JAC Board Class 10 Hindi Objective Questions

तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र

क्या आप JAC Class 10 Hindi के “तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र” MCQ (Objective Questions) with Answers खोज रहे हैं? आप बिल्कुल सही जगह पर हैं! JAC Exam Prep पर आपको तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र पाठ के महत्वपूर्ण Multiple Choice Questions (MCQs) with Answers मिलेंगे। ये प्रश्न नवीनतम JCERT एवं NCERT पाठ्यक्रम के अनुसार तथा Jharkhand Academic Council (JAC) की परीक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।

तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र के ये MCQs पाठ की कहानी, पात्रों, घटनाओं, लेखक, विषय-वस्तु और महत्वपूर्ण तथ्यों पर आधारित हैं। इन प्रश्नों का अभ्यास करके विद्यार्थी इस पाठ का बेहतर Revision कर सकते हैं, अपनी तैयारी को मजबूत कर सकते हैं और JAC Class 10 Board Exam में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

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1‘तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेन्द्र’ पाठ के लेखक कौन हैं?
सही उत्तर:A. प्रहलाद अग्रवाल
व्याख्या: ‘तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेन्द्र’ के लेखक प्रहलाद अग्रवाल हैं। इस पाठ में उन्होंने गीतकार शैलेन्द्र के व्यक्तित्व, उनकी संवेदनशीलता तथा ‘तीसरी कसम’ फिल्म के निर्माण से जुड़े विभिन्न पक्षों का वर्णन किया है।
2शैलेन्द्र का जन्म कहाँ हुआ था?
सही उत्तर:B. जबलपुर
व्याख्या: पाठ के अनुसार शैलेन्द्र का जन्म मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में हुआ था। वे बचपन से ही हिंदी फिल्मों और फिल्मकारों के जीवन एवं अभिनय के बारे में जानने तथा चर्चा करने के शौकीन थे।
3शैलेन्द्र का जन्म किस वर्ष हुआ था?
सही उत्तर:C. 1947
व्याख्या: पाठ के आरंभ में शैलेन्द्र के जन्म का वर्ष 1947 दिया गया है। उन्होंने आगे चलकर हिंदी फिल्म जगत में गीतकार के रूप में महत्वपूर्ण स्थान बनाया।
4शैलेन्द्र की प्रमुख विशेषता क्या थी?
सही उत्तर:B. वे आदर्शवादी और भावुक कवि थे।
व्याख्या: लेखक ने शैलेन्द्र को आदर्शवादी और भावुक कवि बताया है। उनके लिए अपार संपत्ति और यश से अधिक आत्म-संतुष्टि का सुख महत्वपूर्ण था।
5‘तीसरी कसम’ फिल्म किस साहित्यिक रचना पर आधारित थी?
सही उत्तर:C. मारे गए गुलफाम
व्याख्या: ‘तीसरी कसम’ फिल्म फणीश्वरनाथ रेणु की प्रसिद्ध कहानी ‘मारे गए गुलफाम’ पर आधारित थी। शैलेन्द्र ने इस संवेदनशील साहित्यिक रचना को फिल्म के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
6‘तीसरी कसम’ का निर्माण किसने किया था?
सही उत्तर:B. शैलेन्द्र
व्याख्या: ‘तीसरी कसम’ फिल्म का निर्माण गीतकार शैलेन्द्र ने किया था। यह उनके लिए केवल व्यावसायिक परियोजना नहीं थी, बल्कि उनकी भावनाओं और साहित्यिक रुचि से जुड़ा हुआ प्रयास था।
7‘तीसरी कसम’ में राज कपूर ने किस पात्र की भूमिका निभाई?
सही उत्तर:B. हिरामन
व्याख्या: ‘तीसरी कसम’ में राज कपूर ने हिरामन की भूमिका निभाई। पाठ में लेखक बताते हैं कि राज कपूर ने इस भूमिका में स्वयं को इस तरह ढाल लिया कि वे हिरामन के चरित्र के साथ एकाकार हो गए।
8‘तीसरी कसम’ में वहीदा रहमान ने किस पात्र की भूमिका निभाई?
