब दृष्टिपटल (रेटिना) के पीछे बनता है।
दोष का निवारण:
इस दोष को उत्तल लेंस (Convex Lens) का चश्मा लगाकर दूर किया जाता है। उत्तल लेंस प्रकाश किरणों को अभिसरित करके प्रतिबिंब को रेटिना पर बनने में सहायता करता है।
3. प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब श्वेत प्रकाश किसी काँच के प्रिज्म से होकर गुजरता है, तो वह अपने सात रंगों में विभाजित हो जाता है। इस घटना को प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण (Dispersion of Light) कहते हैं।
ये सात रंग क्रमशः—
बैंगनी, जामुनी (इंडिगो), नीला, हरा, पीला, नारंगी तथा लाल होते हैं।
इस रंगों के क्रम को VIBGYOR द्वारा याद रखा जाता है।
वर्ण-विक्षेपण का कारण विभिन्न रंगों का प्रिज्म में अलग-अलग मात्रा में अपवर्तित होना है। इसमें लाल रंग सबसे कम तथा बैंगनी रंग सबसे अधिक विचलित होता है।
4. समंजन क्षमता (Power of Accommodation) क्या है? सामान्य नेत्र में इसका मान कितना होता है?
उत्तर:
अभिनेत्र लेंस की वह क्षमता, जिसके द्वारा वह विभिन्न दूरियों पर स्थित वस्तुओं को स्पष्ट देखने के लिए अपनी फोकस दूरी में परिवर्तन करता है, समंजन क्षमता कहलाती है।
एक सामान्य युवा व्यक्ति का नेत्र लगभग 25 सेमी से अनंत दूरी तक स्थित वस्तुओं को स्पष्ट देख सकता है। ऐसे नेत्र की समंजन क्षमता लगभग 4 डायोप्टर होती है।
5. जरा-दूरदृष्टिता तथा दीर्घ-दृष्टि दोष में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जरा-दूरदृष्टिता तथा दीर्घ-दृष्टि दोष दोनों में निकट की वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई नहीं देतीं, परंतु इनके कारण अलग-अलग होते हैं।
दीर्घ-दृष्टि दोष में नेत्र-गोलक छोटा हो जाता है या अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी बढ़ जाती है।
जरा-दूरदृष्टिता आयु बढ़ने के कारण होती है। इसमें पक्ष्माभी (Ciliary) पेशियाँ कमजोर हो जाती हैं तथा लेंस का लचीलापन कम हो जाता है, जिससे समंजन क्षमता घट जाती है।
6. सामान्य नेत्र 25 सेमी से कम दूरी पर रखी वस्तुओं को स्पष्ट क्यों नहीं देख पाता?
उत्तर:
सामान्य नेत्र के लिए स्पष्ट दर्शन की न्यूनतम दूरी लगभग 25 सेमी होती है। यदि कोई वस्तु इससे अधिक निकट रखी जाती है, तो अभिनेत्र लेंस अपनी फोकस दूरी को पर्याप्त मात्रा में कम नहीं कर पाता। परिणामस्वरूप वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना पर स्पष्ट नहीं बनता और वस्तु धुंधली दिखाई देती है।
7. तारे क्यों टिमटिमाते हैं?
उत्तर:
तारों का प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरते समय विभिन्न घनत्व वाली वायु-परतों से लगातार अपवर्तित होता रहता है। वायुमंडल का अपवर्तनांक निरंतर बदलता रहता है, जिससे तारों से आने वाले प्रकाश की दिशा और तीव्रता में परिवर्तन होता रहता है। इसी कारण तारे हमें टिमटिमाते हुए दिखाई देते हैं।
8. दृष्टि-निर्बंध (Persistence of Vision) क्या है? चलचित्र कैसे संभव होता है?
उत्तर:
किसी वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना पर वस्तु हट जाने के बाद भी लगभग 1/10 सेकंड तक बना रहता है। इस गुण को दृष्टि-निर्बंध कहते हैं।
चलचित्र में प्रति सेकंड लगभग 24 या उससे अधिक स्थिर चित्र तेजी से पर्दे पर प्रदर्शित किए जाते हैं। दृष्टि-निर्बंध के कारण ये सभी चित्र एक-दूसरे में मिलते हुए प्रतीत होते हैं, जिससे हमें वे गतिशील (चलते हुए) दिखाई देते हैं।
9. स्वच्छ आकाश हमें नीला दिखाई देता है, जबकि अंतरिक्ष यात्री को काला क्यों दिखाई देता है?
