Class 9 Civics Revision Notes

लोकतांत्रिक अधिकार

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Chapter Overview

Class9
SubjectCivics 
Chapter Nameलोकतांत्रिक अधिकार
Resource TypeRevision Notes
SyllabusNCERT
Suitable ForCBSE, JAC and other state boards

लोकतांत्रिक अधिकार Revision Notes

1. अधिकार क्या हैं? अधिकारों की प्रमुख शर्तों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ अधिकार ऐसे तार्किक और न्यायसंगत दावे हैं जिन्हें समाज की स्वीकृति तथा कानून की मान्यता प्राप्त होती है। किसी दावे को अधिकार तभी कहा जाता है जब वह दूसरों के अधिकारों का उल्लंघन न करे, समाज उसे स्वीकार करे तथा उसे कानूनी संरक्षण प्राप्त हो। अधिकार नागरिकों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने, स्वतंत्रता का उपयोग करने तथा अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाने की शक्ति प्रदान करते हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिकार व्यक्ति और राज्य के बीच संतुलन बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

(i) अधिकार तार्किक दावे होते हैं।

(ii) समाज की स्वीकृति आवश्यक है।

(iii) कानूनी मान्यता आवश्यक है।

(iv) दूसरों के अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए।

(v) अधिकार सम्मानपूर्ण जीवन की गारंटी देते हैं।

2. लोकतंत्र में अधिकारों की आवश्यकता क्यों होती है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ लोकतंत्र की सफलता के लिए नागरिकों को अधिकार प्राप्त होना अत्यंत आवश्यक है। अधिकार नागरिकों को मतदान करने, चुनाव लड़ने तथा अपने विचार स्वतंत्र रूप से व्यक्त करने का अवसर प्रदान करते हैं। ये बहुसंख्यकों द्वारा अल्पसंख्यकों पर होने वाले अन्याय से रक्षा करते हैं तथा सरकार की शक्तियों पर नियंत्रण रखते हैं। यदि कोई सरकार नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन करती है, तो संविधान और न्यायपालिका उनकी रक्षा करते हैं। इसलिए अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद तथा नागरिक स्वतंत्रता की सुरक्षा का आधार हैं।

(i) लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं।

(ii) नागरिकों की स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं।

(iii) अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करते हैं।

(iv) सरकार की शक्तियों पर नियंत्रण रखते हैं।

(v) संविधान द्वारा संरक्षित होते हैं।

3. गुआंतानामो बे जेल की घटना अधिकारों के महत्व को कैसे स्पष्ट करती है?

उत्तर ⇒ गुआंतानामो बे जेल का उदाहरण बताता है कि अधिकारों के बिना व्यक्ति का जीवन कितना असुरक्षित हो सकता है। अमेरिका ने अनेक लोगों को केवल संदेह के आधार पर गिरफ्तार किया और बिना निष्पक्ष सुनवाई के वर्षों तक कैद रखा। उन्हें अदालत में अपील करने, परिवार से मिलने तथा कानूनी सहायता प्राप्त करने का अवसर नहीं दिया गया। एमनेस्टी इंटरनेशनल और संयुक्त राष्ट्र ने इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन माना। यह घटना स्पष्ट करती है कि मौलिक अधिकार, न्यायिक सुरक्षा तथा कानून का शासन प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा और स्वतंत्रता के लिए अनिवार्य हैं।

(i) बिना सुनवाई लोगों को कैद किया गया।

(ii) कानूनी अधिकारों का उल्लंघन हुआ।

(iii) मानवाधिकारों का हनन हुआ।

(iv) संयुक्त राष्ट्र ने विरोध किया।

(v) अधिकारों का महत्व स्पष्ट हुआ।

4. सऊदी अरब में नागरिक अधिकारों की स्थिति का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ सऊदी अरब में वंशानुगत राजतंत्र होने के कारण नागरिकों को लोकतांत्रिक अधिकार सीमित रूप में प्राप्त हैं। जनता को शासक चुनने या बदलने का अधिकार नहीं है। राजनीतिक दल बनाने, स्वतंत्र मीडिया चलाने तथा सरकार की आलोचना करने पर अनेक प्रतिबंध हैं। महिलाओं को पुरुषों की अपेक्षा कम अधिकार प्राप्त हैं तथा धार्मिक स्वतंत्रता भी सीमित है। यह स्थिति दर्शाती है कि अधिकारों के अभाव में व्यक्ति स्वतंत्र और समान जीवन नहीं जी सकता तथा उसका विकास बाधित होता है।

