Class 9 Geography Revision Notes
जनसंख्या
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Chapter Overview
| Class | 9 |
| Subject | Geography |
| Chapter Name | जनसंख्या |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
जनसंख्या Revision Notes
1. जनगणना क्या है? भारत में जनगणना का महत्व बताइए।
उत्तर ⇒ किसी निश्चित समयांतराल पर किसी देश की जनसंख्या की सरकारी एवं आधिकारिक गणना को जनगणना कहते हैं। भारत में पहली जनगणना 1872 में हुई थी, जबकि पहली नियमित एवं संपूर्ण जनगणना 1881 में की गई। तब से प्रत्येक 10 वर्ष पर जनगणना होती है। जनगणना से देश की कुल जनसंख्या, जनसंख्या का वितरण, शिक्षा, आयु, लिंग, व्यवसाय तथा जीवन स्तर जैसी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त होती हैं। सरकार इन्हीं आँकड़ों के आधार पर विकास योजनाएँ बनाती है तथा संसाधनों का उचित वितरण करती है। इसलिए जनगणना देश के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
(i) जनगणना आधिकारिक जनसंख्या गणना है।
(ii) पहली जनगणना 1872 में हुई।
(iii) पहली नियमित जनगणना 1881 में हुई।
(iv) प्रत्येक 10 वर्ष पर जनगणना होती है।
(v) विकास योजनाओं के लिए आवश्यक है।
2. जनसंख्या का महत्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒ जनसंख्या किसी भी देश के विकास का महत्वपूर्ण आधार होती है। जनसंख्या के माध्यम से समाज, अर्थव्यवस्था तथा पर्यावरण का अध्ययन किया जाता है। किसी क्षेत्र की जनसंख्या की संख्या, वितरण, वृद्धि तथा विशेषताओं से उस क्षेत्र के विकास का अनुमान लगाया जा सकता है। मनुष्य प्राकृतिक संसाधनों का उत्पादन और उपभोग करता है, इसलिए जनसंख्या का सही ज्ञान आवश्यक है। जनसंख्या संबंधी जानकारी के आधार पर सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, परिवहन तथा अन्य विकास योजनाओं का निर्माण करती है। इसलिए जनसंख्या सामाजिक अध्ययन का प्रमुख आधार मानी जाती है।
(i) जनसंख्या विकास का आधार है।
(ii) समाज एवं अर्थव्यवस्था को समझने में सहायता मिलती है।
(iii) संसाधनों के उपयोग का ज्ञान मिलता है।
(iv) विकास योजनाएँ बनाने में सहायक है।
(v) पर्यावरण अध्ययन में भी महत्वपूर्ण है।
3. भारत की जनसंख्या एवं उसके वितरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या लगभग 121 करोड़ (12,106 लाख) थी, जो विश्व की कुल जनसंख्या का 17 प्रतिशत से अधिक है। भारत विश्व के केवल 2.4 प्रतिशत भूभाग पर स्थित है, फिर भी यहाँ बहुत अधिक जनसंख्या निवास करती है। भारत में जनसंख्या का वितरण समान नहीं है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जनसंख्या बहुत अधिक है, जबकि सिक्किम और लक्षद्वीप जैसे क्षेत्रों में जनसंख्या बहुत कम है। जनसंख्या का यह असमान वितरण प्राकृतिक एवं आर्थिक परिस्थितियों से प्रभावित होता है।
(i) 2011 में जनसंख्या लगभग 121 करोड़ थी।
(ii) विश्व की 17% से अधिक जनसंख्या भारत में रहती है।
(iii) भारत का भूभाग केवल 2.4% है।
(iv) जनसंख्या का वितरण असमान है।
(v) उत्तर प्रदेश सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है।
4. जनसंख्या घनत्व क्या है? भारत में जनसंख्या घनत्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ प्रति इकाई क्षेत्रफल में रहने वाले लोगों की संख्या को जनसंख्या घनत्व कहते हैं। यह किसी क्षेत्र में जनसंख्या के वितरण को समझने का महत्वपूर्ण मापदंड है। वर्ष 2011 में भारत का औसत जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था। बिहार का जनसंख्या घनत्व 1102 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था, जबकि अरुणाचल प्रदेश में केवल 17 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था। राज्यों में सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व पश्चिम बंगाल का तथा सबसे कम अरुणाचल प्रदेश का है।
