Class 9 Science Revision Notes

प्राकृतिक सम्पदा

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Chapter Overview

Class9
SubjectScience
Chapter Nameप्राकृतिक सम्पदा
Resource TypeRevision Notes
SyllabusNCERT
Suitable ForCBSE, JAC and other state boards

प्राकृतिक सम्पदा Revision Notes

1. प्राकृतिक सम्पदा (Natural Resources) क्या है?

उत्तर ⇒ प्रकृति द्वारा मनुष्य एवं अन्य जीवों को बिना किसी कृत्रिम निर्माण के प्राप्त होने वाले सभी उपयोगी पदार्थ एवं संसाधन प्राकृतिक सम्पदा (Natural Resources) कहलाते हैं। वायु, जल, मिट्टी, सूर्य का प्रकाश, वन, खनिज तथा जीव-जंतु प्राकृतिक सम्पदा के प्रमुख उदाहरण हैं। ये संसाधन पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। मनुष्य अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए इन्हीं संसाधनों पर निर्भर रहता है। इसलिए इनका संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग तथा संरक्षण करना आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी इनका लाभ मिल सके।

(i) प्राकृतिक सम्पदा प्रकृति से प्राप्त होती है।

(ii) वायु, जल एवं मिट्टी इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

(iii) जीवन के लिए आवश्यक है।

(iv) इनका संरक्षण आवश्यक है।

(v) संतुलित उपयोग करना चाहिए।

2. प्राकृतिक सम्पदा के प्रमुख प्रकार लिखिए।

उत्तर ⇒ प्राकृतिक सम्पदा को मुख्यतः जैविक (Biotic) एवं अजैविक (Abiotic) संसाधनों में विभाजित किया जाता है। जैविक संसाधनों में वनस्पति, पशु-पक्षी तथा सूक्ष्मजीव आते हैं, जबकि अजैविक संसाधनों में वायु, जल, मिट्टी, खनिज एवं सूर्य का प्रकाश शामिल हैं। इन सभी संसाधनों का पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण योगदान होता है। इनके संतुलित उपयोग से पर्यावरण सुरक्षित रहता है तथा सतत विकास संभव होता है।

जैविक संसाधनअजैविक संसाधन
पेड़-पौधेवायु
पशु-पक्षीजल
सूक्ष्मजीवमिट्टी, खनिज, सूर्य का प्रकाश

(i) प्राकृतिक सम्पदा दो प्रकार की होती है।

(ii) जैविक संसाधन जीवित होते हैं।

(iii) अजैविक संसाधन निर्जीव होते हैं।

(iv) दोनों जीवन के लिए आवश्यक हैं।

(v) संरक्षण आवश्यक है।

3. पृथ्वी पर जीवन के लिए वायुमंडल का क्या महत्व है?

उत्तर ⇒ वायुमंडल पृथ्वी को चारों ओर से घेरने वाली गैसों की परत है। यह जीवों को श्वसन के लिए ऑक्सीजन तथा पौधों को प्रकाश संश्लेषण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड उपलब्ध कराता है। वायुमंडल सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों से पृथ्वी की रक्षा करता है तथा पृथ्वी का तापमान संतुलित बनाए रखता है। जल चक्र एवं मौसम परिवर्तन भी वायुमंडल के कारण ही संभव हैं। यदि वायुमंडल न हो तो पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं होगा।

(i) ऑक्सीजन उपलब्ध कराता है।

(ii) तापमान संतुलित रखता है।

(iii) UV किरणों से रक्षा करता है।

(iv) जल चक्र में सहायता करता है।

(v) जीवन के लिए आवश्यक है।

4. वायुमंडल की संरचना लिखिए।

उत्तर ⇒ वायुमंडल विभिन्न गैसों का मिश्रण है। इसमें सबसे अधिक मात्रा में नाइट्रोजन (78%), उसके बाद ऑक्सीजन (21%) तथा शेष आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प एवं अन्य गैसें (लगभग 1%) होती हैं। प्रत्येक गैस का अपना विशेष महत्व है। नाइट्रोजन पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक है, ऑक्सीजन श्वसन में तथा कार्बन डाइऑक्साइड प्रकाश संश्लेषण में उपयोग होती है।

गैसप्रतिशत (%)
नाइट्रोजन (N₂)78%
ऑक्सीजन (O₂)21%
अन्य गैसें1%

(i) नाइट्रोजन सबसे अधिक होती है।

(ii) ऑक्सीजन श्वसन के लिए आवश्यक है।

(iii) कार्बन डाइऑक्साइड प्रकाश संश्लेषण में उपयोगी है।

(iv) जलवाष्प भी वायुमंडल में होती है।

(v) गैसों का संतुलन आवश्यक है।

5. जीवन के लिए ऑक्सीजन एवं कार्बन डाइऑक्साइड का महत्व लिखिए।

उत्तर ⇒ ऑक्सीजन सभी जीवों के श्वसन के लिए आवश्यक गैस है। इसके द्वारा भोजन का ऑक्सीकरण होकर ऊर्जा प्राप्त होती है। दूसरी ओर, कार्बन डाइऑक्साइड पौधों द्वारा प्रकाश संश्लेषण के दौरान भोजन बनाने में प्रयुक्त होती है। इस प्रक्रिया में पौधे ऑक्सीजन छोड़ते हैं, जिसे जीव श्वसन में उपयोग करते हैं। इस प्रकार दोनों गैसें प्रकृति में संतुलन बनाए रखती हैं तथा जीवन चक्र को निरंतर चलाती हैं।

