क्या आप JAC Class 10 Hindi के “आत्मत्राण” MCQ (Objective Questions) with Answers खोज रहे हैं? आप बिल्कुल सही जगह पर हैं! JAC Exam Prep पर आपको “आत्मत्राण” पाठ के महत्वपूर्ण Multiple Choice Questions (MCQs) with Answers मिलेंगे। ये प्रश्न नवीनतम JCERT एवं NCERT पाठ्यक्रम के अनुसार तथा Jharkhand Academic Council (JAC) की परीक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।
“आत्मत्राण” के ये MCQs पाठ की कहानी, पात्रों, घटनाओं, लेखक, विषय-वस्तु और महत्वपूर्ण तथ्यों पर आधारित हैं। इन प्रश्नों का अभ्यास करके विद्यार्थी इस पाठ का बेहतर Revision कर सकते हैं, अपनी तैयारी को मजबूत कर सकते हैं और JAC Class 10 Board Exam में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
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1‘आत्मत्राण’ कविता के रचयिता कौन हैं?
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सही उत्तर:A. रवींद्रनाथ ठाकुर
व्याख्या: ‘आत्मत्राण’ कविता के रचयिता रवींद्रनाथ ठाकुर हैं। पाठ में उनकी इस कविता का हिंदी अनुवाद हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा किया गया है।
2रवींद्रनाथ ठाकुर का जन्म किस वर्ष हुआ था?
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सही उत्तर:B. 1861
व्याख्या: रवींद्रनाथ ठाकुर का जन्म 6 मई 1861 को बंगाल के एक संपन्न परिवार में हुआ था।
3रवींद्रनाथ ठाकुर को किस रचना के लिए नोबेल पुरस्कार मिला?
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सही उत्तर:B. गीतांजलि
व्याख्या: रवींद्रनाथ ठाकुर को उनकी काव्य-कृति ‘गीतांजलि’ के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
4रवींद्रनाथ ठाकुर की शिक्षा-दीक्षा कहाँ हुई थी?
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सही उत्तर:C. घर पर
व्याख्या: पाठ-परिचय के अनुसार रवींद्रनाथ ठाकुर की शिक्षा-दीक्षा घर पर ही हुई थी। उन्होंने छोटी उम्र में स्वाध्याय से अनेक विषयों का ज्ञान प्राप्त किया।
5रवींद्रनाथ ठाकुर को बैरिस्ट्री पढ़ने के लिए कहाँ भेजा गया था?
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सही उत्तर:B. इंग्लैंड
व्याख्या: रवींद्रनाथ ठाकुर को बैरिस्ट्री पढ़ने के लिए विदेश भेजा गया था, लेकिन वे बिना परीक्षा दिए ही लौट आए।
6‘आत्मत्राण’ कविता का केंद्रीय भाव क्या है?
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सही उत्तर:B. संकटों का साहसपूर्वक सामना करने की शक्ति की प्रार्थना
व्याख्या: कवि ईश्वर से विपत्तियों को पूरी तरह दूर करने की प्रार्थना नहीं करता, बल्कि उनका सामना करने के लिए निर्भयता, शक्ति और आत्मबल माँगता है।
7“विपदाओं से मुझे बचाओ, यह मेरी प्रार्थना नहीं” में कवि क्या कहना चाहता है?
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सही उत्तर:B. वह विपत्तियों से भागना नहीं चाहता।
व्याख्या: कवि की प्रार्थना विपत्तियों को समाप्त करने की नहीं, बल्कि विपत्तियों में भय से मुक्त रहकर उनका सामना करने की शक्ति प्राप्त करने की है।
8“केवल इतना हो कि करुणामय, कभी न विपदा में पाऊँ भय” में कवि क्या चाहता है?
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सही उत्तर:B. विपत्ति के समय भयभीत न हो।
व्याख्या: कवि ईश्वर से ऐसी शक्ति चाहता है कि विपत्ति आने पर उसके मन में भय उत्पन्न न हो और वह साहस के साथ उसका सामना कर सके।
9“दुःख-ताप से व्यथित चित्त को न दो सांत्वना नहीं सही” में कवि किसे स्वीकार करने को तैयार है?
