Class 10 Science: प्रकाश का परावर्तन तथा अपवर्तन

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Chapter Overview

Class10
SubjectScience
Chapter Nameप्रकाश का परावर्तन तथा अपवर्तन
Resource TypeRevision Notes
SyllabusNCERT
Suitable ForCBSE, JAC and other state boards

प्रकाश का परावर्तन तथा अपवर्तन

उत्तर:
जब प्रकाश की किरण किसी सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है, तब वह अभिलंब से दूर हट जाती है। इस स्थिति में अपवर्तित कोण (∠r), आपतन कोण (∠i) से बड़ा होता है। यदि अपवर्तित कोण का मान 90° (समकोण) हो जाए, तो उस समय सघन माध्यम में बनने वाले आपतन कोण को क्रांतिक कोण (Critical Angle) कहा जाता है।

उत्तर:
पैरिस्कोप एक प्रकाशीय यंत्र है, जिसकी सहायता से ऐसी वस्तुओं को देखा जा सकता है जो सीधे दृष्टि में दिखाई नहीं देतीं या किसी अवरोध के पीछे होती हैं।

(i) सैनिक खाइयों में सुरक्षित रहते हुए शत्रु की गतिविधियों का निरीक्षण करते हैं।
(ii) पनडुब्बियों में बैठे सैनिक समुद्र की सतह एवं आसपास के क्षेत्र का अवलोकन करते हैं।
(iii) धुंध वाले वातावरण में अवरक्त (Infrared) फोटोग्राफी के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
(iv) सामान्य पैरिस्कोप समतल दर्पणों पर आधारित होते हैं, जबकि उच्च गुणवत्ता वाले पैरिस्कोप में प्रिज्मों का प्रयोग किया जाता है।

3. समतल दर्पण द्वारा बनने वाले प्रतिबिंब की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:
समतल दर्पण द्वारा बनने वाले प्रतिबिंब की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

(i) प्रतिबिंब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है, जितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के सामने स्थित होती है।
(ii) प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकार के समान होता है।
(iii) प्रतिबिंब सदैव सीधा एवं आभासी होता है।
(iv) किसी वस्तु का पूरा प्रतिबिंब देखने के लिए दर्पण की न्यूनतम लंबाई वस्तु की लंबाई की लगभग आधी होनी चाहिए।

4. अवतल दर्पण के उपयोग लिखिए।

उत्तर:
अवतल दर्पण का उपयोग अनेक स्थानों पर किया जाता है, जैसे—

(i) सौर ऊर्जा एकत्र करने वाले बड़े परावर्तकों (Solar Concentrators) में।
(ii) वाहनों की हेडलाइट, टॉर्च, सर्चलाइट तथा विभिन्न प्रकार के लैम्पों में।
(iii) शेविंग (दाढ़ी बनाने) वाले दर्पण के निर्माण में।
(iv) दंत चिकित्सकों एवं अन्य विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रोगी के अंगों का बड़ा और स्पष्ट प्रतिबिंब देखने के लिए।

5. प्रकाश का अपवर्तन क्या है? इसके नियम लिखिए।

उत्तर:
जब प्रकाश की किरण एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती है, तब उसकी चाल में परिवर्तन के कारण उसकी दिशा बदल जाती है। इस घटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।

प्रकाश के अपवर्तन के नियम निम्नलिखित हैं—

(i) आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब, तीनों एक ही तल में होते हैं।
(ii) किसी निश्चित रंग के प्रकाश के लिए दो माध्यमों की सीमा पर आपतन कोण की ज्या (sin i) तथा अपवर्तन कोण की ज्या (sin r) का अनुपात सदैव नियत रहता है। इसे स्नेल का नियम (Snell’s Law) कहा जाता है।

6. समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन (+1) का क्या अर्थ है?

