Class 9 Science Revision Notes
क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं?
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Chapter Overview
| Class | 9 |
| Subject | Science |
| Chapter Name | क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं? |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं? Revision Notes
1. शुद्ध पदार्थ (Pure Substance) क्या है?
उत्तर ⇒ वह पदार्थ जो केवल एक ही प्रकार के कणों (परमाणु, अणु या आयन) से मिलकर बना होता है तथा जिसमें किसी अन्य पदार्थ की मिलावट नहीं होती, शुद्ध पदार्थ कहलाता है। इसका संघटन एवं गुण पूरे पदार्थ में समान होते हैं। उदाहरण – शुद्ध जल, ऑक्सीजन, सोना आदि।
(i) केवल एक प्रकार के कणों से बना होता है।
(ii) इसमें कोई मिलावट नहीं होती।
(iii) इसका संघटन समान होता है।
(iv) इसके गुण निश्चित होते हैं।
(v) उदाहरण – शुद्ध जल, ऑक्सीजन, सोना।
2. मिश्रण (Mixture) क्या है?
उत्तर ⇒ वह पदार्थ जो दो या दो से अधिक शुद्ध पदार्थों (तत्वों या यौगिकों) के भौतिक रूप से मिलने से बनता है, मिश्रण कहलाता है। मिश्रण के घटक अपने-अपने गुण बनाए रखते हैं तथा इन्हें भौतिक विधियों द्वारा अलग किया जा सकता है। उदाहरण – समुद्र का जल, दूध, वायु आदि।
(i) दो या दो से अधिक पदार्थों से बनता है।
(ii) घटक अपने गुण बनाए रखते हैं।
(iii) भौतिक विधियों से पृथक किए जा सकते हैं।
(iv) संघटन निश्चित नहीं होता।
(v) उदाहरण – समुद्र का जल, दूध, वायु।
3. मिश्रण कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर ⇒ मिश्रण मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं— समांगी मिश्रण तथा विषमांगी मिश्रण। समांगी मिश्रण में सभी घटक समान रूप से मिले होते हैं, जबकि विषमांगी मिश्रण में घटक समान रूप से मिश्रित नहीं होते।
(i) समांगी मिश्रण।
(ii) विषमांगी मिश्रण।
(iii) समांगी मिश्रण का संघटन समान होता है।
(iv) विषमांगी मिश्रण का संघटन असमान होता है।
(v) दोनों के गुण अलग-अलग होते हैं।
4. समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture) क्या है?
उत्तर ⇒ वह मिश्रण जिसमें सभी अवयव समान रूप से मिश्रित होते हैं तथा पूरे मिश्रण का संघटन एक समान होता है, समांगी मिश्रण कहलाता है। इसमें विभिन्न घटकों के बीच कोई स्पष्ट सीमा दिखाई नहीं देती। उदाहरण – चीनी का घोल, नमक का घोल।
(i) संघटन समान होता है।
(ii) घटकों के बीच स्पष्ट सीमा नहीं होती।
(iii) पूरे मिश्रण का स्वरूप एक जैसा होता है।
(iv) इसे एक ही पदार्थ जैसा देखा जाता है।
(v) उदाहरण – नमक का घोल, चीनी का घोल।
5. विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous Mixture) क्या है?
