Class 9 Civics Revision Notes

संस्थाओं का कामकाज

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Chapter Overview

Class9
SubjectCivics 
Chapter Nameसंस्थाओं का कामकाज
Resource TypeRevision Notes
SyllabusNCERT
Suitable ForCBSE, JAC and other state boards

संस्थाओं का कामकाज Revision Notes

1. सरकार क्या है? सरकार के प्रमुख कार्यों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ सरकार संस्थाओं का ऐसा समूह है जिसके पास देश में कानून बनाने, उन्हें लागू करने तथा उनकी व्याख्या करने का अधिकार होता है। सरकार नागरिकों की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था और विकास की जिम्मेदारी निभाती है। सरकार कर (टैक्स) एकत्र करती है तथा उसका उपयोग सेना, पुलिस, विकास योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों पर करती है। इसके अतिरिक्त सरकार विभिन्न नीतियाँ बनाकर अधिकारियों के माध्यम से उन्हें लागू करती है। इस प्रकार सरकार देश के प्रशासन और जनजीवन को व्यवस्थित रूप से संचालित करती है।

(i) सरकार कानून बनाती और लागू करती है।

(ii) नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

(iii) शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराती है।

(iv) कर एकत्र कर विकास कार्य करती है।

(v) नीतियाँ बनाकर प्रशासन चलाती है।

2. लोकतंत्र में संस्थाएँ क्या होती हैं? इनके महत्व का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ लोकतंत्र में सरकारी कार्यों को व्यवस्थित एवं नियमबद्ध ढंग से संचालित करने के लिए बनाई गई व्यवस्थाओं को संस्थाएँ कहा जाता है। संविधान प्रत्येक संस्था के अधिकार, कार्य और सीमाएँ निर्धारित करता है। संसद, प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद, न्यायपालिका तथा नौकरशाही प्रमुख संस्थाएँ हैं। ये संस्थाएँ सुनिश्चित करती हैं कि सभी निर्णय सोच-समझकर लिए जाएँ, किसी एक व्यक्ति के हाथ में सारी शक्ति न रहे तथा सरकार पारदर्शी और उत्तरदायी बनी रहे। लोकतंत्र की सफलता इन संस्थाओं के सुचारु कार्य पर निर्भर करती है।

(i) संस्थाएँ लोकतंत्र का आधार हैं।

(ii) संविधान इनके कार्य निर्धारित करता है।

(iii) शक्ति का संतुलन बनाए रखती हैं।

(iv) सरकार को उत्तरदायी बनाती हैं।

(v) लोकतंत्र को मजबूत करती हैं।

3. संसद क्या है? संसद के प्रमुख कार्य एवं अधिकारों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ संसद जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों की राष्ट्रीय सभा है, जो देश की सर्वोच्च विधायिका होती है। संसद का मुख्य कार्य कानून बनाना है। इसके अतिरिक्त यह सरकार को उत्तरदायी बनाती है, सार्वजनिक धन के उपयोग पर नियंत्रण रखती है तथा राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर चर्चा एवं बहस करती है। संसद सरकार से प्रश्न पूछ सकती है तथा उसके कार्यों की समीक्षा भी करती है। इस प्रकार संसद लोकतंत्र में जनता की सर्वोच्च प्रतिनिधि संस्था है।

(i) संसद कानून बनाती है।

(ii) सरकार पर नियंत्रण रखती है।

(iii) सार्वजनिक धन की स्वीकृति देती है।

(iv) राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करती है।

(v) जनता का प्रतिनिधित्व करती है।

4. भारतीय संसद की संरचना का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ भारतीय संसद तीन अंगों से मिलकर बनी है—राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा। राष्ट्रपति संसद का अभिन्न अंग है तथा संसद द्वारा पारित विधेयकों को अपनी स्वीकृति प्रदान करता है। लोकसभा संसद का निचला सदन है, जिसके सदस्य जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं। राज्यसभा संसद का उच्च सदन है, जो राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है। इन तीनों के संयुक्त कार्य से भारत की संसदीय व्यवस्था संचालित होती है।

