Class 9 Geography Revision Notes

जलवायु

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Chapter Overview

Class9
SubjectGeography 
Chapter Nameजलवायु
Resource TypeRevision Notes
SyllabusNCERT
Suitable ForCBSE, JAC and other state boards

जलवायु Revision Notes

1. जलवायु क्या है? मानसून से आप क्या समझते हैं?

उत्तर ⇒ किसी विशाल क्षेत्र में 30 वर्ष या उससे अधिक समय तक मौसम की अवस्थाओं तथा उनकी विविधताओं के औसत को जलवायु कहा जाता है। जलवायु किसी क्षेत्र के तापमान, वर्षा, वायु, आर्द्रता तथा वायुदाब जैसी मौसमी दशाओं का दीर्घकालीन स्वरूप है। मानसून शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के ‘मौसिम’ शब्द से हुई है, जिसका अर्थ है मौसम। मानसून का अर्थ वर्ष के विभिन्न ऋतुओं में पवनों की दिशा में होने वाला मौसमी परिवर्तन है। भारत की जलवायु मुख्यतः मानसूनी प्रकृति की है, इसलिए यहाँ वर्षा का अधिकांश भाग मानसूनी पवनों से प्राप्त होता है।

(i) जलवायु दीर्घकालीन मौसम है।

(ii) 30 वर्ष से अधिक अवधि पर आधारित होती है।

(iii) मानसून का अर्थ पवनों की दिशा में परिवर्तन है।

(iv) मानसून शब्द अरबी भाषा से आया है।

(v) भारत की जलवायु मानसूनी है।

2. भारत की जलवायु की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ भारत की जलवायु को मानसूनी जलवायु कहा जाता है। यह मुख्यतः दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया में पाई जाती है। देश में जलवायु का सामान्य स्वरूप समान होते हुए भी विभिन्न क्षेत्रों में तापमान एवं वर्षा में पर्याप्त भिन्नता दिखाई देती है। भारत के अधिकांश भागों में वर्षा जून से सितंबर के बीच होती है, जबकि तमिलनाडु में मुख्य वर्षा अक्टूबर-नवंबर में होती है। हिमालय में हिमपात होता है, जबकि अन्य भागों में वर्षा होती है। इन भिन्नताओं के कारण भारत में लोगों के भोजन, वस्त्र, आवास तथा जीवनशैली में विविधता दिखाई देती है।

(i) भारत की जलवायु मानसूनी है।

(ii) तापमान एवं वर्षा में क्षेत्रीय भिन्नता है।

(iii) अधिकांश वर्षा जून से सितंबर में होती है।

(iv) तमिलनाडु में शीतकालीन वर्षा होती है।

(v) जलवायु लोगों के जीवन को प्रभावित करती है।

3. भारत की जलवायु में पाई जाने वाली प्रमुख भिन्नताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ भारत की जलवायु में मुख्यतः तापमान तथा वर्षा के आधार पर भिन्नताएँ पाई जाती हैं। राजस्थान के मरुस्थल में ग्रीष्म ऋतु में तापमान लगभग 50°C तक पहुँच जाता है, जबकि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में यह लगभग 20°C रहता है। शीत ऋतु में द्रास का तापमान -45°C तक गिर जाता है, जबकि तिरुवनंतपुरम में लगभग 22°C रहता है। वर्षा की दृष्टि से मेघालय में 400 सेमी से अधिक वर्षा होती है, जबकि लद्दाख एवं पश्चिमी राजस्थान में 10 सेमी से कम वर्षा होती है।