उत्तर ⇒ वह मिश्रण जिसमें विभिन्न अवयव समान रूप से मिश्रित नहीं होते तथा उनके बीच स्पष्ट पृथक्करण दिखाई देता है, विषमांगी मिश्रण कहलाता है। उदाहरण – पानी में तेल, धूलयुक्त हवा, रेत और लोहे की बुरादे का मिश्रण।
(i) संघटन असमान होता है।
(ii) घटकों के बीच स्पष्ट सीमा होती है।
(iii) विभिन्न भागों के गुण अलग हो सकते हैं।
(iv) इसे आसानी से पहचाना जा सकता है।
(v) उदाहरण – पानी में तेल, रेत और लोहे की बुरादे का मिश्रण।
6. समांगी एवं विषमांगी मिश्रण में अंतर लिखिए।
उत्तर ⇒ समांगी मिश्रण का संघटन पूरे द्रव्यमान में समान होता है तथा इसके विभिन्न अवयवों के बीच कोई स्पष्ट सीमा दिखाई नहीं देती। इसके विपरीत विषमांगी मिश्रण का संघटन असमान होता है और इसके अवयवों के बीच स्पष्ट पृथक्करण दिखाई देता है।
| समांगी मिश्रण | विषमांगी मिश्रण |
|---|---|
| (i) संघटन समान होता है। | (i) संघटन असमान होता है। |
| (ii) पृथक्करण सीमा नहीं होती। | (ii) स्पष्ट पृथक्करण सीमा होती है। |
| (iii) एक जैसा दिखाई देता है। | (iii) विभिन्न भाग अलग दिखाई देते हैं। |
| (iv) उदाहरण – चीनी का घोल। | (iv) उदाहरण – चॉक का निलंबन। |
| (v) सभी भागों के गुण समान होते हैं। | (v) विभिन्न भागों के गुण अलग हो सकते हैं। |
7. मिश्र धातु (Alloy) क्या है?
उत्तर ⇒ दो या दो से अधिक धातुओं अथवा किसी धातु एवं अधातु के समांगी मिश्रण को मिश्र धातु (Alloy) कहते हैं। मिश्र धातुएँ अपने घटकों के गुणों को बनाए रखती हैं तथा विशेष गुण प्राप्त करने के लिए बनाई जाती हैं। उदाहरण – पीतल, काँसा एवं स्टील।
(i) दो या दो से अधिक धातुओं का मिश्रण है।
(ii) यह समांगी मिश्रण होता है।
(iii) विशेष गुण प्राप्त करने के लिए बनाया जाता है।
(iv) उदाहरण – पीतल, काँसा, स्टील।
(v) इसे मिश्रण माना जाता है।
8. विलयन (Solution) क्या है?
उत्तर ⇒ दो या दो से अधिक पदार्थों से बना समांगी मिश्रण विलयन कहलाता है। इसमें विलेय पूर्ण रूप से विलायक में घुल जाता है, जिससे पूरे विलयन का संघटन समान हो जाता है। उदाहरण – नमक का घोल, चीनी का घोल तथा वायु।
(i) यह समांगी मिश्रण होता है।
(ii) विलेय पूरी तरह घुल जाता है।
(iii) संघटन समान होता है।
(iv) पृथक्करण सीमा नहीं होती।
(v) उदाहरण – नमक का घोल।
9. विलयन के घटक कौन-कौन से हैं?
उत्तर ⇒ किसी भी विलयन के दो मुख्य घटक होते हैं— विलायक (Solvent) तथा विलेय (Solute)। विलायक वह पदार्थ होता है जिसकी मात्रा अधिक होती है, जबकि विलेय वह पदार्थ होता है जो कम मात्रा में विलायक में घुला रहता है।
(i) विलायक।
(ii) विलेय।
(iii) विलायक की मात्रा अधिक होती है।
(iv) विलेय की मात्रा कम होती है।
(v) दोनों मिलकर विलयन बनाते हैं।
10. विलायक (Solvent) एवं विलेय (Solute) क्या हैं?