(i) संसद के तीन अंग हैं।

(ii) राष्ट्रपति संसद का हिस्सा है।

(iii) लोकसभा निचला सदन है।

(iv) राज्यसभा उच्च सदन है।

(v) तीनों मिलकर संसद बनाते हैं।

5. लोकसभा एवं राज्यसभा में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ लोकसभा संसद का निचला सदन है जिसके सदस्य जनता द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव से चुने जाते हैं। इसका कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है तथा यह भंग हो सकती है। राज्यसभा संसद का उच्च सदन है, जो एक स्थायी सदन है और कभी भंग नहीं होती। इसके अधिकांश सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं। धन विधेयक तथा सरकार पर नियंत्रण के मामलों में लोकसभा को अधिक अधिकार प्राप्त हैं, जबकि राज्यसभा राज्यों के हितों का प्रतिनिधित्व करती है।

(i) लोकसभा प्रत्यक्ष रूप से चुनी जाती है।

(ii) राज्यसभा अप्रत्यक्ष रूप से चुनी जाती है।

(iii) लोकसभा का कार्यकाल पाँच वर्ष है।

(iv) राज्यसभा स्थायी सदन है।

(v) धन विधेयकों में लोकसभा अधिक शक्तिशाली है।

6. लोकसभा को राज्यसभा की अपेक्षा अधिक शक्तिशाली क्यों माना जाता है?

उत्तर ⇒ भारतीय संसद में दोनों सदनों का महत्व है, फिर भी लोकसभा को अधिक शक्तिशाली माना जाता है। धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है तथा राज्यसभा उसे अस्वीकार नहीं कर सकती। प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होते हैं। यदि लोकसभा अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दे तो पूरी मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना पड़ता है। संयुक्त अधिवेशन की स्थिति में भी लोकसभा के सदस्यों की संख्या अधिक होने के कारण उसके निर्णय को प्राथमिकता मिलती है।

(i) धन विधेयक में लोकसभा को विशेष अधिकार हैं।

(ii) मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है।

(iii) अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा प्रभावी बनाती है।

(iv) संयुक्त अधिवेशन में संख्या अधिक होती है।

(v) इसलिए लोकसभा अधिक शक्तिशाली मानी जाती है।

7. कार्यपालिका क्या है? इसके प्रकारों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ कार्यपालिका उन नेताओं और अधिकारियों का समूह है जो सरकारी निर्णय लेते हैं तथा उन्हें लागू करते हैं। कार्यपालिका दो प्रकार की होती है—राजनीतिक कार्यपालिका तथा स्थायी कार्यपालिका। राजनीतिक कार्यपालिका में प्रधानमंत्री और मंत्री आते हैं, जिन्हें जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों में से नियुक्त किया जाता है। स्थायी कार्यपालिका में प्रशासनिक अधिकारी (IAS, IPS आदि) आते हैं, जो सरकार बदलने पर भी अपने पद पर बने रहते हैं तथा प्रशासनिक कार्यों का संचालन करते हैं।

(i) कार्यपालिका सरकारी निर्णय लागू करती है।

(ii) राजनीतिक कार्यपालिका अस्थायी होती है।

(iii) स्थायी कार्यपालिका प्रशासन चलाती है।

(iv) अधिकारी सरकार की सहायता करते हैं।

(v) दोनों मिलकर शासन चलाते हैं।

8. प्रधानमंत्री की नियुक्ति, कार्यकाल एवं प्रमुख अधिकारों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ प्रधानमंत्री भारत सरकार का प्रमुख होता है। राष्ट्रपति लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल या गठबंधन के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करता है। प्रधानमंत्री का कार्यकाल निश्चित नहीं होता; वह तब तक पद पर रहता है जब तक उसे लोकसभा का विश्वास प्राप्त रहता है। प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का नेतृत्व करता है, कैबिनेट बैठकों की अध्यक्षता करता है, मंत्रियों के विभागों का वितरण करता है तथा सभी मंत्रालयों के कार्यों का समन्वय करता है। प्रधानमंत्री भारतीय कार्यपालिका का सबसे प्रभावशाली पद है।

