क्या आप JAC Class 10 Hindi के “मनुष्यता” MCQ (Objective Questions) with Answers खोज रहे हैं? आप बिल्कुल सही जगह पर हैं! JAC Exam Prep पर आपको “मनुष्यता” पाठ के महत्वपूर्ण Multiple Choice Questions (MCQs) with Answers मिलेंगे। ये प्रश्न नवीनतम JCERT एवं NCERT पाठ्यक्रम के अनुसार तथा Jharkhand Academic Council (JAC) की परीक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।
“मनुष्यता” के ये MCQs पाठ की कहानी, पात्रों, घटनाओं, लेखक, विषय-वस्तु और महत्वपूर्ण तथ्यों पर आधारित हैं। इन प्रश्नों का अभ्यास करके विद्यार्थी इस पाठ का बेहतर Revision कर सकते हैं, अपनी तैयारी को मजबूत कर सकते हैं और JAC Class 10 Board Exam में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
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1‘मनुष्यता’ कविता के कवि कौन हैं?
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सही उत्तर:A. मैथिलीशरण गुप्त
व्याख्या: ‘मनुष्यता’ कविता के रचयिता मैथिलीशरण गुप्त हैं। कविता में कवि ने सच्ची मनुष्यता के गुणों और परोपकार की भावना को प्रमुखता दी है।
2मैथिलीशरण गुप्त का जन्म किस वर्ष हुआ था?
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सही उत्तर:B. 1886
व्याख्या: मैथिलीशरण गुप्त का जन्म सन् 1886 में झाँसी के करीब चिरगाँव में हुआ था।
3मैथिलीशरण गुप्त को किस रूप में प्रसिद्धि मिली?
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सही उत्तर:A. राष्ट्रकवि
व्याख्या: मैथिलीशरण गुप्त अपने जीवनकाल में ही राष्ट्रकवि के रूप में प्रसिद्ध हो गए थे।
4मैथिलीशरण गुप्त की शिक्षा-दीक्षा कहाँ हुई थी?
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सही उत्तर:C. घर पर
व्याख्या: पाठ-परिचय के अनुसार मैथिलीशरण गुप्त की शिक्षा-दीक्षा घर पर ही हुई थी।
5मैथिलीशरण गुप्त किन भाषाओं पर समान अधिकार रखते थे?
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सही उत्तर:B. संस्कृत, बंगला, मराठी और अंग्रेज़ी
व्याख्या: मैथिलीशरण गुप्त को संस्कृत, बंगला, मराठी और अंग्रेज़ी भाषाओं पर समान अधिकार था।
6मैथिलीशरण गुप्त की कविता की भाषा कैसी है?
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सही उत्तर:C. विशुद्ध खड़ी बोली
व्याख्या: पाठ-परिचय में उनकी कविता की भाषा को विशुद्ध खड़ी बोली बताया गया है। उनकी भाषा पर संस्कृत का प्रभाव भी है।
7मैथिलीशरण गुप्त की प्रमुख कृतियों में कौन-सी शामिल है?
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सही उत्तर:A. साकेत
व्याख्या: मैथिलीशरण गुप्त की प्रमुख कृतियों में ‘साकेत’, ‘यशोधरा’ और ‘जयद्रथ वध’ शामिल हैं।
8‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने मनुष्य के लिए किस भावना को सर्वोपरि माना है?
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सही उत्तर:B. परोपकार
व्याख्या: कविता का केंद्रीय विचार परोपकार और दूसरों के लिए जीने की भावना है। कवि के अनुसार वही सच्चा मनुष्य है जो दूसरों के लिए मरने को तैयार हो।
9कवि के अनुसार कैसी मृत्यु ‘सुमृत्यु’ कहलाती है?
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सही उत्तर:C. जिसके बाद व्यक्ति अपनी कीर्ति और अच्छे कर्मों से याद किया जाए
व्याख्या: कवि के अनुसार केवल मर जाना पर्याप्त नहीं है। मनुष्य को ऐसा जीवन जीना चाहिए कि मृत्यु के बाद भी लोग उसे याद करें; ऐसी मृत्यु सुमृत्यु कहलाती है।
10“विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी” में कवि मनुष्य को क्या संदेश देता है?
