Class 9 Science Revision Notes
बल तथा गति के नियम
Revise the NCERT Class 9 Science chapter, बल तथा गति के नियम, with these concise and well-organised revision notes. JAC Exam Prep (jac.jharkhandexamprep.com) provides NCERT Class 9 Science बल तथा गति के नियम Revision Notes based on the latest NCERT syllabus. Download the PDF below and revise the chapter for school examinations, CBSE board examinations, and competitive exams such as JEE and NEET.
Chapter Overview
| Class | 9 |
| Subject | Science |
| Chapter Name | बल तथा गति के नियम |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
बल तथा गति के नियम Revision Notes
1. बल (Force) क्या है?
उत्तर ⇒ किसी वस्तु को गति में लाने, गति को रोकने, गति की दिशा बदलने अथवा उसके आकार एवं आकृति में परिवर्तन करने वाली बाह्य क्रिया को बल (Force) कहते हैं। जब किसी वस्तु को धक्का दिया जाता है, खींचा जाता है या ठोकर मारी जाती है, तब उस पर बल लगाया जाता है। बल स्वयं दिखाई नहीं देता, बल्कि उसका प्रभाव दिखाई देता है। बल एक सदिश राशि (Vector Quantity) है क्योंकि इसमें परिमाण के साथ दिशा भी होती है। बल का SI मात्रक न्यूटन (Newton) है तथा इसे N से व्यक्त किया जाता है। 1 न्यूटन वह बल है जो 1 किलोग्राम द्रव्यमान की वस्तु में 1 m/s² का त्वरण उत्पन्न करे।
(i) बल किसी वस्तु की गति में परिवर्तन करता है।
(ii) बल वस्तु की दिशा बदल सकता है।
(iii) बल वस्तु का आकार बदल सकता है।
(iv) बल एक सदिश राशि है।
(v) इसका SI मात्रक न्यूटन (N) है।
2. बल का SI मात्रक क्या है?
उत्तर ⇒ बल का SI मात्रक न्यूटन (Newton) है, जिसे N द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इसका नाम प्रसिद्ध वैज्ञानिक सर आइज़ैक न्यूटन के सम्मान में रखा गया है। यदि 1 किलोग्राम द्रव्यमान की किसी वस्तु में 1 मीटर प्रति सेकंड² (1 m/s²) का त्वरण उत्पन्न करने के लिए जितना बल आवश्यक होता है, उसे 1 न्यूटन कहते हैं। SI पद्धति में बल का विमीय सूत्र kg·m/s² होता है। वैज्ञानिक गणनाओं तथा संख्यात्मक प्रश्नों में न्यूटन का व्यापक उपयोग किया जाता है।
1 न्यूटन = 1 kg × 1 m/s²
(i) बल का SI मात्रक न्यूटन (N) है।
(ii) इसका नाम आइज़ैक न्यूटन के नाम पर रखा गया है।
(iii) 1 N = 1 kg × 1 m/s²
(iv) यह SI पद्धति का मानक मात्रक है।
(v) संख्यात्मक प्रश्नों में इसका उपयोग किया जाता है।
3. बल के प्रभाव लिखिए।
उत्तर ⇒ किसी वस्तु पर बल लगाने से उसके ऊपर अनेक प्रकार के प्रभाव पड़ सकते हैं। बल वस्तु की गति को बढ़ा या घटा सकता है, उसकी दिशा बदल सकता है तथा उसका आकार या आकृति भी बदल सकता है। यदि किसी स्थिर वस्तु पर पर्याप्त असंतुलित बल लगाया जाए तो वह गति करने लगती है। इसी प्रकार गतिमान वस्तु को भी बल लगाकर रोका जा सकता है। इसलिए बल का प्रभाव वस्तु की गति तथा उसके आकार दोनों पर पड़ता है।
(i) बल वस्तु के वेग में परिवर्तन कर सकता है।
(ii) बल वस्तु की गति की दिशा बदल सकता है।
(iii) बल वस्तु का आकार या आकृति बदल सकता है।
(iv) बल स्थिर वस्तु को गतिमान बना सकता है।
(v) बल गतिमान वस्तु को रोक सकता है।
4. बल के प्रकार लिखिए।
उत्तर ⇒ परिणामी बल के आधार पर बल मुख्यतः दो प्रकार का होता है—संतुलित बल तथा असंतुलित बल। जब किसी वस्तु पर कार्य करने वाले सभी बलों का परिणामी शून्य होता है, तो वे संतुलित बल कहलाते हैं। इसके विपरीत यदि परिणामी बल शून्य नहीं होता, तो वह असंतुलित बल कहलाता है। वस्तु की गति में परिवर्तन मुख्यतः असंतुलित बल के कारण होता है।
(i) संतुलित बल
(ii) असंतुलित बल
(iii) संतुलित बल का परिणामी शून्य होता है।
(iv) असंतुलित बल का परिणामी शून्य नहीं होता।
(v) असंतुलित बल गति में परिवर्तन करता है।
5. संतुलित बल (Balanced Force) क्या है?
