Class 9 Science Revision Notes
गुरुत्वाकर्षण
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Chapter Overview
| Class | 9 |
| Subject | Science |
| Chapter Name | गुरुत्वाकर्षण |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
गुरुत्वाकर्षण Revision Notes
1. गुरुत्वाकर्षण (Gravitation) क्या है?
उत्तर ⇒ विश्व का प्रत्येक पिंड दूसरे प्रत्येक पिंड को अपनी ओर एक आकर्षण बल से खींचता है। इस आकर्षण बल को गुरुत्वाकर्षण बल कहते हैं। यह बल सभी वस्तुओं के बीच कार्य करता है, चाहे वे बड़ी हों या छोटी। इसी गुरुत्वाकर्षण बल के कारण पृथ्वी हमें अपनी सतह पर बनाए रखती है तथा ग्रह और उपग्रह अपनी-अपनी कक्षाओं में घूमते रहते हैं। गुरुत्वाकर्षण बल की खोज और उसके नियम का प्रतिपादन सर आइज़ैक न्यूटन ने किया था। यह प्रकृति का एक सार्वत्रिक बल है, जो पूरे ब्रह्मांड में कार्य करता है।
(i) प्रत्येक पिंड दूसरे पिंड को आकर्षित करता है।
(ii) यह आकर्षण बल गुरुत्वाकर्षण कहलाता है।
(iii) यह सभी वस्तुओं के बीच कार्य करता है।
(iv) इसका प्रतिपादन सर आइज़ैक न्यूटन ने किया।
(v) यह प्रकृति का सार्वत्रिक बल है।
2. गुरुत्वाकर्षण का महत्व लिखिए।
उत्तर ⇒ गुरुत्वाकर्षण का हमारे दैनिक जीवन तथा पूरे ब्रह्मांड में अत्यधिक महत्व है। इसी बल के कारण हम पृथ्वी की सतह पर बने रहते हैं और वस्तुएँ पृथ्वी पर गिरती हैं। चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर तथा ग्रह सूर्य के चारों ओर गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ही परिक्रमा करते हैं। समुद्र में ज्वार-भाटा भी सूर्य और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के कारण उत्पन्न होते हैं। इसके अतिरिक्त इसी नियम की सहायता से पृथ्वी, सूर्य, चंद्रमा तथा अन्य ग्रहों के द्रव्यमान का अनुमान लगाया जाता है और नए ग्रहों एवं तारों की खोज में भी सहायता मिलती है।
(i) हमें पृथ्वी से बाँधे रखता है।
(ii) ग्रहों एवं उपग्रहों की गति का कारण है।
(iii) ज्वार-भाटा उत्पन्न करता है।
(iv) ग्रहों के द्रव्यमान ज्ञात करने में सहायक है।
(v) नए ग्रहों एवं तारों की खोज में उपयोगी है।
3. अभिकेन्द्र बल (Centripetal Force) क्या है?
उत्तर ⇒ जब कोई वस्तु वृत्ताकार पथ पर गति करती है, तो उसे उसी पथ पर बनाए रखने के लिए एक बल की आवश्यकता होती है। यह बल सदैव वृत्त के केंद्र की ओर कार्य करता है और इसे अभिकेन्द्र बल (Centripetal Force) कहते हैं। यदि यह बल न हो, तो वस्तु वृत्तीय पथ छोड़कर स्पर्शरेखा की दिशा में चली जाएगी। उदाहरण के लिए, जब किसी पत्थर को धागे से बाँधकर घुमाया जाता है, तब धागे में उत्पन्न तनाव ही अभिकेन्द्र बल का कार्य करता है।
(i) यह वृत्त के केंद्र की ओर लगता है।
(ii) वृत्तीय गति के लिए आवश्यक है।
(iii) यह वस्तु को पथ पर बनाए रखता है।
(iv) धागे में तनाव इसका उदाहरण है।
(v) इसके बिना वस्तु स्पर्शरेखा की दिशा में चली जाएगी।
4. स्पर्श रेखा (Tangent) क्या है?