(i) राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है।

(ii) बहुमत दल का नेता प्रधानमंत्री बनता है।

(iii) कैबिनेट की अध्यक्षता करता है।

(iv) मंत्रियों के विभागों का वितरण करता है।

(v) सरकार का प्रमुख होता है।

9. मंत्रिपरिषद एवं कैबिनेट में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ मंत्रिपरिषद में सभी स्तरों के मंत्री शामिल होते हैं, जैसे कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री तथा राज्य मंत्री। इसके विपरीत कैबिनेट मंत्रिपरिषद का छोटा एवं सबसे महत्वपूर्ण समूह होता है, जिसमें प्रमुख मंत्रालयों के वरिष्ठ मंत्री शामिल होते हैं। सरकार के अधिकांश महत्वपूर्ण निर्णय कैबिनेट की बैठकों में लिए जाते हैं। सभी मंत्री कैबिनेट के निर्णयों के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होते हैं। इसलिए कैबिनेट सरकार की निर्णय लेने वाली प्रमुख संस्था है।

(i) मंत्रिपरिषद में सभी मंत्री होते हैं।

(ii) कैबिनेट वरिष्ठ मंत्रियों का समूह है।

(iii) महत्वपूर्ण निर्णय कैबिनेट लेती है।

(iv) कैबिनेट प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कार्य करती है।

(v) सभी मंत्री सामूहिक रूप से उत्तरदायी होते हैं।

10. गठबंधन सरकार क्या है? इसका प्रधानमंत्री की शक्तियों पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर ⇒ जब किसी एक राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं होता और दो या दो से अधिक दल मिलकर सरकार बनाते हैं, तो उसे गठबंधन सरकार कहते हैं। ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री अपनी इच्छा से सभी निर्णय नहीं ले सकता। उसे अपनी पार्टी के साथ-साथ गठबंधन के सहयोगी दलों की राय भी माननी पड़ती है। सरकार का अस्तित्व सहयोगी दलों के समर्थन पर निर्भर होने के कारण प्रधानमंत्री की शक्तियों पर कुछ सीमाएँ लग जाती हैं। फिर भी गठबंधन सरकार लोकतांत्रिक सहमति और साझेदारी की भावना को बढ़ावा देती है।

(i) बहुमत न मिलने पर गठबंधन सरकार बनती है।

(ii) कई दल मिलकर सरकार चलाते हैं।

(iii) प्रधानमंत्री को सहयोगियों की राय माननी पड़ती है।

(iv) निर्णय सामूहिक सहमति से होते हैं।

(v) लोकतांत्रिक साझेदारी को बढ़ावा मिलता है।

11. राष्ट्रपति की नियुक्ति, योग्यताएँ एवं चुनाव प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ राष्ट्रपति भारत का राष्ट्राध्यक्ष तथा संसद का अभिन्न अंग होता है। राष्ट्रपति बनने के लिए व्यक्ति का भारत का नागरिक होना, कम से कम 35 वर्ष की आयु का होना तथा लोकसभा का सदस्य बनने की योग्यता होना आवश्यक है। वह किसी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए। राष्ट्रपति का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा नहीं होता, बल्कि संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य तथा सभी राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य मिलकर उसका चुनाव करते हैं। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि राष्ट्रपति पूरे देश का प्रतिनिधित्व करे।

(i) राष्ट्रपति राष्ट्राध्यक्ष होता है।

(ii) न्यूनतम आयु 35 वर्ष होती है।

(iii) भारत का नागरिक होना आवश्यक है।

(iv) अप्रत्यक्ष चुनाव होता है।

(v) पूरे देश का प्रतिनिधित्व करता है।

12. राष्ट्रपति के प्रमुख कार्य एवं शक्तियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ राष्ट्रपति भारत का संवैधानिक प्रमुख होता है। सभी प्रमुख सरकारी कार्य राष्ट्रपति के नाम से किए जाते हैं। वह प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है तथा प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्रिपरिषद की नियुक्ति करता है। राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों, राज्यपालों तथा चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करता है। वह भारत के सशस्त्र बलों का सर्वोच्च सेनापति होता है। संसद द्वारा पारित कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद ही कानून बनता है।

(i) प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है।

(ii) मंत्रियों की नियुक्ति करता है।

(iii) न्यायाधीशों एवं राज्यपालों की नियुक्ति करता है।

(iv) सशस्त्र बलों का सर्वोच्च सेनापति होता है।

(v) विधेयकों को स्वीकृति देता है।

13. न्यायपालिका क्या है? लोकतंत्र में इसकी आवश्यकता क्यों है?