उत्तर ⇒ जब किसी वस्तु पर दो या दो से अधिक बल इस प्रकार कार्य करते हैं कि उनका परिणामी बल शून्य (0) हो जाता है, तो ऐसे बल संतुलित बल कहलाते हैं। इस स्थिति में वस्तु की गति की अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होता। यदि वस्तु विरामावस्था में है तो वह विरामावस्था में ही रहती है तथा यदि वह समान वेग से चल रही है तो उसी वेग से चलती रहती है। संतुलित बल वस्तु की आकृति में थोड़ा परिवर्तन अवश्य कर सकते हैं। रस्साकशी में दोनों टीमों द्वारा बराबर बल लगाने पर रस्सी का स्थिर रहना इसका प्रमुख उदाहरण है।
(i) परिणामी बल शून्य होता है।
(ii) गति की अवस्था नहीं बदलती।
(iii) विरामावस्था बनी रहती है।
(iv) समान गति बनी रहती है।
(v) रस्साकशी इसका प्रमुख उदाहरण है।
6. संतुलित बल के प्रभाव लिखिए।
उत्तर ⇒ संतुलित बल वस्तु की गति की अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं करता क्योंकि उसका परिणामी बल शून्य होता है। यदि वस्तु पहले से स्थिर है तो वह स्थिर रहती है तथा यदि वह समान वेग से चल रही है तो उसी वेग से चलती रहती है। हालांकि कुछ स्थितियों में संतुलित बल वस्तु के आकार या आकृति में परिवर्तन कर सकता है। जैसे रबर की गेंद या स्प्रिंग को दोनों ओर से समान बल से दबाने पर उसका आकार बदल जाता है।
(i) गति की अवस्था में परिवर्तन नहीं होता।
(ii) विरामावस्था बनी रहती है।
(iii) समान वेग बना रहता है।
(iv) आकृति में परिवर्तन हो सकता है।
(v) परिणामी बल शून्य होता है।
7. असंतुलित बल (Unbalanced Force) क्या है?
