Class 9 Science Revision Notes
ध्वनि (Sound)
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Chapter Overview
| Class | 9 |
| Subject | Science |
| Chapter Name | ध्वनि (Sound) |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
ध्वनि (Sound) Revision Notes
1. ध्वनि (Sound) क्या है?
उत्तर ⇒ हमारे कानों में श्रवण का संवेदन उत्पन्न करने वाली ऊर्जा को ध्वनि (Sound) कहते हैं। हम ध्वनि को विभिन्न स्रोतों जैसे मनुष्य, पक्षियों, घंटियों, मशीनों, वाहनों, टेलीविजन, रेडियो आदि से सुनते हैं। ध्वनि एक प्रकार की यांत्रिक ऊर्जा है, जो किसी माध्यम के कणों के कंपन के कारण एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचती है। ध्वनि का अनुभव तभी होता है जब वह हमारे कान के पर्दे (कर्ण-पटल) तक पहुँचकर उसमें कंपन उत्पन्न करती है।
(i) ध्वनि श्रवण का संवेदन उत्पन्न करती है।
(ii) यह एक प्रकार की ऊर्जा है।
(iii) यह कंपन से उत्पन्न होती है।
(iv) इसके लिए माध्यम आवश्यक है।
(v) कर्ण-पटल में कंपन से ध्वनि सुनाई देती है।
2. ध्वनि कैसे उत्पन्न होती है?
उत्तर ⇒ जब कोई वस्तु कंपन (Vibration) करती है, तब ध्वनि उत्पन्न होती है। किसी वस्तु को कंपन कराने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो किसी बाहरी स्रोत से प्राप्त होती है। उदाहरण के लिए, जब हम ताली बजाते हैं, तो हाथों की यांत्रिक ऊर्जा ध्वनि ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है। इसी प्रकार घर्षण, रगड़ने, खुरचने, फूँक मारने, हिलाने या किसी वस्तु को ठोकने से भी ध्वनि उत्पन्न की जा सकती है। इसलिए प्रत्येक ध्वनि का मूल कारण कंपन है।
(i) ध्वनि कंपन से उत्पन्न होती है।
(ii) कंपन के लिए ऊर्जा आवश्यक है।
(iii) ताली बजाना इसका उदाहरण है।
(iv) रगड़ने एवं ठोकने से भी ध्वनि उत्पन्न होती है।
(v) कंपन ध्वनि का मूल कारण है।
3. कंपन (Vibration) क्या है?
उत्तर ⇒ किसी वस्तु का अपनी माध्य स्थिति के दोनों ओर तेजी से बार-बार आगे-पीछे गति करना कंपन कहलाता है। जब कोई वस्तु कंपन करती है, तो उसके आसपास के माध्यम के कण भी कंपन करने लगते हैं और ध्वनि उत्पन्न होती है। कंपन की गति जितनी अधिक होगी, ध्वनि की आवृत्ति भी उतनी अधिक होगी। संगीत वाद्ययंत्रों, घंटियों तथा मनुष्य के स्वर-तंत्र में ध्वनि कंपन के कारण ही उत्पन्न होती है।
(i) कंपन आगे-पीछे की गति है।
(ii) यह बार-बार होता है।
(iii) कंपन से ध्वनि उत्पन्न होती है।
(iv) अधिक कंपन से अधिक आवृत्ति होती है।
(v) सभी ध्वनि स्रोत कंपन करते हैं।
4. ध्वनि का संचरण (Propagation of Sound) क्या है?
उत्तर ⇒ किसी स्रोत से ध्वनि का हमारे कानों तक पहुँचने की प्रक्रिया को ध्वनि का संचरण कहते हैं। ध्वनि के संचरण के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता होती है। यह माध्यम ठोस, द्रव या गैस हो सकता है। ध्वनि निर्वात में संचरित नहीं हो सकती क्योंकि वहाँ कंपन को आगे बढ़ाने के लिए कोई कण उपस्थित नहीं होते। ध्वनि माध्यम में अनुदैर्ध्य तरंगों के रूप में आगे बढ़ती है और अंत में कर्ण-पटल में कंपन उत्पन्न करती है।
(i) ध्वनि स्रोत से कान तक पहुँचती है।
(ii) संचरण के लिए माध्यम आवश्यक है।
(iii) निर्वात में ध्वनि नहीं चलती।
(iv) ध्वनि अनुदैर्ध्य तरंग के रूप में चलती है।
(v) कर्ण-पटल में कंपन उत्पन्न होता है।
5. माध्यम (Medium) क्या है?
