क्या आप JAC Class 10 Hindi के “साखी” MCQ (Objective Questions) with Answers खोज रहे हैं? आप बिल्कुल सही जगह पर हैं! JAC Exam Prep पर आपको “साखी” पाठ के महत्वपूर्ण Multiple Choice Questions (MCQs) with Answers मिलेंगे। ये प्रश्न नवीनतम JCERT एवं NCERT पाठ्यक्रम के अनुसार तथा Jharkhand Academic Council (JAC) की परीक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।
“साखी” के ये MCQs पाठ की कहानी, पात्रों, घटनाओं, लेखक, विषय-वस्तु और महत्वपूर्ण तथ्यों पर आधारित हैं। इन प्रश्नों का अभ्यास करके विद्यार्थी इस पाठ का बेहतर Revision कर सकते हैं, अपनी तैयारी को मजबूत कर सकते हैं और JAC Class 10 Board Exam में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
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1‘साखी’ पाठ के रचयिता कौन हैं?
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सही उत्तर:A. कबीर
व्याख्या: ‘साखी’ पाठ में संत कबीर की साखियों को संकलित किया गया है।
2कबीर का जन्म किस वर्ष में हुआ माना जाता है?
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सही उत्तर:A. 1398
व्याख्या: पाठ-परिचय के अनुसार कबीर का जन्म सन् 1398 में काशी में हुआ माना जाता है।
3कबीर के गुरु कौन माने जाते हैं?
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सही उत्तर:B. रामानंद
व्याख्या: पाठ के अनुसार कबीर गुरु रामानंद के शिष्य थे।
4कबीर ने अपने जीवन के अंतिम कुछ वर्ष कहाँ बिताए?
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सही उत्तर:B. मगहर
व्याख्या: कबीर ने जीवन के अंतिम कुछ वर्ष मगहर में बिताए और वहीं चिरनिद्रा में लीन हो गए।
5कबीर की कविता में किस प्रकार की सामाजिक चेतना दिखाई देती है?
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सही उत्तर:B. गहरी सामाजिक चेतना
व्याख्या: कबीर की कविता में गहरी सामाजिक चेतना दिखाई देती है। उन्होंने धार्मिक आडंबरों और सामाजिक रूढ़ियों पर तीखा प्रहार किया।
6कबीर शास्त्रीय ज्ञान की अपेक्षा किसे अधिक महत्त्व देते थे?
✓
सही उत्तर:B. अनुभव ज्ञान को
व्याख्या: कबीर शास्त्रीय ज्ञान की अपेक्षा अनुभव ज्ञान को अधिक महत्त्व देते थे। उनका मानना था कि वास्तविक ज्ञान प्रत्यक्ष अनुभव से प्राप्त होता है।
7कबीर के अनुसार ईश्वर कैसा है?
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सही उत्तर:B. एक, निर्विकार और अरूप
व्याख्या: कबीर का विश्वास था कि ईश्वर एक है, निर्विकार है और अरूप है।
8कबीर की भाषा को किस नाम से जाना जाता है?
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सही उत्तर:B. सधुक्कड़ी
व्याख्या: कबीर की भाषा में विभिन्न जनपदीय भाषाओं के शब्दों का प्रभाव है। इसी कारण उनकी भाषा को सधुक्कड़ी भी कहा जाता है।
9कबीर की भाषा को ‘पंचमेल खिचड़ी’ क्यों कहा जाता है?
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सही उत्तर:B. उसमें अनेक क्षेत्रीय भाषाओं के शब्दों का मिश्रण है।
व्याख्या: कबीर की भाषा में अवधी, राजस्थानी, भोजपुरी और पंजाबी आदि भाषाओं के शब्दों का प्रभाव दिखाई देता है। इसलिए इसे ‘पंचमेल खिचड़ी’ कहा जाता है।
10‘साखी’ शब्द किस शब्द का तद्भव रूप है?
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सही उत्तर:A. साक्षी
व्याख्या: ‘साखी’ शब्द ‘साक्षी’ का तद्भव रूप है। इसका अर्थ प्रत्यक्ष ज्ञान या प्रमाण से संबंधित है।
11साखी मुख्यतः किस छंद में रची गई है?
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सही उत्तर:B. दोहा
व्याख्या: पाठ के अनुसार साखी वस्तुतः दोहा छंद है, जिसमें 13 और 11 के विश्राम से कुल 24 मात्राएँ होती हैं।
12“ऐसी बाँणी बोलिए, मन का आपा खोइ” में कबीर किस बात की शिक्षा देते हैं?
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सही उत्तर:B. मधुर और विनम्र वाणी बोलने की
व्याख्या: कबीर ऐसी वाणी बोलने की प्रेरणा देते हैं जिससे अहंकार समाप्त हो और दूसरों को सुख तथा अपने तन को शीतलता प्राप्त हो।
13“मन का आपा” से क्या तात्पर्य है?