उत्तर ⇒ जब किसी वस्तु पर लगाए गए सभी बलों का परिणामी बल शून्य नहीं होता, तो ऐसे बल असंतुलित बल कहलाते हैं। असंतुलित बल वस्तु की गति की अवस्था में परिवर्तन कर देता है। यह किसी स्थिर वस्तु को गतिमान बना सकता है, गतिमान वस्तु को रोक सकता है, उसकी चाल बढ़ा या घटा सकता है तथा उसकी दिशा भी बदल सकता है। क्रिकेट की गेंद को फील्डर द्वारा पकड़ना असंतुलित बल का अच्छा उदाहरण है।
(i) परिणामी बल शून्य नहीं होता।
(ii) गति की अवस्था बदल जाती है।
(iii) चाल बढ़ या घट सकती है।
(iv) दिशा बदल सकती है।
(v) क्रिकेट की गेंद पकड़ना इसका उदाहरण है।
8. असंतुलित बल के प्रभाव लिखिए।
उत्तर ⇒ असंतुलित बल वस्तु की गति में परिवर्तन करता है। यह किसी स्थिर वस्तु को गतिमान बना सकता है तथा गतिमान वस्तु को रोक सकता है। इसके अतिरिक्त यह वस्तु की चाल बढ़ा या घटा सकता है तथा उसकी गति की दिशा भी बदल सकता है। दैनिक जीवन में अधिकांश गतियाँ असंतुलित बल के कारण ही उत्पन्न होती हैं।
(i) चाल में परिवर्तन करता है।
(ii) गति बढ़ा या घटा सकता है।
(iii) दिशा बदल सकता है।
(iv) विराम से गति में ला सकता है।
(v) गति से विराम में ला सकता है।
9. संतुलित एवं असंतुलित बल में अंतर लिखिए।
उत्तर ⇒ संतुलित तथा असंतुलित बलों में मुख्य अंतर उनके परिणामी बल तथा वस्तु की गति पर पड़ने वाले प्रभाव में होता है। संतुलित बल वस्तु की गति की अवस्था को नहीं बदलता, जबकि असंतुलित बल वस्तु की गति में परिवर्तन करता है। दोनों बलों का अध्ययन न्यूटन के गति के नियमों को समझने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
| संतुलित बल | असंतुलित बल |
|---|---|
| परिणामी बल शून्य होता है। | परिणामी बल शून्य नहीं होता। |
| गति की अवस्था नहीं बदलती। | गति की अवस्था बदल जाती है। |
| वस्तु स्थिर या समान गति में रहती है। | वस्तु गतिमान हो सकती है या रुक सकती है। |
| चाल एवं दिशा में परिवर्तन नहीं होता। | चाल एवं दिशा में परिवर्तन हो सकता है। |
| आकृति में परिवर्तन हो सकता है। | गति में परिवर्तन प्रमुख प्रभाव है। |
(i) संतुलित बल का परिणामी शून्य होता है।
(ii) असंतुलित बल का परिणामी शून्य नहीं होता।
(iii) संतुलित बल गति नहीं बदलता।
(iv) असंतुलित बल गति बदलता है।
(v) दोनों बलों का अध्ययन भौतिकी में महत्वपूर्ण है।
10. घर्षण बल (Frictional Force) क्या है?
उत्तर ⇒ जब दो सतहें एक-दूसरे के संपर्क में आती हैं और उनमें से कोई एक सतह दूसरी के सापेक्ष गति करती है या गति करने का प्रयास करती है, तब उनके बीच एक प्रतिरोधक बल उत्पन्न होता है जिसे घर्षण बल (Frictional Force) कहते हैं। घर्षण बल सदैव वस्तु की गति या संभावित गति की विपरीत दिशा में कार्य करता है। यही कारण है कि चलती हुई वस्तुएँ कुछ दूरी तय करने के बाद रुक जाती हैं। यदि लगाया गया बल घर्षण बल से अधिक हो जाए, तो वस्तु गति करने लगती है।
(i) घर्षण एक प्रतिरोधक बल है।
(ii) यह दो सतहों के संपर्क में उत्पन्न होता है।
(iii) यह गति की विपरीत दिशा में कार्य करता है।
(iv) वस्तुओं को धीरे-धीरे रोक देता है।
(v) चलना, लिखना और वाहन चलाना घर्षण के कारण ही संभव है।
11. न्यूटन के गति के नियम (Newton’s Laws of Motion) क्या हैं?
उत्तर ⇒ किसी वस्तु की गति तथा उसकी गति में होने वाले परिवर्तन के कारणों को समझाने के लिए महान वैज्ञानिक सर आइज़ैक न्यूटन ने गति के तीन नियम प्रतिपादित किए। इन्हें न्यूटन के गति के नियम कहा जाता है। ये नियम बताते हैं कि कोई वस्तु कब स्थिर रहेगी, कब गति करेगी तथा किसी वस्तु पर लगाए गए बल का उसकी गति पर क्या प्रभाव पड़ेगा। आधुनिक भौतिकी तथा यांत्रिकी (Mechanics) का आधार यही नियम हैं। दैनिक जीवन में चलना, दौड़ना, वाहन चलाना, गेंद फेंकना आदि सभी क्रियाएँ न्यूटन के गति के नियमों पर आधारित हैं।
न्यूटन के तीन नियम—
- न्यूटन का प्रथम गति नियम (जड़त्व का नियम)
- न्यूटन का द्वितीय गति नियम
- न्यूटन का तृतीय गति नियम
(i) न्यूटन ने गति के तीन नियम दिए।
(ii) ये नियम वस्तुओं की गति का वर्णन करते हैं।
(iii) ये बल एवं गति के संबंध को स्पष्ट करते हैं।
(iv) आधुनिक यांत्रिकी का आधार हैं।
(v) दैनिक जीवन में इनका व्यापक उपयोग होता है।
12. न्यूटन का प्रथम गति नियम (Newton’s First Law of Motion) क्या है?
