Class 9 Science Revision Notes
ऊतक
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Chapter Overview
| Class | 9 |
| Subject | Science |
| Chapter Name | ऊतक |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
ऊतक Revision Notes
1. ऊतक (Tissue) क्या है?
उत्तर ⇒ समान उत्पत्ति, समान आकृति, समान संरचना तथा समान कार्य करने वाली कोशिकाओं के समूह को ऊतक (Tissue) कहते हैं। ऊतक शरीर में किसी विशेष कार्य को करने के लिए विशेषीकृत (रूपान्तरित) होते हैं।
(i) ऊतक समान प्रकार की कोशिकाओं का समूह होता है।
(ii) इसकी कोशिकाओं की उत्पत्ति समान होती है।
(iii) कोशिकाओं की संरचना एवं कार्य समान होते हैं।
(iv) ऊतक किसी विशिष्ट कार्य को संपन्न करता है।
(v) ऊतक मिलकर अंगों का निर्माण करते हैं।
2. ऊतक का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर ⇒ जब समान आकृति एवं समान कार्य करने वाली कोशिकाएँ एक साथ मिलकर कार्य करती हैं, तब वे एक समूह बनाती हैं, जिसे ऊतक कहते हैं। अर्थात समान कार्य करने वाली कोशिकाओं के समूह से ऊतक का निर्माण होता है।
(i) समान कोशिकाएँ एक साथ मिलती हैं।
(ii) कोशिकाओं की उत्पत्ति समान होती है।
(iii) सभी कोशिकाएँ एक ही कार्य करती हैं।
(iv) कोशिकाएँ विशेषीकृत होकर ऊतक बनाती हैं।
(v) ऊतक मिलकर विभिन्न अंगों का निर्माण करते हैं।
3. पादप ऊतक (Plant Tissue) क्या है?
उत्तर ⇒ पौधों में पाए जाने वाले समान उत्पत्ति, समान संरचना तथा समान कार्य करने वाली कोशिकाओं के समूह को पादप ऊतक कहते हैं। ये पौधों की वृद्धि, भोजन निर्माण, जल एवं खनिजों के परिवहन तथा सहारा देने का कार्य करते हैं।
(i) यह केवल पौधों में पाया जाता है।
(ii) समान कोशिकाओं से मिलकर बना होता है।
(iii) पौधों की वृद्धि में सहायता करता है।
(iv) जल एवं खनिजों का परिवहन करता है।
(v) पौधे को सहारा एवं मजबूती प्रदान करता है।
4. जन्तु ऊतक (Animal Tissue) क्या है?
उत्तर ⇒ पशुओं एवं मनुष्यों में पाए जाने वाले समान उत्पत्ति, समान संरचना तथा समान कार्य करने वाली कोशिकाओं के समूह को जन्तु ऊतक कहते हैं। ये शरीर के अंगों का निर्माण, गति, संचार तथा अन्य शारीरिक क्रियाओं में सहायता करते हैं।
(i) यह पशुओं एवं मनुष्यों में पाया जाता है।
(ii) समान प्रकार की कोशिकाओं से बना होता है।
(iii) शरीर के अंगों का निर्माण करता है।
(iv) गति एवं संचार में सहायता करता है।
(v) विभिन्न शारीरिक कार्यों का संचालन करता है।
5. पादप ऊतक एवं जन्तु ऊतक में अंतर लिखिए।
उत्तर ⇒ पादप ऊतक एवं जन्तु ऊतक की संरचना, कार्य तथा वृद्धि में अनेक अंतर पाए जाते हैं। पादप ऊतक पौधों में तथा जन्तु ऊतक पशुओं एवं मनुष्यों में पाए जाते हैं।
| पादप ऊतक | जन्तु ऊतक |
|---|---|
| (i) पादप ऊतक स्थिर होते हैं। | (i) जन्तु ऊतक गतिशील होते हैं। |
| (ii) इनमें वृद्धि केवल विभज्योतक भागों में होती है। | (ii) इनमें वृद्धि लगभग सभी भागों में होती है। |
| (iii) इनमें सहारा देने वाले ऊतक अधिक होते हैं। | (iii) इनमें सहारा देने वाले ऊतक अपेक्षाकृत कम होते हैं। |
| (iv) कई ऊतक मृत कोशिकाओं से बने होते हैं। | (iv) अधिकांश ऊतक जीवित कोशिकाओं से बने होते हैं। |
| (v) पौधों में वृद्धि जीवनभर होती रहती है। | (v) जन्तुओं में वृद्धि एक निश्चित आयु तक होती है। |
6. पादप ऊतक के प्रकार लिखिए।
उत्तर ⇒ पादप ऊतक मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं— विभज्योतक ऊतक तथा स्थायी ऊतक। विभज्योतक ऊतक पौधे की वृद्धि के लिए नई कोशिकाएँ बनाते हैं, जबकि स्थायी ऊतक विशेष कार्य करते हैं।
(i) विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue)
(ii) स्थायी ऊतक (Permanent Tissue)
(iii) विभज्योतक ऊतक नई कोशिकाएँ बनाते हैं।
(iv) स्थायी ऊतक विशेष कार्य करते हैं।
(v) दोनों मिलकर पौधे का निर्माण एवं विकास करते हैं।
7. विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue) क्या है?
उत्तर ⇒ पौधों के उन भागों में पाए जाने वाले ऊतक, जिनकी कोशिकाएँ लगातार विभाजित होकर नई कोशिकाएँ बनाती हैं, विभज्योतक ऊतक कहलाते हैं। ये पौधे की वृद्धि के लिए उत्तरदायी होते हैं।
(i) इसकी कोशिकाएँ लगातार विभाजित होती हैं।
(ii) नई कोशिकाओं का निर्माण करती हैं।
(iii) पौधे की वृद्धि कराती हैं।
(iv) यह जड़ एवं तने के अग्रभाग में पाया जाता है।
(v) इसकी कोशिकाएँ जीवित एवं सक्रिय होती हैं।
8. विभज्योतक ऊतक के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒ विभज्योतक ऊतक का मुख्य कार्य कोशिका विभाजन द्वारा नई कोशिकाओं का निर्माण करना तथा पौधे की लंबाई एवं मोटाई में वृद्धि करना है।
(i) नई कोशिकाओं का निर्माण करता है।
(ii) पौधे की लंबाई बढ़ाता है।
(iii) पौधे की मोटाई बढ़ाने में सहायता करता है।
(iv) घाव भरने एवं पुनर्जनन में सहायक होता है।
(v) पौधे की निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करता है।
9. विभज्योतक ऊतक के प्रकार लिखिए।
उत्तर ⇒ स्थिति के आधार पर विभज्योतक ऊतक तीन प्रकार के होते हैं— शीर्षस्थ विभज्योतक, पार्श्व विभज्योतक तथा अंतर्विष्ट विभज्योतक। ये पौधों के विभिन्न भागों में स्थित होकर वृद्धि का कार्य करते हैं।
(i) शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem)
(ii) पार्श्व विभज्योतक (Lateral Meristem)
(iii) अंतर्विष्ट विभज्योतक (Intercalary Meristem)
(iv) ये पौधों के वृद्धि वाले भागों में पाए जाते हैं।
(v) सभी प्रकार पौधों की वृद्धि में सहायक होते हैं।
10. शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem) क्या है?