उत्तर ⇒ विलायक वह घटक है जिसकी मात्रा विलयन में अधिक होती है तथा जिसमें अन्य पदार्थ घुलता है। विलेय वह पदार्थ है जिसकी मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है और जो विलायक में घुलकर विलयन बनाता है। उदाहरण – चीनी के घोल में जल विलायक तथा चीनी विलेय होती है।
(i) विलायक की मात्रा अधिक होती है।
(ii) विलेय की मात्रा कम होती है।
(iii) विलेय, विलायक में घुलता है।
(iv) दोनों मिलकर विलयन बनाते हैं।
(v) उदाहरण – जल (विलायक), चीनी (विलेय)।
11. विलयन (Solution) के प्रमुख गुणधर्म लिखिए।
उत्तर ⇒ विलयन एक समांगी मिश्रण होता है, जिसमें विलेय के कण बहुत छोटे होते हैं। ये कण प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं करते तथा सामान्य छानन विधि द्वारा अलग नहीं किए जा सकते। विलयन लंबे समय तक स्थिर रहता है।
(i) यह समांगी मिश्रण होता है।
(ii) कणों का आकार 1 nm से भी छोटा होता है।
(iii) टिण्डल प्रभाव नहीं दिखाता।
(iv) छानन द्वारा पृथक नहीं किया जा सकता।
(v) लंबे समय तक स्थिर रहता है।
12. विलयन की घुलनशीलता (Solubility) क्या है?
उत्तर ⇒ किसी निश्चित तापमान पर किसी निश्चित मात्रा के विलायक में जितनी अधिकतम मात्रा में विलेय घुल सकता है, उसे उस विलेय की घुलनशीलता कहते हैं। प्रत्येक पदार्थ की घुलनशीलता अलग-अलग होती है तथा यह तापमान पर निर्भर करती है।
(i) निश्चित तापमान पर निर्धारित होती है।
(ii) विलेय की अधिकतम घुलने वाली मात्रा होती है।
(iii) प्रत्येक पदार्थ की घुलनशीलता अलग होती है।
(iv) तापमान से प्रभावित होती है।
(v) विलायक पर निर्भर करती है।
13. संतृप्त विलयन (Saturated Solution) क्या है?
उत्तर ⇒ जब किसी निश्चित तापमान पर किसी विलयन में और अधिक विलेय नहीं घुल सकता, तब उस विलयन को संतृप्त विलयन कहते हैं। इस अवस्था में अतिरिक्त विलेय नीचे बैठ जाता है या घुलता नहीं है।
(i) अधिक विलेय नहीं घुलता।
(ii) निश्चित तापमान पर बनता है।
(iii) अतिरिक्त विलेय नीचे रह जाता है।
(iv) यह अधिकतम घुलनशीलता की अवस्था है।
(v) संतुलित अवस्था होती है।
14. असंतृप्त विलयन (Unsaturated Solution) क्या है?
उत्तर ⇒ जिस विलयन में किसी निश्चित तापमान पर अभी और विलेय घुल सकता है, उसे असंतृप्त विलयन कहते हैं। इसमें विलेय की मात्रा उसकी घुलनशीलता से कम होती है।
(i) इसमें और विलेय घुल सकता है।
(ii) विलेय की मात्रा कम होती है।
(iii) निश्चित तापमान पर बनता है।
(iv) यह संतृप्त नहीं होता।
(v) घुलनशीलता से कम विलेय उपस्थित रहता है।
15. विलयन की सांद्रता (Concentration of Solution) क्या है?
उत्तर ⇒ किसी निश्चित मात्रा के विलायक अथवा विलयन में घुले हुए विलेय की मात्रा को विलयन की सांद्रता कहते हैं। सांद्रता से यह ज्ञात होता है कि विलयन में विलेय कम है या अधिक।
(i) विलेय की मात्रा को दर्शाती है।
(ii) विलायक या विलयन के आधार पर व्यक्त की जाती है।
(iii) सांद्र एवं तनु विलयन की पहचान होती है।
(iv) प्रतिशत के रूप में व्यक्त की जा सकती है।
(v) यह विलयन का महत्वपूर्ण गुण है।
16. विलयन की सांद्रता को व्यक्त करने की प्रमुख विधियाँ लिखिए।
उत्तर ⇒ विलयन की सांद्रता को व्यक्त करने के लिए कई विधियों का उपयोग किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से द्रव्यमान प्रतिशत तथा द्रव्यमान/आयतन प्रतिशत का प्रयोग किया जाता है। इनसे यह ज्ञात होता है कि विलयन में विलेय की मात्रा कितनी है।
(i) द्रव्यमान/द्रव्यमान प्रतिशत।
(ii) द्रव्यमान/आयतन प्रतिशत।
(iii) सांद्रता विलेय की मात्रा बताती है।
(iv) प्रतिशत के रूप में व्यक्त की जाती है।
(v) वैज्ञानिक गणनाओं में उपयोगी है।
17. निलंबन (Suspension) क्या है?