उत्तर ⇒ न्यूटन के प्रथम गति नियम के अनुसार, यदि कोई वस्तु विरामावस्था में है तो वह विरामावस्था में ही बनी रहेगी तथा यदि कोई वस्तु सरल रेखा में एकसमान वेग से गतिमान है तो वह उसी अवस्था में तब तक बनी रहेगी, जब तक उस पर कोई बाह्य असंतुलित बल कार्य न करे। इस नियम को जड़त्व का नियम (Law of Inertia) भी कहा जाता है, क्योंकि यह वस्तुओं के जड़त्व की व्याख्या करता है। यह नियम सर्वप्रथम गैलीलियो के विचारों पर आधारित था, जिसे न्यूटन ने वैज्ञानिक रूप से प्रस्तुत किया।
(i) वस्तु अपनी अवस्था बनाए रखती है।
(ii) बाह्य असंतुलित बल आवश्यक होता है।
(iii) इसे जड़त्व का नियम कहते हैं।
(iv) यह गैलीलियो के विचारों पर आधारित है।
(v) गति का मूलभूत नियम है।
13. न्यूटन के प्रथम गति नियम का उदाहरण लिखिए।
उत्तर ⇒ न्यूटन के प्रथम गति नियम को दैनिक जीवन में अनेक उदाहरणों से समझा जा सकता है। यदि कोई पुस्तक मेज पर रखी हो, तो वह तब तक उसी स्थान पर रहती है जब तक कोई बाहरी बल उसे न हटाए। इसी प्रकार चलती हुई बस अचानक रुकने पर यात्री आगे की ओर झुक जाते हैं क्योंकि उनका शरीर गति की अवस्था बनाए रखना चाहता है। इसी प्रकार बस के अचानक चलने पर यात्री पीछे की ओर झुक जाते हैं। ये सभी घटनाएँ जड़त्व के कारण होती हैं।
(i) मेज पर रखी पुस्तक इसका उदाहरण है।
(ii) बस रुकने पर यात्री आगे झुकते हैं।
(iii) बस चलने पर यात्री पीछे झुकते हैं।
(iv) यह जड़त्व के कारण होता है।
(v) बाह्य बल के बिना अवस्था नहीं बदलती।
14. जड़त्व (Inertia) क्या है?
उत्तर ⇒ किसी वस्तु का वह गुण जिसके कारण वह अपनी विरामावस्था अथवा एकसमान गति की अवस्था में परिवर्तन का विरोध करती है, जड़त्व (Inertia) कहलाता है। प्रत्येक वस्तु में जड़त्व होता है। किसी वस्तु का जड़त्व उसके द्रव्यमान पर निर्भर करता है। जितना अधिक द्रव्यमान होगा, उतना ही अधिक जड़त्व होगा। इसी कारण भारी वस्तु को गति देना या रोकना हल्की वस्तु की तुलना में अधिक कठिन होता है।
(i) जड़त्व परिवर्तन का विरोध करता है।
(ii) प्रत्येक वस्तु में जड़त्व होता है।
(iii) जड़त्व द्रव्यमान पर निर्भर करता है।
(iv) अधिक द्रव्यमान ⇒ अधिक जड़त्व।
(v) प्रथम नियम को जड़त्व का नियम कहते हैं।
15. संवेग (Momentum) क्या है?