उत्तर:
समतल दर्पण का आवर्धन +1 होने का अर्थ है कि दर्पण द्वारा बनने वाले प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकार के बिल्कुल समान होता है। इसमें धनात्मक (+) चिन्ह यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब सीधा (Erect) तथा आभासी (Virtual) होता है।

7. उत्तल लेंस के दो उपयोग लिखिए।

उत्तर:
उत्तल लेंस के प्रमुख उपयोग निम्नलिखित हैं—

(i) दूर-दृष्टि दोष (Hypermetropia) को दूर करने के लिए चश्मों में।
(ii) छोटे अक्षरों को बड़ा करके पढ़ने के लिए आवर्धक काँच (Magnifying Glass) के रूप में।

8. प्रकाश का परावर्तन क्या है? इसके नियम लिखिए।

उत्तर:
जब प्रकाश की किरण किसी चिकनी, चमकदार या पॉलिश की हुई सतह से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौट जाती है, तो इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।

प्रकाश के परावर्तन के नियम निम्नलिखित हैं—

(i) आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब, तीनों एक ही तल में होते हैं।
(ii) परावर्तन कोण का मान सदैव आपतन कोण के बराबर होता है।

9. दिए गए उत्तल लेंस, अवतल लेंस तथा काँच की वृत्ताकार पट्टिका को बिना छुए कैसे पहचानेंगे?

उत्तर:
इनकी पहचान किसी मुद्रित पुस्तक या कागज के अक्षरों को देखकर की जा सकती है।

(i) यदि अक्षर बड़े दिखाई दें, तो वह उत्तल लेंस है।
(ii) यदि अक्षर छोटे दिखाई दें, तो वह अवतल लेंस है।
(iii) यदि अक्षरों के आकार में कोई परिवर्तन न हो, तो वह काँच की वृत्ताकार पट्टिका है।

10. वाहनों में पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में उत्तल दर्पण का प्रयोग क्यों किया जाता है?

उत्तर:
वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च-दृश्य (Rear View Mirror) के रूप में इसलिए उपयोग किया जाता है क्योंकि—

(i) यह सदैव सीधा एवं आभासी प्रतिबिंब बनाता है।
(ii) इसका दृष्टि क्षेत्र (Field of View) अधिक होता है, जिससे चालक पीछे का बड़ा भाग आसानी से देख सकता है।
(iii) इसकी बाहरी ओर उभरी हुई सतह के कारण अधिक क्षेत्र का दृश्य एक साथ दिखाई देता है।

11. उत्तल लेंस को अभिसारी लेंस क्यों कहा जाता है?

उत्तर:
उत्तल लेंस से होकर गुजरने वाली समांतर प्रकाश किरणें अपवर्तन के बाद एक बिंदु पर आकर मिलती हैं। अर्थात् यह प्रकाश किरणों को एक स्थान पर अभिसरित (Converge) करता है। इसी गुण के कारण उत्तल लेंस को अभिसारी लेंस (Converging Lens) कहा जाता है।

12. उत्तल दर्पण तथा अवतल दर्पण में अंतर लिखिए।

अवतल दर्पणउत्तल दर्पण
(i) इसका परावर्तक तल अंदर की ओर धँसा हुआ होता है।(i) इसका परावर्तक तल बाहर की ओर उभरा हुआ होता है।
(ii) इसमें वास्तविक तथा आभासी दोनों प्रकार के प्रतिबिंब बन सकते हैं।(ii) इसमें केवल आभासी प्रतिबिंब बनता है।
(iii) इसमें प्रतिबिंब सीधा या उल्टा दोनों प्रकार का हो सकता है।(iii) इसमें प्रतिबिंब सदैव सीधा बनता है।
(iv) इसमें प्रतिबिंब बड़ा, छोटा अथवा वस्तु के समान आकार का बन सकता है।(iv) इसमें प्रतिबिंब सदैव छोटा बनता है।