उत्तर ⇒ कोई ऐसी सरल रेखा जो किसी वृत्त को केवल एक ही बिंदु पर स्पर्श करती है, उसे स्पर्श रेखा (Tangent) कहते हैं। स्पर्श रेखा उस बिंदु पर वृत्त को काटती नहीं है, बल्कि केवल छूती है। वृत्तीय गति में यदि अभिकेन्द्र बल समाप्त हो जाए, तो वस्तु स्पर्श रेखा की दिशा में गति करती है। इसलिए स्पर्श रेखा का अध्ययन वृत्तीय गति को समझने में महत्वपूर्ण है।
(i) स्पर्श रेखा वृत्त को केवल एक बिंदु पर छूती है।
(ii) यह वृत्त को नहीं काटती।
(iii) वृत्तीय गति में इसका विशेष महत्व है।
(iv) अभिकेन्द्र बल हटने पर वस्तु इसी दिशा में चलती है।
(v) यह ज्यामिति एवं भौतिकी दोनों में उपयोगी है।
5. गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम लिखिए।
उत्तर ⇒ सर आइज़ैक न्यूटन ने 1687 ई. में गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम प्रतिपादित किया। इस नियम के अनुसार, दो पिंडों के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यह बल दोनों पिंडों के केंद्रों को मिलाने वाली रेखा की दिशा में कार्य करता है तथा सदैव आकर्षण का होता है।
सूत्र :
F = Gm₁m₂ / r²
जहाँ—
- F = गुरुत्वाकर्षण बल
- G = सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक
- m₁ = प्रथम पिंड का द्रव्यमान
- m₂ = द्वितीय पिंड का द्रव्यमान
- r = दोनों पिंडों के केंद्रों के बीच की दूरी
(i) नियम का प्रतिपादन न्यूटन ने किया।
(ii) बल द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती होता है।
(iii) बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
(iv) यह सदैव आकर्षण का बल है।
(v) इसका सूत्र F = Gm₁m₂/r² है।
6. गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम का महत्व लिखिए।
उत्तर ⇒ गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम अनेक प्राकृतिक घटनाओं की वैज्ञानिक व्याख्या करता है। इसी नियम के कारण पृथ्वी हमें अपनी ओर आकर्षित करती है, चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर तथा ग्रह सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करते हैं। समुद्र में ज्वार-भाटा भी सूर्य और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के कारण उत्पन्न होते हैं। यह नियम ग्रहों, उपग्रहों और अन्य खगोलीय पिंडों की गति को समझने का आधार है।
(i) पृथ्वी हमें अपनी ओर आकर्षित करती है।
(ii) चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है।
(iii) ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं।
(iv) ज्वार-भाटा की व्याख्या करता है।
(v) खगोलीय पिंडों की गति समझने में सहायक है।
7. गुरुत्वीय बल (Gravitational Force) क्या है?
उत्तर ⇒ पृथ्वी प्रत्येक वस्तु को अपनी ओर आकर्षित करती है। पृथ्वी द्वारा लगाए गए इस आकर्षण बल को गुरुत्वीय बल (Gravitational Force) कहते हैं। यही बल वस्तुओं को पृथ्वी की सतह पर बनाए रखता है तथा ऊपर फेंकी गई वस्तुओं को पुनः पृथ्वी पर गिरा देता है। गुरुत्वीय बल सदैव पृथ्वी के केंद्र की ओर कार्य करता है।
(i) पृथ्वी का आकर्षण बल गुरुत्वीय बल कहलाता है।
(ii) यह वस्तुओं को पृथ्वी पर बनाए रखता है।
(iii) इसकी दिशा पृथ्वी के केंद्र की ओर होती है।
(iv) यह एक आकर्षण बल है।
(v) मुक्त पातन इसी के कारण होता है।
8. मुक्त पातन (Free Fall) क्या है?