उत्तर ⇒ न्यायपालिका वह संस्था है जिसके पास न्याय करने तथा कानूनी विवादों का निपटारा करने का अधिकार होता है। लोकतंत्र में स्वतंत्र न्यायपालिका अत्यंत आवश्यक है क्योंकि यह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती है तथा सरकार की मनमानी पर रोक लगाती है। यदि न्यायपालिका स्वतंत्र न हो, तो सरकार संविधान के विरुद्ध कार्य कर सकती है और नागरिकों को न्याय नहीं मिल पाएगा। इसलिए न्यायपालिका कानून के शासन, लोकतंत्र तथा संविधान की रक्षा करने वाली महत्वपूर्ण संस्था है।

(i) न्यायपालिका न्याय प्रदान करती है।

(ii) नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती है।

(iii) सरकार की मनमानी रोकती है।

(iv) संविधान की रक्षा करती है।

(v) लोकतंत्र को मजबूत बनाती है।

14. भारतीय न्यायपालिका की संरचना का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ भारत की न्यायपालिका एक एकीकृत न्यायपालिका है। इसका सर्वोच्च स्तर सर्वोच्च न्यायालय है, जो पूरे देश की सर्वोच्च अदालत है। इसके नीचे प्रत्येक राज्य में उच्च न्यायालय होते हैं। इनके अधीन जिला न्यायालय तथा स्थानीय न्यायालय कार्य करते हैं। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होते हैं। यह व्यवस्था पूरे देश में न्याय की एकरूपता तथा कानून के समान अनुपालन को सुनिश्चित करती है।

(i) सर्वोच्च न्यायालय सर्वोच्च स्तर पर है।

(ii) राज्यों में उच्च न्यायालय होते हैं।

(iii) जिला एवं स्थानीय न्यायालय नीचे कार्य करते हैं।

(iv) सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय अंतिम होते हैं।

(v) न्यायपालिका एकीकृत है।

15. सर्वोच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार (अधिकार क्षेत्र) का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ सर्वोच्च न्यायालय देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था है। यह नागरिकों के बीच, नागरिकों और सरकार के बीच, केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच तथा दो राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों की सुनवाई करता है। यह दीवानी तथा फौजदारी मामलों में अंतिम अपील की अदालत है। उच्च न्यायालयों के निर्णयों के विरुद्ध भी सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है। इस प्रकार सर्वोच्च न्यायालय पूरे देश में न्याय की अंतिम व्यवस्था प्रदान करता है।

(i) नागरिकों के विवादों की सुनवाई करता है।

(ii) केंद्र एवं राज्यों के विवाद सुलझाता है।

(iii) अंतिम अपील की अदालत है।

(iv) उच्च न्यायालयों की अपील सुनता है।

(v) सर्वोच्च न्यायिक संस्था है।

16. न्यायपालिका की स्वतंत्रता क्यों आवश्यक है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ लोकतंत्र में न्यायपालिका की स्वतंत्रता अत्यंत आवश्यक है ताकि न्याय निष्पक्ष रूप से दिया जा सके। यदि न्यायपालिका सरकार के नियंत्रण में हो, तो नागरिकों के अधिकार सुरक्षित नहीं रहेंगे। भारत में न्यायाधीशों की नियुक्ति और उन्हें हटाने की प्रक्रिया को कठिन बनाया गया है ताकि उन पर राजनीतिक दबाव न पड़े। स्वतंत्र न्यायपालिका सरकार की कार्यवाही की समीक्षा करती है तथा संविधान के विरुद्ध किसी भी कार्य को रोक सकती है। इससे कानून का शासन तथा लोकतंत्र सुरक्षित रहता है।

