Class 9 Science Revision Notes

हम बीमार क्यों पड़ते हैं?

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Chapter Overview

Class9
SubjectScience
Chapter Nameहम बीमार क्यों पड़ते हैं?
Resource TypeRevision Notes
SyllabusNCERT
Suitable ForCBSE, JAC and other state boards

हम बीमार क्यों पड़ते हैं? Revision Notes

1. स्वास्थ्य (Health) क्या है?

उत्तर ⇒ स्वास्थ्य केवल रोगों की अनुपस्थिति का नाम नहीं है, बल्कि यह शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ रहने की अवस्था है। जब व्यक्ति का शरीर ठीक प्रकार से कार्य करता है, मन प्रसन्न रहता है तथा वह समाज में सामान्य रूप से अपने कार्य कर सकता है, तब उसे स्वस्थ माना जाता है। स्वस्थ व्यक्ति की कार्यक्षमता अधिक होती है और वह अपने दैनिक कार्यों को अच्छी तरह पूरा कर सकता है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ वातावरण, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद तथा व्यक्तिगत स्वच्छता आवश्यक है।

(i) स्वास्थ्य शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक सुख-समृद्धि की अवस्था है।

(ii) केवल रोगमुक्त होना स्वास्थ्य नहीं है।

(iii) संतुलित भोजन आवश्यक है।

(iv) स्वच्छता एवं व्यायाम स्वास्थ्य बनाए रखते हैं।

(v) स्वस्थ व्यक्ति अधिक कार्यक्षम होता है।

2. रोग (Disease) क्या है?

उत्तर ⇒ जब शरीर का कोई अंग या तंत्र सामान्य रूप से कार्य नहीं करता तथा व्यक्ति शारीरिक या मानसिक असुविधा महसूस करता है, तो उस स्थिति को रोग (Disease) कहते हैं। रोग के कारण शरीर की कार्यक्षमता कम हो जाती है तथा व्यक्ति अपने दैनिक कार्य ठीक से नहीं कर पाता। रोग कई कारणों से हो सकते हैं, जैसे संक्रमण, कुपोषण, आनुवंशिक दोष, प्रदूषण या असंतुलित जीवनशैली। समय पर उपचार एवं उचित देखभाल से अधिकांश रोगों से बचाव एवं इलाज संभव है।

(i) रोग में शरीर सामान्य रूप से कार्य नहीं करता।

(ii) रोग कार्यक्षमता को कम करता है।

(iii) रोग कई कारणों से हो सकते हैं।

(iv) समय पर उपचार आवश्यक है।

(v) स्वस्थ जीवनशैली से रोगों से बचाव होता है।

3. स्वास्थ्य एवं रोग में अंतर लिखिए।

उत्तर ⇒ स्वास्थ्य एवं रोग एक-दूसरे के विपरीत अवस्थाएँ हैं। स्वास्थ्य में शरीर के सभी अंग सामान्य रूप से कार्य करते हैं, जबकि रोग की अवस्था में शरीर का कोई न कोई भाग प्रभावित हो जाता है।

स्वास्थ्यरोग
शरीर सामान्य रूप से कार्य करता है।शरीर का कार्य प्रभावित होता है।
व्यक्ति सक्रिय रहता है।व्यक्ति कमजोर एवं अस्वस्थ रहता है।
कार्यक्षमता अधिक होती है।कार्यक्षमता कम हो जाती है।
मानसिक संतुलन बना रहता है।मानसिक तनाव हो सकता है।
उपचार की आवश्यकता नहीं होती।उपचार आवश्यक होता है।

(i) स्वास्थ्य सामान्य अवस्था है।

(ii) रोग असामान्य अवस्था है।

(iii) स्वास्थ्य में कार्यक्षमता अधिक होती है।

(iv) रोग में उपचार आवश्यक होता है।

(v) दोनों एक-दूसरे के विपरीत हैं।

4. अच्छे स्वास्थ्य के लिए कौन-कौन से कारक आवश्यक हैं?

उत्तर ⇒ अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित एवं पौष्टिक भोजन, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छ वातावरण, व्यक्तिगत स्वच्छता, नियमित व्यायाम, पर्याप्त विश्राम तथा मानसिक शांति आवश्यक हैं। इसके अतिरिक्त समय-समय पर टीकाकरण, रोगों की रोकथाम तथा स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है। यदि व्यक्ति इन सभी बातों का पालन करता है, तो वह लंबे समय तक स्वस्थ रह सकता है और रोगों से बचा रह सकता है।

(i) संतुलित भोजन आवश्यक है।

(ii) स्वच्छ पानी एवं वातावरण आवश्यक है।

(iii) नियमित व्यायाम करना चाहिए।

(iv) पर्याप्त नींद एवं विश्राम आवश्यक है।

(v) टीकाकरण रोगों से बचाव करता है।

5. व्यक्तिगत स्वास्थ्य एवं सामुदायिक स्वास्थ्य में अंतर लिखिए।

उत्तर ⇒ व्यक्तिगत स्वास्थ्य का संबंध किसी एक व्यक्ति की स्वच्छता एवं स्वास्थ्य आदतों से होता है, जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य पूरे समाज या समुदाय के स्वास्थ्य से संबंधित होता है। व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए व्यक्ति स्वयं जिम्मेदार होता है, जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य के लिए सरकार एवं समाज दोनों की जिम्मेदारी होती है।

