Class 9 Geography Revision Notes
भारत का भौतिक स्वरूप
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Chapter Overview
| Class | 9 |
| Subject | Geography |
| Chapter Name | भारत का भौतिक स्वरूप |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
भारत का भौतिक स्वरूप Revision Notes
1. भारत की प्रमुख भौगोलिक आकृतियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ भारत का भौतिक स्वरूप अत्यंत विविधतापूर्ण है। इसकी भौगोलिक संरचना को मुख्यतः छह प्रमुख भागों में विभाजित किया गया है— (1) हिमालय पर्वत श्रृंखला, (2) उत्तरी मैदान, (3) प्रायद्वीपीय पठार, (4) भारतीय मरुस्थल, (5) तटीय मैदान तथा (6) द्वीप समूह। प्रत्येक भौगोलिक भाग की अपनी अलग विशेषताएँ हैं। हिमालय प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करता है, उत्तरी मैदान उपजाऊ कृषि क्षेत्र है, प्रायद्वीपीय पठार खनिज संपदा से समृद्ध है, थार मरुस्थल शुष्क जलवायु वाला क्षेत्र है, तटीय मैदान समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण हैं तथा द्वीप समूह सामरिक एवं पर्यटन की दृष्टि से विशेष महत्व रखते हैं।
(i) भारत की छह प्रमुख भौगोलिक आकृतियाँ हैं।
(ii) हिमालय उत्तरी सीमा पर स्थित है।
(iii) उत्तरी मैदान कृषि के लिए महत्वपूर्ण है।
(iv) प्रायद्वीपीय पठार खनिजों से समृद्ध है।
(v) द्वीप समूह सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
2. हिमालय पर्वत श्रृंखला का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ हिमालय विश्व की सबसे ऊँची एवं नवीन वलित पर्वत श्रृंखला है। यह भारत की उत्तरी सीमा पर सिंधु नदी से ब्रह्मपुत्र नदी तक लगभग 2400 किलोमीटर लंबाई में फैली हुई है। इसकी चौड़ाई कश्मीर में लगभग 400 किलोमीटर तथा अरुणाचल प्रदेश में लगभग 150 किलोमीटर है। हिमालय एक अर्द्धवृत्ताकार पर्वत श्रृंखला है जो भारत को उत्तर से प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करती है। यहाँ अनेक हिमनद, ऊँचे पर्वत शिखर तथा नदियों के उद्गम स्थल स्थित हैं। हिमालय भारत की जलवायु, कृषि, जल संसाधनों तथा प्राकृतिक संतुलन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
(i) हिमालय नवीन वलित पर्वत है।
(ii) लंबाई लगभग 2400 किमी. है।
(iii) भारत की उत्तरी सीमा पर स्थित है।
(iv) प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करता है।
(v) अनेक नदियों का उद्गम स्थल है।
3. हिमालय के उत्तर-दक्षिण विभाजन का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ उत्तर से दक्षिण की ओर हिमालय को तीन समानांतर पर्वत श्रेणियों में विभाजित किया गया है। सबसे उत्तरी भाग महान हिमालय (हिमाद्रि) है, जहाँ सबसे ऊँचे पर्वत शिखर और हिमनद स्थित हैं। इसके दक्षिण में निम्न हिमालय (हिमाचल) स्थित है, जहाँ पीर पंजाल, धौलाधर तथा महाभारत जैसी पर्वत श्रेणियाँ तथा कश्मीर, कुल्लू और कांगड़ा जैसी घाटियाँ हैं। सबसे दक्षिणी भाग शिवालिक कहलाता है, जो नवीन जलोढ़ अवसादों से निर्मित है। हिमाचल और शिवालिक के बीच स्थित लंबी घाटियों को दून कहा जाता है।
