Class 9 Science Revision Notes

गति

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Chapter Overview

Class9
SubjectScience
Chapter Nameगति
Resource TypeRevision Notes
SyllabusNCERT
Suitable ForCBSE, JAC and other state boards

गति Revision Notes

1. गति (Motion) क्या है?

उत्तर ⇒ जब कोई वस्तु समय के साथ अपनी स्थिति (Position) बदलती है, तो उसे गति (Motion) कहते हैं। दूसरे शब्दों में, यदि कोई वस्तु किसी निर्देश बिंदु (Reference Point) के सापेक्ष अपना स्थान बदलती है, तो वह गतिमान कहलाती है। गति हमारे दैनिक जीवन की एक सामान्य घटना है। सड़क पर चलती कार, उड़ता हुआ पक्षी, बहता हुआ पानी तथा पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर घूमना गति के प्रमुख उदाहरण हैं। किसी वस्तु की गति का निर्धारण हमेशा किसी संदर्भ बिंदु के सापेक्ष ही किया जाता है।

(i) समय के साथ स्थिति परिवर्तन को गति कहते हैं।

(ii) गति का निर्धारण निर्देश बिंदु के सापेक्ष किया जाता है।

(iii) गति भौतिकी का एक महत्वपूर्ण विषय है।

(iv) चलती कार, साइकिल एवं पक्षी इसके उदाहरण हैं।

(v) प्रत्येक गतिमान वस्तु समय के साथ अपना स्थान बदलती है।

2. गति की अवस्थाएँ लिखिए।

उत्तर ⇒ किसी वस्तु की मुख्यतः दो अवस्थाएँ होती हैं—विरामावस्था तथा गतिमान अवस्था। यदि कोई वस्तु अपने आसपास की स्थिर वस्तुओं के सापेक्ष अपनी स्थिति नहीं बदलती है, तो वह विरामावस्था में होती है। इसके विपरीत यदि वह अपनी स्थिति बदलती रहती है, तो वह गतिमान अवस्था में कहलाती है। यह अवस्था प्रेक्षक एवं संदर्भ बिंदु पर निर्भर करती है।

(i) विरामावस्था (Rest)

(ii) गतिमान अवस्था (Motion)

(iii) दोनों अवस्थाएँ संदर्भ बिंदु पर निर्भर करती हैं।

(iv) एक ही वस्तु अलग-अलग प्रेक्षकों के लिए अलग अवस्था में हो सकती है।

(v) गति सापेक्ष होती है।

3. विरामावस्था (Rest) क्या है?

उत्तर ⇒ जब कोई वस्तु अपने चारों ओर की स्थिर वस्तुओं के सापेक्ष अपनी स्थिति नहीं बदलती है, तब वह विरामावस्था में कहलाती है। जैसे घर में रखी कुर्सी, मेज पर रखी पुस्तक तथा सड़क के किनारे खड़ा पेड़ पृथ्वी के सापेक्ष विरामावस्था में माने जाते हैं। ध्यान रहे कि विराम भी पूर्ण नहीं बल्कि सापेक्ष होता है।

(i) वस्तु अपनी स्थिति नहीं बदलती।

(ii) विराम संदर्भ बिंदु पर निर्भर करता है।

(iii) मेज पर रखी पुस्तक इसका उदाहरण है।

(iv) पेड़ पृथ्वी के सापेक्ष विराम में माना जाता है।

(v) विराम भी सापेक्ष होता है।

4. गतिमान अवस्था (State of Motion) क्या है?

उत्तर ⇒ जब कोई वस्तु अपने आसपास की स्थिर वस्तुओं के सापेक्ष समय के साथ अपनी स्थिति बदलती है, तो वह गतिमान अवस्था में कहलाती है। सड़क पर दौड़ती बस, चलती ट्रेन, उड़ता पक्षी तथा बहता हुआ जल इसके सामान्य उदाहरण हैं। किसी वस्तु के गतिमान होने का निर्धारण हमेशा किसी निर्देश बिंदु के आधार पर किया जाता है।

(i) वस्तु समय के साथ अपना स्थान बदलती है।

(ii) यह संदर्भ बिंदु पर निर्भर करती है।

(iii) चलती बस इसका उदाहरण है।

(iv) उड़ता पक्षी गतिमान होता है।

(v) गति का निर्धारण सापेक्ष होता है।

5. सापेक्ष गति (Relative Motion) क्या है?

