Class 10 Science: धातु और अधातु
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Chapter Overview
| Class | 10 |
| Subject | Science |
| Chapter Name | धातु और अधातु |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
धातु एवं अधातु (Subjective Questions)
1. धातु किसे कहते हैं?
उत्तर:
आवर्त सारणी के बाईं ओर तथा मध्य भाग में स्थित अधिकांश तत्व धातु (Metal) कहलाते हैं। सामान्यतः धातुओं में धात्विक चमक होती है तथा वे ऊष्मा एवं विद्युत की अच्छी सुचालक, आघातवर्ध्य (Malleable), तन्य (Ductile), कठोर एवं अधिक घनत्व वाली होती हैं। अधिकांश धातुओं के ऑक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं।
उदाहरण: लोहा (Fe), ताँबा (Cu), सोना (Au), चाँदी (Ag), एल्युमिनियम (Al), प्लैटिनम (Pt) आदि।
2. धातुओं के दो रासायनिक गुण लिखिए।
उत्तर:
धातुओं के प्रमुख रासायनिक गुण निम्नलिखित हैं—
(i) धातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके सामान्यतः क्षारीय प्रकृति के ऑक्साइड बनाती हैं।
(ii) धातुएँ तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया करके लवण एवं हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती हैं।
उदाहरण:
2Na +2HCL→ 2NaCl + H 2
3. अधातुओं के दो गुणधर्म लिखिए।
उत्तर:
अधातुओं के प्रमुख गुणधर्म निम्नलिखित हैं—
(i) अधिकांश अधातुएँ सामान्य ताप पर गैसीय अवस्था में पाई जाती हैं।
(ii) अधातुएँ धात्विक ध्वनि (Sonorous Sound) उत्पन्न नहीं करती हैं।
4. कौन-सी धातुएँ आसानी से संक्षारित नहीं होती हैं?
उत्तर:
सोना (Gold) तथा चाँदी (Silver) जैसी धातुएँ अत्यंत कम अभिक्रियाशील होती हैं। ये वायु, जल तथा अधिकांश रासायनिक पदार्थों के साथ आसानी से अभिक्रिया नहीं करतीं। इसलिए इन धातुओं पर सामान्य परिस्थितियों में संक्षारण नहीं होता।
5. धातुओं के परिष्करण से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
अयस्कों से प्राप्त धातुएँ पूर्णतः शुद्ध नहीं होतीं। इनमें अनेक प्रकार की अशुद्धियाँ उपस्थित रहती हैं। इन अशुद्धियों को हटाकर शुद्ध धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया को धातुओं का परिष्करण (Refining of Metals) कहते हैं।
धातुओं का परिष्करण विभिन्न विधियों द्वारा किया जाता है, जिनमें विद्युत अपघटनी परिष्करण (Electrolytic Refining) सबसे अधिक प्रचलित विधि है।
6. ऐसी धातुओं के नाम लिखिए जो—
(i) कमरे के ताप पर द्रव होती है।
उत्तर: पारा (Mercury)
(ii) चाकू से आसानी से काटी जा सकती है।
उत्तर: सोडियम (Na) तथा पोटैशियम (K)
(iii) ऊष्मा की सबसे अच्छी चालक होती है।
उत्तर: चाँदी (Ag)
(iv) ऊष्मा की कुचालक होती है।
उत्तर: सीसा (Lead) तथा पारा (Mercury)
7. मिश्रधातु (Alloy) क्या है? ताँबे की दो मिश्रधातुओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
दो या दो से अधिक धातुओं अथवा किसी धातु एवं अधातु को निश्चित अनुपात में मिलाकर प्राप्त पदार्थ को मिश्रधातु (Alloy) कहते हैं। मिश्रधातुओं के गुण उनके अवयवों की अपेक्षा अधिक उपयोगी होते हैं।
ताँबे की प्रमुख मिश्रधातुएँ—
(i) पीतल (Brass) – ताँबा + जस्ता
(ii) काँसा (Bronze) – ताँबा + टिन
8. धातुएँ विद्युत की अच्छी सुचालक क्यों होती हैं?
उत्तर:
धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉनों (Free Electrons) की संख्या अधिक होती है। ये इलेक्ट्रॉन धातु के भीतर आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक गति कर सकते हैं। इसी कारण धातुएँ विद्युत तथा ऊष्मा की अच्छी सुचालक होती हैं।
9. संयोजकता (Valency) से क्या समझते हैं?