(i) ऑक्सीजन श्वसन के लिए आवश्यक है।

(ii) कार्बन डाइऑक्साइड प्रकाश संश्लेषण में उपयोगी है।

(iii) पौधे ऑक्सीजन छोड़ते हैं।

(iv) दोनों गैसें संतुलन बनाए रखती हैं।

(v) जीवन के लिए दोनों आवश्यक हैं।

6. ग्रीनहाउस प्रभाव (Greenhouse Effect) क्या है?

उत्तर ⇒ वायुमंडल में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, जलवाष्प आदि गैसें सूर्य से आने वाली ऊष्मा को पृथ्वी के पास रोककर रखती हैं। इस घटना को ग्रीनहाउस प्रभाव कहते हैं। यह प्रभाव सामान्य मात्रा में पृथ्वी का तापमान जीवन के अनुकूल बनाए रखता है। लेकिन इन गैसों की अधिकता से पृथ्वी का तापमान बढ़ने लगता है, जिसे वैश्विक ऊष्मीकरण (Global Warming) कहा जाता है। इसलिए ग्रीनहाउस गैसों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

(i) ग्रीनहाउस गैसें ऊष्मा रोकती हैं।

(ii) सामान्य प्रभाव लाभदायक है।

(iii) अधिकता से तापमान बढ़ता है।

(iv) वैश्विक ऊष्मीकरण होता है।

(v) गैसों का संतुलन आवश्यक है।

7. जल (Water) का जीवन में क्या महत्व है?

उत्तर ⇒ जल सभी जीवों के लिए अत्यंत आवश्यक प्राकृतिक संसाधन है। यह शरीर की विभिन्न जैविक क्रियाओं, पाचन, परिवहन तथा तापमान नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पौधों में जल प्रकाश संश्लेषण तथा खनिज लवणों के परिवहन में सहायक होता है। कृषि, उद्योग, घरेलू कार्य तथा विद्युत उत्पादन में भी जल का व्यापक उपयोग होता है। इसलिए जल का संरक्षण एवं विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है।

(i) जल जीवन का आधार है।

(ii) जैविक क्रियाओं में सहायक है।

(iii) कृषि के लिए आवश्यक है।

(iv) उद्योगों में उपयोग होता है।

(v) जल संरक्षण आवश्यक है।

8. जल चक्र (Water Cycle) क्या है?

उत्तर ⇒ पृथ्वी पर जल के निरंतर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने की प्राकृतिक प्रक्रिया को जल चक्र कहते हैं। सूर्य की ऊष्मा से जल का वाष्पीकरण होता है। जलवाष्प ऊपर जाकर संघनित होकर बादल बनाती है तथा वर्षा के रूप में पुनः पृथ्वी पर गिरती है। वर्षा का जल नदियों, झीलों एवं समुद्रों में पहुँच जाता है और यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। जल चक्र के कारण पृथ्वी पर जल का संतुलन बना रहता है।

(i) जल का वाष्पीकरण होता है।

(ii) बादल बनते हैं।

(iii) वर्षा होती है।

(iv) जल पुनः जलाशयों में पहुँचता है।

(v) जल का संतुलन बना रहता है।

9. मिट्टी (Soil) का निर्माण कैसे होता है?

उत्तर ⇒ मिट्टी का निर्माण चट्टानों के लंबे समय तक होने वाले अपक्षय (Weathering) से होता है। सूर्य की गर्मी, वर्षा, हवा तथा जीवों की क्रियाओं के कारण चट्टानें धीरे-धीरे छोटे-छोटे कणों में टूट जाती हैं। इन कणों में पौधों एवं जीवों के मृत अवशेष मिलकर उपजाऊ मिट्टी का निर्माण करते हैं। मिट्टी पौधों को जल, खनिज एवं सहारा प्रदान करती है, इसलिए कृषि एवं जीवन के लिए इसका विशेष महत्व है।

(i) चट्टानों के अपक्षय से मिट्टी बनती है।

(ii) हवा एवं वर्षा सहायक हैं।

(iii) जैविक पदार्थ मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं।

(iv) पौधों को सहारा मिलता है।

(v) कृषि के लिए आवश्यक है।

10. मृदा अपरदन (Soil Erosion) क्या है? इसके कारण एवं रोकथाम लिखिए।

उत्तर ⇒ जल, वायु अथवा अन्य प्राकृतिक कारणों से मिट्टी की उपजाऊ ऊपरी परत का बह जाना मृदा अपरदन (Soil Erosion) कहलाता है। वनों की कटाई, अत्यधिक चराई, तेज वर्षा तथा तेज हवा इसके प्रमुख कारण हैं। मृदा अपरदन से भूमि की उर्वरता कम हो जाती है और कृषि उत्पादन प्रभावित होता है। वृक्षारोपण, समोच्च जुताई, सीढ़ीदार खेती तथा वनों का संरक्षण करके मृदा अपरदन को रोका जा सकता है।