उत्तर ⇒ वह पदार्थ जिससे होकर ध्वनि एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचती है, माध्यम कहलाता है। माध्यम ठोस, द्रव या गैस कोई भी हो सकता है। ध्वनि की चाल माध्यम के गुणों पर निर्भर करती है। ठोस में कण सबसे अधिक निकट होते हैं, इसलिए ध्वनि सबसे तेज चलती है। द्रव में इसकी चाल कम तथा गैस में सबसे कम होती है। निर्वात में माध्यम के अभाव के कारण ध्वनि का संचरण नहीं होता।
(i) माध्यम ध्वनि के संचरण का पदार्थ है।
(ii) यह ठोस, द्रव या गैस हो सकता है।
(iii) ठोस में ध्वनि सबसे तेज चलती है।
(iv) गैस में ध्वनि सबसे धीमी चलती है।
(v) निर्वात में ध्वनि नहीं चलती।
6. ध्वनि का संचरण कैसे होता है?
उत्तर ⇒ जब कोई वस्तु कंपन करती है, तो वह अपने आसपास के माध्यम के कणों में विक्षोभ उत्पन्न करती है। ये कण अपनी संतुलित अवस्था से हटकर अपने निकटवर्ती कणों को कंपन कराते हैं और फिर अपनी मूल स्थिति में लौट आते हैं। यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है और कंपन एक कण से दूसरे कण तक पहुँचता रहता है। अंत में यह कंपन हमारे कान के कर्ण-पटल तक पहुँचकर उसमें कंपन उत्पन्न करता है, जिससे हमें ध्वनि सुनाई देती है। ध्वनि में माध्यम के कण आगे नहीं बढ़ते, केवल ऊर्जा का संचरण होता है।
(i) स्रोत के कण पहले कंपन करते हैं।
(ii) निकटवर्ती कणों में विक्षोभ उत्पन्न होता है।
(iii) ऊर्जा आगे बढ़ती है।
(iv) कण अपनी मूल स्थिति में लौट आते हैं।
(v) अंत में कर्ण-पटल में कंपन होता है।
7. तरंग (Wave) क्या है?
उत्तर ⇒ तरंग एक प्रकार का विक्षोभ है, जो किसी माध्यम में ऊर्जा का संचरण करती है। तरंग के संचरण के समय माध्यम के कण स्वयं आगे नहीं बढ़ते, बल्कि वे अपनी संतुलित स्थिति के आसपास दोलन करते हुए निकटवर्ती कणों तक ऊर्जा पहुँचाते हैं। ध्वनि तरंग भी इसी प्रकार माध्यम में संचरित होती है। तरंगों के माध्यम से ऊर्जा का स्थानांतरण होता है, जबकि माध्यम के कण अपने स्थान के आसपास ही दोलन करते रहते हैं।
(i) तरंग ऊर्जा का संचरण करती है।
(ii) यह विक्षोभ का रूप है।
(iii) कण स्वयं आगे नहीं बढ़ते।
(iv) केवल ऊर्जा आगे जाती है।
(v) ध्वनि तरंग इसका उदाहरण है।
8. संपीडन (Compression) एवं विरलन (Rarefaction) क्या हैं?
