क्या आप JAC Class 10 Hindi के “पतझर में टूटी पत्तियाँ” MCQ (Objective Questions) with Answers खोज रहे हैं? आप बिल्कुल सही जगह पर हैं! JAC Exam Prep पर आपको “पतझर में टूटी पत्तियाँ” पाठ के महत्वपूर्ण Multiple Choice Questions (MCQs) with Answers मिलेंगे। ये प्रश्न नवीनतम JCERT एवं NCERT पाठ्यक्रम के अनुसार तथा Jharkhand Academic Council (JAC) की परीक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।
“पतझर में टूटी पत्तियाँ” के ये MCQs पाठ की कहानी, पात्रों, घटनाओं, लेखक, विषय-वस्तु और महत्वपूर्ण तथ्यों पर आधारित हैं। इन प्रश्नों का अभ्यास करके विद्यार्थी इस पाठ का बेहतर Revision कर सकते हैं, अपनी तैयारी को मजबूत कर सकते हैं और JAC Class 10 Board Exam में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
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1‘पतझर में टूटी पत्तियाँ’ पाठ के लेखक कौन हैं?
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सही उत्तर:B. रविंद्र केलेकर
व्याख्या: ‘पतझर में टूटी पत्तियाँ’ के लेखक रविंद्र केलेकर हैं। वे कोंकणी और मराठी के शीर्षस्थ लेखक और पत्रकार थे। उनके लेखन में जन-जीवन, मान्यताओं और व्यक्तिगत विचारों को देश और समाज के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है।
2रविंद्र केलेकर का जन्म कब हुआ था?
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सही उत्तर:A. 7 मार्च 1925
व्याख्या: रविंद्र केलेकर का जन्म 7 मार्च 1925 को कोंकण क्षेत्र में हुआ था। छात्र जीवन से ही वे गोवा मुक्ति आंदोलन में शामिल हो गए थे।
3रविंद्र केलेकर छात्र जीवन से ही किस आंदोलन में शामिल हो गए थे?
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सही उत्तर:C. गोवा मुक्ति आंदोलन
व्याख्या: रविंद्र केलेकर छात्र जीवन से ही गोवा मुक्ति आंदोलन में शामिल हो गए थे। उनके जीवन और लेखन में स्वतंत्रता तथा सामाजिक चेतना की भावना प्रमुख रही।
4रविंद्र केलेकर किस रूप में प्रसिद्ध थे?
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सही उत्तर:B. गांधीवादी चिंतक
व्याख्या: रविंद्र केलेकर गांधीवादी चिंतक के रूप में प्रसिद्ध थे। उनके लेखन में मानवीय मूल्यों, सामाजिक सरोकारों और जीवन के अनुभवों की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।
5रविंद्र केलेकर की प्रमुख हिंदी कृति कौन-सी है?
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सही उत्तर:C. पतझर में टूटी पत्तियाँ
व्याख्या: रविंद्र केलेकर की प्रमुख कृतियों में हिंदी में ‘पतझर में टूटी पत्तियाँ’ शामिल है। इसी रचना के दो प्रसंग ‘गिन्नी का सोना’ और ‘झेन की देन’ पाठ में दिए गए हैं।
6‘पतझर में टूटी पत्तियाँ’ पाठ में कितने प्रमुख प्रसंग हैं?
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सही उत्तर:C. दो
व्याख्या: पाठ दो प्रमुख प्रसंगों में विभाजित है—‘गिन्नी का सोना’ और ‘झेन की देन’। दोनों प्रसंग अलग-अलग विषयों के माध्यम से जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों पर विचार प्रस्तुत करते हैं।
7‘गिन्नी का सोना’ में शुद्ध सोने में किस धातु की थोड़ी मात्रा मिलाई जाती है?
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सही उत्तर:A. ताँबा
व्याख्या: गिन्नी के सोने में थोड़ा-सा ताँबा मिलाया जाता है। इससे वह अधिक चमकदार और मजबूत हो जाता है तथा उससे आभूषण बनाए जाते हैं।
8गिन्नी का सोना शुद्ध सोने की तुलना में कैसा होता है?
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सही उत्तर:B. अधिक चमकदार और मजबूत
व्याख्या: पाठ के अनुसार गिन्नी के सोने में ताँबा मिला होने के कारण वह शुद्ध सोने से अधिक चमकता है और मजबूत भी होता है। यही उदाहरण आगे आदर्श और व्यवहारिकता को समझाने के लिए दिया गया है।
9‘प्रैक्टिकल आइडियलिस्ट’ किसे कहा गया है?