उत्तर ⇒ किसी वस्तु के द्रव्यमान तथा वेग के गुणनफल को संवेग (Momentum) कहते हैं। इसे p से प्रदर्शित किया जाता है। यदि किसी वस्तु का द्रव्यमान m तथा वेग v हो, तो उसका संवेग p = mv होगा। संवेग एक सदिश राशि है क्योंकि इसमें परिमाण के साथ दिशा भी होती है तथा इसकी दिशा वेग की दिशा के समान होती है। किसी वस्तु का वेग जितना अधिक होगा, उसका संवेग भी उतना ही अधिक होगा।
सूत्र :
p = m × v
SI मात्रक : kg·m/s
(i) संवेग = द्रव्यमान × वेग।
(ii) इसका प्रतीक p है।
(iii) यह सदिश राशि है।
(iv) इसकी दिशा वेग के समान होती है।
(v) SI मात्रक kg·m/s है।
16. संवेग और बल में क्या संबंध है?
उत्तर ⇒ बल तथा संवेग का आपस में घनिष्ठ संबंध है। जब किसी वस्तु पर असंतुलित बल लगाया जाता है, तब उसके वेग में परिवर्तन होता है और चूँकि संवेग वेग पर निर्भर करता है, इसलिए संवेग भी बदल जाता है। संवेग में परिवर्तन केवल लगाए गए बल पर ही नहीं, बल्कि बल के लगने के समय पर भी निर्भर करता है। यदि कम समय में अधिक बल लगाया जाए या अधिक समय तक कम बल लगाया जाए, तो दोनों स्थितियों में संवेग में परिवर्तन हो सकता है।
(i) बल संवेग को परिवर्तित करता है।
(ii) संवेग वेग पर निर्भर करता है।
(iii) असंतुलित बल आवश्यक है।
(iv) समय भी महत्वपूर्ण होता है।
(v) यह द्वितीय नियम का आधार है।
17. न्यूटन का द्वितीय गति नियम (Newton’s Second Law of Motion) क्या है?
उत्तर ⇒ न्यूटन के द्वितीय गति नियम के अनुसार, किसी वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर उस पर लगाए गए असंतुलित बल के समानुपाती होती है तथा यह परिवर्तन बल की दिशा में होता है। इस नियम से बल का गणितीय सूत्र प्राप्त होता है।
सूत्र :
F = m × a
जहाँ—
F = बल
m = द्रव्यमान
a = त्वरण
यह नियम बताता है कि किसी वस्तु का द्रव्यमान जितना अधिक होगा, उतना ही अधिक बल उसे समान त्वरण देने के लिए आवश्यक होगा।
(i) यह संवेग पर आधारित नियम है।
(ii) बल = द्रव्यमान × त्वरण।
(iii) सूत्र F = ma है।
(iv) बल की दिशा में त्वरण होता है।
(v) संख्यात्मक प्रश्नों में महत्वपूर्ण है।
18. न्यूटन का तृतीय गति नियम (Newton’s Third Law of Motion) क्या है?
उत्तर ⇒ न्यूटन के तृतीय गति नियम के अनुसार, “प्रत्येक क्रिया के बराबर तथा विपरीत दिशा में एक प्रतिक्रिया होती है।” जब एक वस्तु दूसरी वस्तु पर बल लगाती है, तब दूसरी वस्तु भी उसी पर समान परिमाण का किंतु विपरीत दिशा में बल लगाती है। ये दोनों बल क्रिया तथा प्रतिक्रिया कहलाते हैं। दोनों बल हमेशा एक साथ उत्पन्न होते हैं और अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं।
(i) प्रत्येक क्रिया की प्रतिक्रिया होती है।
(ii) दोनों बल समान परिमाण के होते हैं।
(iii) दोनों की दिशा विपरीत होती है।
(iv) दोनों अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं।
(v) दोनों एक साथ उत्पन्न होते हैं।
19. क्रिया तथा प्रतिक्रिया बल क्या हैं?