उत्तर ⇒ जब किसी वस्तु की गति अलग-अलग प्रेक्षकों को अलग-अलग दिखाई देती है, तो उसे सापेक्ष गति कहते हैं। उदाहरण के लिए, बस में बैठा यात्री अपने पास बैठे व्यक्ति को स्थिर देखता है, जबकि सड़क पर खड़ा व्यक्ति उसी यात्री को बस के साथ चलता हुआ देखता है। इससे स्पष्ट होता है कि गति का निर्धारण हमेशा संदर्भ बिंदु के आधार पर किया जाता है।

(i) गति संदर्भ बिंदु पर निर्भर करती है।

(ii) अलग-अलग प्रेक्षकों को अलग गति दिखाई देती है।

(iii) बस वाला उदाहरण इसका सर्वोत्तम उदाहरण है।

(iv) गति पूर्ण नहीं बल्कि सापेक्ष होती है।

(v) भौतिकी में इसका विशेष महत्व है।

6. क्या गति सापेक्ष है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ हाँ, गति पूर्णतः सापेक्ष होती है। किसी वस्तु की गति इस बात पर निर्भर करती है कि उसे किस संदर्भ बिंदु से देखा जा रहा है। एक ही वस्तु किसी प्रेक्षक के लिए विराम में हो सकती है, जबकि दूसरे प्रेक्षक के लिए वही वस्तु गतिमान दिखाई दे सकती है। इसलिए गति का अध्ययन हमेशा किसी निश्चित निर्देश बिंदु के सापेक्ष किया जाता है।

(i) गति संदर्भ बिंदु पर निर्भर करती है।

(ii) एक ही वस्तु गति एवं विराम दोनों में हो सकती है।

(iii) बस में बैठा यात्री इसका उदाहरण है।

(iv) गति का निर्धारण प्रेक्षक के अनुसार बदल सकता है।

(v) इसलिए गति को सापेक्ष कहा जाता है।

7. स्थिति (Position) क्या है?

उत्तर ⇒ किसी वस्तु का स्थान यदि किसी निश्चित मूल बिंदु (Reference Point) के सापेक्ष बताया जाए, तो उसे उस वस्तु की स्थिति (Position) कहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि विद्यालय घर से 5 किलोमीटर दूर है, तो घर को मूल बिंदु मानकर विद्यालय की स्थिति 5 किलोमीटर कही जाएगी। स्थिति ज्ञात करने के लिए दूरी तथा दिशा दोनों का ज्ञान आवश्यक हो सकता है।

(i) स्थिति मूल बिंदु के सापेक्ष बताई जाती है।

(ii) दूरी एवं दिशा से स्थिति व्यक्त की जाती है।

(iii) स्थिति ज्ञात करने के लिए निर्देश बिंदु आवश्यक है।

(iv) घर एवं विद्यालय इसका सरल उदाहरण हैं।

(v) गति के अध्ययन में स्थिति का महत्वपूर्ण स्थान है।

8. निर्देश बिंदु (Reference Point) क्या है?

उत्तर ⇒ किसी वस्तु की स्थिति अथवा गति ज्ञात करने के लिए जिस निश्चित बिंदु को आधार बनाया जाता है, उसे निर्देश बिंदु (Reference Point) या मूल बिंदु कहते हैं। यह कोई भी स्थिर स्थान हो सकता है, जैसे घर, विद्यालय, पेड़, बिजली का खंभा आदि। सभी प्रकार की गति का अध्ययन किसी न किसी निर्देश बिंदु के सापेक्ष ही किया जाता है।

(i) इसे मूल बिंदु भी कहते हैं।

(ii) स्थिति बताने के लिए आवश्यक होता है।

(iii) गति का निर्धारण इसी के सापेक्ष होता है।

(iv) यह कोई भी स्थिर वस्तु हो सकती है।

(v) भौतिकी में इसका विशेष महत्व है।

9. मूल भौतिक राशियाँ (Fundamental Physical Quantities) क्या हैं?

उत्तर ⇒ वे भौतिक राशियाँ जिन्हें सीधे मापा जा सकता है तथा जिनकी SI इकाइयाँ स्वतंत्र रूप से निर्धारित की गई हैं, उन्हें मूल भौतिक राशियाँ कहते हैं। अंतरराष्ट्रीय इकाई प्रणाली (SI System) में ऐसी कुल सात मूल भौतिक राशियाँ होती हैं। अन्य सभी व्युत्पन्न राशियाँ इन्हीं मूल राशियों के आधार पर बनाई जाती हैं।

(i) इन्हें सीधे मापा जा सकता है।

(ii) इनकी SI इकाइयाँ निश्चित होती हैं।

(iii) इनकी कुल संख्या सात है।

(iv) लंबाई, द्रव्यमान एवं समय इसके उदाहरण हैं।

(v) अन्य भौतिक राशियाँ इन्हीं से प्राप्त होती हैं।

10. सात मूल भौतिक राशियों के नाम लिखिए।

उत्तर ⇒ अंतरराष्ट्रीय इकाई प्रणाली (SI) के अनुसार कुल सात मूल भौतिक राशियाँ होती हैं। इनकी अपनी-अपनी SI इकाइयाँ निर्धारित हैं और इन्हीं के आधार पर अन्य व्युत्पन्न भौतिक राशियाँ बनाई जाती हैं।

(i) लंबाई (Length) – मीटर (m)

(ii) द्रव्यमान (Mass) – किलोग्राम (kg)

(iii) समय (Time) – सेकंड (s)

(iv) विद्युत धारा (Electric Current) – एम्पीयर (A)

(v) ऊष्मागतिक तापमान (Temperature) – केल्विन (K)

(vi) प्रकाश तीव्रता (Luminous Intensity) – कैंडेला (cd)

(vii) द्रव्य की मात्रा (Amount of Substance) – मोल (mol)

11. भौतिक राशियों का वर्गीकरण (Classification of Physical Quantities) क्या है?