व्यक्तिगत स्वास्थ्यसामुदायिक स्वास्थ्य
एक व्यक्ति से संबंधितपूरे समाज से संबंधित
व्यक्तिगत स्वच्छता पर आधारितसार्वजनिक स्वच्छता पर आधारित
स्वयं की जिम्मेदारीसमाज एवं सरकार की जिम्मेदारी

(i) व्यक्तिगत स्वास्थ्य व्यक्ति से जुड़ा है।

(ii) सामुदायिक स्वास्थ्य समाज से जुड़ा है।

(iii) दोनों स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं।

(iv) स्वच्छता दोनों का आधार है।

(v) सरकार की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

6. रोगों के प्रमुख कारण लिखिए।

उत्तर ⇒ रोग अनेक कारणों से उत्पन्न होते हैं। इनमें रोगजनक सूक्ष्मजीव (जीवाणु, विषाणु, कवक एवं प्रोटोजोआ), कुपोषण, प्रदूषण, अस्वच्छता, दूषित जल, असंतुलित भोजन, आनुवंशिक कारण तथा अस्वस्थ जीवनशैली प्रमुख हैं। इन कारणों से शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता कमजोर हो जाती है और व्यक्ति आसानी से बीमार पड़ जाता है। इनसे बचने के लिए स्वच्छता एवं संतुलित जीवनशैली अपनानी चाहिए।

(i) सूक्ष्मजीव रोग उत्पन्न करते हैं।

(ii) कुपोषण भी रोग का कारण है।

(iii) प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

(iv) दूषित जल रोग फैलाता है।

(v) स्वच्छता से रोगों की रोकथाम होती है।

7. तीव्र रोग (Acute Disease) क्या है?

उत्तर ⇒ जो रोग अचानक होते हैं और कम समय तक रहते हैं, उन्हें तीव्र रोग (Acute Disease) कहते हैं। इनका प्रभाव कुछ दिनों या सप्ताहों तक रहता है तथा उचित उपचार से रोगी शीघ्र स्वस्थ हो जाता है। उदाहरण के रूप में सर्दी, जुकाम, हैजा, टाइफाइड एवं डेंगू आदि को तीव्र रोग माना जाता है। ये रोग शरीर पर अधिक समय तक प्रभाव नहीं छोड़ते।

(i) तीव्र रोग कम समय तक रहते हैं।

(ii) अचानक उत्पन्न होते हैं।

(iii) शीघ्र उपचार संभव है।

(iv) रोगी जल्दी स्वस्थ हो जाता है।

(v) सर्दी एवं जुकाम इसके उदाहरण हैं।

8. दीर्घकालिक रोग (Chronic Disease) क्या है?

उत्तर ⇒ जो रोग लंबे समय तक बने रहते हैं तथा धीरे-धीरे शरीर को प्रभावित करते हैं, उन्हें दीर्घकालिक रोग (Chronic Disease) कहते हैं। इनका उपचार लंबी अवधि तक चलता है तथा ये व्यक्ति की कार्यक्षमता को काफी प्रभावित करते हैं। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, तपेदिक (टीबी), कैंसर तथा गठिया इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इन रोगों में नियमित उपचार एवं सावधानी आवश्यक होती है।

(i) दीर्घकालिक रोग लंबे समय तक रहते हैं।

(ii) शरीर पर अधिक प्रभाव डालते हैं।

(iii) उपचार लंबी अवधि तक चलता है।

(iv) कार्यक्षमता कम हो जाती है।

(v) मधुमेह एवं टीबी इसके उदाहरण हैं।

9. तीव्र रोग एवं दीर्घकालिक रोग में अंतर लिखिए।

उत्तर ⇒ तीव्र एवं दीर्घकालिक रोगों में मुख्य अंतर उनकी अवधि एवं शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव का होता है।

तीव्र रोगदीर्घकालिक रोग
कम समय तक रहते हैं।लंबे समय तक रहते हैं।
अचानक होते हैं।धीरे-धीरे विकसित होते हैं।
जल्दी ठीक हो जाते हैं।उपचार में अधिक समय लगता है।
शरीर पर कम प्रभाव पड़ता है।शरीर पर अधिक प्रभाव पड़ता है।

(i) तीव्र रोग अल्पकालिक होते हैं।

(ii) दीर्घकालिक रोग दीर्घकाल तक रहते हैं।

(iii) उपचार अवधि अलग होती है।

(iv) दीर्घकालिक रोग अधिक हानिकारक होते हैं।

(v) दोनों के उपचार अलग-अलग होते हैं।

10. संक्रामक एवं असंक्रामक रोग क्या हैं? इनमें अंतर लिखिए।

उत्तर ⇒ जो रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में रोगजनकों के माध्यम से फैलते हैं, उन्हें संक्रामक रोग कहते हैं, जबकि जो रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलते, उन्हें असंक्रामक रोग कहते हैं।

संक्रामक रोगअसंक्रामक रोग
एक व्यक्ति से दूसरे में फैलते हैं।नहीं फैलते।
रोगजनकों के कारण होते हैं।जीवनशैली, आनुवंशिक या अन्य कारणों से होते हैं।
उदाहरण— मलेरिया, टीबी, डेंगूउदाहरण— मधुमेह, कैंसर, उच्च रक्तचाप

(i) संक्रामक रोग फैलते हैं।

(ii) असंक्रामक रोग नहीं फैलते।

(iii) रोगजनक संक्रामक रोगों का कारण हैं।

(iv) जीवनशैली भी रोगों का कारण हो सकती है।

(v) रोकथाम एवं उपचार दोनों आवश्यक हैं।

11. संक्रामक रोग (Communicable Disease) क्या हैं?

