Class 9 Geography Revision Notes
प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी
Revise the NCERT Class 9 Geography chapter, प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी, with these concise and well-organised revision notes. JAC Exam Prep (jac.jharkhandexamprep.com) provides NCERT Class 9 Geography प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी Revision Notes based on the latest NCERT syllabus. Download the PDF below and revise the chapter for school examinations, CBSE board examinations, and competitive exams such as JEE and NEET.
Chapter Overview
| Class | 9 |
| Subject | Geography |
| Chapter Name | प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी Revision Notes
1. भारत की जैव विविधता का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ भारत विश्व के 12 प्रमुख जैव विविधता वाले देशों में शामिल है। यहाँ लगभग 47,000 से अधिक पौधों की जातियाँ तथा 90,000 से अधिक जीव-जंतुओं की प्रजातियाँ पाई जाती हैं। भारत में लगभग 15,000 प्रकार के पुष्पीय पौधे हैं, जो विश्व के कुल पुष्पीय पौधों का लगभग 6% हैं। इसके अतिरिक्त फर्न, शैवाल, कवक आदि भी पाए जाते हैं। विभिन्न प्रकार की मछलियाँ, पक्षी, स्तनधारी, सरीसृप तथा उभयचर भी भारत की जैव विविधता को समृद्ध बनाते हैं। भारत की विविध जलवायु और भौतिक संरचना के कारण यहाँ वनस्पतियों एवं जीवों की अनेक प्रजातियाँ विकसित हुई हैं।
(i) भारत 12 प्रमुख जैव विविधता वाले देशों में है।
(ii) 47,000 से अधिक पौधों की जातियाँ हैं।
(iii) लगभग 90,000 जीव-जंतुओं की प्रजातियाँ हैं।
(iv) 15,000 प्रकार के पुष्पीय पौधे पाए जाते हैं।
(v) विविध जलवायु जैव विविधता का प्रमुख कारण है।
2. प्राकृतिक वनस्पति क्या है? देशज एवं विदेशज पौधों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒ प्राकृतिक वनस्पति वह वनस्पति है जो मानव की सहायता के बिना प्राकृतिक रूप से उगती है तथा लंबे समय तक जिस पर मानवीय प्रभाव नहीं पड़ता। इसे अक्षत वनस्पति भी कहा जाता है। कृषि फसलें, बागान तथा फलदार पौधे प्राकृतिक वनस्पति नहीं हैं। देशज पौधे वे हैं जो मूल रूप से भारत के हैं और यहाँ की जलवायु एवं मिट्टी के अनुसार विकसित हुए हैं। जबकि विदेशज पौधे वे हैं जिन्हें अन्य देशों से मनुष्यों द्वारा भारत लाया गया है।
(i) प्राकृतिक वनस्पति स्वतः उगती है।
(ii) इसे अक्षत वनस्पति भी कहते हैं।
(iii) देशज पौधे भारत के मूल पौधे हैं।
(iv) विदेशज पौधे बाहर से लाए जाते हैं।
(v) कृषि फसलें प्राकृतिक वनस्पति नहीं हैं।
3. वनस्पति-जगत एवं प्राणि-जगत से आप क्या समझते हैं?