उत्तर ⇒ वह विषमांगी मिश्रण जिसमें विलेय के कण विलायक में अघुलनशील रहते हैं तथा उन्हें नग्न आँखों से देखा जा सकता है, निलंबन कहलाता है। कुछ समय तक स्थिर रखने पर इसके कण नीचे बैठ जाते हैं।
(i) यह विषमांगी मिश्रण है।
(ii) कण अघुलनशील होते हैं।
(iii) कण आँखों से देखे जा सकते हैं।
(iv) कुछ समय बाद नीचे बैठ जाते हैं।
(v) उदाहरण – जल में चॉक का निलंबन।
18. निलंबन के प्रमुख गुणधर्म लिखिए।
उत्तर ⇒ निलंबन के कण बड़े होते हैं, इसलिए वे प्रकाश का प्रकीर्णन करते हैं तथा छानन विधि द्वारा आसानी से अलग किए जा सकते हैं। इसे कुछ समय तक स्थिर छोड़ने पर इसके कण नीचे बैठ जाते हैं।
(i) यह विषमांगी मिश्रण है।
(ii) कण नग्न आँखों से दिखाई देते हैं।
(iii) टिण्डल प्रभाव दिखाता है।
(iv) कण नीचे बैठ जाते हैं।
(v) छानन द्वारा पृथक किए जा सकते हैं।
19. कोलॉयड (Colloid) या कोलॉयडल विलयन क्या है?
उत्तर ⇒ कोलॉयड वह विषमांगी मिश्रण है जिसमें विलेय के अत्यंत सूक्ष्म कण विलायक में समान रूप से फैले रहते हैं, लेकिन पूर्णतः घुलते नहीं हैं। यह देखने में समांगी प्रतीत होता है, पर वास्तव में विषमांगी मिश्रण होता है। दूध इसका प्रमुख उदाहरण है।
(i) यह विषमांगी मिश्रण है।
(ii) देखने में समांगी प्रतीत होता है।
(iii) कण बहुत छोटे होते हैं।
(iv) दूध इसका प्रमुख उदाहरण है।
(v) कण आसानी से नीचे नहीं बैठते।
20. कोलॉयड के प्रमुख गुणधर्म लिखिए।
उत्तर ⇒ कोलॉयड के कण नग्न आँखों से दिखाई नहीं देते, लेकिन वे प्रकाश का प्रकीर्णन करते हैं। इसके कण लंबे समय तक स्थिर रहते हैं तथा सामान्य छानन विधि द्वारा अलग नहीं किए जा सकते। इन्हें विशेष विधि अपकेंद्रीकरण (Centrifugation) द्वारा पृथक किया जा सकता है।
(i) यह विषमांगी मिश्रण है।
(ii) कण नग्न आँखों से नहीं दिखते।
(iii) टिण्डल प्रभाव प्रदर्शित करता है।
(iv) कण नीचे नहीं बैठते।
(v) अपकेंद्रीकरण द्वारा पृथक किए जा सकते हैं।
21. टिण्डल प्रभाव (Tyndall Effect) क्या है?