सही उत्तर:A. हीराबाई
व्याख्या: फिल्म में वहीदा रहमान ने नौटंकी की अभिनेत्री हीराबाई का पात्र निभाया। उनका अभिनय और राज कपूर के साथ उनका तालमेल फिल्म की प्रमुख विशेषताओं में शामिल था।
9‘तीसरी कसम’ को ‘सैलूलाइड पर लिखी कविता’ क्यों कहा गया है?
सही उत्तर:B. क्योंकि फिल्म में साहित्यिक संवेदना और काव्यात्मक सौंदर्य पूरी तरह उभरता है।
व्याख्या: ‘तीसरी कसम’ को सैलूलाइड पर लिखी कविता इसलिए कहा गया है क्योंकि इसमें साहित्यिक रचना की संवेदनशीलता, भावनात्मक गहराई और काव्यात्मक सौंदर्य को पूरी सार्थकता के साथ पर्दे पर उतारा गया है।
10‘तीसरी कसम’ के निर्माण में राज कपूर ने किस प्रकार सहयोग किया?
सही उत्तर:B. बिना पारिश्रमिक की अपेक्षा के पूरी तन्मयता से
व्याख्या: शैलेन्द्र के अनुसार राज कपूर ने ‘तीसरी कसम’ की कहानी सुनकर उत्साहपूर्वक काम स्वीकार किया। उन्होंने मित्रता के कारण अत्यंत तन्मयता से काम किया और पारिश्रमिक के रूप में केवल एक रुपये का मजाकिया उल्लेख किया।
11राज कपूर ने शैलेन्द्र से पारिश्रमिक के रूप में क्या कहा था?
सही उत्तर:C. एक रुपया
व्याख्या: जब शैलेन्द्र ने पारिश्रमिक के बारे में पूछा तो राज कपूर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उनका पारिश्रमिक एक रुपया है और पूरा एडवांस है। यह दोनों की गहरी मित्रता को दर्शाता है।
12‘तीसरी कसम’ के निर्माण में लगभग कितना समय लगा?
सही उत्तर:C. छह वर्ष
व्याख्या: राज कपूर ने 1965 में ‘मेरा नाम जोकर’ के साथ ‘तीसरी कसम’ का निर्माण शुरू किया था। पाठ के अनुसार इसके एक भाग को बनाने में ही लगभग छह वर्षों का समय लग गया।
13‘तीसरी कसम’ को कौन-कौन से पुरस्कार मिले?
सही उत्तर:B. राष्ट्रपति स्वर्णपदक और कई अन्य पुरस्कार
व्याख्या: ‘तीसरी कसम’ को राष्ट्रपति स्वर्णपदक मिला। इसके अतिरिक्त बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट एसोसिएशन द्वारा सर्वश्रेष्ठ फिल्म सहित कई अन्य पुरस्कारों से भी इसे सम्मानित किया गया और मॉस्को फिल्म फेस्टिवल में भी यह पुरस्कृत हुई।
14‘तीसरी कसम’ के गीतों की प्रमुख विशेषता क्या थी?
सही उत्तर:B. उनमें भाव-प्रवणता और जीवन की सच्ची संवेदना थी।
व्याख्या: शैलेन्द्र के गीत भाव-प्रवण थे और उनमें जीवन की वास्तविक संवेदनाएँ दिखाई देती थीं। उनके गीतों में करुणा के साथ संघर्ष और आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मौजूद थी।
15शैलेन्द्र के अनुसार कलाकार का क्या कर्तव्य है?
सही उत्तर:B. दर्शकों की रुचि को परिष्कृत करने का प्रयास करना।
व्याख्या: शैलेन्द्र का मानना था कि कलाकार को केवल उपभोक्ता की तत्काल रुचि के अनुसार हल्कापन नहीं थोपना चाहिए। कलाकार का कर्तव्य है कि वह दर्शकों की रुचियों को परिष्कृत करने का प्रयास करे।
16‘तीसरी कसम’ के निर्माण में शैलेन्द्र की कौन-सी भावना प्रमुख थी?
सही उत्तर:B. आत्म-संतुष्टि और साहित्य के प्रति संवेदनशीलता
व्याख्या: शैलेन्द्र के लिए ‘तीसरी कसम’ केवल व्यावसायिक फिल्म नहीं थी। वे साहित्यिक रचना के साथ न्याय करना चाहते थे और आत्म-संतुष्टि को धन और यश से अधिक महत्व देते थे।
17‘तीसरी कसम’ को दर्शकों के बीच तुरंत सफलता क्यों नहीं मिली?