उत्तर ⇒ जब कोई कंपन करती हुई वस्तु आगे की ओर बढ़ती है, तो वह वायु के कणों को पास-पास कर देती है, जिससे उच्च दाब एवं अधिक घनत्व वाला क्षेत्र बनता है। इसे संपीडन (Compression) कहते हैं। जब वही वस्तु पीछे की ओर आती है, तो वायु के कण दूर-दूर हो जाते हैं और निम्न दाब एवं कम घनत्व वाला क्षेत्र बनता है। इसे विरलन (Rarefaction) कहते हैं। ध्वनि तरंग में संपीडन और विरलन क्रमशः उत्पन्न होते रहते हैं।
(i) संपीडन में कण पास आते हैं।
(ii) विरलन में कण दूर होते हैं।
(iii) संपीडन उच्च दाब का क्षेत्र है।
(iv) विरलन निम्न दाब का क्षेत्र है।
(v) ध्वनि तरंग में दोनों क्रमशः बनते हैं।
9. तरंगों के प्रकार लिखिए।
उत्तर ⇒ तरंगों को मुख्यतः दो प्रकारों में बाँटा जाता है— यांत्रिक तरंगें तथा विद्युत-चुंबकीय तरंगें। यांत्रिक तरंगों के संचरण के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता होती है, जैसे जल तरंगें एवं ध्वनि तरंगें। जबकि विद्युत-चुंबकीय तरंगों को संचरण के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती। प्रकाश, रेडियो तरंगें तथा एक्स-किरणें विद्युत-चुंबकीय तरंगों के उदाहरण हैं।
| यांत्रिक तरंगें | विद्युत-चुंबकीय तरंगें |
|---|---|
| माध्यम आवश्यक होता है। | माध्यम आवश्यक नहीं होता। |
| ध्वनि तरंग इसका उदाहरण है। | प्रकाश एवं रेडियो तरंगें उदाहरण हैं। |
| निर्वात में नहीं चलती। | निर्वात में भी चलती हैं। |
(i) तरंगें दो प्रकार की होती हैं।
(ii) यांत्रिक तरंगों को माध्यम चाहिए।
(iii) ध्वनि यांत्रिक तरंग है।
(iv) प्रकाश विद्युत-चुंबकीय तरंग है।
(v) विद्युत-चुंबकीय तरंग निर्वात में चलती है।
10. यांत्रिक तरंगें कितने प्रकार की होती हैं?
उत्तर ⇒ यांत्रिक तरंगें मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं— अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तथा अनुप्रस्थ (Transverse)। अनुदैर्ध्य तरंगों में माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा के समानांतर दोलन करते हैं। ध्वनि तरंग इसका प्रमुख उदाहरण है। अनुप्रस्थ तरंगों में माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा के लंबवत दोलन करते हैं। जल की सतह पर बनने वाली तरंगें तथा तनी हुई डोरी में बनने वाली तरंगें इसके उदाहरण हैं।
(i) यांत्रिक तरंगें दो प्रकार की होती हैं।
(ii) अनुदैर्ध्य तरंग में कण समानांतर दोलन करते हैं।
(iii) ध्वनि अनुदैर्ध्य तरंग है।
(iv) अनुप्रस्थ तरंग में कण लंबवत दोलन करते हैं।
(v) जल तरंग अनुप्रस्थ तरंग का उदाहरण है।
11. अनुदैर्ध्य तरंग (Longitudinal Wave) क्या है?
उत्तर ⇒ वे तरंगें जिनमें माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा के समानांतर (आगे-पीछे) दोलन करते हैं, अनुदैर्ध्य तरंगें कहलाती हैं। ध्वनि तरंग इसका सबसे प्रमुख उदाहरण है। इन तरंगों में संपीडन (Compression) तथा विरलन (Rarefaction) क्रमशः उत्पन्न होते रहते हैं। अनुदैर्ध्य तरंगें ठोस, द्रव तथा गैस तीनों माध्यमों में संचरित हो सकती हैं। ध्वनि के संचरण में माध्यम के कण केवल दोलन करते हैं, वे स्वयं एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं जाते।
(i) कण समानांतर दोलन करते हैं।
(ii) ध्वनि अनुदैर्ध्य तरंग है।
(iii) इनमें संपीडन एवं विरलन बनते हैं।
(iv) ये तीनों माध्यमों में चलती हैं।
(v) कण केवल दोलन करते हैं।
12. अनुप्रस्थ तरंग (Transverse Wave) क्या है?