13. उत्तल लेंस तथा अवतल लेंस में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तल लेंसअवतल लेंस
(i) बीच में मोटा तथा किनारों पर पतला होता है।(i) बीच में पतला तथा किनारों पर मोटा होता है।
(ii) अक्षर बड़े दिखाई देते हैं।(ii) अक्षर छोटे दिखाई देते हैं।
(iii) प्रकाश किरणों को एक बिंदु पर एकत्रित करता है।(iii) प्रकाश किरणों को फैलाता है।
(iv) वास्तविक एवं आभासी दोनों प्रकार के प्रतिबिंब बना सकता है।(iv) केवल आभासी एवं सीधा प्रतिबिंब बनाता है।
(v) लेंस को बाईं ओर ले जाने पर प्रतिबिंब दाईं ओर जाता है।(v) लेंस को बाईं ओर ले जाने पर प्रतिबिंब भी बाईं ओर जाता है।
(vi) इसकी फोकस दूरी धनात्मक होती है।(vi) इसकी फोकस दूरी ऋणात्मक होती है।

14. वास्तविक तथा आभासी प्रतिबिंब में अंतर लिखिए।

वास्तविक प्रतिबिंबआभासी प्रतिबिंब
(i) इसे पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है।(i) इसे पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।
(ii) यह सदैव उल्टा होता है।(ii) यह सदैव सीधा होता है।
(iii) यह दर्पण के सामने बनता है।(iii) यह दर्पण के पीछे बनता है।

15. प्रकाश का परावर्तन क्या है? इसके नियम लिखिए।

उत्तर:
जब प्रकाश की किरण किसी सतह से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौट जाती है, तो इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।

प्रकाश के परावर्तन के नियम निम्नलिखित हैं—

(i) आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब एक ही तल में स्थित होते हैं।
(ii) परावर्तन कोण का मान सदैव आपतन कोण के बराबर होता है।

महत्त्वपूर्ण परिभाषाएँ

● आपतित किरण: दर्पण या किसी सतह पर आकर गिरने वाली प्रकाश किरण को आपतित किरण कहते हैं।

● परावर्तित किरण: सतह से टकराकर वापस लौटने वाली प्रकाश किरण को परावर्तित किरण कहते हैं।

● अभिलंब: आपतन बिंदु पर सतह पर खींची गई लंब रेखा को अभिलंब कहते हैं।

● आपतन कोण: आपतित किरण तथा अभिलंब के बीच बनने वाले कोण को आपतन कोण कहते हैं।

● परावर्तन कोण: परावर्तित किरण तथा अभिलंब के बीच बनने वाले कोण को परावर्तन कोण कहते हैं।

16. प्रकाश का प्रकीर्णन क्या है?

उत्तर:
जब प्रकाश किसी ऐसे माध्यम से होकर गुजरता है जिसमें धूल, धुआँ या अन्य अत्यंत सूक्ष्म कण उपस्थित होते हैं, तब प्रकाश उन कणों द्वारा विभिन्न दिशाओं में फैल जाता है। इस घटना को प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering of Light) कहते हैं।

आकाश का नीला दिखाई देना सूर्य के प्रकाश के प्रकीर्णन का ही परिणाम है।

17. प्रकाश के अपवर्तन के नियम लिखिए।

उत्तर:
जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करता है, तब उसकी दिशा में परिवर्तन होता है। इस घटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।

अपवर्तन के नियम निम्नलिखित हैं—

(i) आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब एक ही तल में होते हैं।

(ii) किसी निश्चित रंग के प्रकाश के लिए आपतन कोण की ज्या (sin i) तथा अपवर्तन कोण की ज्या (sin r) का अनुपात सदैव स्थिर रहता है। इसे स्नेल का नियम (Snell’s Law) कहते हैं।

18. अपवर्तनांक को परिभाषित कीजिए। हीरे का अपवर्तनांक 2.42 होने का क्या अर्थ है?