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सही उत्तर:B. मृत्यु से न डरकर सार्थक जीवन जीने का
व्याख्या: कवि मनुष्य को मृत्यु से भयभीत न होने और ऐसा जीवन जीने की प्रेरणा देता है जो दूसरों के लिए उपयोगी हो।
11“मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए” का मुख्य भाव क्या है?
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सही उत्तर:B. दूसरों के लिए जीने वाला व्यक्ति ही वास्तव में जीवित है।
व्याख्या: कवि के अनुसार केवल अपने स्वार्थ के लिए जीना पशु-प्रवृत्ति है। सच्चा मनुष्य वही है जो दूसरों के हित के लिए जीवन समर्पित करता है।
12“वही पशु-प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे” में ‘पशु-प्रवृत्ति’ किसे कहा गया है?
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सही उत्तर:B. केवल अपने स्वार्थ और हित की चिंता करना
व्याख्या: केवल अपने लिए जीना और अपने हित की चिंता करना पशु-प्रवृत्ति है। मनुष्य की पहचान दूसरों के लिए कुछ करने से होती है।
13कवि के अनुसार सच्चा मनुष्य कौन है?
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सही उत्तर:B. जो दूसरों के लिए मरे
व्याख्या: कविता की बार-बार आने वाली पंक्ति “वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे” सच्ची मनुष्यता की पहचान बताती है।
14“उसी उदार की कथा सरस्वती बखानती” में ‘उदार’ व्यक्ति की कौन-सी विशेषता बताई गई है?
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सही उत्तर:B. वह दूसरों के लिए अपना जीवन और साधन समर्पित करता है।
व्याख्या: कवि के अनुसार उदार व्यक्ति दूसरों के हित के लिए अपना जीवन और साधन समर्पित करता है। ऐसे व्यक्ति की कीर्ति युगों तक बनी रहती है।
15“उसी उदार से धरा कृतार्थ भाव मानती” का आशय क्या है?
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सही उत्तर:B. परोपकारी व्यक्ति के कारण पृथ्वी स्वयं को धन्य मानती है।
व्याख्या: जो व्यक्ति दूसरों के कल्याण के लिए कार्य करता है, उसके कारण धरती भी स्वयं को कृतार्थ मानती है।
16“उसी उदार की सदा सजीव कीर्ति कूजती” में ‘कीर्ति’ किसकी बनी रहती है?
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सही उत्तर:B. परोपकारी व्यक्ति की
व्याख्या: परोपकारी और उदार व्यक्ति की कीर्ति मृत्यु के बाद भी जीवित रहती है और लोग उसे लंबे समय तक याद करते हैं।
17कवि ने रंतिदेव का उदाहरण किस संदर्भ में दिया है?
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सही उत्तर:B. दान और परोपकार के लिए
व्याख्या: रंतिदेव को परम दानी राजा के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिन्होंने भूख से व्याकुल होने पर भी अपना भोजन दूसरों के लिए दे दिया।
18दधीचि ने परोपकार के लिए क्या दिया था?
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सही उत्तर:B. अपनी हड्डियाँ
व्याख्या: ऋषि दधीचि ने देवताओं के हित के लिए अपनी अस्थियाँ तक दान कर दी थीं। उनकी हड्डियों से इंद्र का वज्र बनाया गया था।
19कर्ण किस बात के लिए प्रसिद्ध थे?
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सही उत्तर:B. दान देने के लिए
व्याख्या: कर्ण दानवीर के रूप में प्रसिद्ध थे। कवि ने उनके द्वारा अपने शरीर का कवच-कुंडल तक दान करने का उदाहरण दिया है।
20उशीनर नरेश ने परोपकार के लिए क्या दान किया था?
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सही उत्तर:B. अपना मांस
व्याख्या: उशीनर नरेश ने प्राणी की रक्षा के लिए अपने शरीर का मांस तक दान कर दिया था। यह उनके त्याग और परोपकार की भावना का उदाहरण है।
21कविता में रंतिदेव, दधीचि, कर्ण और उशीनर के उदाहरण क्यों दिए गए हैं?
