Class 9 History Revision Notes

नात्सीवाद और हिटलर का उदय

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Chapter Overview

Class9
SubjectHistory 
Chapter Nameनात्सीवाद और हिटलर का उदय
Resource TypeRevision Notes
SyllabusNCERT
Suitable ForCBSE, JAC and other state boards

नात्सीवाद और हिटलर का उदय Revision Notes

1. नात्सीवाद (Nazism) क्या था? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ नात्सीवाद जर्मनी में विकसित एक राजनीतिक और सामाजिक विचारधारा थी, जिसका नेतृत्व एडॉल्फ हिटलर ने किया। ‘नात्सी’ शब्द जर्मन भाषा के ‘नात्सियोणाल’ (National) शब्द से बना है, जो हिटलर की पार्टी के नाम का पहला शब्द था। नात्सीवाद का उद्देश्य जर्मनी को विश्व का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनाना, जर्मन आर्य नस्ल को सर्वोच्च सिद्ध करना तथा पूरे यूरोप पर प्रभुत्व स्थापित करना था। इस विचारधारा में लोकतंत्र का विरोध, तानाशाही का समर्थन तथा नस्लीय भेदभाव को बढ़ावा दिया गया। इसी विचारधारा के कारण लाखों निर्दोष लोगों का नरसंहार हुआ और द्वितीय विश्वयुद्ध जैसी विनाशकारी घटना हुई।

(i) नात्सीवाद एक राजनीतिक विचारधारा थी।

(ii) इसका नेतृत्व एडॉल्फ हिटलर ने किया।

(iii) इसका उद्देश्य जर्मनी को शक्तिशाली बनाना था।

(iv) इसमें आर्य नस्ल को श्रेष्ठ माना गया।

(v) इससे द्वितीय विश्वयुद्ध और नरसंहार हुआ।

2. नात्सीवाद के उदय के प्रमुख कारणों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ नात्सीवाद के उदय के पीछे कई कारण थे। प्रथम विश्वयुद्ध में जर्मनी की हार के बाद वर्साय की संधि (1919) ने जर्मनी पर कठोर शर्तें लागू कर दीं। इससे देश की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्थिति खराब हो गई। बेरोज़गारी, महँगाई और गरीबी बढ़ गई। जनता वाइमर गणराज्य से असंतुष्ट हो गई। 1929 की वैश्विक आर्थिक मंदी ने स्थिति और भी गंभीर बना दी। इन परिस्थितियों का लाभ उठाकर हिटलर ने राष्ट्रवाद, रोजगार और जर्मनी की खोई प्रतिष्ठा लौटाने का वादा किया। जनता ने उसका समर्थन किया और नात्सी पार्टी सत्ता तक पहुँच गई।

(i) प्रथम विश्वयुद्ध में हार हुई।

(ii) वर्साय संधि कठोर थी।

(iii) आर्थिक संकट बढ़ा।

(iv) जनता वाइमर सरकार से नाराज़ थी।

(v) हिटलर को जनसमर्थन मिला।

3. नात्सियों के अमानवीय अपराधों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ नात्सी शासन के दौरान मानव इतिहास के सबसे बड़े नरसंहारों में से एक हुआ। हिटलर ने यहूदियों, जिप्सियों, विकलांगों, राजनीतिक विरोधियों तथा अन्य समुदायों को अपना शत्रु मानकर उनके विरुद्ध जनसंहार की नीति अपनाई। लगभग 60 लाख यहूदियों, 2 लाख जिप्सियों, 10 लाख पोलैंड के नागरिकों तथा हजारों विकलांग और राजनीतिक विरोधियों की हत्या कर दी गई। लोगों को औशवित्स (Auschwitz) जैसे यातना शिविरों में भेजा जाता था, जहाँ जहरीली गैस से उनकी हत्या की जाती थी। यह नात्सी शासन का सबसे अमानवीय अपराध माना जाता है।

(i) लाखों लोगों की हत्या की गई।

(ii) यहूदियों को सबसे अधिक निशाना बनाया गया।

(iii) गैस चैंबरों का उपयोग हुआ।

(iv) औशवित्स प्रमुख यातना शिविर था।

(v) यह मानवता के विरुद्ध अपराध था।

4. औशवित्स (Auschwitz) क्या था? इसका महत्व बताइए।

उत्तर ⇒ औशवित्स नात्सी जर्मनी द्वारा स्थापित सबसे बड़ा कत्लखाना (Concentration and Extermination Camp) था। यहाँ लाखों यहूदियों, जिप्सियों तथा अन्य लोगों को बंदी बनाकर रखा जाता था। कैदियों से कठोर श्रम कराया जाता था और बाद में जहरीली गैस के माध्यम से उनकी हत्या कर दी जाती थी। औशवित्स मानव इतिहास में क्रूरता और नरसंहार का प्रतीक माना जाता है। यह नात्सी शासन की अमानवीय नीतियों का सबसे बड़ा प्रमाण है। आज यह स्थान मानवाधिकारों और शांति के महत्व की याद दिलाता है।

(i) औशवित्स सबसे बड़ा नात्सी शिविर था।

(ii) यहाँ लाखों लोगों को कैद किया गया।

(iii) गैस चैंबरों में हत्या की जाती थी।

(iv) यह नरसंहार का प्रतीक है।

(v) आज यह ऐतिहासिक स्मारक है।

5. मित्र राष्ट्र (Allied Powers) और धुरी राष्ट्र (Axis Powers) में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान विश्व के देश दो प्रमुख गुटों में बँट गए थे। मित्र राष्ट्र (Allied Powers) में मुख्य रूप से ब्रिटेन, फ्रांस, सोवियत संघ (रूस) और अमेरिका शामिल थे। इनका उद्देश्य नात्सी जर्मनी और उसके सहयोगियों को पराजित करना था। दूसरी ओर, धुरी राष्ट्र (Axis Powers) में जर्मनी, इटली और जापान शामिल थे। इन देशों ने मिलकर युद्ध लड़ा, लेकिन अंततः 1945 में मित्र राष्ट्रों के सामने पराजित हो गए।

आधारमित्र राष्ट्रधुरी राष्ट्र
प्रमुख देशब्रिटेन, फ्रांस, अमेरिका, सोवियत संघजर्मनी, इटली, जापान
उद्देश्यधुरी राष्ट्रों को हरानाविस्तारवादी नीति

(i) मित्र राष्ट्र युद्ध में विजयी हुए।

(ii) धुरी राष्ट्र पराजित हुए।

(iii) जर्मनी धुरी राष्ट्र का प्रमुख देश था।

(iv) अमेरिका मित्र राष्ट्र में था।

(v) द्वितीय विश्वयुद्ध 1945 में समाप्त हुआ.

6. न्यूरेम्बर्ग ट्रायल (Nuremberg Trial) क्या था?

उत्तर ⇒ द्वितीय विश्वयुद्ध समाप्त होने के बाद नात्सी नेताओं द्वारा किए गए युद्ध अपराधों और मानवता के विरुद्ध अपराधों की सुनवाई के लिए न्यूरेम्बर्ग में एक अंतरराष्ट्रीय सैनिक न्यायालय की स्थापना की गई। इस न्यायालय का उद्देश्य युद्ध अपराधियों को दंड देना तथा भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकना था। मुकदमे में अनेक नात्सी नेताओं को दोषी पाया गया। 11 प्रमुख नात्सी नेताओं को मृत्युदंड दिया गया तथा कई अन्य को आजीवन कारावास की सजा मिली। न्यूरेम्बर्ग ट्रायल अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।

(i) युद्ध अपराधों की सुनवाई हुई।

(ii) मानवता के विरुद्ध अपराधों का न्याय हुआ।

(iii) 11 नात्सियों को मृत्युदंड मिला।

(iv) कई को आजीवन कारावास मिला।

(v) अंतरराष्ट्रीय न्याय का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

7. प्रथम विश्वयुद्ध में जर्मनी की भूमिका का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ प्रथम विश्वयुद्ध (1914–1918) में जर्मनी ने ऑस्ट्रिया के साथ मिलकर ब्रिटेन, फ्रांस और रूस के विरुद्ध युद्ध लड़ा। प्रारंभिक वर्षों में जर्मनी को कई सफलताएँ मिलीं और उसने फ्रांस तथा बेल्जियम के कुछ भागों पर कब्ज़ा कर लिया। लेकिन 1917 में अमेरिका के युद्ध में शामिल होने से मित्र राष्ट्र अधिक शक्तिशाली हो गए। अंततः नवंबर 1918 में जर्मनी को हार स्वीकार करनी पड़ी। इस हार के कारण जर्मनी पर वर्साय की कठोर संधि थोपी गई, जिसने आगे चलकर नात्सीवाद के उदय का मार्ग प्रशस्त किया।