उत्तर:
किसी तत्व के परमाणु द्वारा रासायनिक अभिक्रिया के दौरान इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करने, त्यागने अथवा साझा करने की क्षमता को उसकी संयोजकता (Valency) कहते हैं।
किसी तत्व की संयोजकता उसके सबसे बाहरी कक्ष (संयोजकता कक्ष) में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करती है।
उदाहरण:
सोडियम (Na) का परमाणु क्रमांक 11 है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1 है। इसके बाहरी कक्ष में 1 इलेक्ट्रॉन है, इसलिए इसकी संयोजकता 1 होती है।
10. आघातवर्ध्यता तथा तन्यता का अर्थ बताइए।
उत्तर:
आघातवर्ध्यता (Malleability):
धातुओं का वह गुण, जिसके कारण उन्हें पीटकर पतली चादरों में बदला जा सकता है, आघातवर्ध्यता कहलाता है।
उदाहरण: सोना, चाँदी, ताँबा तथा ऐलुमिनियम।
तन्यता (Ductility):
धातुओं का वह गुण, जिसके कारण उन्हें खींचकर पतले तारों में बदला जा सकता है, तन्यता कहलाता है।
उदाहरण के लिए, एक ग्राम सोने से लगभग 2 किलोमीटर लंबा तार बनाया जा सकता है।
11. संक्षारण (Corrosion) से क्या समझते हैं?
उत्तर:
जब कोई धातु वायु, नमी, अम्ल अथवा अन्य रासायनिक पदार्थों के संपर्क में आकर धीरे-धीरे नष्ट होने लगती है, तो इस प्रक्रिया को संक्षारण (Corrosion) कहते हैं। संक्षारण के कारण धातुओं की चमक समाप्त हो जाती है तथा उनकी सतह पर ऑक्साइड, कार्बोनेट या सल्फाइड की परत बन जाती है।
उदाहरण:
(i) लोहे पर जंग लगना।
(ii) चाँदी का काला पड़ जाना।
(iii) ताँबे पर हरे रंग की परत जम जाना।
12. संक्षारण से बचने की तीन विधियाँ लिखिए।
उत्तर:
संक्षारण से बचने के लिए निम्नलिखित विधियाँ अपनाई जाती हैं—
(i) पेंट या ग्रीस लगाकर: धातु की सतह को वायु एवं नमी के संपर्क से बचाया जाता है।
(ii) यशदलेपन (Galvanization): लोहे पर जस्ते (Zinc) की परत चढ़ाई जाती है।
(iii) विद्युत लेपन (Electroplating): धातु की सतह पर किसी अन्य धातु की पतली परत चढ़ाकर उसे संक्षारण से सुरक्षित रखा जाता है।
13. एक ऐसी धातु तथा एक ऐसी अधातु का नाम लिखिए जो वायु के संपर्क में आते ही जल उठती है।
उत्तर:
(i) धातु: सोडियम (Na)
(ii) अधातु: श्वेत फॉस्फोरस (White Phosphorus)
सोडियम अत्यधिक अभिक्रियाशील धातु है। यह वायु में उपस्थित ऑक्सीजन एवं नमी के संपर्क में आते ही तीव्र अभिक्रिया करता है, इसलिए इसे केरोसीन तेल में रखा जाता है। श्वेत फॉस्फोरस भी वायु के संपर्क में स्वतः जल उठता है, इसलिए इसे जल के भीतर सुरक्षित रखा जाता है।
14. धातुएँ नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) से अभिक्रिया करने पर सामान्यतः हाइड्रोजन गैस क्यों नहीं देती हैं?
उत्तर:
नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) एक प्रबल ऑक्सीकारक (Oxidising Agent) है। धातु के साथ अभिक्रिया के दौरान उत्पन्न हाइड्रोजन गैस का भी यह ऑक्सीकरण करके जल में परिवर्तित कर देता है। इसलिए सामान्यतः धातुएँ नाइट्रिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त नहीं करती हैं।
अपवाद: अत्यंत तनु नाइट्रिक अम्ल के साथ मैग्नीशियम (Mg) तथा मैंगनीज (Mn) हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करते हैं।
15. एनोड पंक (Anode Mud) क्या है?