(i) मिट्टी की ऊपरी परत बह जाती है।

(ii) वनों की कटाई प्रमुख कारण है।

(iii) भूमि की उर्वरता घटती है।

(iv) वृक्षारोपण से रोकथाम होती है।

(v) समोच्च एवं सीढ़ीदार खेती उपयोगी है।

11. वायु प्रदूषण (Air Pollution) क्या है?

उत्तर ⇒ वायु में धूल, धुआँ, विषैली गैसें तथा अन्य हानिकारक कणों की मात्रा सामान्य स्तर से अधिक हो जाने पर उसे वायु प्रदूषण कहते हैं। इसके प्रमुख कारण उद्योगों का धुआँ, वाहनों से निकलने वाली गैसें, जीवाश्म ईंधनों का दहन तथा कचरे का जलाना हैं। वायु प्रदूषण से श्वसन संबंधी रोग, अस्थमा, एलर्जी तथा पर्यावरण संबंधी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। वृक्षारोपण, स्वच्छ ईंधनों का उपयोग तथा प्रदूषण नियंत्रण के उपाय अपनाकर वायु प्रदूषण को कम किया जा सकता है।

(i) वायु में हानिकारक पदार्थों की वृद्धि वायु प्रदूषण है।

(ii) वाहनों एवं उद्योगों से प्रदूषण बढ़ता है।

(iii) श्वसन रोग उत्पन्न होते हैं।

(iv) वृक्षारोपण उपयोगी है।

(v) स्वच्छ ईंधन अपनाने चाहिए।

12. जल प्रदूषण (Water Pollution) क्या है?

उत्तर ⇒ जल में हानिकारक पदार्थ, रसायन, गंदगी तथा सूक्ष्मजीव मिल जाने से जल पीने एवं उपयोग के योग्य नहीं रहता। इस स्थिति को जल प्रदूषण कहते हैं। इसका मुख्य कारण घरेलू गंदा पानी, औद्योगिक अपशिष्ट, कृषि में प्रयुक्त रसायन तथा प्लास्टिक कचरा है। प्रदूषित जल से हैजा, टाइफाइड, पीलिया तथा अन्य जलजनित रोग फैलते हैं। जल स्रोतों को स्वच्छ रखना तथा अपशिष्टों का उचित निपटान करना आवश्यक है।

(i) जल में हानिकारक पदार्थ मिलना जल प्रदूषण है।

(ii) औद्योगिक अपशिष्ट प्रमुख कारण हैं।

(iii) जलजनित रोग फैलते हैं।

(iv) स्वच्छ जल स्रोत आवश्यक हैं।

(v) जल संरक्षण करना चाहिए।

13. मृदा प्रदूषण (Soil Pollution) क्या है?

उत्तर ⇒ मिट्टी में हानिकारक रसायनों, प्लास्टिक, औद्योगिक अपशिष्ट तथा अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के मिल जाने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसे मृदा प्रदूषण कहते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है तथा फसलों की गुणवत्ता पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। जैविक खेती, कचरे का उचित प्रबंधन तथा रासायनिक पदार्थों का सीमित उपयोग करके मृदा प्रदूषण को कम किया जा सकता है।

(i) मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

(ii) रासायनिक उर्वरक प्रमुख कारण हैं।

(iii) प्लास्टिक भी मृदा प्रदूषण बढ़ाता है।

(iv) जैविक खेती लाभदायक है।

(v) मिट्टी की उर्वरता घटती है।

14. जैव-भूरासायनिक चक्र (Biogeochemical Cycle) क्या है?

उत्तर ⇒ प्रकृति में विभिन्न तत्वों जैसे जल, कार्बन, नाइट्रोजन एवं ऑक्सीजन का जीवों तथा पर्यावरण के बीच लगातार आदान-प्रदान होने की प्रक्रिया को जैव-भूरासायनिक चक्र कहते हैं। ये चक्र प्राकृतिक संतुलन बनाए रखते हैं तथा जीवों को आवश्यक तत्व उपलब्ध कराते हैं। यदि इन चक्रों में असंतुलन उत्पन्न हो जाए, तो पर्यावरण एवं जीव-जंतुओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

(i) तत्वों का प्राकृतिक चक्र है।

(ii) पर्यावरण का संतुलन बनाए रखता है।

(iii) जीवों को आवश्यक तत्व देता है।

(iv) कई प्रकार के जैव-भूरासायनिक चक्र होते हैं।

(v) प्रकृति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

15. ऑक्सीजन चक्र (Oxygen Cycle) क्या है?