उत्तर ⇒ भौतिक राशियों को मुख्य रूप से दो वर्गों में विभाजित किया जाता है—अदिश राशियाँ (Scalar Quantities) तथा सदिश राशियाँ (Vector Quantities)। जिन राशियों को व्यक्त करने के लिए केवल परिमाण (Magnitude) और मात्रक (Unit) की आवश्यकता होती है, उन्हें अदिश राशियाँ कहते हैं। जबकि जिन राशियों को व्यक्त करने के लिए परिमाण, मात्रक तथा दिशा (Direction) तीनों की आवश्यकता होती है, उन्हें सदिश राशियाँ कहते हैं। भौतिकी में किसी राशि की प्रकृति को समझने के लिए उसका यह वर्गीकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है।

(i) भौतिक राशियाँ दो प्रकार की होती हैं।

(ii) अदिश राशियों में केवल परिमाण होता है।

(iii) सदिश राशियों में परिमाण तथा दिशा दोनों होते हैं।

(iv) यह वर्गीकरण भौतिकी में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

(v) बल, वेग एवं विस्थापन सदिश राशियाँ हैं।

12. अदिश राशि (Scalar Quantity) क्या है?

उत्तर ⇒ जिन भौतिक राशियों को व्यक्त करने के लिए केवल परिमाण (Magnitude) और मात्रक (Unit) की आवश्यकता होती है, उन्हें अदिश राशियाँ (Scalar Quantities) कहते हैं। इनमें दिशा का कोई महत्व नहीं होता। द्रव्यमान, समय, दूरी, चाल, कार्य, ऊर्जा तथा आयतन आदि अदिश राशियों के प्रमुख उदाहरण हैं। इन राशियों का मान केवल संख्या और इकाई द्वारा व्यक्त किया जाता है।

(i) इनमें केवल परिमाण होता है।

(ii) दिशा की आवश्यकता नहीं होती।

(iii) द्रव्यमान अदिश राशि है।

(iv) दूरी एवं समय अदिश राशियाँ हैं।

(v) चाल भी एक अदिश राशि है।

13. सदिश राशि (Vector Quantity) क्या है?

उत्तर ⇒ जिन भौतिक राशियों को व्यक्त करने के लिए परिमाण (Magnitude), मात्रक (Unit) तथा दिशा (Direction) तीनों की आवश्यकता होती है, उन्हें सदिश राशियाँ (Vector Quantities) कहते हैं। केवल परिमाण बताने से इन राशियों का पूरा वर्णन नहीं होता। विस्थापन, वेग, त्वरण, बल तथा संवेग सदिश राशियों के प्रमुख उदाहरण हैं।

(i) इनमें परिमाण एवं दिशा दोनों होते हैं।

(ii) दिशा का विशेष महत्व होता है।

(iii) वेग एक सदिश राशि है।

(iv) बल एवं त्वरण सदिश राशियाँ हैं।

(v) विस्थापन भी सदिश राशि है।

14. अदिश एवं सदिश राशियों में अंतर लिखिए।

उत्तर ⇒ अदिश एवं सदिश राशियाँ अपनी प्रकृति तथा विशेषताओं के आधार पर एक-दूसरे से भिन्न होती हैं। अदिश राशियों में केवल परिमाण होता है, जबकि सदिश राशियों में परिमाण के साथ दिशा भी होती है। भौतिकी में इन दोनों का अलग-अलग महत्व है।

अदिश राशिसदिश राशि
(i) केवल परिमाण होता है।(i) परिमाण एवं दिशा दोनों होते हैं।
(ii) दिशा की आवश्यकता नहीं होती।(ii) दिशा आवश्यक होती है।
(iii) दूरी इसका उदाहरण है।(iii) विस्थापन इसका उदाहरण है।
(iv) चाल अदिश राशि है।(iv) वेग सदिश राशि है।
(v) द्रव्यमान एवं समय अदिश हैं।(v) बल एवं त्वरण सदिश हैं।

15. सरल रेखीय गति (Linear Motion) क्या है?

उत्तर ⇒ जब कोई वस्तु सीधी रेखा (Straight Line) के पथ पर गति करती है, तो उसे सरल रेखीय गति (Linear Motion) कहते हैं। यह गति का सबसे सरल प्रकार है। सड़क पर सीधी दिशा में चलती कार, रेल की सीधी पटरी पर चलती ट्रेन तथा सीधी सड़क पर दौड़ती साइकिल इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इस प्रकार की गति में वस्तु का पथ सीधा होता है।

(i) वस्तु सीधी रेखा में चलती है।

(ii) यह गति का सबसे सरल प्रकार है।

(iii) सीधी सड़क पर चलती कार इसका उदाहरण है।

(iv) रेल की सीधी पटरी पर चलती ट्रेन भी उदाहरण है।

(v) इसमें गति का पथ सीधा होता है।

16. दूरी (Distance) क्या है?

