Class 9 Civics Revision Notes
संविधान निर्माण
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Chapter Overview
| Class | 9 |
| Subject | Civics |
| Chapter Name | संविधान निर्माण |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
संविधान निर्माण Revision Notes
1. संविधान क्या है? इसकी आवश्यकता एवं महत्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ संविधान किसी भी देश का सर्वोच्च कानून होता है। इसमें देश के शासन, नागरिकों के अधिकारों तथा सरकार की शक्तियों से संबंधित मूल नियम लिखे होते हैं। संविधान यह निर्धारित करता है कि सरकार कैसे बनेगी, उसके अधिकार और सीमाएँ क्या होंगी तथा नागरिकों के अधिकार कैसे सुरक्षित रहेंगे। यह विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच विश्वास एवं सहयोग बनाए रखता है तथा सरकार को मनमानी करने से रोकता है। लोकतांत्रिक देश में संविधान लोकतंत्र को मजबूत बनाता है और सभी नागरिकों को समान अधिकार एवं अवसर प्रदान करता है।
(i) संविधान देश का सर्वोच्च कानून है।
(ii) यह सरकार के कार्यों को निर्धारित करता है।
(iii) नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है।
(iv) सरकार की शक्तियों को सीमित करता है।
(v) लोकतंत्र को मजबूत बनाता है।
2. संविधान के प्रमुख कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ संविधान देश के शासन को व्यवस्थित रूप से चलाने का आधार प्रदान करता है। यह विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच विश्वास और सहयोग स्थापित करता है। संविधान यह स्पष्ट करता है कि सरकार का गठन कैसे होगा तथा निर्णय लेने का अधिकार किसके पास होगा। यह सरकार की शक्तियों की सीमा निर्धारित करता है और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है। इसके साथ ही संविधान देश के आदर्शों एवं उद्देश्यों को व्यक्त करता है तथा एक अच्छे समाज के निर्माण की दिशा प्रदान करता है।
(i) सरकार के गठन की व्यवस्था करता है।
(ii) नागरिकों के अधिकार सुरक्षित करता है।
(iii) सरकार की शक्तियाँ सीमित करता है।
(iv) सामाजिक विश्वास बनाए रखता है।
(v) देश के आदर्शों को व्यक्त करता है।
3. दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद (Apartheid) क्या था? इसका वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ रंगभेद दक्षिण अफ्रीका की वह नस्लीय व्यवस्था थी जिसमें लोगों के साथ उनकी चमड़ी के रंग के आधार पर भेदभाव किया जाता था। इस व्यवस्था में गोरे लोगों को सभी अधिकार प्राप्त थे, जबकि अश्वेत, रंगीन तथा भारतीय मूल के लोगों को अनेक अधिकारों से वंचित रखा गया। उन्हें मतदान का अधिकार नहीं था तथा वे सार्वजनिक स्थानों, विद्यालयों, अस्पतालों और अन्य सुविधाओं का समान रूप से उपयोग नहीं कर सकते थे। यह व्यवस्था मानव अधिकारों के विरुद्ध थी और कई वर्षों तक दक्षिण अफ्रीका में लागू रही।
(i) रंगभेद नस्लीय भेदभाव था।
(ii) गोरे लोगों को विशेष अधिकार प्राप्त थे।
(iii) अश्वेतों के साथ भेदभाव किया जाता था।
(iv) मतदान का अधिकार नहीं था।
(v) यह मानव अधिकारों के विरुद्ध था।
4. दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के विरुद्ध हुए संघर्ष का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के विरुद्ध 1950 के दशक से संघर्ष प्रारंभ हुआ। अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस (ANC) के नेतृत्व में अश्वेत, रंगीन तथा भारतीय मूल के लोगों ने आंदोलन किए। मजदूर संगठनों तथा कुछ गोरे नागरिकों ने भी उनका समर्थन किया। आंदोलनकारियों ने हड़ताल, प्रदर्शन और विरोध मार्च आयोजित किए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रंगभेद की आलोचना हुई। अंततः सरकार को रंगभेद संबंधी कानून समाप्त करने पड़े तथा नेल्सन मंडेला को 28 वर्ष बाद जेल से रिहा किया गया। इससे दक्षिण अफ्रीका में लोकतंत्र की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ।