उत्तर ⇒ प्रकृति में ऑक्सीजन के निरंतर संचरण को ऑक्सीजन चक्र कहते हैं। पौधे प्रकाश संश्लेषण के दौरान ऑक्सीजन छोड़ते हैं। मनुष्य एवं अन्य जीव श्वसन के समय ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं तथा कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। यह कार्बन डाइऑक्साइड पुनः पौधों द्वारा उपयोग की जाती है। इस प्रकार ऑक्सीजन का संतुलन बना रहता है और पृथ्वी पर जीवन संभव होता है।

(i) पौधे ऑक्सीजन छोड़ते हैं।

(ii) जीव ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं।

(iii) श्वसन एवं प्रकाश संश्लेषण जुड़े हैं।

(iv) संतुलन बना रहता है।

(v) जीवन के लिए आवश्यक चक्र है।

16. कार्बन चक्र (Carbon Cycle) क्या है?

उत्तर ⇒ प्रकृति में कार्बन के एक स्थान से दूसरे स्थान तक निरंतर संचरण को कार्बन चक्र कहते हैं। पौधे वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड लेकर प्रकाश संश्लेषण करते हैं। जीव भोजन के माध्यम से कार्बन प्राप्त करते हैं तथा श्वसन द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड वापस वातावरण में छोड़ते हैं। जीवाश्म ईंधनों के दहन से भी कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण में पहुँचती है। यह चक्र पर्यावरण के संतुलन के लिए आवश्यक है।

(i) कार्बन डाइऑक्साइड पौधों द्वारा उपयोग होती है।

(ii) जीव भोजन से कार्बन प्राप्त करते हैं।

(iii) श्वसन से CO₂ निकलती है।

(iv) जीवाश्म ईंधन CO₂ बढ़ाते हैं।

(v) कार्बन चक्र संतुलन बनाए रखता है।

17. नाइट्रोजन चक्र (Nitrogen Cycle) क्या है?

उत्तर ⇒ वायुमंडल में लगभग 78% नाइट्रोजन होती है, परंतु अधिकांश जीव इसे सीधे उपयोग नहीं कर सकते। कुछ जीवाणु एवं नीले-हरे शैवाल वायुमंडलीय नाइट्रोजन को उपयोगी यौगिकों में बदलते हैं। पौधे इन्हें मिट्टी से ग्रहण करते हैं और भोजन के माध्यम से यह नाइट्रोजन अन्य जीवों तक पहुँचती है। मृत जीवों एवं अपशिष्टों के अपघटन से नाइट्रोजन पुनः मिट्टी एवं वायुमंडल में लौट जाती है। इस प्रक्रिया को नाइट्रोजन चक्र कहते हैं।

(i) वायुमंडल में 78% नाइट्रोजन होती है।

(ii) जीवाणु नाइट्रोजन स्थिरीकरण करते हैं।

(iii) पौधे नाइट्रोजन ग्रहण करते हैं।

(iv) अपघटन से नाइट्रोजन वापस लौटती है।

(v) यह प्राकृतिक संतुलन बनाए रखता है।

18. ओजोन परत (Ozone Layer) क्या है? इसका महत्व लिखिए।

उत्तर ⇒ वायुमंडल के समताप मंडल (Stratosphere) में स्थित ओजोन गैस की परत को ओजोन परत कहते हैं। यह सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों को अवशोषित करके पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करती है। यदि ओजोन परत नष्ट हो जाए तो त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद तथा अन्य गंभीर रोगों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए ओजोन परत का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

(i) ओजोन परत UV किरणों को रोकती है।

(ii) समताप मंडल में स्थित होती है।

(iii) जीवन की रक्षा करती है।

(iv) ओजोन क्षय हानिकारक है।

(v) इसका संरक्षण आवश्यक है।

19. प्राकृतिक सम्पदा का संरक्षण क्यों आवश्यक है?

उत्तर ⇒ प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं तथा इनका अत्यधिक दोहन भविष्य में संकट उत्पन्न कर सकता है। बढ़ती जनसंख्या एवं औद्योगीकरण के कारण इन संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। यदि इनका संरक्षण नहीं किया गया, तो जल, वन, मिट्टी एवं स्वच्छ वायु जैसी आवश्यक सम्पदाओं की कमी हो सकती है। इसलिए प्राकृतिक सम्पदा का विवेकपूर्ण उपयोग, पुनर्चक्रण, वृक्षारोपण तथा पर्यावरण संरक्षण आवश्यक है।

(i) संसाधन सीमित हैं।

(ii) भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षण आवश्यक है।

(iii) पर्यावरण संतुलन बना रहता है।

(iv) विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए।

(v) वृक्षारोपण आवश्यक है।

20. सतत विकास (Sustainable Development) क्या है?