(i) तापमान में अत्यधिक अंतर है।

(ii) वर्षा का वितरण असमान है।

(iii) राजस्थान सबसे गर्म क्षेत्रों में है।

(iv) द्रास अत्यधिक ठंडा क्षेत्र है।

(v) मेघालय में सर्वाधिक वर्षा होती है।

4. भारत की जलवायु को नियंत्रित करने वाले प्रमुख कारकों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ भारत की जलवायु को मुख्यतः अक्षांश, ऊँचाई (तुंगता), वायु दाब एवं पवन तंत्र, समुद्र से दूरी, महासागरीय धाराएँ तथा उच्चावच (भू-आकृति) नियंत्रित करते हैं। अक्षांश के कारण तापमान में परिवर्तन होता है। ऊँचाई बढ़ने पर तापमान घटता है। समुद्र के निकट स्थित क्षेत्रों में सम जलवायु रहती है, जबकि आंतरिक भागों में महाद्वीपीय जलवायु पाई जाती है। पर्वत वर्षा कराने तथा ठंडी हवाओं को रोकने में सहायक होते हैं। इन सभी कारकों के संयुक्त प्रभाव से भारत में विविध प्रकार की जलवायु विकसित हुई है।

(i) छह प्रमुख कारक जलवायु को प्रभावित करते हैं।

(ii) अक्षांश तापमान को प्रभावित करता है।

(iii) ऊँचाई बढ़ने पर तापमान घटता है।

(iv) समुद्र जलवायु को संतुलित करता है।

(v) पर्वत वर्षा में सहायक होते हैं।

5. अक्षांश एवं ऊँचाई (तुंगता) भारत की जलवायु को कैसे प्रभावित करते हैं?

उत्तर ⇒ पृथ्वी की गोलाकार आकृति के कारण विभिन्न अक्षांशों पर सूर्य की किरणें अलग-अलग कोणों पर पड़ती हैं, जिससे तापमान में अंतर उत्पन्न होता है। विषुवत रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर तापमान कम होता जाता है। इसी प्रकार समुद्र तल से ऊँचाई बढ़ने पर वायुमंडल विरल होता जाता है और तापमान घटता है। इसलिए पर्वतीय क्षेत्र ग्रीष्म ऋतु में भी ठंडे रहते हैं। हिमालय भारत को मध्य एशिया की अत्यंत ठंडी हवाओं से भी बचाता है, जिससे भारत की जलवायु अपेक्षाकृत संतुलित बनी रहती है।

(i) अक्षांश तापमान को प्रभावित करता है।

(ii) ऊँचाई बढ़ने पर तापमान घटता है।

(iii) पर्वतीय क्षेत्र ठंडे रहते हैं।

(iv) हिमालय ठंडी हवाओं को रोकता है।

(v) भारत की जलवायु संतुलित रहती है।

6. वायु दाब एवं पवन तंत्र भारत की जलवायु को कैसे प्रभावित करते हैं?

उत्तर ⇒ भारत की जलवायु पर वायु दाब एवं पवन तंत्र का गहरा प्रभाव पड़ता है। किसी स्थान का वायु दाब उसके अक्षांश तथा ऊँचाई पर निर्भर करता है। भारत की जलवायु मुख्यतः वायु दाब एवं पवनें, ऊपरी वायु परिसंचरण तथा पश्चिमी चक्रवाती विक्षोभ एवं उष्णकटिबंधीय चक्रवातों से प्रभावित होती है। इन वायुमंडलीय प्रक्रियाओं के कारण देश के विभिन्न भागों में वर्षा तथा तापमान का वितरण अलग-अलग होता है। मानसूनी हवाएँ भी इसी वायु दाब प्रणाली के कारण विकसित होती हैं।