उत्तर ⇒ जब दो वस्तुएँ परस्पर अन्योन्य क्रिया करती हैं, तब वे एक-दूसरे पर समान परिमाण के किंतु विपरीत दिशा में बल लगाती हैं। इन्हें क्रिया (Action) तथा प्रतिक्रिया (Reaction) बल कहते हैं। क्रिया और प्रतिक्रिया बल कभी भी एक ही वस्तु पर कार्य नहीं करते, बल्कि हमेशा दो अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं। इसलिए ये एक-दूसरे को निरस्त नहीं करते। न्यूटन का तृतीय नियम इन्हीं बलों पर आधारित है।
(i) क्रिया और प्रतिक्रिया साथ-साथ होती हैं।
(ii) दोनों का परिमाण समान होता है।
(iii) दिशा विपरीत होती है।
(iv) दोनों अलग-अलग वस्तुओं पर लगते हैं।
(v) ये एक-दूसरे को समाप्त नहीं करते।
20. न्यूटन के तृतीय नियम का उदाहरण लिखिए।
उत्तर ⇒ सड़क पर चलना न्यूटन के तृतीय नियम का सबसे सरल उदाहरण है। जब हम चलते हैं, तो हमारे पैर सड़क को पीछे की ओर धक्का देते हैं। यह क्रिया है। इसके उत्तर में सड़क हमारे पैरों पर उतना ही बल आगे की दिशा में लगाती है। यह प्रतिक्रिया है। इसी प्रतिक्रिया बल के कारण हम आगे बढ़ पाते हैं। इसी प्रकार नाव से किनारे पर कूदने, बंदूक चलाने पर पीछे झटका लगने तथा रॉकेट के उड़ने की क्रिया भी न्यूटन के तृतीय नियम पर आधारित है।
(i) सड़क पर चलना इसका प्रमुख उदाहरण है।
(ii) पैर सड़क को पीछे धकेलते हैं।
(iii) सड़क शरीर को आगे धकेलती है।
(iv) क्रिया और प्रतिक्रिया साथ-साथ होती हैं।
(v) रॉकेट का उड़ना भी इसी नियम पर आधारित है।
21. न्यूटन के गति के नियमों का दैनिक जीवन में महत्व लिखिए।
उत्तर ⇒ न्यूटन के गति के नियम केवल भौतिकी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हमारे दैनिक जीवन में भी इनका व्यापक उपयोग होता है। वाहन चलाना, साइकिल चलाना, गेंद फेंकना, रॉकेट का प्रक्षेपण, सड़क पर चलना तथा मशीनों का कार्य करना सभी न्यूटन के गति के नियमों पर आधारित हैं। इन नियमों की सहायता से वैज्ञानिक विभिन्न प्रकार के वाहनों, मशीनों तथा अंतरिक्ष यानों का निर्माण करते हैं। इसलिए न्यूटन के गति के नियम आधुनिक विज्ञान और तकनीक की आधारशिला माने जाते हैं।
(i) वाहन चलाने में इनका उपयोग होता है।
(ii) खेलों में इनका महत्वपूर्ण योगदान है।
(iii) रॉकेट प्रक्षेपण में इनका उपयोग होता है।
(iv) मशीनों की कार्यप्रणाली इन्हीं नियमों पर आधारित है।
(v) आधुनिक भौतिकी का आधार हैं।
22. बल एवं गति में क्या संबंध है?
उत्तर ⇒ बल और गति का आपस में घनिष्ठ संबंध है। यदि किसी वस्तु पर असंतुलित बल लगाया जाता है, तो उसकी गति की अवस्था में परिवर्तन हो जाता है। बल किसी वस्तु को विरामावस्था से गति में ला सकता है, गतिमान वस्तु को रोक सकता है, उसकी चाल बढ़ा या घटा सकता है तथा उसकी दिशा भी बदल सकता है। यदि वस्तु पर संतुलित बल कार्य करे, तो उसकी गति की अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होता। इसलिए कहा जाता है कि बल ही गति में परिवर्तन का मुख्य कारण है।
(i) बल गति में परिवर्तन करता है।
(ii) असंतुलित बल आवश्यक होता है।
(iii) बल चाल बढ़ा या घटा सकता है।
(iv) बल दिशा बदल सकता है।
(v) संतुलित बल गति नहीं बदलता।
23. जड़त्व और द्रव्यमान में क्या संबंध है?