(i) जनसंख्या घनत्व प्रति वर्ग किमी जनसंख्या है।
(ii) भारत का औसत घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है।
(iii) बिहार का घनत्व बहुत अधिक है।
(iv) अरुणाचल प्रदेश का घनत्व सबसे कम है।
(v) पश्चिम बंगाल सबसे अधिक घनत्व वाला राज्य है।
5. भारत में जनसंख्या घनत्व के वितरण को प्रभावित करने वाले कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ भारत में जनसंख्या घनत्व सभी क्षेत्रों में समान नहीं है। जहाँ उपजाऊ मिट्टी, पर्याप्त वर्षा, समतल भूमि, सिंचाई तथा रोजगार के अवसर अधिक होते हैं, वहाँ जनसंख्या घनत्व भी अधिक होता है। इसके विपरीत पर्वतीय, पथरीले, शुष्क तथा कम उपजाऊ क्षेत्रों में जनसंख्या कम रहती है। बिहार, उत्तर प्रदेश तथा पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में उपजाऊ मैदान होने के कारण घनत्व अधिक है, जबकि अरुणाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में घनत्व बहुत कम है।
(i) उपजाऊ भूमि घनत्व बढ़ाती है।
(ii) समतल क्षेत्र अधिक आबादी वाले होते हैं।
(iii) पर्वतीय क्षेत्रों में घनत्व कम होता है।
(iv) रोजगार के अवसर महत्वपूर्ण हैं।
(v) प्राकृतिक परिस्थितियाँ प्रभाव डालती हैं।
6. जनसंख्या वृद्धि क्या है? निरपेक्ष एवं वार्षिक वृद्धि में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒ किसी निश्चित समय में किसी क्षेत्र की जनसंख्या में होने वाले परिवर्तन को जनसंख्या वृद्धि कहते हैं। इसे दो प्रकार से व्यक्त किया जाता है— निरपेक्ष वृद्धि तथा वार्षिक वृद्धि दर। निरपेक्ष वृद्धि का अर्थ है किसी अवधि में बढ़ी हुई कुल जनसंख्या, जबकि वार्षिक वृद्धि दर से पता चलता है कि प्रति वर्ष प्रति 100 व्यक्तियों पर कितने लोगों की वृद्धि हुई। निरपेक्ष वृद्धि संख्या में व्यक्त की जाती है जबकि वार्षिक वृद्धि प्रतिशत में व्यक्त की जाती है।
| निरपेक्ष वृद्धि | वार्षिक वृद्धि |
|---|---|
| कुल बढ़ी हुई जनसंख्या | प्रतिशत में वृद्धि |
| संख्या के रूप में व्यक्त | प्रति वर्ष बताई जाती है |
| दो जनगणनाओं की तुलना | प्रति 100 व्यक्तियों पर आधारित |
(i) जनसंख्या वृद्धि समय के साथ परिवर्तन है।
(ii) निरपेक्ष वृद्धि कुल संख्या है।
(iii) वार्षिक वृद्धि प्रतिशत में होती है।
(iv) दोनों वृद्धि मापने के तरीके हैं।
(v) जनसंख्या अध्ययन में उपयोगी हैं।
7. भारत में 1951 से 2011 तक जनसंख्या वृद्धि का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ भारत की जनसंख्या वर्ष 1951 में लगभग 36.1 करोड़ थी, जो बढ़कर 2011 में लगभग 121 करोड़ हो गई। 1951 से 1981 के बीच जनसंख्या वृद्धि दर लगातार बढ़ती रही। इसके बाद 1981 से वृद्धि दर में धीरे-धीरे कमी आने लगी। इसका मुख्य कारण जन्म दर में कमी तथा परिवार नियोजन कार्यक्रमों की सफलता है। फिर भी भारत विश्व के सबसे अधिक जनसंख्या वाले देशों में से एक बना हुआ है।
(i) 1951 में जनसंख्या 36.1 करोड़ थी।
(ii) 2011 में लगभग 121 करोड़ हुई।
(iii) 1951–1981 में वृद्धि तेज थी।
(iv) 1981 के बाद वृद्धि दर घटी।
(v) परिवार नियोजन इसका प्रमुख कारण है।
8. जनसंख्या परिवर्तन की प्रमुख प्रक्रियाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ जनसंख्या में परिवर्तन मुख्य रूप से जन्म दर, मृत्यु दर तथा प्रवास के कारण होता है। जन्म दर जनसंख्या बढ़ाती है, जबकि मृत्यु दर जनसंख्या कम करती है। प्रवास के कारण लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं, जिससे किसी क्षेत्र की जनसंख्या बढ़ या घट सकती है। भारत में जन्म दर लंबे समय तक मृत्यु दर से अधिक रही है, जिसके कारण जनसंख्या तेजी से बढ़ी। इन तीनों प्रक्रियाओं का संयुक्त प्रभाव किसी देश की कुल जनसंख्या को निर्धारित करता है।
