क्या आप JAC Class 10 Hindi के “लखनवी अंदाज़” MCQ (Objective Questions) with Answers खोज रहे हैं? आप बिल्कुल सही जगह पर हैं! JAC Exam Prep पर आपको “लखनवी अंदाज़” पाठ के महत्वपूर्ण Multiple Choice Questions (MCQs) with Answers मिलेंगे। ये प्रश्न नवीनतम JCERT एवं NCERT पाठ्यक्रम के अनुसार तथा Jharkhand Academic Council (JAC) की परीक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।
“लखनवी अंदाज़” के ये MCQs पाठ की कहानी, पात्रों, घटनाओं, लेखक, विषय-वस्तु और महत्वपूर्ण तथ्यों पर आधारित हैं। इन प्रश्नों का अभ्यास करके विद्यार्थी इस पाठ का बेहतर Revision कर सकते हैं, अपनी तैयारी को मजबूत कर सकते हैं और JAC Class 10 Board Exam में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
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1‘लखनवी अंदाज़’ पाठ के लेखक कौन हैं?
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सही उत्तर:B. यशपाल
व्याख्या: ‘लखनवी अंदाज़’ के लेखक यशपाल हैं। उनकी रचनाओं में आम आदमी के सरोकार, सामाजिक विषमता और राजनीतिक पाखंड जैसे विषय प्रमुखता से दिखाई देते हैं।
2यशपाल का जन्म किस वर्ष हुआ था?
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सही उत्तर:C. 1903
व्याख्या: यशपाल का जन्म सन् 1903 में पंजाब के फ़िरोज़पुर छावनी में हुआ था।
3यशपाल ने बी.ए. की शिक्षा कहाँ से प्राप्त की थी?
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सही उत्तर:B. लाहौर के नेशनल कॉलेज से
व्याख्या: प्रारंभिक शिक्षा काँगड़ा में प्राप्त करने के बाद यशपाल ने लाहौर के नेशनल कॉलेज से बी.ए. किया था।
4यशपाल का परिचय किन क्रांतिकारियों से हुआ था?
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सही उत्तर:B. भगत सिंह और सुखदेव
व्याख्या: लाहौर के नेशनल कॉलेज में यशपाल का परिचय भगत सिंह और सुखदेव से हुआ था।
5यशपाल किस धारा से जुड़े होने के कारण जेल भी गए?
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सही उत्तर:B. क्रांतिकारी धारा
व्याख्या: यशपाल स्वतंत्रता संग्राम की क्रांतिकारी धारा से जुड़े थे और इसी कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा।
6यशपाल की रचनाओं में मुख्य रूप से किसकी उपस्थिति दिखाई देती है?
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सही उत्तर:B. आम आदमी के सरोकारों की
व्याख्या: यशपाल की रचनाओं में आम आदमी के जीवन और उसके सरोकारों की प्रमुख उपस्थिति दिखाई देती है।
7यशपाल किस प्रकार की शैली के विशिष्ट रचनाकार माने जाते हैं?
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सही उत्तर:B. यथार्थवादी
व्याख्या: यशपाल यथार्थवादी शैली के विशिष्ट रचनाकार हैं। उनकी रचनाओं में सामाजिक और राजनीतिक वास्तविकताओं का चित्रण मिलता है।
8‘लखनवी अंदाज़’ पाठ में लेखक यात्रा करने के लिए किस ट्रेन से जा रहा था?
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सही उत्तर:B. पैसेंजर ट्रेन
व्याख्या: पाठ में लेखक के पैसेंजर ट्रेन में यात्रा करने का वर्णन है। वह भीड़ से बचने और एकांत में नई कहानी के संबंध में सोचने के लिए सेकंड क्लास का टिकट लेता है।
9लेखक ने सेकंड क्लास का टिकट क्यों लिया था?
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सही उत्तर:B. भीड़ से बचकर एकांत में नई कहानी के बारे में सोचने के लिए
व्याख्या: लेखक को सेकंड क्लास का डिब्बा खाली लगा, इसलिए उसने एकांत में बैठकर नई कहानी के संबंध में सोचने और खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देखने के लिए टिकट लिया।
10लेखक जब सेकंड क्लास के डिब्बे में चढ़ा तो वहाँ कौन बैठा था?