उत्तर ⇒ किसी वस्तु का जड़त्व उसके द्रव्यमान पर निर्भर करता है। जिस वस्तु का द्रव्यमान अधिक होता है, उसका जड़त्व भी अधिक होता है। इसलिए भारी वस्तु को गति देना या रोकना हल्की वस्तु की अपेक्षा अधिक कठिन होता है। इसी कारण एक भारी ट्रक को रोकने के लिए अधिक बल की आवश्यकता पड़ती है, जबकि साइकिल को कम बल से रोका जा सकता है। जड़त्व वस्तु का स्वाभाविक गुण है और यह न्यूटन के प्रथम गति नियम का आधार है।
(i) जड़त्व द्रव्यमान पर निर्भर करता है।
(ii) अधिक द्रव्यमान ⇒ अधिक जड़त्व।
(iii) भारी वस्तु को रोकना कठिन होता है।
(iv) हल्की वस्तु का जड़त्व कम होता है।
(v) प्रथम नियम जड़त्व पर आधारित है।
24. बल का सूत्र लिखिए।
उत्तर ⇒ न्यूटन के द्वितीय गति नियम के अनुसार किसी वस्तु पर लगाया गया बल उसके द्रव्यमान तथा त्वरण के गुणनफल के बराबर होता है। इस नियम से बल का सूत्र प्राप्त होता है।
सूत्र :
F = m × a
जहाँ—
- F = बल (Force)
- m = द्रव्यमान (Mass)
- a = त्वरण (Acceleration)
यदि किसी वस्तु का द्रव्यमान अधिक होगा, तो समान त्वरण उत्पन्न करने के लिए अधिक बल की आवश्यकता होगी।
(i) बल का सूत्र F = ma है।
(ii) F बल को दर्शाता है।
(iii) m द्रव्यमान को दर्शाता है।
(iv) a त्वरण को दर्शाता है।
(v) यह न्यूटन के द्वितीय नियम पर आधारित है।
25. संवेग का सूत्र एवं SI मात्रक लिखिए।
उत्तर ⇒ किसी वस्तु के द्रव्यमान और वेग के गुणनफल को संवेग कहते हैं। संवेग का प्रतीक p है। यदि वस्तु का द्रव्यमान m तथा वेग v हो, तो उसका संवेग निम्न प्रकार से ज्ञात किया जाता है—
सूत्र :
p = m × v
संवेग का SI मात्रक किलोग्राम मीटर प्रति सेकंड (kg·m/s) है। संवेग एक सदिश राशि है तथा इसकी दिशा वेग की दिशा के समान होती है।
(i) संवेग का सूत्र p = mv है।
(ii) इसका SI मात्रक kg·m/s है।
(iii) यह सदिश राशि है।
(iv) इसकी दिशा वेग के समान होती है।
(v) संवेग द्रव्यमान एवं वेग पर निर्भर करता है।
26. प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय गति नियम में अंतर लिखिए।
उत्तर ⇒ न्यूटन के तीनों गति नियम अलग-अलग परिस्थितियों में वस्तुओं की गति को समझाते हैं। प्रथम नियम जड़त्व का वर्णन करता है, द्वितीय नियम बल एवं त्वरण का संबंध बताता है तथा तृतीय नियम क्रिया एवं प्रतिक्रिया के सिद्धांत को स्पष्ट करता है।
| प्रथम नियम | द्वितीय नियम | तृतीय नियम |
|---|---|---|
| जड़त्व का नियम है। | बल एवं त्वरण का नियम है। | क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम है। |
| बाह्य बल की आवश्यकता बताता है। | F = ma का आधार है। | प्रत्येक क्रिया की समान एवं विपरीत प्रतिक्रिया होती है। |
| गति की अवस्था बनाए रखने की व्याख्या करता है। | गति में परिवर्तन की व्याख्या करता है। | दो वस्तुओं के पारस्परिक बल को बताता है। |
(i) प्रथम नियम जड़त्व पर आधारित है।
(ii) द्वितीय नियम F = ma बताता है।
(iii) तृतीय नियम क्रिया-प्रतिक्रिया पर आधारित है।
(iv) तीनों नियम परस्पर संबंधित हैं।
(v) ये आधुनिक यांत्रिकी का आधार हैं।
27. रॉकेट का उड़ना किस नियम पर आधारित है?