(i) तीन प्रमुख प्रक्रियाएँ हैं।
(ii) जन्म दर जनसंख्या बढ़ाती है।
(iii) मृत्यु दर जनसंख्या घटाती है।
(iv) प्रवास वितरण बदलता है।
(v) तीनों मिलकर जनसंख्या परिवर्तन करते हैं।
9. जन्म दर एवं मृत्यु दर का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ एक वर्ष में प्रति 1000 व्यक्तियों पर जितने जीवित बच्चों का जन्म होता है, उसे जन्म दर कहते हैं। इसी प्रकार एक वर्ष में प्रति 1000 व्यक्तियों पर मरने वाले लोगों की संख्या को मृत्यु दर कहते हैं। भारत में लंबे समय तक जन्म दर मृत्यु दर से अधिक रही, जिसके कारण जनसंख्या में निरंतर वृद्धि हुई। चिकित्सा सुविधाओं में सुधार तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से मृत्यु दर में कमी आई है, जिससे जनसंख्या तेजी से बढ़ी।
(i) जन्म दर प्रति 1000 जन्म है।
(ii) मृत्यु दर प्रति 1000 मृत्यु है।
(iii) जन्म दर अधिक होने से जनसंख्या बढ़ती है।
(iv) मृत्यु दर में कमी आई है।
(v) स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रभाव पड़ता है।
10. प्रवास क्या है? इसके कारण एवं प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ लोगों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाकर बसना प्रवास कहलाता है। यह आंतरिक तथा अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार का हो सकता है। भारत में अधिकांश प्रवास गाँवों से शहरों की ओर होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी, बेरोज़गारी तथा कम सुविधाएँ लोगों को बाहर जाने के लिए प्रेरित करती हैं, जबकि शहरों में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा बेहतर जीवन स्तर लोगों को आकर्षित करते हैं। प्रवास के कारण शहरों की जनसंख्या तेजी से बढ़ती है तथा शहरीकरण में वृद्धि होती है।
(i) प्रवास स्थान परिवर्तन है।
(ii) गाँव से शहर की ओर अधिक प्रवास होता है।
(iii) रोजगार प्रमुख कारण है।
(iv) शहरीकरण बढ़ता है।
(v) जनसंख्या वितरण प्रभावित होता है।
11. भारत में प्रवास के कारणों एवं परिणामों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ भारत में अधिकांश प्रवास ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी, बेरोज़गारी, कम आय तथा शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी लोगों को शहरों की ओर जाने के लिए प्रेरित करती है। दूसरी ओर शहरों में रोजगार के अधिक अवसर, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ तथा उच्च जीवन स्तर लोगों को आकर्षित करते हैं। प्रवास के कारण शहरों की जनसंख्या तेजी से बढ़ती है, शहरीकरण में वृद्धि होती है तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की आयु एवं लिंग संरचना में भी परिवर्तन होता है।
(i) गाँव से शहर की ओर अधिक प्रवास होता है।
(ii) गरीबी एवं बेरोज़गारी प्रमुख कारण हैं।
(iii) शहरों में रोजगार अधिक मिलता है।
(iv) शहरीकरण बढ़ता है।
(v) जनसंख्या संरचना प्रभावित होती है।
12. भारत में प्रवास के परिणामों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ भारत में प्रवास के कारण शहरी क्षेत्रों की जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। वर्ष 1951 में भारत की शहरी जनसंख्या लगभग 17.29% थी, जो 2011 में बढ़कर 31.80% हो गई। बड़े शहरों की संख्या भी लगातार बढ़ी है। वर्ष 2001 में 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों की संख्या 35 थी, जो 2011 में 53 और 2023 में 59 हो गई। प्रवास के कारण शहरों पर आवास, परिवहन, रोजगार तथा अन्य सुविधाओं का दबाव भी बढ़ता है।