उत्तर ⇒ किसी क्षेत्र में एक निश्चित समय पर पाई जाने वाली सभी प्रकार की वनस्पतियों के समूह को वनस्पति-जगत कहा जाता है। इसमें वृक्ष, झाड़ियाँ, घास, फूल तथा अन्य पौधे शामिल होते हैं। उसी प्रकार किसी क्षेत्र में पाए जाने वाले सभी प्रकार के जीव-जंतुओं के समूह को प्राणि-जगत कहा जाता है। इसमें स्तनधारी, पक्षी, सरीसृप, मछलियाँ, कीट-पतंगे तथा अन्य वन्य जीव शामिल होते हैं। दोनों मिलकर किसी क्षेत्र की जैव विविधता का निर्माण करते हैं।
(i) वनस्पति-जगत में सभी पौधे शामिल हैं।
(ii) प्राणि-जगत में सभी जीव-जंतु शामिल हैं।
(iii) दोनों जैव विविधता का भाग हैं।
(iv) किसी क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा को दर्शाते हैं।
(v) पर्यावरण संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
4. भारत में प्राकृतिक वनस्पतियों के प्रमुख प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ भारत में प्राकृतिक वनस्पतियों को पाँच प्रमुख भागों में बाँटा गया है— (1) उष्ण कटिबंधीय वर्षा (सदाबहार) वन, (2) उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन, (3) उष्ण कटिबंधीय कंटीले वन एवं झाड़ियाँ, (4) पर्वतीय वन तथा (5) मैंग्रोव वन। इन वनस्पतियों का वितरण वर्षा, तापमान, मिट्टी तथा स्थलाकृति के अनुसार होता है। प्रत्येक प्रकार के वन में अलग-अलग प्रकार के वृक्ष, पौधे तथा वन्य जीव पाए जाते हैं। ये वन देश की जैव विविधता एवं पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
(i) भारत में पाँच प्रकार की प्राकृतिक वनस्पतियाँ हैं।
(ii) वर्षा एवं तापमान इनका आधार हैं।
(iii) प्रत्येक वन की अलग विशेषता है।
(iv) वन जैव विविधता को बढ़ाते हैं।
(v) पर्यावरण संरक्षण में सहायक हैं।
5. उष्ण कटिबंधीय वर्षा (सदाबहार) वनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ 200 सेमी से अधिक वर्षा होती है। ये पश्चिमी घाट, अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, असम के ऊपरी भाग तथा तमिलनाडु के कुछ तटीय क्षेत्रों में मिलते हैं। इन वनों के वृक्ष 60 मीटर या उससे अधिक ऊँचे होते हैं। यहाँ पेड़ों के पत्ते एक साथ नहीं गिरते, इसलिए ये वन पूरे वर्ष हरे-भरे रहते हैं। प्रमुख वृक्षों में महोगनी, आबनूस, रोज़वुड, रबर एवं सिंकोना शामिल हैं। हाथी, बंदर, हिरण तथा अनेक पक्षी एवं सरीसृप यहाँ पाए जाते हैं।
(i) 200 सेमी से अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
(ii) वर्षभर हरे-भरे रहते हैं।
(iii) वृक्ष बहुत ऊँचे होते हैं।
(iv) महोगनी एवं आबनूस प्रमुख वृक्ष हैं।
(v) हाथी एवं बंदर प्रमुख जीव हैं।
6. उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन भारत में सबसे अधिक क्षेत्र में फैले हुए हैं। इन्हें मानसूनी वन भी कहा जाता है। ये 70 से 200 सेंटीमीटर वर्षा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं। इन वनों के वृक्ष शुष्क ग्रीष्म ऋतु में लगभग 6 से 8 सप्ताह के लिए अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं। इन वनों में सिंह, हिरण, हाथी, सूअर, साँप, कछुए तथा अनेक प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं। जल की उपलब्धता के आधार पर इन्हें आर्द्र पर्णपाती तथा शुष्क पर्णपाती वनों में विभाजित किया जाता है।
(i) इन्हें मानसूनी वन कहते हैं।
(ii) 70–200 सेमी वर्षा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
(iii) वृक्ष ग्रीष्म ऋतु में पत्तियाँ गिराते हैं।