उत्तर:
पृथ्वी के वायुमंडल में सूर्य के प्रकाश का प्रकीर्णन होता है। नीले रंग का प्रकीर्णन अन्य रंगों की अपेक्षा अधिक होता है, इसलिए आकाश नीला दिखाई देता है।
अंतरिक्ष में वायुमंडल नहीं होता, इसलिए वहाँ प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं होता। यही कारण है कि अंतरिक्ष यात्री को आकाश काला दिखाई देता है।
10. रेलवे के सिग्नल में लाल रंग के प्रकाश का ही प्रयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर:
रेलवे सिग्नल में लाल रंग का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि लाल रंग का प्रकीर्णन सबसे कम होता है। यही कारण है कि यह धुंध, वर्षा तथा अधिक दूरी पर भी स्पष्ट दिखाई देता है। इसलिए चेतावनी संकेतों के लिए लाल रंग सबसे उपयुक्त माना जाता है।
11. निकट-दृष्टि दोष तथा दूर-दृष्टि दोष में अंतर लिखिए।
| निकट-दृष्टि दोष (Myopia) | दूर-दृष्टि दोष (Hypermetropia) |
|---|---|
| (i) इसमें व्यक्ति निकट की वस्तुओं को स्पष्ट देखता है, लेकिन दूर की वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई नहीं देतीं। | (i) इसमें व्यक्ति दूर की वस्तुओं को स्पष्ट देखता है, लेकिन निकट की वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई नहीं देतीं। |
| (ii) नेत्र-लेंस की फोकस दूरी कम हो जाती है या नेत्र-गोलक लंबा हो जाता है। | (ii) नेत्र-लेंस की फोकस दूरी बढ़ जाती है या नेत्र-गोलक छोटा हो जाता है। |
| (iii) इस दोष को दूर करने के लिए अवतल लेंस का प्रयोग किया जाता है। | (iii) इस दोष को दूर करने के लिए उत्तल लेंस का प्रयोग किया जाता है। |
12. दृष्टिदोष क्या है? यह कितने प्रकार का होता है?
उत्तर:
जब कोई व्यक्ति सामान्य स्पष्ट दर्शन की न्यूनतम दूरी (लगभग 25 सेमी) पर रखी वस्तु को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता, तो उस स्थिति को दृष्टिदोष कहते हैं।
दृष्टिदोष मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं—
(i) निकट-दृष्टि दोष (Myopia)
(ii) दूर-दृष्टि दोष (Hypermetropia)
(iii) जरा-दृष्टि दोष (Presbyopia)
(iv) अबिंदुकता (Astigmatism)
13. जरा-दूरदृष्टिता (Presbyopia) क्या है?
उत्तर:
बढ़ती आयु के साथ नेत्र की समंजन क्षमता कम होने लगती है। परिणामस्वरूप निकट बिंदु दूर हट जाता है और व्यक्ति को पास की वस्तुओं को स्पष्ट देखने में कठिनाई होती है। इस दोष को जरा-दूरदृष्टिता कहते हैं।
यह दोष मुख्यतः पक्ष्माभी (Ciliary) पेशियों के कमजोर होने तथा क्रिस्टलीय लेंस के लचीलेपन में कमी आने के कारण उत्पन्न होता है। यदि किसी व्यक्ति में निकट-दृष्टि तथा दूर-दृष्टि दोनों दोष हों, तो उन्हें द्विफोकसी (Bifocal) लेंस द्वारा ठीक किया जाता है।
14. जरा-दूरदृष्टिता तथा दूर-दृष्टि दोष में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जरा-दूरदृष्टिता मुख्यतः बढ़ती आयु के कारण उत्पन्न होती है। इस दोष को दूर करने के लिए द्विफोकसी लेंस वाले चश्मे का उपयोग किया जाता है, जिसमें ऊपरी भाग में अवतल लेंस तथा निचले भाग में उत्तल लेंस लगाया जाता है। इससे व्यक्ति दूर एवं पास दोनों प्रकार की वस्तुओं को स्पष्ट देख सकता है।
इसके विपरीत, दूर-दृष्टि दोष में व्यक्ति दूर की वस्तुओं को स्पष्ट देखता है, लेकिन निकट की वस्तुओं को देखने में कठिनाई होती है। इस दोष को दूर करने के लिए केवल उत्तल लेंस का प्रयोग किया जाता है।
15. जब किसी वस्तु को नेत्र से अधिक दूर ले जाते हैं, तो प्रतिबिंब की स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
जब वस्तु की दूरी बढ़ाई जाती है, तब स्वस्थ नेत्र अपनी समंजन क्षमता के कारण अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी में परिवर्तन कर लेता है। इसके परिणामस्वरूप वस्तु का प्रतिबिंब सदैव रेटिना पर ही बनता है।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि नेत्र-लेंस और रेटिना के बीच की दूरी स्थिर रहती है। केवल लेंस की फोकस दूरी बदलती है।
16. किसी वस्तु को स्पष्ट देखने के लिए नेत्र समंजन कैसे करता है?