(i) संघर्ष 1950 के दशक से शुरू हुआ।
(ii) ANC ने आंदोलन का नेतृत्व किया।
(iii) नेल्सन मंडेला को रिहा किया गया।
(iv) रंगभेद कानून समाप्त हुए।
(v) लोकतंत्र की स्थापना हुई।
5. दक्षिण अफ्रीका के नए संविधान की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ रंगभेद समाप्त होने के बाद दक्षिण अफ्रीका में नया संविधान बनाया गया। इस संविधान को सरकार और स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं ने मिलकर तैयार किया। इसमें सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए गए तथा नस्लीय भेदभाव समाप्त किया गया। संविधान में लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, मानव अधिकार, समानता और सभी समुदायों की भागीदारी पर विशेष बल दिया गया। यह संविधान विश्व के सबसे प्रगतिशील संविधानों में से एक माना जाता है तथा अन्य लोकतांत्रिक देशों के लिए प्रेरणास्रोत है।
(i) सभी नागरिकों को समान अधिकार मिले।
(ii) रंगभेद समाप्त किया गया।
(iii) लोकतंत्र एवं मानव अधिकारों पर बल दिया गया।
(iv) सभी समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित की गई।
(v) यह विश्व के श्रेष्ठ संविधानों में माना जाता है।
6. संविधान की आवश्यकता क्यों होती है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒ किसी भी देश में संविधान की आवश्यकता इसलिए होती है ताकि सरकार तथा नागरिक निश्चित नियमों के अनुसार कार्य करें। संविधान सरकार की शक्तियों को सीमित करता है तथा नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है। यह विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक समूहों के बीच विश्वास बनाए रखता है। संविधान यह सुनिश्चित करता है कि सरकार मनमानी न करे तथा सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार हो। लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के सुचारु संचालन के लिए संविधान अत्यंत आवश्यक है।
(i) सरकार को नियमों के अनुसार चलाता है।
(ii) नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है।
(iii) सरकार की शक्तियाँ सीमित करता है।
(iv) सामाजिक विश्वास बनाए रखता है।
(v) लोकतंत्र को मजबूत बनाता है।
7. भारतीय संविधान निर्माण के समय संविधान निर्माताओं के सामने कौन-कौन सी चुनौतियाँ थीं?
उत्तर ⇒ भारतीय संविधान का निर्माण अनेक कठिन परिस्थितियों में हुआ। भारत एक विशाल एवं विविधताओं वाला देश था। देश ने विभाजन की त्रासदी झेली थी, जिसमें लाखों लोगों की मृत्यु हुई। अनेक रियासतों का भारत में विलय होना भी एक बड़ी चुनौती थी। देश गुलामी से स्वतंत्र हुआ था तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित करनी थी। इन सभी परिस्थितियों के बावजूद संविधान निर्माताओं ने एक ऐसा संविधान बनाया जो सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित है।
(i) भारत विविधताओं वाला देश था।
(ii) विभाजन बड़ी चुनौती था।
(iii) रियासतों का विलय करना था।
(iv) लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित करनी थी।
(v) संविधान ने सभी चुनौतियों का समाधान दिया।
8. भारतीय संविधान निर्माण के लिए उपलब्ध अनुकूल परिस्थितियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ भारतीय संविधान के निर्माण में कई अनुकूल परिस्थितियों का योगदान रहा। स्वतंत्र भारत के लोकतांत्रिक स्वरूप पर पहले से सहमति थी। मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में 1928 में संविधान का प्रारूप तैयार किया जा चुका था। भारत सरकार अधिनियम, 1935 के अनेक प्रावधानों का उपयोग किया गया। संविधान निर्माताओं ने ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस तथा रूस सहित अनेक देशों की संवैधानिक व्यवस्थाओं से उपयोगी सिद्धांत अपनाए। इन सभी अनुभवों ने भारतीय संविधान को मजबूत और व्यापक बनाने में सहायता की।