उत्तर ⇒ जब कोलॉयड के सूक्ष्म कणों पर प्रकाश की किरण पड़ती है, तो वे प्रकाश का प्रकीर्णन (फैलाव) कर देते हैं, जिससे प्रकाश का मार्ग दिखाई देने लगता है। इस घटना को टिण्डल प्रभाव कहते हैं। इसकी खोज जॉन टिण्डल ने की थी।
(i) कोलॉयड के कण प्रकाश का प्रकीर्णन करते हैं।
(ii) प्रकाश का मार्ग दिखाई देता है।
(iii) यह कोलॉयड का प्रमुख गुण है।
(iv) निलंबन भी टिण्डल प्रभाव दिखाता है।
(v) इसकी खोज जॉन टिण्डल ने की।
22. कोलॉयडल विलयन के घटक कौन-कौन से हैं?
उत्तर ⇒ कोलॉयडल विलयन के दो मुख्य घटक होते हैं— परिक्षिप्त प्रावस्था (Dispersed Phase) तथा परिक्षेपण माध्यम (Dispersion Medium)। परिक्षिप्त प्रावस्था के कण परिक्षेपण माध्यम में समान रूप से फैले रहते हैं।
(i) परिक्षिप्त प्रावस्था।
(ii) परिक्षेपण माध्यम।
(iii) परिक्षिप्त प्रावस्था विलेय के समान होती है।
(iv) परिक्षेपण माध्यम विलायक के समान होता है।
(v) दोनों मिलकर कोलॉयड बनाते हैं।
23. भौतिक गुण (Physical Properties) क्या हैं?
उत्तर ⇒ किसी पदार्थ के वे गुण जिनका अवलोकन एवं मापन बिना उसकी रासायनिक प्रकृति बदले किया जा सकता है, भौतिक गुण कहलाते हैं। जैसे— रंग, घनत्व, कठोरता, द्रवणांक, क्वथनांक, बहाव आदि।
(i) बिना रासायनिक परिवर्तन के देखे जा सकते हैं।
(ii) रंग भौतिक गुण है।
(iii) घनत्व भौतिक गुण है।
(iv) द्रवणांक एवं क्वथनांक भौतिक गुण हैं।
(v) कठोरता भी भौतिक गुण है।
24. रासायनिक गुण (Chemical Properties) क्या हैं?
उत्तर ⇒ किसी पदार्थ के वे गुण जो उसकी रासायनिक प्रकृति एवं अभिक्रियाशीलता को दर्शाते हैं, रासायनिक गुण कहलाते हैं। जैसे— ज्वलनशीलता, अम्लता, क्षारीयता तथा ऑक्सीकरण की क्षमता।
(i) रासायनिक अभिक्रिया से संबंधित होते हैं।
(ii) ज्वलनशीलता रासायनिक गुण है।
(iii) अम्लता एवं क्षारीयता रासायनिक गुण हैं।
(iv) पदार्थ की अभिक्रियाशीलता दर्शाते हैं।
(v) नया पदार्थ बनने की संभावना होती है।
25. भौतिक परिवर्तन (Physical Change) क्या है?
उत्तर ⇒ ऐसा परिवर्तन जिसमें पदार्थ के केवल भौतिक गुण या अवस्था बदलती है, लेकिन उसका रासायनिक संघटन नहीं बदलता, भौतिक परिवर्तन कहलाता है। यह सामान्यतः उत्क्रमणीय (Reversible) होता है। उदाहरण— बर्फ का पिघलना एवं पानी का वाष्प बनना।
(i) नया पदार्थ नहीं बनता।
(ii) रासायनिक संघटन नहीं बदलता।
(iii) केवल अवस्था या भौतिक गुण बदलते हैं।
(iv) यह सामान्यतः उत्क्रमणीय होता है।
(v) उदाहरण— बर्फ का पिघलना।
26. रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change) क्या है?