(i) वायु दाब जलवायु को प्रभावित करता है।

(ii) पवनें वर्षा लाती हैं।

(iii) ऊपरी वायु परिसंचरण महत्वपूर्ण है।

(iv) चक्रवाती विक्षोभ प्रभाव डालते हैं।

(v) मानसून वायु दाब से जुड़ा है।

7. समुद्र से दूरी एवं महासागरीय धाराओं का जलवायु पर प्रभाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ समुद्र का जलवायु पर समकारी प्रभाव पड़ता है। समुद्र के निकट स्थित क्षेत्रों में तापमान का अंतर कम रहता है, जबकि समुद्र से दूर स्थित क्षेत्रों में ग्रीष्म ऋतु अधिक गर्म तथा शीत ऋतु अधिक ठंडी होती है। इसे महाद्वीपीय जलवायु कहा जाता है। महासागरीय धाराएँ भी तटीय क्षेत्रों की जलवायु को प्रभावित करती हैं। गर्म जलधाराएँ तटीय क्षेत्रों को गर्म एवं आर्द्र बनाती हैं, जबकि ठंडी जलधाराएँ जलवायु को ठंडा एवं शुष्क बनाती हैं।

(i) समुद्र तापमान को संतुलित करता है।

(ii) तटीय क्षेत्रों में सम जलवायु होती है।

(iii) आंतरिक भागों में महाद्वीपीय जलवायु होती है।

(iv) गर्म जलधाराएँ आर्द्रता बढ़ाती हैं।

(v) ठंडी जलधाराएँ तापमान घटाती हैं।

8. उच्चावच (भू-आकृति) भारत की जलवायु को कैसे प्रभावित करता है?

उत्तर ⇒ पर्वत एवं अन्य भू-आकृतियाँ भारत की जलवायु को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पर्वत पवनों के मार्ग में अवरोध उत्पन्न करते हैं, जिससे पवनमुखी ढाल पर अधिक वर्षा होती है जबकि पवनविमुख ढाल पर कम वर्षा होती है। हिमालय मध्य एशिया की ठंडी हवाओं को भारत में प्रवेश करने से रोकता है। पश्चिमी घाट भी दक्षिण-पश्चिम मानसून से भारी वर्षा प्राप्त करते हैं। इस प्रकार भू-आकृति वर्षा, तापमान तथा पवनों के वितरण को नियंत्रित करती है।

(i) पर्वत पवनों को रोकते हैं।

(ii) पवनमुखी ढाल पर अधिक वर्षा होती है।

(iii) पवनविमुख ढाल पर कम वर्षा होती है।

(iv) हिमालय ठंडी हवाओं को रोकता है।

(v) पश्चिमी घाट भारी वर्षा प्राप्त करते हैं।

9. कोरिओलिस बल क्या है? इसका प्रभाव बताइए।

उत्तर ⇒ पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न होने वाले आभासी बल को कोरिओलिस बल कहा जाता है। इसे फेरेल का नियम भी कहते हैं। इस बल के कारण उत्तरी गोलार्द्ध में पवनें अपनी दिशा से दाहिनी ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बाईं ओर मुड़ जाती हैं। यही कारण है कि व्यापारिक पवनों तथा मानसूनी पवनों की दिशा में परिवर्तन होता है। कोरिओलिस बल वैश्विक पवन प्रणाली तथा मौसम संबंधी घटनाओं को समझने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

(i) पृथ्वी के घूर्णन से उत्पन्न होता है।

(ii) इसे फेरेल का नियम भी कहते हैं।

(iii) उत्तरी गोलार्द्ध में पवनें दाहिनी ओर मुड़ती हैं।

(iv) दक्षिणी गोलार्द्ध में बाईं ओर मुड़ती हैं।

(v) मानसूनी पवनों की दिशा प्रभावित होती है।

10. दक्षिण-पश्चिम मानसून का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत की मुख्य वर्षा लाने वाली पवन प्रणाली है। जून के प्रारंभ में उत्तर भारत में निम्न वायुदाब का क्षेत्र विकसित होता है, जिससे दक्षिणी गोलार्द्ध की दक्षिण-पूर्व व्यापारिक पवनें आकर्षित होकर भूमध्य रेखा पार करती हैं। कोरिओलिस बल के प्रभाव से ये दक्षिण-पश्चिमी दिशा में मुड़ जाती हैं। ये पवनें हिंद महासागर से पर्याप्त नमी लेकर भारत पहुँचती हैं और जून से सितंबर तक देश के अधिकांश भागों में वर्षा करती हैं। इसी कारण भारत की जलवायु को मानसूनी जलवायु कहा जाता है।