उत्तर ⇒ जब कोई वस्तु केवल पृथ्वी के गुरुत्वीय बल के प्रभाव में पृथ्वी की ओर गिरती है तथा उस पर कोई अन्य बाहरी बल (जैसे वायु प्रतिरोध) कार्य नहीं करता, तो इस प्रकार की गति को मुक्त पातन (Free Fall) कहते हैं। मुक्त पातन के दौरान वस्तु का वेग लगातार बढ़ता है क्योंकि उस पर गुरुत्वीय त्वरण कार्य करता है।
(i) केवल गुरुत्वीय बल कार्य करता है।
(ii) वस्तु पृथ्वी की ओर गिरती है।
(iii) वायु प्रतिरोध की उपेक्षा की जाती है।
(iv) वेग लगातार बढ़ता है।
(v) गुरुत्वीय त्वरण उत्पन्न होता है।
9. गुरुत्वीय त्वरण (Acceleration due to Gravity) क्या है?
उत्तर ⇒ जब कोई वस्तु पृथ्वी की ओर गिरती है, तो पृथ्वी के गुरुत्वीय आकर्षण के कारण उसके वेग में परिवर्तन होता है। इस परिवर्तन के कारण जो त्वरण उत्पन्न होता है, उसे गुरुत्वीय त्वरण (g) कहते हैं। पृथ्वी की सतह पर इसका औसत मान 9.8 m/s² होता है। गुरुत्वीय त्वरण की दिशा सदैव पृथ्वी के केंद्र की ओर होती है।
(i) इसे g से दर्शाते हैं।
(ii) इसका औसत मान 9.8 m/s² है।
(iii) यह गुरुत्वीय बल के कारण उत्पन्न होता है।
(iv) इसकी दिशा पृथ्वी के केंद्र की ओर होती है।
(v) मुक्त पातन में यही त्वरण कार्य करता है।
10. गुरुत्वीय त्वरण के लिए गति के समीकरण लिखिए।
उत्तर ⇒ यदि कोई वस्तु गुरुत्वीय त्वरण g के प्रभाव में मुक्त पातन करती है, तो उसके लिए भी गति के वही समीकरण लागू होते हैं जो एकसमान त्वरण के लिए होते हैं। केवल त्वरण a के स्थान पर g का प्रयोग किया जाता है। ऊपर की ओर गति करने पर g को ऋणात्मक तथा नीचे की ओर गति करने पर धनात्मक माना जाता है।
गति के समीकरण :
v = u + gt
v² = u² + 2gs
s = ut + ½gt²
(i) मुक्त पातन में g का प्रयोग होता है।
(ii) प्रथम समीकरण : v = u + gt
(iii) द्वितीय समीकरण : v² = u² + 2gs
(iv) तृतीय समीकरण : s = ut + ½gt²
(v) ऊपर की ओर गति में g ऋणात्मक माना जाता है।
11. द्रव्यमान (Mass) क्या है?
उत्तर ⇒ किसी वस्तु में उपस्थित कुल पदार्थ की मात्रा को द्रव्यमान (Mass) कहते हैं। दूसरे शब्दों में, किसी वस्तु के जड़त्व की माप को भी द्रव्यमान कहा जाता है। किसी वस्तु का द्रव्यमान जितना अधिक होगा, उसका जड़त्व भी उतना ही अधिक होगा। द्रव्यमान स्थान परिवर्तन के साथ नहीं बदलता। अर्थात पृथ्वी, चंद्रमा या अंतरिक्ष में किसी वस्तु का द्रव्यमान समान रहता है। द्रव्यमान एक अदिश राशि (Scalar Quantity) है तथा इसका SI मात्रक किलोग्राम (kg) है। इसे m से प्रदर्शित किया जाता है।
(i) द्रव्यमान पदार्थ की मात्रा है।
(ii) यह जड़त्व की माप है।
(iii) इसका मान स्थान बदलने पर नहीं बदलता।
(iv) इसका SI मात्रक किलोग्राम (kg) है।
(v) यह एक अदिश राशि है।
12. द्रव्यमान की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर ⇒ द्रव्यमान किसी वस्तु का मूलभूत गुण है। यह वस्तु में उपस्थित पदार्थ की मात्रा को दर्शाता है तथा स्थान बदलने पर इसका मान नहीं बदलता। पृथ्वी, चंद्रमा या अंतरिक्ष में भी वस्तु का द्रव्यमान समान रहता है। द्रव्यमान जितना अधिक होगा, वस्तु का जड़त्व भी उतना अधिक होगा। इसका मापन भौतिक तुला (Beam Balance) से किया जाता है तथा इसका SI मात्रक किलोग्राम (kg) है।
(i) द्रव्यमान स्थिर रहता है।
(ii) यह स्थान के अनुसार नहीं बदलता।
(iii) इसका SI मात्रक किलोग्राम है।
(iv) इसे m से प्रदर्शित करते हैं।
(v) इसका मापन भौतिक तुला से किया जाता है।
13. भार (Weight) क्या है?