उत्तर:
धातुओं के विद्युत अपघटनी परिष्करण (Electrolytic Refining) के समय अशुद्ध धातु को एनोड तथा शुद्ध धातु को कैथोड बनाया जाता है। विद्युत धारा प्रवाहित करने पर शुद्ध धातु कैथोड पर जमा होती रहती है, जबकि अघुलनशील अशुद्धियाँ एनोड के नीचे एकत्र हो जाती हैं। इन्हें एनोड पंक (Anode Mud) कहते हैं।
ताँबे के परिष्करण में सोना, चाँदी तथा प्लैटिनम जैसी बहुमूल्य धातुएँ एनोड पंक के रूप में प्राप्त होती हैं।
16. निम्नलिखित की परिभाषा दीजिए—
(i) खनिज
उत्तर:
पृथ्वी की भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले तत्व अथवा उनके यौगिक खनिज (Minerals) कहलाते हैं।
(ii) अयस्क
उत्तर:
वे खनिज जिनसे धातुओं का आर्थिक रूप से तथा सरलता से निष्कर्षण किया जा सकता है, अयस्क (Ore) कहलाते हैं।
(iii) गैंग
उत्तर:
अयस्क के साथ उपस्थित मिट्टी, रेत, पत्थर तथा अन्य अवांछित अशुद्धियों को गैंग (Gangue) कहते हैं।
(iv) निस्तापन (Calcination)
उत्तर:
अयस्क को उसके गलनांक से कम ताप पर वायु की अनुपस्थिति अथवा सीमित वायु में गर्म करने की प्रक्रिया निस्तापन कहलाती है। इस प्रक्रिया द्वारा नमी तथा वाष्पशील अशुद्धियाँ दूर की जाती हैं।
(v) भर्जन (Roasting)
उत्तर:
सल्फाइड अयस्कों को उनके गलनांक से कम ताप पर वायु की पर्याप्त उपस्थिति में गर्म करने की प्रक्रिया भर्जन कहलाती है। इस प्रक्रिया में सल्फाइड अयस्क ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाते हैं।
17. आघातवर्ध्यता (Malleability) से क्या समझते हैं?
उत्तर:
धातुओं का वह गुण, जिसके कारण उन्हें पीटकर पतली चादरों में बदला जा सकता है, आघातवर्ध्यता कहलाता है।
उदाहरण: सोना, चाँदी, ताँबा तथा ऐलुमिनियम अत्यधिक आघातवर्ध्य धातुएँ हैं।
18. पोटैशियम तथा सोडियम को केरोसीन तेल में डुबाकर क्यों रखा जाता है?
उत्तर:
सोडियम तथा पोटैशियम अत्यंत अभिक्रियाशील धातुएँ हैं। ये वायु में उपस्थित ऑक्सीजन तथा नमी के संपर्क में आते ही तीव्र अभिक्रिया करके आग पकड़ सकती हैं। इसलिए इन्हें वायु के संपर्क से बचाने के लिए केरोसीन तेल में डुबाकर सुरक्षित रखा जाता है।
19. आयनिक यौगिकों के गलनांक एवं क्वथनांक उच्च क्यों होते हैं?
उत्तर:
आयनिक यौगिकों में धनायनों तथा ऋणायनों के बीच प्रबल वैद्युत-स्थैतिक आकर्षण बल होता है। इन बलों को तोड़ने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसलिए आयनिक यौगिकों के गलनांक तथा क्वथनांक सामान्यतः बहुत अधिक होते हैं।
20. द्विधर्मी (उभयधर्मी) ऑक्साइड क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
वे ऑक्साइड जो अम्ल तथा क्षार दोनों के साथ अभिक्रिया करके लवण एवं जल बनाते हैं, द्विधर्मी (Amphoteric) ऑक्साइड कहलाते हैं।
उदाहरण:
(i) ऐलुमिनियम ऑक्साइड (Al₂O₃)
(ii) जिंक ऑक्साइड (ZnO)
रासायनिक अभिक्रियाएँ:
Al2O3 + 6HCI → 2AICI3 + 3H2O
Al2O3 + 2NaOH → 2NaAIO2 + H2O
21. आयनिक यौगिक क्या हैं? इनके प्रमुख गुण लिखिए।
उत्तर:
वे यौगिक जो इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण (Transfer of Electrons) से धनायन एवं ऋणायन के बीच वैद्युत-स्थैतिक आकर्षण बल के कारण बनते हैं, आयनिक यौगिक (Ionic Compounds) कहलाते हैं।
आयनिक यौगिकों के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं—
(i) ये सामान्यतः कठोर एवं भंगुर होते हैं।
(ii) इनके गलनांक एवं क्वथनांक अधिक होते हैं।
(iii) ये ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते, लेकिन गलित अवस्था अथवा जलीय विलयन में विद्युत के अच्छे चालक होते हैं।
(iv) ये सामान्यतः जल में घुलनशील होते हैं।
22. धातुओं की अभिक्रियाशीलता श्रेणी (Reactivity Series) क्या है?