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सही उत्तर:B. सांत्वना न मिले तो भी दुख सहना
व्याख्या: कवि कहता है कि यदि दुखी मन को सांत्वना न भी मिले तो कोई बात नहीं, लेकिन वह इतना चाहता है कि दुख को सहने और उससे लड़ने की शक्ति बनी रहे।
10“दुःख को मैं कर सकूँ सदा जय” में ‘जय’ का अर्थ क्या है?
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सही उत्तर:B. विजय
व्याख्या: ‘जय’ का अर्थ विजय है। कवि दुखों पर विजय प्राप्त करने की शक्ति की कामना करता है।
11“कोई कहीं सहायक न मिले” की स्थिति में कवि क्या चाहता है?
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सही उत्तर:A. वह स्वयं का बल और पुरुषार्थ न खोए।
व्याख्या: कवि चाहता है कि यदि कोई सहायक न मिले, तब भी उसका अपना बल और पुरुषार्थ कमजोर न पड़े।
12“तो अपना बल पौरुष न हिले” में ‘पौरुष’ का अर्थ क्या है?
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सही उत्तर:B. पुरुषार्थ और साहस
व्याख्या: ‘पौरुष’ का अर्थ पुरुषार्थ, साहस और आत्मबल है। कवि विपत्ति में अपने आत्मबल को बनाए रखना चाहता है।
13“हानि उठानी पड़े जगत में लाभ अगर वंचना रही” का आशय क्या है?
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सही उत्तर:B. यदि लाभ न मिले और हानि उठानी पड़े, तब भी मन टूटना नहीं चाहिए।
व्याख्या: कवि कहता है कि संसार में कभी लाभ के स्थान पर हानि भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में भी मन में निराशा और पराजय की भावना नहीं आनी चाहिए।
14“तब भी मन में ना मानूँ क्षय” में ‘क्षय’ का अर्थ क्या है?
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सही उत्तर:B. नाश या हार
व्याख्या: ‘क्षय’ का अर्थ नाश या कमी है। कवि चाहता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी उसके मन का साहस और आत्मविश्वास नष्ट न हो।
15“मेरा त्राण करो अनुदिन तुम” में ‘त्राण’ का अर्थ क्या है?
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सही उत्तर:B. रक्षा या बचाव
व्याख्या: ‘त्राण’ का अर्थ रक्षा, बचाव या आश्रय है। कवि ईश्वर से प्रतिदिन आत्मबल बनाए रखने की शक्ति माँगता है।
16कविता में कवि ईश्वर से किस प्रकार की शक्ति माँगता है?
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सही उत्तर:B. विपत्तियों से लड़ने की
व्याख्या: कवि ईश्वर से ऐसी शक्ति चाहता है जिससे वह स्वयं विपत्तियों और कठिनाइयों का सामना कर सके।
17“तरने की हो शक्ति अनामय” में ‘तरने’ का आशय क्या है?
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सही उत्तर:B. संकटों से उबरना
व्याख्या: यहाँ ‘तरने’ का अर्थ जीवन की कठिनाइयों और विपत्तियों से सफलतापूर्वक उबरना है।
18“मेरा भार अगर लघु करके न दो सांत्वना नहीं सही” में कवि क्या कहना चाहता है?
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सही उत्तर:A. वह अपने दुख का बोझ कम करने की प्रार्थना नहीं करता।
व्याख्या: कवि कहता है कि यदि ईश्वर उसके दुख का भार कम न भी करे तो कोई बात नहीं; वह केवल उस भार को स्वयं सहने की शक्ति चाहता है।
19“वहन कर सकूँ इसको निर्भय” में कवि किस शक्ति की इच्छा करता है?
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सही उत्तर:B. निर्भय होकर दुख का भार सहने की
व्याख्या: कवि चाहता है कि वह जीवन के दुखों और कठिनाइयों का भार बिना भय के स्वयं उठा सके।
20“नत शिर होकर सुख के दिन में तव मुख पहचानूँ छिन-छिन में” का भाव क्या है?