(i) हिमालय तीन भागों में विभाजित है।
(ii) हिमाद्रि सबसे ऊँचा भाग है।
(iii) हिमाचल मध्य भाग है।
(iv) शिवालिक सबसे बाहरी भाग है।
(v) दून घाटियाँ हिमाचल और शिवालिक के बीच हैं।
4. महान हिमालय (हिमाद्रि) की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ महान हिमालय, जिसे हिमाद्रि भी कहा जाता है, हिमालय का सबसे ऊँचा और उत्तरी भाग है। इसकी औसत ऊँचाई लगभग 6000 मीटर है। इस भाग में विश्व के प्रसिद्ध पर्वत शिखर जैसे माउंट एवरेस्ट, कंचनजंगा, मकालु तथा नंगा पर्वत स्थित हैं। यह क्षेत्र वर्षभर बर्फ से ढका रहता है तथा अनेक हिमनदों का उद्गम स्थल है। हिमाद्रि का अधिकांश भाग ग्रेनाइट चट्टानों से बना है। यहाँ से निकलने वाली नदियाँ भारत की प्रमुख नदी प्रणालियों को जल प्रदान करती हैं।
(i) हिमाद्रि सबसे ऊँचा भाग है।
(ii) औसत ऊँचाई 6000 मीटर है।
(iii) प्रमुख पर्वत शिखर यहीं स्थित हैं।
(iv) वर्षभर बर्फ से ढका रहता है।
(v) अनेक हिमनदों का उद्गम स्थल है।
5. निम्न हिमालय (हिमाचल) का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ निम्न हिमालय, जिसे हिमाचल भी कहा जाता है, महान हिमालय के दक्षिण में स्थित है। इसकी ऊँचाई लगभग 3700 से 4500 मीटर तथा औसत चौड़ाई लगभग 50 किलोमीटर है। इस भाग का निर्माण मुख्यतः संपीडित एवं रूपांतरित शैलों से हुआ है। यहाँ की प्रमुख पर्वत श्रेणियाँ पीर पंजाल, धौलाधर तथा महाभारत हैं। कश्मीर, कुल्लू तथा कांगड़ा जैसी प्रसिद्ध घाटियाँ इसी भाग में स्थित हैं। शिमला, मसूरी, नैनीताल और दार्जिलिंग जैसे प्रसिद्ध पर्वतीय नगर भी इसी क्षेत्र में विकसित हुए हैं।
(i) हिमाचल हिमाद्रि के दक्षिण में है।
(ii) ऊँचाई 3700–4500 मीटर है।
(iii) पीर पंजाल प्रमुख श्रृंखला है।
(iv) प्रसिद्ध घाटियाँ यहाँ स्थित हैं।
(v) पर्वतीय नगरों के लिए प्रसिद्ध है।
6. शिवालिक पर्वतमाला की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ शिवालिक हिमालय की सबसे बाहरी और दक्षिणी पर्वत श्रृंखला है। इसकी चौड़ाई लगभग 10 से 50 किलोमीटर तथा ऊँचाई लगभग 900 से 1100 मीटर तक होती है। इसका निर्माण हिमालय से आने वाली नदियों द्वारा लाए गए अवसादों से हुआ है। शिवालिक और हिमाचल के बीच स्थित लंबी एवं समतल घाटियों को दून कहा जाता है। देहरादून, कोटलीदून और पाटलीदून इसके प्रमुख उदाहरण हैं। यह क्षेत्र जलोढ़ निक्षेपों तथा उपजाऊ घाटियों के लिए प्रसिद्ध है।
(i) शिवालिक सबसे बाहरी श्रृंखला है।
(ii) ऊँचाई 900–1100 मीटर है।
(iii) अवसादों से निर्मित है।
(iv) दून घाटियाँ यहाँ मिलती हैं।
(v) देहरादून इसका प्रमुख उदाहरण है।
7. हिमालय के पश्चिम-पूर्व विभाजन का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ नदी घाटियों के आधार पर हिमालय को पश्चिम से पूर्व चार प्रमुख भागों में बाँटा गया है। सतलुज और सिंधु नदियों के बीच का भाग पंजाब हिमालय कहलाता है। सतलुज और काली नदी के बीच का भाग कुमाऊँ हिमालय है। काली और तिस्ता नदी के बीच का भाग नेपाल हिमालय कहलाता है तथा तिस्ता और दिहांग नदी के बीच स्थित भाग असम हिमालय कहलाता है। यह विभाजन हिमालय की भौगोलिक संरचना और क्षेत्रीय विशेषताओं को समझने में सहायता करता है।