उत्तर ⇒ वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति इस प्रकार करना कि भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े, सतत विकास (Sustainable Development) कहलाता है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग, पर्यावरण संरक्षण तथा आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना है। जल संरक्षण, ऊर्जा की बचत, वृक्षारोपण, पुनर्चक्रण एवं प्रदूषण नियंत्रण सतत विकास के प्रमुख उपाय हैं।

(i) वर्तमान एवं भविष्य दोनों का ध्यान रखा जाता है।

(ii) प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग होता है।

(iii) पर्यावरण संरक्षण आवश्यक है।

(iv) पुनर्चक्रण को बढ़ावा दिया जाता है।

(v) सतत विकास मानव एवं प्रकृति दोनों के लिए लाभदायक है।

21. जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) क्या हैं?

उत्तर ⇒ करोड़ों वर्ष पहले मृत पौधों एवं जीवों के अवशेष पृथ्वी की सतह के नीचे दब गए। अधिक ताप एवं दाब के कारण ये अवशेष कोयला, पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस में परिवर्तित हो गए, जिन्हें जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) कहते हैं। ये ऊर्जा के प्रमुख स्रोत हैं तथा इनका उपयोग उद्योगों, बिजली उत्पादन, परिवहन एवं घरेलू कार्यों में किया जाता है। जीवाश्म ईंधनों के अत्यधिक उपयोग से वायु प्रदूषण तथा वैश्विक ऊष्मीकरण की समस्या बढ़ती है। इसलिए इनका विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए तथा वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को अपनाना चाहिए।

(i) जीवाश्म ईंधन करोड़ों वर्ष में बनते हैं।

(ii) कोयला, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस इसके उदाहरण हैं।

(iii) ऊर्जा का प्रमुख स्रोत हैं।

(iv) इनके दहन से प्रदूषण होता है।

(v) इनका संतुलित उपयोग आवश्यक है।

22. जैव निम्नीकरणीय एवं अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों में अंतर लिखिए।

उत्तर ⇒ जिन पदार्थों का अपघटन सूक्ष्मजीवों द्वारा प्राकृतिक रूप से हो जाता है, उन्हें जैव निम्नीकरणीय पदार्थ कहते हैं। जिन पदार्थों का अपघटन आसानी से नहीं होता, उन्हें अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ कहते हैं।

जैव निम्नीकरणीय पदार्थअजैव निम्नीकरणीय पदार्थ
सूक्ष्मजीवों द्वारा विघटित हो जाते हैं।आसानी से विघटित नहीं होते।
पर्यावरण को कम नुकसान पहुँचाते हैं।पर्यावरण प्रदूषण बढ़ाते हैं।
उदाहरण— पत्तियाँ, कागज, भोजनउदाहरण— प्लास्टिक, काँच, धातु

(i) जैव निम्नीकरणीय पदार्थ आसानी से नष्ट होते हैं।

(ii) अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ लंबे समय तक बने रहते हैं।

(iii) प्लास्टिक प्रदूषण बढ़ाता है।

(iv) जैविक कचरा खाद में बदला जा सकता है।

(v) पर्यावरण संरक्षण के लिए जैव निम्नीकरणीय पदार्थ बेहतर हैं।

23. जैव निम्नीकरणीय पदार्थों का महत्व लिखिए।

उत्तर ⇒ जैव निम्नीकरणीय पदार्थ प्राकृतिक रूप से सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटित होकर मिट्टी में मिल जाते हैं। इससे पर्यावरण स्वच्छ रहता है तथा कचरे का ढेर नहीं लगता। इन पदार्थों से कंपोस्ट खाद बनाई जा सकती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। पत्तियाँ, गोबर, फल एवं सब्जियों के छिलके आदि इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इनका अधिक उपयोग पर्यावरण संरक्षण में सहायक है।

(i) प्राकृतिक रूप से विघटित होते हैं।

(ii) प्रदूषण कम करते हैं।

(iii) कंपोस्ट खाद बनाई जा सकती है।

(iv) मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है।

(v) पर्यावरण के लिए लाभदायक हैं।

24. अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों के दुष्प्रभाव लिखिए।

उत्तर ⇒ अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ जैसे प्लास्टिक, काँच एवं धातुएँ लंबे समय तक पर्यावरण में बने रहते हैं। इनके कारण भूमि, जल एवं वायु प्रदूषित हो सकते हैं। प्लास्टिक नालियों को जाम कर देता है तथा पशु-पक्षियों के लिए भी हानिकारक होता है। इसलिए इनका कम उपयोग करना चाहिए तथा पुनः उपयोग (Reuse) एवं पुनर्चक्रण (Recycle) को बढ़ावा देना चाहिए।

(i) पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है।

(ii) मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

(iii) जल स्रोत प्रदूषित होते हैं।

(iv) पुनर्चक्रण आवश्यक है।

(v) प्लास्टिक का उपयोग कम करना चाहिए।

25. 3R सिद्धांत (Reduce, Reuse, Recycle) क्या है?