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सही उत्तर:B. जो आदर्शों में व्यवहारिकता का थोड़ा-सा ताँबा मिला देता है
व्याख्या: पाठ में उन लोगों को ‘प्रैक्टिकल आइडियलिस्ट’ कहा गया है जो शुद्ध आदर्शों में व्यवहारिकता का थोड़ा-सा मिश्रण कर देते हैं और फिर उन्हें व्यवहार में चलाकर दिखाते हैं।
10व्यवहारिकता का अधिक बखान होने पर ‘प्रैक्टिकल आइडियलिस्टों’ के जीवन में क्या होने लगता है?
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सही उत्तर:C. आदर्श धीरे-धीरे पीछे हटने लगते हैं
व्याख्या: लेखक के अनुसार जब व्यवहारिकता का अधिक बखान होने लगता है तो ‘प्रैक्टिकल आइडियलिस्टों’ के जीवन से आदर्श धीरे-धीरे पीछे हटने लगते हैं और उनकी व्यावहारिक सूझ-बूझ आगे आने लगती है।
11पाठ में कुछ लोगों ने गांधीजी को किस नाम से संबोधित किया है?
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सही उत्तर:C. प्रैक्टिकल आइडियलिस्ट
व्याख्या: पाठ में कुछ लोग गांधीजी को ‘प्रैक्टिकल आइडियलिस्ट’ कहते हैं क्योंकि वे व्यवहारिकता को पहचानते थे और उसकी कीमत भी जानते थे। लेकिन लेखक गांधीजी की कार्य-पद्धति को इससे अलग ढंग से स्पष्ट करता है।
12लेखक के अनुसार गांधीजी व्यवहारिकता के साथ क्या करते थे?
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सही उत्तर:A. उसे आदर्शों के स्तर पर चढ़ाते थे
व्याख्या: लेखक के अनुसार गांधीजी आदर्शों को व्यवहारिकता के स्तर पर नहीं उतारते थे, बल्कि व्यवहारिकता को आदर्शों के स्तर पर चढ़ाते थे। वे ताँबे में सोना मिलाकर उसकी कीमत बढ़ाने जैसे काम करते थे।
13‘गिन्नी का सोना’ में शुद्ध आदर्श की तुलना किससे की गई है?
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सही उत्तर:C. शुद्ध सोने से
व्याख्या: पाठ में शुद्ध आदर्शों की तुलना शुद्ध सोने से की गई है। जिस प्रकार शुद्ध सोने में मिलावट करके उसकी प्रकृति बदली जा सकती है, उसी प्रकार आदर्शों में व्यवहारिकता का मिश्रण करने पर उनके स्वरूप में परिवर्तन आ सकता है।
14व्यवहारवादी लोग सामान्यतः किसका हिसाब लगाकर कदम उठाते हैं?
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सही उत्तर:B. लाभ-हानि का
व्याख्या: पाठ में कहा गया है कि व्यवहारवादी लोग हमेशा सजग रहते हैं और लाभ-हानि का हिसाब लगाकर ही कदम उठाते हैं। उनका ध्यान व्यावहारिक सफलता और आगे बढ़ने पर रहता है।
15लेखक के अनुसार समाज के पास शाश्वत मूल्यों जैसा कुछ है तो वह किसकी देन है?
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सही उत्तर:B. आदर्शवादी लोगों की
व्याख्या: लेखक मानता है कि समाज के पास यदि शाश्वत मूल्यों जैसा कुछ है तो वह आदर्शवादी लोगों की ही देन है। उन्होंने अपने आदर्शों के माध्यम से समाज को ऊँचे मूल्यों की दिशा दी है।
16‘झेन की देन’ प्रसंग किस देश के अनुभव पर आधारित है?
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सही उत्तर:C. जापान
व्याख्या: ‘झेन की देन’ प्रसंग लेखक के जापान प्रवास के अनुभव पर आधारित है। इसमें जापानी जीवन-शैली, चाय पीने की विधि और वर्तमान क्षण में जीने की भावना को प्रस्तुत किया गया है।
17लेखक के जापानी मित्र के अनुसार जापान में किस प्रकार की बीमारियाँ अधिक हैं?
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सही उत्तर:B. मानसिक
व्याख्या: लेखक के जापानी मित्र के अनुसार जापान में मानसिक रोगों से पीड़ित लोगों की संख्या बहुत अधिक है। इसका प्रमुख कारण जीवन की तेज रफ्तार और लगातार बढ़ता मानसिक तनाव बताया गया है।
18जापान के लोगों के जीवन की रफ्तार के बारे में लेखक के मित्र ने क्या कहा?