(i) नदी घाटियों के आधार पर विभाजन हुआ है।
(ii) पंजाब हिमालय पश्चिम में है।
(iii) कुमाऊँ हिमालय मध्य भाग में है।
(iv) नेपाल हिमालय काली-तिस्ता के बीच है।
(v) असम हिमालय पूर्व में स्थित है।
8. पूर्वाचल (पूर्वी पहाड़ियों) का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ ब्रह्मपुत्र नदी के दिहांग गार्ज के बाद हिमालय दक्षिण की ओर मुड़कर भारत की पूर्वी सीमा के साथ फैल जाता है, जिसे पूर्वाचल या पूर्वी पहाड़ियाँ कहा जाता है। यह क्षेत्र मजबूत बलुआ पत्थर से बना है तथा घने जंगलों से आच्छादित है। यहाँ अधिकतर समानांतर पर्वत श्रेणियाँ एवं घाटियाँ पाई जाती हैं। पूर्वाचल की प्रमुख पहाड़ियों में पटकाई, नागा, मणिपुर तथा मिजो पहाड़ियाँ शामिल हैं। यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य, जैव विविधता तथा सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
(i) पूर्वाचल पूर्वी सीमा पर स्थित है।
(ii) घने जंगल पाए जाते हैं।
(iii) बलुआ पत्थर से निर्मित है।
(iv) नागा एवं मिजो पहाड़ियाँ यहाँ हैं।
(v) जैव विविधता से समृद्ध है।
9. उत्तरी मैदान का निर्माण एवं महत्व बताइए।
उत्तर ⇒ उत्तरी मैदान का निर्माण सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों तथा उनकी सहायक नदियों द्वारा लाए गए जलोढ़ निक्षेपों से हुआ है। लाखों वर्षों तक इन नदियों ने हिमालय से लाई गई मिट्टी को विशाल द्रोणी में जमा किया, जिससे यह उपजाऊ मैदान बना। इसका क्षेत्रफल लगभग 7 लाख वर्ग किलोमीटर तथा लंबाई लगभग 2400 किलोमीटर है। उपजाऊ मिट्टी, पर्याप्त जल तथा अनुकूल जलवायु के कारण यह भारत का सबसे महत्वपूर्ण कृषि क्षेत्र है। यहाँ देश की सर्वाधिक जनसंख्या निवास करती है।
(i) जलोढ़ मिट्टी से निर्मित है।
(ii) सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र ने बनाया है।
(iii) अत्यंत उपजाऊ मैदान है।
(iv) कृषि के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
(v) घनी जनसंख्या निवास करती है।
10. नदी घाटियों के आधार पर उत्तरी मैदानों का विभाजन कीजिए।
उत्तर ⇒ नदी घाटियों के आधार पर उत्तरी मैदानों को तीन भागों में विभाजित किया जाता है। पहला पंजाब का मैदान है, जो सिंधु और उसकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित है। दूसरा गंगा का मैदान है, जिसका विस्तार घग्घर नदी से तिस्ता नदी तक है और यह हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार तथा पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ है। तीसरा ब्रह्मपुत्र का मैदान है, जो मुख्यतः असम में स्थित है। इन तीनों मैदानों की मिट्टी अत्यंत उपजाऊ है और ये भारत के प्रमुख कृषि क्षेत्र हैं।
(i) पंजाब का मैदान सिंधु नदी से बना है।
(ii) गंगा का मैदान सबसे विस्तृत है।
(iii) ब्रह्मपुत्र का मैदान असम में है।
(iv) सभी मैदान जलोढ़ मिट्टी से बने हैं।