उत्तर ⇒ पृथ्वी प्रत्येक वस्तु को गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा अपनी ओर आकर्षित करती है। पृथ्वी द्वारा किसी वस्तु पर लगाया गया गुरुत्वीय आकर्षण बल ही उस वस्तु का भार (Weight) कहलाता है। भार एक बल है, इसलिए इसमें परिमाण तथा दिशा दोनों होते हैं। इसकी दिशा सदैव पृथ्वी के केंद्र की ओर होती है। भार को W से प्रदर्शित किया जाता है तथा इसका SI मात्रक न्यूटन (N) है। चूँकि विभिन्न स्थानों पर गुरुत्वीय त्वरण (g) का मान बदल सकता है, इसलिए भार भी बदल जाता है।
(i) भार पृथ्वी का आकर्षण बल है।
(ii) इसे W से दर्शाते हैं।
(iii) यह एक सदिश राशि है।
(iv) इसका SI मात्रक न्यूटन (N) है।
(v) इसका मान स्थान के अनुसार बदलता है।
14. भार का सूत्र लिखिए।
उत्तर ⇒ न्यूटन के द्वितीय गति नियम के अनुसार बल F = ma होता है। जब कोई वस्तु पृथ्वी के गुरुत्वीय आकर्षण के प्रभाव में होती है, तब त्वरण का मान g होता है। इसलिए वस्तु का भार निम्नलिखित सूत्र से ज्ञात किया जाता है—
सूत्र :
W = m × g
जहाँ—
- W = भार
- m = द्रव्यमान
- g = गुरुत्वीय त्वरण
इस सूत्र से स्पष्ट है कि यदि गुरुत्वीय त्वरण का मान बदलता है, तो वस्तु का भार भी बदल जाता है।
(i) भार का सूत्र W = mg है।
(ii) m द्रव्यमान को दर्शाता है।
(iii) g गुरुत्वीय त्वरण को दर्शाता है।
(iv) भार एक बल है।
(v) इसका SI मात्रक न्यूटन है।
15. द्रव्यमान एवं भार में अंतर लिखिए।
उत्तर ⇒ द्रव्यमान और भार दोनों अलग-अलग भौतिक राशियाँ हैं। द्रव्यमान किसी वस्तु में उपस्थित पदार्थ की मात्रा को दर्शाता है, जबकि भार पृथ्वी द्वारा वस्तु पर लगाए गए गुरुत्वीय आकर्षण बल को दर्शाता है। द्रव्यमान का मान स्थान बदलने पर नहीं बदलता, जबकि भार का मान गुरुत्वीय त्वरण के अनुसार बदलता है।
| द्रव्यमान | भार |
|---|---|
| पदार्थ की मात्रा है। | गुरुत्वीय आकर्षण बल है। |
| स्थान के अनुसार नहीं बदलता। | स्थान के अनुसार बदलता है। |
| SI मात्रक kg है। | SI मात्रक N है। |
| अदिश राशि है। | सदिश राशि है। |
| भौतिक तुला से मापा जाता है। | कमानीदार तुला से मापा जाता है। |
(i) द्रव्यमान स्थिर रहता है।
(ii) भार स्थान के अनुसार बदलता है।
(iii) द्रव्यमान का मात्रक kg है।
(iv) भार का मात्रक N है।
(v) द्रव्यमान अदिश तथा भार सदिश राशि है।
16. प्रणोद (Thrust) क्या है?