उत्तर:
किसी माध्यम का अपवर्तनांक निर्वात में प्रकाश की चाल (c) तथा उस माध्यम में प्रकाश की चाल (v) के अनुपात को कहते हैं।

यदि हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है, तो इसका अर्थ है कि हीरे में प्रकाश का वेग हवा या निर्वात की अपेक्षा कम होता है। इसलिए जब प्रकाश हवा से हीरे में प्रवेश करता है, तो वह अभिलंब की ओर मुड़ जाता है।

19. सामान्य नेत्र 25 सेमी से कम दूरी पर रखी वस्तुओं को स्पष्ट क्यों नहीं देख पाता?

उत्तर:
सामान्य मानव नेत्र लगभग 25 सेमी की दूरी तक रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देख सकता है। यदि वस्तु इससे अधिक निकट रखी जाए, तो उसका प्रतिबिंब रेटिना पर स्पष्ट नहीं बन पाता। इसलिए 25 सेमी से कम दूरी पर रखी वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई नहीं देतीं।

20. समतल दर्पण द्वारा बनने वाले प्रतिबिंब का आकार एवं प्रकृति कैसी होती है?

उत्तर:
समतल दर्पण द्वारा बनने वाले प्रतिबिंब की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

(i) प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकार के बराबर होता है।
(ii) प्रतिबिंब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है, जितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के सामने स्थित होती है।
(iii) प्रतिबिंब सदैव आभासी (Virtual) तथा सीधा (Erect) होता है।

21. समतल दर्पण में प्रतिबिंब बनने की क्रिया रेखा दिखाइए।

उत्तर:
समतल दर्पण में बनने वाला प्रतिबिंब आभासी होता है। यदि किसी वस्तु के बिंदु A से निकलने वाली प्रकाश किरणें समतल दर्पण से परावर्तित होकर आँख तक पहुँचती हैं, तो इन परावर्तित किरणों को पीछे की ओर बढ़ाने पर वे दर्पण के पीछे स्थित बिंदु I पर मिलती हुई प्रतीत होती हैं। यही बिंदु वस्तु का आभासी प्रतिबिंब होता है।

चित्र संबंधी तथ्य—

(i) बिंदु A वस्तु का स्थान दर्शाता है।
(ii) बिंदु I दर्पण के पीछे बनने वाला आभासी प्रतिबिंब है।
(iii) वस्तु की दर्पण से दूरी = प्रतिबिंब की दर्पण से दूरी।

22. गोलीय दर्पण की सहायता से सूर्य के प्रकाश द्वारा कागज के टुकड़े को कैसे जलाया जा सकता है?

उत्तर:
सूर्य से आने वाली समांतर प्रकाश किरणों को यदि अवतल दर्पण पर गिराया जाए, तो वे परावर्तन के बाद दर्पण के मुख्य फोकस पर एकत्रित हो जाती हैं। यदि उस फोकस पर कागज का टुकड़ा रखा जाए, तो प्रकाश ऊर्जा ऊष्मा में परिवर्तित होकर कागज को गर्म कर देती है और कुछ समय बाद वह जलने लगता है।

23. प्रकाश क्या है?

उत्तर:
प्रकाश वह भौतिक ऊर्जा है, जिसके कारण हमें वस्तुएँ दिखाई देती हैं। जब किसी वस्तु पर प्रकाश पड़ता है, तो वह उसे परावर्तित करती है। यह परावर्तित प्रकाश हमारी आँखों तक पहुँचता है, जिससे हम उस वस्तु को देख पाते हैं।

24. प्रकाशिक घनत्व क्या है?

उत्तर:
प्रकाशिक घनत्व किसी माध्यम का वह गुण है, जो यह बताता है कि उस माध्यम में प्रकाश का वेग कितना है। इसका संबंध द्रव्यमान घनत्व से नहीं होता।

जिस माध्यम में प्रकाश का वेग कम होता है, उसे प्रकाशिक दृष्टि से सघन माध्यम कहते हैं, जबकि जिस माध्यम में प्रकाश का वेग अधिक होता है, उसे विरल माध्यम कहते हैं।

जब प्रकाश विरल माध्यम से सघन माध्यम में प्रवेश करता है, तो वह अभिलंब की ओर मुड़ता है। इसके विपरीत, सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाने पर वह अभिलंब से दूर हट जाता है।

25. आभासी प्रतिबिंब क्या है?