(i) भारत की मुख्य वर्षा लाती हैं।

(ii) जून से सितंबर तक सक्रिय रहती हैं।

(iii) महासागर से नमी प्राप्त करती हैं।

(iv) निम्न वायुदाब के कारण भारत आती हैं।

(v) भारत की मानसूनी जलवायु का आधार हैं।

11. भारत की मुख्य ऋतुओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ भारत में मुख्य रूप से चार ऋतुएँ पाई जाती हैं— शीत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु, वर्षा ऋतु (दक्षिण-पश्चिम मानसून) तथा मानसून की वापसी (परिवर्तनीय मौसम)। शीत ऋतु मध्य नवंबर से फरवरी तक रहती है। मार्च से मई तक ग्रीष्म ऋतु होती है। जून से सितंबर तक दक्षिण-पश्चिम मानसून के कारण देश के अधिकांश भागों में वर्षा होती है। अक्टूबर एवं नवंबर में मानसून की वापसी होती है, जिसे परिवर्तनीय मौसम कहा जाता है। प्रत्येक ऋतु की अपनी अलग जलवायु विशेषताएँ होती हैं, जो कृषि, जनजीवन तथा अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं।

(i) भारत में चार प्रमुख ऋतुएँ हैं।

(ii) शीत ऋतु नवंबर से फरवरी तक रहती है।

(iii) ग्रीष्म ऋतु मार्च से मई तक होती है।

(iv) वर्षा ऋतु जून से सितंबर तक रहती है।

(v) अक्टूबर-नवंबर मानसून की वापसी का समय है।

12. भारत की शीत ऋतु का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ भारत के उत्तरी भागों में शीत ऋतु मध्य नवंबर से फरवरी तक रहती है। दिसंबर और जनवरी सबसे ठंडे महीने होते हैं। इस ऋतु में तापमान दक्षिण से उत्तर की ओर घटता जाता है। चेन्नई का औसत तापमान लगभग 24°–25°C रहता है, जबकि उत्तरी मैदानों में यह लगभग 10°–15°C होता है। इस समय उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनें स्थल से समुद्र की ओर बहती हैं, जिससे अधिकांश भागों में शुष्क मौसम रहता है। हिमालय के ऊपरी भागों में हिमपात तथा उत्तरी मैदानों में तुषारापात सामान्य घटना है।

(i) शीत ऋतु नवंबर से फरवरी तक रहती है।

(ii) दिसंबर और जनवरी सबसे ठंडे महीने हैं।

(iii) उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनें चलती हैं।

(iv) हिमालय में हिमपात होता है।

(v) अधिकांश भागों में शुष्क मौसम रहता है।

13. भारत की ग्रीष्म ऋतु का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ भारत में मार्च से मई तक ग्रीष्म ऋतु रहती है। इस समय सूर्य की आभासी उत्तरगति के कारण तापमान तेजी से बढ़ता है। मई महीने में उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान लगभग 45°C तक पहुँच जाता है। अधिक तापमान के कारण उत्तर-पश्चिम भारत में निम्न वायुदाब का क्षेत्र विकसित होता है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून को आकर्षित करता है। समुद्री प्रभाव के कारण प्रायद्वीपीय भारत में तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है। यह ऋतु मानसून के आगमन की तैयारी का समय मानी जाती है।