उत्तर ⇒ तने तथा जड़ के शीर्ष (अग्रभाग) पर स्थित विभज्योतक ऊतक को शीर्षस्थ विभज्योतक कहते हैं। इसका मुख्य कार्य पौधे की लंबाई में वृद्धि करना है।
(i) यह जड़ एवं तने के शीर्ष पर पाया जाता है।
(ii) पौधे की लंबाई बढ़ाता है।
(iii) नई कोशिकाओं का निर्माण करता है।
(iv) पौधे की प्राथमिक वृद्धि कराता है।
(v) यह सक्रिय रूप से विभाजित होने वाली कोशिकाओं से बना होता है।
11. पार्श्व विभज्योतक (Lateral Meristem) क्या है?
उत्तर ⇒ तने एवं जड़ की परिधि (किनारे) पर स्थित विभज्योतक ऊतक को पार्श्व विभज्योतक या कैम्बियम कहते हैं। इसका मुख्य कार्य पौधे की मोटाई में वृद्धि करना है।
(i) यह तने एवं जड़ की परिधि में पाया जाता है।
(ii) इसे कैम्बियम भी कहते हैं।
(iii) पौधे की मोटाई बढ़ाता है।
(iv) द्वितीयक वृद्धि कराता है।
(v) लकड़ी एवं छाल के निर्माण में सहायक होता है।
12. अंतर्विष्ट विभज्योतक (Intercalary Meristem) क्या है?
उत्तर ⇒ पत्तियों के आधार तथा टहनियों की संधियों (Internodes) पर स्थित विभज्योतक ऊतक को अंतर्विष्ट विभज्योतक कहते हैं। यह इन भागों की वृद्धि में सहायता करता है।
(i) यह पत्तियों के आधार पर पाया जाता है।
(ii) टहनियों की संधियों में स्थित होता है।
(iii) इन भागों की लंबाई बढ़ाता है।
(iv) घास जैसे पौधों में अधिक विकसित होता है।
(v) पौधों की तीव्र वृद्धि में सहायक होता है।
13. विभज्योतक ऊतक की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर ⇒ विभज्योतक ऊतक की कोशिकाएँ जीवित, छोटी, पतली भित्ति वाली तथा निरंतर विभाजित होने वाली होती हैं। इनमें अंतरकोशिकीय स्थान एवं रसधानी नहीं होती।
(i) कोशिका भित्ति पतली एवं सेल्यूलोज की बनी होती है।
(ii) कोशिकाएँ छोटी एवं सघन होती हैं।
(iii) अंतरकोशिकीय स्थान नहीं होता।
(iv) नाभिक बड़ा तथा कोशिका द्रव्य सघन होता है।
(v) रसधानी अनुपस्थित या बहुत छोटी होती है।
14. स्थायी ऊतक (Permanent Tissue) क्या है?
उत्तर ⇒ जब विभज्योतक ऊतक की कोशिकाएँ अपनी विभाजन क्षमता खो देती हैं और किसी विशेष कार्य के लिए स्थायी रूप एवं संरचना प्राप्त कर लेती हैं, तब उन्हें स्थायी ऊतक कहते हैं। ये ऊतक पौधे में विभिन्न विशेष कार्यों का संपादन करते हैं।
(i) यह विभज्योतक ऊतक से बनता है।
(ii) इसकी कोशिकाओं में विभाजन की क्षमता नहीं होती।
(iii) कोशिकाएँ निश्चित आकार एवं संरचना वाली होती हैं।
(iv) यह विशेष कार्य करता है।
(v) पौधे के विभिन्न भागों में पाया जाता है।
15. स्थायी ऊतक की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर ⇒ स्थायी ऊतक की कोशिकाएँ परिपक्व होती हैं तथा इनमें विभाजन की क्षमता समाप्त हो जाती है। इनकी आकृति, आकार एवं कार्य निश्चित होते हैं।
(i) कोशिकाएँ विभाजित नहीं होती हैं।
(ii) विभज्योतक ऊतक से उत्पन्न होती हैं।
(iii) कोशिकाओं का आकार एवं आकृति निश्चित होती है।
(iv) कोशिकाएँ अपेक्षाकृत बड़ी होती हैं।
(v) इनमें कोशिका द्रव्य एवं नाभिक उपस्थित होता है।
16. स्थायी ऊतक के प्रकार लिखिए।
उत्तर ⇒ स्थायी ऊतक मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं— सरल स्थायी ऊतक तथा जटिल स्थायी ऊतक। सरल स्थायी ऊतक एक ही प्रकार की कोशिकाओं से बने होते हैं, जबकि जटिल स्थायी ऊतक विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बने होते हैं।
(i) सरल स्थायी ऊतक
(ii) जटिल स्थायी ऊतक
(iii) सरल ऊतक एक प्रकार की कोशिकाओं से बने होते हैं।
(iv) जटिल ऊतक अनेक प्रकार की कोशिकाओं से बने होते हैं।
(v) दोनों पौधे के विभिन्न कार्यों का संचालन करते हैं।
17. कोशिका विभेदीकरण (Cell Differentiation) क्या है?
उत्तर ⇒ जब एक साधारण कोशिका किसी विशेष कार्य को करने के लिए निश्चित आकार, संरचना एवं कार्य प्राप्त कर लेती है, तो इस प्रक्रिया को कोशिका विभेदीकरण कहते हैं।
(i) कोशिका विशेषीकृत बन जाती है।
(ii) निश्चित आकार एवं संरचना प्राप्त करती है।
(iii) विशेष कार्य करने लगती है।
(iv) विभज्योतक कोशिकाओं में यह प्रक्रिया होती है।
(v) इससे स्थायी ऊतकों का निर्माण होता है।
18. सरल स्थायी ऊतक (Simple Permanent Tissue) क्या है?
उत्तर ⇒ एक ही प्रकार की कोशिकाओं से बने स्थायी ऊतक को सरल स्थायी ऊतक कहते हैं। इनका मुख्य कार्य पौधे को भोजन का भंडारण, मजबूती तथा लचीलापन प्रदान करना है। इसके तीन प्रमुख प्रकार हैं— पैरेन्काइमा, कॉलेन्काइमा तथा स्क्लेरेन्काइमा।
(i) यह एक ही प्रकार की कोशिकाओं से बना होता है।
(ii) भोजन का भंडारण करता है।
(iii) पौधे को लचीलापन प्रदान करता है।
(iv) पौधे को मजबूती देता है।
(v) इसके तीन प्रकार— पैरेन्काइमा, कॉलेन्काइमा एवं स्क्लेरेन्काइमा हैं।
19. पैरेन्काइमा (Parenchyma) ऊतक क्या है?
उत्तर ⇒ पैरेन्काइमा सबसे अधिक पाया जाने वाला सरल स्थायी ऊतक है। यह जीवित, पतली कोशिका भित्ति वाली कोशिकाओं से बना होता है। इसकी कोशिकाओं के बीच पर्याप्त अंतरकोशिकीय स्थान होता है। इसका मुख्य कार्य भोजन का भंडारण तथा प्रकाश संश्लेषण में सहायता करना है।
(i) यह सबसे अधिक पाया जाने वाला सरल स्थायी ऊतक है।
(ii) इसकी कोशिकाएँ जीवित एवं पतली भित्ति वाली होती हैं।
(iii) कोशिकाओं के बीच पर्याप्त रिक्त स्थान होता है।
(iv) यह तना, जड़, पत्ती एवं फूलों में पाया जाता है।
(v) इसका मुख्य कार्य भोजन का भंडारण करना है।
20. पैरेन्काइमा ऊतक के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒ पैरेन्काइमा ऊतक पौधों में भोजन का भंडारण करता है। कुछ पैरेन्काइमा कोशिकाओं में क्लोरोफिल पाया जाता है, जिससे वे प्रकाश संश्लेषण करती हैं। जलीय पौधों में यह तैरने में भी सहायता करता है।
(i) भोजन का भंडारण करता है।
(ii) प्रकाश संश्लेषण में सहायता करता है।
(iii) पौधे के विभिन्न भागों की मरम्मत करता है।
(iv) जलीय पौधों को तैरने में सहायता करता है।
(v) गैसों के आदान-प्रदान में सहायक होता है।
21. क्लोरेन्काइमा (Chlorenchyma) क्या है?