सही उत्तर:B. फिल्म की संवेदना सामान्य व्यावसायिक समझ से परे थी।
व्याख्या: फिल्म में राज कपूर, वहीदा रहमान, शंकर-जयकिशन और लोकप्रिय गीत होने के बावजूद उसे तुरंत खरीदार नहीं मिले। लेखक के अनुसार इसकी गहरी संवेदना सामान्य व्यावसायिक गणित से परे थी।
18‘तीसरी कसम’ के माध्यम से शैलेन्द्र ने किस प्रकार के सिनेमा को प्रस्तुत किया?
सही उत्तर:B. साहित्यिक संवेदना और जीवन की सच्चाई से जुड़ा सार्थक सिनेमा
व्याख्या: शैलेन्द्र ने साहित्यिक रचना को उसकी संवेदना और जीवन-सापेक्षता के साथ पर्दे पर उतारने का प्रयास किया। इसलिए ‘तीसरी कसम’ सार्थक और संवेदनशील सिनेमा का उदाहरण बनती है।
19‘तीसरी कसम’ में राज कपूर का अभिनय किस पात्र के साथ एकाकार होने के रूप में प्रस्तुत किया गया है?
सही उत्तर:C. हिरामन
व्याख्या: लेखक के अनुसार राज कपूर ने ‘तीसरी कसम’ में हिरामन के चरित्र को केवल अभिनय के रूप में प्रस्तुत नहीं किया, बल्कि वे स्वयं हिरामन की आत्मा में उतर गए थे।
20शैलेन्द्र के गीतों में करुणा के साथ क्या भावना भी दिखाई देती है?
सही उत्तर:B. संघर्ष और आगे बढ़ने का संकेत
व्याख्या: शैलेन्द्र के गीत केवल करुणा से भरे हुए नहीं थे। उनमें जूझने का संकेत और आगे बढ़ने की प्रेरणा भी थी। लेखक के अनुसार उनकी व्यथा व्यक्ति को पराजित नहीं करती, बल्कि आगे बढ़ने का संदेश देती है।
21‘तीसरी कसम’ के शिल्पकार शैलेन्द्र पाठ में लेखक ने शैलेन्द्र को किस रूप में अधिक महत्वपूर्ण माना है?
सही उत्तर:C. संवेदनशील और आदर्शवादी कवि
व्याख्या: लेखक ने शैलेन्द्र को केवल फिल्मी गीतकार के रूप में नहीं देखा है। उनके व्यक्तित्व में आदर्शवाद, भावुकता, आत्म-संतुष्टि की चाह और जीवन की गहरी संवेदनशीलता प्रमुख थी।
22शैलेन्द्र को अपार संपत्ति और यश से अधिक किसकी अभिलाषा थी?
सही उत्तर:A. आत्म-संतुष्टि के सुख की
व्याख्या: शैलेन्द्र आदर्शवादी भावुक कवि थे। उनके लिए अपार संपत्ति और यश की अपेक्षा आत्म-संतुष्टि का सुख अधिक महत्वपूर्ण था। इसी कारण उन्होंने व्यावसायिक लाभ की चिंता किए बिना सार्थक रचना को महत्व दिया।
23राज कपूर ने शैलेन्द्र को फिल्म की असफलता के किस खतरे से आगाह किया था?
सही उत्तर:D. फिल्म के व्यावसायिक रूप से असफल होने से
व्याख्या: राज कपूर एक अच्छे और सच्चे मित्र की हैसियत से शैलेन्द्र को फिल्म की असफलता के संभावित खतरे से सावधान करते थे। उन्हें पता था कि शैलेन्द्र की संवेदनशील फिल्म सामान्य व्यावसायिक फिल्मों से अलग थी।
24शैलेन्द्र ने राज कपूर की चेतावनी के बावजूद ‘तीसरी कसम’ क्यों बनाई?