उत्तर ⇒ जो रोग एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति में रोगजनक सूक्ष्मजीवों के माध्यम से फैलते हैं, उन्हें संक्रामक रोग (Communicable Disease) कहते हैं। ये रोग जीवाणु, विषाणु, कवक तथा प्रोटोजोआ जैसे सूक्ष्मजीवों के कारण होते हैं। संक्रामक रोग वायु, जल, भोजन, प्रत्यक्ष संपर्क तथा वाहकों (Vector) के माध्यम से फैल सकते हैं। मलेरिया, डेंगू, हैजा, तपेदिक (टीबी) तथा चिकनपॉक्स इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इन रोगों की रोकथाम के लिए स्वच्छता, टीकाकरण तथा संक्रमित व्यक्ति से उचित दूरी बनाए रखना आवश्यक है।

(i) संक्रामक रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलते हैं।

(ii) ये सूक्ष्मजीवों के कारण होते हैं।

(iii) वायु, जल एवं भोजन से फैल सकते हैं।

(iv) स्वच्छता से इनकी रोकथाम संभव है।

(v) टीकाकरण महत्वपूर्ण उपाय है।

12. असंक्रामक रोग (Non-Communicable Disease) क्या हैं?

उत्तर ⇒ जो रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलते, उन्हें असंक्रामक रोग (Non-Communicable Disease) कहते हैं। ये रोग मुख्यतः आनुवंशिक कारणों, कुपोषण, असंतुलित भोजन, प्रदूषण, मानसिक तनाव तथा अस्वस्थ जीवनशैली के कारण होते हैं। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कैंसर, हृदय रोग तथा गठिया इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इन रोगों से बचने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए।

(i) असंक्रामक रोग नहीं फैलते।

(ii) जीवनशैली इसका प्रमुख कारण है।

(iii) आनुवंशिक कारण भी हो सकते हैं।

(iv) नियमित व्यायाम लाभदायक है।

(v) संतुलित भोजन आवश्यक है।

13. रोगजनक (Pathogen) क्या हैं?

उत्तर ⇒ ऐसे सूक्ष्मजीव जो मनुष्य, पशुओं या पौधों में रोग उत्पन्न करते हैं, उन्हें रोगजनक (Pathogens) कहते हैं। रोगजनक मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं— जीवाणु (Bacteria), विषाणु (Virus), कवक (Fungi) तथा प्रोटोजोआ (Protozoa)। ये शरीर में प्रवेश करके विभिन्न अंगों को प्रभावित करते हैं और रोग उत्पन्न करते हैं। रोगजनकों से बचाव के लिए स्वच्छता, शुद्ध भोजन, स्वच्छ जल तथा समय पर टीकाकरण आवश्यक है।

(i) रोगजनक सूक्ष्मजीव होते हैं।

(ii) ये रोग उत्पन्न करते हैं।

(iii) जीवाणु, विषाणु, कवक एवं प्रोटोजोआ प्रमुख हैं।

(iv) शरीर में प्रवेश करके संक्रमण फैलाते हैं।

(v) स्वच्छता से बचाव संभव है।

14. संक्रामक रोग किस प्रकार फैलते हैं?

उत्तर ⇒ संक्रामक रोग विभिन्न माध्यमों से फैलते हैं। कुछ रोग वायु के माध्यम से फैलते हैं, जैसे टीबी एवं सर्दी-जुकाम। कुछ रोग दूषित जल एवं भोजन द्वारा फैलते हैं, जैसे हैजा एवं टाइफाइड। मलेरिया एवं डेंगू जैसे रोग मच्छरों द्वारा फैलते हैं। कुछ रोग संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क या रक्त के माध्यम से भी फैल सकते हैं। इसलिए रोग फैलने के माध्यम को समझना रोकथाम के लिए आवश्यक है।

रोग फैलने का माध्यमउदाहरण
वायुटीबी, सर्दी-जुकाम
जल एवं भोजनहैजा, टाइफाइड
वाहक (मच्छर)मलेरिया, डेंगू
प्रत्यक्ष संपर्कचिकनपॉक्स