उत्तर:
जब परावर्तन अथवा अपवर्तन के बाद प्रकाश किरणें वास्तव में किसी बिंदु पर नहीं मिलतीं, बल्कि उन्हें पीछे की ओर बढ़ाने पर किसी बिंदु से आती हुई प्रतीत होती हैं, तब बनने वाले प्रतिबिंब को आभासी प्रतिबिंब कहते हैं।

आभासी प्रतिबिंब की विशेषताएँ—

(i) यह सदैव सीधा होता है।
(ii) इसे पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।

26. वास्तविक प्रतिबिंब क्या है?

उत्तर:
जब परावर्तन अथवा अपवर्तन के बाद प्रकाश किरणें वास्तव में किसी एक बिंदु पर मिलती हैं, तब बनने वाले प्रतिबिंब को वास्तविक प्रतिबिंब कहते हैं।

वास्तविक प्रतिबिंब की विशेषताएँ—

(i) यह सामान्यतः उल्टा होता है।
(ii) इसे पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है।
(iii) मानव नेत्र की रेटिना पर भी वास्तविक प्रतिबिंब ही बनता है।

27. गोलीय दर्पणों के लिए नई कार्तीय चिन्ह परिपाटी लिखिए।

उत्तर:
गोलीय दर्पणों के लिए नई कार्तीय चिन्ह परिपाटी के अनुसार—

(i) वस्तु (बिम्ब) को सदैव दर्पण के बाईं ओर माना जाता है।
(ii) सभी दूरियाँ दर्पण के ध्रुव (Pole) से मुख्य अक्ष के समानांतर मापी जाती हैं।
(iii) ध्रुव से दाईं ओर (+X-अक्ष) की दूरियाँ धनात्मक तथा बाईं ओर (−X-अक्ष) की दूरियाँ ऋणात्मक मानी जाती हैं।
(iv) मुख्य अक्ष के ऊपर की ओर की ऊँचाई धनात्मक तथा नीचे की ओर की ऊँचाई ऋणात्मक मानी जाती है।

28. अवतल दर्पण, उत्तल दर्पण तथा समतल दर्पण की पहचान स्पर्श करके एवं बिना स्पर्श किए कैसे करेंगे?

उत्तर:

स्पर्श करके पहचान—

(i) अवतल दर्पण का परावर्तक तल अंदर की ओर धँसा होता है।
(ii) उत्तल दर्पण का परावर्तक तल बाहर की ओर उभरा होता है।
(iii) समतल दर्पण का परावर्तक तल बिल्कुल समतल होता है।

बिना स्पर्श किए पहचान—

फोकस के भीतर किसी वस्तु को रखने पर—

(i) यदि प्रतिबिंब सीधा, आभासी एवं बड़ा दिखाई दे, तो वह अवतल दर्पण है।
(ii) यदि प्रतिबिंब सीधा, आभासी एवं छोटा दिखाई दे, तो वह उत्तल दर्पण है।
(iii) यदि प्रतिबिंब सीधा, आभासी तथा वस्तु के समान आकार का दिखाई दे, तो वह समतल दर्पण है।

29. लेंस कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर:
मुख्यतः लेंस दो प्रकार के होते हैं—

(i) उत्तल लेंस (Convex Lens)
(ii) अवतल लेंस (Concave Lens)

उत्तल लेंस वास्तविक तथा आभासी दोनों प्रकार के प्रतिबिंब बना सकता है, जबकि अवतल लेंस केवल आभासी प्रतिबिंब बनाता है।

30. लेंस की क्षमता (Power of Lens) से क्या समझते हैं?