सही उत्तर:B. वे अपनी भावनाओं और साहित्यिक संवेदना को फिल्म के माध्यम से व्यक्त करना चाहते थे।
व्याख्या: शैलेन्द्र के लिए ‘तीसरी कसम’ केवल पैसा कमाने का माध्यम नहीं थी। वे फणीश्वरनाथ रेणु की संवेदनशील कहानी को पूरी ईमानदारी और कलात्मकता के साथ पर्दे पर उतारना चाहते थे।
25‘तीसरी कसम’ फिल्म के निर्माण के लिए शैलेन्द्र ने किस साहित्यकार की रचना चुनी?
सही उत्तर:B. फणीश्वरनाथ रेणु
व्याख्या: ‘तीसरी कसम’ फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी ‘मारे गए गुलफाम’ पर आधारित थी। शैलेन्द्र ने इस साहित्यिक रचना की संवेदनशीलता को फिल्म के माध्यम से जीवंत रूप देने का प्रयास किया।
26‘तीसरी कसम’ को साहित्यिक रचना के साथ न्याय करने वाली फिल्म क्यों माना गया है?
सही उत्तर:B. क्योंकि इसमें कहानी की संवेदना और बारीकियाँ प्रभावी ढंग से पर्दे पर उतरीं।
व्याख्या: फिल्म में मूल कहानी की छोटी-छोटी बारीकियों को भी प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया। इसी कारण लेखक मानते हैं कि फिल्म ने साहित्यिक रचना के साथ शत-प्रतिशत न्याय किया।
27शैलेन्द्र की दृष्टि में ‘तीसरी कसम’ कैसी फिल्म थी?
सही उत्तर:C. संवेदनशील और सार्थक
व्याख्या: ‘तीसरी कसम’ में लोकजीवन, मानवीय संवेदना, करुणा और जीवन की वास्तविकता को महत्व दिया गया है। इसलिए यह केवल मनोरंजन या व्यवसाय के लिए बनाई गई फिल्म नहीं थी।
28‘तीसरी कसम’ के निर्माण में राज कपूर ने शैलेन्द्र का सहयोग किस भावना से किया?
सही उत्तर:B. पुरानी मित्रता और आत्मीयता के कारण
व्याख्या: शैलेन्द्र और राज कपूर के बीच गहरी मित्रता थी। इसी आत्मीय संबंध के कारण राज कपूर ने फिल्म में पूरी तन्मयता से काम किया और आर्थिक लाभ को प्राथमिकता नहीं दी।
29शैलेन्द्र ने राज कपूर के बारे में क्या कहा था कि उन्होंने उनकी भावनाओं को शब्द दिए?
सही उत्तर:A. शैलेन्द्र ने राज कपूर की भावनाओं को गीतों के माध्यम से व्यक्त किया।
व्याख्या: शैलेन्द्र ने राज कपूर की भावनाओं को अपने गीतों के माध्यम से अभिव्यक्ति दी। दोनों की रचनात्मक साझेदारी ने उनकी फिल्मों को विशेष पहचान दिलाई।
30‘तीसरी कसम’ में राज कपूर के अभिनय की सबसे बड़ी विशेषता क्या बताई गई है?
सही उत्तर:B. उन्होंने हिरामन के चरित्र को पूरी तरह आत्मसात कर लिया।
व्याख्या: लेखक के अनुसार राज कपूर ने ‘तीसरी कसम’ में हिरामन का अभिनय मात्र नहीं किया, बल्कि वे हिरामन की आत्मा में उतर गए। उनका व्यक्तित्व पूरी तरह उस ग्रामीण पात्र में ढल गया।
31हिरामन किस प्रकार का व्यक्ति था?
सही उत्तर:C. सरल हृदय वाला ग्रामीण गाड़ीवान
व्याख्या: हिरामन एक सीधा-सादा ग्रामीण गाड़ीवान है जो केवल दिल की जुबान समझता है। उसके लिए मोहब्बत और आत्मीयता के अलावा किसी दूसरी चीज का विशेष अर्थ नहीं है।
32हीराबाई के प्रति हिरामन के व्यवहार से उसके व्यक्तित्व की कौन-सी विशेषता सामने आती है?
सही उत्तर:B. संवेदनशीलता और आत्मीयता
व्याख्या: हिरामन हीराबाई के प्रति अत्यंत आत्मीय और संवेदनशील व्यवहार करता है। उसके मन में हीराबाई के प्रति सम्मान और निष्कपट प्रेम जैसी भावनाएँ दिखाई देती हैं।
33‘तीसरी कसम’ के गीतों की लोकप्रियता के बावजूद फिल्म को खरीदार क्यों नहीं मिल रहे थे?