(i) लोकतंत्र पर पहले से सहमति थी।
(ii) 1928 का नेहरू रिपोर्ट उपयोगी रही।
(iii) 1935 के अधिनियम से सहायता मिली।
(iv) अन्य देशों से अच्छे विचार अपनाए गए।
(v) संविधान अधिक मजबूत बना।
9. भारतीय संविधान के निर्माण की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ भारतीय संविधान का निर्माण संविधान सभा द्वारा किया गया। संविधान सभा के चुनाव जुलाई 1946 में हुए तथा इसकी पहली बैठक दिसंबर 1946 में हुई। देश के विभाजन के बाद भारतीय संविधान सभा में 299 सदस्य रह गए। संविधान निर्माण का कार्य 26 नवंबर 1949 को पूरा हुआ तथा इसे 26 जनवरी 1950 से लागू किया गया। डॉ. भीमराव अंबेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष तथा डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष थे।
(i) संविधान सभा ने संविधान बनाया।
(ii) चुनाव 1946 में हुए।
(iii) 299 सदस्य थे।
(iv) 26 नवंबर 1949 को संविधान तैयार हुआ।
(v) 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ।
10. संविधान सभा क्या थी? भारतीय संविधान सभा की संरचना एवं भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ संविधान सभा वह प्रतिनिधि संस्था थी जिसे भारत का संविधान बनाने के लिए गठित किया गया था। इसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों, धर्मों, जातियों तथा वर्गों के प्रतिनिधि शामिल थे। संविधान सभा ने लगभग तीन वर्षों तक विस्तृत चर्चा और विचार-विमर्श करके संविधान तैयार किया। प्रत्येक प्रावधान पर गंभीर बहस हुई तथा अनेक संशोधनों पर विचार किया गया। संविधान सभा ने लोकतंत्र, समानता, स्वतंत्रता और न्याय पर आधारित भारतीय संविधान का निर्माण किया, जो आज देश का सर्वोच्च कानून है।
(i) संविधान सभा ने संविधान बनाया।
(ii) इसमें विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि थे।
(iii) विस्तृत चर्चा के बाद संविधान तैयार हुआ।
(iv) लोकतांत्रिक मूल्यों को अपनाया गया।
(v) संविधान देश का सर्वोच्च कानून है।
11. संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) क्या है? इसके महत्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ संविधान की शुरुआत में लिखे गए उस कथन को प्रस्तावना (उद्देशिका) कहते हैं, जिसमें संविधान के मूल उद्देश्य, आदर्श तथा मूल्यों का उल्लेख होता है। इसे संविधान की आत्मा भी कहा जाता है। प्रस्तावना से पता चलता है कि भारत कैसा राष्ट्र बनना चाहता है। इसमें प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथ-निरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक, गणराज्य, न्याय, स्वतंत्रता, समानता तथा बंधुता जैसे मूल आदर्शों का वर्णन किया गया है। संविधान की सभी धाराएँ इन्हीं मूल्यों के अनुरूप बनाई गई हैं। इसलिए प्रस्तावना संविधान के उद्देश्य एवं दिशा को स्पष्ट करती है।
(i) प्रस्तावना संविधान का प्रारंभिक कथन है।
(ii) इसे संविधान की आत्मा कहा जाता है।
(iii) इसमें संविधान के मूल आदर्श हैं।
(iv) यह संविधान की दिशा बताती है।
(v) सभी धाराएँ इसके अनुरूप बनाई गई हैं।
12. प्रस्तावना के प्रमुख उद्देश्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ प्रस्तावना संविधान के मूल उद्देश्यों को स्पष्ट करती है। यह बताती है कि संविधान का स्रोत “हम भारत के लोग” हैं। प्रस्तावना सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों की जाँच का आधार प्रदान करती है तथा संविधान के आदर्शों एवं लक्ष्यों को स्पष्ट करती है। यह लोकतंत्र, समानता, न्याय, स्वतंत्रता तथा बंधुता जैसे मूल्यों को स्थापित करने का मार्गदर्शन करती है। इस प्रकार प्रस्तावना संविधान के मूल दर्शन को व्यक्त करती है।
(i) संविधान का स्रोत बताती है।
