Class 9 Civics Revision Notes
चुनावी राजनीति
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Chapter Overview
| Class | 9 |
| Subject | Civics |
| Chapter Name | चुनावी राजनीति |
| Resource Type | Revision Notes |
| Syllabus | NCERT |
| Suitable For | CBSE, JAC and other state boards |
चुनावी राजनीति Revision Notes
1. चुनाव क्या है? लोकतंत्र में चुनावों की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर ⇒ चुनाव लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण अंग है। चुनाव के माध्यम से जनता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है, जो सरकार बनाते हैं और देश तथा राज्य का शासन चलाते हैं। बड़े लोकतांत्रिक देशों में सभी नागरिक प्रत्यक्ष रूप से शासन नहीं कर सकते, इसलिए वे अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं। चुनाव जनता को यह अधिकार देता है कि वह सरकार बनाए, कानून बनाने वाले प्रतिनिधियों का चयन करे तथा आवश्यकता पड़ने पर सरकार को बदल सके। नियमित और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं तथा सरकार को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाए रखते हैं।
(i) चुनाव लोकतंत्र का आधार है।
(ii) जनता अपने प्रतिनिधि चुनती है।
(iii) सरकार का गठन चुनाव से होता है।
(iv) जनता सरकार बदल सकती है।
(v) लोकतंत्र मजबूत होता है।
2. चुनावों का महत्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒ चुनाव लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की सफलता का आधार हैं। चुनावों के माध्यम से जनता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है तथा सरकार के कार्यों का मूल्यांकन करती है। चुनाव सरकार को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाते हैं क्योंकि अगले चुनाव में जनता उसे बदल सकती है। चुनावों से नागरिकों को अपनी पसंद की सरकार चुनने तथा नीतियों को प्रभावित करने का अवसर मिलता है। नियमित चुनाव लोकतंत्र में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करते हैं तथा सत्ता परिवर्तन का शांतिपूर्ण माध्यम प्रदान करते हैं।
(i) जनता प्रतिनिधि चुनती है।
(ii) सरकार उत्तरदायी बनती है।
(iii) सत्ता परिवर्तन संभव होता है।
(iv) जनता की भागीदारी बढ़ती है।
(v) लोकतंत्र मजबूत होता है।
3. लोकतांत्रिक चुनावों के लिए आवश्यक न्यूनतम शर्तों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ लोकतांत्रिक चुनावों के लिए कुछ आवश्यक शर्तें होती हैं। प्रत्येक वयस्क नागरिक को समान मतदान का अधिकार मिलना चाहिए। चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के रूप में वास्तविक विकल्प उपलब्ध होने चाहिए। चुनाव नियमित अंतराल पर कराए जाने चाहिए। जनता का निर्णय अंतिम होना चाहिए तथा चुनाव स्वतंत्र एवं निष्पक्ष वातावरण में संपन्न होने चाहिए। यदि ये सभी शर्तें पूरी होती हैं, तभी चुनाव वास्तव में लोकतांत्रिक माने जाते हैं और जनता अपनी इच्छा से सरकार का चुनाव कर सकती है।
(i) सभी को मतदान का अधिकार मिले।
(ii) चुनाव में विकल्प उपलब्ध हों।
(iii) नियमित चुनाव हों।
(iv) जनता का निर्णय अंतिम हो।
(v) चुनाव स्वतंत्र एवं निष्पक्ष हों।
4. राजनीतिक प्रतियोगिता (प्रतिद्वंद्विता) क्या है? इसके महत्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ राजनीतिक प्रतियोगिता वह स्थिति है जिसमें विभिन्न राजनीतिक दल और उम्मीदवार जनता का समर्थन प्राप्त करने के लिए चुनाव में एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हैं। वे जनता के सामने अपनी नीतियाँ, योजनाएँ और वादे प्रस्तुत करते हैं। राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी रहती है तथा सत्ता परिवर्तन शांतिपूर्ण ढंग से संभव होता है। इससे मतदाताओं को अनेक विकल्प प्राप्त होते हैं और राजनीतिक दल जनता की समस्याओं को समझकर बेहतर नीतियाँ बनाने का प्रयास करते हैं।