(i) शहरी जनसंख्या बढ़ती है।
(ii) शहरीकरण में वृद्धि होती है।
(iii) बड़े शहरों की संख्या बढ़ती है।
(iv) सुविधाओं पर दबाव बढ़ता है।
(v) ग्रामीण जनसंख्या घटती है।
13. किशोरावस्था क्या है? किशोरों की आवश्यकताओं एवं समस्याओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ 10 से 19 वर्ष की आयु को किशोरावस्था कहा जाता है। इस आयु में शारीरिक, मानसिक तथा भावनात्मक विकास तेजी से होता है। भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 20 प्रतिशत भाग किशोरों का है। इस आयु वर्ग को संतुलित एवं पौष्टिक भोजन, स्वास्थ्य सेवाएँ तथा उचित शिक्षा की आवश्यकता होती है। भारत में अनेक किशोर, विशेषकर किशोर बालिकाएँ, कुपोषण तथा रक्ताल्पता (एनीमिया) से प्रभावित हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएँ तथा जागरूकता आवश्यक है।
(i) 10–19 वर्ष की आयु किशोरावस्था है।
(ii) यह तीव्र विकास की अवस्था है।
(iii) संतुलित भोजन आवश्यक है।
(iv) किशोरियों में रक्ताल्पता अधिक होती है।
(v) शिक्षा एवं जागरूकता आवश्यक है।
14. लिंगानुपात क्या है? इसका महत्व बताइए।
उत्तर ⇒ किसी देश या क्षेत्र में प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या को लिंगानुपात कहा जाता है। लिंगानुपात किसी समाज की सामाजिक स्थिति तथा लैंगिक समानता का महत्वपूर्ण सूचक है। संतुलित लिंगानुपात स्वस्थ समाज के निर्माण में सहायक होता है। यदि लिंगानुपात कम होता है, तो सामाजिक एवं आर्थिक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य तथा समान अधिकारों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
(i) प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या लिंगानुपात है।
(ii) यह सामाजिक विकास का सूचक है।
(iii) लैंगिक समानता का संकेत देता है।
(iv) संतुलित लिंगानुपात आवश्यक है।
(v) महिलाओं के विकास पर बल देना चाहिए।
15. परिवार नियोजन कार्यक्रम (1952) का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ भारत सरकार ने 1952 में विश्व का पहला व्यापक परिवार नियोजन कार्यक्रम प्रारंभ किया। इसका मुख्य उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना तथा परिवारों के आकार को सीमित रखना था। इस कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को छोटे परिवार के लाभों के बारे में जागरूक किया गया। इसका लक्ष्य व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार के कल्याण तथा जिम्मेदार एवं सुनियोजित पितृत्व को बढ़ावा देना था। इस कार्यक्रम के कारण देश में जन्म दर को नियंत्रित करने में सहायता मिली।
(i) 1952 में शुरू किया गया।
(ii) जनसंख्या वृद्धि नियंत्रित करना उद्देश्य था।
(iii) छोटे परिवार को बढ़ावा दिया गया।
(iv) स्वास्थ्य एवं कल्याण पर बल दिया गया।
(v) जिम्मेदार पितृत्व को प्रोत्साहन मिला।
16. राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 भारत सरकार द्वारा बनाई गई एक महत्वपूर्ण नीति है, जिसका उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना तथा लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। इस नीति में शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवार नियोजन तथा महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष बल दिया गया है। यह नीति देश के विकास के लिए जनसंख्या को संतुलित रखने तथा मानव संसाधन के बेहतर विकास का मार्गदर्शन करती है।
(i) वर्ष 2000 में लागू की गई।
(ii) जनसंख्या नियंत्रण इसका उद्देश्य है।
(iii) शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर बल दिया गया।
(iv) परिवार नियोजन को बढ़ावा दिया गया।