(i) रोग कई माध्यमों से फैलते हैं।

(ii) दूषित जल रोग फैलाता है।

(iii) मच्छर महत्वपूर्ण वाहक हैं।

(iv) वायुजनित रोग तेजी से फैलते हैं।

(v) स्वच्छता से बचाव होता है।

15. वाहक (Vector) क्या है? उदाहरण दीजिए।

उत्तर ⇒ ऐसे जीव जो रोगजनकों को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुँचाते हैं, उन्हें वाहक (Vector) कहते हैं। वाहक स्वयं हमेशा रोग से प्रभावित नहीं होते, लेकिन वे रोग फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उदाहरण के लिए मादा एनोफिलीज़ मच्छर मलेरिया तथा एडीज़ मच्छर डेंगू फैलाता है। मक्खियाँ भी दूषित भोजन के माध्यम से कई रोगों का प्रसार करती हैं। वाहकों का नियंत्रण रोगों की रोकथाम का महत्वपूर्ण उपाय है।

(i) वाहक रोगजनकों को फैलाते हैं।

(ii) एनोफिलीज़ मलेरिया फैलाता है।

(iii) एडीज़ डेंगू फैलाता है।

(iv) मक्खियाँ भी रोग फैलाती हैं।

(v) वाहक नियंत्रण आवश्यक है।

16. मलेरिया क्या है? इसके कारण एवं बचाव के उपाय लिखिए।

उत्तर ⇒ मलेरिया एक संक्रामक रोग है, जो प्लाज्मोडियम (Plasmodium) नामक प्रोटोजोआ के कारण होता है। यह रोग संक्रमित मादा एनोफिलीज़ मच्छर के काटने से फैलता है। इसके प्रमुख लक्षण तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द तथा कमजोरी हैं। मलेरिया से बचने के लिए मच्छरों को पनपने से रोकना, मच्छरदानी का उपयोग करना, घर के आसपास पानी जमा न होने देना तथा समय पर उपचार कराना आवश्यक है।

(i) मलेरिया प्रोटोजोआ से होता है।

(ii) एनोफिलीज़ मच्छर इसका वाहक है।

(iii) तेज बुखार इसका प्रमुख लक्षण है।

(iv) मच्छरदानी का उपयोग करें।

(v) पानी जमा न होने दें।

17. डेंगू क्या है? इसके लक्षण एवं बचाव लिखिए।

उत्तर ⇒ डेंगू एक विषाणुजनित (Viral) संक्रामक रोग है, जो एडीज़ मच्छर के काटने से फैलता है। इसके प्रमुख लक्षण तेज बुखार, सिरदर्द, आँखों के पीछे दर्द, शरीर एवं जोड़ों में दर्द तथा त्वचा पर लाल चकत्ते हैं। गंभीर स्थिति में रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो सकती है। डेंगू से बचने के लिए घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए, पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनने चाहिए तथा मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने चाहिए।

(i) डेंगू विषाणुजनित रोग है।

(ii) एडीज़ मच्छर इसका वाहक है।

(iii) तेज बुखार प्रमुख लक्षण है।

(iv) पानी जमा नहीं होने देना चाहिए।

(v) मच्छरों से बचाव आवश्यक है।

18. हैजा (Cholera) क्या है?

उत्तर ⇒ हैजा (Cholera) एक जीवाणुजनित संक्रामक रोग है, जो दूषित जल एवं भोजन के सेवन से फैलता है। यह विब्रियो कॉलरी (Vibrio cholerae) नामक जीवाणु के कारण होता है। इसमें बार-बार दस्त, उल्टी तथा शरीर में पानी की कमी (निर्जलीकरण) हो जाती है। समय पर उपचार न मिलने पर यह रोग गंभीर हो सकता है। स्वच्छ जल पीना, भोजन को ढककर रखना तथा व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना इसके बचाव के प्रमुख उपाय हैं।

(i) हैजा जीवाणुजनित रोग है।

(ii) दूषित जल से फैलता है।

(iii) दस्त एवं उल्टी इसके लक्षण हैं।

(iv) निर्जलीकरण हो सकता है।

(v) स्वच्छ जल से बचाव संभव है।

19. तपेदिक (Tuberculosis – TB) क्या है?

उत्तर ⇒ तपेदिक (टीबी) एक जीवाणुजनित संक्रामक रोग है, जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस (Mycobacterium tuberculosis) नामक जीवाणु से होता है। यह मुख्यतः संक्रमित व्यक्ति के खाँसने या छींकने से वायु के माध्यम से फैलता है। इसके प्रमुख लक्षण लगातार खाँसी, बुखार, वजन कम होना तथा कमजोरी हैं। टीबी का उपचार नियमित दवाओं से किया जाता है तथा बीसीजी (BCG) टीका इसके बचाव में सहायक होता है।

(i) टीबी जीवाणुजनित रोग है।

(ii) वायु द्वारा फैलता है।

(iii) लगातार खाँसी प्रमुख लक्षण है।

(iv) BCG टीका बचाव करता है।

(v) नियमित उपचार आवश्यक है।

20. रोगों की रोकथाम के सामान्य उपाय लिखिए।

उत्तर ⇒ रोगों से बचाव उपचार से बेहतर माना जाता है। रोगों की रोकथाम के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ पेयजल, नियमित व्यायाम, पर्याप्त विश्राम, व्यक्तिगत एवं सार्वजनिक स्वच्छता तथा समय-समय पर टीकाकरण आवश्यक है। मच्छरों एवं मक्खियों का नियंत्रण, दूषित भोजन से बचाव तथा रोगी के संपर्क में सावधानी रखना भी महत्वपूर्ण है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर अधिकांश रोगों से बचा जा सकता है।

(i) संतुलित भोजन करें।

(ii) स्वच्छ पानी पिएँ।

(iii) नियमित व्यायाम करें।

(iv) समय पर टीकाकरण कराएँ।

(v) व्यक्तिगत एवं सार्वजनिक स्वच्छता बनाए रखें।

21. प्रतिरक्षा (Immunity) क्या है?