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सही उत्तर:B. एक नवाब साहब
व्याख्या: डिब्बे में पहले से ही एक नवाब साहब बैठे थे। वे बड़े आराम से बर्थ पर पालथी मारे बैठे हुए थे।
11नवाब साहब के सामने क्या रखा हुआ था?
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सही उत्तर:B. दो ताज़े-चिकने खीरे
व्याख्या: नवाब साहब के सामने दो ताज़े-चिकने खीरे तौलिये पर रखे हुए थे।
12नवाब साहब ने लेखक के डिब्बे में आने पर कैसी प्रतिक्रिया व्यक्त की?
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सही उत्तर:B. असंतोष और संकोच का भाव दिखाया।
व्याख्या: लेखक के डिब्बे में आने पर नवाब साहब की आँखों में एकांत में व्यवधान पड़ने का असंतोष और संकोच दिखाई दिया। उन्होंने बातचीत में विशेष उत्साह नहीं दिखाया।
13लेखक ने नवाब साहब के व्यवहार से क्या अनुमान लगाया?
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सही उत्तर:B. वे अकेले यात्रा करने के लिए सेकंड क्लास का टिकट लेकर बैठे थे।
व्याख्या: लेखक ने अनुमान लगाया कि नवाब साहब ने शायद अकेले यात्रा करने और किसी संभ्रांत व्यक्ति द्वारा उन्हें मँझले दर्जे में सफर करते न देखे जाने के विचार से सेकंड क्लास का टिकट लिया होगा।
14नवाब साहब ने लेखक को खीरे के संबंध में क्या कहा?
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सही उत्तर:B. “आदाब-अर्ज, जनाब, खीरे का शौक फरमाएँगे?”
व्याख्या: नवाब साहब ने शिष्टाचारपूर्ण अंदाज़ में लेखक से पूछा कि क्या वे खीरे का शौक फरमाएँगे।
15लेखक ने नवाब साहब द्वारा दिए गए खीरे को क्यों नहीं खाया?
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सही उत्तर:B. उसने आत्मसम्मान बनाए रखने के लिए खीरा खाने से इनकार कर दिया।
व्याख्या: लेखक को खीरे देखकर पानी मुँह में आ रहा था, फिर भी उसने आत्मसम्मान बनाए रखने के लिए नवाब साहब के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
16नवाब साहब ने खीरे खाने की तैयारी किस प्रकार की?
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सही उत्तर:B. बहुत यत्न से खीरे काटे, नमक-मिर्च बुरकी और सूँघकर बाहर फेंक दिए।
व्याख्या: नवाब साहब ने बड़े यत्न से खीरे काटे, उन पर नमक-मिर्च बुरकी और फिर उन्हें सूँघकर खिड़की से बाहर फेंक दिया।
17नवाब साहब ने खीरे पर क्या डाला था?
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सही उत्तर:B. जीरा-मिला नमक और पिसी हुई लाल मिर्च
व्याख्या: लखनऊ स्टेशन पर खीरा बेचने वालों की तरह नवाब साहब ने खीरे की फाँकों पर जीरा-मिला नमक और लाल मिर्च की सूखी बुरक दी।
18नवाब साहब ने खीरे की फाँक को खाने के बजाय क्या किया?
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सही उत्तर:B. उसे सूँघा और फिर खिड़की से बाहर फेंक दिया।
व्याख्या: नवाब साहब ने खीरे की फाँक को होंठों तक ले जाकर उसकी खुशबू और स्वाद की कल्पना की, फिर उसे खिड़की से बाहर फेंक दिया।
19नवाब साहब के इस व्यवहार को लेखक ने किस रूप में देखा?
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सही उत्तर:B. खीरे की सुगंध और स्वाद की कल्पना से संतुष्ट होने के रूप में
व्याख्या: लेखक ने व्यंग्यपूर्ण ढंग से समझा कि नवाब साहब खीरे की सुगंध और स्वाद की कल्पना मात्र से संतुष्ट हो रहे थे, जबकि उन्होंने वास्तव में खीरा खाया ही नहीं।
20“मियाँ रईस बनते हैं, लेकिन लोगों की नज़र से बच सकने के खयाल में अपनी असलियत पर उतर आए हैं।” इस कथन में लेखक किस पर व्यंग्य करता है?