उत्तर ⇒ जब किसी वस्तु पर कोई बल किसी सतह के लंबवत (Perpendicular) लगाया जाता है, तो उसे प्रणोद (Thrust) कहते हैं। अर्थात किसी सतह पर लंबवत दिशा में लगाया गया कुल बल प्रणोद कहलाता है। प्रणोद एक प्रकार का बल है, इसलिए इसका SI मात्रक भी न्यूटन (N) होता है। प्रणोद का उपयोग दाब की गणना करने में किया जाता है।
(i) प्रणोद सतह पर लंबवत लगाया गया बल है।
(ii) यह एक प्रकार का बल है।
(iii) इसका SI मात्रक न्यूटन है।
(iv) दाब की गणना में इसका उपयोग होता है।
(v) यह सतह पर कार्य करता है।
17. दाब (Pressure) क्या है?
उत्तर ⇒ किसी सतह के प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाले प्रणोद को दाब (Pressure) कहते हैं। यदि समान बल कम क्षेत्रफल पर लगाया जाए, तो दाब अधिक होता है और अधिक क्षेत्रफल पर लगाया जाए, तो दाब कम होता है। दाब का SI मात्रक पास्कल (Pa) है, जिसका नाम वैज्ञानिक ब्लैस पास्कल के सम्मान में रखा गया है।
सूत्र :
P = F / A
जहाँ—
- P = दाब
- F = प्रणोद (बल)
- A = क्षेत्रफल
(i) दाब = बल / क्षेत्रफल।
(ii) इसका SI मात्रक पास्कल (Pa) है।
(iii) कम क्षेत्रफल पर दाब अधिक होता है।
(iv) अधिक क्षेत्रफल पर दाब कम होता है।
(v) यह सतह पर लगने वाले बल पर निर्भर करता है।
18. उत्प्लावन बल (Buoyant Force) क्या है?
उत्तर ⇒ जब किसी वस्तु को किसी तरल में पूर्ण या आंशिक रूप से डुबोया जाता है, तो तरल उस वस्तु पर ऊपर की दिशा में एक बल लगाता है। इस बल को उत्प्लावन बल (Buoyant Force) या उत्थान बल कहते हैं। यदि उत्प्लावन बल वस्तु के भार से अधिक हो जाए, तो वस्तु ऊपर तैरने लगती है। यदि उत्प्लावन बल कम हो, तो वस्तु डूब जाती है। उत्प्लावन बल वस्तु के आयतन तथा तरल के घनत्व पर निर्भर करता है।
(i) यह तरल द्वारा लगाया गया ऊपर की ओर बल है।
(ii) इसे उत्थान बल भी कहते हैं।
(iii) यह वस्तु के आयतन पर निर्भर करता है।
(iv) यह तरल के घनत्व पर निर्भर करता है।
(v) इसी के कारण वस्तुएँ तैरती या डूबती हैं।
19. घनत्व (Density) क्या है?
उत्तर ⇒ किसी पदार्थ के एकांक आयतन में उपस्थित द्रव्यमान को उसका घनत्व (Density) कहते हैं। यदि किसी वस्तु का द्रव्यमान अधिक तथा आयतन कम हो, तो उसका घनत्व अधिक होगा। घनत्व का SI मात्रक किलोग्राम प्रति घन मीटर (kg/m³) है। किसी पदार्थ के तैरने या डूबने का निर्णय मुख्यतः उसके घनत्व पर निर्भर करता है।
सूत्र :
घनत्व = द्रव्यमान / आयतन
ρ = m / V
(i) घनत्व = द्रव्यमान / आयतन।
(ii) इसका SI मात्रक kg/m³ है।
(iii) इसे ρ (रो) से दर्शाते हैं।
(iv) यह पदार्थ का महत्वपूर्ण गुण है।
(v) तैरने एवं डूबने में इसकी भूमिका होती है।
20. वस्तुएँ तैरती या डूबती क्यों हैं?