उत्तर ⇒ पर्यावरण संरक्षण के लिए अपनाए जाने वाले तीन महत्वपूर्ण उपायों को 3R सिद्धांत कहते हैं। Reduce का अर्थ है संसाधनों का कम उपयोग करना, Reuse का अर्थ है वस्तुओं का पुनः उपयोग करना तथा Recycle का अर्थ है अनुपयोगी वस्तुओं को पुनः उपयोगी बनाना। इस सिद्धांत को अपनाने से प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है, कचरा कम उत्पन्न होता है तथा प्रदूषण में कमी आती है।

3Rअर्थ
Reduceकम उपयोग करें
Reuseपुनः उपयोग करें
Recycleपुनर्चक्रण करें

(i) संसाधनों की बचत होती है।

(ii) कचरा कम होता है।

(iii) प्रदूषण घटता है।

(iv) पर्यावरण सुरक्षित रहता है।

(v) सतत विकास को बढ़ावा मिलता है।

26. वनों (Forests) का महत्व लिखिए।

उत्तर ⇒ वन प्राकृतिक सम्पदा का महत्वपूर्ण भाग हैं। ये ऑक्सीजन प्रदान करते हैं तथा कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करके वायु को शुद्ध बनाते हैं। वन मृदा अपरदन रोकते हैं, वर्षा में सहायता करते हैं तथा अनेक जीव-जंतुओं को आवास प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त लकड़ी, औषधियाँ, फल, गोंद एवं अन्य वन उत्पाद भी प्राप्त होते हैं। इसलिए वनों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

(i) ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।

(ii) मृदा अपरदन रोकते हैं।

(iii) वन्य जीवों का आवास हैं।

(iv) वर्षा में सहायता करते हैं।

(v) पर्यावरण संतुलित रखते हैं।

27. वनों की कटाई (Deforestation) के दुष्प्रभाव लिखिए।

उत्तर ⇒ वनों की अत्यधिक कटाई से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ जाता है। इससे मृदा अपरदन, बाढ़, सूखा, जैव विविधता में कमी तथा वैश्विक ऊष्मीकरण जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो जाता है और वर्षा का चक्र भी प्रभावित होता है। इसलिए अनावश्यक वृक्ष कटाई रोकनी चाहिए तथा अधिक से अधिक वृक्ष लगाने चाहिए।

(i) मृदा अपरदन बढ़ता है।

(ii) वर्षा प्रभावित होती है।

(iii) वन्य जीवों का आवास नष्ट होता है।

(iv) वैश्विक ऊष्मीकरण बढ़ता है।

(v) वृक्षारोपण आवश्यक है।

28. जैव विविधता (Biodiversity) क्या है?

उत्तर ⇒ किसी क्षेत्र में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के पौधों, पशुओं तथा सूक्ष्मजीवों की विविधता को जैव विविधता कहते हैं। यह पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है। जैव विविधता के कारण खाद्य श्रृंखला, पोषक चक्र एवं प्राकृतिक प्रक्रियाएँ सुचारु रूप से चलती हैं। वनों की कटाई, प्रदूषण तथा जलवायु परिवर्तन से जैव विविधता को खतरा उत्पन्न हो रहा है।

(i) विभिन्न जीवों की विविधता है।

(ii) पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखती है।

(iii) खाद्य श्रृंखला को बनाए रखती है।

(iv) पर्यावरण के लिए आवश्यक है।

(v) संरक्षण आवश्यक है।

29. पर्यावरण संरक्षण के प्रमुख उपाय लिखिए।

उत्तर ⇒ पर्यावरण संरक्षण के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग, वृक्षारोपण, जल संरक्षण, ऊर्जा की बचत तथा प्रदूषण नियंत्रण आवश्यक है। प्लास्टिक का कम उपयोग करना, कचरे का उचित निपटान, पुनर्चक्रण तथा सार्वजनिक स्वच्छता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। जनजागरूकता एवं पर्यावरण शिक्षा के माध्यम से समाज को संरक्षण के प्रति प्रेरित किया जा सकता है।

(i) अधिक से अधिक वृक्ष लगाएँ।

(ii) जल एवं ऊर्जा बचाएँ।

(iii) प्रदूषण कम करें।

(iv) प्लास्टिक का उपयोग घटाएँ।

(v) पुनर्चक्रण अपनाएँ।

30. प्राकृतिक सम्पदा का विवेकपूर्ण उपयोग क्यों आवश्यक है?

उत्तर ⇒ प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं और उनका निर्माण बहुत लंबे समय में होता है। यदि इनका अंधाधुंध उपयोग किया जाए तो भविष्य में इनकी कमी हो सकती है। बढ़ती जनसंख्या एवं औद्योगीकरण के कारण संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसलिए जल, वन, मिट्टी, खनिज तथा ऊर्जा संसाधनों का आवश्यकता के अनुसार ही उपयोग करना चाहिए। विवेकपूर्ण उपयोग से पर्यावरण संतुलित रहता है तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए भी संसाधन सुरक्षित रहते हैं।

(i) प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं।

(ii) भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षण आवश्यक है।

(iii) पर्यावरण संतुलित रहता है।

(iv) सतत विकास संभव होता है।

(v) विवेकपूर्ण उपयोग प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

31. पर्यावरण (Environment) क्या है?