उत्तर ⇒ ऐसा परिवर्तन जिसमें किसी पदार्थ का रासायनिक संघटन बदल जाता है तथा एक या एक से अधिक नए पदार्थों का निर्माण होता है, रासायनिक परिवर्तन कहलाता है। यह परिवर्तन सामान्यतः अनुत्क्रमणीय (Irreversible) होता है। उदाहरण – लकड़ी का जलना, लोहे में जंग लगना तथा दूध का फटना।
(i) नया पदार्थ बनता है।
(ii) रासायनिक संघटन बदल जाता है।
(iii) सामान्यतः अनुत्क्रमणीय होता है।
(iv) ऊर्जा का अवशोषण या उत्सर्जन होता है।
(v) उदाहरण – लकड़ी का जलना।
27. भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन में अंतर लिखिए।
उत्तर ⇒ भौतिक परिवर्तन में केवल पदार्थ के भौतिक गुण बदलते हैं और नया पदार्थ नहीं बनता, जबकि रासायनिक परिवर्तन में नया पदार्थ बनता है तथा पदार्थ का रासायनिक संघटन बदल जाता है।
| भौतिक परिवर्तन | रासायनिक परिवर्तन |
|---|---|
| (i) नया पदार्थ नहीं बनता। | (i) नया पदार्थ बनता है। |
| (ii) रासायनिक संघटन नहीं बदलता। | (ii) रासायनिक संघटन बदल जाता है। |
| (iii) सामान्यतः उत्क्रमणीय होता है। | (iii) सामान्यतः अनुत्क्रमणीय होता है। |
| (iv) कम ऊर्जा का परिवर्तन होता है। | (iv) अधिक ऊर्जा का परिवर्तन हो सकता है। |
| (v) उदाहरण – बर्फ का पिघलना। | (v) उदाहरण – लकड़ी का जलना। |
28. शुद्ध पदार्थों के मुख्य प्रकार कौन-कौन से हैं?
उत्तर ⇒ रासायनिक संघटन के आधार पर शुद्ध पदार्थों को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जाता है— तत्त्व (Element) तथा यौगिक (Compound)। दोनों का संघटन निश्चित होता है तथा इनके गुण भी निश्चित होते हैं।
(i) तत्त्व।
(ii) यौगिक।
(iii) दोनों शुद्ध पदार्थ हैं।
(iv) दोनों का संघटन निश्चित होता है।
(v) रासायनिक रूप से परिभाषित होते हैं।
29. तत्त्व (Element) क्या है?
उत्तर ⇒ तत्त्व वह शुद्ध पदार्थ है जिसे रासायनिक विधियों द्वारा भी सरल पदार्थों में विभाजित नहीं किया जा सकता। यह केवल एक ही प्रकार के परमाणुओं से मिलकर बना होता है। रॉबर्ट बॉयल ने सबसे पहले “तत्त्व” शब्द का प्रयोग किया तथा इसकी आधुनिक परिभाषा एंटोनी लॉरेंट लवॉयजिए ने दी।
(i) शुद्ध पदार्थ होता है।
(ii) केवल एक प्रकार के परमाणुओं से बना होता है।
(iii) रासायनिक विधि से विभाजित नहीं किया जा सकता।
(iv) लवॉयजिए ने इसकी आधुनिक परिभाषा दी।
(v) उदाहरण – ऑक्सीजन, लोहा, सोना।
30. तत्त्वों का वर्गीकरण कैसे किया जाता है?
उत्तर ⇒ तत्त्वों को उनके भौतिक एवं रासायनिक गुणों के आधार पर तीन वर्गों में बाँटा जाता है— धातु, अधातु तथा उपधातु। प्रत्येक वर्ग के तत्त्वों के गुण एवं उपयोग अलग-अलग होते हैं।
(i) धातु।
(ii) अधातु।
(iii) उपधातु।
(iv) वर्गीकरण गुणों के आधार पर किया जाता है।
(v) प्रत्येक वर्ग के गुण अलग होते हैं।
31. धातु (Metal) क्या है?