उत्तर ⇒ किसी वस्तु का तैरना या डूबना उसके घनत्व तथा तरल के घनत्व पर निर्भर करता है। यदि वस्तु का घनत्व तरल के घनत्व से कम हो, तो उत्प्लावन बल उसके भार से अधिक होता है और वस्तु तैरती है। यदि वस्तु का घनत्व तरल के घनत्व से अधिक हो, तो उत्प्लावन बल कम होता है और वस्तु डूब जाती है। यदि दोनों बराबर हों, तो वस्तु तरल में संतुलित अवस्था में तैरती रहती है।
(i) कम घनत्व वाली वस्तु तैरती है।
(ii) अधिक घनत्व वाली वस्तु डूब जाती है।
(iii) उत्प्लावन बल महत्वपूर्ण होता है।
(iv) तरल का घनत्व भी प्रभाव डालता है।
(v) कॉर्क तैरता है जबकि लोहे की कील डूब जाती है।
21. आर्किमिडीज़ का सिद्धान्त (Archimedes’ Principle) क्या है?
उत्तर ⇒ आर्किमिडीज़ के सिद्धान्त के अनुसार, जब किसी वस्तु को किसी तरल में पूर्ण या आंशिक रूप से डुबोया जाता है, तो वह वस्तु ऊपर की दिशा में एक उत्प्लावन बल का अनुभव करती है, जिसका परिमाण वस्तु द्वारा हटाए गए तरल के भार के बराबर होता है। इस सिद्धान्त की खोज यूनान के प्रसिद्ध वैज्ञानिक आर्किमिडीज़ ने की थी। इसी सिद्धान्त के कारण भारी-से-भारी जहाज़ भी पानी पर तैरते हैं। यह सिद्धान्त तरल में वस्तुओं के तैरने तथा डूबने की व्याख्या करता है और विज्ञान एवं अभियांत्रिकी में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
(i) यह सिद्धान्त आर्किमिडीज़ ने दिया।
(ii) वस्तु पर ऊपर की ओर उत्प्लावन बल लगता है।
(iii) उत्प्लावन बल हटाए गए तरल के भार के बराबर होता है।
(iv) यह तरल में तैरने और डूबने की व्याख्या करता है।
(v) जहाज़ों के तैरने का आधार यही सिद्धान्त है।
22. आर्किमिडीज़ के सिद्धान्त के अनुप्रयोग लिखिए।
उत्तर ⇒ आर्किमिडीज़ के सिद्धान्त का उपयोग विज्ञान तथा दैनिक जीवन में अनेक स्थानों पर किया जाता है। इसी सिद्धान्त के आधार पर बड़े-बड़े जलयानों एवं पनडुब्बियों का निर्माण किया जाता है। दूध की शुद्धता जाँचने वाले दुग्धमापी (Lactometer) तथा द्रवों का घनत्व मापने वाले हाइड्रोमीटर (Hydrometer) भी इसी सिद्धान्त पर कार्य करते हैं। इसके अतिरिक्त यह सिद्धान्त किसी वस्तु का आयतन तथा घनत्व ज्ञात करने में भी उपयोगी है।
(i) जलयानों के निर्माण में उपयोग होता है।
(ii) पनडुब्बियों के निर्माण में उपयोग होता है।
(iii) दुग्धमापी इसी सिद्धान्त पर आधारित है।
(iv) हाइड्रोमीटर इसी सिद्धान्त पर कार्य करता है।
(v) घनत्व ज्ञात करने में सहायक है।
23. उत्प्लावन बल किन-किन कारकों पर निर्भर करता है?