उत्तर ⇒ किसी गतिमान वस्तु द्वारा तय किए गए वास्तविक पथ की कुल लंबाई को दूरी (Distance) कहते हैं। दूरी एक अदिश राशि है क्योंकि इसमें केवल परिमाण होता है, दिशा नहीं। दूरी का SI मात्रक मीटर (m) है। दूरी का मान कभी ऋणात्मक नहीं होता तथा यह सदैव धनात्मक होता है।

(i) दूरी वास्तविक पथ की कुल लंबाई है।

(ii) यह एक अदिश राशि है।

(iii) इसमें केवल परिमाण होता है।

(iv) इसका SI मात्रक मीटर (m) है।

(v) दूरी का मान सदैव धनात्मक होता है।

17. विस्थापन (Displacement) क्या है?

उत्तर ⇒ किसी गतिमान वस्तु की प्रारंभिक तथा अंतिम स्थिति के बीच की न्यूनतम सीधी दूरी, जो दिशा सहित व्यक्त की जाती है, विस्थापन (Displacement) कहलाती है। यह एक सदिश राशि है क्योंकि इसमें परिमाण के साथ दिशा भी होती है। विस्थापन का मान दूरी के बराबर या उससे कम हो सकता है तथा इसका SI मात्रक भी मीटर (m) है।

(i) प्रारंभिक एवं अंतिम स्थिति के बीच की न्यूनतम दूरी है।

(ii) यह एक सदिश राशि है।

(iii) इसमें दिशा का विशेष महत्व होता है।

(iv) इसका SI मात्रक मीटर (m) है।

(v) विस्थापन दूरी से अधिक नहीं हो सकता।

18. दूरी एवं विस्थापन में अंतर लिखिए।

उत्तर ⇒ दूरी एवं विस्थापन दोनों गति से संबंधित राशियाँ हैं, लेकिन इनकी परिभाषा, प्रकृति तथा विशेषताएँ अलग-अलग होती हैं। दूरी वास्तविक पथ की कुल लंबाई होती है, जबकि विस्थापन प्रारंभिक एवं अंतिम स्थिति के बीच की न्यूनतम सीधी दूरी होती है।

दूरी (Distance)विस्थापन (Displacement)
(i) वास्तविक पथ की कुल लंबाई है।(i) प्रारंभिक एवं अंतिम स्थिति की न्यूनतम दूरी है।
(ii) अदिश राशि है।(ii) सदिश राशि है।
(iii) केवल परिमाण होता है।(iii) परिमाण एवं दिशा दोनों होते हैं।
(iv) सदैव धनात्मक होती है।(iv) धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकती है।
(v) दूरी ≥ विस्थापन होती है।(v) विस्थापन ≤ दूरी होता है।

19. एकसमान गति (Uniform Motion) क्या है?

उत्तर ⇒ जब कोई वस्तु समान समयांतराल में समान दूरी तय करती है, तो उसकी गति को एकसमान गति (Uniform Motion) कहते हैं। ऐसी गति में वस्तु की चाल स्थिर रहती है तथा समय के साथ उसमें परिवर्तन नहीं होता। घड़ी की सुई का घूमना तथा सीधी सड़क पर समान चाल से चलती कार इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

(i) समान समय में समान दूरी तय होती है।

(ii) चाल स्थिर रहती है।

(iii) समय के साथ चाल नहीं बदलती।

(iv) घड़ी की सुई इसका उदाहरण है।

(v) यह नियमित गति कहलाती है।

20. असमान गति (Non-uniform Motion) क्या है?

उत्तर ⇒ जब कोई वस्तु समान समयांतराल में असमान दूरी तय करती है, तो उसकी गति को असमान गति (Non-uniform Motion) कहते हैं। ऐसी स्थिति में वस्तु की चाल समय-समय पर बदलती रहती है। भीड़भाड़ वाली सड़क पर चलती कार, दौड़ता हुआ खिलाड़ी तथा उड़ान भरता हवाई जहाज इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

(i) समान समय में असमान दूरी तय होती है।

(ii) चाल लगातार बदलती रहती है।

(iii) यह दैनिक जीवन में सबसे अधिक देखने को मिलती है।

(iv) भीड़भाड़ वाली सड़क पर चलती कार इसका उदाहरण है।

(v) इसे परिवर्तनशील गति भी कहा जाता है।

21. गति की दर का मापन (Measurement of Rate of Motion) क्या है?