उत्तर ⇒ वे तरंगें जिनमें माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा के लंबवत (ऊपर-नीचे) दोलन करते हैं, अनुप्रस्थ तरंगें कहलाती हैं। इन तरंगों में श्रृंग (Crest) तथा गर्त (Trough) बनते हैं। पानी की सतह पर बनने वाली तरंगें तथा तनी हुई डोरी में उत्पन्न तरंगें अनुप्रस्थ तरंगों के प्रमुख उदाहरण हैं। इनका संचरण मुख्यतः ठोस तथा द्रव की सतह पर होता है।
(i) कण लंबवत दोलन करते हैं।
(ii) इनमें श्रृंग एवं गर्त बनते हैं।
(iii) जल तरंग इसका उदाहरण है।
(iv) तनी हुई डोरी में भी उत्पन्न होती हैं।
(v) ध्वनि तरंग अनुप्रस्थ नहीं होती।
13. अनुप्रस्थ एवं अनुदैर्ध्य तरंगों में अंतर लिखिए।
उत्तर ⇒ अनुप्रस्थ तथा अनुदैर्ध्य तरंगों में कणों की गति, संरचना तथा संचरण की दिशा में अंतर होता है। ध्वनि तरंग अनुदैर्ध्य होती है, जबकि जल की सतह पर बनने वाली तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं।
| अनुप्रस्थ तरंग | अनुदैर्ध्य तरंग |
|---|---|
| कण लंबवत दोलन करते हैं। | कण समानांतर दोलन करते हैं। |
| श्रृंग एवं गर्त बनते हैं। | संपीडन एवं विरलन बनते हैं। |
| जल की सतह पर उत्पन्न होती हैं। | ध्वनि तरंग इसका उदाहरण है। |
| मुख्यतः ठोस एवं द्रव की सतह पर चलती हैं। | ठोस, द्रव एवं गैस तीनों में चलती हैं। |
| तरंगदैर्ध्य दो श्रृंगों/गर्तों के बीच होती है। | तरंगदैर्ध्य दो संपीडनों/विरलनों के बीच होती है। |
(i) कणों की गति अलग होती है।
(ii) संरचना अलग होती है।
(iii) ध्वनि अनुदैर्ध्य तरंग है।
(iv) जल तरंग अनुप्रस्थ होती है।
(v) दोनों की तरंगदैर्ध्य की परिभाषा अलग होती है।
14. तरंगदैर्ध्य (Wavelength) क्या है?
उत्तर ⇒ दो क्रमागत संपीडनों (C) अथवा दो क्रमागत विरलनों (R) के बीच की दूरी को तरंगदैर्ध्य (Wavelength) कहते हैं। इसे ग्रीक अक्षर λ (लैम्डा) द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इसका SI मात्रक मीटर (m) है। ध्वनि तरंग की तरंगदैर्ध्य माध्यम के गुणों तथा ध्वनि की आवृत्ति पर निर्भर करती है। तरंगदैर्ध्य किसी तरंग की एक पूर्ण आवृत्ति का प्रतिनिधित्व करती है।
(i) प्रतीक λ है।
(ii) SI मात्रक मीटर है।
(iii) दो संपीडनों के बीच की दूरी होती है।
(iv) दो विरलनों के बीच की दूरी भी होती है।
(v) यह तरंग का महत्वपूर्ण अभिलक्षण है।
15. ध्वनि तरंग के प्रमुख अभिलक्षण लिखिए।
उत्तर ⇒ किसी ध्वनि तरंग के कई महत्वपूर्ण अभिलक्षण होते हैं, जिनकी सहायता से उसके गुणों का अध्ययन किया जाता है। ये हैं— तरंगदैर्ध्य (λ), आवृत्ति (ν), आयाम (A), आवर्तकाल (T) तथा तरंग वेग (v)। इन अभिलक्षणों के आधार पर ध्वनि की तीक्ष्णता, प्रबलता तथा गति का निर्धारण किया जाता है। प्रत्येक अभिलक्षण का अपना अलग महत्व होता है।
(i) तरंगदैर्ध्य।
(ii) आवृत्ति।
(iii) आयाम।
(iv) आवर्तकाल।
(v) तरंग वेग।
16. आवृत्ति (Frequency) क्या है?