(v) मानव संसाधन विकास पर ध्यान दिया गया।
17. राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 के प्रमुख उद्देश्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 का उद्देश्य सभी बच्चों को 14 वर्ष तक निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराना, शिशु मृत्यु दर को प्रति 1000 जीवित जन्म पर 30 से कम करना तथा सभी बच्चों का पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करना है। इस नीति में लड़कियों की विवाह आयु बढ़ाने, लैंगिक समानता स्थापित करने तथा परिवार नियोजन कार्यक्रमों को जन-केंद्रित बनाने पर भी विशेष बल दिया गया है। इन उद्देश्यों से जनसंख्या की गुणवत्ता में सुधार लाने का प्रयास किया गया है।
(i) 14 वर्ष तक निःशुल्क शिक्षा।
(ii) शिशु मृत्यु दर कम करना।
(iii) सभी बच्चों का टीकाकरण।
(iv) लड़कियों की विवाह आयु बढ़ाना।
(v) जन-केंद्रित परिवार नियोजन।
18. भारत में जनसंख्या वृद्धि के प्रमुख कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ भारत में जनसंख्या वृद्धि के प्रमुख कारणों में उच्च जन्म दर, मृत्यु दर में कमी तथा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ शामिल हैं। चिकित्सा विज्ञान के विकास से मृत्यु दर कम हुई, जबकि लंबे समय तक जन्म दर अधिक बनी रही। इसके अतिरिक्त अशिक्षा, गरीबी, सामाजिक परंपराएँ तथा परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता की कमी ने भी जनसंख्या वृद्धि को बढ़ावा दिया। इन सभी कारणों से भारत की जनसंख्या में तीव्र वृद्धि हुई।
(i) जन्म दर अधिक रही।
(ii) मृत्यु दर में कमी आई।
(iii) स्वास्थ्य सुविधाएँ बेहतर हुईं।
(iv) अशिक्षा भी कारण है।
(v) जागरूकता की कमी रही।
19. भारत में जनसंख्या वृद्धि के प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ जनसंख्या वृद्धि का देश के आर्थिक, सामाजिक तथा पर्यावरणीय विकास पर गहरा प्रभाव पड़ता है। अधिक जनसंख्या के कारण भोजन, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा रोजगार की माँग बढ़ जाती है। प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ता है तथा बेरोज़गारी और गरीबी जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। इसके साथ ही पर्यावरण प्रदूषण तथा शहरी समस्याएँ भी बढ़ती हैं। इसलिए संतुलित जनसंख्या देश के सतत विकास के लिए आवश्यक है।
(i) संसाधनों पर दबाव बढ़ता है।
(ii) बेरोज़गारी बढ़ती है।
(iii) गरीबी की समस्या बढ़ती है।
(iv) पर्यावरण प्रभावित होता है।
(v) सतत विकास बाधित होता है।
20. ‘जनसंख्या’ अध्याय से हमें क्या सीख मिलती है?
उत्तर ⇒ यह अध्याय हमें भारत की जनसंख्या, उसके वितरण, घनत्व, वृद्धि तथा जनसंख्या परिवर्तन की प्रक्रियाओं की जानकारी देता है। इससे हमें जनगणना, प्रवास, जन्म दर, मृत्यु दर, किशोरावस्था, लिंगानुपात तथा परिवार नियोजन जैसे महत्वपूर्ण विषयों का ज्ञान प्राप्त होता है। यह अध्याय हमें जनसंख्या वृद्धि के कारणों एवं प्रभावों को समझने तथा राष्ट्रीय जनसंख्या नीति के महत्व से परिचित कराता है। साथ ही यह संतुलित जनसंख्या एवं मानव संसाधन विकास की आवश्यकता पर बल देता है।
(i) जनसंख्या का महत्व समझ में आता है।
(ii) जनगणना का महत्व ज्ञात होता है।
(iii) जनसंख्या वृद्धि के कारण समझ आते हैं।
(iv) परिवार नियोजन का महत्व पता चलता है।
(v) संतुलित जनसंख्या की आवश्यकता स्पष्ट होती है।
More Class 9 Geography Revision Notes
| Chapter 1: भारत – आकार एवं स्थिति |
| Chapter 2: भारत का भौतिक स्वरूप |
| Chapter 3: अपवाह |
| Chapter 4: जलवायु |
| Chapter 5: प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी |
| Chapter 6: जनसंख्या |