उत्तर ⇒ किसी वस्तु की गति कितनी तेज़ या धीमी है, इसका पता लगाने के लिए उसकी गति की दर (Rate of Motion) मापी जाती है। गति की दर ज्ञात करने के लिए यह देखा जाता है कि वस्तु ने एक निश्चित समय में कितनी दूरी तय की है। इसी आधार पर चाल (Speed) की अवधारणा विकसित हुई है। यदि कोई वस्तु कम समय में अधिक दूरी तय करती है, तो उसकी चाल अधिक होगी तथा अधिक समय में कम दूरी तय करने पर चाल कम होगी।

(i) गति की दर से वस्तु की तेज़ी या धीमापन ज्ञात होता है।

(ii) इसे दूरी एवं समय के आधार पर मापा जाता है।

(iii) चाल गति की दर का माप है।

(iv) गति की तुलना करने में सहायता मिलती है।

(v) इसका अध्ययन भौतिकी में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

22. चाल (Speed) क्या है?

उत्तर ⇒ किसी वस्तु द्वारा इकाई समय में तय की गई दूरी को उसकी चाल (Speed) कहते हैं। अर्थात किसी वस्तु ने एक सेकंड, एक मिनट या एक घंटे में जितनी दूरी तय की, वही उसकी चाल कहलाती है। चाल एक अदिश राशि है क्योंकि इसमें केवल परिमाण होता है, दिशा का कोई महत्व नहीं होता। चाल का SI मात्रक मीटर प्रति सेकंड (m/s) है तथा इसे किलोमीटर प्रति घंटा (km/h) में भी व्यक्त किया जाता है।

(i) चाल = दूरी ÷ समय

(ii) यह एक अदिश राशि है।

(iii) इसमें दिशा का महत्व नहीं होता।

(iv) इसका SI मात्रक m/s है।

(v) इसे km/h में भी व्यक्त किया जाता है।

23. चाल की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर ⇒ चाल किसी वस्तु की गति की दर को दर्शाती है। यह केवल इस बात की जानकारी देती है कि कोई वस्तु कितनी तेज़ या धीमी गति से चल रही है। चाल में दिशा का कोई महत्व नहीं होता, इसलिए इसे अदिश राशि माना जाता है। इसका मुख्य मात्रक मीटर प्रति सेकंड (m/s) होता है।

(i) चाल एक अदिश राशि है।

(ii) इसमें केवल परिमाण होता है।

(iii) इसका SI मात्रक m/s है।

(iv) इसे km/h में भी व्यक्त किया जा सकता है।

(v) दिशा बदलने से चाल आवश्यक नहीं कि बदले।

24. औसत चाल (Average Speed) क्या है?

उत्तर ⇒ यदि कोई वस्तु पूरी यात्रा के दौरान समान चाल से नहीं चलती, तो उसकी कुल गति को औसत चाल (Average Speed) द्वारा व्यक्त किया जाता है। औसत चाल ज्ञात करने के लिए वस्तु द्वारा तय की गई कुल दूरी को कुल समय से भाग दिया जाता है। यह वास्तविक गति का औसत मान बताती है और असमान गति वाली वस्तुओं के लिए अधिक उपयोगी होती है।

औसत चाल = कुल दूरी ÷ कुल समय

(i) असमान गति के लिए उपयोग की जाती है।

(ii) कुल दूरी को कुल समय से भाग दिया जाता है।

(iii) यह अदिश राशि है।

(iv) इसका SI मात्रक m/s है।

(v) वाहन की औसत गति ज्ञात करने में उपयोगी है।

25. औसत चाल का उदाहरण दीजिए।

उत्तर ⇒ यदि कोई कार 2 घंटे में 100 किलोमीटर की दूरी तय करती है, तो उसकी औसत चाल निम्न प्रकार से ज्ञात की जाएगी—

औसत चाल = कुल दूरी ÷ कुल समय

= 100 km ÷ 2 h = 50 km/h

इसका अर्थ यह नहीं है कि कार पूरे समय 50 km/h की चाल से चली होगी। संभव है कि कुछ समय उसकी चाल अधिक तथा कुछ समय कम रही हो, लेकिन पूरी यात्रा की औसत चाल 50 km/h होगी।

(i) औसत चाल = कुल दूरी ÷ कुल समय

(ii) 100 km ÷ 2 h = 50 km/h

(iii) असमान गति में इसका उपयोग होता है।

(iv) यह वास्तविक चाल का औसत मान है।

(v) दिशा का इसमें महत्व नहीं होता।

26. वेग (Velocity) क्या है?