उत्तर ⇒ रोगों से लड़ने की शरीर की प्राकृतिक क्षमता को प्रतिरक्षा (Immunity) कहते हैं। जब रोगजनक सूक्ष्मजीव शरीर में प्रवेश करते हैं, तब श्वेत रक्त कण (White Blood Cells) तथा प्रतिरक्षा तंत्र उन्हें नष्ट करने का प्रयास करते हैं। यदि प्रतिरक्षा शक्ति अच्छी हो तो व्यक्ति जल्दी बीमार नहीं पड़ता। संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, स्वच्छता तथा समय पर टीकाकरण से प्रतिरक्षा शक्ति मजबूत होती है। कमजोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्ति रोगों से जल्दी प्रभावित हो जाते हैं।

(i) प्रतिरक्षा रोगों से रक्षा करती है।

(ii) श्वेत रक्त कण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

(iii) संतुलित भोजन आवश्यक है।

(iv) टीकाकरण प्रतिरक्षा बढ़ाता है।

(v) मजबूत प्रतिरक्षा रोगों से बचाती है।

22. जन्मजात प्रतिरक्षा एवं अर्जित प्रतिरक्षा में अंतर लिखिए।

उत्तर ⇒ प्रतिरक्षा मुख्यतः दो प्रकार की होती है— जन्मजात प्रतिरक्षा तथा अर्जित प्रतिरक्षा। जन्मजात प्रतिरक्षा जन्म से ही शरीर में होती है, जबकि अर्जित प्रतिरक्षा जीवनकाल में संक्रमण या टीकाकरण के बाद विकसित होती है।

जन्मजात प्रतिरक्षाअर्जित प्रतिरक्षा
जन्म से प्राप्त होती है।जीवनकाल में विकसित होती है।
प्राकृतिक होती है।संक्रमण या टीकाकरण से प्राप्त होती है।
सभी रोगों के विरुद्ध सीमित सुरक्षा देती है।विशेष रोगों के विरुद्ध सुरक्षा देती है।

(i) जन्मजात प्रतिरक्षा जन्म से होती है।

(ii) अर्जित प्रतिरक्षा बाद में विकसित होती है।

(iii) टीकाकरण से अर्जित प्रतिरक्षा मिलती है।

(iv) दोनों शरीर की रक्षा करती हैं।

(v) प्रतिरक्षा रोगों से बचाव करती है।

23. टीकाकरण (Vaccination) क्या है?

उत्तर ⇒ किसी विशेष रोग से बचाव के लिए शरीर में कमजोर अथवा निष्क्रिय रोगजनकों या उनके उत्पादों को प्रविष्ट कराने की प्रक्रिया को टीकाकरण (Vaccination) कहते हैं। इससे शरीर में उस रोग के विरुद्ध प्रतिरक्षा विकसित हो जाती है। टीकाकरण के कारण भविष्य में वही रोगजनक शरीर में प्रवेश करने पर प्रतिरक्षा तंत्र तुरंत सक्रिय होकर रोग से बचाव करता है। पोलियो, बीसीजी, डीपीटी, खसरा एवं हेपेटाइटिस-बी इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

(i) टीकाकरण रोगों से बचाव करता है।

(ii) प्रतिरक्षा शक्ति विकसित होती है।

(iii) कई गंभीर रोगों की रोकथाम होती है।

(iv) बच्चों के लिए विशेष रूप से आवश्यक है।

(v) समय पर टीकाकरण कराना चाहिए।

24. प्रतिरक्षण (Immunisation) का महत्व लिखिए।

उत्तर ⇒ प्रतिरक्षण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति को विभिन्न संक्रामक रोगों के विरुद्ध सुरक्षित बनाया जाता है। यह मुख्यतः टीकाकरण के माध्यम से किया जाता है। प्रतिरक्षण से रोगों के फैलने की संभावना कम होती है तथा महामारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है। बच्चों में समय पर प्रतिरक्षण कराने से पोलियो, खसरा, डिप्थीरिया, काली खाँसी एवं टिटनेस जैसे गंभीर रोगों से बचाव होता है। इसलिए प्रत्येक बच्चे का निर्धारित समय पर टीकाकरण आवश्यक है।

(i) प्रतिरक्षण रोगों से सुरक्षा देता है।

(ii) महामारी रोकने में सहायक है।

(iii) बच्चों के लिए आवश्यक है।

(iv) टीकाकरण इसका प्रमुख माध्यम है।

(v) समय पर प्रतिरक्षण कराना चाहिए।

25. एंटीबायोटिक (Antibiotics) क्या हैं?