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सही उत्तर:B. अहंकार
व्याख्या: ‘आपा’ का अर्थ अहंकार है। कबीर मन से अहंकार को दूर करने की शिक्षा देते हैं।
14“औरन को सुख होइ” के अनुसार मधुर वाणी का क्या प्रभाव पड़ता है?
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सही उत्तर:B. दूसरों को सुख मिलता है।
व्याख्या: कबीर के अनुसार मधुर और कल्याणकारी वाणी बोलने से दूसरों को सुख मिलता है और बोलने वाले को भी शीतलता प्राप्त होती है।
15“कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढै बन माँहि” में किस बात का संकेत है?
✓
सही उत्तर:B. मनुष्य द्वारा अपने भीतर स्थित ईश्वर को बाहर खोजना
व्याख्या: जैसे कस्तूरी मृग की नाभि में होती है लेकिन वह उसे वन में खोजता है, वैसे ही मनुष्य अपने भीतर स्थित ईश्वर को बाहर खोजता रहता है।
16“ऐसैं घटि घटि राम हैं, दुनिया देखै नाँहि” में ‘घटि घटि’ का अर्थ क्या है?
✓
सही उत्तर:B. प्रत्येक प्राणी के भीतर
व्याख्या: ‘घटि घटि’ का अर्थ प्रत्येक शरीर या प्रत्येक प्राणी के भीतर है। कबीर के अनुसार राम कण-कण में व्याप्त हैं।
17“जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि” में ‘मैं’ किसका प्रतीक है?
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सही उत्तर:B. अहंकार
व्याख्या: यहाँ ‘मैं’ अहंकार का प्रतीक है। जब तक अहंकार था, तब तक ईश्वर की अनुभूति नहीं हुई; अहंकार मिटने पर ईश्वर की अनुभूति हुई।
18“सब अँधियारा मिटि गया, जब दीपक देख्या माँहि” में ‘दीपक’ किसका प्रतीक है?
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सही उत्तर:B. ज्ञान और आत्मबोध
व्याख्या: ‘दीपक’ ज्ञान और आत्मबोध का प्रतीक है। ज्ञान का प्रकाश प्राप्त होते ही अज्ञान का अँधकार दूर हो जाता है।
19“सुखिया सब संसार है, खायै अरु सोवै” में संसार के लोगों को सुखी क्यों कहा गया है?
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सही उत्तर:B. वे सांसारिक सुखों में लीन होकर खाते-पीते और सोते हैं।
व्याख्या: कबीर के अनुसार संसार के लोग सांसारिक सुखों में डूबे हुए हैं और खाते-पीते तथा सोते रहते हैं, इसलिए उन्हें सुखी दिखाई देते हैं।
20“दुखिया दास कबीर है, जागै अरु रोवै” में कबीर स्वयं को दुखी क्यों कहते हैं?
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सही उत्तर:B. वे संसार की अज्ञानता को देखकर जागते और दुखी होते हैं।
व्याख्या: कबीर संसार के लोगों की अज्ञानता और सांसारिक मोह को देखकर स्वयं को जागा हुआ और दुखी अनुभव करते हैं।
21“बिरह भुवंगम तन बसै” में ‘भुवंगम’ किसका प्रतीक है?
✓
सही उत्तर:B. साँप
व्याख्या: ‘भुवंगम’ का अर्थ साँप है। यहाँ विरह की पीड़ा की तुलना विषैले साँप से की गई है।
22“राम बियोगी न जीवै” का आशय क्या है?
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सही उत्तर:A. राम से बिछुड़ा भक्त जीवित नहीं रह सकता।
व्याख्या: कबीर के अनुसार राम के विरह में रहने वाला भक्त अत्यंत व्याकुल रहता है और उसके लिए यह विरह असहनीय होता है।
23“निंदक नेड़ा राखिए” में कबीर निंदक को पास रखने की बात क्यों करते हैं?
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सही उत्तर:B. निंदक हमारी कमियाँ बताकर स्वभाव को निर्मल करने में सहायता करता है।
व्याख्या: कबीर के अनुसार निंदक हमारी कमियाँ बताता है। इसलिए उसे पास रखने से बिना साबुन और पानी के हमारा स्वभाव निर्मल हो सकता है।
24“आँगणि कुटी बँधाइ” का आशय क्या है?
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सही उत्तर:B. निंदक को अपने पास रखना
व्याख्या: कबीर निंदक को अपने घर के आँगन में कुटिया बनाकर पास रखने की बात कहते हैं, ताकि उसकी आलोचना से अपनी कमियाँ सुधारी जा सकें।
25“पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोइ” में कबीर किसकी आलोचना करते हैं?