उत्तर ⇒ जिस पैरेन्काइमा ऊतक की कोशिकाओं में क्लोरोफिल पाया जाता है, उसे क्लोरेन्काइमा (हरित ऊतक) कहते हैं। इसका मुख्य कार्य प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाना है।
(i) यह पैरेन्काइमा का एक प्रकार है।
(ii) इसमें क्लोरोफिल पाया जाता है।
(iii) इसे हरित ऊतक भी कहते हैं।
(iv) यह प्रकाश संश्लेषण करता है।
(v) पौधे के हरे भागों में पाया जाता है।
22. ऐरेन्काइमा (Aerenchyma) क्या है?
उत्तर ⇒ जलीय पौधों में पाए जाने वाले ऐसे पैरेन्काइमा ऊतक, जिनकी कोशिकाओं के बीच बड़े-बड़े वायु कक्ष (Air Cavities) होते हैं, ऐरेन्काइमा कहलाते हैं। यह पौधों को पानी में तैरने में सहायता करता है।
(i) यह जलीय पौधों में पाया जाता है।
(ii) कोशिकाओं के बीच बड़े वायु कक्ष होते हैं।
(iii) पौधे को पानी में तैरने में सहायता करता है।
(iv) यह पैरेन्काइमा का एक प्रकार है।
(v) गैसों के संचरण में भी सहायक होता है।
23. स्क्लेरेन्काइमा (Sclerenchyma) ऊतक क्या है?
उत्तर ⇒ स्क्लेरेन्काइमा एक सरल स्थायी ऊतक है, जिसकी कोशिकाएँ मृत होती हैं तथा उनकी कोशिका भित्ति लिग्निन के कारण अत्यधिक मोटी होती है। इसका मुख्य कार्य पौधे को कठोरता एवं यांत्रिक मजबूती प्रदान करना है।
(i) इसकी कोशिकाएँ मृत होती हैं।
(ii) कोशिका भित्ति लिग्निन के कारण मोटी होती है।
(iii) यह पौधे को कठोरता प्रदान करता है।
(iv) नारियल का रेशेदार छिलका इसका उदाहरण है।
(v) यह तने, पत्तियों की शिराओं एवं कठोर बीजों में पाया जाता है।
24. स्क्लेरेन्काइमा ऊतक के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒ स्क्लेरेन्काइमा ऊतक पौधे को कठोरता, मजबूती एवं यांत्रिक सहारा प्रदान करता है। इसकी मृत एवं मोटी भित्ति वाली कोशिकाएँ पौधे के विभिन्न भागों को सुरक्षित एवं मजबूत बनाए रखती हैं।
(i) पौधे को कठोरता प्रदान करता है।
(ii) यांत्रिक सहारा देता है।
(iii) पौधे के भागों को मजबूत बनाता है।
(iv) बीज एवं फलों के कठोर आवरण का निर्माण करता है।
(v) पौधे की सुरक्षा में सहायता करता है।
25. कॉलेन्काइमा (Collenchyma) ऊतक क्या है?
उत्तर ⇒ कॉलेन्काइमा एक सरल स्थायी ऊतक है, जिसकी कोशिकाएँ जीवित होती हैं तथा उनके कोनों पर कोशिका भित्ति असमान रूप से मोटी होती है। यह पौधे को लचीलापन एवं यांत्रिक सहारा प्रदान करता है।
(i) इसकी कोशिकाएँ जीवित होती हैं।
(ii) कोशिका भित्ति कोनों पर मोटी होती है।
(iii) यह एपिडर्मिस के नीचे पाया जाता है।
(iv) पौधे को लचीलापन प्रदान करता है।
(v) कोशिकाओं के बीच बहुत कम रिक्त स्थान होता है।
26. कॉलेन्काइमा ऊतक के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒ कॉलेन्काइमा ऊतक पौधे के कोमल भागों को बिना टूटे मुड़ने की क्षमता प्रदान करता है तथा उन्हें यांत्रिक सहारा देता है।
(i) पौधे को लचीलापन प्रदान करता है।
(ii) कोमल भागों को टूटने से बचाता है।
(iii) यांत्रिक सहारा प्रदान करता है।
(iv) पत्तियों एवं तनों को मजबूती देता है।
(v) पौधे की वृद्धि में सहायक होता है।
27. एपिडर्मिस (Epidermis) क्या है?
उत्तर ⇒ एपिडर्मिस पौधे के सभी भागों (जड़, तना एवं पत्ती) की सबसे बाहरी कोशिका परत होती है। यह पौधे को बाहरी क्षति, जल हानि तथा रोगजनकों से सुरक्षा प्रदान करती है।
(i) यह पौधे की सबसे बाहरी परत होती है।
(ii) जड़, तना एवं पत्ती को ढकती है।
(iii) पौधे की सुरक्षा करती है।
(iv) जल की हानि को कम करती है।
(v) रोगजनकों एवं यांत्रिक आघात से बचाती है।
28. एपिडर्मिस के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒ एपिडर्मिस पौधे की रक्षा करने के साथ-साथ जल की हानि को रोकती है तथा बाहरी वातावरण के हानिकारक प्रभावों से पौधे को सुरक्षित रखती है।
(i) पौधे को सुरक्षा प्रदान करती है।
(ii) जल की हानि को रोकती है।
(iii) यांत्रिक आघात से बचाती है।
(iv) परजीवी एवं रोगजनकों से रक्षा करती है।
(v) पौधे की बाहरी सतह को सुरक्षित रखती है।
29. एपिडर्मिस की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर ⇒ एपिडर्मिस पौधे की सबसे बाहरी सुरक्षात्मक परत होती है। इसकी कोशिकाएँ आपस में सघन रूप से जुड़ी रहती हैं तथा इनके बीच कोई अंतःकोशिकीय स्थान नहीं होता। बाहरी सतह पर प्रायः मोम जैसी क्यूटिकल परत पाई जाती है, जो जल की हानि को रोकती है।
(i) यह पौधे की सबसे बाहरी परत होती है।
(ii) कोशिकाएँ सघन रूप से जुड़ी रहती हैं।
(iii) कोशिकाओं के बीच कोई रिक्त स्थान नहीं होता।
(iv) बाहरी सतह पर क्यूटिकल (मोम) की परत होती है।
(v) जल की हानि कम करके पौधे की रक्षा करती है।
30. जड़ की एपिडर्मिस (Root Epidermis) क्या है?