उत्तर:
अभिनेत्र लेंस की वक्रता को पक्ष्माभी (Ciliary) पेशियाँ नियंत्रित करती हैं।
(i) जब दूर की वस्तु को देखते हैं, तब पक्ष्माभी पेशियाँ शिथिल हो जाती हैं। इससे लेंस पतला हो जाता है तथा उसकी फोकस दूरी बढ़ जाती है।
(ii) जब निकट की वस्तु को देखते हैं, तब पक्ष्माभी पेशियाँ सिकुड़ जाती हैं। इससे लेंस अधिक मोटा हो जाता है और उसकी फोकस दूरी कम हो जाती है, जिससे निकट की वस्तु स्पष्ट दिखाई देती है।
17. नेत्र में जरा-दृष्टि दोष का क्या कारण है?
उत्तर:
जरा-दृष्टि दोष मुख्यतः बढ़ती आयु के कारण उत्पन्न होता है। उम्र बढ़ने पर पक्ष्माभी (Ciliary) पेशियाँ कमजोर हो जाती हैं तथा अभिनेत्र लेंस का लचीलापन कम हो जाता है। परिणामस्वरूप नेत्र की समंजन क्षमता घट जाती है और व्यक्ति को विशेष रूप से निकट की वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई नहीं देतीं।
18. आँखों की सुग्राहिता (Sensitivity) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
कम या मद्धिम प्रकाश में भी किसी वस्तु को स्पष्ट देखने की आँख की क्षमता को सुग्राहिता (Sensitivity) कहते हैं। जिस आँख में यह क्षमता अधिक होती है, उसे सुग्राही आँख कहा जाता है।
19. निकट-दृष्टि दोष तथा दूर-दृष्टि दोष में कोई तीन अंतर लिखिए।
उत्तर:
(i) निकट-दृष्टि दोष वाला व्यक्ति पास की वस्तुओं को स्पष्ट देखता है, जबकि दूर-दृष्टि दोष वाला व्यक्ति दूर की वस्तुओं को स्पष्ट देखता है।
(ii) निकट-दृष्टि दोष में दूर की वस्तुएँ धुंधली दिखाई देती हैं, जबकि दूर-दृष्टि दोष में निकट की वस्तुएँ धुंधली दिखाई देती हैं।
(iii) निकट-दृष्टि दोष को दूर करने के लिए अवतल लेंस तथा दूर-दृष्टि दोष को दूर करने के लिए उत्तल लेंस का प्रयोग किया जाता है।
20. दूर-दृष्टि दोष वाला व्यक्ति आकाश की ओर देखते समय चश्मा उतारना क्यों पसंद करता है?
उत्तर:
दूर-दृष्टि दोष वाला व्यक्ति स्वाभाविक रूप से दूर स्थित वस्तुओं को स्पष्ट देख सकता है। चूँकि आकाश तथा उसमें स्थित वस्तुएँ बहुत दूर होती हैं, इसलिए उन्हें देखने के लिए उसे चश्मे की आवश्यकता नहीं पड़ती। यही कारण है कि ऐसा व्यक्ति आकाश की ओर देखते समय अपना चश्मा उतार देता है।
21. स्पेक्ट्रम क्या है?