(i) ग्रीष्म ऋतु मार्च से मई तक रहती है।

(ii) तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है।

(iii) उत्तर-पश्चिम भारत में निम्न दाब बनता है।

(iv) समुद्री क्षेत्रों में तापमान कम रहता है।

(v) मानसून के आगमन की तैयारी होती है।

14. ग्रीष्म ऋतु की प्रमुख मौसमीय घटनाओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ ग्रीष्म ऋतु में अनेक महत्वपूर्ण मौसमीय घटनाएँ होती हैं। लू उत्तर एवं उत्तर-पश्चिम भारत में चलने वाली गर्म एवं शुष्क हवाएँ हैं। धूल भरी आँधियाँ तापमान कम करके कुछ राहत पहुँचाती हैं। पश्चिम बंगाल में गरज एवं तेज वर्षा को काल-बैशाखी कहा जाता है। कर्नाटक एवं केरल में ग्रीष्म ऋतु के अंत में होने वाली पूर्व-मानसूनी वर्षा को आम्र वर्षा कहते हैं, जिससे आम जल्दी पक जाते हैं। ये सभी घटनाएँ भारत की मानसूनी जलवायु की महत्वपूर्ण विशेषताएँ हैं।

(i) लू गर्म एवं शुष्क हवा है।

(ii) धूल भरी आँधियाँ राहत देती हैं।

(iii) काल-बैशाखी पश्चिम बंगाल में होती है।

(iv) आम्र वर्षा दक्षिण भारत में होती है।

(v) ये ग्रीष्म ऋतु की प्रमुख घटनाएँ हैं।

15. वर्षा ऋतु अथवा दक्षिण-पश्चिम मानसून का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ भारत में वर्षा ऋतु जून से सितंबर तक रहती है। जून के प्रारंभ में उत्तर भारत में निम्न वायुदाब का क्षेत्र विकसित होता है, जिससे दक्षिणी गोलार्द्ध की व्यापारिक पवनें आकर्षित होकर हिंद महासागर से नमी लेकर भारत पहुँचती हैं। ये पवनें दक्षिण-पश्चिम मानसून कहलाती हैं। लगभग एक महीने में ये पूरे देश में फैल जाती हैं और भारत की अधिकांश वार्षिक वर्षा कराती हैं। कृषि, जल संसाधन तथा जनजीवन इस मानसून पर अत्यधिक निर्भर करते हैं।

(i) जून से सितंबर तक सक्रिय रहता है।

(ii) हिंद महासागर से नमी लाता है।

(iii) भारत की मुख्य वर्षा कराता है।

(iv) कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

(v) निम्न वायुदाब के कारण विकसित होता है।

16. भारत में वर्षा के वितरण का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ भारत में वर्षा का वितरण अत्यंत असमान है। पश्चिमी घाट के पवनमुखी भागों तथा उत्तर-पूर्व भारत में 250–400 सेंटीमीटर या उससे अधिक वर्षा होती है। मासिनराम विश्व का सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान है। गंगा के मैदानों में वर्षा पूर्व से पश्चिम की ओर घटती जाती है। राजस्थान, गुजरात तथा लद्दाख जैसे क्षेत्रों में बहुत कम वर्षा होती है। वर्षा के इस असमान वितरण के कारण देश के कुछ भागों में बाढ़ तथा कुछ भागों में सूखे की समस्या बनी रहती है।

(i) वर्षा का वितरण असमान है।

(ii) उत्तर-पूर्व भारत में सर्वाधिक वर्षा होती है।

(iii) मासिनराम सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान है।

(iv) राजस्थान में कम वर्षा होती है।

(v) गंगा के मैदान में पूर्व से पश्चिम वर्षा घटती है।

17. मानसूनी वर्षा की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ भारत की मानसूनी वर्षा की सबसे बड़ी विशेषता इसका अनियमित एवं मौसमी स्वरूप है। मानसूनी वर्षा लगातार नहीं होती, बल्कि इसमें वर्षा तथा विराम का क्रम चलता रहता है। यह विराम मानसूनी गर्त की स्थिति में परिवर्तन के कारण आता है। जब मानसूनी गर्त हिमालय की ओर खिसक जाता है, तब मैदानी क्षेत्रों में सूखा तथा पर्वतीय क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा होती है। मानसून की अनिश्चितता के कारण देश के एक भाग में बाढ़ तथा दूसरे भाग में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