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सही उत्तर:B. दिखावटी रईसी और बनावटी जीवन-शैली पर
व्याख्या: लेखक नवाब साहब के व्यवहार के माध्यम से उस सामंती मानसिकता और दिखावटी रईसी पर व्यंग्य करता है, जिसमें व्यक्ति वास्तविकता से दूर बनावटी जीवन जीता है।
21नवाब साहब ने खीरे को काटने के बाद उसकी फाँकों पर क्या डाला?
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सही उत्तर:B. जीरा-मिला नमक और लाल मिर्च
व्याख्या: नवाब साहब ने खीरे की फाँकों पर जीरा-मिला नमक और पिसी हुई लाल मिर्च की सूखी बुरक दी।
22नवाब साहब खीरे की फाँकों को किस प्रकार सजाकर रखते हैं?
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सही उत्तर:B. तौलिये पर करीने से
व्याख्या: खीरे की फाँकों को बहुत एहतियात से काटकर और सजाकर तौलिये पर रखा गया था। यह उनके नफासत और नजाकत भरे व्यवहार को दर्शाता है।
23नवाब साहब खीरे की फाँक को खाने से पहले क्या करते हैं?
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सही उत्तर:B. उसे सूँघते हैं।
व्याख्या: नवाब साहब खीरे की फाँक को होंठों तक ले जाकर उसकी खुशबू का रसास्वादन करते हैं और फिर उसे बाहर फेंक देते हैं।
24नवाब साहब के व्यवहार से उनके किस गुण का पता चलता है?
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सही उत्तर:B. नफासत और नजाकत
व्याख्या: खीरा खाने की पूरी प्रक्रिया में नवाब साहब का अत्यधिक नफासत और नजाकत भरा व्यवहार दिखाई देता है।
25“मियाँ रईस बनते हैं, लेकिन लोगों की नजरों से बच सकने के खयाल में अपनी असलियत पर उतर आए हैं।” इस कथन में ‘असलियत’ से क्या तात्पर्य है?
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सही उत्तर:A. वास्तविक आर्थिक स्थिति और साधारण जीवन
व्याख्या: लेखक के अनुसार नवाब साहब अपनी रईसी का दिखावा करते हुए भी वास्तव में साधारण स्थिति में यात्रा कर रहे हैं और लोगों की नजरों से बचना चाहते हैं।
26लेखक को नवाब साहब की कौन-सी बात देखकर आश्चर्य हुआ?
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सही उत्तर:B. वे खीरे को इतनी सावधानी से तैयार करके भी नहीं खाते थे।
व्याख्या: नवाब साहब ने खीरे को बड़ी मेहनत से काटा, नमक-मिर्च लगाया और उसकी खुशबू का आनंद लेकर उसे बाहर फेंक दिया। यही व्यवहार लेखक को विचित्र लगा।
27लेखक ने नवाब साहब के व्यवहार को किस प्रकार का माना?
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सही उत्तर:B. दिखावटी और बनावटी
व्याख्या: लेखक ने नवाब साहब के व्यवहार में वास्तविक भोजन से अधिक उसके स्वाद और खुशबू की कल्पना तथा रईसी का दिखावा देखा।
28नवाब साहब ने लेखक के सामने खीरा खाने का प्रस्ताव क्यों रखा?
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सही उत्तर:B. वे शिष्टाचार और अपने रईसी अंदाज़ का प्रदर्शन करना चाहते थे।
व्याख्या: नवाब साहब का व्यवहार उनके शिष्टाचार और रईसी के दिखावटी अंदाज़ को प्रकट करता है। उनका खीरा पेश करना भी इसी मानसिकता से जुड़ा दिखाई देता है।
29लेखक ने नवाब साहब के सामने खीरा खाने से इनकार करके क्या बनाए रखा?
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सही उत्तर:B. आत्मसम्मान
व्याख्या: लेखक खीरा खाने के लिए इच्छुक था, लेकिन आत्मसम्मान की वजह से उसने नवाब साहब का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया।
30लेखक को खीरे की फाँकों को देखकर क्या अनुभव हो रहा था?
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सही उत्तर:B. मुँह में पानी आ रहा था।
व्याख्या: ताजे खीरे पर नमक-मिर्च देखकर लेखक के मुँह में पानी आ रहा था, लेकिन उसने आत्मसम्मान के कारण खाने से इनकार कर दिया।
31नवाब साहब ने खीरे की फाँक को होंठों तक ले जाकर क्या किया?