(v) कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
11. आकृतिक भिन्नता के आधार पर उत्तरी मैदानों का विभाजन कीजिए।
उत्तर ⇒ आकृतिक भिन्नता के आधार पर उत्तरी मैदानों को चार भागों में विभाजित किया गया है— भाबर, तराई, भांगर तथा खादर। भाबर हिमालय की तलहटी में कंकड़-पत्थरों के निक्षेप से बना क्षेत्र है, जहाँ नदियाँ लुप्त हो जाती हैं। तराई भाबर के दक्षिण में स्थित दलदली क्षेत्र है, जहाँ नदियाँ पुनः सतह पर दिखाई देती हैं। भांगर पुराने जलोढ़ निक्षेपों से बना ऊँचा मैदान है, जबकि खादर नए जलोढ़ निक्षेपों से बना अत्यंत उपजाऊ बाढ़ का मैदान है। इन चारों भागों की अपनी अलग भौगोलिक विशेषताएँ हैं।
(i) चार भागों में विभाजित किया गया है।
(ii) भाबर सबसे उत्तरी भाग है।
(iii) तराई दलदली क्षेत्र है।
(iv) भांगर पुराने जलोढ़ से बना है।
(v) खादर सबसे उपजाऊ क्षेत्र है।
12. भाबर एवं तराई क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ भाबर हिमालय की तलहटी में स्थित 8 से 16 किलोमीटर चौड़ी पट्टी है। यहाँ नदियाँ पर्वतों से उतरते समय बड़े-बड़े कंकड़ और पत्थरों का निक्षेप करती हैं, जिसके कारण अधिकांश नदियाँ इस क्षेत्र में भूमि के भीतर लुप्त हो जाती हैं। भाबर के दक्षिण में तराई क्षेत्र स्थित है, जहाँ यही नदियाँ पुनः सतह पर निकल आती हैं और दलदली भूमि का निर्माण करती हैं। पहले यह क्षेत्र घने जंगलों एवं वन्य जीवों के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन बाद में इसका बड़ा भाग कृषि भूमि में परिवर्तित कर दिया गया।
(i) भाबर कंकड़-पत्थरों का क्षेत्र है।
(ii) नदियाँ भाबर में लुप्त हो जाती हैं।
(iii) तराई दलदली क्षेत्र है।
(iv) नदियाँ तराई में पुनः प्रकट होती हैं।
(v) तराई पहले घने जंगलों से ढकी थी।
13. भांगर एवं खादर में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒ भांगर उत्तरी मैदान का पुराना जलोढ़ क्षेत्र है, जो बाढ़ के मैदान से ऊँचाई पर स्थित होता है। इसकी मिट्टी में चुनेदार निक्षेप पाए जाते हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में कंकड़ कहा जाता है। दूसरी ओर खादर बाढ़ द्वारा प्रतिवर्ष जमा किए गए नए जलोढ़ निक्षेपों से बना होता है। इसकी मिट्टी अत्यंत उपजाऊ होती है और प्रत्येक वर्ष नई मिट्टी मिलने के कारण कृषि के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। दोनों ही क्षेत्र उत्तरी मैदान का महत्वपूर्ण भाग हैं, किंतु उनकी मिट्टी और उपजाऊ क्षमता में अंतर है।
| भांगर | खादर |
|---|---|
| पुराना जलोढ़ | नया जलोढ़ |
| ऊँचा मैदान | बाढ़ का मैदान |
| कंकड़युक्त मिट्टी | अत्यंत उपजाऊ मिट्टी |
(i) भांगर पुराना जलोढ़ है।
(ii) खादर नया जलोढ़ है।
(iii) भांगर ऊँचाई पर स्थित है।
(iv) खादर अधिक उपजाऊ है।
(v) खादर में हर वर्ष नई मिट्टी जमा होती है।