उत्तर:
किसी लेंस द्वारा प्रकाश किरणों को अभिसरित या अपसरित करने की क्षमता को लेंस की क्षमता (Power of Lens) कहते हैं।

लेंस की क्षमता का मात्रक डायोप्टर (Dioptre, D) है।

1 डायोप्टर उस लेंस की क्षमता होती है जिसकी फोकस दूरी 1 मीटर होती है।

31. उत्तल लेंस तथा अवतल लेंस में सचित्र अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

उत्तल लेंस एवं अवतल लेंस में अंतर

उत्तल लेंसअवतल लेंस
(i) इसमें वास्तविक तथा आभासी दोनों प्रकार के प्रतिबिंब बन सकते हैं।(i) इसमें केवल आभासी प्रतिबिंब बनता है।
(ii) यह प्रकाश किरणों को एक बिंदु पर अभिसरित करता है।(ii) यह प्रकाश किरणों को अपसरित करता है।
(iii) इसे अभिसारी लेंस (Converging Lens) कहा जाता है।(iii) इसे अपसारी लेंस (Diverging Lens) कहा जाता है।

32. लेंस में कितने मुख्य फोकस होते हैं?

उत्तर:
प्रत्येक लेंस के दो मुख्य फोकस होते हैं, क्योंकि प्रकाश किरणें लेंस के दोनों ओर से होकर गुजर सकती हैं। इसलिए लेंस के दोनों तरफ एक-एक मुख्य फोकस स्थित होता है।

33. कौन-सा लेंस वास्तविक तथा आभासी दोनों प्रकार के प्रतिबिंब बनाता है?

उत्तर:
उत्तल लेंस वास्तविक तथा आभासी दोनों प्रकार के प्रतिबिंब बना सकता है।

  • जब वस्तु फोकस के बाहर रखी जाती है, तब उत्तल लेंस वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है।
  • जब वस्तु फोकस और लेंस के बीच रखी जाती है, तब यह आभासी प्रतिबिंब बनाता है।

34. बिना स्पर्श किए उत्तल लेंस, अवतल लेंस तथा काँच की वृत्ताकार प्लेट की पहचान कैसे करेंगे?

उत्तर:
इनकी पहचान किसी पुस्तक के मुद्रित अक्षरों को देखकर की जा सकती है।

(i) यदि अक्षर वास्तविक आकार से बड़े दिखाई दें, तो वह उत्तल लेंस है।
(ii) यदि अक्षर अपने वास्तविक आकार के समान दिखाई दें, तो वह काँच की वृत्ताकार प्लेट है।
(iii) यदि अक्षर वास्तविक आकार से छोटे दिखाई दें, तो वह अवतल लेंस है।

35. सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय सूर्य रक्ताभ (लाल) क्यों दिखाई देता है?

उत्तर:
सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय सूर्य का प्रकाश वायुमंडल की अधिक मोटी परत से होकर गुजरता है। इस दौरान कम तरंगदैर्घ्य वाले नीले एवं बैंगनी रंग का प्रकाश अधिक मात्रा में प्रकीर्णित हो जाता है, जबकि अधिक तरंगदैर्घ्य वाला लाल रंग का प्रकाश हमारी आँखों तक पहुँचता है। इसलिए उस समय सूर्य रक्ताभ (लाल) दिखाई देता है।

36. अवतल लेंस को अपसारी लेंस क्यों कहा जाता है?

उत्तर:
अवतल लेंस पर पड़ने वाली समांतर प्रकाश किरणें अपवर्तन के बाद एक-दूसरे से दूर फैल जाती हैं। अर्थात् यह प्रकाश किरणों का अपसरण (Divergence) करता है। इसी कारण अवतल लेंस को अपसारी लेंस (Diverging Lens) कहा जाता है।

37. किरण क्या है?

उत्तर:
प्रकाश के सीधी दिशा में चलने वाले मार्ग को प्रकाश किरण कहते हैं।

प्रकाश किरणों के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं—

(i) संसृत (अभिसारी) किरण पुंज
(ii) अपसृत किरण पुंज
(iii) समांतर किरण पुंज

परवलयिक अथवा अवतल दर्पण अभिसारी किरण पुंज उत्पन्न करता है, उत्तल दर्पण अपसृत किरण पुंज तथा समतल दर्पण समांतर किरण पुंज उत्पन्न करता है।

38. पाश्विक विस्थापन (Lateral Displacement) से क्या समझते हैं?