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सही उत्तर:B. सुख के समय भी विनम्र रहकर ईश्वर को याद करना
व्याख्या: कवि सुख के दिनों में भी अहंकार से दूर रहना चाहता है। वह हर क्षण विनम्र होकर ईश्वर को याद करना चाहता है।
21‘आत्मत्राण’ शीर्षक का क्या अर्थ है?
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सही उत्तर:B. स्वयं की रक्षा
व्याख्या: ‘आत्मत्राण’ का अर्थ है अपनी रक्षा स्वयं करना। कविता में कवि ईश्वर से ऐसी शक्ति माँगता है जिससे वह स्वयं कठिनाइयों का सामना कर सके।
22“दुःख-रात्रि में करे वंचना मेरी जिस दिन निखिल मही” में ‘निखिल’ का अर्थ क्या है?
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सही उत्तर:B. संपूर्ण
व्याख्या: ‘निखिल’ का अर्थ संपूर्ण है। कवि चाहता है कि दुख की रात में भी उसका मन संसार से निराश होकर टूटे नहीं।
23कविता के अंत में कवि ईश्वर से क्या कहता है?
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सही उत्तर:A. तुम पर करूँ नहीं कुछ संशय
व्याख्या: अंत में कवि ईश्वर पर पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए कहता है कि वह ईश्वर पर किसी प्रकार का संशय नहीं करेगा।
24“सुख के दिन में तव मुख पहचानूँ” में ‘तव’ शब्द का अर्थ क्या है?
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सही उत्तर:C. तुम्हारा
व्याख्या: ‘तव’ का अर्थ ‘तुम्हारा’ है। कवि सुख के दिनों में भी ईश्वर के प्रति अपनी श्रद्धा बनाए रखना चाहता है।
25“नत शिर होकर सुख के दिन में” में ‘नत शिर’ का क्या अर्थ है?
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सही उत्तर:B. सिर झुकाकर
व्याख्या: ‘नत शिर’ का अर्थ सिर झुकाकर है। यह विनम्रता और ईश्वर के प्रति श्रद्धा का भाव व्यक्त करता है।
26कवि दुख की रात में किस प्रकार जीवन बिताना चाहता है?
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सही उत्तर:C. साहस और आत्मबल के साथ
व्याख्या: कवि दुख और विपत्ति के समय भी भयभीत नहीं होना चाहता। वह आत्मबल और साहस के साथ कठिनाइयों का सामना करना चाहता है।
27“करुणामय” शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
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सही उत्तर:B. ईश्वर के लिए
व्याख्या: ‘करुणामय’ शब्द ईश्वर के लिए प्रयुक्त हुआ है। कवि उन्हें दयालु और करुणा से पूर्ण मानता है।
28“कभी न विपदा में पाऊँ भय” में कवि की मुख्य कामना क्या है?
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सही उत्तर:B. विपदा में उसे भय न लगे
व्याख्या: कवि विपत्तियों को समाप्त करने की प्रार्थना नहीं करता। वह केवल विपत्ति के समय निर्भय रहने की शक्ति चाहता है।
29“कोई कहीं सहायक न मिले” की स्थिति में कवि किस पर भरोसा रखना चाहता है?
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सही उत्तर:A. अपने बल-पौरुष पर
व्याख्या: यदि कोई सहायक न मिले, तब भी कवि अपने बल और पुरुषार्थ को कमजोर नहीं पड़ने देना चाहता।
30“हानि उठानी पड़े जगत में” के साथ कवि किस स्थिति को स्वीकार करता है?
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सही उत्तर:A. लाभ न मिलने पर भी मन में क्षय न मानना
व्याख्या: कवि मानता है कि संसार में हानि उठानी पड़ सकती है, लेकिन ऐसी स्थिति में भी मन में हार या क्षय की भावना नहीं आनी चाहिए।
31“तुम यह मेरी प्रार्थना नहीं” जैसी पंक्तियों से कवि की प्रार्थना की कौन-सी विशेषता स्पष्ट होती है?