14. प्रायद्वीपीय पठार का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ प्रायद्वीपीय पठार भारत का सबसे प्राचीन भूभाग है। इसका निर्माण पुराने क्रिस्टलीय, आग्नेय तथा रूपांतरित शैलों से हुआ है। यह गोंडवाना भूमि के टूटने एवं अपरदन के परिणामस्वरूप बना है। इसकी आकृति मेज के समान है तथा यहाँ चौड़ी एवं उथली घाटियाँ तथा गोलाकार पहाड़ियाँ पाई जाती हैं। प्रायद्वीपीय पठार खनिज संसाधनों से समृद्ध है और भारत के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे दो प्रमुख भागों— मध्य उच्चभूमि तथा दक्कन का पठार— में विभाजित किया जाता है।
(i) भारत का सबसे प्राचीन भूभाग है।
(ii) आग्नेय एवं रूपांतरित शैलों से बना है।
(iii) मेज जैसी आकृति है।
(iv) खनिजों से समृद्ध है।
(v) दो भागों में विभाजित है।
15. मध्य उच्चभूमि का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ मध्य उच्चभूमि प्रायद्वीपीय पठार का वह भाग है जो नर्मदा नदी के उत्तर में स्थित है। इसका अधिकांश भाग मालवा के पठार पर फैला हुआ है। यह दक्षिण में विंध्य तथा सतपुड़ा पर्वतमालाओं और उत्तर-पश्चिम में अरावली पर्वतमाला से घिरा है। इस क्षेत्र की प्रमुख नदियाँ चंबल, सिंध, बेतवा और केन हैं, जो दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर बहती हैं। इसके पूर्वी विस्तार को बुंदेलखंड, बघेलखंड तथा छोटानागपुर पठार के नाम से जाना जाता है।
(i) नर्मदा के उत्तर में स्थित है।
(ii) मालवा पठार इसका प्रमुख भाग है।
(iii) विंध्य एवं सतपुड़ा से घिरा है।
(iv) चंबल एवं बेतवा प्रमुख नदियाँ हैं।
(v) छोटानागपुर इसका पूर्वी विस्तार है।
16. दक्कन के पठार का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ दक्कन का पठार नर्मदा नदी के दक्षिण में स्थित त्रिभुजाकार भूभाग है। इसके उत्तर में सतपुड़ा पर्वतमाला तथा पूर्व में महादेव, कैमूर और मैकाल पर्वत स्थित हैं। इसका पश्चिमी भाग अधिक ऊँचा तथा पूर्वी भाग अपेक्षाकृत नीचा है, इसलिए अधिकांश नदियाँ पूर्व की ओर बहती हैं। दक्कन का पठार खनिज संपदा, काली मिट्टी तथा कृषि के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ का ज्वालामुखीय क्षेत्र दक्कन ट्रैप कहलाता है, जहाँ काली मिट्टी का विस्तार पाया जाता है।
(i) नर्मदा के दक्षिण में स्थित है।
(ii) त्रिभुजाकार भूभाग है।
(iii) पश्चिम ऊँचा और पूर्व नीचा है।
(iv) दक्कन ट्रैप यहाँ स्थित है।
(v) काली मिट्टी पाई जाती है।
17. पश्चिमी घाट एवं पूर्वी घाट की तुलना कीजिए।
उत्तर ⇒ पश्चिमी घाट दक्कन के पठार के पश्चिमी किनारे पर स्थित सतत पर्वत श्रृंखला है, जिसकी ऊँचाई 900 से 1600 मीटर तक होती है। पूर्वी घाट दक्कन के पूर्वी किनारे पर स्थित असतत एवं टूटी-फूटी पर्वत श्रृंखला है, जिसकी औसत ऊँचाई लगभग 600 मीटर है। पश्चिमी घाट में थाल घाट, भोर घाट तथा पाल घाट जैसे प्रमुख दर्रे पाए जाते हैं, जबकि पूर्वी घाट को महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी नदियाँ काटती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं।
| पश्चिमी घाट | पूर्वी घाट |
|---|---|
| सतत पर्वत श्रृंखला | असतत पर्वत श्रृंखला |
| अधिक ऊँचाई | कम ऊँचाई |
| प्रमुख दर्रे पाए जाते हैं | नदियों द्वारा कटे हुए |