(i) वंशानुगत राजतंत्र है।

(ii) राजनीतिक स्वतंत्रता सीमित है।

(iii) महिलाओं के अधिकार सीमित हैं।

(iv) धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रतिबंध हैं।

(v) अधिकारों का महत्व स्पष्ट होता है।

5. कोसोवो के जातीय नरसंहार से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर ⇒ कोसोवो का जातीय नरसंहार यह सिद्ध करता है कि केवल चुनावों से लोकतंत्र सुरक्षित नहीं होता। लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकार भी यदि मानवाधिकारों और अल्पसंख्यकों की रक्षा न करे, तो गंभीर अत्याचार हो सकते हैं। सर्ब राष्ट्रवादी शासन के दौरान अल्बानियाई समुदाय पर हिंसा, हत्या तथा जबरन विस्थापन जैसी घटनाएँ हुईं। बाद में अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप से हिंसा रुकी। यह घटना बताती है कि लोकतंत्र के साथ-साथ मानवाधिकारों, न्यायपालिका की स्वतंत्रता तथा कानून के शासन का होना भी आवश्यक है।

(i) केवल चुनाव पर्याप्त नहीं हैं।

(ii) मानवाधिकारों की रक्षा आवश्यक है।

(iii) अल्पसंख्यकों की सुरक्षा जरूरी है।

(iv) अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप हुआ।

(v) लोकतंत्र में कानून का शासन आवश्यक है।

6. भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों का महत्व स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ भारतीय संविधान में नागरिकों के सबसे महत्वपूर्ण अधिकारों को मौलिक अधिकार कहा गया है। ये अधिकार संविधान की प्रस्तावना में वर्णित स्वतंत्रता, समानता और न्याय के आदर्शों को वास्तविक रूप प्रदान करते हैं। मौलिक अधिकार नागरिकों को सरकार की मनमानी से बचाते हैं तथा उनके सम्मानपूर्ण जीवन की रक्षा करते हैं। यदि इन अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो नागरिक न्यायालय की शरण ले सकते हैं। इसलिए मौलिक अधिकार भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला माने जाते हैं।

(i) संविधान द्वारा संरक्षित हैं।

(ii) स्वतंत्रता एवं समानता सुनिश्चित करते हैं।

(iii) सरकार की मनमानी रोकते हैं।

(iv) नागरिकों की गरिमा की रक्षा करते हैं।

(v) लोकतंत्र की आधारशिला हैं।

7. समानता के अधिकार का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ समानता का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 से 18 तक वर्णित है। इसके अनुसार सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हैं तथा राज्य धर्म, जाति, लिंग, नस्ल या जन्मस्थान के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं कर सकता। सरकारी नौकरियों में समान अवसर प्रदान किए जाते हैं। संविधान ने अस्पृश्यता को समाप्त कर उसे दंडनीय अपराध घोषित किया है तथा विशेष प्रकार की उपाधियों को समाप्त किया है। यह अधिकार सामाजिक न्याय एवं समान अवसर सुनिश्चित करता है।

(i) कानून के समक्ष सभी समान हैं।

(ii) भेदभाव का निषेध किया गया है।

(iii) सरकारी नौकरियों में समान अवसर हैं।

(iv) अस्पृश्यता समाप्त की गई है।

(v) सामाजिक समानता स्थापित होती है।

8. स्वतंत्रता के अधिकार का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ स्वतंत्रता का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 से 22 तक वर्णित है। इसके अंतर्गत नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा करने, संगठन बनाने, देश में कहीं भी आने-जाने, रहने तथा कोई भी व्यवसाय या पेशा अपनाने की स्वतंत्रता प्राप्त है। साथ ही किसी व्यक्ति को बिना कानूनी प्रक्रिया के उसकी स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता। हालांकि यह स्वतंत्रता असीमित नहीं है और इसका प्रयोग सार्वजनिक व्यवस्था तथा दूसरों के अधिकारों का सम्मान करते हुए किया जाना चाहिए।