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सही उत्तर:B. मनुष्य को त्याग और परोपकार की प्रेरणा देने के लिए
व्याख्या: इन महान व्यक्तियों के उदाहरणों के माध्यम से कवि बताना चाहता है कि सच्ची मनुष्यता दूसरों के हित के लिए त्याग करने में है।
22“सहानुभूति चाहिए, महाविभूति है यही” में कवि ने किस गुण को महत्त्व दिया है?
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सही उत्तर:C. सहानुभूति
व्याख्या: कवि के अनुसार सहानुभूति मनुष्य का महान गुण है। दूसरों के दुख को समझना और उनके प्रति संवेदनशील होना ही सच्ची मनुष्यता है।
23“वश में सदा है बनी हुई स्वयं मही” का संबंध किससे है?
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सही उत्तर:A. उदार व्यक्ति से
व्याख्या: उदार और परोपकारी व्यक्ति के प्रति पृथ्वी भी कृतज्ञ रहती है। उसके अच्छे कार्यों के कारण उसकी कीर्ति लंबे समय तक बनी रहती है।
24बुद्ध के संबंध में कविता में किस गुण का उल्लेख किया गया है?
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सही उत्तर:B. दया और करुणा
व्याख्या: कविता में बुद्ध के दया-प्रवाह का उल्लेख है। उन्होंने करुणा और मानवता का संदेश देकर लोगों को प्रभावित किया।
25“विनीत लोकवर्ग क्या न सामने झुका रहा?” का आशय क्या है?
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सही उत्तर:A. लोग उदार और करुणामय व्यक्तित्व के सामने सम्मान से झुकते हैं।
व्याख्या: बुद्ध की करुणा और उदारता इतनी प्रभावशाली थी कि विनम्र लोग उनके सामने श्रद्धा से झुकते थे।
26कवि ने मनुष्य को किस बात से बचने की सलाह दी है?
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सही उत्तर:B. धन के अहंकार से
व्याख्या: कवि चेतावनी देता है कि मनुष्य को क्षणिक और तुच्छ धन-संपत्ति के मद में अंधा होकर अपने भीतर अहंकार नहीं आने देना चाहिए।
27“रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ वित्त में” में ‘मदांध’ का अर्थ क्या है?
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सही उत्तर:B. धन के अहंकार से अंधा
व्याख्या: ‘मदांध’ का अर्थ अहंकार के कारण विवेक खो देना है। कवि विशेष रूप से धन के अहंकार से बचने की प्रेरणा देता है।
28“सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में” में कवि क्या संदेश देता है?
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सही उत्तर:B. अपने सुख-साधनों के कारण अहंकार मत करो।
व्याख्या: मनुष्य को अपने साधनों और सुविधाओं के कारण गर्व नहीं करना चाहिए, क्योंकि संसार में कोई भी वास्तव में अनाथ नहीं है और सभी एक-दूसरे से जुड़े हैं।
29“अनाथ कौन है यहाँ?” पंक्ति में कवि का क्या आशय है?
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सही उत्तर:A. कोई भी व्यक्ति पूरी तरह अकेला नहीं है।
व्याख्या: कवि के अनुसार त्रिलोकनाथ सबके साथ हैं और दीनबंधु के विशाल हाथ सबकी सहायता के लिए हैं। इसलिए किसी को स्वयं को अनाथ नहीं समझना चाहिए।
30“अति भाग्यहीन है अधीर भाव जो करे” में कवि किस भाव से बचने को कहता है?
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सही उत्तर:B. अधीरता
व्याख्या: कवि मनुष्य को अधीर होकर निराश होने के बजाय ईश्वर और मानवता पर विश्वास रखने की प्रेरणा देता है।
31“अधीर भाव” का आशय क्या है?
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सही उत्तर:B. व्याकुलता और अस्थिरता
व्याख्या: ‘अधीर भाव’ का अर्थ मन की व्याकुलता और अस्थिरता है। कवि ऐसे भाव से बचने की प्रेरणा देता है।
32“अंतरिक्ष में अनंत देव हैं खड़े” में कवि किस भावना को व्यक्त करता है?