उत्तर:
धातुओं को उनकी अभिक्रियाशीलता के घटते क्रम में व्यवस्थित करने पर प्राप्त सूची को अभिक्रियाशीलता श्रेणी (Reactivity Series) कहते हैं।
अभिक्रियाशीलता श्रेणी इस प्रकार है—
K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > (H) > Cu > Hg > Ag > Au
इस श्रेणी में ऊपर स्थित धातुएँ अधिक अभिक्रियाशील तथा नीचे स्थित धातुएँ कम अभिक्रियाशील होती हैं।
23. धातुएँ अम्लों के साथ अभिक्रिया करके क्या बनाती हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
अधिकांश धातुएँ तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया करके लवण एवं हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती हैं।
इस अभिक्रिया में जिंक, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करके जिंक क्लोराइड तथा हाइड्रोजन गैस बनाता है।
24. धातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके क्या बनाती हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
धातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके सामान्यतः धातु ऑक्साइड बनाती हैं। अधिकांश धातु ऑक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं।
इस अभिक्रिया में मैग्नीशियम ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाता है।
25. धातुएँ जल के साथ किस प्रकार अभिक्रिया करती हैं?
उत्तर:
विभिन्न धातुएँ जल के साथ अलग-अलग प्रकार से अभिक्रिया करती हैं।
(i) पोटैशियम एवं सोडियम ठंडे जल के साथ तीव्र अभिक्रिया करते हैं।
(ii) कैल्सियम ठंडे जल के साथ धीरे-धीरे अभिक्रिया करता है।
(iii) मैग्नीशियम गर्म जल अथवा भाप के साथ अभिक्रिया करता है।
(iv) लोहा केवल भाप के साथ अभिक्रिया करता है।
(v) ताँबा, चाँदी एवं सोना जल के साथ अभिक्रिया नहीं करते।
26. धातुओं के प्रमुख भौतिक गुण लिखिए।
उत्तर:
धातुओं के प्रमुख भौतिक गुण निम्नलिखित हैं—
(i) इनमें धात्विक चमक होती है।
(ii) ये ऊष्मा एवं विद्युत के अच्छे सुचालक होते हैं।
(iii) ये आघातवर्ध्य तथा तन्य होते हैं।
(iv) ये सामान्यतः कठोर एवं मजबूत होते हैं।
(v) इनका गलनांक एवं क्वथनांक अधिक होता है।
(vi) ये धात्विक ध्वनि उत्पन्न करते हैं।
27. अधातुओं के प्रमुख भौतिक गुण लिखिए।
उत्तर:
अधातुओं के प्रमुख भौतिक गुण निम्नलिखित हैं—
(i) इनमें धात्विक चमक नहीं होती।
(ii) ये ऊष्मा एवं विद्युत की कुचालक होती हैं (ग्रेफाइट अपवाद है।)
(iii) ये भंगुर होती हैं तथा इन्हें पीटकर चादर या तार नहीं बनाया जा सकता।
(iv) ये धात्विक ध्वनि उत्पन्न नहीं करती हैं।
(v) इनका घनत्व तथा गलनांक सामान्यतः कम होता है।
28. धातुओं का निष्कर्षण (Extraction of Metals) क्या है?
उत्तर:
अयस्कों से शुद्ध धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया को धातुओं का निष्कर्षण (Extraction of Metals) कहते हैं।
इस प्रक्रिया के मुख्य चरण हैं—
(i) अयस्क का सांद्रण।
(ii) अयस्क का निस्तापन या भर्जन।
(iii) धातु का अपचयन।
(iv) धातु का परिष्करण।
29. विद्युत अपघटनी परिष्करण (Electrolytic Refining) क्या है?