उत्तर ⇒ धातु वे तत्व हैं जो सामान्य रासायनिक अभिक्रियाओं में अपने परमाणुओं से एक, दो या तीन इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन (Cation) बनाने की प्रवृत्ति रखते हैं। धातुएँ सामान्यतः चमकीली, तन्य, आघातवर्ध्य तथा ऊष्मा एवं विद्युत की सुचालक होती हैं। उदाहरण – सोना, चाँदी, ताँबा, लोहा, सोडियम आदि।
(i) इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाती हैं।
(ii) ऊष्मा एवं विद्युत की सुचालक होती हैं।
(iii) चमकीली होती हैं।
(iv) तन्य एवं आघातवर्ध्य होती हैं।
(v) उदाहरण – सोना, ताँबा, लोहा।
32. धातुओं के प्रमुख गुणधर्म लिखिए।
उत्तर ⇒ धातुएँ सामान्यतः चमकीली होती हैं तथा ऊष्मा एवं विद्युत की अच्छी सुचालक होती हैं। इन्हें तार के रूप में खींचा जा सकता है (तन्यता) तथा पीटकर पतली चादरों में बदला जा सकता है (आघातवर्ध्यता)। अधिकांश धातुएँ ठोस होती हैं, जबकि पारा कमरे के तापमान पर द्रव अवस्था में पाया जाता है।
(i) चमकीली होती हैं।
(ii) ऊष्मा एवं विद्युत की सुचालक होती हैं।
(iii) तन्य होती हैं।
(iv) आघातवर्ध्य होती हैं।
(v) पारा द्रव धातु है।
33. अधातु (Non-metal) क्या है?
उत्तर ⇒ अधातु वे तत्व हैं जो सामान्य रासायनिक अभिक्रियाओं में एक या एक से अधिक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन (Anion) बनाने की प्रवृत्ति रखते हैं। ये सामान्यतः ऊष्मा एवं विद्युत की कुचालक होती हैं। उदाहरण – ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, कार्बन, क्लोरीन आदि।
(i) इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाती हैं।
(ii) ऊष्मा एवं विद्युत की कुचालक होती हैं।
(iii) सामान्यतः चमकीली नहीं होतीं।
(iv) विभिन्न रंगों की हो सकती हैं।
(v) उदाहरण – ऑक्सीजन, कार्बन, क्लोरीन।
34. अधातुओं के प्रमुख गुणधर्म लिखिए।
उत्तर ⇒ अधातुएँ सामान्यतः ऊष्मा एवं विद्युत की कुचालक होती हैं। ये तन्य, आघातवर्ध्य तथा प्रतिध्वनिपूर्ण नहीं होतीं। अधिकांश अधातुएँ भंगुर होती हैं तथा विभिन्न रंगों में पाई जाती हैं।
(i) ऊष्मा एवं विद्युत की कुचालक होती हैं।
(ii) तन्य नहीं होतीं।
(iii) आघातवर्ध्य नहीं होतीं।
(iv) प्रतिध्वनिपूर्ण नहीं होतीं।
(v) अधिकांश भंगुर होती हैं।
35. उपधातु (Metalloid) क्या है?
उत्तर ⇒ उपधातु वे तत्व हैं जिनमें धातुओं तथा अधातुओं दोनों के गुण पाए जाते हैं। इनका व्यवहार परिस्थितियों के अनुसार बदल सकता है। उदाहरण – बोरॉन, सिलिकॉन तथा जर्मेनियम।
(i) धातु एवं अधातु दोनों के गुण होते हैं।
(ii) व्यवहार परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
(iii) अर्धचालक गुण प्रदर्शित कर सकते हैं।
(iv) वैज्ञानिक एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उपयोगी हैं।
(v) उदाहरण – सिलिकॉन, बोरॉन, जर्मेनियम।
36. यौगिक (Compound) क्या है?