उत्तर ⇒ हमारे चारों ओर उपस्थित सभी जैविक (जीवित) एवं अजैविक (निर्जीव) घटकों का समुच्चय पर्यावरण (Environment) कहलाता है। इसमें वायु, जल, मिट्टी, सूर्य का प्रकाश, पौधे, पशु, सूक्ष्मजीव तथा मनुष्य सभी शामिल हैं। पर्यावरण जीवों को भोजन, जल, आवास एवं अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराता है। यदि पर्यावरण का संतुलन बिगड़ जाए तो पृथ्वी पर जीवन प्रभावित हो सकता है। इसलिए पर्यावरण की सुरक्षा एवं संरक्षण प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।

(i) पर्यावरण में जैविक एवं अजैविक दोनों घटक होते हैं।

(ii) यह जीवन के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराता है।

(iii) पर्यावरण का संतुलन आवश्यक है।

(iv) सभी जीव पर्यावरण पर निर्भर हैं।

(v) पर्यावरण संरक्षण आवश्यक है।

32. पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) क्या है?

उत्तर ⇒ किसी क्षेत्र में रहने वाले जीवधारियों तथा उनके आसपास के निर्जीव वातावरण के बीच होने वाली पारस्परिक क्रियाओं की व्यवस्था को पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) कहते हैं। इसमें उत्पादक, उपभोक्ता एवं अपघटक मिलकर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखते हैं। वन, तालाब, घास का मैदान तथा नदी पारिस्थितिकी तंत्र के प्रमुख उदाहरण हैं। प्रत्येक पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह एवं पोषक तत्वों का चक्र निरंतर चलता रहता है।

(i) जीव एवं निर्जीव घटक मिलकर पारिस्थितिकी तंत्र बनाते हैं।

(ii) इसमें उत्पादक, उपभोक्ता एवं अपघटक होते हैं।

(iii) ऊर्जा का प्रवाह होता है।

(iv) प्राकृतिक संतुलन बना रहता है।

(v) वन एवं तालाब इसके उदाहरण हैं।

33. उत्पादक (Producers) क्या हैं?

उत्तर ⇒ ऐसे जीव जो सूर्य के प्रकाश की सहायता से प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, उत्पादक (Producers) कहलाते हैं। सभी हरे पौधे एवं शैवाल उत्पादक हैं। ये कार्बन डाइऑक्साइड एवं जल से भोजन बनाकर ऑक्सीजन छोड़ते हैं। पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा का प्रवेश उत्पादकों से ही होता है। इसलिए इन्हें खाद्य श्रृंखला का प्रथम स्तर माना जाता है।

(i) हरे पौधे उत्पादक हैं।

(ii) अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।

(iii) प्रकाश संश्लेषण करते हैं।

(iv) ऑक्सीजन छोड़ते हैं।

(v) खाद्य श्रृंखला का प्रथम स्तर हैं।

34. उपभोक्ता (Consumers) क्या हैं?

उत्तर ⇒ ऐसे जीव जो अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते तथा भोजन के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पौधों एवं अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं, उपभोक्ता (Consumers) कहलाते हैं। मनुष्य, गाय, बकरी, शेर, बाघ आदि सभी उपभोक्ता हैं। उपभोक्ताओं को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक उपभोक्ताओं में विभाजित किया जाता है। ये पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा के प्रवाह को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

(i) अपना भोजन स्वयं नहीं बनाते।

(ii) अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं।

(iii) कई प्रकार के उपभोक्ता होते हैं।

(iv) ऊर्जा प्रवाह में भाग लेते हैं।

(v) मनुष्य भी उपभोक्ता है।

35. अपघटक (Decomposers) क्या हैं?

उत्तर ⇒ मृत पौधों, पशुओं एवं जैविक अपशिष्टों को सरल पदार्थों में बदलने वाले जीवों को अपघटक (Decomposers) कहते हैं। मुख्य रूप से जीवाणु एवं कवक अपघटक का कार्य करते हैं। ये मृत जीवों का अपघटन करके पोषक तत्वों को पुनः मिट्टी में मिलाते हैं, जिससे पौधों को आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त होते हैं। अपघटक प्राकृतिक सफाईकर्मी भी कहलाते हैं क्योंकि ये पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखते हैं।

(i) जीवाणु एवं कवक अपघटक हैं।

(ii) मृत जीवों का अपघटन करते हैं।

(iii) पोषक तत्व मिट्टी में लौटाते हैं।

(iv) पर्यावरण को स्वच्छ रखते हैं।

(v) प्राकृतिक संतुलन बनाए रखते हैं।

36. खाद्य श्रृंखला (Food Chain) क्या है?

उत्तर ⇒ जीवों के बीच भोजन एवं ऊर्जा के स्थानांतरण के क्रम को खाद्य श्रृंखला (Food Chain) कहते हैं। इसमें ऊर्जा उत्पादकों से प्राथमिक उपभोक्ता, फिर द्वितीयक एवं तृतीयक उपभोक्ताओं तक पहुँचती है। उदाहरण के लिए—

घास → हिरण → शेर

यदि खाद्य श्रृंखला का कोई एक भाग नष्ट हो जाए तो पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बिगड़ सकता है। इसलिए प्रत्येक जीव का अपना महत्व है।

(i) भोजन का क्रम खाद्य श्रृंखला कहलाता है।

(ii) ऊर्जा का प्रवाह होता है।

(iii) उत्पादक प्रथम स्तर पर होते हैं।

(iv) प्रत्येक जीव महत्वपूर्ण है।

(v) संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

37. खाद्य जाल (Food Web) क्या है?