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सही उत्तर:B. वहाँ कोई चलता नहीं, बल्कि दौड़ता है।
व्याख्या: लेखक के मित्र के अनुसार जापान में जीवन की रफ्तार बहुत तेज हो गई है। वहाँ कोई चलता नहीं, बल्कि दौड़ता है और कोई सामान्य रूप से बोलता नहीं, बल्कि लगातार बोलता रहता है।
19जापानी लोग अमेरिका से प्रतिस्पर्धा करते हुए किस प्रकार काम करने लगे थे?
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सही उत्तर:B. एक महीने का काम एक दिन में
व्याख्या: लेखक के मित्र के अनुसार जापानी लोग अमेरिका से प्रतिस्पर्धा करने लगे थे और एक महीने में पूरा होने वाला काम एक दिन में पूरा करने की कोशिश करने लगे थे। इससे जीवन में तनाव और मानसिक दबाव बढ़ता गया।
20जापानी भाषा में चाय पीने की विशेष विधि को क्या कहा जाता है?
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सही उत्तर:A. चा-नो-यू
व्याख्या: जापान में चाय पीने की विशेष विधि को ‘चा-नो-यू’ कहा जाता है। यह केवल चाय पीने की सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक विशेष आयोजन और शांतिपूर्ण अनुभव है।
21जापान में चाय पिलाने के स्थान की प्रमुख विशेषता क्या थी?
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सही उत्तर:C. वहाँ का वातावरण अत्यंत शांत था।
व्याख्या: चाय पिलाने का स्थान बहुत शांत और गरिमापूर्ण था। वहाँ की प्रत्येक क्रिया इतनी गंभीरता और शांति से की जाती थी कि चायदानी के पानी का खदबदाना भी सुनाई देता था।
22चाय पिलाने के स्थान की छत पर कैसी दीवारें थीं?
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सही उत्तर:B. लकड़ी की खोखली सरकने वाली दीवारें
व्याख्या: चाय पिलाने वाले स्थान की छह मंजिली इमारत की छत पर नक्काशीदार और तातामी की जमीन वाली सुंदर पर्णकुटी थी। उसकी दीवारें लकड़ी की खोखली सरकने वाली थीं जिन पर चित्रकारी की गई थी।
23चाय पिलाने के स्थान के बाहर किस प्रकार का पात्र रखा था?
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सही उत्तर:B. मिट्टी का बेडौल-सा पात्र
व्याख्या: पर्णकुटी के बाहर बेडौल-सा मिट्टी का एक पात्र रखा था। उसमें पानी भरा हुआ था और उसी पानी से लेखक तथा उसके मित्रों ने हाथ-पाँव धोए थे।
24चाय पिलाने वाला व्यक्ति कौन-सा संबोधन करता हुआ अंदर आया?
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सही उत्तर:B. आइए, तशरीफ़ लाइए
व्याख्या: चाय पिलाने वाला व्यक्ति कमरे में आया, कमर झुकाकर उसने अतिथियों को प्रणाम किया और ‘आइए, तशरीफ़ लाइए’ कहकर उनका स्वागत किया।
25चाय पिलाने वाले व्यक्ति ने अतिथियों के लिए सबसे पहले क्या किया?
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सही उत्तर:B. अँगीठी सुलगाई
व्याख्या: चाय की विधि के अनुसार चाय पिलाने वाले व्यक्ति ने अँगीठी सुलगाई और उस पर चायदानी रखी। उसकी प्रत्येक क्रिया बहुत गरिमापूर्ण ढंग से की गई।
26चाय पिलाने वाले व्यक्ति की हर क्रिया लेखक को कैसी लग रही थी?
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सही उत्तर:C. गरिमापूर्ण
व्याख्या: लेखक को चाय पिलाने वाले की प्रत्येक क्रिया इतनी गरिमापूर्ण लग रही थी कि ऐसा प्रतीत होता था मानो उसकी हर भंगिमा से जयजयवंती के सुर गूँज रहे हों।
27चाय पिलाने वाले व्यक्ति की गतिविधियों से किस राग के सुरों का आभास हो रहा था?
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सही उत्तर:B. जयजयवंती
व्याख्या: लेखक ने चाय पिलाने वाले की हर भंगिमा को इतनी गरिमापूर्ण महसूस किया कि उसे लगा मानो उससे जयजयवंती के सुर गूँज रहे हों।
28चाय पिलाने के स्थान का वातावरण कैसा था?
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सही उत्तर:A. अत्यंत शांत
व्याख्या: चाय-पान की पूरी प्रक्रिया अत्यंत शांत वातावरण में हुई। लेखक को वहाँ तक चायदानी के पानी का खदबदाना भी स्पष्ट सुनाई दे रहा था।
29चाय तैयार होने के बाद उसे किसमें भरा गया?