सही उत्तर:B. फिल्म की संवेदना सामान्य व्यावसायिक समझ से परे थी।
व्याख्या: फिल्म में राज कपूर, वहीदा रहमान और शंकर-जयकिशन जैसे प्रसिद्ध नाम होने के बावजूद उसकी संवेदना सामान्य व्यावसायिक गणित में आसानी से नहीं बैठती थी। इसी कारण उसे खरीदार मिलने में कठिनाई हुई।
34शैलेन्द्र की रचनात्मकता में लोकजीवन का क्या महत्व था?
सही उत्तर:C. लोकजीवन उनकी रचनाओं की महत्वपूर्ण विशेषता था।
व्याख्या: शैलेन्द्र के गीतों और ‘तीसरी कसम’ में लोकजीवन की सहजता, भाषा, भावनाएँ और वातावरण गहराई से उपस्थित हैं। यही उनकी रचनाओं को आम जीवन के निकट बनाता है।
35लेखक के अनुसार फिल्मों की सबसे बड़ी कमजोरी क्या होती है?
सही उत्तर:A. उनमें लोक-तत्त्व का अभाव
व्याख्या: लेखक के अनुसार फिल्मों की सबसे बड़ी कमजोरी लोक-तत्त्व का अभाव है। लोकजीवन से दूर होने पर फिल्में वास्तविक जीवन की संवेदनाओं से भी दूर हो जाती हैं।
36शैलेन्द्र के गीतों में किस प्रकार की करुणा दिखाई देती है?
सही उत्तर:C. संघर्ष और आगे बढ़ने का संदेश देने वाली करुणा
व्याख्या: शैलेन्द्र के गीतों में करुणा तो है, लेकिन वह व्यक्ति को पराजित नहीं करती। उनकी व्यथा में जूझने और अपनी मंजिल की ओर आगे बढ़ने का संकेत भी मौजूद रहता है।
37शैलेन्द्र ने ‘श्री 420’ के गीत में किस प्रकार की भाषा और भावनाओं का प्रयोग किया?
सही उत्तर:B. भारतीयता और विविध संस्कृतियों के मेल का भाव
व्याख्या: ‘मेरा जूता है जापानी, ये पतलून इंग्लिस्तान की…’ जैसे गीत में अलग-अलग देशों की वस्तुओं के बीच भारतीय हृदय की भावना व्यक्त होती है। यह शैलेन्द्र की सहज और व्यापक मानवीय दृष्टि को दिखाता है।
38‘तीसरी कसम’ को बनाने में शैलेन्द्र को किस प्रकार की कठिनाई का सामना करना पड़ा?
सही उत्तर:C. फिल्म के निर्माण में लंबा समय लगा और आर्थिक कठिनाइयाँ भी आईं।
व्याख्या: शैलेन्द्र ने पूरी ईमानदारी से फिल्म बनाने का प्रयास किया, लेकिन निर्माण में लंबा समय लगा और फिल्म की संवेदनशीलता के कारण उसे व्यावसायिक सफलता दिलाना कठिन रहा। इससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
39लेखक के अनुसार शैलेन्द्र की सबसे बड़ी विशेषता क्या थी?
सही उत्तर:B. वे फिल्म उद्योग में रहते हुए भी अपनी मानवीय संवेदनशीलता नहीं खोते थे।
व्याख्या: शैलेन्द्र लंबे समय तक फिल्म उद्योग से जुड़े रहे, फिर भी उन्होंने अपनी आदमियत और संवेदनशीलता नहीं खोई। उनकी रचनाओं में उनके निजी जीवन के आदर्श और भावनाएँ भी दिखाई देती हैं।
40‘तीसरी कसम’ के माध्यम से शैलेन्द्र ने हिंदी सिनेमा को क्या दिखाया?
सही उत्तर:B. साहित्यिक रचना को सार्थक और संवेदनशील तरीके से फिल्म में रूपांतरित किया जा सकता है।
व्याख्या: ‘तीसरी कसम’ यह प्रमाणित करती है कि किसी साहित्यिक रचना को उसकी मूल संवेदना, जीवन-सापेक्षता और कलात्मकता के साथ सिनेमा के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है।

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