उत्तर ⇒ जड़ की एपिडर्मिस में मूल रोम (Root Hairs) पाए जाते हैं, जो मिट्टी से जल एवं खनिज लवणों के अवशोषण के लिए उत्तरदायी होते हैं। ये जड़ का अवशोषण क्षेत्र बढ़ा देते हैं।
(i) इसमें मूल रोम पाए जाते हैं।
(ii) मूल रोम अवशोषण क्षेत्र बढ़ाते हैं।
(iii) जल का अवशोषण करते हैं।
(iv) खनिज लवणों का अवशोषण करते हैं।
(v) पौधे को पोषण प्राप्त करने में सहायता करते हैं।
31. मरुस्थलीय पौधों की एपिडर्मिस की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर ⇒ मरुस्थलीय पौधों की एपिडर्मिस पर क्यूटिन (Cutin) नामक जलरोधी पदार्थ की मोटी परत होती है। यह अत्यधिक वाष्पोत्सर्जन को रोककर पौधे को शुष्क वातावरण में जीवित रहने में सहायता करती है।
(i) एपिडर्मिस पर क्यूटिन की मोटी परत होती है।
(ii) यह जलरोधी होती है।
(iii) वाष्पोत्सर्जन को कम करती है।
(iv) पौधे को सूखे से बचाती है।
(v) मरुस्थलीय परिस्थितियों के अनुकूल बनाती है।
32. स्टोमेटा (Stomata) क्या है?
उत्तर ⇒ पत्तियों की एपिडर्मिस में पाए जाने वाले सूक्ष्म छिद्रों को स्टोमेटा कहते हैं। प्रत्येक स्टोमा दो रक्षी कोशिकाओं (Guard Cells) से घिरा रहता है। ये गैसों के आदान-प्रदान तथा वाष्पोत्सर्जन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
(i) यह पत्तियों की एपिडर्मिस में पाया जाता है।
(ii) यह सूक्ष्म छिद्र होता है।
(iii) दो रक्षी कोशिकाएँ इसे घेरे रहती हैं।
(iv) गैसों के आदान-प्रदान में सहायता करता है।
(v) वाष्पोत्सर्जन की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है।
33. स्टोमेटा के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒ स्टोमेटा पौधों में गैसों के आदान-प्रदान तथा वाष्पोत्सर्जन की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। यह प्रकाश संश्लेषण एवं श्वसन के लिए आवश्यक गैसों के आवागमन में सहायता करता है।
(i) कार्बन डाइऑक्साइड को पौधे के भीतर प्रवेश कराता है।
(ii) ऑक्सीजन को बाहर निकालता है।
(iii) वाष्पोत्सर्जन कराता है।
(iv) प्रकाश संश्लेषण में सहायता करता है।
(v) श्वसन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
34. कॉर्क (Cork) क्या है?
उत्तर ⇒ कॉर्क पौधों का बाहरी सुरक्षात्मक ऊतक है, जो द्वितीयक विभज्योतक (कैम्बियम) द्वारा बनता है। इसकी कोशिकाएँ मृत होती हैं तथा इनमें सबरिन (Suberin) नामक जलरोधी एवं वायुरोधी पदार्थ पाया जाता है। यह पौधे को बाहरी क्षति से बचाता है।
(i) यह पौधे का सुरक्षात्मक ऊतक है।
(ii) इसकी कोशिकाएँ मृत होती हैं।
(iii) कोशिका भित्ति में सबरिन पाया जाता है।
(iv) यह जल एवं वायु के प्रवेश को रोकता है।
(v) तने एवं शाखाओं की सुरक्षा करता है।
35. कॉर्क के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒ कॉर्क पौधे के तने एवं शाखाओं को बाहरी वातावरण के प्रभाव, जल हानि तथा रोगजनकों से सुरक्षा प्रदान करता है। इसकी जलरोधी प्रकृति पौधे को सूखने से बचाती है।
(i) पौधे की सुरक्षा करता है।
(ii) जल की हानि को रोकता है।
(iii) वायु के अनावश्यक प्रवेश को रोकता है।
(iv) रोगजनकों से रक्षा करता है।
(v) तने एवं शाखाओं को मजबूती प्रदान करता है।
36. जटिल स्थायी ऊतक (Complex Permanent Tissue) क्या है?
उत्तर ⇒ जटिल स्थायी ऊतक ऐसे ऊतक हैं जो एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बने होते हैं। इनकी सभी कोशिकाएँ मिलकर एक इकाई की तरह कार्य करती हैं। जाइलम एवं फ्लोएम इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
(i) यह अनेक प्रकार की कोशिकाओं से बना होता है।
(ii) सभी कोशिकाएँ मिलकर कार्य करती हैं।
(iii) इसे संवहन ऊतक भी कहते हैं।
(iv) जाइलम एवं फ्लोएम इसके उदाहरण हैं।
(v) यह पौधे में पदार्थों का परिवहन करता है।
37. जाइलम (Xylem) क्या है?
उत्तर ⇒ जाइलम एक जटिल स्थायी ऊतक है, जो पौधों में जल एवं खनिज लवणों को जड़ों से पौधे के ऊपरी भागों तक पहुँचाने का कार्य करता है। यह पौधे को यांत्रिक सहारा भी प्रदान करता है।
(i) यह जटिल स्थायी ऊतक है।
(ii) जल एवं खनिज लवणों का संवहन करता है।
(iii) जड़ से पत्तियों तक पदार्थ पहुँचाता है।
(iv) पौधे को यांत्रिक सहारा देता है।
(v) इसे संवहन ऊतक भी कहा जाता है।
38. जाइलम के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒ जाइलम का मुख्य कार्य जड़ों द्वारा अवशोषित जल एवं खनिज लवणों को पौधे के सभी भागों तक पहुँचाना तथा पौधे को मजबूती प्रदान करना है।
(i) जल का संवहन करता है।
(ii) खनिज लवणों का परिवहन करता है।
(iii) जड़ से ऊपरी भागों तक पदार्थ पहुँचाता है।
(iv) पौधे को यांत्रिक सहारा देता है।
(v) तने को मजबूत बनाता है।
39. जाइलम की संरचना लिखिए।
उत्तर ⇒ जाइलम एक जटिल स्थायी ऊतक है, जो चार प्रकार की कोशिकाओं— ट्रैकीड (वाहिनिका), वाहिका, जाइलम पैरेन्काइमा तथा जाइलम रेशे (फाइबर) से मिलकर बना होता है। ये सभी मिलकर जल एवं खनिज लवणों का संवहन तथा पौधे को मजबूती प्रदान करते हैं।
(i) ट्रैकीड (वाहिनिका)
(ii) वाहिका (Vessel)
(iii) जाइलम पैरेन्काइमा
(iv) जाइलम रेशे (Xylem Fibres)
(v) सभी मिलकर जल का संवहन एवं यांत्रिक सहारा प्रदान करते हैं।
40. फ्लोएम (Phloem) क्या है?