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सही उत्तर:B. उसकी खुशबू और स्वाद का अनुभव किया।
व्याख्या: नवाब साहब ने खीरे की फाँक को होंठों तक ले जाकर उसकी खुशबू और स्वाद की कल्पना की और फिर उसे बाहर फेंक दिया।
32नवाब साहब ने खीरे की फाँक को खिड़की से बाहर क्यों फेंका?
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सही उत्तर:B. वे खाने के बजाय उसके स्वाद और खुशबू की कल्पना से संतुष्ट होते थे।
व्याख्या: पाठ में नवाब साहब के व्यवहार को इस तरह प्रस्तुत किया गया है कि वे खीरे के वास्तविक सेवन के बजाय उसकी खुशबू और स्वाद की कल्पना से संतुष्ट होते हैं।
33“खीरा लजीज होता है लेकिन होता है सख्त, नामुराद मेदे पर बोझ डाल देता है।” यह कथन किसका है?
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सही उत्तर:B. नवाब साहब का
व्याख्या: यह कथन नवाब साहब का है। वे खीरे के स्वादिष्ट होने के बावजूद उसे मेदे पर बोझ डालने वाला बताते हैं।
34नवाब साहब ने खीरे के संबंध में किस बात को स्वीकार किया?
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सही उत्तर:B. खीरा लजीज होता है, लेकिन मेदे पर बोझ डालता है।
व्याख्या: नवाब साहब के अनुसार खीरा स्वादिष्ट तो होता है, लेकिन वह मेदे पर बोझ डाल देता है।
35लेखक को कब यह समझ में आया कि नवाब साहब स्वयं भी कहानी के लेखक हैं?
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सही उत्तर:B. जब नवाब साहब ने खीरे के स्वाद की कल्पना से पेट भरने की बात कही।
व्याख्या: नवाब साहब के खीरे की सुगंध और स्वाद की कल्पना से संतुष्ट होकर डकार लेने पर लेखक को लगा कि यह भी एक ‘नई कहानी’ है।
36“ज्ञान-चक्षु खुल गए” से लेखक किस बात का संकेत करता है?
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सही उत्तर:B. उसे नवाब साहब के व्यवहार का रहस्य समझ में आ गया।
व्याख्या: नवाब साहब के व्यवहार को देखकर लेखक को अचानक समझ में आया कि इस घटना में भी एक नई कहानी की संभावना है।
37लेखक के अनुसार कहानी लिखने के लिए किन तत्वों की आवश्यकता होती है?
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सही उत्तर:B. विचार, घटना और पात्र
व्याख्या: पाठ के अंत में लेखक व्यंग्य करते हुए विचार करता है कि बिना विचार, घटना और पात्रों के केवल लेखक की इच्छा से ‘नई कहानी’ कैसे बन सकती है।
38‘लखनवी अंदाज़’ में लेखक ने किस वर्ग पर व्यंग्य किया है?
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सही उत्तर:B. पतनशील सामंती वर्ग
व्याख्या: पाठ के आरंभिक परिचय में स्पष्ट किया गया है कि यशपाल ने वास्तविकता से बेखबर बनावटी जीवन-शैली के आदी पतनशील सामंती वर्ग पर कटाक्ष किया है।
39‘लखनवी अंदाज़’ में व्यंग्य का प्रमुख आधार क्या है?
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सही उत्तर:B. बनावटी रईसी और दिखावे की संस्कृति
व्याख्या: पाठ में नवाब साहब के व्यवहार के माध्यम से ऐसी बनावटी रईसी पर व्यंग्य किया गया है जिसमें वास्तविक आवश्यकता से अधिक दिखावे और नफासत को महत्त्व दिया जाता है।
40‘लखनवी अंदाज़’ पाठ का सबसे उपयुक्त संदेश क्या है?
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सही उत्तर:A. दिखावे और बनावटी रईसी की मानसिकता पर व्यंग्य करना
व्याख्या: पाठ हास्य-व्यंग्य के माध्यम से ऐसी सामंती और दिखावटी मानसिकता पर चोट करता है जो वास्तविक जीवन की आवश्यकताओं से कटकर केवल आडंबर में विश्वास करती है।