उत्तर:
जब प्रकाश की किरण किसी आयताकार काँच की स्लैब से होकर गुजरती है, तो आपतित तथा निर्गत किरणें एक-दूसरे के समांतर होती हैं, लेकिन वे एक ही सीधी रेखा में नहीं होतीं। इन दोनों किरणों के बीच की लंबवत दूरी को पाश्विक विस्थापन (Lateral Displacement) कहते हैं।

39. विवर्तन (Diffraction) क्या है?

उत्तर:
जब प्रकाश के मार्ग में कोई अत्यंत छोटा अवरोध या संकीर्ण छिद्र आता है, तब प्रकाश केवल सीधी रेखा में न चलकर उसके किनारों पर मुड़ने लगता है। प्रकाश के इस मुड़ने की घटना को विवर्तन (Diffraction) कहते हैं।

40. नई कार्तीय चिन्ह परिपाटी के अनुसार गोलीय लेंस में आवर्धन किस प्रकार बदलता है?

उत्तर:
नई कार्तीय चिन्ह परिपाटी के अनुसार—

(i) उत्तल लेंस में यदि प्रतिबिंब आभासी हो, तो आवर्धन धनात्मक (+) होता है तथा यदि प्रतिबिंब वास्तविक हो, तो आवर्धन ऋणात्मक (–) होता है।

(ii) अवतल लेंस सदैव आभासी प्रतिबिंब बनाता है, इसलिए इसका आवर्धन हमेशा धनात्मक (+) होता है।

41. प्रधान फोकस तथा फोकस में क्या अंतर है?

उत्तर:

प्रधान फोकसफोकस
(i) यह दर्पण या लेंस के प्रधान अक्ष पर स्थित निश्चित बिंदु होता है।(i) यह वह बिंदु है जहाँ प्रकाश किरणें परावर्तन या अपवर्तन के बाद मिलती हैं या मिलती हुई प्रतीत होती हैं।
(ii) यह सदैव प्रधान अक्ष पर स्थित होता है।(ii) प्रत्येक फोकस का प्रधान अक्ष पर होना आवश्यक नहीं है।

42. तारे टिमटिमाते हैं, किन्तु ग्रह नहीं टिमटिमाते। क्यों?

उत्तर:
तारे पृथ्वी से अत्यधिक दूर स्थित होते हैं। इनका प्रकाश वायुमंडल की विभिन्न घनत्व वाली परतों से होकर गुजरता है, जिसके कारण बार-बार अपवर्तन होता है। परिणामस्वरूप तारों की चमक लगातार बदलती रहती है और वे टिमटिमाते हुए दिखाई देते हैं।

इसके विपरीत, ग्रह पृथ्वी के अपेक्षाकृत निकट होते हैं तथा उनका प्रत्यक्ष आकार अधिक होता है। उनसे आने वाला प्रकाश अधिक स्थिर होता है, इसलिए ग्रह सामान्यतः टिमटिमाते नहीं हैं

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Chapter 2: अम्ल, क्षार और लवण
Chapter 3: धातु और अधातु
Chapter 4: कार्बन और उसके यौगिक
Chapter 5: तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण
Chapter 6: जैव प्रक्रम
Chapter 7: नियंत्रण और समन्वय
Chapter 8: जीव जनन कैसे करते हैं?
Chapter 9: आनुवंशिकी और जैव विकास
Chapter 10: प्रकाश : परावर्तन और अपवर्तन
Chapter 11: मानव नेत्र और रंग-बिरंगा संसार
Chapter 12: विद्युत्
Chapter 13: विद्युतधारा के चुम्बकीय प्रभाव
Chapter 14: ऊर्जा के स्रोत
Chapter 15: हमारा पर्यावरण
Chapter 16: प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन

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