उत्तर ⇒ एंटीबायोटिक ऐसी औषधियाँ हैं जो जीवाणुओं (Bacteria) को नष्ट करती हैं या उनकी वृद्धि रोकती हैं। इनका उपयोग जीवाणुजनित रोगों के उपचार में किया जाता है। सबसे पहली एंटीबायोटिक पेनिसिलिन थी, जिसकी खोज अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने की थी। एंटीबायोटिक का उपयोग केवल चिकित्सक की सलाह पर करना चाहिए तथा पूरा निर्धारित कोर्स पूरा करना चाहिए। इनका अनावश्यक उपयोग हानिकारक हो सकता है।

(i) एंटीबायोटिक जीवाणुओं पर प्रभाव डालती हैं।

(ii) विषाणुओं पर प्रभावी नहीं होतीं।

(iii) चिकित्सक की सलाह आवश्यक है।

(iv) पूरा दवा कोर्स करना चाहिए।

(v) अनावश्यक उपयोग नहीं करना चाहिए।

26. एंटीबायोटिक विषाणुजनित रोगों पर प्रभावी क्यों नहीं होती?

उत्तर ⇒ विषाणु (Virus) जीवित कोशिकाओं के भीतर ही अपनी संख्या बढ़ाते हैं। एंटीबायोटिक दवाएँ केवल जीवाणुओं की कोशिकीय क्रियाओं को प्रभावित करती हैं। क्योंकि विषाणुओं की संरचना एवं जीवन-प्रक्रिया जीवाणुओं से भिन्न होती है, इसलिए एंटीबायोटिक उन पर कोई प्रभाव नहीं डालती। सर्दी-जुकाम, डेंगू, चिकनपॉक्स तथा खसरा जैसे विषाणुजनित रोगों में एंटीबायोटिक का प्रयोग लाभदायक नहीं होता।

(i) एंटीबायोटिक केवल जीवाणुओं पर कार्य करती हैं।

(ii) विषाणुओं पर इनका प्रभाव नहीं होता।

(iii) विषाणु कोशिकाओं के भीतर बढ़ते हैं।

(iv) गलत उपयोग हानिकारक है।

(v) डॉक्टर की सलाह आवश्यक है।

27. एंटीबायोटिक का अनुचित उपयोग क्यों नहीं करना चाहिए?

उत्तर ⇒ एंटीबायोटिक का बिना आवश्यकता या चिकित्सकीय सलाह के उपयोग करने से जीवाणुओं में औषधि प्रतिरोध (Drug Resistance) विकसित हो सकता है। इसके बाद वही दवा भविष्य में प्रभावी नहीं रहती। इसके अतिरिक्त शरीर में लाभदायक जीवाणु भी नष्ट हो सकते हैं, जिससे अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए एंटीबायोटिक का उपयोग केवल चिकित्सक के निर्देशानुसार एवं पूरा कोर्स पूरा करके ही करना चाहिए।

(i) औषधि प्रतिरोध विकसित हो सकता है।

(ii) लाभदायक जीवाणु भी नष्ट हो जाते हैं।

(iii) डॉक्टर की सलाह आवश्यक है।

(iv) पूरा कोर्स करना चाहिए।

(v) स्वयं दवा नहीं लेनी चाहिए।

28. रोगों की रोकथाम उपचार से बेहतर क्यों मानी जाती है?

उत्तर ⇒ रोग होने के बाद उपचार कराने की अपेक्षा रोगों की रोकथाम करना अधिक सरल, सस्ता एवं प्रभावी होता है। रोकथाम से व्यक्ति स्वस्थ रहता है तथा रोग फैलने की संभावना कम हो जाती है। संतुलित भोजन, स्वच्छता, टीकाकरण, नियमित व्यायाम, शुद्ध पेयजल एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर अधिकांश संक्रामक एवं असंक्रामक रोगों से बचा जा सकता है। इससे समय, धन तथा स्वास्थ्य तीनों की रक्षा होती है।

(i) रोकथाम उपचार से आसान है।

(ii) खर्च कम होता है।

(iii) रोग फैलने से रुकते हैं।

(iv) स्वस्थ जीवनशैली आवश्यक है।

(v) टीकाकरण महत्वपूर्ण है।

29. स्वस्थ जीवनशैली (Healthy Lifestyle) का क्या महत्व है?

उत्तर ⇒ स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ती है तथा अनेक रोगों से बचाव होता है। इसमें संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, मानसिक तनाव से बचाव, स्वच्छता तथा नशीले पदार्थों से दूरी शामिल है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने वाले व्यक्ति अधिक सक्रिय, ऊर्जावान एवं कार्यक्षम रहते हैं। इससे जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है और दीर्घकालिक रोगों की संभावना भी कम हो जाती है।

(i) प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ती है।

(ii) कार्यक्षमता बढ़ती है।

(iii) दीर्घकालिक रोग कम होते हैं।

(iv) मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है।

(v) जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है।

30. हम बीमार क्यों पड़ते हैं? अध्याय का सारांश लिखिए।

उत्तर ⇒ मनुष्य विभिन्न कारणों से बीमार पड़ता है, जैसे रोगजनक सूक्ष्मजीव, कुपोषण, अस्वच्छता, प्रदूषण, दूषित जल, असंतुलित जीवनशैली तथा कमजोर प्रतिरक्षा शक्ति। संक्रामक रोग जीवाणु, विषाणु, कवक एवं प्रोटोजोआ के कारण फैलते हैं, जबकि असंक्रामक रोग जीवनशैली एवं अन्य कारणों से होते हैं। संतुलित भोजन, स्वच्छता, नियमित व्यायाम, टीकाकरण, शुद्ध जल तथा समय पर उपचार अपनाकर अधिकांश रोगों से बचा जा सकता है। स्वस्थ जीवन ही स्वस्थ समाज और राष्ट्र की नींव है।