उत्तर ⇒ जब किसी वस्तु की चाल के साथ उसकी दिशा भी बताई जाती है, तो उसे वेग (Velocity) कहते हैं। दूसरे शब्दों में, किसी निश्चित दिशा में इकाई समय में हुए विस्थापन को वेग कहते हैं। वेग एक सदिश राशि है क्योंकि इसमें परिमाण के साथ दिशा भी होती है। इसका SI मात्रक भी मीटर प्रति सेकंड (m/s) होता है।

(i) वेग = दिशा सहित चाल

(ii) यह एक सदिश राशि है।

(iii) इसमें परिमाण एवं दिशा दोनों होते हैं।

(iv) इसका SI मात्रक m/s है।

(v) दिशा बदलने पर वेग बदल जाता है।

27. वेग की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर ⇒ वेग किसी वस्तु की गति तथा उसकी दिशा दोनों को व्यक्त करता है। यदि वस्तु की चाल या दिशा में परिवर्तन होता है, तो उसका वेग भी बदल जाता है। इसलिए वेग को सदिश राशि माना जाता है।

(i) वेग सदिश राशि है।

(ii) इसमें दिशा का विशेष महत्व होता है।

(iii) चाल या दिशा बदलने पर वेग बदल जाता है।

(iv) इसका SI मात्रक m/s है।

(v) विस्थापन के आधार पर वेग ज्ञात किया जाता है।

28. औसत वेग (Average Velocity) क्या है?

उत्तर ⇒ किसी वस्तु के कुल विस्थापन को कुल समय से भाग देने पर प्राप्त राशि को औसत वेग (Average Velocity) कहते हैं। यदि कोई वस्तु सीधी रेखा में बदलती हुई चाल से गति करती है, तो उसकी गति को औसत वेग द्वारा व्यक्त किया जाता है। औसत वेग सदिश राशि है क्योंकि इसमें दिशा का महत्व होता है।

औसत वेग = कुल विस्थापन ÷ कुल समय

(i) कुल विस्थापन के आधार पर ज्ञात किया जाता है।

(ii) कुल समय से भाग दिया जाता है।

(iii) यह सदिश राशि है।

(iv) दिशा का विशेष महत्व होता है।

(v) इसका SI मात्रक m/s है।

29. समान रूप से परिवर्तित वेग की स्थिति में औसत वेग का सूत्र लिखिए।

उत्तर ⇒ यदि किसी वस्तु का वेग समान रूप से बदल रहा हो, अर्थात उसका त्वरण एकसमान हो, तो औसत वेग प्रारंभिक वेग तथा अंतिम वेग के अंकगणितीय माध्य से ज्ञात किया जाता है।

औसत वेग = (u + v) / 2

जहाँ—

u = प्रारंभिक वेग

v = अंतिम वेग

यह सूत्र केवल समान त्वरण की स्थिति में ही लागू होता है।

(i) सूत्र = (u + v)/2

(ii) u = प्रारंभिक वेग

(iii) v = अंतिम वेग

(iv) समान त्वरण में प्रयुक्त होता है।

(v) यह औसत वेग ज्ञात करने का सरल सूत्र है।

30. चाल एवं वेग में अंतर लिखिए।

उत्तर ⇒ चाल एवं वेग दोनों गति से संबंधित राशियाँ हैं, लेकिन इनमें महत्वपूर्ण अंतर है। चाल केवल दूरी एवं समय पर आधारित होती है, जबकि वेग विस्थापन एवं दिशा पर आधारित होता है। चाल अदिश राशि है, जबकि वेग सदिश राशि है।

चाल (Speed)वेग (Velocity)
(i) दूरी पर आधारित होती है।(i) विस्थापन पर आधारित होता है।
(ii) अदिश राशि है।(ii) सदिश राशि है।
(iii) दिशा का महत्व नहीं होता।(iii) दिशा आवश्यक होती है।
(iv) केवल परिमाण होता है।(iv) परिमाण एवं दिशा दोनों होते हैं।
(v) औसत चाल कभी शून्य नहीं होती।(v) औसत वेग शून्य हो सकता है।

31. त्वरण (Acceleration) क्या है?

उत्तर ⇒ किसी वस्तु के वेग में प्रति इकाई समय होने वाले परिवर्तन को त्वरण (Acceleration) कहते हैं। यदि किसी वस्तु का वेग समय के साथ बढ़ता या घटता है, तो कहा जाता है कि वस्तु में त्वरण उत्पन्न हो रहा है। दूसरे शब्दों में, वेग के परिवर्तन की दर ही त्वरण कहलाती है। यदि वस्तु का वेग बढ़ता है, तो त्वरण धनात्मक तथा यदि वेग घटता है, तो त्वरण ऋणात्मक (मंदन) माना जाता है। त्वरण एक सदिश राशि (Vector Quantity) है, क्योंकि इसमें परिमाण के साथ दिशा भी होती है। इसका SI मात्रक मीटर प्रति सेकंड² (m/s²) है। मुक्त रूप से गिरती हुई वस्तु त्वरण का सबसे अच्छा उदाहरण है।