(iv) भारत में सबसे अधिक क्षेत्र में फैले हैं।
(v) आर्द्र एवं शुष्क दो प्रकार के होते हैं।
7. आर्द्र एवं शुष्क पर्णपाती वनों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒ आर्द्र पर्णपाती वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ 100 से 200 सेमी वर्षा होती है। इन वनों में सागौन, साल, बाँस, शीशम, अर्जुन आदि प्रमुख वृक्ष पाए जाते हैं। दूसरी ओर शुष्क पर्णपाती वन 70 से 100 सेमी वर्षा वाले क्षेत्रों में मिलते हैं। इन क्षेत्रों में सागौन, साल, पीपल तथा नीम प्रमुख वृक्ष हैं। आर्द्र पर्णपाती वन मुख्यतः पूर्वी भारत तथा पश्चिमी घाट के पूर्वी ढालों में पाए जाते हैं, जबकि शुष्क पर्णपाती वन उत्तर भारत एवं प्रायद्वीपीय पठार के कुछ भागों में मिलते हैं।
| आर्द्र पर्णपाती वन | शुष्क पर्णपाती वन |
|---|---|
| 100–200 सेमी वर्षा | 70–100 सेमी वर्षा |
| अधिक घने वन | अपेक्षाकृत कम घने वन |
| साल, सागौन, बाँस | सागौन, नीम, पीपल |
(i) वर्षा के आधार पर अंतर है।
(ii) आर्द्र वन अधिक घने होते हैं।
(iii) शुष्क वन कम वर्षा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
(iv) दोनों में सागौन पाया जाता है।
(v) दोनों व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
8. उष्ण कटिबंधीय कंटीले वन एवं झाड़ियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ उष्ण कटिबंधीय कंटीले वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ 70 सेमी से कम वर्षा होती है। ये मुख्यतः राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में मिलते हैं। इन वनों के वृक्ष बिखरे हुए होते हैं तथा उनकी जड़ें लंबी होती हैं ताकि वे अधिक गहराई से जल प्राप्त कर सकें। इनकी पत्तियाँ छोटी होती हैं जिससे वाष्पीकरण कम होता है। प्रमुख वृक्षों में बबूल (अकासिया), खजूर, यूफोरबिया एवं नागफनी शामिल हैं।
(i) 70 सेमी से कम वर्षा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
(ii) जड़ें लंबी होती हैं।
(iii) पत्तियाँ छोटी होती हैं।
(iv) नागफनी प्रमुख पौधा है।
(v) राजस्थान एवं गुजरात में अधिक पाए जाते हैं।
9. पर्वतीय वनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ पर्वतीय क्षेत्रों में ऊँचाई बढ़ने के साथ वनस्पति में परिवर्तन होता है। 1000–2000 मीटर की ऊँचाई पर चौड़ी पत्ती वाले ओक एवं चेस्टनट के वन मिलते हैं। 1500–3000 मीटर के बीच चीड़, देवदार, स्प्रूस तथा सिल्वर फर जैसे शंकुधारी वन पाए जाते हैं। 3600 मीटर से अधिक ऊँचाई पर अल्पाइन वनस्पति, घास के मैदान, काई तथा लाइकेन पाए जाते हैं। इन वनों में याक, हिम तेंदुआ, लाल पांडा, कश्मीरी महामृग, जंगली भेड़ आदि वन्य जीव पाए जाते हैं।
(i) ऊँचाई के अनुसार वनस्पति बदलती है।
(ii) शंकुधारी वन 1500–3000 मीटर पर मिलते हैं।
(iii) अल्पाइन वनस्पति 3600 मीटर से ऊपर होती है।
(iv) याक एवं हिम तेंदुआ पाए जाते हैं।
(v) काई एवं लाइकेन भी मिलते हैं।
10. मैंग्रोव वनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ मैंग्रोव वन तटीय क्षेत्रों तथा ज्वार-भाटा वाले डेल्टा प्रदेशों में पाए जाते हैं। ये गंगा, ब्रह्मपुत्र, महानदी, गोदावरी, कृष्णा एवं कावेरी नदियों के डेल्टा क्षेत्रों में विकसित होते हैं। इन वनों की जड़ें पानी में डूबी रहती हैं तथा ये दलदली भूमि में उगते हैं। सुंदरी वृक्ष इन वनों का प्रमुख वृक्ष है, जिससे सुंदरवन का नाम पड़ा है। यहाँ रॉयल बंगाल टाइगर, मगरमच्छ, घड़ियाल, कछुए तथा विभिन्न प्रकार के साँप पाए जाते हैं।