(i) विभिन्न दलों के बीच प्रतिस्पर्धा होती है।
(ii) जनता को विकल्प मिलते हैं।
(iii) सरकार उत्तरदायी बनती है।
(iv) सत्ता परिवर्तन शांतिपूर्ण होता है।
(v) लोकतंत्र मजबूत होता है।
5. राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के सकारात्मक एवं नकारात्मक पक्षों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के अनेक लाभ हैं। इससे सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी रहती है, मतदाताओं को विभिन्न विकल्प मिलते हैं तथा नई नीतियों और सुधारों को बढ़ावा मिलता है। सत्ता परिवर्तन भी शांतिपूर्ण ढंग से होता है। दूसरी ओर, इसके कुछ नकारात्मक प्रभाव भी हैं। चुनावों में आरोप-प्रत्यारोप, जातीय एवं सामाजिक विभाजन, धनबल का उपयोग तथा अच्छे लोगों का राजनीति से दूर रहना जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। फिर भी लोकतंत्र में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को आवश्यक माना जाता है क्योंकि इससे जनता की शक्ति बनी रहती है।
(i) सरकार उत्तरदायी बनती है।
(ii) जनता को विकल्प मिलते हैं।
(iii) सत्ता परिवर्तन शांतिपूर्ण होता है।
(iv) आरोप-प्रत्यारोप बढ़ सकते हैं।
(v) फिर भी लोकतंत्र के लिए आवश्यक है।
6. चुनावी प्रतिस्पर्धा की कमियों के बावजूद संविधान निर्माताओं ने इसे क्यों स्वीकार किया?
उत्तर ⇒ संविधान निर्माताओं को चुनावी प्रतिस्पर्धा की कमियों का ज्ञान था, फिर भी उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए सबसे उपयुक्त व्यवस्था माना। उनका विश्वास था कि सभी नेता हमेशा जनता के हित में कार्य नहीं करते। इसलिए ऐसी व्यवस्था आवश्यक थी जिसमें जनता चुनाव के माध्यम से अच्छे कार्य करने वाले नेताओं को पुनः चुन सके तथा खराब कार्य करने वालों को हटा सके। चुनावी प्रतिस्पर्धा नेताओं को जनता की सेवा करने के लिए प्रेरित करती है तथा सरकार को उत्तरदायी बनाए रखती है।
(i) जनता नेताओं का मूल्यांकन करती है।
(ii) सरकार उत्तरदायी रहती है।
(iii) खराब नेताओं को हटाया जा सकता है।
(iv) अच्छे कार्यों को प्रोत्साहन मिलता है।
(v) लोकतंत्र मजबूत होता है।
7. भारत में आम चुनाव एवं उपचुनाव में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒ भारत में लोकसभा तथा विधानसभाओं के चुनाव सामान्यतः प्रत्येक पाँच वर्ष में कराए जाते हैं। जब पूरे देश या पूरे राज्य के सभी निर्वाचन क्षेत्रों में एक साथ चुनाव कराए जाते हैं, तो उन्हें आम चुनाव कहा जाता है। इसके विपरीत यदि किसी सांसद या विधायक की मृत्यु, इस्तीफा अथवा अन्य कारणों से कोई सीट रिक्त हो जाती है, तो केवल उस एक निर्वाचन क्षेत्र में जो चुनाव कराया जाता है, उसे उपचुनाव कहते हैं। दोनों प्रकार के चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।
(i) आम चुनाव पूरे देश या राज्य में होते हैं।
(ii) उपचुनाव एक सीट के लिए होता है।
(iii) आम चुनाव पाँच वर्ष में होते हैं।
(iv) रिक्त सीट पर उपचुनाव कराया जाता है।
(v) दोनों लोकतंत्र के लिए आवश्यक हैं।
8. भारत में चुनाव की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ भारत में चुनाव एक निश्चित प्रक्रिया के अनुसार संपन्न होते हैं। सबसे पहले निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण किया जाता है तथा मतदाता सूची तैयार की जाती है। इसके बाद चुनाव की अधिसूचना जारी होती है और आदर्श आचार संहिता लागू होती है। उम्मीदवार नामांकन पत्र भरते हैं, उनकी जाँच होती है तथा चुनाव चिह्न आवंटित किए जाते हैं। इसके बाद चुनाव प्रचार, मतदान, मतगणना और अंत में परिणामों की घोषणा की जाती है। पूरी प्रक्रिया का संचालन निर्वाचन आयोग करता है।
(i) निर्वाचन क्षेत्र बनाए जाते हैं।
(ii) मतदाता सूची तैयार होती है।
(iii) नामांकन एवं प्रचार होता है।
(iv) मतदान कराया जाता है।
(v) मतगणना के बाद परिणाम घोषित होते हैं।