सूत्र :

a = (v − u) / t

जहाँ—

  • a = त्वरण
  • u = प्रारंभिक वेग
  • v = अंतिम वेग
  • t = समय

(i) प्रति इकाई समय में वेग के परिवर्तन को त्वरण कहते हैं।

(ii) त्वरण एक सदिश राशि है।

(iii) इसका SI मात्रक m/s² है।

(iv) वेग बढ़ने पर त्वरण धनात्मक तथा घटने पर ऋणात्मक होता है।

(v) मुक्त रूप से गिरती वस्तु एकसमान त्वरण का उदाहरण है।

32. त्वरण के प्रकार लिखिए।

उत्तर ⇒ वेग में परिवर्तन की प्रकृति के आधार पर त्वरण को मुख्यतः दो प्रकारों में विभाजित किया जाता है—एकसमान त्वरण तथा असमान त्वरण। यदि किसी वस्तु का वेग समान समयांतराल में समान मात्रा से बदलता है, तो उसे एकसमान त्वरण कहते हैं। इसके विपरीत यदि वेग समान समयांतराल में असमान मात्रा से बदलता है, तो उसे असमान त्वरण कहते हैं। भौतिकी में गति को समझने के लिए इन दोनों प्रकारों का अध्ययन आवश्यक है।

(i) एकसमान त्वरण

(ii) असमान त्वरण

(iii) दोनों वेग परिवर्तन पर आधारित हैं।

(iv) एकसमान त्वरण में परिवर्तन स्थिर रहता है।

(v) असमान त्वरण में परिवर्तन लगातार बदलता रहता है।

33. एकसमान त्वरण (Uniform Acceleration) क्या है?

उत्तर ⇒ जब कोई वस्तु सीधी रेखा में गति करते हुए समान समयांतराल में अपने वेग में समान परिवर्तन करती है, तो उस वस्तु का त्वरण एकसमान त्वरण (Uniform Acceleration) कहलाता है। ऐसी स्थिति में वस्तु का त्वरण पूरे समय समान रहता है। मुक्त रूप से गिरता हुआ पत्थर (वायु प्रतिरोध की उपेक्षा करने पर) तथा समान रूप से गति बढ़ाती हुई कार इसके प्रमुख उदाहरण हैं। गति के तीनों समीकरण भी इसी प्रकार की गति पर आधारित हैं।

(i) समान समय में समान वेग परिवर्तन होता है।

(ii) त्वरण का मान स्थिर रहता है।

(iii) यह सीधी रेखीय गति में पाया जाता है।

(iv) मुक्त रूप से गिरती वस्तु इसका उदाहरण है।

(v) गति के समीकरण इसी पर आधारित हैं।

34. असमान त्वरण (Non-uniform Acceleration) क्या है?

उत्तर ⇒ जब किसी वस्तु का वेग समान समयांतराल में असमान मात्रा से बदलता है, तो उसे असमान त्वरण (Non-uniform Acceleration) कहते हैं। इस प्रकार की गति में त्वरण का मान हर समय समान नहीं रहता। शहर की भीड़भाड़ वाली सड़क पर चलती कार, जो कभी तेज़ तो कभी धीमी चलती है, असमान त्वरण का सबसे सामान्य उदाहरण है। दैनिक जीवन में अधिकांश गतियाँ असमान त्वरण वाली होती हैं।

(i) समान समय में असमान वेग परिवर्तन होता है।

(ii) त्वरण का मान स्थिर नहीं रहता।

(iii) शहर में चलती कार इसका प्रमुख उदाहरण है।

(iv) दैनिक जीवन में यह अधिक देखने को मिलता है।

(v) इसे परिवर्तनशील त्वरण भी कहा जाता है।

35. गति के समीकरण (Equations of Motion) क्या हैं?

उत्तर ⇒ यदि कोई वस्तु सीधी रेखा में एकसमान त्वरण से गति करती है, तो उसके प्रारंभिक वेग (u), अंतिम वेग (v), समय (t), दूरी (s) तथा त्वरण (a) के बीच स्थापित गणितीय संबंधों को गति के समीकरण (Equations of Motion) कहते हैं। इन समीकरणों की सहायता से दूरी, समय, वेग तथा त्वरण ज्ञात किया जाता है। ये केवल एकसमान त्वरण की स्थिति में ही लागू होते हैं। गति के कुल तीन समीकरण होते हैं।

प्रथम समीकरण : v = u + at

द्वितीय समीकरण : s = ut + ½at²

तृतीय समीकरण : v² − u² = 2as

(i) गति के तीन समीकरण होते हैं।

(ii) ये केवल एकसमान त्वरण पर लागू होते हैं।

(iii) इनसे दूरी, समय एवं वेग ज्ञात किया जाता है।

(iv) संख्यात्मक प्रश्नों में इनका विशेष महत्व है।

(v) ये सीधी रेखीय गति के लिए प्रयुक्त होते हैं।

36. गति का प्रथम समीकरण (First Equation of Motion) लिखिए।

उत्तर ⇒ गति का प्रथम समीकरण वस्तु के प्रारंभिक वेग, अंतिम वेग, त्वरण तथा समय के बीच संबंध स्थापित करता है। यदि कोई वस्तु एकसमान त्वरण से गति कर रही हो, तो उसका अंतिम वेग निम्नलिखित सूत्र से ज्ञात किया जाता है—