उत्तर ⇒ फ्लोएम एक जटिल स्थायी ऊतक है, जो पत्तियों में निर्मित भोजन को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाने का कार्य करता है। इसे भी संवहन ऊतक कहा जाता है। फ्लोएम की अधिकांश कोशिकाएँ जीवित होती हैं।
(i) यह जटिल स्थायी ऊतक है।
(ii) पत्तियों में बने भोजन का संवहन करता है।
(iii) इसकी अधिकांश कोशिकाएँ जीवित होती हैं।
(iv) यह संवहन ऊतक कहलाता है।
(v) भोजन को पौधे के सभी भागों तक पहुँचाता है।
41. फ्लोएम के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒ फ्लोएम का मुख्य कार्य पत्तियों द्वारा निर्मित भोजन को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाना है। यह भोजन का संवहन ऊपर तथा नीचे दोनों दिशाओं में करता है।
(i) पत्तियों में बने भोजन का परिवहन करता है।
(ii) भोजन को सभी भागों तक पहुँचाता है।
(iii) संवहन दोनों दिशाओं में करता है।
(iv) पौधे की वृद्धि एवं विकास में सहायता करता है।
(v) जीवित कोशिकाओं से बना होता है।
42. फ्लोएम की संरचना लिखिए।
उत्तर ⇒ फ्लोएम चार प्रकार की कोशिकाओं— चालनी नलिकाएँ, सहचरी कोशिकाएँ, फ्लोएम पैरेन्काइमा तथा फ्लोएम रेशे से मिलकर बना होता है। ये सभी मिलकर भोजन के संवहन का कार्य करते हैं।
(i) चालनी नलिकाएँ (Sieve Tubes)
(ii) सहचरी कोशिकाएँ (Companion Cells)
(iii) फ्लोएम पैरेन्काइमा
(iv) फ्लोएम रेशे (Phloem Fibres)
(v) सभी मिलकर भोजन का संवहन करते हैं।
43. जाइलम एवं फ्लोएम में अंतर लिखिए।
उत्तर ⇒ जाइलम एवं फ्लोएम दोनों संवहन ऊतक हैं, परंतु जाइलम जल एवं खनिज लवणों का परिवहन करता है, जबकि फ्लोएम भोजन का संवहन करता है। दोनों की संरचना एवं कार्य में महत्वपूर्ण अंतर होते हैं।
| जाइलम (Xylem) | फ्लोएम (Phloem) |
|---|---|
| (i) जल एवं खनिज लवणों का संवहन करता है। | (i) भोजन का संवहन करता है। |
| (ii) अधिकांश कोशिकाएँ मृत होती हैं। | (ii) अधिकांश कोशिकाएँ जीवित होती हैं। |
| (iii) संवहन केवल ऊपर की ओर होता है। | (iii) संवहन ऊपर एवं नीचे दोनों दिशाओं में होता है। |
| (iv) कोशिका भित्ति लिग्निनयुक्त एवं मोटी होती है। | (iv) कोशिका भित्ति अपेक्षाकृत पतली होती है। |
| (v) पौधे को यांत्रिक सहारा भी देता है। | (v) मुख्य कार्य भोजन का वितरण करना है। |
44. जन्तु ऊतक (Animal Tissue) क्या है?
उत्तर ⇒ जन्तुओं एवं मनुष्यों में समान उत्पत्ति, समान संरचना तथा समान कार्य करने वाली कोशिकाओं के समूह को जन्तु ऊतक कहते हैं। ये शरीर के अंगों का निर्माण, गति, संचार तथा विभिन्न शारीरिक क्रियाओं को संपन्न करने का कार्य करते हैं।
(i) यह जन्तुओं एवं मनुष्यों में पाया जाता है।
(ii) समान प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बना होता है।
(iii) अंगों एवं अंग-तंत्रों का निर्माण करता है।
(iv) शरीर की विभिन्न क्रियाओं में सहायता करता है।
(v) उदाहरण— रक्त एवं पेशियाँ।
45. जन्तु ऊतकों के प्रमुख प्रकार लिखिए।
उत्तर ⇒ जन्तु ऊतकों को मुख्यतः चार प्रकारों में बाँटा गया है। प्रत्येक ऊतक शरीर में अलग-अलग कार्य करता है।
(i) एपिथीलियमी ऊतक (Epithelial Tissue)
(ii) संयोजी ऊतक (Connective Tissue)
(iii) पेशीय ऊतक (Muscular Tissue)
(iv) तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue)
(v) ये सभी मिलकर शरीर का निर्माण एवं संचालन करते हैं।
46. एपिथीलियमी ऊतक (Epithelial Tissue) क्या है?
उत्तर ⇒ शरीर की बाहरी सतह को ढकने तथा आंतरिक अंगों एवं गुहाओं की भीतरी सतह पर पाए जाने वाले सुरक्षात्मक ऊतक को एपिथीलियमी ऊतक कहते हैं। यह शरीर को सुरक्षा प्रदान करता है।
(i) यह शरीर की बाहरी सतह को ढकता है।
(ii) आंतरिक अंगों की भीतरी सतह पर पाया जाता है।
(iii) शरीर को सुरक्षा प्रदान करता है।
(iv) कोशिकाएँ आपस में सघन रूप से जुड़ी होती हैं।
(v) इनके नीचे आधार झिल्ली (Basement Membrane) होती है।
47. एपिथीलियमी ऊतक की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर ⇒ एपिथीलियमी ऊतक की कोशिकाएँ एक-दूसरे से सटी हुई होती हैं तथा इनके बीच बहुत कम अंतरकोशिकीय स्थान होता है। यह शरीर के विभिन्न अंगों को सुरक्षा प्रदान करता है तथा उन्हें अलग-अलग बनाए रखता है।
(i) कोशिकाएँ सघन रूप से जुड़ी होती हैं।
(ii) अंतरकोशिकीय स्थान बहुत कम होता है।
(iii) आधार झिल्ली पर स्थित होता है।
(iv) शरीर के अंगों की रक्षा करता है।
(v) विभिन्न अंगों को अलग रखने का कार्य करता है।
48. एपिथीलियमी ऊतक के प्रकार लिखिए।
उत्तर ⇒ संरचना एवं कार्य के आधार पर एपिथीलियमी ऊतक छः प्रकार के होते हैं। प्रत्येक प्रकार शरीर के अलग-अलग भागों में पाया जाता है तथा विशेष कार्य करता है।
(i) सरल शल्की एपिथीलियम
(ii) स्तरित शल्की एपिथीलियम
(iii) स्तंभाकार एपिथीलियम
(iv) पक्ष्माभी स्तंभाकार एपिथीलियम
(v) घनाकार एपिथीलियम एवं ग्रंथिल एपिथीलियम
49. सरल शल्की एपिथीलियम (Simple Squamous Epithelium) क्या है?
उत्तर ⇒ सरल शल्की एपिथीलियम अत्यंत पतली एवं चपटी कोशिकाओं से बना एपिथीलियमी ऊतक है। यह उन स्थानों पर पाया जाता है जहाँ पदार्थों का विसरण एवं आदान-प्रदान होता है, जैसे रक्त वाहिकाओं का अस्तर एवं फेफड़ों की कूपिकाएँ।
(i) यह पतली एवं चपटी कोशिकाओं से बना होता है।
(ii) रक्त वाहिकाओं एवं फेफड़ों की कूपिकाओं में पाया जाता है।
(iii) पदार्थों के विसरण में सहायता करता है।
(iv) कोमल अस्तर का निर्माण करता है।
(v) गैसों के आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
50. स्तरित शल्की एपिथीलियम (Stratified Squamous Epithelium) क्या है?
उत्तर ⇒ स्तरित शल्की एपिथीलियम कई परतों वाली चपटी कोशिकाओं से बना होता है। इसका मुख्य कार्य शरीर के उन भागों की सुरक्षा करना है जहाँ घर्षण अधिक होता है, जैसे त्वचा एवं मुख का अस्तर।
(i) यह अनेक परतों से बना होता है।
(ii) त्वचा में पाया जाता है।
(iii) मुख एवं आहारनली के अस्तर में पाया जाता है।
(iv) घर्षण से सुरक्षा प्रदान करता है।
(v) शरीर का रक्षात्मक आवरण बनाता है।
51. स्तंभाकार एपिथीलियम (Columnar Epithelium) क्या है?