(i) जर्मनी प्रथम विश्वयुद्ध में शामिल था।

(ii) प्रारंभ में उसे सफलता मिली।

(iii) अमेरिका के आने से स्थिति बदली।

(iv) 1918 में जर्मनी हार गया।

(v) वर्साय संधि लागू हुई।

8. वर्साय की संधि (Treaty of Versailles) की प्रमुख शर्तें लिखिए।

उत्तर ⇒ प्रथम विश्वयुद्ध के बाद 1919 में जर्मनी और मित्र राष्ट्रों के बीच वर्साय की संधि हुई। यह संधि जर्मनी के लिए अत्यंत कठोर और अपमानजनक थी। इसके अनुसार जर्मनी को अपने उपनिवेश, लगभग 13% भूभाग और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों वाले क्षेत्र छोड़ने पड़े। उसकी सेना को सीमित कर दिया गया तथा उस पर 6 अरब पौंड का भारी जुर्माना लगाया गया। युद्ध से हुई तबाही के लिए भी जर्मनी को दोषी ठहराया गया। इन शर्तों के कारण जर्मनी में असंतोष फैल गया।

(i) 1919 में संधि हुई।

(ii) जर्मनी पर भारी जुर्माना लगाया गया।

(iii) भूभाग और उपनिवेश छीन लिए गए।

(iv) सेना सीमित कर दी गई।

(v) जर्मनी को युद्ध का दोषी माना गया।

9. वाइमर गणराज्य (Weimar Republic) की स्थापना कैसे हुई?

उत्तर ⇒ प्रथम विश्वयुद्ध में जर्मनी की हार और सम्राट के पदत्याग के बाद एक नई लोकतांत्रिक सरकार की स्थापना की गई, जिसे वाइमर गणराज्य कहा गया। वाइमर नगर में राष्ट्रीय सभा की बैठक हुई और एक लोकतांत्रिक संविधान बनाया गया। इस संविधान में संघीय शासन व्यवस्था, संसद (राइखस्टाग) तथा सभी वयस्क स्त्री-पुरुषों को समान मताधिकार दिया गया। यह जर्मनी में लोकतंत्र स्थापित करने का पहला महत्वपूर्ण प्रयास था। हालांकि बाद में आर्थिक और राजनीतिक संकटों के कारण यह सरकार कमजोर हो गई।

(i) प्रथम विश्वयुद्ध के बाद स्थापना हुई।

(ii) लोकतांत्रिक संविधान बनाया गया।

(iii) राइखस्टाग की स्थापना हुई।

(iv) सभी वयस्कों को मताधिकार मिला।

(v) बाद में यह सरकार कमजोर हो गई।

10. वाइमर गणराज्य के प्रति जनता में असंतोष क्यों था?

उत्तर ⇒ वाइमर गणराज्य की स्थापना लोकतांत्रिक व्यवस्था के रूप में हुई, लेकिन अधिकांश जर्मन इससे संतुष्ट नहीं थे। जनता प्रथम विश्वयुद्ध की हार और वर्साय की संधि के अपमान के लिए नई सरकार को जिम्मेदार मानती थी। भारी जुर्माना, बेरोज़गारी, महँगाई और आर्थिक संकट ने लोगों की समस्याएँ बढ़ा दीं। राजनीतिक अस्थिरता और कमजोर गठबंधन सरकारों के कारण जनता का लोकतंत्र से विश्वास उठने लगा। इसी असंतोष का लाभ उठाकर हिटलर और नात्सी पार्टी ने सत्ता प्राप्त की।

(i) युद्ध की हार से असंतोष था।

(ii) वर्साय संधि का विरोध था।

(iii) आर्थिक संकट बढ़ा।

(iv) लोकतंत्र कमजोर हुआ।

(v) हिटलर के उदय का मार्ग प्रशस्त हुआ।

11. प्रथम विश्वयुद्ध के बाद वाइमर गणराज्य पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर ⇒ प्रथम विश्वयुद्ध के बाद वाइमर गणराज्य को राजनीतिक और आर्थिक दोनों प्रकार की गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा। राजनीतिक रूप से उसे युद्ध में हार और वर्साय की संधि के अपमान का बोझ उठाना पड़ा। जनता ने पुराने साम्राज्य की गलतियों के लिए भी नई सरकार को दोषी ठहराया। आर्थिक रूप से जर्मनी पर भारी हर्जाना लगाया गया, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था कमजोर हो गई। बेरोज़गारी, महँगाई और गरीबी तेजी से बढ़ने लगी। इन समस्याओं के कारण जनता का लोकतांत्रिक सरकार से विश्वास उठने लगा और आगे चलकर नात्सी पार्टी को सत्ता में आने का अवसर मिला।

(i) राजनीतिक संकट उत्पन्न हुआ।

(ii) भारी हर्जाना देना पड़ा।

(iii) अर्थव्यवस्था कमजोर हुई।

(iv) जनता असंतुष्ट हो गई।

(v) नात्सीवाद के उदय का मार्ग प्रशस्त हुआ।

12. वाइमर गणराज्य के समर्थक और विरोधी कौन थे?

उत्तर ⇒ वाइमर गणराज्य के समर्थकों में मुख्य रूप से समाजवादी, कैथोलिक तथा डेमोक्रेट दलों के लोग शामिल थे। वे लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को मजबूत करना चाहते थे। दूसरी ओर, रूढ़िवादी तथा पुरातनपंथी राष्ट्रवादी इस गणराज्य के विरोधी थे। उन्होंने जनता के बीच यह प्रचार किया कि जर्मनी की हार और वर्साय संधि के लिए वाइमर सरकार जिम्मेदार है। विरोधियों ने सरकार के समर्थकों को “नवंबर के अपराधी” कहकर बदनाम किया। इस प्रचार का जनता पर गहरा प्रभाव पड़ा और लोकतंत्र कमजोर होता गया।

समर्थकविरोधी
समाजवादीरूढ़िवादी
कैथोलिकराष्ट्रवादी
डेमोक्रेटपुरातनपंथी

(i) समाजवादी समर्थक थे।

(ii) कैथोलिक समर्थक थे।

(iii) राष्ट्रवादी विरोधी थे।

(iv) “नवंबर के अपराधी” कहा गया।

(v) लोकतंत्र कमजोर हुआ।

13. प्रथम विश्वयुद्ध का यूरोप पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर ⇒ प्रथम विश्वयुद्ध ने पूरे यूरोप को आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से कमजोर कर दिया। युद्ध से पहले यूरोप विश्व का प्रमुख ऋणदाता था, लेकिन युद्ध के बाद वह कर्जदार बन गया। लाखों लोगों की मृत्यु हुई और उद्योग-धंधे नष्ट हो गए। समाज में सैनिकों को अधिक सम्मान मिलने लगा तथा आक्रामक राष्ट्रवाद को बढ़ावा मिला। लोकतंत्र कमजोर हुआ और कई देशों में तानाशाही प्रवृत्तियाँ बढ़ने लगीं। युद्ध के कारण यूरोप की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई कि आगे चलकर अनेक देशों में राजनीतिक अस्थिरता और सामाजिक तनाव बढ़ गया।

(i) यूरोप आर्थिक रूप से कमजोर हुआ।

(ii) भारी जनहानि हुई।

(iii) राष्ट्रवाद बढ़ा।

(iv) लोकतंत्र कमजोर हुआ।

(v) तानाशाही प्रवृत्तियाँ बढ़ीं।

14. यूरोपीय समाज पर प्रथम विश्वयुद्ध के प्रभावों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ प्रथम विश्वयुद्ध के बाद यूरोपीय समाज में कई बड़े परिवर्तन हुए। सैनिकों को आम नागरिकों की तुलना में अधिक सम्मान मिलने लगा। मीडिया ने युद्ध और सैनिकों के जीवन का महिमामंडन किया, जबकि वास्तविकता बहुत कठिन थी। सैनिकों को खंदकों में रहना पड़ता था, जहाँ वे जहरीली गैस, लगातार गोलाबारी और कठिन परिस्थितियों का सामना करते थे। युद्ध ने समाज में हिंसा, आक्रामकता और सैन्य भावना को बढ़ावा दिया। लोगों के जीवन में असुरक्षा और भय का वातावरण भी बढ़ गया।

(i) सैनिकों का सम्मान बढ़ा।

(ii) मीडिया ने युद्ध का प्रचार किया।

(iii) सैनिक कठिन परिस्थितियों में रहे।

(iv) समाज में हिंसा बढ़ी।

(v) भय और असुरक्षा का वातावरण बना।

15. यूरोप की राजनीति पर प्रथम विश्वयुद्ध का क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर ⇒ प्रथम विश्वयुद्ध के बाद यूरोप की राजनीति में बड़े परिवर्तन हुए। युद्ध के कारण राष्ट्रवाद और सैन्यवाद को बढ़ावा मिला। कई देशों में लोकतांत्रिक संस्थाएँ कमजोर हो गईं और जनता का लोकतंत्र से विश्वास कम होने लगा। आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता के कारण लोग मजबूत नेताओं की तलाश करने लगे। इसी वातावरण में जर्मनी में हिटलर और इटली में मुसोलिनी जैसे तानाशाह सत्ता में आए। इस प्रकार युद्ध ने यूरोप में लोकतंत्र को कमजोर तथा तानाशाही को मजबूत किया।

(i) राष्ट्रवाद बढ़ा।

(ii) लोकतंत्र कमजोर हुआ।

(iii) तानाशाही मजबूत हुई।

(iv) जनता मजबूत नेता चाहती थी।

(v) हिटलर के उदय का मार्ग बना।

16. खंदक (Trench) क्या होती थी?