उत्तर ⇒ किसी निश्चित बिंदु से एक सेकंड में होने वाले पूर्ण दोलनों की संख्या को आवृत्ति (Frequency) कहते हैं। इसे ग्रीक अक्षर ν (न्यू) द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इसका SI मात्रक हर्ट्ज़ (Hz) है। उदाहरण के लिए, यदि कोई वस्तु एक सेकंड में 5 बार कंपन करती है, तो उसकी आवृत्ति 5 Hz होगी। आवृत्ति जितनी अधिक होगी, ध्वनि का तारत्व उतना अधिक होगा।
(i) एक सेकंड में दोलनों की संख्या है।
(ii) प्रतीक ν है।
(iii) SI मात्रक हर्ट्ज़ है।
(iv) अधिक आवृत्ति पर उच्च तारत्व होता है।
(v) 5 दोलन/सेकंड = 5 Hz।
17. आवर्तकाल (Time Period) क्या है?
उत्तर ⇒ किसी तरंग के एक पूर्ण दोलन को पूरा करने में लगने वाले समय को आवर्तकाल (Time Period) कहते हैं। इसे T से प्रदर्शित किया जाता है तथा इसका SI मात्रक सेकंड (s) है। दूसरे शब्दों में, दो क्रमागत संपीडनों या दो क्रमागत विरलनों के किसी निश्चित बिंदु से गुजरने में लगने वाला समय आवर्तकाल कहलाता है। आवृत्ति तथा आवर्तकाल एक-दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं।
(i) एक पूर्ण दोलन का समय है।
(ii) प्रतीक T है।
(iii) SI मात्रक सेकंड है।
(iv) आवृत्ति से संबंधित है।
(v) यह ध्वनि तरंग का महत्वपूर्ण गुण है।
18. तारत्व (Pitch) क्या है?
उत्तर ⇒ तारत्व (Pitch) वह ध्वनि अभिलक्षण है जिसके आधार पर हम किसी ध्वनि को तीक्ष्ण (Sharp) या मंद (Grave) के रूप में पहचानते हैं। तारत्व मुख्य रूप से ध्वनि की आवृत्ति पर निर्भर करता है। यदि किसी स्रोत की आवृत्ति अधिक होती है, तो उसका तारत्व अधिक होता है और ध्वनि तीक्ष्ण सुनाई देती है। कम आवृत्ति होने पर तारत्व कम होता है तथा ध्वनि भारी या मंद प्रतीत होती है।
(i) तारत्व आवृत्ति पर निर्भर करता है।
(ii) अधिक आवृत्ति = अधिक तारत्व।
(iii) कम आवृत्ति = कम तारत्व।
(iv) यह ध्वनि की तीक्ष्णता बताता है।
(v) वायलिन एवं बाँसुरी इसका उदाहरण हैं।
19. आयाम (Amplitude) क्या है?
उत्तर ⇒ किसी माध्यम में उसकी माध्य स्थिति से दोनों ओर अधिकतम विस्थापन को आयाम (Amplitude) कहते हैं। इसे A से प्रदर्शित किया जाता है। ध्वनि की प्रबलता मुख्य रूप से आयाम पर निर्भर करती है। यदि आयाम अधिक होगा, तो ध्वनि अधिक प्रबल होगी और यदि आयाम कम होगा, तो ध्वनि मृदु होगी। आयाम ध्वनि की तीव्रता को प्रभावित करता है।
(i) प्रतीक A है।
(ii) यह अधिकतम विस्थापन है।
(iii) अधिक आयाम पर ध्वनि प्रबल होती है।
(iv) कम आयाम पर ध्वनि मृदु होती है।
(v) यह ध्वनि का प्रमुख अभिलक्षण है।
20. ध्वनि की प्रबलता (Loudness) क्या है?