उत्तर ⇒ स्तंभाकार एपिथीलियम लंबी स्तंभ जैसी कोशिकाओं से बना होता है। यह मुख्यतः आँतों की भीतरी सतह पर पाया जाता है तथा अवशोषण एवं स्राव का कार्य करता है।
(i) इसकी कोशिकाएँ स्तंभ के समान होती हैं।
(ii) आँत की भीतरी सतह पर पाया जाता है।
(iii) भोजन के अवशोषण में सहायता करता है।
(iv) विभिन्न पदार्थों का स्राव करता है।
(v) पाचन क्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
52. पक्ष्माभी स्तंभाकार एपिथीलियम (Ciliated Columnar Epithelium) क्या है?
उत्तर ⇒ पक्ष्माभी स्तंभाकार एपिथीलियम ऐसी स्तंभाकार कोशिकाओं से बना होता है, जिनकी सतह पर छोटे-छोटे पक्ष्म (Cilia) होते हैं। यह श्वासनली में पाया जाता है तथा धूल एवं श्लेष्मा (म्यूकस) को बाहर निकालने में सहायता करता है।
(i) इसकी कोशिकाओं पर पक्ष्म (Cilia) होते हैं।
(ii) यह श्वासनली में पाया जाता है।
(iii) धूल एवं कणों को बाहर निकालता है।
(iv) श्लेष्मा को आगे बढ़ाने में सहायता करता है।
(v) श्वसन तंत्र को स्वच्छ रखता है।
53. घनाकार एपिथीलियम (Cuboidal Epithelium) क्या है?
उत्तर ⇒ घनाकार एपिथीलियम घन (Cube) के आकार की कोशिकाओं से बना होता है। यह वृक्क नलिकाओं एवं लार ग्रंथियों की नलिकाओं में पाया जाता है तथा स्राव एवं यांत्रिक सहारा प्रदान करता है।
(i) इसकी कोशिकाएँ घनाकार होती हैं।
(ii) वृक्कीय नलिकाओं में पाया जाता है।
(iii) लार ग्रंथियों की नलिकाओं में पाया जाता है।
(iv) स्राव का कार्य करता है।
(v) यांत्रिक सहारा प्रदान करता है।
54. ग्रंथिल एपिथीलियम (Glandular Epithelium) क्या है?
उत्तर ⇒ ग्रंथिल एपिथीलियम वह एपिथीलियमी ऊतक है, जिसमें कुछ कोशिकाएँ अंदर की ओर मुड़कर ग्रंथियों का निर्माण करती हैं। ये ग्रंथियाँ एंजाइम, हार्मोन, पसीना, लार आदि पदार्थों का स्राव करती हैं।
(i) यह ग्रंथियों का निर्माण करता है।
(ii) एपिथीलियम की कोशिकाएँ अंदर की ओर मुड़ जाती हैं।
(iii) विभिन्न पदार्थों का स्राव करता है।
(iv) एंजाइम एवं हार्मोन बनाता है।
(v) शरीर की अनेक क्रियाओं को नियंत्रित करता है।
55. संयोजी ऊतक (Connective Tissue) क्या है?
उत्तर ⇒ संयोजी ऊतक वह ऊतक है जो शरीर के विभिन्न ऊतकों एवं अंगों को आपस में जोड़ता है, उन्हें सहारा देता है तथा उनकी रक्षा करता है। इसकी कोशिकाएँ अंतरकोशिकीय आधात्री (Matrix) में स्थित रहती हैं।
(i) यह शरीर के अंगों को जोड़ता है।
(ii) अंगों को सहारा प्रदान करता है।
(iii) अंगों की रक्षा करता है।
(iv) कोशिकाएँ आधात्री (Matrix) में स्थित रहती हैं।
(v) यह भराव (Packing) का कार्य भी करता है।
56. संयोजी ऊतक की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर ⇒ संयोजी ऊतक की कोशिकाएँ एक-दूसरे से अधिक दूर होती हैं तथा इनके बीच पर्याप्त अंतरकोशिकीय आधात्री (Matrix) पाया जाता है। यही आधात्री इस ऊतक को मजबूती एवं विशेष गुण प्रदान करता है।
(i) कोशिकाएँ दूर-दूर स्थित होती हैं।
(ii) अंतरकोशिकीय आधात्री अधिक होती है।
(iii) आधात्री तरल, ठोस या जैलीनुमा हो सकती है।
(iv) यह शरीर को सहारा प्रदान करता है।
(v) अंगों को जोड़ने एवं सुरक्षा देने का कार्य करता है।
57. संयोजी ऊतक के प्रकार लिखिए।
उत्तर ⇒ संयोजी ऊतक कई प्रकार के होते हैं। प्रत्येक प्रकार का शरीर में अलग-अलग कार्य होता है, जैसे पदार्थों का परिवहन, सहारा देना, जोड़ना तथा सुरक्षा करना।
(i) रक्त (Blood)
(ii) अस्थि (Bone)
(iii) स्नायु (Ligament)
(iv) कंडरा (Tendon)
(v) उपास्थि, एरिओलर एवं वसामय ऊतक
58. रक्त (Blood) क्या है?
उत्तर ⇒ रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है। इसका तरल भाग प्लाज़्मा कहलाता है, जिसमें लाल रक्त कणिकाएँ (RBC), श्वेत रक्त कणिकाएँ (WBC) तथा प्लेटलेट्स उपस्थित रहते हैं। रक्त पूरे शरीर में गैसों, भोजन, हार्मोन एवं उत्सर्जी पदार्थों का परिवहन करता है।
(i) रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है।
(ii) इसका तरल भाग प्लाज़्मा कहलाता है।
(iii) इसमें RBC, WBC एवं प्लेटलेट्स पाए जाते हैं।
(iv) यह ऑक्सीजन एवं पोषक पदार्थों का परिवहन करता है।
(v) यह हार्मोन एवं उत्सर्जी पदार्थों का भी परिवहन करता है।
59. रक्त के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒ रक्त शरीर के विभिन्न भागों में ऑक्सीजन, पोषक पदार्थ, हार्मोन तथा उत्सर्जी पदार्थों का परिवहन करता है। यह शरीर की रोगों से रक्षा करने तथा तापमान को नियंत्रित रखने में भी सहायता करता है।
(i) ऑक्सीजन एवं कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन करता है।
(ii) पचे हुए भोजन को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचाता है।
(iii) हार्मोन एवं उत्सर्जी पदार्थों का परिवहन करता है।
(iv) रोगों से रक्षा करता है।
(v) शरीर का तापमान बनाए रखने में सहायता करता है।
60. अस्थि (Bone) क्या है?
उत्तर ⇒ अस्थि एक कठोर संयोजी ऊतक है, जो शरीर का कंकाल (Skeleton) बनाती है। इसकी आधात्री कैल्शियम एवं फॉस्फोरस से बनी होती है, जिससे यह मजबूत एवं कठोर होती है।
(i) यह कठोर संयोजी ऊतक है।
(ii) शरीर का कंकाल बनाती है।
(iii) इसकी आधात्री कैल्शियम एवं फॉस्फोरस से बनी होती है।
(iv) शरीर को आकार प्रदान करती है।
(v) आंतरिक अंगों की रक्षा करती है।
61. अस्थि के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒ अस्थि शरीर को सहारा देने, आकार प्रदान करने तथा आंतरिक अंगों की रक्षा करने का कार्य करती है। यह मांसपेशियों के साथ मिलकर शरीर की गति में भी सहायता करती है।
(i) शरीर को सहारा देती है।
(ii) शरीर को आकार प्रदान करती है।
(iii) आंतरिक अंगों की रक्षा करती है।
(iv) मांसपेशियों को सहारा देती है।
(v) शरीर की गति में सहायता करती है।
62. स्नायु (Ligament) क्या है?