उत्तर ⇒ प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान सैनिकों की सुरक्षा के लिए युद्ध क्षेत्र में लंबे और गहरे गड्ढे खोदे जाते थे, जिन्हें खंदक (Trench) कहा जाता था। सैनिक इन खंदकों में रहकर दुश्मनों के हमलों से बचते थे। खंदकों का जीवन अत्यंत कठिन था। वहाँ गंदगी, बारिश, कीचड़, चूहे तथा जहरीली गैस का खतरा हमेशा बना रहता था। सैनिकों को कई दिनों तक इन्हीं खंदकों में रहकर युद्ध करना पड़ता था। इसलिए प्रथम विश्वयुद्ध को “खंदकों का युद्ध” भी कहा जाता है।

(i) खंदक युद्ध क्षेत्र में खोदी जाती थी।

(ii) सैनिकों की सुरक्षा के लिए बनाई जाती थी।

(iii) जीवन अत्यंत कठिन था।

(iv) गंदगी और गैस का खतरा रहता था।

(v) प्रथम विश्वयुद्ध में इनका व्यापक उपयोग हुआ।

17. स्पार्टाकिस्ट विद्रोह (Spartacist Revolt) क्या था?

उत्तर ⇒ वाइमर गणराज्य की स्थापना के समय जर्मनी में स्पार्टाकिस्ट लीग ने रूस की बोल्शेविक क्रांति से प्रेरित होकर विद्रोह किया। उनका उद्देश्य जर्मनी में भी सोवियत शैली की साम्यवादी सरकार स्थापित करना था। उन्होंने कई शहरों में मजदूरों और नाविकों की सोवियतें बनाई तथा विद्रोह शुरू किया। वाइमर सरकार ने सेना और फ़्री कोर की सहायता से इस विद्रोह को दबा दिया। बाद में स्पार्टाकिस्टों ने जर्मनी की कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की।

(i) बोल्शेविक क्रांति से प्रेरित था।

(ii) साम्यवादी शासन स्थापित करना चाहते थे।

(iii) वाइमर सरकार ने विद्रोह दबाया।

(iv) फ़्री कोर का उपयोग किया गया।

(v) बाद में कम्युनिस्ट पार्टी बनी।

18. स्पार्टाकिस्ट विद्रोह के परिणाम लिखिए।

उत्तर ⇒ स्पार्टाकिस्ट विद्रोह के बाद जर्मनी की राजनीति में गहरा विभाजन उत्पन्न हो गया। वाइमर सरकार ने फ़्री कोर की सहायता से विद्रोह को कुचल दिया। इसके बाद स्पार्टाकिस्ट नेताओं ने जर्मनी की कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की। समाजवादी और कम्युनिस्ट दलों के बीच कटुता बढ़ गई। इस विभाजन का लाभ आगे चलकर हिटलर और नात्सी पार्टी को मिला क्योंकि लोकतांत्रिक दल एकजुट होकर उनका विरोध नहीं कर सके।

(i) विद्रोह असफल हुआ।

(ii) कम्युनिस्ट पार्टी बनी।

(iii) समाजवादी और कम्युनिस्ट अलग हुए।

(iv) लोकतांत्रिक दल कमजोर हुए।

(v) हिटलर को लाभ मिला।

19. 1923 के आर्थिक संकट (अति-मुद्रास्फीति) के कारण लिखिए।

उत्तर ⇒ 1923 में जर्मनी गंभीर आर्थिक संकट से गुजरा। प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान उसने भारी कर्ज लिया था और युद्ध के बाद वर्साय संधि के अनुसार भारी हर्जाना भी देना पड़ा। जब जर्मनी हर्जाना देने में असफल रहा तो फ्रांस ने रूर क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। इसके विरोध में जर्मन सरकार ने अत्यधिक मात्रा में कागजी मुद्रा छापनी शुरू कर दी। इससे मुद्रा का मूल्य तेजी से गिर गया और वस्तुओं की कीमतें बहुत अधिक बढ़ गईं। इस स्थिति को अति-मुद्रास्फीति (Hyperinflation) कहा जाता है।

(i) युद्ध का कर्ज था।

(ii) भारी हर्जाना देना पड़ा।

(iii) रूर क्षेत्र पर कब्जा हुआ।

(iv) अत्यधिक मुद्रा छापी गई।

(v) अति-मुद्रास्फीति उत्पन्न हुई।

20. अति-मुद्रास्फीति (Hyperinflation) क्या है? इसके प्रभाव लिखिए।

उत्तर ⇒ जब किसी देश की मुद्रा का मूल्य बहुत तेजी से गिर जाता है और वस्तुओं की कीमतें अत्यधिक बढ़ जाती हैं, तब उस स्थिति को अति-मुद्रास्फीति (Hyperinflation) कहा जाता है। 1923 में जर्मनी में यही स्थिति उत्पन्न हुई। लोगों की बचत बेकार हो गई और रोजमर्रा की वस्तुएँ खरीदना भी कठिन हो गया। लोग रोटी खरीदने के लिए बैलगाड़ियों में नोट भरकर ले जाते थे। वेतन का मूल्य घट गया और मध्यवर्ग सबसे अधिक प्रभावित हुआ। इस आर्थिक संकट से जनता का सरकार पर विश्वास समाप्त हो गया।

(i) मुद्रा का मूल्य तेजी से गिरता है।

(ii) वस्तुओं की कीमतें बहुत बढ़ जाती हैं।

(iii) लोगों की बचत समाप्त हो जाती है।

(iv) महँगाई चरम पर पहुँच जाती है।

(v) जनता आर्थिक संकट का सामना करती है।

21. डॉव्स योजना (Dawes Plan) क्या थी? इसका महत्व बताइए।

उत्तर ⇒ 1924 में जर्मनी की बिगड़ती हुई अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए अमेरिका की सहायता से डॉव्स योजना (Dawes Plan) लागू की गई। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी भारी हर्जाने और आर्थिक संकट से जूझ रहा था। इस योजना के अंतर्गत जर्मनी पर लगाए गए हर्जाने के भुगतान की शर्तों को पुनर्निर्धारित किया गया तथा उसे आर्थिक सहायता और ऋण उपलब्ध कराया गया। इससे जर्मनी की अर्थव्यवस्था में कुछ समय के लिए स्थिरता आई, उद्योगों को बढ़ावा मिला तथा अति-मुद्रास्फीति पर नियंत्रण पाया गया। डॉव्स योजना ने जर्मनी को आर्थिक संकट से उबरने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की।

(i) 1924 में लागू हुई।

(ii) अमेरिका की सहायता से बनी।

(iii) हर्जाने की शर्तें बदली गईं।

(iv) अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ।

(v) अति-मुद्रास्फीति पर नियंत्रण मिला।

22. वैश्विक आर्थिक मंदी (1929) के प्रमुख कारण लिखिए।

उत्तर ⇒ 1929 की वैश्विक आर्थिक मंदी की शुरुआत अमेरिका के वॉल स्ट्रीट शेयर बाजार के ध्वस्त होने से हुई। अक्टूबर 1929 में निवेशकों ने बड़ी संख्या में अपने शेयर बेचने शुरू कर दिए, जिससे शेयरों की कीमतें तेजी से गिर गईं। बैंक और उद्योग आर्थिक संकट में फँस गए। उत्पादन कम हो गया, निर्यात घट गया और बेरोज़गारी तेजी से बढ़ने लगी। क्योंकि विश्व के अनेक देश अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर निर्भर थे, इसलिए इस संकट का प्रभाव पूरी दुनिया, विशेषकर जर्मनी, पर पड़ा। इस घटना को आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी आर्थिक मंदी माना जाता है।