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सही उत्तर:B. ईश्वर की सर्वव्यापकता
व्याख्या: कवि के अनुसार अनंत देव चारों ओर विद्यमान हैं। यह पंक्ति ईश्वर की व्यापक उपस्थिति और मनुष्य के प्रति उसके संरक्षण की भावना व्यक्त करती है।
33“परस्परावलंब से उठो तथा बढ़ो सभी” में किस सिद्धांत पर बल दिया गया है?
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सही उत्तर:B. परस्पर सहयोग
व्याख्या: कवि सभी मनुष्यों को एक-दूसरे के सहयोग से आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। समाज की प्रगति परस्परावलंबन से होती है।
34“अभी अमर्त्य-अंक में आपक हो चढ़ो सभी” में ‘अमर्त्य-अंक’ का क्या अर्थ है?
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सही उत्तर:A. देवताओं की गोद
व्याख्या: ‘अमर्त्य-अंक’ का अर्थ देवताओं की गोद है। कवि मनुष्य को श्रेष्ठ कर्म करते हुए उच्च आध्यात्मिक अवस्था प्राप्त करने की प्रेरणा देता है।
35“मनुष्य मात्र बंधु है” का मूल भाव क्या है?
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सही उत्तर:B. सभी मनुष्य एक-दूसरे के बंधु हैं।
व्याख्या: कवि मनुष्य मात्र को एक-दूसरे का भाई और बंधु मानता है। यही भावना मानव-एकता और विश्वबंधुत्व का आधार है।
36“फलानुसार कर्म के अवश्य बाह्य भेद हैं” का आशय क्या है?
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सही उत्तर:B. कर्मों के परिणाम के कारण बाहरी भिन्नताएँ हो सकती हैं।
व्याख्या: कवि स्वीकार करता है कि कर्मों के अनुसार मनुष्यों की बाहरी परिस्थितियों में अंतर हो सकता है, लेकिन भीतर से सभी मनुष्य एक ही मानव परिवार के सदस्य हैं।
37“अंतरैक्य में प्रमाणभूत वेद हैं” में किस बात की पुष्टि होती है?
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सही उत्तर:A. मनुष्यों की आंतरिक एकता
व्याख्या: कवि वेदों के आधार पर मनुष्यों की आंतरिक एकता की बात करता है। बाहरी भेदों के बावजूद सभी में मूल मानवीय एकता विद्यमान है।
38“चलो अभीष्ट मार्ग में हर्ष खेलते हुए” में कवि किस प्रकार आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है?
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सही उत्तर:B. हर्ष और उत्साह के साथ
व्याख्या: कवि मनुष्य को अपने अभीष्ट मार्ग पर प्रसन्नता और उत्साह के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
39“विपत्ति, विघ्न जो पड़ें उन्हें ढकेलते हुए” का क्या अर्थ है?
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सही उत्तर:B. कठिनाइयों और बाधाओं का साहसपूर्वक सामना करना
व्याख्या: मनुष्य को जीवन की विपत्तियों और बाधाओं से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि साहसपूर्वक उनका सामना करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
40“घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी” में कवि किस सामाजिक आदर्श की बात करता है?
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सही उत्तर:A. सामाजिक एकता
व्याख्या: कवि चाहता है कि मनुष्यों के बीच मेल-जोल कभी कम न हो और आपसी भिन्नता तथा विभाजन की भावना न बढ़े।
41“अवर्त एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी” का मुख्य संदेश क्या है?
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सही उत्तर:B. सभी एक मार्ग पर मिलकर आगे बढ़ें।
व्याख्या: कवि मनुष्यों को एकता और सहयोग के साथ एक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। यही सामूहिक प्रगति का आधार है।
42‘मनुष्यता’ कविता का मुख्य संदेश क्या है?
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सही उत्तर:C. परोपकार, सहानुभूति, त्याग और मानव-एकता
व्याख्या: कविता मनुष्य को स्वार्थ से ऊपर उठकर परोपकार, सहानुभूति, त्याग, सहयोग और विश्वबंधुत्व की भावना अपनाने का संदेश देती है।