(i) तटीय एवं डेल्टा क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
(ii) ज्वार-भाटा वाले क्षेत्रों में विकसित होते हैं।
(iii) सुंदरी प्रमुख वृक्ष है।
(iv) रॉयल बंगाल टाइगर प्रसिद्ध जीव है।
(v) जड़ें पानी में डूबी रहती हैं।
11. भारत में पाए जाने वाले प्रमुख वन्य प्राणियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ भारत वन्य प्राणियों की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध देश है। यहाँ लगभग 90,000 प्रजातियों के जीव-जंतु पाए जाते हैं। हाथी असम, कर्नाटक तथा केरल के आर्द्र वनों में पाए जाते हैं। एक सींग वाला गैंडा असम एवं पश्चिम बंगाल के दलदली क्षेत्रों में मिलता है। जंगली गधा कच्छ के रण में तथा ऊँट थार मरुस्थल में पाया जाता है। भारत में भारतीय भैंसा, नीलगाय, चौसिंघा, गैजल तथा अनेक प्रकार के हिरण भी मिलते हैं। विविध जलवायु और प्राकृतिक वनस्पतियों के कारण यहाँ वन्य जीवों की अत्यधिक विविधता देखने को मिलती है।
(i) भारत में लगभग 90,000 जीव प्रजातियाँ हैं।
(ii) हाथी आर्द्र वनों में पाए जाते हैं।
(iii) एक सींग वाला गैंडा असम में मिलता है।
(iv) ऊँट थार मरुस्थल में पाया जाता है।
(v) भारत वन्य जीवों से समृद्ध देश है।
12. भारत में पाए जाने वाले पक्षियों, सरीसृपों एवं जलीय जीवों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ भारत में पक्षियों की 2,000 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो विश्व की कुल पक्षी प्रजातियों का लगभग 13 प्रतिशत हैं। प्रमुख पक्षियों में मोर, तोता, मैना, बत्तख, सारस तथा कबूतर शामिल हैं। भारत की नदियों, झीलों तथा समुद्री क्षेत्रों में कछुए, मगरमच्छ एवं घड़ियाल पाए जाते हैं। घड़ियाल विश्व में मुख्य रूप से भारत में पाया जाने वाला महत्वपूर्ण सरीसृप है। भारत में लगभग 2,546 प्रकार की मछलियाँ भी पाई जाती हैं, जो विश्व की कुल मछली प्रजातियों का लगभग 12 प्रतिशत हैं।
(i) भारत में 2,000 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ हैं।
(ii) मोर भारत का प्रमुख पक्षी है।
(iii) घड़ियाल प्रमुख सरीसृप है।
(iv) 2,546 प्रकार की मछलियाँ पाई जाती हैं।
(v) भारत जलीय जीवों से भी समृद्ध है।
13. भारत में शेर, बाघ एवं हिमालयी वन्य प्राणियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ भारत विश्व का एकमात्र देश है जहाँ शेर और बाघ दोनों प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं। भारतीय शेर केवल गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाते हैं। बाघ मध्य प्रदेश, झारखंड, सुंदरवन तथा हिमालयी क्षेत्रों के वनों में पाए जाते हैं। हिमालयी क्षेत्रों में याक, तिब्बती बारहसिंघा, भारल (नीली भेड़), कियांग, जंगली भेड़ तथा लाल पांडा जैसे विशेष जीव मिलते हैं। इन क्षेत्रों की कठोर जलवायु के कारण यहाँ विशिष्ट वन्य जीवों का विकास हुआ है।
(i) भारत में शेर और बाघ दोनों पाए जाते हैं।
(ii) शेर गिर वन में पाए जाते हैं।
(iii) बाघ कई राज्यों में पाए जाते हैं।
(iv) याक हिमालय का प्रमुख जीव है।
(v) लाल पांडा भी हिमालय में मिलता है।
14. वनों का महत्व बताइए।
उत्तर ⇒ वन मानव जीवन तथा पर्यावरण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। ये प्रकाश संश्लेषण द्वारा ऑक्सीजन प्रदान करते हैं तथा कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर जलवायु को संतुलित रखते हैं। वन जलावन की लकड़ी, औषधियाँ, फल, गोंद तथा अन्य वन उत्पाद उपलब्ध कराते हैं। पेड़ों की जड़ें मिट्टी को बाँधकर मृदा अपरदन रोकती हैं तथा वर्षा और जलचक्र को बनाए रखने में सहायता करती हैं। वन अनेक जीव-जंतुओं का प्राकृतिक आवास हैं तथा जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