(i) वॉल स्ट्रीट दुर्घटना मुख्य कारण थी।

(ii) शेयरों की कीमतें गिर गईं।

(iii) उद्योग प्रभावित हुए।

(iv) बेरोज़गारी बढ़ी।

(v) पूरी दुनिया प्रभावित हुई।

23. 1929 की महामंदी का जर्मनी पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर ⇒ 1929 की वैश्विक आर्थिक मंदी का सबसे अधिक प्रभाव जर्मनी पर पड़ा क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था अमेरिकी ऋण पर निर्भर थी। अमेरिकी सहायता बंद होते ही उद्योगों का उत्पादन तेजी से घट गया। 1932 तक औद्योगिक उत्पादन 1929 के स्तर का लगभग 40 प्रतिशत रह गया। लगभग 60 लाख लोग बेरोज़गार हो गए। मजदूरों की आय घट गई, व्यापार ठप हो गया और जनता में निराशा फैल गई। इस संकट के कारण लोग लोकतांत्रिक सरकार से निराश होकर हिटलर और नात्सी पार्टी की ओर आकर्षित हुए।

(i) अमेरिकी सहायता बंद हो गई।

(ii) उद्योगों का उत्पादन घटा।

(iii) 60 लाख लोग बेरोज़गार हुए।

(iv) जनता में निराशा फैली।

(v) हिटलर को समर्थन मिला।

24. वैश्विक आर्थिक मंदी का जर्मनी के मध्यवर्ग और किसानों पर प्रभाव लिखिए।

उत्तर ⇒ वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण जर्मनी का मध्यवर्ग और किसान वर्ग गंभीर रूप से प्रभावित हुआ। मुद्रा के अवमूल्यन से मध्यवर्ग की वर्षों की बचत समाप्त हो गई। छोटे व्यापारी, पेंशनभोगी और वेतनभोगी कर्मचारी आर्थिक संकट में फँस गए। दूसरी ओर किसानों की कृषि उपज की कीमतें तेजी से गिर गईं, जिससे उनकी आय कम हो गई और वे कर्ज में डूब गए। इन कठिन परिस्थितियों के कारण समाज में असंतोष बढ़ा और लोगों ने नात्सी पार्टी को समर्थन देना शुरू किया।

(i) मध्यवर्ग की बचत समाप्त हुई।

(ii) व्यापार प्रभावित हुआ।

(iii) किसानों की आय घट गई।

(iv) कर्ज बढ़ गया।

(v) नात्सी पार्टी को लाभ मिला।

25. वाइमर गणराज्य की संवैधानिक कमजोरियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ वाइमर गणराज्य का संविधान लोकतांत्रिक था, लेकिन उसमें कुछ महत्वपूर्ण कमजोरियाँ थीं। आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के कारण किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता था, जिससे बार-बार गठबंधन सरकारें बनती और गिरती थीं। दूसरी ओर, अनुच्छेद 48 के तहत राष्ट्रपति को आपातकाल घोषित करने तथा अध्यादेश द्वारा शासन चलाने का अधिकार प्राप्त था। इन प्रावधानों का कई बार दुरुपयोग हुआ। परिणामस्वरूप लोकतंत्र कमजोर होता गया और जनता का विश्वास संसदीय व्यवस्था से उठने लगा।

(i) गठबंधन सरकारें बनती थीं।

(ii) स्थिर सरकार नहीं बनती थी।

(iii) अनुच्छेद 48 का दुरुपयोग हुआ।

(iv) लोकतंत्र कमजोर हुआ।

(v) जनता का विश्वास कम हुआ।

26. वाइमर गणराज्य के अनुच्छेद 48 (Article 48) का महत्व बताइए।

उत्तर ⇒ वाइमर संविधान के अनुच्छेद 48 के अनुसार राष्ट्रपति को विशेष परिस्थितियों में आपातकाल घोषित करने का अधिकार प्राप्त था। इसके अंतर्गत राष्ट्रपति नागरिकों के मौलिक अधिकारों को निलंबित कर सकता था तथा संसद की अनुमति के बिना अध्यादेश जारी करके शासन चला सकता था। यद्यपि इसका उद्देश्य संकट की स्थिति से निपटना था, लेकिन इसका कई बार राजनीतिक लाभ के लिए दुरुपयोग किया गया। इसी संवैधानिक प्रावधान ने आगे चलकर हिटलर को तानाशाही स्थापित करने में अप्रत्यक्ष सहायता प्रदान की।

(i) राष्ट्रपति को आपातकाल का अधिकार था।

(ii) नागरिक अधिकार निलंबित किए जा सकते थे।

(iii) अध्यादेश द्वारा शासन संभव था।

(iv) इसका दुरुपयोग हुआ।

(v) लोकतंत्र कमजोर हुआ।

27. प्रोपेगेंडा (Propaganda) क्या है?

उत्तर ⇒ प्रोपेगेंडा वह विशेष प्रकार का प्रचार है जिसके माध्यम से लोगों के विचारों, भावनाओं और जनमत को प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है। इसके लिए पोस्टर, रेडियो, भाषण, समाचार पत्र, फिल्में और अन्य संचार माध्यमों का उपयोग किया जाता है। नात्सी शासन के दौरान हिटलर ने प्रोपेगेंडा का व्यापक उपयोग किया। उसने स्वयं को जर्मनी का उद्धारकर्ता बताया तथा जनता को यह विश्वास दिलाया कि केवल नात्सी पार्टी ही देश की सभी समस्याओं का समाधान कर सकती है। इस प्रकार प्रोपेगेंडा नात्सीवाद के प्रसार का महत्वपूर्ण साधन बना।

(i) यह विशेष प्रकार का प्रचार है।

(ii) जनमत को प्रभावित करता है।

(iii) मीडिया का उपयोग किया जाता है।

(iv) हिटलर ने इसका व्यापक प्रयोग किया।

(v) नात्सीवाद फैलाने में सहायक बना।

28. एडॉल्फ हिटलर के प्रारंभिक जीवन का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ एडॉल्फ हिटलर का जन्म 1889 में ऑस्ट्रिया में हुआ था। उसका बचपन आर्थिक कठिनाइयों में बीता। स्थायी रोजगार न मिलने के कारण वह प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान जर्मन सेना में भर्ती हो गया। युद्ध के समय उसने संदेशवाहक और बाद में कॉर्पोरल के रूप में कार्य किया। बहादुरी के लिए उसे कई पदक भी मिले। प्रथम विश्वयुद्ध में जर्मनी की हार और वर्साय की संधि से वह अत्यंत आक्रोशित हो गया। यही घटनाएँ उसके राजनीतिक जीवन की शुरुआत का आधार बनीं।

(i) जन्म 1889 में हुआ।

(ii) जन्म ऑस्ट्रिया में हुआ।

(iii) प्रथम विश्वयुद्ध में सैनिक रहा।

(iv) कई पदक प्राप्त किए।

(v) युद्ध की हार से प्रभावित हुआ।

29. हिटलर ने राजनीति में प्रवेश कैसे किया?

उत्तर ⇒ प्रथम विश्वयुद्ध के बाद 1919 में हिटलर जर्मन वर्कर्स पार्टी नामक एक छोटे राजनीतिक दल में शामिल हुआ। अपनी प्रभावशाली भाषण कला और नेतृत्व क्षमता के कारण उसने शीघ्र ही पार्टी पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। बाद में इस पार्टी का नाम बदलकर नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी (नात्सी पार्टी) रखा गया। हिटलर ने राष्ट्रवाद, रोजगार और जर्मनी की खोई प्रतिष्ठा वापस लाने के वादों के माध्यम से जनता का समर्थन प्राप्त किया। धीरे-धीरे नात्सी पार्टी जर्मनी की सबसे शक्तिशाली राजनीतिक पार्टी बन गई।

(i) 1919 में राजनीति में आया।

(ii) जर्मन वर्कर्स पार्टी में शामिल हुआ।

(iii) पार्टी पर नियंत्रण स्थापित किया।

(iv) नात्सी पार्टी का गठन हुआ।

(v) जनता का समर्थन मिला।

30. हिटलर की लोकप्रियता के प्रमुख कारण लिखिए।

उत्तर ⇒ हिटलर एक प्रभावशाली वक्ता था, जो अपने भाषणों से लोगों की भावनाओं को प्रभावित करता था। उसने जर्मनी को फिर से शक्तिशाली बनाने, वर्साय की संधि का बदला लेने, बेरोज़गारों को रोजगार देने और देश की खोई प्रतिष्ठा लौटाने का वादा किया। उसने राष्ट्रवाद और प्रोपेगेंडा का प्रभावी उपयोग किया। 1929 की आर्थिक मंदी से परेशान जनता को उसमें एक मजबूत नेता दिखाई दिया। इसी कारण उसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी और नात्सी पार्टी सत्ता तक पहुँच गई।