उत्तर ⇒ उत्प्लावन बल मुख्यतः दो कारकों पर निर्भर करता है। पहला, तरल में डुबोई गई वस्तु का आयतन, अर्थात वस्तु जितना अधिक तरल विस्थापित करेगी, उत्प्लावन बल उतना अधिक होगा। दूसरा, तरल का घनत्व, अर्थात अधिक घनत्व वाले तरल में उत्पन्न उत्प्लावन बल भी अधिक होता है। यही कारण है कि समुद्र के पानी में वस्तुएँ सामान्य पानी की अपेक्षा अधिक आसानी से तैरती हैं।
(i) वस्तु के डूबे हुए आयतन पर निर्भर करता है।
(ii) तरल के घनत्व पर निर्भर करता है।
(iii) अधिक घनत्व वाले तरल में उत्प्लावन बल अधिक होता है।
(iv) अधिक आयतन से उत्प्लावन बल बढ़ता है।
(v) तैरने एवं डूबने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
24. गुरुत्वीय बल एवं गुरुत्वाकर्षण बल में अंतर लिखिए।
उत्तर ⇒ गुरुत्वाकर्षण बल तथा गुरुत्वीय बल में मुख्य अंतर उनके कार्य क्षेत्र में होता है। गुरुत्वाकर्षण बल ब्रह्मांड के किसी भी दो पिंडों के बीच कार्य करने वाला आकर्षण बल है, जबकि गुरुत्वीय बल विशेष रूप से पृथ्वी द्वारा किसी वस्तु पर लगाया गया आकर्षण बल है। अर्थात प्रत्येक गुरुत्वीय बल गुरुत्वाकर्षण बल है, लेकिन प्रत्येक गुरुत्वाकर्षण बल गुरुत्वीय बल नहीं होता।
| गुरुत्वाकर्षण बल | गुरुत्वीय बल |
|---|---|
| किसी भी दो पिंडों के बीच कार्य करता है। | केवल पृथ्वी द्वारा वस्तु पर लगाया जाता है। |
| सार्वत्रिक आकर्षण बल है। | पृथ्वी का आकर्षण बल है। |
| पूरे ब्रह्मांड में कार्य करता है। | केवल पृथ्वी के संदर्भ में प्रयुक्त होता है। |
| न्यूटन के सार्वत्रिक नियम पर आधारित है। | पृथ्वी के गुरुत्व पर आधारित है। |
(i) गुरुत्वाकर्षण बल सभी पिंडों के बीच होता है।
(ii) गुरुत्वीय बल पृथ्वी का आकर्षण बल है।
(iii) दोनों आकर्षण बल हैं।
(iv) दोनों की दिशा आकर्षण की ओर होती है।
(v) दोनों का अध्ययन गुरुत्व के अंतर्गत किया जाता है।
25. गुरुत्वीय त्वरण (g) का मान कितना होता है?
उत्तर ⇒ पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण का औसत मान 9.8 m/s² होता है। इसका अर्थ है कि मुक्त पातन करने वाली किसी वस्तु का वेग प्रत्येक सेकंड 9.8 m/s की दर से बढ़ता है। गुरुत्वीय त्वरण का मान पृथ्वी के केंद्र से दूरी, ऊँचाई तथा स्थान के अनुसार थोड़ा-बहुत बदल सकता है। इसे g से प्रदर्शित किया जाता है तथा इसकी दिशा सदैव पृथ्वी के केंद्र की ओर होती है।
(i) g का औसत मान 9.8 m/s² है।
(ii) इसे g से प्रदर्शित करते हैं।
(iii) इसकी दिशा पृथ्वी के केंद्र की ओर होती है।
(iv) यह स्थान के अनुसार थोड़ा बदल सकता है।
(v) मुक्त पातन में यही त्वरण कार्य करता है।
26. भार स्थान के अनुसार क्यों बदलता है?
उत्तर ⇒ किसी वस्तु का भार गुरुत्वीय त्वरण (g) पर निर्भर करता है। भार का सूत्र W = mg है। चूँकि पृथ्वी के विभिन्न स्थानों तथा अन्य ग्रहों पर गुरुत्वीय त्वरण का मान अलग-अलग होता है, इसलिए वस्तु का भार भी बदल जाता है। उदाहरण के लिए, चंद्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी की तुलना में लगभग 1/6 होता है, इसलिए किसी वस्तु का भार वहाँ कम हो जाता है, जबकि उसका द्रव्यमान समान रहता है।
(i) भार g पर निर्भर करता है।
(ii) W = mg होता है।
(iii) g बदलने पर भार बदलता है।
(iv) चंद्रमा पर भार कम होता है।
(v) द्रव्यमान नहीं बदलता।
27. दाब किन-किन कारकों पर निर्भर करता है?