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सही उत्तर:B. केवल पुस्तकें पढ़कर विद्वान होने के अहंकार की
व्याख्या: कबीर केवल पुस्तकें पढ़ने को पर्याप्त नहीं मानते। उनके अनुसार पुस्तकीय ज्ञान के साथ प्रेम और अनुभव का ज्ञान आवश्यक है।
26“ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होइ” में कबीर के अनुसार सच्चा पंडित कौन है?
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सही उत्तर:B. जो प्रेम के मर्म को समझे
व्याख्या: कबीर के अनुसार प्रेम के ढाई आखर का अर्थ समझने और जीवन में उतारने वाला ही वास्तविक अर्थ में पंडित है।
27“हम घर जाल्या आपणा, लिया मुराड़ा हाथि” में ‘घर जलाना’ किसका प्रतीक है?
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सही उत्तर:B. मोह-माया और अहंकार का त्याग करने का
व्याख्या: यहाँ ‘घर जलाना’ सांसारिक मोह-माया और अहंकार का त्याग करने का प्रतीक है।
28“अब घर जालौं तास का, जे चलै हमारे साथि” में कबीर किसे अपने साथ चलने का संकेत देते हैं?
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सही उत्तर:B. उन लोगों को जो मोह-माया का त्याग कर सत्य के मार्ग पर चलना चाहते हैं।
व्याख्या: कबीर उन लोगों को अपने साथ चलने का संकेत देते हैं जो मोह-माया और अहंकार का त्याग करके सत्य और आत्मज्ञान के मार्ग पर चलना चाहते हैं।
29कबीर की कविता की प्रमुख विशेषता क्या है?
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सही उत्तर:B. सामाजिक चेतना और जीवन के सत्य का चित्रण
व्याख्या: कबीर की कविता में गहरी सामाजिक चेतना दिखाई देती है। वे जीवन के वास्तविक सत्य और सामाजिक बुराइयों पर प्रभावी ढंग से प्रहार करते हैं।
30कबीर ने धार्मिक आडंबरों के संबंध में क्या दृष्टिकोण अपनाया?
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सही उत्तर:B. उन पर गहरी और तीखी चोट की
व्याख्या: कबीर ने धर्म के बाह्य आडंबरों और रूढ़ियों पर गहरी तथा तीखी चोट की है।
31कबीर की कविता में आत्मा-परमात्मा के संबंध को किस रूप में प्रस्तुत किया गया है?
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सही उत्तर:B. विरह और मिलन के भाव के रूप में
व्याख्या: कबीर ने आत्मा और परमात्मा के संबंध को विरह तथा मिलन के भावपूर्ण गीतों के माध्यम से व्यक्त किया है।
32‘साखी’ में कबीर किस प्रकार का ज्ञान अधिक महत्त्वपूर्ण मानते हैं?
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सही उत्तर:B. अनुभव से प्राप्त ज्ञान
व्याख्या: कबीर शास्त्रीय ज्ञान की अपेक्षा अनुभव ज्ञान को अधिक महत्त्व देते हैं। उनके अनुसार वास्तविक ज्ञान अनुभव से प्राप्त होता है।
33कबीर की साखियों में किन भाषाओं के शब्दों का प्रभाव मिलता है?
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सही उत्तर:B. अवधी, राजस्थानी, भोजपुरी और पंजाबी
व्याख्या: कबीर ने अनेक स्थानों का भ्रमण किया था। इसलिए उनकी साखियों की भाषा में अवधी, राजस्थानी, भोजपुरी और पंजाबी आदि भाषाओं के शब्द मिलते हैं।
34“ऐसी बाँणी बोलिए” में ‘बाँणी’ शब्द का अर्थ क्या है?
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सही उत्तर:B. बोली या वाणी
व्याख्या: ‘बाँणी’ का अर्थ बोली या वाणी है। कबीर मधुर और कल्याणकारी वाणी बोलने की शिक्षा देते हैं।
35“अपना तन सीतल करै” का आशय क्या है?
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सही उत्तर:B. मधुर वाणी बोलने से मन को शांति मिलना
व्याख्या: मधुर वाणी बोलने से स्वयं के मन में भी शांति और संतोष उत्पन्न होता है। इसी भाव को ‘तन सीतल’ करने के रूप में व्यक्त किया गया है।
36कस्तूरी मृग के उदाहरण द्वारा कबीर क्या समझाना चाहते हैं?
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सही उत्तर:B. ईश्वर मनुष्य के भीतर विद्यमान है, फिर भी मनुष्य उसे बाहर खोजता है।
व्याख्या: कस्तूरी मृग की नाभि में होती है, फिर भी मृग उसे वन में खोजता है। इसी प्रकार ईश्वर मनुष्य के भीतर है, लेकिन मनुष्य उसे बाहर खोजता रहता है।
37“ऐसैं घटि घटि राम हैं” का मुख्य भाव क्या है?