(i) प्रभावशाली वक्ता था।

(ii) राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया।

(iii) रोजगार का वादा किया।

(iv) प्रोपेगेंडा का उपयोग किया।

(v) आर्थिक संकट का लाभ उठाया।

31. हिटलर की प्रचार शैली (Propaganda Technique) का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ हिटलर ने जनता को प्रभावित करने के लिए एक नई और प्रभावशाली प्रचार शैली अपनाई। उसने विशाल जनसभाएँ, रैलियाँ, झंडे, प्रतीक, नारे, भाषण, पोस्टर और रेडियो का व्यापक उपयोग किया। स्वस्तिक चिह्न वाले लाल झंडे, नात्सी सलामी तथा अनुशासित सैनिकों की परेड के माध्यम से शक्ति का प्रदर्शन किया जाता था। प्रचार के माध्यम से हिटलर को जर्मनी का उद्धारकर्ता और मसीहा के रूप में प्रस्तुत किया गया। आर्थिक संकट और बेरोज़गारी से परेशान जनता ने इस प्रचार पर विश्वास किया और नात्सी पार्टी का समर्थन करने लगी। इस प्रकार प्रोपेगेंडा नात्सीवाद के प्रसार का सबसे प्रभावी माध्यम बना।

(i) रैलियों और सभाओं का आयोजन किया गया।

(ii) स्वस्तिक प्रतीक का उपयोग हुआ।

(iii) हिटलर को मसीहा बताया गया।

(iv) रेडियो और पोस्टरों का उपयोग हुआ।

(v) जनता नात्सी पार्टी की ओर आकर्षित हुई।

32. कंसन्ट्रेशन कैंप (Concentration Camp) क्या थे?

उत्तर ⇒ कंसन्ट्रेशन कैंप ऐसे विशेष शिविर थे जहाँ नात्सी शासन अपने विरोधियों, यहूदियों, जिप्सियों तथा अन्य लोगों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के बंदी बनाकर रखता था। इन शिविरों के चारों ओर बिजली के करंट वाले काँटेदार तार लगाए जाते थे। कैदियों से कठोर श्रम कराया जाता था तथा उन्हें भोजन और चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाएँ भी नहीं मिलती थीं। अनेक लोगों को यातनाएँ देकर मार दिया जाता था या गैस चैंबरों में भेज दिया जाता था। ये शिविर नात्सी शासन की क्रूरता और मानवाधिकारों के उल्लंघन का प्रतीक हैं।

(i) बिना मुकदमे के लोगों को कैद किया जाता था।

(ii) काँटेदार तारों से घिरे होते थे।

(iii) कठोर श्रम कराया जाता था।

(iv) अमानवीय व्यवहार किया जाता था।

(v) मानवाधिकारों का उल्लंघन होता था।

33. हिटलर 1933 में सत्ता में कैसे आया?

उत्तर ⇒ 30 जनवरी 1933 को जर्मनी के राष्ट्रपति पॉल वॉन हिंडनबर्ग ने एडॉल्फ हिटलर को जर्मनी का चांसलर नियुक्त किया। उस समय नात्सी पार्टी देश की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति बन चुकी थी और उसे रूढ़िवादी दलों का भी समर्थन प्राप्त था। आर्थिक संकट, बेरोज़गारी तथा राजनीतिक अस्थिरता के कारण जनता एक मजबूत नेता चाहती थी। हिटलर ने इन परिस्थितियों का लाभ उठाया और लोकतांत्रिक व्यवस्था के माध्यम से सत्ता प्राप्त कर ली। इसके बाद उसने धीरे-धीरे लोकतंत्र समाप्त कर तानाशाही स्थापित कर दी।

(i) 30 जनवरी 1933 को चांसलर बना।

(ii) हिंडनबर्ग ने नियुक्त किया।

(iii) नात्सी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी थी।

(iv) जनता मजबूत नेता चाहती थी।

(v) बाद में तानाशाही स्थापित हुई।

34. संसद भवन में आग (Reichstag Fire) की घटना का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ फरवरी 1933 में जर्मनी के संसद भवन राइखस्टाग में रहस्यमय आग लग गई। नात्सी सरकार ने इसका आरोप कम्युनिस्टों पर लगाया, जबकि इस घटना का पूरा सत्य आज भी विवाद का विषय है। इस घटना को आधार बनाकर हिटलर ने अग्नि अध्यादेश (Fire Decree) लागू किया। इसके अंतर्गत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रेस की स्वतंत्रता तथा सभा करने के अधिकार जैसे नागरिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया। हजारों कम्युनिस्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। इस घटना ने जर्मनी में लोकतंत्र को कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

(i) संसद भवन में आग लगी।

(ii) आरोप कम्युनिस्टों पर लगाया गया।

(iii) अग्नि अध्यादेश लागू हुआ।

(iv) नागरिक अधिकार निलंबित हुए।

(v) लोकतंत्र कमजोर हुआ।

35. अग्नि अध्यादेश (Fire Decree) के प्रमुख प्रभाव लिखिए।

उत्तर ⇒ संसद भवन में आग लगने के बाद 28 फरवरी 1933 को अग्नि अध्यादेश लागू किया गया। इसके माध्यम से जर्मनी में नागरिकों के कई मौलिक अधिकार समाप्त कर दिए गए। प्रेस की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सभा करने के अधिकार पर रोक लगा दी गई। हजारों कम्युनिस्टों तथा राजनीतिक विरोधियों को गिरफ्तार कर कंसन्ट्रेशन कैंपों में भेज दिया गया। इस अध्यादेश ने हिटलर को अपने विरोधियों को समाप्त करने और तानाशाही स्थापित करने का अवसर प्रदान किया।

(i) नागरिक अधिकार समाप्त हुए।

(ii) प्रेस की स्वतंत्रता खत्म हुई।

(iii) विरोधियों को गिरफ्तार किया गया।

(iv) कंसन्ट्रेशन कैंपों में भेजा गया।

(v) तानाशाही मजबूत हुई।

36. इनेबलिंग एक्ट (Enabling Act) क्या था?

उत्तर ⇒ 3 मार्च 1933 को जर्मनी में इनेबलिंग एक्ट (विशेषाधिकार अधिनियम) पारित किया गया। इस कानून ने हिटलर को संसद की अनुमति के बिना अध्यादेश जारी करके शासन चलाने का अधिकार दे दिया। इसके बाद संसद की शक्तियाँ लगभग समाप्त हो गईं। सभी राजनीतिक दलों और ट्रेड यूनियनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया तथा मीडिया, न्यायपालिका और सेना पर नात्सी सरकार का पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो गया। इस अधिनियम ने लोकतंत्र को समाप्त कर जर्मनी में कानूनी रूप से तानाशाही स्थापित कर दी।

(i) 1933 में पारित हुआ।

(ii) हिटलर को विशेष अधिकार मिले।

(iii) संसद कमजोर हुई।

(iv) राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगा।

(v) तानाशाही स्थापित हुई।

37. नात्सी शासन में गेस्तापो (Gestapo) क्या था?

उत्तर ⇒ गेस्तापो (Gestapo) नात्सी जर्मनी की गुप्त राज्य पुलिस थी। इसका मुख्य कार्य सरकार के विरोधियों की खोज करना, उन्हें गिरफ्तार करना तथा नात्सी शासन के विरुद्ध किसी भी प्रकार के विरोध को समाप्त करना था। गेस्तापो को बिना मुकदमे के लोगों को गिरफ्तार करने, पूछताछ करने और कंसन्ट्रेशन कैंपों में भेजने का अधिकार प्राप्त था। इसके कारण पूरे जर्मनी में भय का वातावरण बना रहता था। गेस्तापो नात्सी शासन की सबसे शक्तिशाली और दमनकारी संस्थाओं में से एक थी।

(i) यह गुप्त राज्य पुलिस थी।

(ii) विरोधियों को गिरफ्तार करती थी।

(iii) बिना मुकदमे कार्रवाई करती थी।

(iv) कंसन्ट्रेशन कैंप भेजती थी।

(v) भय का वातावरण बनाती थी।

38. एसएस (SS) और एसडी (SD) का परिचय दीजिए।

उत्तर ⇒ नात्सी शासन में एसएस (Schutzstaffel) और एसडी (Security Service) दो प्रमुख सुरक्षा संगठन थे। एसएस का कार्य हिटलर की सुरक्षा करना तथा नात्सी शासन की नीतियों को लागू करना था। एसडी एक गुप्त खुफिया संस्था थी, जो सरकार के विरोधियों की जानकारी एकत्र करती थी। इन संगठनों को असाधारण अधिकार प्राप्त थे। वे किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकते थे तथा बिना न्यायिक प्रक्रिया के दंडित भी कर सकते थे। इन संस्थाओं ने नात्सी शासन को अत्यंत दमनकारी बना दिया।

(i) एसएस सुरक्षा संगठन था।

(ii) एसडी गुप्तचर संस्था थी।

(iii) दोनों को विशेष अधिकार मिले थे।

(iv) विरोधियों पर निगरानी रखते थे।

(v) नात्सी शासन को मजबूत बनाया।

39. हिटलर ने जर्मनी की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए क्या कदम उठाए?