(i) मानसूनी वर्षा अनियमित होती है।

(ii) वर्षा के बीच विराम आता है।

(iii) मानसूनी गर्त इसका कारण है।

(iv) बाढ़ एवं सूखा दोनों हो सकते हैं।

(v) कृषि पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

18. मानसून की वापसी (परिवर्तनीय मौसम) का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ मानसून की वापसी अक्टूबर एवं नवंबर के महीनों में होती है। सूर्य की दक्षिणायन स्थिति के कारण उत्तर भारत का निम्न वायुदाब समाप्त होने लगता है और उच्च वायुदाब विकसित हो जाता है। परिणामस्वरूप दक्षिण-पश्चिम मानसूनी पवनें धीरे-धीरे भारत से लौटने लगती हैं। इस समय दिन गर्म तथा रातें अपेक्षाकृत ठंडी होती हैं। उच्च तापमान एवं अधिक आर्द्रता के कारण उत्पन्न असहनीय स्थिति को ‘क्वार की उमस’ कहा जाता है। यह ऋतु वर्षा और शीत ऋतु के बीच संक्रमण काल है।

(i) अक्टूबर-नवंबर में होती है।

(ii) दक्षिण-पश्चिम मानसून लौटता है।

(iii) दिन गर्म रहते हैं।

(iv) रातें ठंडी होने लगती हैं।

(v) क्वार की उमस इस ऋतु की विशेषता है।

19. परिवर्तनीय मौसम में चक्रवातीय गतिविधियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ परिवर्तनीय मौसम के दौरान बंगाल की खाड़ी तथा अंडमान सागर के ऊपर चक्रवाती निम्न वायुदाब का विकास होता है। ये चक्रवात मुख्यतः भारत के पूर्वी तट, विशेषकर गोदावरी, कृष्णा एवं कावेरी नदी डेल्टा क्षेत्रों को प्रभावित करते हैं। कभी-कभी ओडिशा, पश्चिम बंगाल तथा बांग्लादेश के तटीय क्षेत्रों में भी भारी वर्षा और तेज हवाएँ लाते हैं। ये चक्रवात एक ओर वर्षा प्रदान करते हैं, तो दूसरी ओर भारी जन-धन की हानि भी पहुँचाते हैं।

(i) बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न होते हैं।

(ii) पूर्वी तट को प्रभावित करते हैं।

(iii) भारी वर्षा लाते हैं।

(iv) जन-धन की हानि होती है।

(v) डेल्टा क्षेत्र अधिक प्रभावित होते हैं।

20. भारत में वर्षा की विषमता तथा उसके प्रभावों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ भारत में मानसून की अनिश्चित प्रकृति के कारण वर्षा की मात्रा प्रत्येक वर्ष समान नहीं रहती। एक वर्ष से दूसरे वर्ष वर्षा की मात्रा में होने वाले अंतर को वर्षा की विषमता कहा जाता है। यह विषमता राजस्थान, गुजरात तथा पश्चिमी घाट के वृष्टि-छाया क्षेत्रों में अधिक पाई जाती है। अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में बाढ़ तथा कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इसका प्रतिकूल प्रभाव कृषि, जल संसाधनों, पशुपालन तथा जनजीवन पर पड़ता है।

(i) वर्षा की मात्रा हर वर्ष समान नहीं होती।

(ii) इसे वर्षा की विषमता कहते हैं।

(iii) राजस्थान में विषमता अधिक है।

(iv) बाढ़ एवं सूखे की समस्या उत्पन्न होती है।

(v) कृषि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

More Class 9 Geography Revision Notes

Chapter 1: भारत – आकार एवं स्थिति
Chapter 2: भारत का भौतिक स्वरूप
Chapter 3: अपवाह
Chapter 4: जलवायु
Chapter 5: प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी
Chapter 6: जनसंख्या

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