उत्तर ⇒ जब अनेक खाद्य श्रृंखलाएँ आपस में जुड़कर एक जाल जैसी संरचना बनाती हैं, तो उसे खाद्य जाल (Food Web) कहते हैं। किसी जीव का भोजन केवल एक ही जीव नहीं होता, बल्कि वह कई प्रकार के जीवों पर निर्भर हो सकता है। इसी कारण खाद्य जाल पारिस्थितिकी तंत्र को अधिक स्थिर एवं संतुलित बनाता है। खाद्य जाल के कारण किसी एक जीव के समाप्त होने पर भी पूरा तंत्र तुरंत प्रभावित नहीं होता।

(i) अनेक खाद्य श्रृंखलाओं से बनता है।

(ii) पारिस्थितिकी तंत्र को स्थिर बनाता है।

(iii) ऊर्जा कई मार्गों से प्रवाहित होती है।

(iv) जीव एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं।

(v) प्राकृतिक संतुलन बनाए रखता है।

38. ओजोन परत के क्षय (Ozone Depletion) के कारण एवं प्रभाव लिखिए।

उत्तर ⇒ क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC), हैलोन एवं अन्य हानिकारक गैसों के कारण ओजोन परत का क्षय होता है। ओजोन परत पतली होने से सूर्य की पराबैंगनी (UV) किरणें अधिक मात्रा में पृथ्वी तक पहुँचती हैं। इससे त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी तथा पौधों एवं समुद्री जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए CFC युक्त पदार्थों का उपयोग कम करना चाहिए।

(i) CFC ओजोन परत को नुकसान पहुँचाती है।

(ii) UV किरणें पृथ्वी तक पहुँचती हैं।

(iii) त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ता है।

(iv) पौधों पर भी प्रभाव पड़ता है।

(v) CFC का उपयोग कम करना चाहिए।

39. वैश्विक ऊष्मीकरण (Global Warming) क्या है?

उत्तर ⇒ वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ने से पृथ्वी के औसत तापमान में होने वाली वृद्धि को वैश्विक ऊष्मीकरण (Global Warming) कहते हैं। इसका मुख्य कारण जीवाश्म ईंधनों का अत्यधिक उपयोग, वनों की कटाई तथा औद्योगिक प्रदूषण है। इसके परिणामस्वरूप हिमनद पिघल रहे हैं, समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है तथा जलवायु परिवर्तन की समस्या उत्पन्न हो रही है। वृक्षारोपण एवं प्रदूषण नियंत्रण से इसे कम किया जा सकता है।

(i) पृथ्वी का तापमान बढ़ता है।

(ii) ग्रीनहाउस गैसें प्रमुख कारण हैं।

(iii) हिमनद पिघलते हैं।

(iv) समुद्र का जलस्तर बढ़ता है।

(v) वृक्षारोपण आवश्यक है।

40. प्राकृतिक सम्पदा अध्याय का सारांश लिखिए।

उत्तर ⇒ प्राकृतिक सम्पदा पृथ्वी पर जीवन का आधार है। वायु, जल, मिट्टी, वन, खनिज एवं जीव-जंतु सभी प्राकृतिक संसाधनों का भाग हैं। इन संसाधनों का संरक्षण करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। प्रदूषण नियंत्रण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण, पुनर्चक्रण तथा प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करके पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सकता है। सतत विकास का उद्देश्य भी वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति करते हुए भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों का संरक्षण करना है। प्राकृतिक सम्पदा का संतुलन बनाए रखना ही मानव एवं प्रकृति के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है।

(i) प्राकृतिक सम्पदा जीवन का आधार है।

(ii) पर्यावरण संरक्षण आवश्यक है।

(iii) संसाधनों का संतुलित उपयोग करें।

(iv) प्रदूषण कम करें।

(v) सतत विकास अपनाएँ।

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Chapter 1: हमारे आस-पास के पदार्थ
Chapter 2: क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं?
Chapter 3: अणु और परमाणु
Chapter 4: परमाणु की संरचना
Chapter 5: जीवन की मौलिक इकाई – कोशिका
Chapter 6: ऊतक
Chapter 7: जीवों में विविधता
Chapter 8: गति
Chapter 9: बल तथा गति के नियम
Chapter 10: गुरुत्वाकर्षण
Chapter 11: कार्य तथा ऊर्जा
Chapter 12: ध्वनि
Chapter 13: हम बीमार क्यों पड़ते हैं?
Chapter 14: प्राकृतिक सम्पदा
Chapter 15: खाद्य संसाधनों में सुधार

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