उत्तर ⇒ सत्ता में आने के बाद हिटलर ने प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ह्यालमार शाख़्त को आर्थिक सुधारों की जिम्मेदारी सौंपी। सरकारी निवेश बढ़ाकर बड़े पैमाने पर रोजगार कार्यक्रम शुरू किए गए। नई सड़कों, पुलों और प्रसिद्ध ऑटोबान (सुपर हाईवे) का निर्माण कराया गया। फॉक्सवैगन जैसी योजनाओं को बढ़ावा दिया गया ताकि उद्योगों का विकास हो और लोगों को रोजगार मिले। इन उपायों से कुछ वर्षों में बेरोज़गारी कम हुई तथा जर्मनी की औद्योगिक उत्पादन क्षमता बढ़ी।

(i) सरकारी निवेश बढ़ाया गया।

(ii) रोजगार कार्यक्रम शुरू हुए।

(iii) सुपर हाईवे बनाए गए।

(iv) उद्योगों को बढ़ावा मिला।

(v) बेरोज़गारी में कमी आई।

40. हिटलर की विदेश नीति (Foreign Policy) का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ हिटलर की विदेश नीति का मुख्य उद्देश्य जर्मनी का विस्तार करना और वर्साय की संधि की शर्तों को समाप्त करना था। उसने “एक जन, एक साम्राज्य, एक नेता” का नारा दिया। 1933 में जर्मनी लीग ऑफ नेशंस से बाहर निकल गया। 1936 में राइनलैंड पर पुनः कब्जा किया गया। 1938 में ऑस्ट्रिया का विलय (Anschluss) किया गया तथा बाद में सुडेटनलैंड और पूरे चेकोस्लोवाकिया पर अधिकार कर लिया गया। इन विस्तारवादी नीतियों के कारण यूरोप में तनाव बढ़ा और अंततः द्वितीय विश्वयुद्ध शुरू हुआ।

(i) विस्तारवादी नीति अपनाई।

(ii) लीग ऑफ नेशंस छोड़ा।

(iii) राइनलैंड पर कब्जा किया।

(iv) ऑस्ट्रिया का विलय किया।

(v) द्वितीय विश्वयुद्ध का मार्ग प्रशस्त हुआ।

41. द्वितीय विश्वयुद्ध (Second World War) के प्रमुख कारणों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ द्वितीय विश्वयुद्ध (1939–1945) के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण थे। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद वर्साय की संधि ने जर्मनी पर कठोर शर्तें लगाईं, जिससे जर्मनी में असंतोष बढ़ गया। हिटलर ने इन शर्तों का विरोध करते हुए जर्मनी का सैन्य विस्तार शुरू किया। उसने राइनलैंड, ऑस्ट्रिया तथा चेकोस्लोवाकिया पर कब्ज़ा कर लिया। सितंबर 1939 में जर्मनी ने पोलैंड पर आक्रमण कर दिया। इसके बाद ब्रिटेन और फ्रांस ने जर्मनी के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। इस प्रकार विस्तारवादी नीति, राष्ट्रवाद और वर्साय संधि के प्रति असंतोष द्वितीय विश्वयुद्ध के प्रमुख कारण बने।

(i) वर्साय की संधि प्रमुख कारण थी।

(ii) हिटलर की विस्तारवादी नीति थी।

(iii) पोलैंड पर हमला हुआ।

(iv) ब्रिटेन और फ्रांस युद्ध में शामिल हुए।

(v) 1939 में युद्ध प्रारम्भ हुआ।

42. त्रिपक्षीय संधि (Tripartite Pact) क्या थी?

उत्तर ⇒ सितंबर 1940 में जर्मनी, इटली और जापान ने मिलकर त्रिपक्षीय संधि (Tripartite Pact) पर हस्ताक्षर किए। इस संधि के बाद ये तीनों देश धुरी राष्ट्र (Axis Powers) कहलाए। इस गठबंधन का उद्देश्य युद्ध में एक-दूसरे की सहायता करना तथा अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करना था। इस संधि से हिटलर की अंतरराष्ट्रीय स्थिति मजबूत हुई। बाद में यूरोप और एशिया के कई क्षेत्रों में इन देशों ने अपना प्रभाव बढ़ाने का प्रयास किया, जिससे द्वितीय विश्वयुद्ध और अधिक व्यापक हो गया।

(i) 1940 में संधि हुई।

(ii) जर्मनी, इटली और जापान शामिल थे।

(iii) धुरी राष्ट्र बने।

(iv) युद्ध में सहयोग का उद्देश्य था।

(v) हिटलर की स्थिति मजबूत हुई।

43. हिटलर द्वारा सोवियत संघ पर आक्रमण के परिणाम लिखिए।

उत्तर ⇒ जून 1941 में हिटलर ने सोवियत संघ (USSR) पर आक्रमण किया। यह उसका सबसे बड़ी रणनीतिक गलती माना जाता है। प्रारंभ में जर्मन सेना को कुछ सफलता मिली, लेकिन बाद में सोवियत सेना ने कड़ा प्रतिरोध किया। कठोर सर्दी, संसाधनों की कमी और सोवियत सेना के जवाबी हमलों से जर्मनी कमजोर पड़ गया। अंततः सोवियत सेना ने जर्मनों को पीछे धकेलते हुए बर्लिन तक पहुँचकर विजय प्राप्त की। इस युद्ध ने नात्सी जर्मनी की पराजय का मार्ग तैयार किया।

(i) 1941 में आक्रमण हुआ।

(ii) प्रारंभ में सफलता मिली।

(iii) सोवियत सेना ने पलटवार किया।

(iv) जर्मनी कमजोर हुआ।

(v) पराजय का मार्ग प्रशस्त हुआ।

44. अमेरिका द्वितीय विश्वयुद्ध में क्यों शामिल हुआ?

उत्तर ⇒ द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत में अमेरिका तटस्थ रहना चाहता था क्योंकि वह प्रथम विश्वयुद्ध जैसी आर्थिक समस्याओं से बचना चाहता था। लेकिन 7 दिसंबर 1941 को जापान ने अमेरिका के पर्ल हार्बर नौसैनिक अड्डे पर अचानक हमला कर दिया। इस हमले में अमेरिका को भारी क्षति हुई। इसके बाद अमेरिका ने जापान के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी और मित्र राष्ट्रों के साथ युद्ध में शामिल हो गया। अमेरिका के युद्ध में प्रवेश से मित्र राष्ट्रों की शक्ति काफी बढ़ गई और अंततः धुरी राष्ट्रों की हार हुई।

(i) प्रारंभ में अमेरिका तटस्थ था।

(ii) पर्ल हार्बर पर हमला हुआ।

(iii) 7 दिसंबर 1941 की घटना थी।

(iv) अमेरिका मित्र राष्ट्रों में शामिल हुआ।

(v) धुरी राष्ट्र कमजोर हुए।

45. द्वितीय विश्वयुद्ध का अंत कैसे हुआ?

उत्तर ⇒ द्वितीय विश्वयुद्ध का अंत 1945 में हुआ। यूरोप में सोवियत सेना ने बर्लिन पर कब्ज़ा कर लिया। अप्रैल 1945 में एडॉल्फ हिटलर और उसका प्रचार मंत्री जोसेफ गोएबेल्स ने आत्महत्या कर ली। मई 1945 में जर्मनी ने मित्र राष्ट्रों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद अगस्त 1945 में अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए। अंततः जापान ने भी आत्मसमर्पण कर दिया और द्वितीय विश्वयुद्ध समाप्त हो गया।

(i) बर्लिन पर सोवियत सेना का कब्ज़ा हुआ।

(ii) हिटलर ने आत्महत्या की।

(iii) जर्मनी ने आत्मसमर्पण किया।

(iv) जापान पर परमाणु बम गिराया गया।

(v) 1945 में युद्ध समाप्त हुआ।

46. नॉर्डिक जर्मन आर्य (Nordic Aryans) से क्या अभिप्राय है?