(ii) संविधान के उद्देश्य स्पष्ट करती है।
(iii) कानूनों की जाँच का आधार देती है।
(iv) लोकतांत्रिक मूल्यों को व्यक्त करती है।
(v) संविधान का मार्गदर्शन करती है।
13. प्रस्तावना में दिए गए ‘हम भारत के लोग’ तथा ‘प्रभुत्व-संपन्न’ शब्दों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒ “हम भारत के लोग” का अर्थ है कि भारतीय संविधान देश की जनता द्वारा अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से बनाया गया है, न कि किसी राजा या विदेशी शक्ति द्वारा दिया गया है। “प्रभुत्व-संपन्न” का अर्थ है कि भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र है और अपने सभी आंतरिक एवं बाहरी निर्णय स्वयं लेने के लिए पूर्णतः स्वतंत्र है। किसी बाहरी देश या शक्ति का भारत पर कोई नियंत्रण नहीं है। ये दोनों शब्द भारत की स्वतंत्रता तथा जनता की सर्वोच्च सत्ता को व्यक्त करते हैं।
(i) संविधान जनता द्वारा बनाया गया है।
(ii) किसी राजा ने संविधान नहीं दिया।
(iii) भारत स्वतंत्र राष्ट्र है।
(iv) बाहरी शक्ति का नियंत्रण नहीं है।
(v) जनता सर्वोच्च शक्ति है।
14. प्रस्तावना में वर्णित ‘समाजवादी’, ‘पंथ-निरपेक्ष’ तथा ‘लोकतंत्रात्मक’ शब्दों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒ समाजवादी का अर्थ है कि सरकार सामाजिक एवं आर्थिक असमानताओं को कम करने का प्रयास करती है। पंथ-निरपेक्ष का अर्थ है कि भारत का कोई राजधर्म नहीं है तथा सभी धर्मों को समान सम्मान दिया जाता है। लोकतंत्रात्मक का अर्थ है कि जनता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है और सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी रहती है। ये तीनों शब्द भारतीय संविधान के मूल आदर्शों को व्यक्त करते हैं।
(i) समाजवादी – समान अवसर पर बल।
(ii) पंथ-निरपेक्ष – सभी धर्म समान।
(iii) लोकतंत्रात्मक – जनता का शासन।
(iv) सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी होती है।
(v) सभी को समान सम्मान मिलता है।
15. प्रस्तावना में वर्णित ‘गणराज्य’, ‘न्याय’, ‘स्वतंत्रता’, ‘समानता’ एवं ‘बंधुता’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒ गणराज्य का अर्थ है कि देश का प्रमुख जनता द्वारा चुना जाता है। न्याय का अर्थ है कि सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार किया जाए। स्वतंत्रता का अर्थ है कि प्रत्येक व्यक्ति को विचार, अभिव्यक्ति और विश्वास की स्वतंत्रता प्राप्त हो। समानता का अर्थ है कि सभी नागरिक कानून की दृष्टि में समान हैं। बंधुता का अर्थ है कि सभी नागरिक एक-दूसरे के प्रति भाईचारे और सम्मान की भावना रखें। ये सभी मूल्य भारतीय लोकतंत्र की मजबूत नींव हैं।
(i) गणराज्य में राष्ट्राध्यक्ष निर्वाचित होता है।
(ii) न्याय सभी के लिए समान है।
(iii) स्वतंत्रता मौलिक अधिकार है।
(iv) समानता लोकतंत्र का आधार है।
(v) बंधुता भाईचारे की भावना है।
16. संविधान संशोधन क्या है? इसकी आवश्यकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒ देश की सर्वोच्च विधायी संस्था द्वारा संविधान में किए गए परिवर्तन को संविधान संशोधन कहते हैं। समय के साथ समाज, अर्थव्यवस्था तथा शासन व्यवस्था में परिवर्तन होते रहते हैं। इन परिवर्तनों के अनुसार संविधान में आवश्यक सुधार करना पड़ता है। संविधान संशोधन की व्यवस्था होने से संविधान समयानुकूल बना रहता है तथा नई आवश्यकताओं के अनुसार देश का विकास संभव हो पाता है। इसलिए संविधान संशोधन लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण भाग है।
(i) संविधान में परिवर्तन को संशोधन कहते हैं।
(ii) संसद संशोधन करती है।
(iii) समय के अनुसार परिवर्तन आवश्यक हैं।
(iv) संविधान को आधुनिक बनाए रखता है।
(v) लोकतंत्र को मजबूत बनाता है।