उत्तर ⇒ स्नायु (Ligament) एक मजबूत एवं लचीला संयोजी ऊतक है, जो एक अस्थि को दूसरी अस्थि से जोड़ता है। इसमें आधात्री बहुत कम होती है तथा यह जोड़ों को मजबूती प्रदान करता है।
(i) यह एक संयोजी ऊतक है।
(ii) एक अस्थि को दूसरी अस्थि से जोड़ता है।
(iii) यह मजबूत एवं लचीला होता है।
(iv) जोड़ों को मजबूती प्रदान करता है।
(v) इसमें आधात्री कम होती है।
63. कंडरा (Tendon) क्या है?
उत्तर ⇒ कंडरा (Tendon) एक मजबूत रेशेदार संयोजी ऊतक है, जो मांसपेशियों को अस्थियों से जोड़ता है। इसमें लचीलापन कम होता है, लेकिन यह अत्यधिक मजबूत होता है।
(i) यह मांसपेशियों को अस्थियों से जोड़ता है।
(ii) यह मजबूत रेशेदार ऊतक है।
(iii) इसमें लचीलापन कम होता है।
(iv) शरीर की गति में सहायता करता है।
(v) मांसपेशियों द्वारा उत्पन्न बल को अस्थियों तक पहुँचाता है।
64. कंडरा (Tendon) के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒ कंडरा मांसपेशियों को अस्थियों से जोड़ता है तथा मांसपेशियों द्वारा उत्पन्न बल को अस्थियों तक पहुँचाकर शरीर की गति में सहायता करता है। यह जोड़ों को स्थिरता एवं मजबूती भी प्रदान करता है।
(i) मांसपेशियों को अस्थियों से जोड़ता है।
(ii) मांसपेशियों के बल का संचार करता है।
(iii) शरीर की गति में सहायता करता है।
(iv) जोड़ों को मजबूती प्रदान करता है।
(v) मजबूत एवं रेशेदार संरचना वाला ऊतक है।
65. उपास्थि (Cartilage) क्या है?
उत्तर ⇒ उपास्थि (Cartilage) एक विशेष प्रकार का संयोजी ऊतक है, जिसकी आधात्री ठोस लेकिन लचीली होती है। यह जोड़ों, नाक, कान, कंठ तथा श्वासनली में पाई जाती है और अंगों को लचीलापन प्रदान करती है।
(i) यह लचीला संयोजी ऊतक है।
(ii) इसकी आधात्री प्रोटीन एवं शर्करा से बनी होती है।
(iii) यह नाक, कान एवं कंठ में पाई जाती है।
(iv) जोड़ों में उपस्थित होती है।
(v) शरीर को लचीलापन प्रदान करती है।
66. उपास्थि के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒ उपास्थि अस्थियों के जोड़ों पर घर्षण को कम करती है तथा शरीर के विभिन्न भागों को लचीलापन एवं सहारा प्रदान करती है।
(i) जोड़ों में घर्षण कम करती है।
(ii) अस्थियों को सुरक्षित रखती है।
(iii) शरीर को लचीलापन प्रदान करती है।
(iv) नाक एवं कान को आकार देती है।
(v) झटकों को सहन करने में सहायता करती है।
67. एरिओलर ऊतक (Areolar Tissue) क्या है?
उत्तर ⇒ एरिओलर ऊतक एक ढीला संयोजी ऊतक है, जो त्वचा एवं मांसपेशियों के बीच, रक्त वाहिकाओं तथा नसों के चारों ओर पाया जाता है। यह अंगों को सहारा देता है तथा रिक्त स्थानों को भरता है।
(i) यह ढीला संयोजी ऊतक है।
(ii) त्वचा एवं मांसपेशियों के बीच पाया जाता है।
(iii) रक्त वाहिकाओं एवं नसों के चारों ओर स्थित होता है।
(iv) अंगों के बीच रिक्त स्थान भरता है।
(v) ऊतकों की मरम्मत में सहायता करता है।
68. वसामय ऊतक (Adipose Tissue) क्या है?
उत्तर ⇒ वसामय ऊतक वह संयोजी ऊतक है, जिसकी कोशिकाओं में वसा (Fat) संग्रहित रहती है। यह त्वचा के नीचे तथा आंतरिक अंगों के बीच पाया जाता है और ऊर्जा का भंडारण तथा शरीर को ऊष्मीय संरक्षण प्रदान करता है।
(i) इसमें वसा का संग्रह होता है।
(ii) यह त्वचा के नीचे पाया जाता है।
(iii) आंतरिक अंगों की सुरक्षा करता है।
(iv) शरीर को ऊष्मीय संरक्षण प्रदान करता है।
(v) ऊर्जा के भंडार के रूप में कार्य करता है।
69. वसामय ऊतक (Adipose Tissue) के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒ वसामय ऊतक शरीर में वसा का संग्रह करता है, जिससे आवश्यकता पड़ने पर ऊर्जा प्राप्त होती है। यह शरीर को ठंड से बचाता है तथा आंतरिक अंगों को चोट से सुरक्षा प्रदान करता है।
(i) वसा का भंडारण करता है।
(ii) आवश्यकता पड़ने पर ऊर्जा प्रदान करता है।
(iii) शरीर को ऊष्मीय संरक्षण देता है।
(iv) आंतरिक अंगों की रक्षा करता है।
(v) शरीर को कुशन (Cushion) प्रदान करता है।
70. पेशीय ऊतक (Muscular Tissue) क्या है?
उत्तर ⇒ पेशीय ऊतक लंबी पेशीय कोशिकाओं (Muscle Fibres) से बना ऊतक है, जो शरीर में विभिन्न प्रकार की गतियों के लिए उत्तरदायी होता है। इसमें संकुचन एवं प्रसार करने वाले विशेष प्रोटीन पाए जाते हैं।
(i) यह लंबी पेशीय कोशिकाओं से बना होता है।
(ii) शरीर की गति कराता है।
(iii) संकुचन एवं प्रसार करने की क्षमता रखता है।
(iv) इसमें विशेष प्रोटीन पाए जाते हैं।
(v) इसे पेशीय रेशा भी कहा जाता है।
71. पेशीय ऊतक के प्रकार लिखिए।
उत्तर ⇒ संरचना एवं कार्य के आधार पर पेशीय ऊतक तीन प्रकार के होते हैं। प्रत्येक प्रकार शरीर में अलग-अलग कार्य करता है।
(i) ऐच्छिक या रेखित पेशी
(ii) अनैच्छिक या अरेखित पेशी
(iii) हृदय पेशी
(iv) सभी पेशियाँ संकुचन एवं प्रसार करती हैं।
(v) ये शरीर की विभिन्न गतियों में सहायता करती हैं।
72. ऐच्छिक (रेखित) पेशी क्या है?
उत्तर ⇒ जिन पेशियों की गति हम अपनी इच्छा के अनुसार नियंत्रित कर सकते हैं, उन्हें ऐच्छिक या रेखित पेशी कहते हैं। ये मुख्यतः हड्डियों से जुड़ी होती हैं, इसलिए इन्हें कंकाल पेशी (Skeletal Muscle) भी कहते हैं।
(i) इनकी गति इच्छानुसार होती है।
(ii) ये हड्डियों से जुड़ी होती हैं।
(iii) इन्हें कंकाल पेशी भी कहते हैं।
(iv) कोशिकाएँ लंबी, बेलनाकार एवं बहुनाभीय होती हैं।
(v) इनमें हल्की एवं गहरी धारियाँ दिखाई देती हैं।
73. ऐच्छिक (रेखित) पेशी की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर ⇒ ऐच्छिक पेशियाँ शरीर की स्वैच्छिक गतियों के लिए उत्तरदायी होती हैं। इनकी कोशिकाएँ लंबी, बेलनाकार, शाखारहित एवं बहुनाभीय होती हैं तथा इनमें स्पष्ट धारियाँ दिखाई देती हैं।
(i) इच्छानुसार कार्य करती हैं।
(ii) हड्डियों से जुड़ी होती हैं।
(iii) कोशिकाएँ बहुनाभीय होती हैं।
(iv) कोशिकाएँ बेलनाकार एवं शाखारहित होती हैं।
(v) इनमें स्पष्ट रेखाएँ (Striations) पाई जाती हैं।
74. अनैच्छिक (अरेखित) पेशी क्या है?