(i) रोग कई कारणों से होते हैं।

(ii) प्रतिरक्षा शक्ति महत्वपूर्ण है।

(iii) स्वच्छता रोगों से बचाती है।

(iv) टीकाकरण आवश्यक है।

(v) स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए।

31. संक्रामक रोगों की रोकथाम के उपाय लिखिए।

उत्तर ⇒ संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए व्यक्तिगत एवं सामुदायिक स्वच्छता का पालन करना आवश्यक है। स्वच्छ पेयजल का उपयोग करना, भोजन को ढककर रखना, हाथों को साबुन से धोना तथा आसपास साफ-सफाई बनाए रखना चाहिए। रोग फैलाने वाले मच्छरों एवं मक्खियों पर नियंत्रण रखना भी आवश्यक है। समय-समय पर टीकाकरण कराने तथा संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से सावधानी बरतने से अनेक संक्रामक रोगों से बचाव किया जा सकता है। रोकथाम अपनाने से रोगों का प्रसार कम होता है।

(i) स्वच्छता बनाए रखें।

(ii) शुद्ध पेयजल का उपयोग करें।

(iii) टीकाकरण कराएँ।

(iv) मच्छरों एवं मक्खियों पर नियंत्रण रखें।

(v) संक्रमित व्यक्ति से सावधानी रखें।

32. सामुदायिक स्वास्थ्य (Community Health) का महत्व लिखिए।

उत्तर ⇒ सामुदायिक स्वास्थ्य का अर्थ पूरे समाज के स्वास्थ्य की सुरक्षा से है। यदि किसी क्षेत्र में स्वच्छ जल, स्वच्छ वातावरण, उचित जल निकासी तथा स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हों, तो वहाँ रोगों के फैलने की संभावना कम हो जाती है। सरकार द्वारा टीकाकरण अभियान, स्वच्छता अभियान तथा चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराना सामुदायिक स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण भाग है। स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए प्रत्येक नागरिक का सहयोग भी आवश्यक है।

(i) पूरे समाज का स्वास्थ्य महत्वपूर्ण है।

(ii) स्वच्छ वातावरण आवश्यक है।

(iii) स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध होनी चाहिए।

(iv) सरकारी योजनाएँ सहायक हैं।

(v) नागरिकों का सहयोग आवश्यक है।

33. स्वच्छ पेयजल का स्वास्थ्य में क्या महत्व है?

उत्तर ⇒ स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल अच्छे स्वास्थ्य का आधार है। दूषित जल पीने से हैजा, टाइफाइड, पेचिश तथा पीलिया जैसे अनेक संक्रामक रोग फैल सकते हैं। इसलिए पानी को उबालकर, छानकर या शुद्ध करके पीना चाहिए। जल स्रोतों को स्वच्छ रखना तथा गंदगी से बचाना भी आवश्यक है। स्वच्छ पेयजल से रोगों की रोकथाम होती है और शरीर स्वस्थ रहता है।

(i) स्वच्छ जल स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।

(ii) दूषित जल रोग फैलाता है।

(iii) पानी को शुद्ध करके पीना चाहिए।

(iv) जल स्रोतों को स्वच्छ रखें।

(v) जलजनित रोगों से बचाव होता है।

34. संतुलित आहार का स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर ⇒ संतुलित आहार में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज लवण, रेशे तथा जल उचित मात्रा में होते हैं। यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है, वृद्धि एवं विकास में सहायता करता है तथा प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाता है। संतुलित भोजन से कुपोषण तथा अनेक रोगों की संभावना कम हो जाती है। स्वस्थ जीवन के लिए प्रतिदिन पौष्टिक एवं संतुलित भोजन करना आवश्यक है।

(i) ऊर्जा प्रदान करता है।

(ii) शरीर की वृद्धि करता है।

(iii) प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाता है।

(iv) कुपोषण से बचाता है।

(v) स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक है।

35. कुपोषण (Malnutrition) क्या है?

उत्तर ⇒ जब शरीर को आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलते या असंतुलित मात्रा में मिलते हैं, तब उस स्थिति को कुपोषण कहते हैं। कुपोषण के कारण शरीर की वृद्धि रुक सकती है, प्रतिरक्षा शक्ति कम हो जाती है तथा व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ता है। बच्चों में इसका प्रभाव अधिक देखा जाता है। संतुलित एवं पौष्टिक भोजन से कुपोषण को रोका जा सकता है।

(i) पोषक तत्वों की कमी से होता है।

(ii) शरीर की वृद्धि प्रभावित होती है।

(iii) प्रतिरक्षा शक्ति घटती है।

(iv) बच्चे अधिक प्रभावित होते हैं।

(v) संतुलित भोजन से बचाव होता है।

36. व्यक्तिगत स्वच्छता का क्या महत्व है?