उत्तर:
अशुद्ध धातु को विद्युत अपघटन की सहायता से शुद्ध करने की प्रक्रिया को विद्युत अपघटनी परिष्करण कहते हैं।
इस विधि में—
- अशुद्ध धातु को एनोड बनाया जाता है।
- शुद्ध धातु की पतली पट्टी को कैथोड बनाया जाता है।
- उसी धातु के लवण का विलयन विद्युत अपघट्य के रूप में प्रयोग किया जाता है।
विद्युत धारा प्रवाहित करने पर शुद्ध धातु कैथोड पर जमा होती जाती है तथा अशुद्धियाँ एनोड पंक के रूप में नीचे बैठ जाती हैं।
30. धातुओं तथा अधातुओं में अंतर लिखिए।
| धातु | अधातु |
|---|---|
| (i) इनमें धात्विक चमक होती है। | (i) इनमें सामान्यतः धात्विक चमक नहीं होती। |
| (ii) ये ऊष्मा एवं विद्युत की अच्छी सुचालक होती हैं। | (ii) ये ऊष्मा एवं विद्युत की कुचालक होती हैं। |
| (iii) ये आघातवर्ध्य एवं तन्य होती हैं। | (iii) ये भंगुर होती हैं। |
| (iv) ये धात्विक ध्वनि उत्पन्न करती हैं। | (iv) ये धात्विक ध्वनि उत्पन्न नहीं करतीं। |
| (v) ये इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाती हैं। | (v) ये इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाती हैं। |
31. धातुएँ विद्युत का चालन क्यों करती हैं?
उत्तर:
धातुओं में बड़ी संख्या में मुक्त इलेक्ट्रॉन (Free Electrons) उपस्थित होते हैं। ये इलेक्ट्रॉन धातु के भीतर आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक गति करते हैं। इसी कारण धातुएँ विद्युत की अच्छी सुचालक होती हैं।
32. धातु तथा अधातु की पहचान कैसे की जा सकती है?
उत्तर:
धातु तथा अधातु की पहचान उनके भौतिक एवं रासायनिक गुणों के आधार पर की जाती है।
धातु की पहचान—
(i) इनमें धात्विक चमक होती है।
(ii) ये ऊष्मा एवं विद्युत की अच्छी सुचालक होती हैं।
(iii) ये आघातवर्ध्य तथा तन्य होती हैं।
अधातु की पहचान—
(i) इनमें सामान्यतः चमक नहीं होती।
(ii) ये ऊष्मा एवं विद्युत की कुचालक होती हैं।
(iii) ये भंगुर होती हैं तथा इन्हें पीटकर चादर नहीं बनाया जा सकता।
33. धातुएँ हाइड्रोजन से ऊपर तथा नीचे होने पर क्या अंतर होता है?
उत्तर:
अभिक्रियाशीलता श्रेणी में हाइड्रोजन से ऊपर स्थित धातुएँ तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं।
जबकि हाइड्रोजन से नीचे स्थित धातुएँ तनु अम्लों से सामान्यतः हाइड्रोजन गैस विस्थापित नहीं कर पाती हैं।
उदाहरण:
(i) जिंक (Zn) – हाइड्रोजन से ऊपर है, इसलिए H₂ गैस मुक्त करता है।
(ii) ताँबा (Cu) – हाइड्रोजन से नीचे है, इसलिए H₂ गैस मुक्त नहीं करता।
34. धातुएँ अधातुओं के साथ किस प्रकार अभिक्रिया करती हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
धातुएँ अधातुओं के साथ अभिक्रिया करके आयनिक यौगिक बनाती हैं। इस प्रक्रिया में धातु इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन तथा अधातु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाती है।
इस अभिक्रिया में सोडियम तथा क्लोरीन मिलकर सोडियम क्लोराइड का निर्माण करते हैं।
35. धातुओं का उपयोग किन-किन कार्यों में किया जाता है?
उत्तर:
धातुओं के प्रमुख उपयोग निम्नलिखित हैं—
(i) विद्युत तार बनाने में।
(ii) रसोई के बर्तन बनाने में।
(iii) मशीनों एवं औद्योगिक उपकरणों के निर्माण में।
(iv) वाहन, रेल तथा वायुयान बनाने में।
(v) आभूषण बनाने में।
(vi) भवन एवं पुलों के निर्माण में।