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सही उत्तर:C. प्यालों में
व्याख्या: चाय तैयार होने के बाद उसे प्यालों में भरा गया और फिर वे प्याले अतिथियों के सामने रख दिए गए। इस प्रक्रिया में भी पूरी गरिमा और शांति बनाए रखी गई।
30टी-सेरेमनी में कितने मित्र उपस्थित थे?
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सही उत्तर:B. तीन
व्याख्या: लेखक और उसके साथ दो अन्य व्यक्ति थे। इस प्रकार उस समय कुल तीन मित्र चाय-पान की इस विशेष विधि में उपस्थित थे।
31टी-सेरेमनी में तीन से अधिक लोगों को प्रवेश क्यों नहीं दिया जाता?
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सही उत्तर:C. शांति मुख्य बात होती है।
व्याख्या: जापानी चाय-पद्धति में शांति को मुख्य महत्व दिया जाता है। इसी कारण इस विधि में तीन से अधिक आदमियों को प्रवेश नहीं दिया जाता।
32टी-सेरेमनी में प्याले में कितनी चाय होती थी?
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सही उत्तर:C. दो घूँट से अधिक नहीं
व्याख्या: चाय के प्याले में दो घूँट से अधिक चाय नहीं होती थी। लेखक और उसके साथी होंठों से प्याला लगाकर एक-एक बूँद चाय पीते रहे।
33लेखक और उसके साथी लगभग कितनी देर तक चुस्कियाँ लेते रहे?
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सही उत्तर:C. डेढ़ घंटे
व्याख्या: लेखक के अनुसार लगभग डेढ़ घंटे तक चुस्कियों का सिलसिला चलता रहा। इस दौरान धीरे-धीरे उसके मन और मस्तिष्क की गति शांत होने लगी।
34चाय पीने के शुरुआती दस-पंद्रह मिनट में लेखक की मनःस्थिति कैसी थी?
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सही उत्तर:B. वह उलझन में पड़ा हुआ था।
व्याख्या: शुरुआत के दस-पंद्रह मिनट तक लेखक उलझन में पड़ा रहा। इसके बाद धीरे-धीरे उसके दिमाग की रफ्तार धीमी पड़ने लगी और वह शांत अनुभव करने लगा।
35चाय पीते-पीते लेखक के दिमाग की रफ्तार पर क्या प्रभाव पड़ा?
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सही उत्तर:C. धीरे-धीरे धीमी पड़ गई।
व्याख्या: चाय की शांत प्रक्रिया का लेखक पर गहरा प्रभाव पड़ा। कुछ समय बाद उसके दिमाग की रफ्तार धीरे-धीरे धीमी पड़ती गई और थोड़ी देर में बिल्कुल बंद जैसी हो गई।
36चाय पीने के बाद लेखक को कैसा अनुभव हुआ?
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सही उत्तर:A. मानो अनंतकाल में जी रहा हो।
व्याख्या: चाय पीते-पीते लेखक के मन से अतीत और भविष्य दोनों हट गए। उसे ऐसा लगा मानो वह अनंतकाल में जी रहा हो और सन्नाटा भी उसे सुनाई देने लगा।
37लेखक के अनुसार मनुष्य सामान्यतः किन दो कालों में उलझा रहता है?
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सही उत्तर:C. भूतकाल और भविष्यकाल
व्याख्या: लेखक कहता है कि मनुष्य या तो बीते हुए दिनों की खट्टी-मीठी यादों में उलझा रहता है या भविष्य के रंगीन सपने देखता रहता है। इस प्रकार वह भूतकाल या भविष्यकाल में जीता है।
38लेखक के अनुसार वास्तव में सत्य क्या है?
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सही उत्तर:C. वर्तमान क्षण
व्याख्या: लेखक के अनुसार बीता हुआ समय वापस नहीं आता और भविष्य अभी आया नहीं है। हमारे सामने जो वर्तमान क्षण है, वही सत्य है और उसी में जीना चाहिए।
39‘झेन की देन’ के अनुसार जीवन जीने का सही तरीका क्या है?
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सही उत्तर:C. वर्तमान क्षण में जीना
व्याख्या: पाठ का मुख्य संदेश है कि मनुष्य को वर्तमान क्षण में जीना चाहिए। अतीत बीत चुका है और भविष्य अभी आया नहीं है, इसलिए वर्तमान ही वास्तविक और सार्थक है।
40‘झेन की देन’ से जापानियों को क्या सीख मिली है?
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सही उत्तर:B. वर्तमान क्षण में शांतिपूर्वक जीने की
व्याख्या: लेखक के अनुसार झेन परंपरा जापानियों को वर्तमान क्षण में जीने और व्यस्त जीवन के बीच कुछ शांतिपूर्ण पल प्राप्त करने की सीख देती है। यही इस प्रसंग की मुख्य देन है।