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सही उत्तर:B. ईश्वर प्रत्येक प्राणी के भीतर विद्यमान है।
व्याख्या: कबीर के अनुसार ईश्वर कण-कण और प्रत्येक प्राणी के भीतर विद्यमान है।
38“जब मैं था तब हरि नहीं” में ‘हरि’ और ‘मैं’ का संबंध किस ओर संकेत करता है?
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सही उत्तर:B. अहंकार और ईश्वर की अनुभूति
व्याख्या: यहाँ ‘मैं’ अहंकार का प्रतीक है। अहंकार के रहते ईश्वर की अनुभूति नहीं होती, लेकिन अहंकार समाप्त होने पर ईश्वर का बोध होता है।
39“सब अँधियारा मिटि गया” में ‘अँधियारा’ किसका प्रतीक है?
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सही उत्तर:B. अज्ञान
व्याख्या: ‘अँधियारा’ अज्ञान का प्रतीक है। ज्ञानरूपी दीपक के प्रकट होने पर अज्ञान का अंधकार समाप्त हो जाता है।
40संसार के सुखी और कबीर के दुखी होने में क्या अंतर है?
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सही उत्तर:B. संसार सांसारिक सुखों में सोया है, जबकि कबीर सत्य की खोज में जागते हैं।
व्याख्या: संसार सांसारिक सुखों में लीन है, जबकि कबीर जागरूक होकर जीवन के सत्य को खोजते हैं। इसी कारण वे स्वयं को दुखी कहते हैं।
41“जागै अरु रोवै” में ‘जागना’ किसका प्रतीक है?
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सही उत्तर:B. आत्मज्ञान और सत्य के प्रति जागरूक होने का
व्याख्या: यहाँ ‘जागना’ आध्यात्मिक जागृति और जीवन के वास्तविक सत्य को समझने का प्रतीक है।
42“बिरह भुवंगम तन बसै” में विरह की तुलना किससे की गई है?
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सही उत्तर:B. साँप से
व्याख्या: ‘भुवंगम’ का अर्थ साँप है। कबीर ने परमात्मा के विरह की पीड़ा को साँप के समान बताया है।
43“मंत्र न लागै कोइ” का आशय क्या है?
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सही उत्तर:B. परमात्मा के विरह की पीड़ा पर कोई सामान्य उपाय प्रभावी नहीं होता।
व्याख्या: कबीर के अनुसार परमात्मा के विरह की पीड़ा इतनी गहरी है कि उस पर कोई सामान्य मंत्र या उपाय प्रभावी नहीं होता।
44कबीर ने निंदक को अपने पास रखने की सलाह क्यों दी है?
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सही उत्तर:B. वह हमारी कमियाँ बताकर स्वभाव को सुधारने में सहायता करता है।
व्याख्या: निंदक हमारी कमियों को सामने लाता है। उसकी आलोचना से व्यक्ति अपने दोषों को पहचानकर उन्हें दूर कर सकता है।
45“बिन साबण पाँणी बिना, निरमल करै सुभाइ” में किस बात की ओर संकेत है?
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सही उत्तर:B. आलोचना द्वारा स्वभाव का सुधार
व्याख्या: निंदक की आलोचना व्यक्ति के स्वभाव की कमियों को दूर करने में सहायता करती है। इसलिए कबीर कहते हैं कि वह बिना साबुन और पानी के स्वभाव को निर्मल कर देता है।
46“पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ” में कबीर किस प्रकार के ज्ञान को अधूरा मानते हैं?
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सही उत्तर:B. केवल पुस्तकीय ज्ञान
व्याख्या: कबीर केवल पुस्तकों को पढ़ते रहने से व्यक्ति को वास्तविक अर्थ में पंडित नहीं मानते। उनके अनुसार ज्ञान को जीवन में अनुभव करना आवश्यक है।
47“ढाई आखर प्रेम का” में ‘प्रेम’ का व्यापक अर्थ क्या है?
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सही उत्तर:B. मानवता और आध्यात्मिक प्रेम
व्याख्या: कबीर के यहाँ प्रेम केवल व्यक्तिगत संबंध नहीं है। यह मानवता, आत्मीयता और परमात्मा से जुड़ी आध्यात्मिक अनुभूति का व्यापक भाव है।
48कबीर की साखियों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
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सही उत्तर:B. जीवन के सत्य और सही आचरण की शिक्षा देना
व्याख्या: साखियों के माध्यम से कबीर सत्य, मधुर वाणी, अहंकार-त्याग, आत्मज्ञान, प्रेम और सही जीवन-आचरण की शिक्षा देते हैं।