उत्तर ⇒ यौगिक वह शुद्ध पदार्थ है जो दो या दो से अधिक तत्वों के निश्चित अनुपात में रासायनिक संयोजन से बनता है। यौगिक के गुण उसके घटक तत्वों से भिन्न होते हैं तथा इसे केवल रासायनिक या वैद्युत-रासायनिक विधियों द्वारा ही पृथक किया जा सकता है। उदाहरण – जल (H₂O), सोडियम क्लोराइड (NaCl)।
(i) दो या दो से अधिक तत्वों से बनता है।
(ii) निश्चित अनुपात में बनता है।
(iii) रासायनिक संयोजन से बनता है।
(iv) इसके गुण घटक तत्वों से भिन्न होते हैं।
(v) उदाहरण – जल, सामान्य नमक।
37. मिश्रण एवं यौगिक में अंतर लिखिए।
उत्तर ⇒ मिश्रण में पदार्थ केवल भौतिक रूप से मिलते हैं, जबकि यौगिक में तत्व रासायनिक अभिक्रिया करके नया पदार्थ बनाते हैं। मिश्रण के घटकों को भौतिक विधियों से अलग किया जा सकता है, जबकि यौगिक के घटकों को केवल रासायनिक विधियों से पृथक किया जा सकता है।
| मिश्रण | यौगिक |
|---|---|
| (i) भौतिक रूप से बनता है। | (i) रासायनिक संयोजन से बनता है। |
| (ii) नया पदार्थ नहीं बनता। | (ii) नया पदार्थ बनता है। |
| (iii) संघटन परिवर्तनीय होता है। | (iii) संघटन निश्चित होता है। |
| (iv) भौतिक विधियों से पृथक किया जा सकता है। | (iv) केवल रासायनिक विधियों से पृथक किया जा सकता है। |
| (v) घटक अपने गुण बनाए रखते हैं। | (v) नए पदार्थ के गुण भिन्न होते हैं। |
38. ‘क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं?’ अध्याय का महत्व लिखिए।
उत्तर ⇒ यह अध्याय शुद्ध पदार्थ, मिश्रण, विलयन, निलंबन, कोलॉयड, तत्व, यौगिक तथा भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तनों की मूलभूत अवधारणाओं को समझाता है। इससे विद्यार्थियों को पदार्थों के वर्गीकरण एवं उनके गुणों का वैज्ञानिक ज्ञान प्राप्त होता है।
(i) शुद्ध पदार्थ एवं मिश्रण की जानकारी मिलती है।
(ii) विलयन, निलंबन एवं कोलॉयड का ज्ञान होता है।
(iii) तत्व एवं यौगिक की समझ विकसित होती है।
(iv) भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन स्पष्ट होते हैं।
(v) विज्ञान की आधारभूत अवधारणाएँ मजबूत होती हैं।
39. दैनिक जीवन में मिश्रण एवं यौगिक का महत्व लिखिए।
उत्तर ⇒ हमारे दैनिक जीवन में अधिकांश पदार्थ मिश्रण या यौगिक के रूप में पाए जाते हैं। वायु, दूध एवं समुद्र का जल मिश्रण के उदाहरण हैं, जबकि जल, नमक एवं कार्बन डाइऑक्साइड यौगिक हैं। इनके गुणों की जानकारी से विभिन्न पदार्थों का सही उपयोग एवं पृथक्करण संभव होता है।
(i) वायु एक मिश्रण है।
(ii) दूध एक कोलॉयड है।
(iii) जल एक यौगिक है।
(iv) नमक एक यौगिक है।
(v) पदार्थों की पहचान में सहायता मिलती है।
40. ‘क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं?’ अध्याय का निष्कर्ष लिखिए।
उत्तर ⇒ इस अध्याय से स्पष्ट होता है कि पदार्थों को उनके संघटन एवं गुणों के आधार पर शुद्ध पदार्थ एवं मिश्रण में वर्गीकृत किया जाता है। मिश्रण समांगी एवं विषमांगी हो सकते हैं, जबकि शुद्ध पदार्थ तत्व एवं यौगिक के रूप में पाए जाते हैं। विलयन, निलंबन एवं कोलॉयड के गुण, साथ ही भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तनों का अध्ययन हमें पदार्थों की प्रकृति को वैज्ञानिक दृष्टि से समझने में सहायता करता है।