(i) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त है।

(ii) संगठन बनाने का अधिकार है।

(iii) कहीं भी आने-जाने की स्वतंत्रता है।

(iv) व्यवसाय चुनने की स्वतंत्रता है।

(v) स्वतंत्रता पर उचित सीमाएँ लागू हैं।

9. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का महत्व स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार है। इसके अंतर्गत प्रत्येक नागरिक को बोलने, लिखने, चित्र, कविता या अन्य माध्यमों से अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार प्राप्त है। नागरिक सरकार की आलोचना भी कर सकते हैं। किंतु इस स्वतंत्रता का उपयोग हिंसा फैलाने, झूठी अफवाह फैलाने या विद्रोह भड़काने के लिए नहीं किया जा सकता। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक बहस, जनमत निर्माण तथा सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

(i) विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता मिलती है।

(ii) सरकार की आलोचना की जा सकती है।

(iii) लोकतांत्रिक बहस को बढ़ावा मिलता है।

(iv) हिंसा फैलाने की अनुमति नहीं है।

(v) उत्तरदायी शासन सुनिश्चित होता है।

10. शोषण के विरुद्ध अधिकार का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ शोषण के विरुद्ध अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 और 24 में वर्णित है। इसके अंतर्गत मानव तस्करी, बेगार तथा जबरन मजदूरी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। साथ ही 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों, खदानों तथा अन्य खतरनाक उद्योगों में काम पर लगाने की मनाही है। इस अधिकार का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को शोषण, अमानवीय व्यवहार तथा जबरन श्रम से सुरक्षा प्रदान करना तथा सम्मानपूर्ण जीवन सुनिश्चित करना है।

(i) मानव तस्करी पर रोक है।

(ii) बेगार एवं जबरन मजदूरी निषिद्ध है।

(iii) बाल श्रम पर प्रतिबंध है।

(iv) बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।

(v) शोषण से संरक्षण मिलता है।

11. धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 तक वर्णित है। इसके अंतर्गत प्रत्येक नागरिक को अपनी इच्छा से किसी भी धर्म को मानने, उसका पालन करने तथा उसका प्रचार करने की स्वतंत्रता प्राप्त है। धार्मिक समुदाय अपने धार्मिक संस्थानों का प्रबंधन स्वयं कर सकते हैं। किसी व्यक्ति को किसी विशेष धर्म के प्रचार के लिए कर देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। साथ ही सरकारी वित्त से पूर्णतः संचालित विद्यालयों में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाती। यह अधिकार भारत की धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था को मजबूत बनाता है तथा सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान की भावना विकसित करता है।

(i) किसी भी धर्म को मानने की स्वतंत्रता है।

(ii) धर्म का प्रचार करने का अधिकार है।

(iii) धार्मिक संस्थाओं का प्रबंधन किया जा सकता है।

(iv) धार्मिक आधार पर कर देने की बाध्यता नहीं है।

(v) धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा मिलता है।

12. शैक्षिक एवं सांस्कृतिक अधिकार का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ शैक्षिक एवं सांस्कृतिक अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 में दिए गए हैं। इनका उद्देश्य भारत की भाषाई, धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता की रक्षा करना है। प्रत्येक नागरिक, विशेषकर अल्पसंख्यक समुदायों को अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति को सुरक्षित रखने का अधिकार प्राप्त है। धार्मिक तथा भाषाई अल्पसंख्यक अपने शैक्षिक संस्थानों की स्थापना एवं संचालन भी कर सकते हैं। यह अधिकार भारतीय संस्कृति की विविधता और राष्ट्रीय एकता दोनों को मजबूत बनाता है।