उत्तर ⇒ अनैच्छिक (अरेखित) पेशी वह पेशीय ऊतक है जो हमारी इच्छा के बिना स्वतः कार्य करता है। यह आंत, आमाशय, मूत्रवाहिनी, रक्त वाहिनियों तथा श्वासनली जैसे आंतरिक अंगों में पाया जाता है।
(i) यह हमारी इच्छा के बिना कार्य करती है।
(ii) इसे चिकनी (Smooth) पेशी भी कहते हैं।
(iii) इसकी कोशिकाएँ लंबी एवं तर्कुरूपी (Spindle-shaped) होती हैं।
(iv) प्रत्येक कोशिका में एक केंद्रक होता है।
(v) इसमें धारियाँ (Striations) नहीं होती हैं।
75. अनैच्छिक (अरेखित) पेशी की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर ⇒ अनैच्छिक पेशियाँ शरीर के आंतरिक अंगों की क्रियाओं को नियंत्रित करती हैं। इनकी कोशिकाएँ लंबी, एक-केंद्रकीय तथा तर्कुरूपी होती हैं और इनमें धारियाँ नहीं होतीं।
(i) यह इच्छा के बिना कार्य करती है।
(ii) कोशिकाएँ तर्कुरूपी होती हैं।
(iii) प्रत्येक कोशिका में एक केंद्रक होता है।
(iv) इनमें धारियाँ नहीं होती हैं।
(v) यह आंत, आमाशय एवं रक्त वाहिनियों में पाई जाती हैं।
76. हृदय पेशी (Cardiac Muscle) क्या है?
उत्तर ⇒ हृदय पेशी एक विशेष प्रकार की अनैच्छिक पेशी है, जो केवल हृदय में पाई जाती है। यह जीवनभर निरंतर संकुचन एवं प्रसार करके पूरे शरीर में रक्त का संचार करती है।
(i) यह केवल हृदय में पाई जाती है।
(ii) यह अनैच्छिक पेशी है।
(iii) इसकी कोशिकाएँ शाखित होती हैं।
(iv) इसमें हल्की एवं गहरी धारियाँ होती हैं।
(v) यह जीवनभर बिना रुके कार्य करती है।
77. हृदय पेशी की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर ⇒ हृदय पेशी की कोशिकाएँ शाखित, बेलनाकार एवं एक-केंद्रकीय होती हैं। ये बिना थके जीवनभर नियमित रूप से संकुचन एवं प्रसार करती रहती हैं।
(i) केवल हृदय में पाई जाती है।
(ii) हमारी इच्छा के बिना कार्य करती है।
(iii) कोशिकाएँ शाखित एवं बेलनाकार होती हैं।
(iv) प्रत्येक कोशिका में सामान्यतः एक केंद्रक होता है।
(v) जीवनभर लगातार कार्य करती है।
78. ऐच्छिक, अनैच्छिक एवं हृदय पेशियों में अंतर लिखिए।
उत्तर ⇒ ऐच्छिक, अनैच्छिक एवं हृदय पेशियाँ संरचना, स्थान, नियंत्रण तथा कार्य के आधार पर एक-दूसरे से भिन्न होती हैं।
| ऐच्छिक (रेखित) पेशी | अनैच्छिक (अरेखित) पेशी | हृदय पेशी |
|---|---|---|
| (i) इच्छानुसार कार्य करती है। | (i) इच्छा के बिना कार्य करती है। | (i) इच्छा के बिना कार्य करती है। |
| (ii) हड्डियों से जुड़ी होती है। | (ii) आंतरिक अंगों में पाई जाती है। | (ii) केवल हृदय में पाई जाती है। |
| (iii) बहुनाभीय होती है। | (iii) एक-केंद्रकीय होती है। | (iii) सामान्यतः एक-केंद्रकीय होती है। |
| (iv) धारियाँ स्पष्ट होती हैं। | (iv) धारियाँ नहीं होती हैं। | (iv) धारियाँ होती हैं। |
| (v) जल्दी थक जाती है। | (v) जल्दी नहीं थकती। | (v) जीवनभर लगातार कार्य करती है। |
79. तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue) क्या है?
उत्तर ⇒ तंत्रिका ऊतक वह ऊतक है जिससे मस्तिष्क, मेरुरज्जु एवं तंत्रिकाओं का निर्माण होता है। यह शरीर में संवेदनाओं का ग्रहण एवं उनका संचार करने का कार्य करता है। इसकी मूल इकाई न्यूरॉन है।
(i) यह मस्तिष्क एवं मेरुरज्जु का निर्माण करता है।
(ii) इसकी मूल इकाई न्यूरॉन है।
(iii) यह उत्तेजनाओं को ग्रहण करता है।
(iv) शरीर में संदेशों का संचार करता है।
(v) शरीर के विभिन्न अंगों का समन्वय करता है।
80. तंत्रिका ऊतक के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर ⇒ तंत्रिका ऊतक शरीर में संदेशों का तीव्र गति से संचार करता है तथा विभिन्न अंगों के कार्यों का समन्वय एवं नियंत्रण करता है।
(i) उत्तेजनाओं को ग्रहण करता है।
(ii) तंत्रिका संदेशों का संचार करता है।
(iii) शरीर के अंगों का समन्वय करता है।
(iv) मस्तिष्क एवं शरीर के बीच संपर्क स्थापित करता है।
(v) प्रतिक्रिया (Response) उत्पन्न करने में सहायता करता है।
81. न्यूरॉन (Neuron) या तंत्रिका कोशिका क्या है?
उत्तर ⇒ न्यूरॉन तंत्रिका ऊतक की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है। इसमें कोशिका शरीर (Cell Body), डेंड्राइट तथा एक लंबा एक्सॉन होता है। यह तंत्रिका संदेशों का संचार करता है।
(i) यह तंत्रिका ऊतक की इकाई है।
(ii) इसमें कोशिका शरीर, डेंड्राइट एवं एक्सॉन होते हैं।
(iii) एक्सॉन लंबा प्रवर्ध होता है।
(iv) डेंड्राइट संदेश ग्रहण करते हैं।
(v) यह तंत्रिका संदेशों का संचार करता है।
82. तंत्रिका स्पंदन (Nerve Impulse) क्या है?
उत्तर ⇒ तंत्रिका रेशों से गुजरने वाली संवेदना या संदेश को तंत्रिका स्पंदन (Nerve Impulse) कहते हैं। यह एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक पहुँचकर शरीर में शीघ्र प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है।
(i) यह तंत्रिका संदेश होता है।
(ii) न्यूरॉन द्वारा संचरित होता है।
(iii) एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक जाता है।
(iv) शरीर में त्वरित प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है।
(v) मस्तिष्क एवं शरीर के बीच संचार स्थापित करता है।