उत्तर ⇒ ध्वनि की प्रबलता वह गुण है जिसके आधार पर ध्वनि तेज़ या धीमी सुनाई देती है। यह मुख्य रूप से तरंग के आयाम पर निर्भर करती है। यदि किसी मेज़ पर धीरे से चोट की जाए, तो कम आयाम वाली मृदु ध्वनि उत्पन्न होती है। जबकि जोर से चोट करने पर अधिक आयाम वाली प्रबल ध्वनि उत्पन्न होती है। ध्यान रहे कि ध्वनि की प्रबलता और ध्वनि की तीव्रता समान नहीं हैं, यद्यपि सामान्य बोलचाल में इन्हें एक जैसा समझ लिया जाता है।
(i) प्रबलता आयाम पर निर्भर करती है।
(ii) अधिक आयाम = अधिक प्रबल ध्वनि।
(iii) कम आयाम = मृदु ध्वनि।
(iv) मेज़ पर चोट इसका उदाहरण है।
(v) प्रबलता और तीव्रता समान नहीं हैं।
21. टोन (Tone), स्वर (Note) एवं शोर (Noise) क्या हैं?
उत्तर ⇒ ध्वनि को उसकी प्रकृति के आधार पर टोन, स्वर तथा शोर में बाँटा जाता है। टोन (Tone) वह ध्वनि है जिसकी केवल एक ही आवृत्ति होती है। स्वर (Note) अनेक नियमित आवृत्तियों के मिश्रण से उत्पन्न मधुर ध्वनि है, जिसे संगीत में प्रयोग किया जाता है। शोर (Noise) अनियमित आवृत्तियों का मिश्रण होता है, जो सुनने में अप्रिय लगता है। टोन और स्वर संगीत के लिए उपयोगी होते हैं, जबकि शोर सामान्यतः अवांछनीय माना जाता है।
| टोन | स्वर | शोर |
|---|---|---|
| एकल आवृत्ति | अनेक नियमित आवृत्तियाँ | अनियमित आवृत्तियाँ |
| सरल ध्वनि | मधुर ध्वनि | अप्रिय ध्वनि |
(i) टोन में एक आवृत्ति होती है।
(ii) स्वर अनेक नियमित आवृत्तियों का मिश्रण है।
(iii) शोर अनियमित ध्वनि है।
(iv) स्वर संगीत में उपयोगी है।
(v) शोर सुनने में अप्रिय होता है।
22. तरंग वेग (Wave Velocity) क्या है? इसका सूत्र लिखिए।
उत्तर ⇒ किसी तरंग द्वारा एकांक समय में तय की गई दूरी को तरंग वेग (Wave Velocity) कहते हैं। यदि कोई तरंग एक आवर्तकाल में एक तरंगदैर्ध्य जितनी दूरी तय करती है, तो उसका वेग निम्न प्रकार से व्यक्त किया जाता है—
वेग = दूरी / समय
v = λ / T
चूँकि,
ν = 1 / T
अतः,
v = λν
जहाँ v = तरंग वेग, λ = तरंगदैर्ध्य तथा ν = आवृत्ति। एक ही माध्यम एवं समान परिस्थितियों में ध्वनि का वेग सभी आवृत्तियों के लिए लगभग समान रहता है।
(i) वेग एकांक समय में तय दूरी है।
(ii) सूत्र v = λ/T है।
(iii) दूसरा सूत्र v = λν है।
(iv) λ तरंगदैर्ध्य है।
(v) ν आवृत्ति है।
23. ध्वनि की तीव्रता (Intensity of Sound) क्या है?
उत्तर ⇒ किसी एकांक क्षेत्रफल से एक सेकंड में गुजरने वाली ध्वनि ऊर्जा को ध्वनि की तीव्रता (Intensity) कहते हैं। यह ध्वनि द्वारा वहन की जाने वाली ऊर्जा की मात्रा को दर्शाती है। ध्वनि की तीव्रता और ध्वनि की प्रबलता समान नहीं हैं। प्रबलता हमारे कानों द्वारा अनुभव की जाने वाली अनुभूति है, जबकि तीव्रता एक भौतिक राशि है जिसे मापा जा सकता है। इसलिए दोनों शब्दों का प्रयोग अलग-अलग अर्थों में किया जाता है।
(i) तीव्रता ऊर्जा पर आधारित है।
(ii) यह एक भौतिक राशि है।
(iii) एकांक क्षेत्रफल से संबंधित है।
(iv) प्रबलता से भिन्न होती है।
(v) इसे मापा जा सकता है।
24. विभिन्न माध्यमों में ध्वनि की चाल कैसी होती है?