(i) भाषा और संस्कृति की रक्षा होती है।

(ii) अल्पसंख्यकों को विशेष संरक्षण मिलता है।

(iii) शैक्षिक संस्थान स्थापित किए जा सकते हैं।

(iv) सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहती है।

(v) राष्ट्रीय एकता को बल मिलता है।

13. संवैधानिक उपचार का अधिकार क्या है? इसके महत्व का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ संवैधानिक उपचार का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 में दिया गया है। यदि किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो वह सीधे सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय की शरण ले सकता है। न्यायालय रिट जारी करके नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करते हैं। डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने इसे संविधान का “हृदय और आत्मा” कहा था। यह अधिकार अन्य सभी मौलिक अधिकारों को प्रभावी बनाता है तथा नागरिकों को न्याय प्राप्त करने का संवैधानिक साधन प्रदान करता है।

(i) अनुच्छेद 32 में वर्णित है।

(ii) सर्वोच्च न्यायालय में जाने का अधिकार देता है।

(iii) रिट जारी की जा सकती है।

(iv) मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है।

(v) संविधान का हृदय और आत्मा कहलाता है।

14. रिट (Writ) क्या है? इसका महत्व स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ रिट वह औपचारिक लिखित आदेश है जिसे सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय सरकार अथवा किसी प्राधिकरण को जारी करता है। जब किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तब न्यायालय रिट जारी करके उसके अधिकारों की रक्षा करता है। रिट के माध्यम से न्यायालय सरकार को आवश्यक निर्देश देता है तथा संविधान के अनुरूप कार्य करने के लिए बाध्य करता है। यह व्यवस्था न्यायपालिका को नागरिकों के अधिकारों का प्रभावी संरक्षक बनाती है।

(i) न्यायालय द्वारा जारी लिखित आदेश है।

(ii) अधिकारों की रक्षा के लिए जारी होती है।

(iii) सरकार को निर्देश देती है।

(iv) संविधान का पालन सुनिश्चित करती है।

(v) न्यायपालिका की शक्ति का प्रमुख साधन है।

15. मौलिक अधिकारों की सुरक्षा कैसे की जाती है?

उत्तर ⇒ भारतीय संविधान नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों को विशेष शक्तियाँ प्रदान करता है। यदि किसी अधिकार का उल्लंघन होता है, तो नागरिक सीधे न्यायालय जा सकते हैं। न्यायालय रिट जारी कर सकते हैं, दोषियों को दंडित कर सकते हैं तथा आवश्यक होने पर पीड़ित को राहत या हर्जाना भी दिला सकते हैं। जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से सार्वजनिक हित के मामलों में भी न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है। इस प्रकार स्वतंत्र न्यायपालिका मौलिक अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा करती है।

(i) न्यायालय अधिकारों की रक्षा करते हैं।

(ii) रिट जारी की जाती है।

(iii) जनहित याचिका दायर की जा सकती है।

(iv) दोषियों पर कार्रवाई होती है।

(v) नागरिकों को न्याय मिलता है।

16. जनहित याचिका (PIL) क्या है? इसका महत्व बताइए।

उत्तर ⇒ जनहित याचिका (Public Interest Litigation – PIL) ऐसी न्यायिक व्यवस्था है जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति या संस्था सार्वजनिक हित से जुड़े मामलों में न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकती है। इसका उद्देश्य केवल व्यक्तिगत हित नहीं बल्कि समाज के व्यापक हित की रक्षा करना है। यदि सरकार की किसी कार्रवाई से जनता के अधिकार प्रभावित होते हैं, तो PIL के माध्यम से न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है। इससे न्याय सभी वर्गों तक पहुँचता है तथा प्रशासन की जवाबदेही बढ़ती है।