17. हम भारतीय संविधान को क्यों मानते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒ भारतीय संविधान व्यापक सहमति का दस्तावेज़ है। इसमें स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान विकसित राष्ट्रीय विचारों को स्थान दिया गया है। संविधान सभा में देश के विभिन्न धर्मों, जातियों, क्षेत्रों एवं वर्गों के प्रतिनिधि शामिल थे। संविधान का निर्माण विस्तृत चर्चा एवं विचार-विमर्श के बाद किया गया। प्रत्येक प्रावधान पर गंभीर बहस हुई तथा अनेक संशोधनों पर विचार किया गया। यही कारण है कि भारत के अधिकांश नागरिक एवं राजनीतिक दल संविधान को स्वीकार करते हैं और उसका सम्मान करते हैं।
(i) संविधान व्यापक सहमति का दस्तावेज़ है।
(ii) सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व था।
(iii) विस्तृत चर्चा के बाद बनाया गया।
(iv) लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाई गई।
(v) सभी इसका सम्मान करते हैं।
18. भारतीय संविधान सभा की कार्यप्रणाली का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ भारतीय संविधान सभा ने अत्यंत व्यवस्थित एवं लोकतांत्रिक ढंग से कार्य किया। पहले संविधान के मूल सिद्धांत तय किए गए, फिर प्रारूप समिति ने संविधान का मसौदा तैयार किया। प्रत्येक अनुच्छेद पर विस्तार से चर्चा हुई तथा दो हजार से अधिक संशोधनों पर विचार किया गया। संविधान सभा ने लगभग तीन वर्षों तक 114 दिनों की बहस के बाद संविधान तैयार किया। सभा की सभी कार्यवाहियों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा गया, जिससे संविधान निर्माण की प्रक्रिया पारदर्शी बनी रही।
(i) विस्तृत चर्चा की गई।
(ii) सभी प्रावधानों पर बहस हुई।
(iii) अनेक संशोधनों पर विचार हुआ।
(iv) कार्यवाही का रिकॉर्ड रखा गया।
(v) लोकतांत्रिक ढंग से संविधान बनाया गया।
19. भारतीय संविधान के निर्माण में विश्व के विभिन्न संविधानों का क्या योगदान रहा?
उत्तर ⇒ भारतीय संविधान निर्माताओं ने अनेक देशों की संवैधानिक व्यवस्थाओं से उपयोगी विचार अपनाए। फ्रांस से स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श लिए गए। ब्रिटेन से संसदीय शासन प्रणाली, अमेरिका से मौलिक अधिकारों की अवधारणा तथा रूस से सामाजिक एवं आर्थिक समानता के विचार अपनाए गए। संविधान निर्माताओं ने इन विचारों की केवल नकल नहीं की, बल्कि भारत की परिस्थितियों के अनुसार उनमें आवश्यक परिवर्तन करके उन्हें अपनाया। इससे भारतीय संविधान अधिक व्यापक एवं प्रभावशाली बना।
(i) फ्रांस से स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व।
(ii) ब्रिटेन से संसदीय प्रणाली।
(iii) अमेरिका से मौलिक अधिकार।
(iv) रूस से सामाजिक समानता।
(v) भारतीय आवश्यकताओं के अनुसार अपनाया गया।
20. ‘संविधान निर्माण’ अध्याय से हमें क्या सीख मिलती है?
उत्तर ⇒ यह अध्याय हमें संविधान के महत्व, आवश्यकता तथा निर्माण प्रक्रिया की जानकारी देता है। इससे हमें दक्षिण अफ्रीका के रंगभेद, भारतीय संविधान निर्माण, संविधान सभा, प्रस्तावना तथा संविधान के मूल आदर्शों का ज्ञान प्राप्त होता है। यह अध्याय सिखाता है कि लोकतंत्र, समानता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुता जैसे मूल्य किसी भी राष्ट्र की प्रगति के लिए आवश्यक हैं। साथ ही यह संविधान के प्रति सम्मान एवं नागरिक कर्तव्यों के पालन की प्रेरणा भी देता है।
(i) संविधान का महत्व समझ में आता है।
(ii) लोकतांत्रिक मूल्यों का ज्ञान मिलता है।
(iii) संविधान निर्माण की प्रक्रिया समझ में आती है।
(iv) नागरिक अधिकार एवं कर्तव्य स्पष्ट होते हैं।
(v) संविधान के प्रति सम्मान की भावना विकसित होती है।
More Class 9 Civics Revision Notes
| Chapter 1: लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों? |
| Chapter 2: संविधान निर्माण |
| Chapter 3: चुनावी राजनीति |
| Chapter 4: संस्थाओं का कामकाज |
| Chapter 5: लोकतांत्रिक अधिकार |