9. निर्वाचन क्षेत्र क्या है? लोकसभा एवं विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ निर्वाचन क्षेत्र वह भौगोलिक क्षेत्र होता है जिसके सभी मतदाता मिलकर एक प्रतिनिधि का चुनाव करते हैं। भारत में लोकसभा चुनाव के लिए देश को 543 निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजित किया गया है तथा प्रत्येक क्षेत्र से एक सांसद (MP) चुना जाता है। प्रत्येक राज्य को उसकी विधानसभा की सीटों के अनुसार अनेक विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में बाँटा गया है, जहाँ से विधायक (MLA) चुने जाते हैं। निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण इस प्रकार किया जाता है कि प्रत्येक क्षेत्र में लगभग समान संख्या में मतदाता हों।
(i) निर्वाचन क्षेत्र एक भौगोलिक क्षेत्र है।
(ii) लोकसभा में 543 निर्वाचन क्षेत्र हैं।
(iii) प्रत्येक क्षेत्र से एक सांसद चुना जाता है।
(iv) विधानसभा से विधायक चुने जाते हैं।
(v) मतदाताओं की संख्या लगभग समान रहती है।
10. संविधान में आरक्षण की व्यवस्था क्यों की गई? इसके उद्देश्य एवं महत्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ संविधान निर्माताओं ने यह महसूस किया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति जैसे कमजोर वर्ग खुले चुनावों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं कर पाएँगे। इसलिए उनके लिए कुछ निर्वाचन क्षेत्रों को आरक्षित किया गया। आरक्षित सीटों से केवल संबंधित वर्ग के उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकते हैं। स्थानीय निकायों में महिलाओं तथा कई राज्यों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए भी आरक्षण की व्यवस्था है। इस व्यवस्था का उद्देश्य सभी वर्गों को शासन में उचित प्रतिनिधित्व देना तथा लोकतंत्र को अधिक समावेशी और न्यायपूर्ण बनाना है।
(i) कमजोर वर्गों को प्रतिनिधित्व मिलता है।
(ii) SC/ST के लिए आरक्षित सीटें हैं।
(iii) महिलाओं को भी आरक्षण दिया गया है।
(iv) लोकतंत्र अधिक समावेशी बनता है।
(v) सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित होती है।
11. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार क्या है? इसके महत्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का अर्थ है कि 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का प्रत्येक भारतीय नागरिक बिना किसी भेदभाव के मतदान कर सकता है। किसी नागरिक को जाति, धर्म, लिंग, भाषा, शिक्षा या आर्थिक स्थिति के आधार पर मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। लोकतंत्र में प्रत्येक मत का समान महत्व होता है। यह व्यवस्था सभी नागरिकों को समान राजनीतिक अधिकार प्रदान करती है तथा लोकतंत्र को मजबूत बनाती है। सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के कारण प्रत्येक नागरिक सरकार के गठन में भागीदारी करता है।
(i) 18 वर्ष या अधिक आयु वालों को मतदान का अधिकार है।
(ii) सभी नागरिकों के मत का समान मूल्य होता है।
(iii) किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता।
(iv) लोकतंत्र मजबूत होता है।
(v) जनता की भागीदारी सुनिश्चित होती है।
12. मतदाता सूची क्या है? इसके महत्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ मतदाता सूची वह आधिकारिक सूची है जिसमें किसी निर्वाचन क्षेत्र के सभी योग्य मतदाताओं के नाम दर्ज होते हैं। इसे सामान्य भाषा में वोटर लिस्ट भी कहा जाता है। चुनाव से पहले इस सूची को तैयार एवं अद्यतन किया जाता है ताकि प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदान का अवसर मिल सके। मतदाता सूची लोकतांत्रिक चुनावों की पहली शर्त को पूरा करती है क्योंकि इसके माध्यम से सभी योग्य नागरिकों को समान मतदान अधिकार सुनिश्चित किया जाता है। इसका समय-समय पर नवीनीकरण भी किया जाता है।
(i) इसमें योग्य मतदाताओं के नाम होते हैं।
(ii) इसे वोटर लिस्ट भी कहते हैं।
(iii) मतदान का अधिकार सुनिश्चित करती है।