उत्तर ⇒ रॉकेट का प्रक्षेपण न्यूटन के तृतीय गति नियम पर आधारित है। रॉकेट के इंजन से गैसें अत्यधिक वेग से नीचे की ओर निकलती हैं। यह क्रिया है। इसके परिणामस्वरूप गैसें रॉकेट पर बराबर एवं विपरीत दिशा में बल लगाती हैं। यह प्रतिक्रिया है, जिसके कारण रॉकेट ऊपर की ओर उड़ता है। यही सिद्धांत जेट विमान तथा अन्य अंतरिक्ष यानों में भी उपयोग किया जाता है।
(i) यह तृतीय नियम पर आधारित है।
(ii) गैसें नीचे की ओर निकलती हैं।
(iii) प्रतिक्रिया बल रॉकेट को ऊपर ले जाता है।
(iv) क्रिया एवं प्रतिक्रिया साथ-साथ होती हैं।
(v) जेट इंजन भी इसी सिद्धांत पर कार्य करते हैं।
28. सड़क पर चलना न्यूटन के किस नियम का उदाहरण है?
उत्तर ⇒ सड़क पर चलना न्यूटन के तृतीय गति नियम का सबसे अच्छा उदाहरण है। जब हम चलते हैं, तो हमारे पैर सड़क को पीछे की ओर धक्का देते हैं। इसके बदले सड़क हमारे पैरों पर समान परिमाण का बल आगे की दिशा में लगाती है। इसी प्रतिक्रिया बल के कारण हमारा शरीर आगे बढ़ता है। यदि सड़क पर घर्षण न हो, तो चलना संभव नहीं होगा।
(i) यह तृतीय नियम का उदाहरण है।
(ii) पैर सड़क को पीछे धकेलते हैं।
(iii) सड़क शरीर को आगे बढ़ाती है।
(iv) घर्षण भी आवश्यक होता है।
(v) क्रिया एवं प्रतिक्रिया साथ-साथ होती हैं।
29. घर्षण बल का क्या महत्व है?
उत्तर ⇒ घर्षण बल हमारे दैनिक जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी के कारण हम सड़क पर चल पाते हैं, वाहन नियंत्रित कर पाते हैं, लिख सकते हैं तथा वस्तुओं को पकड़ सकते हैं। यदि घर्षण न हो, तो सभी सतहें फिसलन भरी हो जाएँगी और सामान्य कार्य करना कठिन हो जाएगा। यद्यपि घर्षण के कारण मशीनों में ऊर्जा की हानि भी होती है, फिर भी इसका महत्व बहुत अधिक है।
(i) घर्षण चलने में सहायता करता है।
(ii) वाहन रोकने में सहायक है।
(iii) लिखना एवं पकड़ना संभव बनाता है।
(iv) ऊर्जा की कुछ हानि भी होती है।
(v) दैनिक जीवन में इसका विशेष महत्व है।
30. अध्याय का निष्कर्ष लिखिए।
उत्तर ⇒ इस अध्याय में हमने बल, उसके प्रभाव, संतुलित एवं असंतुलित बल, घर्षण बल तथा न्यूटन के तीनों गति नियमों का अध्ययन किया। साथ ही जड़त्व, संवेग, बल एवं संवेग के संबंध तथा क्रिया-प्रतिक्रिया के सिद्धांत को समझा। ये सभी अवधारणाएँ भौतिकी की आधारभूत नींव हैं तथा आगे के अध्यायों और प्रतियोगी परीक्षाओं में अत्यंत उपयोगी हैं। इन सिद्धांतों की सहायता से हम दैनिक जीवन में होने वाली अनेक घटनाओं को वैज्ञानिक रूप से समझ सकते हैं।
(i) बल गति में परिवर्तन करता है।
(ii) न्यूटन ने गति के तीन नियम दिए।
(iii) जड़त्व प्रथम नियम का आधार है।
(iv) संवेग = द्रव्यमान × वेग।
(v) यह अध्याय भौतिकी की मूलभूत अवधारणाओं को समझने में सहायक है।