उत्तर ⇒ व्यक्तिगत स्वच्छता का अर्थ शरीर, कपड़ों तथा दैनिक उपयोग की वस्तुओं को साफ रखना है। नियमित स्नान करना, हाथ धोना, दाँत साफ करना, नाखून काटना तथा साफ कपड़े पहनना व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रमुख भाग हैं। इससे रोगजनक सूक्ष्मजीवों का संक्रमण कम होता है तथा अनेक संक्रामक रोगों से बचाव होता है। स्वस्थ जीवन के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता अत्यंत आवश्यक है।

(i) नियमित स्नान करें।

(ii) हाथ साबुन से धोएँ।

(iii) दाँत एवं नाखून साफ रखें।

(iv) साफ कपड़े पहनें।

(v) संक्रमण से बचाव होता है।

37. सार्वजनिक स्वच्छता (Public Hygiene) क्या है?

उत्तर ⇒ सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता बनाए रखने को सार्वजनिक स्वच्छता कहते हैं। इसमें सड़कों, नालियों, जल स्रोतों, विद्यालयों तथा सार्वजनिक स्थानों की सफाई शामिल होती है। उचित कचरा प्रबंधन, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था तथा जल निकासी की अच्छी व्यवस्था से रोगों का प्रसार कम होता है। स्वस्थ समाज के लिए सार्वजनिक स्वच्छता अत्यंत आवश्यक है।

(i) सार्वजनिक स्थान स्वच्छ रखें।

(ii) कचरे का उचित निपटान करें।

(iii) नालियाँ साफ रखें।

(iv) स्वच्छ जल उपलब्ध कराएँ।

(v) रोगों का प्रसार कम होता है।

38. रोग फैलाने वाले प्रमुख सूक्ष्मजीवों का वर्गीकरण कीजिए।

उत्तर ⇒ रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीव मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं। प्रत्येक प्रकार के सूक्ष्मजीव अलग-अलग रोग उत्पन्न करते हैं।

सूक्ष्मजीवउदाहरण
जीवाणु (Bacteria)हैजा, टाइफाइड
विषाणु (Virus)डेंगू, खसरा
प्रोटोजोआ (Protozoa)मलेरिया
कवक (Fungi)दाद (Ringworm)

(i) जीवाणु कई रोग उत्पन्न करते हैं।

(ii) विषाणु संक्रामक रोग फैलाते हैं।

(iii) प्रोटोजोआ मलेरिया का कारण है।

(iv) कवक त्वचा रोग उत्पन्न करते हैं।

(v) प्रत्येक सूक्ष्मजीव का प्रभाव अलग होता है।

39. रोगों के उपचार के सामान्य सिद्धांत लिखिए।

उत्तर ⇒ किसी भी रोग के उपचार का पहला उद्देश्य रोग के कारण की पहचान करना होता है। उसके बाद उचित दवा, पौष्टिक भोजन, पर्याप्त विश्राम तथा चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार किया जाता है। संक्रामक रोगों में संक्रमण को फैलने से रोकना भी आवश्यक होता है। समय पर उपचार से रोगी जल्दी स्वस्थ हो जाता है तथा जटिलताओं से बचा जा सकता है।

(i) सही निदान आवश्यक है।

(ii) उचित दवा का प्रयोग करें।

(iii) पर्याप्त विश्राम करें।

(iv) पौष्टिक भोजन लें।

(v) चिकित्सक की सलाह मानें।

40. अध्याय “हम बीमार क्यों पड़ते हैं?” के महत्वपूर्ण बिंदु लिखिए।

उत्तर ⇒ इस अध्याय में स्वास्थ्य, रोग, संक्रामक एवं असंक्रामक रोग, रोगजनक सूक्ष्मजीव, प्रतिरक्षा, टीकाकरण, एंटीबायोटिक तथा रोगों की रोकथाम के बारे में जानकारी दी गई है। यह स्पष्ट किया गया है कि स्वच्छता, संतुलित भोजन, शुद्ध पेयजल, नियमित व्यायाम, समय पर टीकाकरण तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर अधिकांश रोगों से बचा जा सकता है। स्वस्थ व्यक्ति ही समाज एवं राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

(i) स्वास्थ्य सबसे बड़ी संपत्ति है।

(ii) स्वच्छता रोगों से बचाती है।

(iii) टीकाकरण आवश्यक है।

(iv) संतुलित भोजन स्वास्थ्य का आधार है।

(v) रोकथाम उपचार से बेहतर है।

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Chapter 1: हमारे आस-पास के पदार्थ
Chapter 2: क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं?
Chapter 3: अणु और परमाणु
Chapter 4: परमाणु की संरचना
Chapter 5: जीवन की मौलिक इकाई – कोशिका
Chapter 6: ऊतक
Chapter 7: जीवों में विविधता
Chapter 8: गति
Chapter 9: बल तथा गति के नियम
Chapter 10: गुरुत्वाकर्षण
Chapter 11: कार्य तथा ऊर्जा
Chapter 12: ध्वनि
Chapter 13: हम बीमार क्यों पड़ते हैं?
Chapter 14: प्राकृतिक सम्पदा
Chapter 15: खाद्य संसाधनों में सुधार

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