(iv) समय-समय पर अद्यतन की जाती है।
(v) लोकतांत्रिक चुनाव का आधार है।
13. मतदान पहचान प्रणाली का महत्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒ मतदान पहचान प्रणाली का उद्देश्य चुनावों में फर्जी मतदान को रोकना तथा निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत मतदाताओं को फोटो पहचान पत्र (मतदाता पहचान पत्र) जारी किया जाता है। यदि किसी मतदाता के पास मतदाता पहचान पत्र नहीं है, तो वह सरकार द्वारा स्वीकृत अन्य पहचान पत्रों जैसे पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस आदि के आधार पर भी मतदान कर सकता है। यह व्यवस्था सही मतदाता की पहचान सुनिश्चित करती है तथा चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखती है।
(i) फर्जी मतदान पर रोक लगती है।
(ii) मतदाता की सही पहचान होती है।
(iii) चुनाव निष्पक्ष बनते हैं।
(iv) अन्य पहचान पत्र भी मान्य हैं।
(v) लोकतंत्र मजबूत होता है।
14. उम्मीदवारों के नामांकन की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ भारत में प्रत्येक योग्य मतदाता चुनाव लड़ सकता है, यदि उसकी आयु कम से कम 25 वर्ष हो। चुनाव लड़ने के इच्छुक व्यक्ति को नामांकन पत्र भरना होता है तथा निर्धारित जमानत राशि जमा करनी होती है। राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों को टिकट देते हैं, जिसके साथ उन्हें चुनाव चिन्ह भी मिलता है। कुछ गंभीर आपराधिक मामलों में दोषी व्यक्तियों पर चुनाव लड़ने की रोक लगाई जा सकती है। इस प्रकार नामांकन प्रक्रिया योग्य उम्मीदवारों के चयन की पहली औपचारिक प्रक्रिया होती है।
(i) उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 25 वर्ष है।
(ii) नामांकन पत्र भरना आवश्यक है।
(iii) जमानत राशि जमा करनी होती है।
(iv) राजनीतिक दल टिकट देते हैं।
(v) चुनाव चिन्ह आवंटित किया जाता है।
15. उम्मीदवार के घोषणा-पत्र का महत्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒ सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार प्रत्येक उम्मीदवार को चुनाव से पहले घोषणा-पत्र प्रस्तुत करना होता है। इसमें उसके विरुद्ध चल रहे आपराधिक मामलों, उसकी तथा उसके परिवार की संपत्ति एवं देनदारियों तथा उसकी शैक्षिक योग्यता का विवरण दिया जाता है। इन सूचनाओं को सार्वजनिक किया जाता है ताकि मतदाता सही जानकारी के आधार पर अपना निर्णय ले सकें। इससे चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनती है तथा योग्य उम्मीदवारों के चयन में सहायता मिलती है।
(i) उम्मीदवार की जानकारी सार्वजनिक होती है।
(ii) आपराधिक मामलों का विवरण दिया जाता है।
(iii) संपत्ति एवं देनदारियाँ बताई जाती हैं।
(iv) शैक्षिक योग्यता बताई जाती है।
(v) मतदाता सही निर्णय ले सकते हैं।
16. चुनाव प्रचार के प्रमुख साधनों एवं उसके महत्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ चुनाव प्रचार के माध्यम से उम्मीदवार एवं राजनीतिक दल अपनी नीतियों और कार्यक्रमों को जनता तक पहुँचाते हैं। चुनाव प्रचार के प्रमुख साधनों में पोस्टर, जनसभाएँ, भाषण, रैलियाँ तथा घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करना शामिल है। प्रचार अवधि में उम्मीदवार जनता को अपने विचारों से अवगत कराते हैं और समर्थन प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। चुनाव प्रचार लोकतंत्र का महत्वपूर्ण भाग है क्योंकि इससे मतदाताओं को विभिन्न दलों एवं उम्मीदवारों के विचारों की जानकारी मिलती है और वे सोच-समझकर मतदान कर सकते हैं।
(i) पोस्टर एवं रैलियाँ आयोजित की जाती हैं।
(ii) जनसभाएँ एवं भाषण दिए जाते हैं।
(iii) घर-घर संपर्क किया जाता है।
(iv) मतदाताओं को जानकारी मिलती है।
(v) सही उम्मीदवार चुनने में सहायता मिलती है।