(i) सार्वजनिक हित की रक्षा के लिए दायर होती है।

(ii) कोई भी व्यक्ति याचिका दायर कर सकता है।

(iii) न्यायालय सरकार की समीक्षा करता है।

(iv) नागरिकों को न्याय मिलता है।

(v) लोकतंत्र मजबूत होता है।

17. समानता के अधिकार और स्वतंत्रता के अधिकार में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ समानता का अधिकार सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समान दर्जा तथा भेदभाव से सुरक्षा प्रदान करता है। इसके अंतर्गत धर्म, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर स्वतंत्रता का अधिकार नागरिकों को विचार व्यक्त करने, संगठन बनाने, कहीं भी आने-जाने, रहने तथा व्यवसाय करने की स्वतंत्रता देता है। समानता का अधिकार समान व्यवहार सुनिश्चित करता है, जबकि स्वतंत्रता का अधिकार व्यक्ति के स्वतंत्र विकास और अभिव्यक्ति की रक्षा करता है। दोनों अधिकार लोकतंत्र के लिए समान रूप से आवश्यक हैं।

(i) समानता भेदभाव समाप्त करती है।

(ii) स्वतंत्रता विचार व्यक्त करने का अधिकार देती है।

(iii) दोनों मौलिक अधिकार हैं।

(iv) लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं।

(v) नागरिकों की गरिमा की रक्षा करते हैं।

18. भारतीय संविधान में वर्णित छह मौलिक अधिकारों के नाम लिखिए।

उत्तर ⇒ भारतीय संविधान नागरिकों को छह मौलिक अधिकार प्रदान करता है। ये अधिकार नागरिकों की स्वतंत्रता, समानता, गरिमा तथा न्याय की रक्षा करते हैं। ये सभी अधिकार संविधान के भाग-III में वर्णित हैं तथा लोकतंत्र की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। ये अधिकार प्रत्येक नागरिक को सम्मानपूर्वक जीवन जीने तथा सरकार की मनमानी से सुरक्षा प्रदान करते हैं।

(i) समानता का अधिकार।

(ii) स्वतंत्रता का अधिकार।

(iii) शोषण के विरुद्ध अधिकार।

(iv) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार।

(v) शैक्षिक एवं सांस्कृतिक अधिकार तथा संवैधानिक उपचार का अधिकार।

19. लोकतंत्र और मौलिक अधिकारों के बीच संबंध स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ लोकतंत्र और मौलिक अधिकार एक-दूसरे के पूरक हैं। लोकतंत्र तभी सफल हो सकता है जब नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता, न्याय और सुरक्षा प्राप्त हो। मौलिक अधिकार नागरिकों को सरकार की मनमानी से बचाते हैं तथा उन्हें अपने विचार व्यक्त करने, चुनाव में भाग लेने और न्याय प्राप्त करने का अवसर देते हैं। ये अधिकार अल्पसंख्यकों की रक्षा करते हैं तथा सरकार की शक्तियों पर नियंत्रण स्थापित करते हैं। इसलिए मौलिक अधिकार लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की आत्मा माने जाते हैं।

(i) लोकतंत्र की सफलता के लिए आवश्यक हैं।

(ii) नागरिकों की स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं।

(iii) सरकार की शक्तियों पर नियंत्रण रखते हैं।

(iv) अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करते हैं।

(v) संविधान द्वारा संरक्षित हैं।

20. ‘लोकतांत्रिक अधिकार’ अध्याय से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर ⇒ यह अध्याय हमें बताता है कि अधिकार प्रत्येक नागरिक के सम्मानपूर्ण जीवन के लिए अनिवार्य हैं। लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं चलता, बल्कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा से मजबूत होता है। संविधान द्वारा प्रदत्त समानता, स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता, शोषण से सुरक्षा, सांस्कृतिक अधिकार तथा संवैधानिक उपचार नागरिकों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन प्रदान करते हैं। साथ ही यह अध्याय हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ दूसरों के अधिकारों का सम्मान करने तथा संविधान के प्रति आस्था रखने की प्रेरणा देता है।

(i) अधिकारों का महत्व समझ में आता है।

(ii) संविधान के प्रति सम्मान बढ़ता है।

(iii) लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संदेश मिलता है।

(iv) नागरिक कर्तव्यों की समझ विकसित होती है।

(v) अधिकारों के साथ जिम्मेदारियों का भी बोध होता है।

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Chapter 1: लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों?
Chapter 2: संविधान निर्माण
Chapter 3: चुनावी राजनीति
Chapter 4: संस्थाओं का कामकाज
Chapter 5: लोकतांत्रिक अधिकार

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