उत्तर ⇒ नात्सी विचारधारा के अनुसार नॉर्डिक जर्मन आर्य सबसे श्रेष्ठ नस्ल मानी जाती थी। हिटलर का विश्वास था कि सुनहरे बाल, नीली आँखों वाले तथा उत्तरी यूरोप के लोग सबसे उत्कृष्ट मानव हैं। नात्सियों ने इन्हें शासन करने योग्य तथा अन्य सभी जातियों से श्रेष्ठ बताया। इस नस्लीय सोच के कारण यहूदियों, जिप्सियों तथा अन्य समुदायों के साथ भेदभाव किया गया। आधुनिक विज्ञान इस प्रकार की नस्लीय श्रेष्ठता के विचार को स्वीकार नहीं करता और इसे गलत तथा अमानवीय मानता है।

(i) आर्यों को श्रेष्ठ माना गया।

(ii) उत्तरी यूरोप के लोगों को महत्व दिया गया।

(iii) नस्लीय भेदभाव बढ़ा।

(iv) यहूदियों को निम्न माना गया।

(v) आधुनिक विज्ञान इसे स्वीकार नहीं करता।

47. नात्सियों के विश्व-दृष्टिकोण (Nazi World View) का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ नात्सी विचारधारा नस्लीय श्रेष्ठता पर आधारित थी। हिटलर का मानना था कि सभी समाज समान नहीं हैं और आर्य नस्ल सबसे श्रेष्ठ है। उसने यहूदियों को आर्यों का सबसे बड़ा शत्रु घोषित किया। नात्सियों का उद्देश्य आर्य नस्ल की शुद्धता बनाए रखना तथा विश्व पर उसका प्रभुत्व स्थापित करना था। इसी विचारधारा के आधार पर लाखों लोगों पर अत्याचार किए गए। नात्सी विश्व-दृष्टिकोण ने मानव समानता, लोकतंत्र और मानवाधिकारों का विरोध किया।

(i) नस्लीय श्रेष्ठता पर आधारित था।

(ii) आर्य नस्ल को सर्वोच्च माना गया।

(iii) यहूदियों से घृणा की गई।

(iv) मानव समानता का विरोध किया गया।

(v) मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ।

48. डार्विन के सिद्धांत का नात्सियों ने किस प्रकार दुरुपयोग किया?

उत्तर ⇒ चार्ल्स डार्विन ने विकासवाद का सिद्धांत प्रस्तुत किया था, जिसमें प्राकृतिक चयन की प्रक्रिया का वर्णन किया गया था। नात्सियों ने इस सिद्धांत का गलत अर्थ निकालकर दावा किया कि केवल शक्तिशाली नस्लों को ही जीवित रहने का अधिकार है। उन्होंने “योग्यतम की उत्तरजीविता” की अवधारणा का उपयोग अपनी नस्लीय नीतियों को सही ठहराने के लिए किया। जबकि डार्विन ने कहीं भी मनुष्यों के बीच नस्लीय भेदभाव या हिंसा का समर्थन नहीं किया था। नात्सियों ने वैज्ञानिक सिद्धांत का राजनीतिक लाभ के लिए दुरुपयोग किया।

(i) डार्विन के सिद्धांत का गलत अर्थ निकाला।

(ii) नस्लीय श्रेष्ठता का प्रचार किया।

(iii) आर्यों को श्रेष्ठ बताया।

(iv) वैज्ञानिक सिद्धांत का दुरुपयोग हुआ।

(v) मानवता के विरुद्ध नीतियाँ अपनाई गईं।

49. लेबेन्सराउम (Lebensraum) क्या था?

उत्तर ⇒ लेबेन्सराउम (Lebensraum) का अर्थ है “जीवन-परिधि” या रहने के लिए अधिक स्थान। हिटलर का मानना था कि जर्मन लोगों के विकास और संसाधनों की पूर्ति के लिए अधिक भूभाग पर कब्ज़ा करना आवश्यक है। इस नीति के अंतर्गत उसने पोलैंड सहित कई देशों पर आक्रमण किया। उसका उद्देश्य सभी जर्मनों को एक स्थान पर बसाना तथा जर्मनी की शक्ति और संसाधनों का विस्तार करना था। यही नीति आगे चलकर द्वितीय विश्वयुद्ध का एक प्रमुख कारण बनी।

(i) जीवन-परिधि का सिद्धांत था।

(ii) अधिक भूमि प्राप्त करना उद्देश्य था।

(iii) पोलैंड पहला लक्ष्य बना।

(iv) जर्मनी का विस्तार किया गया।

(v) युद्ध का प्रमुख कारण बना।

50. नात्सीवाद और हिटलर के उदय अध्याय का अब तक का सारांश लिखिए।

उत्तर ⇒ इस अध्याय में प्रथम विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी की स्थिति, वर्साय की संधि, वाइमर गणराज्य की समस्याएँ, आर्थिक मंदी तथा हिटलर के उदय का विस्तृत अध्ययन किया गया है। साथ ही नात्सी विचारधारा, प्रोपेगेंडा, तानाशाही, द्वितीय विश्वयुद्ध और नस्लीय भेदभाव जैसी घटनाओं का वर्णन किया गया है। यह अध्याय बताता है कि आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और कट्टर विचारधारा किस प्रकार लोकतंत्र को कमजोर कर सकती है। साथ ही यह मानवाधिकार, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों के महत्व को भी स्पष्ट करता है।

(i) प्रथम विश्वयुद्ध के बाद की स्थिति बताता है।

(ii) हिटलर के उदय का वर्णन करता है।

(iii) नात्सीवाद की विचारधारा समझाता है।

(iv) द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण बताता है।

(v) लोकतंत्र और मानवाधिकारों का महत्व स्पष्ट करता है।

51. नात्सी शासन में शिक्षा व्यवस्था का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ नात्सी शासन का उद्देश्य बच्चों को बचपन से ही नात्सी विचारधारा के अनुसार तैयार करना था। स्कूलों में शिक्षा का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्र सोच विकसित करना नहीं, बल्कि हिटलर के प्रति निष्ठा पैदा करना था। यहूदी और राजनीतिक रूप से अविश्वसनीय शिक्षकों को नौकरी से निकाल दिया गया। पाठ्यपुस्तकों को बदलकर उनमें नात्सी विचारधारा, नस्लीय श्रेष्ठता और राष्ट्रवाद को शामिल किया गया। विद्यार्थियों को यहूदियों से घृणा, हिटलर की पूजा तथा जर्मनी के प्रति पूर्ण निष्ठा की शिक्षा दी जाती थी। इस प्रकार शिक्षा को प्रचार का माध्यम बना दिया गया।

(i) शिक्षा का उद्देश्य नात्सी विचारधारा फैलाना था।

(ii) यहूदी शिक्षकों को हटाया गया।

(iii) पाठ्यपुस्तकों में परिवर्तन किया गया।

(iv) हिटलर के प्रति निष्ठा सिखाई गई।

(v) शिक्षा को प्रचार का माध्यम बनाया गया।

52. नात्सी शासन में बच्चों और युवाओं की स्थिति का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ नात्सी शासन में बच्चों और युवाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। उनका उद्देश्य उन्हें बचपन से ही कट्टर नात्सी बनाना था। बच्चों को स्कूलों और विभिन्न संगठनों के माध्यम से सैनिक अनुशासन, राष्ट्रवाद तथा नस्लीय श्रेष्ठता की शिक्षा दी जाती थी। उन्हें यहूदियों, कम्युनिस्टों और अन्य समुदायों के प्रति घृणा करना सिखाया जाता था। युवाओं को युद्ध, हिंसा और आज्ञापालन के लिए तैयार किया जाता था। इस प्रकार नात्सी सरकार ने नई पीढ़ी को अपनी विचारधारा के अनुसार ढालने का प्रयास किया।

(i) बच्चों पर विशेष नियंत्रण रखा गया।

(ii) राष्ट्रवाद की शिक्षा दी गई।

(iii) सैनिक अनुशासन सिखाया गया।

(iv) यहूदियों के प्रति घृणा फैलायी गई।

(v) युवाओं को नात्सी विचारधारा में ढाला गया।

53. हिटलर यूथ (Hitler Youth) संगठन का परिचय दीजिए।

उत्तर ⇒ हिटलर यूथ नात्सी जर्मनी का प्रमुख युवा संगठन था। इसका गठन 1922 में किया गया और बाद में इसका विस्तार हुआ। 10 वर्ष की आयु के बच्चों को जुंगफोल्क में तथा 14 वर्ष की आयु के लड़कों को हिटलर यूथ का सदस्य बनना अनिवार्य था। इस संगठन में युवाओं को सैन्य प्रशिक्षण, अनुशासन, राष्ट्रवाद तथा हिटलर के प्रति पूर्ण निष्ठा की शिक्षा दी जाती थी। 18 वर्ष की आयु के बाद उन्हें श्रम सेवा तथा सेना में भर्ती होने के लिए तैयार किया जाता था।