(i) वन ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।
(ii) जलवायु को संतुलित रखते हैं।
(iii) मृदा अपरदन रोकते हैं।
(iv) वर्षा एवं जलचक्र में सहायक हैं।
(v) वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास हैं।
15. जीव एवं पौधों का मानव जीवन में महत्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒ जीव एवं पौधे मानव जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। जानवर कृषि कार्य, परिवहन तथा बोझा ढोने में सहायता करते हैं। उनसे दूध, मांस, अंडे एवं अन्य उपयोगी वस्तुएँ प्राप्त होती हैं। मछलियाँ पौष्टिक भोजन का महत्वपूर्ण स्रोत हैं। पौधे भोजन, लकड़ी, औषधि, ईंधन तथा ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। अनेक कीट-पतंगे परागण में सहायता करते हैं और हानिकारक कीटों का जैविक नियंत्रण भी करते हैं। इस प्रकार जीव एवं पौधे पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
(i) जानवर कृषि कार्य में सहायक हैं।
(ii) पौधे ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।
(iii) मछलियाँ पौष्टिक भोजन देती हैं।
(iv) कीट परागण में सहायता करते हैं।
(v) जीव एवं पौधे पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हैं।
16. पारिस्थितिक तंत्र के असंतुलन के प्रमुख कारण बताइए।
उत्तर ⇒ मनुष्य द्वारा प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक उपयोग के कारण पारिस्थितिक तंत्र का संतुलन बिगड़ रहा है। इसके प्रमुख कारणों में अत्यधिक शिकार, औद्योगिक एवं रासायनिक प्रदूषण, विदेशी (आक्रामक) प्रजातियों का प्रवेश, कृषि एवं आवास के लिए वनों की कटाई तथा प्राकृतिक आवासों का नष्ट होना शामिल हैं। इन कारणों से अनेक पौधों एवं वन्य जीवों की प्रजातियाँ संकटग्रस्त हो गई हैं तथा कुछ प्रजातियाँ विलुप्त भी हो चुकी हैं। इसलिए प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग आवश्यक है।
(i) अत्यधिक शिकार प्रमुख कारण है।
(ii) वनों की कटाई असंतुलन बढ़ाती है।
(iii) प्रदूषण भी जिम्मेदार है।
(iv) प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं।
(v) कई प्रजातियाँ विलुप्त हो रही हैं।
17. सरकार द्वारा वन एवं वन्य जीव संरक्षण के लिए किए गए उपायों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ भारत सरकार ने वन एवं वन्य जीवों के संरक्षण के लिए अनेक योजनाएँ लागू की हैं। देश में 18 जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र स्थापित किए गए हैं। सरकार राष्ट्रीय उद्यानों, वन्य जीव अभयारण्यों तथा चिड़ियाघरों की स्थापना कर रही है। वर्ष 1992 से पादप उद्यानों को वित्तीय एवं तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है। शेर, गैंडा तथा भारतीय भैंसे के संरक्षण के लिए विशेष योजनाएँ भी चलाई जा रही हैं। वर्तमान में देश में 106 राष्ट्रीय उद्यान तथा 573 वन्य जीव अभयारण्य स्थापित किए गए हैं।
(i) 18 जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र स्थापित किए गए हैं।
(ii) 106 राष्ट्रीय उद्यान हैं।
(iii) 573 वन्य जीव अभयारण्य हैं।
(iv) संरक्षण हेतु विशेष योजनाएँ चलाई जा रही हैं।
(v) सरकार वित्तीय सहायता भी देती है।
18. जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserve) क्या हैं? इनके महत्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र ऐसे संरक्षित क्षेत्र हैं जहाँ प्राकृतिक वनस्पति, वन्य जीव तथा संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण किया जाता है। भारत में 18 जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें सुंदरवन, नीलगिरी, नंदादेवी, पन्ना, कंचनजंगा, ग्रेट निकोबार, सिमलीपाल आदि प्रमुख हैं। इनमें से कई क्षेत्रों को यूनेस्को के विश्व जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र के रूप में भी मान्यता प्राप्त है। इनका उद्देश्य जैव विविधता का संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों का सतत विकास सुनिश्चित करना है।
(i) जैव विविधता का संरक्षण करते हैं।
(ii) भारत में 18 जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र हैं।
(iii) सुंदरवन प्रमुख आरक्षित क्षेत्र है।
(iv) कई क्षेत्रों को विश्व मान्यता मिली है।
(v) सतत विकास में सहायक हैं।
19. प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण की आवश्यकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒ प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य प्राणियाँ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। वन ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, जलवायु को नियंत्रित करते हैं तथा मृदा अपरदन रोकते हैं। वन्य जीव खाद्य श्रृंखला और पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण भाग हैं। यदि इनका संरक्षण नहीं किया गया, तो अनेक प्रजातियाँ विलुप्त हो जाएँगी और पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ जाएगा। इसलिए वनों की कटाई रोकना, वन्य जीवों का शिकार बंद करना तथा संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार करना आवश्यक है।
(i) पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हैं।
(ii) जैव विविधता की रक्षा करते हैं।
(iii) विलुप्ति रोकना आवश्यक है।
(iv) वनों की कटाई रोकनी चाहिए।
(v) वन्य जीव संरक्षण आवश्यक है।
20. ‘प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी’ अध्याय से हमें क्या सीख मिलती है?
उत्तर ⇒ यह अध्याय हमें भारत की प्राकृतिक वनस्पतियों, वन्य प्राणियों तथा जैव विविधता का महत्व समझाता है। इससे हमें विभिन्न प्रकार के वनों, उनके वितरण, प्रमुख वृक्षों तथा वन्य जीवों की जानकारी प्राप्त होती है। यह अध्याय वनों के महत्व, पर्यावरण संरक्षण तथा वन्य जीवों के संरक्षण की आवश्यकता पर भी बल देता है। साथ ही यह हमें प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने तथा जैव विविधता को सुरक्षित रखने की प्रेरणा देता है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संपदा संरक्षित रह सके।
(i) जैव विविधता का महत्व समझ में आता है।
(ii) विभिन्न प्रकार के वनों की जानकारी मिलती है।
(iii) वन्य जीवों के संरक्षण की आवश्यकता ज्ञात होती है।
(iv) पर्यावरण संरक्षण का संदेश मिलता है।
(v) प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग की प्रेरणा मिलती है।
More Class 9 Geography Revision Notes
| Chapter 1: भारत – आकार एवं स्थिति |
| Chapter 2: भारत का भौतिक स्वरूप |
| Chapter 3: अपवाह |
| Chapter 4: जलवायु |
| Chapter 5: प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी |
| Chapter 6: जनसंख्या |