v = u + at

जहाँ,

u = प्रारंभिक वेग

v = अंतिम वेग

a = त्वरण

t = समय

यह समीकरण अंतिम वेग ज्ञात करने के लिए सबसे अधिक उपयोग किया जाता है।

(i) सूत्र : v = u + at

(ii) अंतिम वेग ज्ञात करने में उपयोगी है।

(iii) यह एकसमान त्वरण पर आधारित है।

(iv) इसमें समय का उपयोग होता है।

(v) प्रतियोगी परीक्षाओं में महत्वपूर्ण है।

37. गति का द्वितीय समीकरण (Second Equation of Motion) लिखिए।

उत्तर ⇒ गति का द्वितीय समीकरण वस्तु द्वारा तय की गई दूरी, प्रारंभिक वेग, समय तथा त्वरण के बीच संबंध बताता है। यदि कोई वस्तु एकसमान त्वरण से गति करती है, तो उसके द्वारा तय की गई दूरी निम्न सूत्र से ज्ञात की जाती है—

s = ut + ½at²

जहाँ,

s = दूरी

u = प्रारंभिक वेग

a = त्वरण

t = समय

यह दूरी निकालने के लिए सबसे अधिक प्रयुक्त होने वाला समीकरण है।

(i) सूत्र : s = ut + ½at²

(ii) दूरी ज्ञात करने में उपयोगी है।

(iii) समय एवं त्वरण दोनों का उपयोग होता है।

(iv) यह एकसमान त्वरण पर लागू होता है।

(v) संख्यात्मक प्रश्नों में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

38. गति का तृतीय समीकरण (Third Equation of Motion) लिखिए।

उत्तर ⇒ गति का तृतीय समीकरण वस्तु के प्रारंभिक वेग, अंतिम वेग, दूरी तथा त्वरण के बीच संबंध स्थापित करता है। इस समीकरण में समय का प्रयोग नहीं किया जाता। जब समय ज्ञात न हो, तब यह समीकरण अत्यंत उपयोगी होता है।

v² − u² = 2as

जहाँ,

u = प्रारंभिक वेग

v = अंतिम वेग

a = त्वरण

s = दूरी

यह समीकरण भी केवल एकसमान त्वरण की स्थिति में ही लागू होता है।

(i) सूत्र : v² − u² = 2as

(ii) इसमें समय का प्रयोग नहीं होता।

(iii) दूरी एवं वेग का संबंध बताता है।

(iv) यह एकसमान त्वरण पर आधारित है।

(v) संख्यात्मक प्रश्नों में अत्यंत उपयोगी है।

39. एकसमान वृत्तीय गति (Uniform Circular Motion) क्या है?

उत्तर ⇒ जब कोई वस्तु वृत्ताकार पथ पर समान चाल से गति करती है, तो उसे एकसमान वृत्तीय गति (Uniform Circular Motion) कहते हैं। इस गति में वस्तु की चाल समान रहती है, लेकिन उसकी दिशा प्रत्येक क्षण बदलती रहती है। दिशा बदलने के कारण वस्तु का वेग भी निरंतर बदलता रहता है, इसलिए यह एक त्वरित गति मानी जाती है। रस्सी से बँधे पत्थर को वृत्त में घुमाना तथा पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करना इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

(i) वस्तु वृत्ताकार पथ पर चलती है।

(ii) चाल समान रहती है।

(iii) दिशा लगातार बदलती रहती है।

(iv) वेग निरंतर परिवर्तित होता है।

(v) पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर परिक्रमा इसका उदाहरण है।

40. अध्याय का निष्कर्ष (Chapter Summary)

उत्तर ⇒ इस अध्याय में हमने गति से संबंधित सभी महत्वपूर्ण अवधारणाओं का अध्ययन किया। इसमें गति, विराम, स्थिति, निर्देश बिंदु, दूरी, विस्थापन, चाल, वेग, त्वरण तथा गति के तीनों समीकरणों को समझा। साथ ही अदिश एवं सदिश राशियों, एकसमान एवं असमान गति तथा एकसमान वृत्तीय गति का भी अध्ययन किया। ये सभी अवधारणाएँ आगे की कक्षाओं तथा प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और भौतिकी की मजबूत नींव तैयार करती हैं।

(i) गति स्थिति परिवर्तन को कहते हैं।

(ii) दूरी अदिश तथा विस्थापन सदिश राशि है।

(iii) चाल अदिश एवं वेग सदिश राशि है।

(iv) गति के तीनों समीकरण एकसमान त्वरण पर आधारित हैं।

(v) यह अध्याय भौतिकी की आधारभूत अवधारणाओं को समझने में सहायक है।

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Chapter 2: क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं?
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Chapter 5: जीवन की मौलिक इकाई – कोशिका
Chapter 6: ऊतक
Chapter 7: जीवों में विविधता
Chapter 8: गति
Chapter 9: बल तथा गति के नियम
Chapter 10: गुरुत्वाकर्षण
Chapter 11: कार्य तथा ऊर्जा
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Chapter 13: हम बीमार क्यों पड़ते हैं?
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