(i) निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित होता है।

(ii) नागरिकों के अधिकार सुरक्षित रहते हैं।

(iii) राजनीतिक दबाव से मुक्ति रहती है।

(iv) सरकार की मनमानी पर रोक लगती है।

(v) लोकतंत्र मजबूत होता है।

17. न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) क्या है? इसका महत्व स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ न्यायिक समीक्षा वह शक्ति है जिसके माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय यह जाँच करते हैं कि सरकार या विधायिका द्वारा बनाया गया कोई कानून संविधान के अनुरूप है या नहीं। यदि कोई कानून या सरकारी निर्णय संविधान के विरुद्ध पाया जाता है, तो न्यायालय उसे अमान्य घोषित कर सकता है। न्यायिक समीक्षा संविधान की सर्वोच्चता बनाए रखती है तथा सरकार की शक्तियों पर नियंत्रण स्थापित करती है। यह लोकतंत्र की सुरक्षा का महत्वपूर्ण साधन है।

(i) संविधान की रक्षा करती है।

(ii) असंवैधानिक कानून रद्द किए जा सकते हैं।

(iii) सरकार की शक्तियों पर नियंत्रण रहता है।

(iv) न्यायालय संविधान की व्याख्या करता है।

(v) लोकतंत्र सुरक्षित रहता है।

18. न्यायपालिका नागरिकों के अधिकारों की रक्षा कैसे करती है?

उत्तर ⇒ न्यायपालिका नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सर्वोच्च रक्षक है। यदि किसी नागरिक के अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो वह न्यायालय की शरण ले सकता है। जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक हित से जुड़े मामलों को न्यायालय के सामने ला सकता है। न्यायालय सरकार की मनमानी, भ्रष्टाचार तथा अधिकारों के दुरुपयोग पर रोक लगाता है। इस प्रकार न्यायपालिका नागरिकों की स्वतंत्रता और संविधान की रक्षा करती है।

(i) मौलिक अधिकारों की रक्षा करती है।

(ii) जनहित याचिका स्वीकार करती है।

(iii) सरकारी मनमानी रोकती है।

(iv) भ्रष्टाचार पर नियंत्रण रखती है।

(v) संविधान की रक्षा करती है।

19. भारतीय लोकतंत्र में संसद, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संबंध स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ भारतीय लोकतंत्र में संसद, कार्यपालिका और न्यायपालिका तीनों एक-दूसरे से जुड़े होने के साथ-साथ स्वतंत्र भी हैं। संसद कानून बनाती है, कार्यपालिका उन कानूनों को लागू करती है तथा न्यायपालिका उनकी संवैधानिक वैधता की जाँच करती है। तीनों संस्थाएँ एक-दूसरे पर नियंत्रण और संतुलन बनाए रखती हैं, जिससे किसी एक संस्था के हाथ में अत्यधिक शक्ति नहीं आती। यह व्यवस्था लोकतंत्र, कानून के शासन और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करती है।

(i) संसद कानून बनाती है।

(ii) कार्यपालिका कानून लागू करती है।

(iii) न्यायपालिका कानूनों की समीक्षा करती है।

(iv) तीनों में शक्ति का संतुलन रहता है।

(v) लोकतंत्र सुरक्षित रहता है।

20. ‘संस्थाओं का कामकाज’ अध्याय से हमें क्या सीख मिलती है?

उत्तर ⇒ यह अध्याय हमें लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की प्रमुख संस्थाओं—संसद, कार्यपालिका, न्यायपालिका, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद—के कार्यों और महत्व की जानकारी देता है। इससे स्पष्ट होता है कि लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं चलता, बल्कि मजबूत संस्थाओं के माध्यम से संचालित होता है। यह अध्याय शक्ति के संतुलन, उत्तरदायित्व, पारदर्शिता तथा कानून के शासन के महत्व को समझाता है। साथ ही यह नागरिकों में संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करता है।

(i) लोकतांत्रिक संस्थाओं का महत्व समझ में आता है।

(ii) संसद, कार्यपालिका और न्यायपालिका की भूमिका स्पष्ट होती है।

(iii) शक्ति के संतुलन का ज्ञान मिलता है।

(iv) संविधान के महत्व का बोध होता है।

(v) लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सम्मान बढ़ता है।

More Class 9 Civics Revision Notes

Chapter 1: लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों?
Chapter 2: संविधान निर्माण
Chapter 3: चुनावी राजनीति
Chapter 4: संस्थाओं का कामकाज
Chapter 5: लोकतांत्रिक अधिकार

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