(i) यह नात्सी युवा संगठन था।

(ii) 1922 में इसकी स्थापना हुई।

(iii) युवाओं को सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता था।

(iv) हिटलर के प्रति निष्ठा सिखाई जाती थी।

(v) सेना के लिए तैयार किया जाता था।

54. नात्सी शासन में महिलाओं की स्थिति का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ नात्सी शासन में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार नहीं दिए जाते थे। हिटलर का मानना था कि महिलाओं का मुख्य कार्य घर संभालना, बच्चों का पालन-पोषण करना और शुद्ध आर्य संतानों को जन्म देना है। महिलाओं को नौकरी और राजनीति से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जाता था। जो महिलाएँ अधिक बच्चे पैदा करती थीं, उन्हें पुरस्कार और सम्मान दिए जाते थे। इसके विपरीत, नात्सी नियमों का उल्लंघन करने वाली महिलाओं को कठोर दंड दिया जाता था। इस प्रकार महिलाओं की स्वतंत्रता सीमित कर दी गई थी।

(i) महिलाओं को समान अधिकार नहीं मिले।

(ii) मातृत्व को सबसे महत्वपूर्ण माना गया।

(iii) आर्य संतानों को जन्म देने पर बल दिया गया।

(iv) अधिक बच्चों वाली माताओं को सम्मान मिला।

(v) नियम तोड़ने पर दंड दिया जाता था।

55. नात्सी शासन में माताओं को किस प्रकार प्रोत्साहित किया जाता था?

उत्तर ⇒ नात्सी सरकार आर्य नस्ल की जनसंख्या बढ़ाना चाहती थी। इसलिए अधिक बच्चे पैदा करने वाली माताओं को विशेष पुरस्कार दिए जाते थे। चार बच्चों की माँ को काँस्य पदक, छह बच्चों की माँ को रजत पदक तथा आठ या उससे अधिक बच्चों की माँ को स्वर्ण पदक दिया जाता था। इसके अतिरिक्त अस्पतालों में विशेष सुविधाएँ, दुकानों पर छूट तथा रेलवे टिकटों में रियायत जैसी सुविधाएँ भी प्रदान की जाती थीं। इन पुरस्कारों का उद्देश्य अधिक से अधिक आर्य संतानों को जन्म देने के लिए महिलाओं को प्रेरित करना था।

(i) अधिक बच्चों पर पुरस्कार दिए जाते थे।

(ii) काँस्य, रजत और स्वर्ण पदक दिए जाते थे।

(iii) विशेष सुविधाएँ प्रदान की जाती थीं।

(iv) आर्य जनसंख्या बढ़ाना उद्देश्य था।

(v) मातृत्व को सम्मान दिया गया।

56. नात्सी शासन में महिलाओं को दंड क्यों दिया जाता था?

उत्तर ⇒ नात्सी शासन में यदि कोई आर्य महिला सरकार द्वारा निर्धारित सामाजिक और नैतिक नियमों का उल्लंघन करती थी, तो उसे कठोर दंड दिया जाता था। ऐसी महिलाओं का सार्वजनिक रूप से अपमान किया जाता था। उनके बाल मुंडवा दिए जाते थे, चेहरे पर कालिख पोती जाती थी और गले में तख्ती लटकाकर पूरे शहर में घुमाया जाता था। कई मामलों में जेल की सजा, नागरिक अधिकारों से वंचित करना तथा परिवार से अलग करना जैसी सजाएँ भी दी जाती थीं। इसका उद्देश्य महिलाओं को नात्सी नियमों का पालन करने के लिए मजबूर करना था।

(i) नियम तोड़ने पर दंड मिलता था।

(ii) सार्वजनिक अपमान किया जाता था।

(iii) जेल की सजा दी जाती थी।

(iv) नागरिक अधिकार छीने जाते थे।

(v) नात्सी नियमों का पालन करवाया जाता था।

57. नात्सी शासन ने भाषा का किस प्रकार दुरुपयोग किया?

उत्तर ⇒ नात्सी शासन ने अपने अमानवीय अपराधों को छिपाने के लिए भाषा का योजनाबद्ध ढंग से दुरुपयोग किया। हत्या और नरसंहार जैसे शब्दों के स्थान पर भ्रामक शब्दों का प्रयोग किया जाता था। उदाहरण के लिए “विशेष व्यवहार” का अर्थ सामूहिक हत्या, “अंतिम समाधान” का अर्थ यहूदियों का संहार तथा “यूथनेज़िया” का अर्थ विकलांग लोगों की हत्या था। गैस चैंबरों को भी स्नानघर जैसा दिखाया जाता था। इस प्रकार भाषा का प्रयोग जनता को भ्रमित करने और अपराधों को छिपाने के लिए किया गया।

(i) भ्रामक शब्दों का प्रयोग किया गया।

(ii) हत्या को छिपाने का प्रयास हुआ।

(iii) गैस चैंबरों को स्नानघर बताया गया।

(iv) जनता को भ्रमित किया गया।

(v) भाषा का दुरुपयोग हुआ।

58. नात्सी शासन में मीडिया और प्रचार का महत्व बताइए।

उत्तर ⇒ नात्सी शासन ने मीडिया को अपने प्रचार का सबसे प्रभावी साधन बनाया। रेडियो, समाचार पत्र, पोस्टर, फिल्में और भाषणों के माध्यम से हिटलर तथा नात्सी विचारधारा का प्रचार किया गया। यहूदियों, समाजवादियों और अन्य विरोधियों को देश का दुश्मन बताकर उनके प्रति घृणा फैलायी गई। हिटलर को राष्ट्र का रक्षक और महान नेता के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस प्रचार ने जनता की सोच को प्रभावित किया और नात्सी शासन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

(i) मीडिया का व्यापक उपयोग हुआ।

(ii) हिटलर का प्रचार किया गया।

(iii) विरोधियों के विरुद्ध नफरत फैलाई गई।

(iv) जनता की सोच प्रभावित हुई।

(v) नात्सी शासन मजबूत हुआ।

59. नात्सी प्रचार का समाज पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर ⇒ नात्सी प्रचार का जर्मन समाज पर गहरा प्रभाव पड़ा। लगातार प्रचार के कारण अनेक लोगों ने यह मान लिया कि जर्मनी की सभी समस्याओं के लिए यहूदी और अन्य समुदाय जिम्मेदार हैं। समाज में नस्लीय भेदभाव, घृणा और हिंसा बढ़ने लगी। लोगों ने हिटलर को एक महान नेता और उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार कर लिया। इससे लोकतांत्रिक मूल्यों का ह्रास हुआ तथा मानवाधिकारों का उल्लंघन बढ़ गया। नात्सी प्रचार ने समाज को कट्टरता और असहिष्णुता की ओर धकेल दिया।

(i) समाज में घृणा बढ़ी।

(ii) नस्लीय भेदभाव फैला।

(iii) हिटलर की लोकप्रियता बढ़ी।

(iv) लोकतंत्र कमजोर हुआ।

(v) मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ।

60. नात्सीवाद और हिटलर के उदय अध्याय से हमें क्या सीख मिलती है?

उत्तर ⇒ यह अध्याय हमें सिखाता है कि कट्टर राष्ट्रवाद, नस्लीय भेदभाव, तानाशाही और घृणा की राजनीति समाज के लिए अत्यंत विनाशकारी होती है। लोकतंत्र, समानता, मानवाधिकार और सहिष्णुता किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति हैं। नात्सी शासन के दौरान हुए नरसंहार और युद्ध यह बताते हैं कि सत्ता का दुरुपयोग मानवता के लिए कितना घातक हो सकता है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करना चाहिए तथा किसी भी प्रकार के भेदभाव और हिंसा का विरोध करना चाहिए। यही इस अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण संदेश है।

(i) तानाशाही विनाशकारी होती है।

(ii) लोकतंत्र का सम्मान करना चाहिए।

(iii) मानवाधिकारों की रक्षा आवश्यक है।

(iv) भेदभाव का विरोध करना चाहिए।

(v) शांति और समानता का समर्थन करना चाहिए।

More Class 9 History Revision Notes

Chapter 1: फ्रांसीसी क्रान्ति
Chapter 2: यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रान्ति
Chapter 3: नात्सीवाद और हिटलर का उदय
Chapter 4: वन्य-समाज और उपनिवेशवाद

Class 9 Notes by Subject

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