17. चुनाव प्रचार के दौरान किन कार्यों की मनाही है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर ⇒ चुनावों को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष बनाए रखने के लिए कानून द्वारा कुछ कार्यों पर प्रतिबंध लगाया गया है। कोई भी उम्मीदवार या राजनीतिक दल मतदाताओं को रिश्वत नहीं दे सकता, धमकी नहीं दे सकता तथा जाति या धर्म के नाम पर वोट नहीं माँग सकता। चुनाव प्रचार में सरकारी संसाधनों का उपयोग भी प्रतिबंधित है। निर्धारित सीमा से अधिक चुनाव खर्च करना भी कानून के विरुद्ध है। इन नियमों का उल्लंघन करने पर उम्मीदवार का चुनाव रद्द किया जा सकता है।
(i) रिश्वत देना प्रतिबंधित है।
(ii) धर्म एवं जाति के नाम पर वोट नहीं माँगे जा सकते।
(iii) सरकारी संसाधनों का उपयोग नहीं किया जा सकता।
(iv) खर्च की सीमा का पालन करना आवश्यक है।
(v) उल्लंघन पर कार्रवाई होती है।
18. आदर्श आचार संहिता क्या है? इसके प्रमुख नियमों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ चुनाव के समय राजनीतिक दलों एवं उम्मीदवारों द्वारा पालन किए जाने वाले नियमों को आदर्श आचार संहिता कहा जाता है। इसके अनुसार चुनाव प्रचार के लिए धार्मिक स्थलों का उपयोग नहीं किया जा सकता। सरकारी वाहन, अधिकारी या सरकारी संसाधनों का चुनावी लाभ के लिए उपयोग प्रतिबंधित है। चुनाव की घोषणा के बाद मंत्री नई योजनाओं की घोषणा या बड़े नीतिगत निर्णय नहीं ले सकते। इन नियमों का उद्देश्य चुनाव को निष्पक्ष एवं पारदर्शी बनाए रखना है।
(i) धार्मिक स्थलों का उपयोग प्रतिबंधित है।
(ii) सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता।
(iii) नई योजनाओं की घोषणा नहीं की जा सकती।
(iv) सभी दलों को समान अवसर मिलता है।
(v) निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित होते हैं।
19. चुनाव आयोग के अधिकार एवं कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ भारत का चुनाव आयोग एक स्वतंत्र एवं निष्पक्ष संवैधानिक संस्था है, जो पूरे चुनाव की प्रक्रिया का संचालन करती है। यह चुनाव की अधिसूचना जारी करता है, मतदान एवं मतगणना कराता है तथा परिणाम घोषित करता है। चुनाव आयोग आदर्श आचार संहिता लागू कराता है और उसके उल्लंघन पर कार्रवाई करता है। चुनाव के दौरान यह सरकारी अधिकारियों के स्थानांतरण तथा पुनर्मतदान का आदेश भी दे सकता है। इसकी स्वतंत्रता लोकतांत्रिक चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित करती है।
(i) चुनाव प्रक्रिया का संचालन करता है।
(ii) आचार संहिता लागू कराता है।
(iii) परिणाम घोषित करता है।
(iv) पुनर्मतदान का आदेश दे सकता है।
(v) स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराता है।
20. स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों की चुनौतियों तथा चुनाव सुधारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर ⇒ भारत में चुनाव स्वतंत्र एवं निष्पक्ष होते हैं, फिर भी कई चुनौतियाँ मौजूद हैं। चुनावों में धनबल, बाहुबल, अपराधियों की भागीदारी, परिवारवाद तथा छोटे दलों की कठिनाइयाँ प्रमुख समस्याएँ हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए चुनाव खर्च पर नियंत्रण, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों की कड़ी जाँच, राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र, चुनावी चंदे में पारदर्शिता तथा मतदाता जागरूकता बढ़ाने जैसे सुधार आवश्यक हैं। इन सुधारों से चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और लोकतांत्रिक बन सकती है।
(i) धनबल एवं बाहुबल चुनौती हैं।
(ii) अपराधियों की भागीदारी रोकनी चाहिए।
(iii) चुनावी खर्च पर नियंत्रण आवश्यक है।
(iv) मतदाता जागरूकता बढ़ानी चाहिए।
(v) चुनाव सुधार लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं।
More Class 9 Civics Revision Notes
| Chapter 1: लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों? |
| Chapter 2: संविधान निर्माण |
| Chapter 3: चुनावी राजनीति |
| Chapter 4: संस्थाओं का कामकाज |
| Chapter 5: लोकतांत्रिक अधिकार |