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सही उत्तर:C. वह आत्मबल की माँग करता है।
व्याख्या: कवि की प्रार्थना सामान्य रूप से विपत्ति से बचने की नहीं है। वह कठिनाइयों का सामना करने के लिए आत्मबल और निर्भयता चाहता है।
32“मेरा भार अगर लघु करके न दो” में ‘लघु’ का अर्थ क्या है?
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सही उत्तर:B. हल्का
व्याख्या: ‘लघु’ का अर्थ हल्का या कम है। कवि अपने दुख का भार कम करने के बजाय उसे स्वयं सहने की शक्ति चाहता है।
33“तुम पर करूँ नहीं कुछ संशय” में कवि किस भावना को व्यक्त करता है?
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सही उत्तर:B. ईश्वर के प्रति पूर्ण विश्वास
व्याख्या: इस पंक्ति में कवि ईश्वर के प्रति अपने अटूट विश्वास को व्यक्त करता है और किसी भी परिस्थिति में उन पर संदेह न करने की बात कहता है।
34कविता में ‘आत्मत्राण’ का संबंध किससे है?
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सही उत्तर:B. आत्मबल और स्वयं संकटों से उबरने की शक्ति से
व्याख्या: ‘आत्मत्राण’ का आशय अपने भीतर ऐसी शक्ति विकसित करना है जिससे मनुष्य कठिन परिस्थितियों में स्वयं को संभाल सके।
35“तरने की हो शक्ति अनामय” में कवि किसकी शक्ति चाहता है?
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सही उत्तर:A. संकटों से उबरने की
व्याख्या: कवि जीवन की विपत्तियों और दुखों से सफलतापूर्वक उबरने की शक्ति चाहता है।
36“दुःख को मैं कर सकूँ सदा जय” में ‘दुःख’ पर विजय पाने का साधन क्या है?
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सही उत्तर:C. आत्मबल
व्याख्या: कविता में कवि अपने आत्मबल, साहस और पुरुषार्थ के सहारे दुखों पर विजय प्राप्त करने की इच्छा व्यक्त करता है।
37‘आत्मत्राण’ कविता का हिंदी अनुवाद किसने किया?
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सही उत्तर:B. हजारीप्रसाद द्विवेदी
व्याख्या: रवींद्रनाथ ठाकुर की इस कविता का हिंदी अनुवाद आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने किया है।
38पाठ के अनुसार रवींद्रनाथ ठाकुर ने किस शैक्षिक और सांस्कृतिक संस्था की स्थापना की?
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सही उत्तर:A. शांतिनिकेतन
व्याख्या: पाठ-परिचय के अनुसार रवींद्रनाथ ठाकुर ने शांतिनिकेतन नाम की एक शैक्षिक और सांस्कृतिक संस्था की स्थापना की थी।
39रवींद्रनाथ ठाकुर की रचनाओं में किसका स्वर प्रमुख रूप से मुखरित होता है?
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सही उत्तर:B. लोक-संस्कृति
व्याख्या: पाठ-परिचय में बताया गया है कि रवींद्रनाथ की रचनाओं में लोक-संस्कृति का स्वर प्रमुख रूप से मुखरित होता है।
40रवींद्रनाथ ठाकुर को प्रकृति से कैसा लगाव था?
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सही उत्तर:A. गहरा लगाव
व्याख्या: पाठ-परिचय के अनुसार रवींद्रनाथ ठाकुर को प्रकृति से गहरा लगाव था और उनकी अनेक रचनाओं में प्रकृति का प्रभाव दिखाई देता है।
41‘आत्मत्राण’ कविता अन्य सामान्य प्रार्थना-गीतों से किस कारण अलग दिखाई देती है?
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सही उत्तर:B. इसमें विपत्तियों से बचने के बजाय उनका सामना करने की शक्ति माँगी गई है।
व्याख्या: कविता की विशेषता यह है कि कवि विपत्तियों को हटाने की प्रार्थना नहीं करता, बल्कि उनका सामना करने के लिए निर्भयता, आत्मबल और पुरुषार्थ की शक्ति चाहता है।