उत्तर ⇒ ध्वनि की चाल माध्यम के गुणों पर निर्भर करती है। ठोस पदार्थों में ध्वनि सबसे अधिक गति से चलती है, क्योंकि वहाँ कण एक-दूसरे के बहुत निकट होते हैं। द्रवों में इसकी चाल ठोस से कम होती है तथा गैसों में सबसे कम होती है। ध्वनि की चाल प्रकाश की चाल से बहुत कम होती है। इसी कारण बिजली की चमक पहले दिखाई देती है और बाद में गर्जन सुनाई देता है।
| माध्यम | ध्वनि की चाल |
|---|---|
| ठोस | सबसे अधिक |
| द्रव | मध्यम |
| गैस | सबसे कम |
(i) ठोस में सबसे अधिक चाल होती है।
(ii) द्रव में चाल कम होती है।
(iii) गैस में चाल सबसे कम होती है।
(iv) ध्वनि की चाल प्रकाश से कम होती है।
(v) माध्यम के गुणों पर चाल निर्भर करती है।
25. ध्वनि की चाल पर ताप का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर ⇒ तापक्रम बढ़ने पर माध्यम के कणों की गति बढ़ जाती है, जिसके कारण ध्वनि की चाल भी बढ़ जाती है। इसके विपरीत तापक्रम कम होने पर ध्वनि की चाल घट जाती है। उदाहरण के लिए, 0°C पर हवा में ध्वनि का वेग लगभग 331 m/s तथा 22°C पर लगभग 344 m/s होता है। इसी कारण गर्मियों में ध्वनि अपेक्षाकृत अधिक स्पष्ट सुनाई देती है।
(i) ताप बढ़ने पर चाल बढ़ती है।
(ii) ताप घटने पर चाल घटती है।
(iii) 0°C पर लगभग 331 m/s होती है।
(iv) 22°C पर लगभग 344 m/s होती है।
(v) गर्मियों में ध्वनि अधिक स्पष्ट सुनाई देती है।
26. ध्वनि का परावर्तन (Reflection of Sound) क्या है?
उत्तर ⇒ जब ध्वनि किसी ठोस या द्रव सतह से टकराकर वापस लौटती है, तो इस घटना को ध्वनि का परावर्तन कहते हैं। ध्वनि का परावर्तन भी प्रकाश के परावर्तन की तरह नियमों का पालन करता है। इसमें आपतन कोण और परावर्तन कोण बराबर होते हैं तथा आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलंब एक ही तल में स्थित होते हैं। ध्वनि के परावर्तन के लिए पर्याप्त बड़ी सतह आवश्यक होती है।
(i) ध्वनि सतह से टकराकर लौटती है।
(ii) इसे ध्वनि का परावर्तन कहते हैं।
(iii) आपतन कोण = परावर्तन कोण।
(iv) तीनों किरणें एक ही तल में होती हैं।
(v) बड़ी सतह आवश्यक होती है।
27. प्रतिध्वनि (Echo) क्या है? स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने की शर्तें लिखिए।
उत्तर ⇒ जब ध्वनि किसी परावर्तक सतह से टकराकर कुछ समय बाद पुनः सुनाई देती है, तो उसे प्रतिध्वनि (Echo) कहते हैं। स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने के लिए मूल ध्वनि और परावर्तित ध्वनि के बीच कम-से-कम 0.1 सेकंड का अंतर होना चाहिए। लगभग 22°C पर ध्वनि की चाल 344 m/s होने पर परावर्तक सतह की न्यूनतम दूरी लगभग 17.2 मीटर होनी चाहिए। बादलों की गर्जना प्रतिध्वनि का अच्छा उदाहरण है।
(i) प्रतिध्वनि परावर्तित ध्वनि है।