उत्तर:
जब श्वेत प्रकाश (सूर्य का प्रकाश) किसी काँच के प्रिज्म से होकर गुजरता है, तो वह अपने सात रंगों में विभाजित हो जाता है। इन सात रंगों के क्रमबद्ध समूह को स्पेक्ट्रम (Spectrum) कहते हैं।
22. टिंडल प्रभाव (Tyndall Effect) क्या है?
उत्तर:
जब प्रकाश किसी ऐसे माध्यम से होकर गुजरता है जिसमें धूल, धुआँ या अन्य सूक्ष्म कण उपस्थित होते हैं, तब ये कण प्रकाश का प्रकीर्णन करते हैं और प्रकाश का मार्ग दिखाई देने लगता है। इस घटना को टिंडल प्रभाव (Tyndall Effect) कहते हैं।
घने जंगल में वृक्षों के बीच से आती सूर्य की किरणें या कुहासे में दिखाई देने वाली प्रकाश किरणें टिंडल प्रभाव के उदाहरण हैं।
23. मोतियाबिंद (Cataract) क्या है?
उत्तर:
बढ़ती आयु के कारण कुछ व्यक्तियों के नेत्र का क्रिस्टलीय लेंस धुंधला या दूधिया हो जाता है। इसके कारण वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई नहीं देतीं। इस नेत्र-दोष को मोतियाबिंद (Cataract) कहते हैं। इसका उपचार शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) द्वारा किया जाता है।
24. प्रकाश के प्रकीर्णन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
जब प्रकाश की किरणें वायुमंडल या किसी ऐसे माध्यम से होकर गुजरती हैं जिसमें सूक्ष्म कण उपस्थित होते हैं, तब ये कण प्रकाश को विभिन्न दिशाओं में फैला देते हैं। इस घटना को प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering of Light) कहते हैं।
प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण ही प्रकाश किरणों का मार्ग दिखाई देता है तथा आकाश नीला दिखाई देता है।
25. मानव नेत्र का कौन-सा गुण सिनेमा के पर्दे पर चलती हुई तस्वीर देखने में सहायता करता है?
उत्तर:
मानव नेत्र का दृष्टि-निर्बंध (Persistence of Vision) गुण सिनेमा के पर्दे पर चलती हुई तस्वीर देखने में सहायता करता है।
किसी चित्र का प्रतिबिंब रेटिना पर लगभग 1/10 सेकंड तक बना रहता है। इसी बीच दूसरा चित्र दिखाई देने पर दोनों चित्र एक-दूसरे में मिलते हुए प्रतीत होते हैं, जिससे स्थिर चित्र भी गतिशील दिखाई देते हैं।
26. स्पेक्ट्रम में किस रंग के प्रकाश का तरंगदैर्घ्य सबसे अधिक तथा किसका सबसे कम होता है?
उत्तर:
स्पेक्ट्रम में लाल रंग के प्रकाश का तरंगदैर्घ्य सबसे अधिक होता है, जबकि बैंगनी रंग के प्रकाश का तरंगदैर्घ्य सबसे कम होता है।
इसी कारण—
(i) लाल रंग का विचलन सबसे कम होता है।
(ii) बैंगनी रंग का विचलन सबसे अधिक होता है।
27. प्रकीर्णित प्रकाश का रंग किन बातों पर निर्भर करता है?
उत्तर:
प्रकीर्णित प्रकाश का रंग मुख्यतः प्रकीर्णन करने वाले कणों के आकार पर निर्भर करता है।
(i) अत्यंत सूक्ष्म कण मुख्यतः नीले रंग के प्रकाश का अधिक प्रकीर्णन करते हैं।
(ii) अपेक्षाकृत बड़े कण अधिक तरंगदैर्घ्य वाले प्रकाश का अधिक प्रकीर्णन करते हैं।
28. कौन-से व्यक्ति नेत्रदान नहीं कर सकते?
उत्तर:
सामान्य परिस्थितियों में उच्च रक्तचाप, मधुमेह अथवा दमा से पीड़ित व्यक्ति भी नेत्रदान कर सकते हैं, यदि उन्हें कोई गंभीर संक्रामक रोग न हो।
किन्तु जिन व्यक्तियों की मृत्यु एड्स (AIDS), हेपेटाइटिस-B, टेटनस, हैजा अथवा अन्य गंभीर संक्रामक रोगों के कारण हुई हो, वे नेत्रदान नहीं कर सकते।