(i) पश्चिमी घाट सतत है।
(ii) पूर्वी घाट असतत है।
(iii) पश्चिमी घाट अधिक ऊँचा है।
(iv) पूर्वी घाट को नदियाँ काटती हैं।
(v) दोनों दक्कन के पठार की सीमाएँ बनाते हैं।
18. भारतीय मरुस्थल (थार मरुस्थल) का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ भारतीय मरुस्थल, जिसे थार मरुस्थल भी कहा जाता है, अरावली पर्वतमाला के पश्चिम में स्थित है। यह विशाल बालू के टिब्बों वाला शुष्क क्षेत्र है, जहाँ वार्षिक वर्षा 150 मिमी से भी कम होती है। यहाँ की जलवायु अत्यंत शुष्क होने के कारण वनस्पति बहुत कम पाई जाती है। इस क्षेत्र की प्रमुख नदी लूनी नदी है। यहाँ अर्धचंद्राकार बालू के टिब्बों को बरखान कहा जाता है। भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट लंबे बालू के टिब्बे भी पाए जाते हैं।
(i) थार भारत का प्रमुख मरुस्थल है।
(ii) अरावली के पश्चिम में स्थित है।
(iii) वर्षा बहुत कम होती है।
(iv) लूनी प्रमुख नदी है।
(v) बरखान बालू के टिब्बे पाए जाते हैं।
19. भारत के तटीय मैदानों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ भारत के तटीय मैदान प्रायद्वीपीय पठार के दोनों ओर स्थित हैं। पश्चिमी तटीय मैदान पश्चिमी घाट और अरब सागर के बीच स्थित संकीर्ण मैदान है, जिसके प्रमुख भाग कोंकण, कन्नड़ तथा मालाबार तट हैं। पूर्वी तटीय मैदान बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित चौड़ा एवं समतल मैदान है। इसके उत्तरी भाग को उत्तरी सरकार तथा दक्षिणी भाग को कोरोमंडल तट कहा जाता है। महानदी, गोदावरी, कृष्णा तथा कावेरी नदियाँ यहाँ विशाल डेल्टा बनाती हैं।
(i) दो प्रमुख तटीय मैदान हैं।
(ii) पश्चिमी तट संकीर्ण है।
(iii) पूर्वी तट चौड़ा है।
(iv) पूर्वी तट पर डेल्टा बनते हैं।
(v) समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण हैं।
20. भारत के द्वीप समूहों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ भारत के दो प्रमुख द्वीप समूह हैं— लक्षद्वीप तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह। लक्षद्वीप अरब सागर में केरल के मालाबार तट के निकट स्थित प्रवाल द्वीपों का समूह है, जिसका प्रशासनिक मुख्यालय कावारत्ती है। अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह बंगाल की खाड़ी में स्थित है और इसे अंडमान तथा निकोबार दो भागों में बाँटा गया है। ये द्वीप देश की समुद्री सुरक्षा, जैव विविधता तथा पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यहाँ विषुवतीय जलवायु तथा घने वन पाए जाते हैं।
(i) भारत के दो प्रमुख द्वीप समूह हैं।
(ii) लक्षद्वीप अरब सागर में है।
(iii) अंडमान-निकोबार बंगाल की खाड़ी में है।
(iv) समुद्री सुरक्षा में महत्वपूर्ण हैं।
(v) जैव विविधता से समृद्ध हैं।
More Class 9 Geography Revision Notes
| Chapter 1: भारत – आकार एवं स्थिति |
| Chapter 2: भारत का भौतिक स्वरूप |
| Chapter 3: अपवाह |
| Chapter 4: जलवायु |
| Chapter 5: प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी |
| Chapter 6: जनसंख्या |