उत्तर ⇒ दाब मुख्यतः दो कारकों पर निर्भर करता है—प्रणोद (बल) तथा संपर्क क्षेत्रफल। यदि समान क्षेत्रफल पर अधिक बल लगाया जाए, तो दाब बढ़ जाता है। इसी प्रकार समान बल को कम क्षेत्रफल पर लगाने से दाब अधिक तथा अधिक क्षेत्रफल पर लगाने से दाब कम हो जाता है। इसी कारण नुकीली कील आसानी से लकड़ी में प्रवेश कर जाती है, जबकि चौड़ी सतह वाली वस्तु ऐसा नहीं कर पाती।
(i) दाब बल पर निर्भर करता है।
(ii) दाब क्षेत्रफल पर निर्भर करता है।
(iii) अधिक बल ⇒ अधिक दाब।
(iv) कम क्षेत्रफल ⇒ अधिक दाब।
(v) नुकीली कील इसका उदाहरण है।
28. नुकीली कील आसानी से लकड़ी में क्यों प्रवेश कर जाती है?
उत्तर ⇒ नुकीली कील का अग्रभाग बहुत छोटा होता है, जिससे उसका संपर्क क्षेत्रफल कम हो जाता है। दाब का सूत्र P = F/A के अनुसार यदि क्षेत्रफल कम हो, तो समान बल लगाने पर दाब अधिक उत्पन्न होता है। अधिक दाब के कारण कील आसानी से लकड़ी में प्रवेश कर जाती है। यही कारण है कि चाकू की धार, सुई तथा पिन का अग्रभाग नुकीला बनाया जाता है।
(i) कील का क्षेत्रफल कम होता है।
(ii) कम क्षेत्रफल से दाब बढ़ता है।
(iii) समान बल पर अधिक दाब उत्पन्न होता है।
(iv) कील आसानी से लकड़ी में प्रवेश करती है।
(v) सुई एवं चाकू भी इसी सिद्धान्त पर कार्य करते हैं।
29. जहाज़ लोहे का होने पर भी पानी में क्यों तैरता है?
उत्तर ⇒ यद्यपि लोहा पानी से अधिक घनत्व वाला होता है, फिर भी जहाज़ का आकार इस प्रकार बनाया जाता है कि उसका औसत घनत्व पानी से कम हो जाता है। जहाज़ का बड़ा खोखला भाग अधिक पानी विस्थापित करता है, जिससे उस पर पर्याप्त उत्प्लावन बल लगता है। जब उत्प्लावन बल जहाज़ के भार के बराबर या उससे अधिक हो जाता है, तब जहाज़ पानी में तैरता रहता है। यह आर्किमिडीज़ के सिद्धान्त का अनुप्रयोग है।
(i) जहाज़ का औसत घनत्व कम होता है।
(ii) वह अधिक पानी विस्थापित करता है।
(iii) उत्प्लावन बल अधिक प्राप्त होता है।
(iv) आर्किमिडीज़ का सिद्धान्त लागू होता है।
(v) इसलिए जहाज़ पानी में तैरता है।
30. अध्याय का निष्कर्ष लिखिए।
उत्तर ⇒ इस अध्याय में हमने गुरुत्वाकर्षण, गुरुत्वीय बल, गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम, अभिकेन्द्र बल, मुक्त पातन, गुरुत्वीय त्वरण, द्रव्यमान, भार, प्रणोद, दाब, उत्प्लावन बल, घनत्व तथा आर्किमिडीज़ के सिद्धान्त का अध्ययन किया। साथ ही यह भी समझा कि वस्तुएँ पानी में क्यों तैरती या डूबती हैं तथा गुरुत्वाकर्षण का हमारे दैनिक जीवन में क्या महत्व है। यह अध्याय भौतिकी की आधारभूत अवधारणाओं को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
(i) प्रत्येक पिंड दूसरे पिंड को आकर्षित करता है।
(ii) भार = द्रव्यमान × गुरुत्वीय त्वरण।
(iii) दाब = बल / क्षेत्रफल।
(iv) उत्प्लावन बल तैरने एवं डूबने का कारण है।
(v) आर्किमिडीज़ का सिद्धान्त विज्ञान एवं अभियांत्रिकी में अत्यंत उपयोगी है।