(ii) 0.1 सेकंड का अंतर आवश्यक है।
(iii) न्यूनतम दूरी लगभग 17.2 m होती है।
(iv) बादलों की गर्जना उदाहरण है।
(v) बड़ी परावर्तक सतह आवश्यक है।
28. अनुरणन (Reverberation) क्या है? इसे कम करने के उपाय लिखिए।
उत्तर ⇒ जब किसी बड़े हॉल या सभा भवन में ध्वनि दीवारों तथा छत से बार-बार परावर्तित होकर कुछ समय तक बनी रहती है, तो इस घटना को अनुरणन (Reverberation) कहते हैं। अत्यधिक अनुरणन के कारण ध्वनि अस्पष्ट हो जाती है। इसे कम करने के लिए दीवारों एवं छतों पर ध्वनि अवशोषक पदार्थ जैसे फाइबर बोर्ड, खुरदरा प्लास्टर, भारी पर्दे तथा ध्वनि अवशोषित करने वाली सीटों का उपयोग किया जाता है।
(i) बार-बार परावर्तन से अनुरणन होता है।
(ii) बड़े हॉल में अधिक होता है।
(iii) ध्वनि अस्पष्ट हो जाती है।
(iv) फाइबर बोर्ड उपयोगी हैं।
(v) भारी पर्दे अनुरणन कम करते हैं।
29. श्रव्यता का परिसर, अवश्रव्य एवं पराश्रव्य ध्वनि क्या है?
उत्तर ⇒ मनुष्य सामान्यतः 20 Hz से 20,000 Hz (20 kHz) तक की ध्वनियाँ सुन सकते हैं। इसे श्रव्यता का परिसर कहते हैं। 20 Hz से कम आवृत्ति वाली ध्वनियाँ अवश्रव्य (Infrasonic) कहलाती हैं। हाथी एवं गैंडा इनका उपयोग करते हैं। 20 kHz से अधिक आवृत्ति वाली ध्वनियाँ पराश्रव्य (Ultrasonic) कहलाती हैं। चमगादड़, डॉलफिन एवं पॉरपॉइज पराश्रव्य ध्वनियाँ उत्पन्न करते हैं।
| ध्वनि का प्रकार | आवृत्ति |
|---|---|
| अवश्रव्य | 20 Hz से कम |
| श्रव्य | 20 Hz – 20 kHz |
| पराश्रव्य | 20 kHz से अधिक |
(i) मनुष्य 20 Hz–20 kHz तक सुनते हैं।
(ii) 20 Hz से कम अवश्रव्य है।
(iii) 20 kHz से अधिक पराश्रव्य है।
(iv) हाथी अवश्रव्य ध्वनि का उपयोग करता है।
(v) चमगादड़ पराश्रव्य ध्वनि उत्पन्न करता है।
30. श्रवण सहायक यंत्र एवं पराश्रव्य ध्वनि के अनुप्रयोग लिखिए।
उत्तर ⇒ श्रवण सहायक यंत्र कम सुनने वाले व्यक्तियों के लिए उपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है। इसमें माइक्रोफ़ोन, एंप्लीफायर तथा स्पीकर होते हैं। माइक्रोफ़ोन ध्वनि को विद्युत संकेतों में बदलता है, एंप्लीफायर उन्हें बढ़ाता है और स्पीकर पुनः ध्वनि में परिवर्तित करता है। पराश्रव्य ध्वनि का उपयोग उद्योगों में मशीनों एवं धातुओं के दोष खोजने तथा वस्तुओं की सफाई में किया जाता है। चिकित्सा में इसका उपयोग अल्ट्रासोनोग्राफी, इकोकार्डियोग्राफी, पथरी तोड़ने तथा भ्रूण की जाँच के लिए किया जाता है।
(i) श्रवण सहायक यंत्र कम सुनने वालों के लिए है।
(ii) इसमें माइक्रोफ़ोन, एंप्लीफायर एवं स्पीकर होते हैं।
(iii) उद्योगों में दोष खोजने में उपयोग होता है।
(iv) अल्ट्रासोनोग्राफी में प्रयोग होता है।
(v) गुर्दे की पथरी तोड़ने में भी उपयोग किया जाता है।